सातवें वेतन आयोग के तहत केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला

केन्द्र सरकार जनवरी 2018 से सातवें वेतन आयोग के तहत सभी केन्द्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने वाली है. सरकार ने यह फैसला कर लिया है कि वह जनवरी 2018 से कर्मचारी की न्यूनम सैलरी में बढ़ोत्तरी करेगी. इससे केन्द्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा, जो काफी दिनों से सैलरी बढ़ने को लेकर खुशखबरी का इंतजार कर रहे हैं. सातवें वेतन आयोग से जुड़े वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि केन्द्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने को लेकर आखिरी फैसला जनवरी में लिया जाएगा. सबसे अच्छी बात यह है कि इस मामले पर सरकार फैसला करने को पूरी तरह से तैयार है. यह केन्द्र सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है.

केन्द्र सरकार कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को 18,000 रुपए करने की बात पहले ही साफ कर चुकी है, लेकिन अब माना जा रहा है कि सरकार इसे 18,000 रुपए से बढ़ाकर 21,000 रुपए करने पर विचार कर रही है. वहीं दूसरी ओर, केन्द्रीय कर्मचारियों की मांग है कि न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दिया जाए.

फिटमेंट फैक्टर पर बनी ये सहमति सरकार फिटमेंट फैक्टर को 3 गुना करने पर सहमत हो गई है, हालांकि, कर्मचारी यूनियन की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.56 गुना किया जाए. फिटमेंट फैक्टर 3 गुना होने पर कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 21,000 रुपए हो जाएगा. वहीं अगर सरकार ने कर्मचारियों की मांग के अनुसार फिटमेंट फैक्टर को 3.56 गुना कर दिया तो न्यूनतम वेतन बढ़कर 25,000 रुपए हो जाएगा.

सरकार पहले ही खुद को 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए तैयार कर रही है. ऐसे में सरकार भी यह नहीं चाहती है कि वह 56 लाख केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को नाखुश कर दे. सैलरी में बढ़ोत्तरी से ही कर्मचारियों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं. आए दिन बढ़ रहे दामों से कर्मचारी परेशान होते हैं, लेकिन सरकार उन्हें सैलरी बढ़ाकर एक तोहफा दे सकती है.

एनडीटीवी ने किया चैनल बिकने की खबरों का किया खंडन

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नई दिल्ली। एनडीटीवी चैनल को स्पाइसजेट के सह-संस्थापक अजय सिंह द्वारा खरीदे जाने की खबरें मीडिया में सुबह से चल रही है. लेकिन एनडीटीवी ने बीएसई को आधिकारिक पत्र लिख कहा है कि चैनल के बिकने की खबर पूरी तरह से गलत है. जिसके बाद चैनल के बिकने की अफवाहों पर विराम लग गया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के अनुसार, मीडिया जगत में हलचल तेज हो गई है जब खबर आई कि मोदी सरकार को नारा देने वाले ‘अबकी बार मोदी सरकार’ अजय सिंह ही इसके मालिक होगें. लेकिन वहीं अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ में छपी एक खबर के अनुसार, एनडीटीवी के बिकने की खबर को पूरी तरह से कोरी अफवाह बताया गया है. समाचार पत्र के अनुसार,एनडीटीवी के वरिष्ठ अधिकारी ने इस खबर को पूरी तरह अफवाह करार दिया है साथ ही कहा है कि ये पूरी तरह से गलत खबर है. एनडीटीवी ने किया खंडन एनडीटीवी के BSE को दिए आधिकारिक पत्र में लिका है कि, चैनल के बिकने की खबर गलत है. एनडीटीवी अपने शेयर नहीं बेच रहा है. इसके साथ उन्होंने लिखा कि, ऐसी उम्मीद है कि इस पत्र के साथ ही चैनल के बिकने की कोरी अफवाहों पर भी विराम लग जाएगा. बता दें कि बीएसई में रजिस्टर्ड प्रत्येक कंपनी को अपने शेयरों का लेन-देन करने की हर जानकारी बीएसई को देनी होती है. लेकिन चैनल के खंडन के बाद खबरों पर विराम लग गया.

जबकि आज सुबह से पूरे मीडिया में हलचल तेज हो गई थी जब एनडीटीवी के बिकने की खबर विस्तार से आई. जोकि इस प्रकार थी-

मीडिया संस्थान एनडीटीवी को स्पाइसजेट के सह-संस्थापक अजय सिंह ने खरीद लिया है. स्पाइसजेट के चेयरमैन और मैनेजिंग एडिटर अजय सिंह के पास एनडीटीवी के करीब 40 प्रतिशत शेयर होंगे. प्रणय रॉय और राधिका रॉय के पास करीब 20 प्रतिशत शेयर होंगे.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के जून 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार एनडीटीवी में प्रमोटरों के पास 61.45 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वहीं 38.55 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है. सूत्रों के अनुसार अजय सिंह एनडीटीवी का 400 करोड़ रुपये का कर्ज भी वहन करेंगे. कुल सौदा करीब 600 करोड़ रुपये में हुआ बताया जा रहा है. सौदे में करीब 100 करोड़ रूपए तक नकद रॉय दंपति को मिल सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस ने जब एनडीटीवी के सूत्र से पूछा कि क्या चैनल स्पाइसजेट के अजय सिंह को बेचा जा चुका है? तो जवाब मिला, “हाँ, सौदा पक्का हो चुका है और संपादकीय अधिकार के साथ चैनल का नियंत्रण अजय सिंह के हाथ में होगा.” इसी साल पांच जून को सीबीआई ने रॉय दंपति के निवास और दफ्तर पर कथित तौर पर बैंक लोन न चुकाने से जुड़े मामले में छापा मारा था. एनडीटीवी ने छापे के बाद जारी बयान में सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था.

एनडीटीवी के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय और प्रमोटर संसथा आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की सीबीआई वित्तीय लेन-देन के एक मामले में जांच कर रही है. इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि स्पाइसजेट के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह एनडीटीवी के सबसे बड़े शेयर धारक बनने जा रहे हैं. अजय सिंह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साल 2014 के चुनाव प्रचार की कोर टीम में शामिल थे.

हिंदू लड़की ने किया मुस्लिम लड़के से प्यार तो भाजपा नेता बरसाए थप्पड़

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अलीगढ़। भाजपा नेता और कार्यकर्ता देश भर में भगवा रंग तो फैला ही रहे हैं. प्रेम करने वालों को भी परेशान कर रह हैं. योगी सरकार ने पहले प्रेमियों के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाया. अलीगढ़ की भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष संगीता वार्ष्णेय ने एक प्रेमी जोड़े को पकड़कर पीट दिया. थप्पड़ मारने के बाद संगीता वार्ष्णेय ने लड़की के पिता को भी बुलाया तथा उसे कुछ और थप्पड़ मारने के लिए कहा. भाजपा नेता के थप्पड़ मारने का यह वीडियो वायरल हो गया है.

मंगलवार को शहर के गांधी पार्क थाना क्षेत्र के तहत आने वाले नौरंगाबाद में एक स्नैक्स शॉप में युवती को उसके बॉय फ्रेंड के साथ बैठे हुए कुछ लोगों ने पकड़ लिया. युवक 32 साल का था और युवती ने अपनी उम्र 18 साल बताई. सूचना मिलने पर संगीता वार्ष्णेय मौके पर पहुंच गईं. पुलिस को भी बुला लिया गया.

लड़की ने कैमरे पर ही युवक मोहम्मद फैजान को अपना बॉयफ्रेंड बताया. जब किसी ने अलीगढ़ की मेयर शकुंतला भारती को वहां बुलाने के लिए कहा तो लड़की ने कहा कि उन्हें नहीं बुलाओ. संगीता वार्ष्णेय ने इस पर लड़की को थप्पड़ जड़ने के साथ कहा कि अलग-अलग समुदाय होने का क्या तुम मतलब नहीं जानती. ऐसे संबंधों का क्या नतीजा होता है सब जानते हैं.

संगीता वार्ष्णेय ने खुद ही कहा कि युवती अपनी उम्र 18 साल बता रही है जबकि उसकी उम्र 16 साल से ज्यादा नहीं लगती. इसी हंगामे के बीच युवती के पिता समेत घरवालों को भी मौके पर बुला लिया गया. युवती को घरवालों के हवाले सुपुर्द कर दिया गया और मोहम्मद फैजान को पुलिस थाने ले गई.

अलीगढ़ के एसएसपी राजेश पांडे के मुताबिक युवक का आईपीसी की धारा 294 के तहत चालान किया गया है. हालांकि संगीता वार्ष्णेय की ओर से युवती को थप्पड़ मारे जाने के सवाल को एसएसपी टाल गए. उन्होंने कहा कि ऐसी कोई शिकायत उन्हें नहीं मिली है. युवती या उसके घरवालों ने किसी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

मामला नौरंगाबाद क्षेत्र का है जहां एक युवक को एक लड़की के साथ अक्सर देखा जा रहा था. वहीं बुधवार शाम को लोगों ने दोनों को एक दुकान में साथ बैठे पकड़ लिया. उसके बाद उन्होंने भाजपा महिला मोर्चा और पुलिस को सूचित कर दिया. मौके पर पहुंची बीजेपी महिला मोर्चा की महानगर अध्यक्ष संगीता ने लड़की से जानकारी कर उसके परिजनों को सूचित किया. संगीता ने काफी देर तक लड़की को समझाने की कोशिश की. मामले की जानकारी मिलते ही लड़की के परिजन भी वहां आ गए. लड़की लड़के को अपना प्रेमी बता रही थी.

विकलांग हो चुका दाऊद, आना चाहता है भारतः राज ठाकरे

Raj Thackrey

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को दावा किया कि भगोड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम भारत लौटने का इच्छुक है और वह इस संबंध में केंद्र से बातचीत कर रहा है. केंद्र उसकी वापसी का श्रेय लेना चाहता है.

ठाकरे ने यह दावा गुरुवार को अपने फेसबुक पेज की लॉन्चिंग की मौके पर किया. सोशल मीडिया से दूरी रखने वाले राज ने पार्टी को बढ़ाने और युवाओं में पैठ बढ़ाने के लिए फेसबुक पेज लॉन्च किया है. इससे 4 लाख लोग जुड़ चुके हैं.

उन्होंने कहा, दाऊद अब विकलांग हो गया है. इसलिए, वह भारत लौटने को इच्छुक है और वह इस संबंध में केंद्र से बातचीत भी कर रहा है. सरकार उसे आम चुनाव से पहले लायेगी और उसका श्रेय लने का प्रयास करेगी. मैं कोई मजाक नहीं कर रहा हूं, बल्कि यह सच्चाई है जिसे आप बाद में एहसास करेंगे.

उन्होंने कहा, जब वह भारत लौटने को राजी हो जायेगा तब नरेंद्र मोदी सरकार इसका ढिंढोरा पीटेगी. यह भाजपा का एक राजनीतिक कदम होगा. आपको बताते चलें मनसे के अलावे महाराष्ट्र की बड़ी पार्टी शिवसेना भी गंठबंधन में साथ होने के बावजूद भाजपा पर लगातार निशाना साधते रहती है. उद्धव ठाकरे अबतक कई बार विभिन्‍न मुद्दों को लेकर भाजपा पर हमले कर चुके हैं.

ऋषि कपूर ने दलित महिला को ट्विटर के डॉयरेक्ट मैसेज पर दी गाली

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Rishi kapoor

नई दिल्ली। द कपूर फेमली के सीनियर सदस्य और बॉलीवुड अभिनेता ऋषि कपूर एक ट्वीट कर विवादों में फंस गए है. ऋषि कपूर ने एक दलित महिला को ट्वीट पर गाली दी. जिसके बाद से लोगों ने ऋषि कपूर को ट्वीटर पर ही घेर लिया.

दरअसल, ऋषि कपूर ने ट्विटर के डायरेक्ट मैसेज में एक महिला यूजर के लिए अभद्र शब्द का इस्तेमाल किया. ऋषि कपूर ने उस महिला को गाली लिखकर मैसेज सेंड कर दिया. उस महिला ने उस मैसेज का स्क्रीन शॉर्ट लेकर उस मैसेज को दुनिया के सामने रख दिया. ऋषि कपूर के खिलाफ महिला ने एफआईआर भी दर्ज करवाई है.

ट्विटर यूजर शिवानी चन्नन ने ऋषि कपूर पर आरोप लगाते हुए एक स्क्रीन शॉट लगाया और लिखा, ‘आपने अपने खानदानी व्यवहार को दिखा दिया.’ उस डायरेक्ट मैसेज के स्क्रीन शॉट में लिखा हुआ दिख रहा है, ‘फ** यू बिच’.

जब बाकि ट्विटर यूजर्स ने इसे देखा तो ऋषि कपूर के कॉमेंट बॉक्स पर कॉमेंट्स करने लगे. कई लोगों ने इस बात का जवाब भी दिया और विरोध भी किया.

पिछले काफी वक्त से ऋषि कपूर इस स्क्रीन शॉर्ट को लेकर ट्रोल हो रहे थे. वहीं अब ऋषि कपूर ने भी इस पर अपनी तरफ से जवाब दिया है.

ऋषि ने देर रात ट्विटर पर लिखा कि रबिश, मैं अभी ये सारे ट्वीट्स देख रहा हूं. यह ट्वीट्स मुझे अब्यूज कर रहे हैं. मैं कोई संत नहीं हूं. मैं भी वैसे ही गालियों में जवाब दूंगा जैसे तुम मुझे गालियां दे रहे हो.

ऋषि ने लोगों को कहा कि मैं भी आपकी ही जुबान में रिएक्ट करूंगा. तो अपनी शिकायतें अपने पास रखिए. टिट-फॉर-टैट.’

शिवानी चौहान नाम की इस यूजर ने बिना शर्म के यह स्क्रीन शॉर्ट सबके आगे रख दिया और साथ ही पोस्ट कर लिखा ‘ऋषि कपूर ने मुझे गालियां देकर अपने खानदानी मैनर्स दिखाएं हैं।’

दरअसल 13 सितंबर को बर्कले में राहुल गांधी के दिए गए वंशवाद वाले बयान पर ऋषि कपूर ने प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था भारतीय सिनेमा के 106 सालों में से 90 सालों तक कपूर्स परिवार का योगदान रहा है. भगवान की कृपा से आज हम चौथी पीढ़ी में हैं और जनता ने उन्हें उनके मेरिट की वजह से चुना है.

ऋषि कपूर के इस ट्वीट पर शिवानी चन्नन ने प्रतिक्रिया दी और एक मीम पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, जनता अभी ‘बेशर्म’ से उबरी नहीं है, ऋषि कपूर मेरिट मेरिट चिल्ला रहे हैं. नवाज का बदला ले लिया.

आतंकी हमले में 3 की मौत और 17 जवान घायल, बाल-बाल बचे मंत्री

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त्राल। गुरुवार को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल टाउनशिप में ग्रेनेड विस्फोट में 3 नागरिकों की मौत हो गई है. त्राल के ग्रेनेड हमले में 17 सीआरपीएफ कर्मी घायल हो गए हैं. जम्मू कश्मीर के वरिष्ठ मंत्री नईम अख्तर आतंकियों के ग्रेनेड हमले में बाल-बाल बच गए हैं.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ब्लास्ट 11 बजकर 45 मिनट पर हुआ, जिसमें 2 लोग मारे गए जबकि 6 अन्य घायल हुए हैं. जम्मू कश्मीर के पब्लिक वर्क्स मंत्री अख्तर बाल-बाल बच गए. ग्रेनेड हमले के 15 मिनट बाद दोपहर 12 बजे के करीब त्राल बस स्टैंड के पास अज्ञात आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. सीआरपीएफ की 180 बटालियन के 7 जवान भी घायल हुए हैं.

इससे पहले, बुधवार को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर स्थित जवाहर सुंरग के पास सशस्त्र सीमा बल-एसएसबी के जवानों को निशाना बनाकर हमला किया गया. बनिहाल इलाके में हुए इस हमले में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) का एक जवान शहीद हो गया. हमले में पांच जवान जख्मी भी हुए. जम्मू से सटे बनिहाल के पास एक कंस्ट्रक्शन कंपनी बॉर्डर पर सड़क बना रही थी. एसएसबी की 14वीं बटालियन यहां उनकी सुरक्षा में तैनात थी. कैंप पर अचानक ही गोलीबारी शुरू हुई और कुछ ही समय में रुक भी गई.

जातिगत संघर्ष: अतुल्य भारत पर एक दाग

प्राचीन वैदिक समाज को श्रम विभाजन तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के तहत चार वर्णों में विभाजित किया गया था. कालांतर में इनसे लाखों जातियां बन गईं. प्राचीन वर्ण व्यवस्था का सही या गलत होना हमेशा से विवादित रहा है, परंतु इसमे कोई शक नही है कि पिछले कुछ सौ वर्षों से जातिगत व्यवस्था के नकारात्मक परिणामों को इस समाज ने देखा और महसूस किया और इस प्रकार जातिगत व्यवस्था के खिलाफ लोगों के मन मे दृढ़ता बढ़ती गई. आज़ादी के बाद संविधान निर्माण के समय जातिगत व्यवस्था को मिटाने के प्रयास किये गए जिसके तहत अनुच्छेद 17 में अस्पृश्यता के उन्मूलन का प्रावधान किया गया. कुल मिलाकर एक लोकतांत्रिक देश को संवैधानिक तरीके से जातिगत व्यवस्था से दूर करने की कोशिश आज से लगभग 70 वर्ष पूर्व की गई थी. अब कई पीढ़ियों बाद भी समाज मे जातिगत व्यवस्था की स्थिति बहुत ही निराशाजनक तथा दुःखद है और देश के ज्यादातर हिस्सों में ख़ूनी जातिगत टकराव की स्थिति हमे देखने को मिलती रही है. कुछ समय पहले उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में जाति के नाम पर जो भी हो रहा था वह एक सभ्य समाज और लोकतंत्र के ऊपर कालिख़ के समान है. भारत मे जातिगत टकरावों पर गौर करे तो बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान , हरियाणा समेत पूरा उत्तरभारत आज बुरी तरह से प्रभावित नज़र आता है.

एक सभ्य समाज से होने का दावा करने के नाते हमारे सामने सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि आखिर 70 साल बाद भी जातिगत व्यवस्था इस समाज को इतनी बुरी तरह से क्यों जकड़ी हुई है; जबकि एक लोकतंत्र होने के नाते हर समय हम किसी भी योजना को जाति, धर्म तथा सम्प्रदाय से ऊपर उठकर क्रियान्यवित करने का दावा करते हैं. सवाल ये भी है कि क्या ये टकराव सिर्फ कानून व्यवस्था का मसला हैं या वाक़ई जातिवाद का घिनौना ज़हर हमारे समाज मे फैला हुआ है? विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा तमाम आरोप प्रत्यारोप कर उसका राजनीतिक लाभ लेने के लिए भले ही इन टकरावों को कानून व्यवस्था का मुद्दा बताया जाता हो परन्तु इनके लंबे इतिहास को देखते हुए ये कानून व्यवस्था का मुदा नही लगता है बल्कि ये घटनाएं समाज मे एक दूसरे के प्रति फ़ैली नकारात्मकता तथा नफरत की भावना है जो समय समय पर तमाम जातिगत संघर्षों के रूप में सामने आती रहती है.

इसकी मूल वजह पर अब हमें गंभीरता से विचार करना होगा कि क्यों आखिर नई पीढ़िया भी जातिगत नफरतों से दूर नही रह पा रही हैं. जातिगत व्यवस्था के उन्मूलन को लेकर हमारा संविधान भी काफ़ी हद तक भ्रमित दिखाई देता है, जैसे कि एक तरफ अस्पृश्यता के अंत की बात और दूसरी तरफ पंचायत चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों तक जातिगत आरक्षण की व्यवस्था; और तो और तुच्छ राजनीतिक कारणों से इसकी अवधि को लगातार बढ़ाया जाना जारी रखा गया.दाख़िले से नौकरियों तक मे हमारी युवा पीढ़ी सामान्य वर्ग, ओ बी सी, एस सी, एस टी और माइनॉरिटी सुन सुन कर और लिख लिख कर बड़ी हो रही हैं तो उनके मन मे जातिवाद की भावना आने को कितना ग़लत माना जाना चाहिए! अगर एक समान्यवर्गीय ग़रीब कहीं दाखिले या नौकरी के लिए आवेदन करते समय 1000 रुपये देता है और वहीं दूसरी तरफ कोई मुख्य धारा से जुड़ा हुआ सशक्त परंतु आरक्षित वर्ग का छात्र उसी जगह पर आवेदन के लिए 200 रुपये देता है तो क्या इस तरह की घटनाएं युवा पीढ़ी के मन में नकारात्मकता नही पैदा करती हैं?

जेएनयू में रोज मनुस्मृति जलाने वाले जाति के नाम पर आरक्षण का लाभ लेने में कोई परहेज़ नही करते बल्कि इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं. उनका स्वाभिमान भी उनको तब नही झकझोरता जब वो वर्ग विशेष के आरक्षण के तहत शिक्षा या नौकरी के लिए आवेदन करते हैं. ये सारी घटनाएं जातिगत ध्रुवीकरण के लिए जिम्मेदार हैं और ये कहने की जरूरत है कि अब बहुत हो गया जातिगत जनगणना, जातिगत दाखिल, जातिगत नौकरियां, जातिगत पदोन्नति, जातिगत चुनाव , जातिगत चुनावी समीकरण और तो और दलित मुख्यमंत्री और ओ बी सी प्रधानमंत्री. हमे यह समझने की जरूरत है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत जातिवाद मिटा पाना असंभव है और अगर जातिवाद का जहर इस देश से मिटाना है तो जाति आधारित हर व्यवस्था को खत्म करना होगा और हर व्यक्ति को ये बताने के लिए मजबूर नही करना होगा कि वो किस जाति या धर्म से संबंधित है. सामाजिक और आर्थिक न्याय दिलाने के ढेरों विकल्पों में से किसी और को चुनना होगा.

सौरभ कुमार मिश्रा का यह लेख जनसत्ता से साभार है।

बीबीएयू को हाईकोर्ट ने दिया झटका, बहुजन छात्रों के पक्ष में सुनाया फैसला

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लखनऊ। लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय(बीबीएयू) की प्रवेश परीक्षा में एमफिल इतिहास के टॉपर बसंत कन्नौजिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने दाखिला नहीं दिया. बसंत कन्नौजिया के अलावा जयवीर सिंह और अश्वनी रंजन को भी दाखिला देने से प्रशासन ने मना कर दिया था.

प्रवेश परीक्षा में टॉपर होने और अच्छे नंबर लाने के बावजूद भी बीबीएयू प्रशासन ने इन दलित छात्रों को दाखिला नहीं दिया. प्रशासन की इस मनमानी का दलित छात्रों ने विरोध किया और इसके बाद बसंत कन्नौजिया ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्री और विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ़ मैनजमेंट के सदस्य, सांसद अंजू बाला और धर्मेन्द्र यादव को भी प्रवेश दिलाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया. लेकिन किसी ने भी इन छात्रों की गुहार का संज्ञान नहीं लिया.

अंतिम में बहुजन छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जहां उच्च न्यायालय के जज राजन राय ने छात्रों के शैक्षिक अधिकार को देखते हुए फैसला छात्रों के पक्ष में सुनाया. विश्वविद्यालय प्रशासन को उक्त छात्रों के तत्काल दाखिला देने का आदेश दिया.

ये भी पढ़ेंः शानदारः बीबीएयू के बसंत कन्नौजिया को 100 में से 94 नंबर

हाईकोर्ट में बहुजन छात्रों की जीत यह दर्शाती है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सिर्फ बहुजन छात्रों का भविष्य बर्बाद करने के लिए सारे हथकंडे अपना रहा है. बसंत कनौजिया ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे. हम भारतीय संविधान को अपना धर्म समझते हैं, इसिलए मैं मरते दम तक संविधानो के नियमों का पालन करता रहूंगा.

इस जीत के बाद बसंत कन्नौजिया ने बहुजन विरोधी प्रशासन को कहा कि सत्य को परेशान कर सकते हो, लेकिन सत्य को पराजित नहीं कर सकते. बसंत कन्नौजिया अम्बेडकर यूनिवर्सिटी दलित स्टूडेंट्स यूनियन (AUDSU) के सक्रिय सदस्य भी है. AUDSU ने जीत पर बसंत कन्नौजिया को बधाई दी और इसे बहुजन छात्रों की जीत बताया. AUDSU ने बीबीएयू प्रशासन पर तंज कसा और कहा कि बीबीएयू प्रशासन आपकी जय हो जो अराजक तत्वों को पनाह दे रहे हैं और पढ़ने वाले छात्रों को अराजक बताकर उनका भविष्य बर्बाद कर रहे हो.

5वीं क्लास के छात्र ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में मैडम को बताया जिम्मेदार

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गोरखपुर। प्राइवेट स्कूलों में भारी अनियमितताओं की सजा स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों और उनके माता-पिता को भुगतनी पड़ रही है. हाल ही में गुरूग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई बच्चे की हत्या के बाद अब गोरखपुर के कोन्वेंट स्कूल से एक बच्चे की मौत की घटना सामने आई है.

गोरखपुर के सेंट एंथोनी कोन्वेंट स्कूल में पांचवी क्लास के 12 साल के बच्चे नवनीत ने आत्महत्या कर ली. आत्महत्या का कारण कोई और नहीं बल्कि उनकी क्लास टीचर बनी. छात्र ने आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा, जिसमें उसने अपनी मैडम को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उसने सुसाइड नोट के माध्यम से अपने मम्मी-पापा से कहा कि कि मेरी मैम से कहना ऐसी सजा किसी और को न दे.

सुसाइड नोट में नवनीत ने लिखा-

‘’पापा, आज 15 सितंबर मेरा पहला एग्जाम था. मेरी मैम क्लास टीचर ने मुझे सवा 9.15 तक रुलाया और खड़ा रखा, इसलिए क्योंकि वह चापलूसों की बात मानती हैं. उनकी किसी बात का विश्वास मत करिएगा. कल उन्होंने मुझे तीन पीरियड खड़ा रखा. आज मैंने सोच लिया है कि मैं मरने वाला हूं. मेरी आखिरी इच्छा मेरी मैम को किसी बच्चे को इतनी बड़ी सजा न देने को कहें.

अलविदा पापा-मम्पी और दीदी.’’

ऊपर लिखी लाइनें छात्र की सुसाइड नोट की हैं. उसने 15 सितंबर को जहर खाकर जान देने की कोशिश की. पता लगने पर छात्र को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई.

सुसाइट नोट मिलने पर गुस्साएं परिजनों ने स्‍कूल के खिलाफ विरोध जताया. मामला बिगड़ता देख स्कूल के प्रिंसिपल ने 100 नंबर पर सूचना देकर पुलिस बुला ली. छात्र के पिता ने स्कूल प्रबंधन और क्लास टीचर के खिलाफ तहरीर दी है. पुलिस ने बताया कि परिजनों की तरफ से लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है. दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.

जानिए महेंद्र सिंह धोनी के पिस्तौल उठाने की वजह

महेंद्र सिंह धोनी ताबड़तोड़ गोलियां दागते दिखे. टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तान ने प्रोफेशनल शूटर की तरह हाथों में पिस्तौल थामा और दनादन फायरिंग शुरू कर दी. अब आप सोच रहे होंगे भला धोनी को पिस्तौल क्यों उठानी पड़ी? दरअसल, पूर्व भारतीय कप्तान धोनी टीम इंडिया का अभ्यास सत्र बारिश की भेंट चढ़ने के बाद कोलकाता पुलिस ट्रेनिंग स्कूल का रुख किया और पिस्टल निशानेबाजी में हाथ आजमाए.

कोलकाता पुलिस ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘महान महेंद्र सिंह धोनी ने कुछ समय निकालकर आज दोपहर पुलिस ट्रेनिंग स्कूल की हमारी अत्याधुनिक शूटिंग रेंज में अपने निशानेबाजी कौशल का अभ्यास किया. उनकी सटीकता बेहतरीन थी.’ कोलकाता पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि धोनी ने न सिर्फ रेंज में निशानेबाजी की बल्कि कोलकाता पुलिस कर्मियों से बात करके उनकी हौसलाअफजाई भी की.

धोनी के साथ जाने वाले कोलकाता पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘दूसरी बार धोनी की मेजबानी शानदार रही. वह बेहतरीन निशानेबाज है और उसने हम सभी को प्रेरित किया.’

उन्होंने कहा, ‘पीटीएस की शूटिंग रेंज अत्याधुनिक है और धोनी ने 10 और 25 मीटर दोनों रेंज में निशानेबाजी की.’ इससे पहले धोनी ने 2010 में एक पुरानी मोटरसाइकिल की तलाश में शहर पुलिस के मुख्यालय का दौरा किया था.

भारत पांच मैचों की एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के दूसरे मैच में कल ईडन गार्डन्स में आस्ट्रेलिया से भिड़ेगा. भारत ने वर्षा से प्रभावित पहले मैच में आस्ट्रेलिया को 26 रन से हराकर श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली है.

अब ‘फलाहारी बाबा’ बना बलात्कारी बाबा

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falahari baba

अलवर। बलात्कारी बाबा राम रहीम के बाद अब राजस्थान के एक प्रसिद्ध बाबा पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है. लॉ की एक छात्रा ने बाबा कौशलेंद्र फलाहारी महाराज के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. पीड़िता का परिवार, पहले तो इस मामले में किसी भी कार्रवाई का इच्छुक नहीं था लेकिन गुरमीत राम रहीम को सजा मिलने के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया.

पुलिस के मुताबिक, लड़की के परिवार के बाबा से करीब 25 साल पुराने फैमिली रिलेशन हैं. लड़की ने पिछले दिनों लॉ की पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप पूरा किया. इसके लिए उसे 5 हजार रुपए मिले. वह पैसे मिलने को लेकर काफी खुश थी और 7 अगस्त को बाबा के अलवर आश्रम पर पहुंची थी.

अपने बयान में रेप पीड़िता ने बताया कि वह 7 अगस्त को बाबा के दिव्य धाम आश्रम में गई थी. यहां उसे बाबा की सेवा के बदले पहले वेतन का ऑफर दिया गया. साथ ही उसे रातभर रुकने के लिए कहा गया. इसी दौरान शाम 7 बजे उसे बाबा ने अपने कमरे में बुलाया और उसके साथ रेप किया. बाबा ने यहां मौजूद लोगों को आरती में शामिल होने के लिए भेज दिया. फिर उसने गेट बंद कर दिया और लड़की के साथ अश्लील बातें करते हुए छेड़छाड़ करने लगा. इसके बाद उसके साथ रेप किया.

अलवर के एसपी राहुल प्रकाश ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली लड़की ने यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया है. पुलिस ने बताया कि बिलासपुर पुलिस स्टेशन में एक जीरो एफआईआर दर्ज की गई है. इसके बाद बुधवार को जांच अधिकारी अलवर पहुंच गए. पुलिस के पहुंचने की सूचना पाकर बाबा अस्पताल में भर्ती हो गया है. अब यह मामला अलवर के अरावली विहार पुलिस स्टेशन में है. उधर, बाबा के एक प्रशंसक सुदर्शनाचार्य महाराज ने कहा, ‘मैं ऐसे किसी मामले के बारे में नहीं जानता. महाराज जी बीमार हैं और वह अभी किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं.’

बाबा ने कथित रूप से यह भी धमकी दी कि उसके भक्त राजनेता और शीर्ष पुलिस अधिकारी हैं, इसलिए वह इस बारे में किसी से कुछ भी न बताए. लड़की का परिवार पिछले 15 साल से बाबा के संपर्क में था और काफी धन उन्हें दान कर चुका है. इस बारे में अलवर के पुलिस अधीक्षक राहुल प्रकाश ने कहा, ‘हमारी टीम ने आश्रम में छापा मारा था लेकिन बाबा वहां नहीं मिला. वह एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है और वहां पुलिसकर्मी तैनात हैं. हम उसके डिस्चार्ज होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हम उनके हेल्थ को लेकर डाक्टरों के साथ संपर्क में हैं.’

फिल्म पद्मावती का फर्स्ट लुक हुआ रिलीज़

राजस्थान में पद्मावती की शूटिंग के दौरान फिल्म की कहानी पर काफी विवाद हुआ था. कुछ संगठनों का आरोप था कि पद्मावती के चरित्र के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. कथित तौर पर अलाऊद्दीन के साथ रानी के प्रणय दृश्यों पर आपत्ति की गई थी. करनी सेना ने शूटिंग का विरोध किया और तोड़फोड़ की. रिपोर्ट्स के मुताबिक भंसाली के साथ मारपीट भी की गई. विरोध के बाद भंसाली ने पैकअप कर लिया था.

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का फर्स्ट लुक रिलीज कर दिया गया है. फर्स्ट लुक के साथ ही ये भी साफ हो गया है कि फिल्म एक दिसंबर 2017 को रिलीज होगी. इस पोस्टर को ठीक नवरात्रि से एक दिन पहले लॉन्च करने का कारण ये बताया जा रहा है कि पद्मावती भारतीय संस्कृति को सेलिब्रेट करती है और ये सही मौका था जब इस पोस्टर को लॉन्च किया जाए. बताया जा रहा है कि दीपिका के इस लुक पर काफी मेहनत की गई है. ये जानकर आपको हैरानी हो सकती है कि ये लुक जितना आकषर्क है, दीपिका को तैयार होने में उतना ही कम समय लगता था. दीपिका रानी पद्मिनी के किरदार के लिए केवल आधे घंटे में तैयार हो जाती थी और साथ ही उन्हें कम से कम मेक अप दिया जाता था.

फिल्म के पोस्टर रिलीज को लेकर रणवीर सिंह ने बुधवार को ही जानकारी दे दी थी. बता दें कि फिल्म की कहानी रानी पद्मावती की जिंदगी पर आधारित है. फिल्म में दीपिका पादुकोण रानी पद्मावती की भूमिका में हैं. वहीं शाहिद कपूर फिल्म में दीपिका के पति यानी रावल रतन सिंह का रोल कर रहे हैं. ये देखना दिलचस्प है कि फिल्म में रणवीर सिंह अलाउद्दीन खिलजी के रोल में हैं. ऐसा पहली बार है, जब रणवीर नेगेटिव रोल में नजर आएंगे.

जियो फोन की प्री बुकिंग करने वाले लोगों के लिए बुरी खबर

नई दिल्ली। जियो फोन की प्री बुकिंग करने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है. उन्हें शुक्रवार को भी अपना जियो मोबाइल नहीं मिल सकेगा. बताया जा रहा है कि ज्यादा डिमांड के कारण रिलायंस जियो कंपनी ने फोन की डिलिवरी डेट 21 सितंबर से बदलकर अक्टूबर में कर दी है. जियो फोन की पहली बार बुकिंग 24 अगस्त को शुरू हुई थी, लेकिन ज्यादा प्री बुकिंग होने के कारण उन्हें दो दिन में ही इसे बंद करना पड़ा था. कंपनी ने दावा किया था कि पहली बार में ही 60 लाख से ज्यादा जियो फोन की बुकिंग कर ली गई थी.

रिलांयस जियो के 4जी फीचर वाले फोन की डिलिवरी डेट सितंबर के पहले हफ्ते में तय की गई थी. बाद में इसे बढ़ाकर 21 सितंबर कर दिया गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब कंपनी ने इस तारीख को और आगे बढ़ाते हुए मोबाइल की डिलिवरी डेट 1 अक्टूबर 2017 कर दी है. इस फोन की बंपर बुकिंग के पीछे की सबसे बड़ी वजह इसका फ्री होना माना जा रहा है. जियो यूजर्स के लिए कंपनी ने 4जी फीचर वाले अपने मोबाइल को मुफ्त में देने का ऐलान किया था.

आपने भी अगर जियो के फोन की प्री बुकिंग की है तो आप इसके स्टेटस का पता लगाने के लिए 18008908900 पर कॉल कर सकते हैं. हालांकि, इस नंबर को डायल करने के लिए आपको उसी जियो नंबर का इस्तेमाल करना होगा, जिसे आपने मोबाइल के प्री बुकिंग के दौरान दिया होगा.

इसके अलावा आप myJio ऐप के जरिए भी अपने जियो फोन का स्टेटस चैक कर सकते हैं. ऐप ओपन करने के बाद माय वाउचर सेक्शन ओपन करें. यहां आपको अपना फोन ट्रैक करने का ऑप्शन मिलेगा, जिससे आप जियो 4जी फोन के डिलिवरी स्टेटस के बारे में जान सकेंगे.

पार्टी कार्यकर्ताओं ने की पत्रकार शांतनु भौमिक की हत्या

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Shantanu Bhowmik

अगरतला। त्रिपुरा में इंडिजीनस पीपुल्स फ्रंट आफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के आंदोलन को कवर करने गये टीवी पत्रकार की हत्या कर दी गयी. पुलिस अधीक्षक अभिजीत सप्तर्षि ने बताया कि ‘दिनरात’ न्यूज चैनल के पत्रकार शांतनु भौमिक मंडई में आईपीएफटी के सड़क जाम तथा आंदोलन को कवर रहे थे. उसी दौरान उन पर पीछे से हमला किया गया और उनका अपहरण कर लिया गया.

अभिजीत सप्तर्षि ने कहा कि बाद में भौमिक का पता लगा और उनके शरीर पर चाकू से हमले के कई निशान थे. उन्हें तत्काल अगरतला मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाया गया जहां डक्टरों ने उन्हें मृत लाया घोषित कर दिया. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बादल चौधरी ने उनकी हत्या की निंदा की. राज्य के सूचना मंत्री भानूलाल साहा अस्पताल गए. पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंडई में स्थिति तनावपूर्ण है और क्षेत्र में पहले से ही धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गयी है. वहां अतिरिक्त पुलिस बल भेजे जा रहे हैं.

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि त्रिपुरा राजेर उपजाति गण मुक्ति परिषद (टीआरयूजीपी) के समर्थक जीएमपी की एक रैली में शामिल होने के लिए अगरतला जा रहे थे और खोवई में बस स्टैंड पर इकट्ठा हुए थे. वहां इंडीजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के कार्यकर्ताओं का एक समूह भी मौजूद था, जिन्हें रैली के बारे में पता चला और वे कथित रूप से भड़क गए.

उन्होंने बताया कि तब अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया और बात नहीं बढ़ी. लेकिन जब बस छानखोला गांव से कुछ दूरी पर थी तब जंगल में छिपे आईपीएफटी के कुछ कार्यकर्ताओं ने वाहन पर हमला किया. उन्होंने जीएमपी कार्यकर्ताओं पर लोहे की छड़ों और डंडों से हमला किया. मंडाई में भीड़ को इकट्ठा होने से रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया. इसी घटना के दौरान आईपीएफटी के कार्यकर्ताओं ने 28 वर्षीय शांतनु भौमिक को मौत के घाट उतार दिया.

बता दें ये ऐसा पहला मामला नहीं है जब किसी पत्रकार को निशाना बनाया गया हो. इससे पहले कन्नड़ की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की कुछ बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

नीतीश कुमार के उद्घघाटन से पहले ही टूटा बांध

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पटना। बिहार में भागलपुर के कहलगांव में करोड़ों की लागत से बना बांध उद्घाटन से पहले ही टूट गया. बांध के टूटने से कई इलाकों में गंगा का पानी घुस गया है. इस बांध को गंगा पंप नहर योजना के तहत तैयार किया गया था. जानकारी मिलते ही जिले के सभी आला अधिकारी मौके पर पहुंचे. पूरे कहलगांव में बाढ़ सा नज़ारा दिख रहा है.

एसडीआरएफ की टीम बचाव कार्य में जुट गई है. पानी अभी भी शहरी इलाकों में घुस रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पंप नहर योजना का आज उद्घाटन करने वाले थे. फिलहाल सीएम का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है. 40 साल बाद पूरा हुए इस नहर परियोजना की नहर कहलगांव के एनटीपीसी मुरकटिया के पास टूट गई. बिहार और झारखंड की इस साझा परियोजना के जरिये जरिए भागलपुर में 18620 हेक्टेयर तथा झारखंड के गोड्डा जिला की 4038 हेक्टयर भूमि सिंचित होगी.

इस परियोजना के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अलावा जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा कहलगांव के विधायक सदानंद सिंह भाग लेने वाले थे. पानी के बहाव को रोकने के बालू भरे बोरे रखे जा रहे हैं.

बांध टूटने पर ​प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी ने नीतीश सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भागलपुर में मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री का पुतला फूंका. आरजेडी ने कहा है कि करोड़ों रुपये के सृजन घोटाले के बाद भागलपुर में एक नया ‘घोटाला’ सामने आया है.

यूपी के अफसर ने घूस लेकर आतंकी को छोड़ा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एक शीर्ष पुलिस अधिकारी के खिलाफ योगी सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं. पुलिस अधिकारी पर पंजाब की नाभा जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड गोपी घनश्यामपुरा को घूस लेकर छोड़ने का आरोप लग रहा है. घनश्यामपुरा को छोड़ने के लिए पुलिस अधिकारी ने एक करोड़ रुपये की रकम ली थी. इस मामले की जब मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को जानकारी मिली, तो उन्होंने मंगलवार शाम प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार और पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह को तलब किया. सीएम के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह ने एडीजी के नेतृत्व में मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

गौरतलब है कि 27 नवंबर 2016 को खालिस्तान लिब्रेशन फ्रंट और बब्बर खालसा के आतंकवादियों को पटियाला की नाभा जेल से छुड़ा लिया गया था. आतंकियों को छुड़ाने के लिए अपराधी पुलिस की वर्दी में आए थे. इस मामले के मास्टरमाइंड गोपी घनश्याम पुरा को उत्‍तर प्रदेश में 10 सितंबर को शाहजहांपुर से गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद पुलिस की तरफ से गोपी घनश्याम पुरा को पकड़ने के बारे में मीडिया में कोई जानकारी नहीं दी गई.

इसके बाद घनश्यामपुरा के दोस्त और नाभा जेल से फरार होने वाले अपराधियों में से एक हरजिंदर सिंह भुल्लर उर्फ विक्की गोंड ने फेसबुक पर गोपी घनश्यामपुरा को लखनऊ में गिरफ्तार किए जाने की खबर पोस्ट की. घनश्यामपुरा के दोस्‍त को डर था कि कही पुलिस उसका एनकाउंटर न कर दें, इस कारण उसने इस मामले को उजागर कर दिया.

पंजाब पुलिस ने भी यूपी के पुलिस अफसरों से गोपी की गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी मांगी तो अफसरों ने कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया. इसके बाद जानकारी मिली कि उसे छोड़ने के बदले यूपी की एक स्पेशल फोर्स के आईजी से एक करोड़ रुपये की डील हो गई है. इस पूरे मामले की मध्यस्तता कांग्रेस के एक नेता ने की.

रासत में लिए गए अपराधी घनश्यामपुरा को छोड़ने के लिए जिस अफसर का नाम सामने आ रहा है वह लखनऊ में ही तैनात है. सूत्रों के मुताबिक IG रैंक के इस अफसर के पहले भी कई कारनामे सामने आ चुके हैं. लेकिन इस अधिकारी की ऊपर तक पहुंच होने के कारण इसके खिलाफ कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता.

आरोप है कि पंजाब के एक बड़े अपराधी और शराब व्यापारी के माध्‍यम से घनश्यामपुरा को छुड़ाने के लिए एक करोड़ रुपये की डील हुई. प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार के मुताबिक एडीजी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में उच्च स्तरीय कमेटी प्रकरण की जांच करेगी. नाभा जेल ब्रेक के मामले में पंजाब पुलिस मास्टरमाइंड गोपी घनश्यामपुरा की तलाश कर रही है.