हेमा मालिनी ने बताया, सनी देओल से कैसा है उनका रिश्ता
मुंबई। 16 अक्टूबर को फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी की जीवनी ‘बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल’ लांच की गई. यह दिन हेमामालिनी के लिए काफी खास था. इसी दिन जहां इस दिग्गज अदाकार का 69वां जन्मदिन था तो वहीं उन्होंने इसी दिन फिल्म इंडस्ट्री में भी अपने 50 साल पूरे कर लिए. कार्यक्रम की खास बात हेमा मालिनी का सनी देओल को लेकर बयान रहा.
हेमा मालिनी ने अपने पति धर्मेंद्र के बड़े बेटे सनी देओल और अपने रिश्तों के बारे में खुलकर बात की. फिल्म अभिनेत्री ने कहा- “लोग सोचते हैं कि हमारे बीच कैसा रिश्ता है. तो सच यह है कि जब भी जरूरत होती है, सनी हमेशा साथ होते हैं. जब 2015 में मेरा कार एक्सीडेंट हुआ था, तब सनी सबसे पहले मुझे देखने पहुंचे थे. वो सब चीजों का ख्याल रखते हैं. जिस तरह से वो ध्यान रखते हैं, उससे साफ है कि हमारा रिश्ता कैसा है.”
असल में माना जाता रहा है कि सनी देओल हेमा मालिनी को पसंद नहीं करते हैं. लेकिन हेमा मालिनी के इस नए खुलासे से नई बात सामने आई है.
फिल्मों में आने से पहले धर्मेंद्र ने 19 साल की उम्र में प्रकाश कौर से शादी कर ली थी. प्रकाश कौर और धर्मेंद्र के 4 बच्चे हैं, जिनमें सनी देओल, बॉबी देओल बेटी विजेता और अजीता हैं. जबकि वहीं फिल्मों में आने के बाद धर्मेंद्र का दिल हेमा पर आ गया था और उन्होंने हेमा मालिनी से 1979 में शादी कर ली थी.
अरबों की बेनामी संपत्ति की मालिक है हनीप्रीत
चंडीगढ़। बलात्कारी बाबा की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत जेल में बंद है. इस बीच पुलिस पूछताछ में ये पता चला है कि हनीप्रीत के नाम अरबों रुपये की बेनामी संपत्तियां हैं. अलग-अलग राज्यों में जमीन और मकान से जुड़े डेरे के कई दस्तावेज पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है. ताकि हकीकत पता लगाई जा सके.
इस संबंध में डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपासना और हनीप्रीत से मिली जानकारियों के आधार जांच की जा रही है. क्रॉस चेकिंग व लैपटॉप की डिलीट फाइलों को रिकवर करने के बाद ही एसआईटी किसी नतीजे पर पहुंचेगी.
राजस्थान में डेराप्रमुख के पैतृक गांव गुरुसर मोडिया से बरामद दस्तावेजों में पिछले कुछ महीनों पहले हुए करोड़ों के लेनदेन की तमाम जानकारी है. इसके अलावा भूरे रंग के बैग से दर्जनों जमीन और मकानों की रजिस्ट्रियां भी मिली हैं. इनमें से ज्यादातर संपत्तियां हनीप्रीत के नाम से खरीदी गई हैं, जो दिल्ली, मुंबई, हिमाचल प्रदेश, पंजाब सहित अन्य कई राज्यों में हैं.
पुलिस के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक 100 से अधिक संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. जिसकी कीमत कई सौ करोड़ रूपये है. इसके अलावा विभिन्न बैंकों के दर्जनों डेबिट कार्ड से हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है.
इनमें कुछ डेबिट कार्ड हनीप्रीत के खातों के हैं. डेराप्रमुख के बाद डेरे में नंबर दो की हैसियत रखने वाली हनीप्रीत के हाथ में ही डेरा का वित्तीय प्रबंधन था और ज्यादातर लेन-देन उसी के जरिये किया जाता था.
दलित लेखक संघ के अध्यक्ष-महासचिव को यूपी के राज्यपाल ने किया सम्मानित
लखनऊ। बुद्ध अम्बेडकर कल्याण एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने दलित साहित्यकार सेमिनार और सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया. यह आयोजन 15 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक और विशिष्ट अतिथि अरूणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद रहे.
राज्यपाल राम नाईक ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने दलित लेखक संघ के अध्यक्ष कर्मशील भारती और महासचिव हीरालाल राजस्थानी को उनके दलित साहित्य व कला में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान पत्र देकर सम्मनित किया.
कार्यक्रम में राम नाईक ने कहा कि अम्बेडकर द्वारा रचित साहित्य में मुझे संविधान सबसे प्रिय है. उन्होंने इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल के साथ मिलकर सात किताबों का विमोचन भी किया. इस मौके पर माता प्रसाद ने कहा कि दलित साहित्य मानवीय मूल्यों का साहित्य है जो समता मूलक समाज की मांग करता है.
इस अवसर पर हीरालाल राजस्थानी ने अपने अभिभाषण में कहा कि दलित लेखन बिना उसकी अवधारणा के रचा जाना अपने उद्देश्य से भटकना जैसा होगा. कर्मशील भारती ने कहा कि दलित साहित्य परंपरागत साहित्य की परिपाटी पर आधारित नहीं है.
इसके आलावा इस सम्मलेन में अनेक राज्यों से दलित लेखक चिंतक भी मौजूद रहें. जिनमें, खन्ना प्रसाद गुजरात से, एमडी इंगोले महाराष्ट्र से, डीसी ऊके मध्यप्रदेश से, नवनाथ काम्बले तमिलनाडु से नागेंद्र गौतम, लालती देवी और कालीचरण स्नेही उत्तर प्रदेश से मुख्यरूप से शामिल रहे. मंच संचालन नानक चंद ने किया.
गुलामी की निशानी संसद और लाल किले को भी गिरा दोः आजम खान
नई दिल्ली। भाजपा विधायक संगीत सोम के बयान के बाद से शुरू हुए विवाद में सपा नेता आजम खान भी कूद गए हैं. ताजमहल के बहाने आजम खान ने भाजपा पर निशाना साधा है. आजम खान ने कहा कि गुलामी की निशानियों को ना मिटाना राजनीतिक नपुंसकता है.
आजम खान ने कहा कि मैंने तो पहले भी कहा कि सिर्फ ताजमहल ही क्यों पार्लियामेंट, राष्ट्रपति भवन, कुतुब मीनार सब को गिरा देना चहिए. हम तो बादशाह से अपील करते हैं. छोटे बादशाह से तो हमने कहा कि आप आगे चलो हम साथ चलेंगे. पहला फावड़ा आपका होगा दूसरा हमारा होगा. कहने के बाद कदम पीछे हटा लेना राजनीतिक नपुंसकता है.”
आजम खान ने संगीत सोम का नाम लिए बिना कहा कि मैं किसी को जवाब नहीं दे रहा हूं क्योंकि गोश्त के कारखाने चलाने वालों को राय देने का अधिकार नहीं है. इस पर मोदी और योगी जी फैसला करेंगे लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि उन सभी इमारतों को गिरा देना चाहिए जिनसे कल के शासकों की बू आती है.
ओवैसी ने भी किया विरोध संगीत सोम के बयान का AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध किया है. ओवैसी ने कहा है कि लाल किला को भी गद्दार ने ही बनाया है तो क्या पीएम मोदी लाल किला पर तिरंगा नहीं फहराएंगे?
असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ”दिल्ली में हैदराबाद हाउस को भी ‘गद्दार’ ने ही बनाया था. क्या मोदी विदेशी मेहमानों को यहां आने से रोकेंगे. ‘गद्दारों ने ही लाल किला को भी बनाया था क्या मोदी वहां तिरंगा फहराना बंद कर देंगे क्या मोदी और योगी देसी और विदेशी सैलानियों को ताजमहल नहीं जाने के लिए कहेंगे.”
उच्च शिक्षा की बदहाली के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं-नीतीश
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि शिक्षा की समस्या किसी राज्य विशेष की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे देश की समस्या है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को मिलकर काम करना होगा. इसके लिए लोगों की मानसिकता बदलने के साथ ही पूरे सिस्टम को ठीक करना होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी जल्द दूर कर लिया जायेगा.
लोक संवाद कार्यालय के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह बातें कहीं. नीतीश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों के लिए राज्य सरकार ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकती, उसके अपने दायरे हैं. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में राज्यों के पास सीमित अधिकार हैं. उन्होंने कहा, इसे बदलने की जरूरत है और केंद्र सरकार को इस विषय में राज्य सरकार की क्षमता निर्धारित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षकों का बड़े पैमाने पर बहाली करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया जारी है, जल्द ही शिक्षकों की बहाली की जायेगी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों का झुकाव भी शिक्षक बनने की तरफ होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश रहती है कि शिक्षकों को पहली तारीख को तनख्वाह मिल सकें. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में सरकार सीधी बहाली नहीं करती. विश्वविद्यालयों के शिक्षा में राज्य सरकार का रोल सीमित है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का संचालन राज्य सरकार को मिले तो बेहतर होगा. नीतीश कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा को बेहतर करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के लिए राज्य सरकार की ओर से करीब चार हजार करोड़ ग्रांट दिया जाता है.
पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह पुरानी मांग है. संसद में भी हम इसे उठाते रहे हैं. इस बारे में अब केंद्र सरकार को फैसला लेना है. केंद्र सरकार चाहे तो पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दे या नहीं दें, यह उनके हाथ में है.
उत्तर प्रदेश में 2682 मदरसों की मान्यता होगी रद्द
लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड ने 2682 मदरसों की मान्यता रद्द करेगा. मदरसा बोर्ड के वेब पोर्टल पर विवरण अपलोड न करने की वजह से इन मदरसों की मान्यता रद्द की जाएगी. फर्जीवाड़े को रोकने के लिए यूपी के करीब 2682 मदरसों के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ ने कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं.
विवरण अपलोड करने की अंतिम तारीख रविवार थी. दरअसल, मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसों में फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए वेब पोर्टल www.madarsaboard.upsdc.gov.in बनवाया था. इस वेबसाइट पर सभी 19143 मदरसों को अपना विवरण अपलोड करना था. इसमें टीचर, अन्य स्टाफ, छात्रों के विवरण के अलावा भवन की फोटो, क्लासरूम का माप और आधार की डिटेल शामिल थी.
मदरसा बोर्ड ने विवरण अपलोड करने की तिथि दो बार बढ़ायी. पहले अंतिम तिथि 15 सितम्बर थी. जिसे बढ़ाकर 30 सितम्बर किया और फिर 15 अक्टूबर. इसके बावजूद 16, 461 मदरसों ने ही विवरण अपलोड किया है.
मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता ने बताया कि जिन मदरसों ने वेब पोर्टल पर अपना विवरण अपलोड कर दिया है उनकी ही मान्यता बनी रहेगी. अंतिम तिथि तक कुल 32, 483 शिक्षकों का डाटा आधार लिंक के साथ अपलोड हुआ है.
‘बिग बॉस’ के घर में फिर से हुई मारपीट
रिएलिटी शो ‘बिग बॉस’ सीजन 11 में तीसरे हफ्ते की नॉमिनेशन प्रक्रिया के बाद एक बार फिर मारपीट हो गई है. घर का कैप्टन होने के नाते विकास गुप्ता को इस हफ्ते 7 लोगों को नॉमिनेट करने का राइट मिला था. विकास ने नॉमिनेशन प्रक्रिया में अपने किसी भी दोस्त को नॉमिनेट नहीं किया. विकास के इस फैसले के बाद घरवाले काफी गुस्सा हो गए. विकास ने 14 वें दिन की शुरुआत में हिना खान से पुरानी बातें भूलाकर फिर से दोस्ती करने के लिए कहा. हिना ने कहा कि ठीक है तुम अपनी हरकतों के लिए माफी मांग लो. लेकिन जब नॉमिनेशन प्रक्रिया के लिए कंटेस्टेंट का नाम लेने की बात आई तो विकास ने हिना को नॉमिनेट कर दिया.
विकास ने हिना के अलावा शिल्पा, आकाश, पुनीश, सपना और लव को भी घर से बाहर जाने के लिए नॉमिनेट किया. इसके बाद ये सभी लोग विकास पर भड़क गए और उन्होंने विकास पर अपने दोस्तों की साइड लेने का आरोप लगाया. पुनीश और आकाश इस हफ्ते नॉमिनेट होने के बाद काफी गुस्से में आ गए. दोनों ने ही दावा किया कि वह विकास को सबक सिखा के रहेंगे. लेकिन बिग बॉस के सोर्सज ने जानकारी दी है कल का एपिसोड पूरा होने के बाद विकास और पुनीश में झगड़ा हो गया है.
बिग बॉस से जुड़ी जानकारी देने वाले ट्विटर हैंडल द खबरी ने बताया है कि विकास ने गुस्से में पुनीश पर हाथ उठाया है. विकास को अपनी इस हरकत का खामियाजा कैप्टनसी गंवाकर उठाना पड़ा है. विकास के कैप्टनसी गंवाने के बाद पुनीश को घर का नया कैप्टन बना दिया गया है. इतना ही दावा किया जा रहा है कि विकास को इस हरकत के लिए काल कोठरी में रहने की सजा दी गई है और अब पूरे सीजन में कभी भी कैप्टन नहीं बन सकते.
नाराज जावानों ने राजनाथ सिंह को नहीं दिया ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
जोधपुर। भारतीय सेना और पुलिस को छप्पन इंच वाली सरकार देश के लिए अहम बताती है, लेकिन सरकार उनके वेतन में हर महीने कटौती कर रही है. वेतन कटौती से नाराज जवान विरोध जताने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं. जवानों ने देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने से इनकार कर दिया.
दरअसल, राजनाथ सिंह सोमवार को जोधपुर में संक्षिप्त दौरे पर पहुंचे थे. जिन 8 जवानों को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने जाना था, वे सामूहिक अवकाश पर चले गए. हालांकि बाद में दूसरी टीम भेजकर गृहमंत्री को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया.
जवानों का विरोध करने का यह कोई पहला तरीका नहीं है. इससे पहले भी जोधपुर दौरे पर आए एडीजी एमएल लाठर को भी जवानों ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने से मना कर दिया था. जवानों का कहना है कि जब तक सरकार हमारी मांगे नहीं मानेंगी. तब तक हम ऐसे ही विरोध करते रहेंगे.
जवानों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि वेतन से कटौती नहीं की जाए. मैस भत्ता 1600 रु. से बढ़ाकर चार हजार रुपए किए जाए. हार्ड ड्यूटी भत्ता 12% से बढ़ाकर 50% किया जाए. कांस्टेबल की योग्यता 12वीं पास की जाए. बाइक भत्ता 2000 रु. किया जाए. 7वां वेतन आयोग एक जनवरी 2016 से लागू हो.
अब देखना होगा कि सरकार देश के जवानों को कितना महत्व देती है? जो जवान देश की सुरक्षा के लिए दिन रात एक कर देते हैं, क्या सरकार उनकी मांगों को पूरा करेगी?
दीपावली पर बाजारों में रौनक
नागपुर। दीपावली से एक दिन पहले धनतेरस पर्व को स्वर्ण आभूषण और पीली धातु खरीदी के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन खरीदी करने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि प्रतिवर्ष धनतेरस पर बाजारों में भीड़ उमड़ पड़ती है. नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद इस साल भी बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है. शहर के इतवारी, बर्डी, गोकुलपेठ, कमाल चौक आदि स्थानों पर सर्राफा, इलेक्ट्रानिक्स, वाहन, बर्तन, कपड़ा आदि बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है. केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में सर्राफा व्यवसाय को कुछ राहत दी गई है, जिससे व्यापारियों और खरीदारों में हर्ष है.
सर्राफा व्यापारी पुरुषोत्तम कावले ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से बाजार में ग्राहकी बढ़ी है. लोग धनतेरस के लिए ज्वेलरी की बुकिंग कर रहे हैं. समय पर होनेवाली भीड़ से बचने के लिए पहले ही बुकिंग की जा रही है. वहीं कपड़ा व्यापारियों में कुछ खास खुशी नहीं है. कपड़ा व्यापारी राजेश झाम के अनुसार, पिछले 2 दिन से बाजार में अच्छी ग्राहकी दिख रही है.
विदित हो कि जीएसटी लगने के बाद से बाजारों में सुस्ती सी छाई थी. गत 3-4 दिन से बाजारों में रौनक लौटी है. सोने की खपत बढ़ते ही इसके दाम बढ़ रहे हैं. सोने के दाम में और बढ़त आने की संभावना व्यापारियों द्वारा व्यक्त की जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में मजबूती देखी गई. सोना हाजिर 1.15 डॉलर चमककर 1,304.75 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. दिसंबर का अमेरिकी सोना वायदा 2.2 डॉलर की बढ़त में 1,306.80 डॉलर प्रति औंस बोला गया. सोना हुआ 31 हजारी
धनतेरस से पहले सोमवार को सोना 31 हजार रुपए प्रति ग्राम के आंकड़े को पार कर गया. शनिवार के मुकाबले सोने के दाम में 120 रुपए की बढ़त रही. सोना 31,100 रुपए प्रति 10 ग्राम बिका, वहीं चांदी 100 रुपए प्रति किलो की बढ़त के साथ 41930 रुपए बिकी.
शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा को दी आत्ममंथन करने की नसीहत
नई दिल्ली। भाजपा नेता और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पंजाब में गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. इस हार पर पार्टी की किरकिरी के बीच उन्होंने कहा है कि जैसी उम्मीद थी पार्टी को दो लाख वोटों से अपमानजनक हार मिली है.
एक के बाद एक ट्वीट करते हुए लिखा है कि पार्टी और इससे जुड़े लोगों के लिए मेरा प्यार हमेशा है, मैं प्रशंसा करता हूं. मेरा अवलोकन और फीडबैक पार्टी के आत्मनिरीक्षण के लिए है. उन्होंने कहा कि हम अपनी हार स्वीकार करते हैं और मैं सुनील जाखड़ को बड़ी जीत पर बधाई देता हूं.
As expected, we suffered a humiliating defeat in the Gurdaspur bye-election by a massive margin of almost 2 lakh votes. They say that…1>2
— Shatrughan Sinha (@ShatruganSinha) October 16, 2017
पार्टी को आइना देखने की जरूरत बताते हुए सिन्हा ने कहा है कि उसे दीवार पर लिखी साफ इबारत को पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए नहीं तो जनता के मूड का आंकलन करने में नाकामयाबी की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. ट्वीट में उन्होंने कहा कि इसकी उम्मीद पहले से ही थी क्योंकि स्वर्गीय विनोद खन्ना के किसी करीबी को टिकट नहीं दिया गया.
11 अक्टूबर को गुरदासपुर में लोक सभा की सीट पर उपचुनाव हुआ था, जहां कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने भाजपा के स्वर्ण सिंह सलारिया को 2 लाख वोटों से हरा दिया था. वहीं इतनी अपमानजनक हार की किसी को उम्मीद भी नहीं थी. सिन्हा ने ट्वीट कर पार्टी को आत्ममंथन करने की सलाह दी है.
..this defeat was expected because of ticket not being given to people connected with the very popular& loved, late&great Vinod Khanna.. 2>3
— Shatrughan Sinha (@ShatruganSinha) October 16, 2017
सिन्हा इससे पहले भी अपने बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं और कई बार पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं. हाल ही में पटना यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया लेकिन खुद कार्यक्रम में नहीं पहुंचे क्योंकि उनके अनुसार उन्हें शनिवार के कार्यक्रम के लिए शुक्रवार की सुबह 10 बजे न्योता मिला था. उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा द्वारा मोदी की आर्थिक नीतियों की आलोचना किए जाने का भी समर्थन किया है.
डरपोक नीतीश को साथ जन्मों तक नहीं करूंगा माफः लालू यादव
पटना। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री को डरपोक बताया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि वह अगले सात जन्मों में भी नीतीश कुमार को माफ नहीं करेंगे.
लालू ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उनके यहां अब नीतीश कुमार को दोबारा एंट्री नहीं मिलेगी. रविवार को पटना के एक कार्यक्रम में नीतीश ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साहसी और कड़े क़दम उठाने वाले व्यक्ति हैं. इस पर लालू ने कहा कि सृजन घोटाले के डर से नीतीश कुमार अब पीएम मोदी और भाजपा की माला जप रहे हैं. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार बहुत बड़े डरपोक व्यक्ति हैं.
पटना लौटने के बाद लालू यादव पहली बार संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उनका नीतीश के प्रति ग़ुस्से का कारण है कि दो बार उन्होंने राज तिलक लगाया, लेकिन उसके बावजूद नीतीश भाजपा के साथ चले गए, हालांकि लालू का मानना है कि भाजपा नीतीश का इस्तेमाल कर रही है.
रविवार का दिन और हजामत। ये तथाकथित बनावटी चाय वाले की नहीं दूध वाले की निखालस शुद्ध देसी शैली है। एकदम ओरिजनल pic.twitter.com/QvvNhskKV2
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) October 15, 2017
इससे पहले लालू ने रविवार को सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि रविवार का दिन और हजामत, ये तथाकथित बनावटी चाय वाले की नहीं, दूध वाले की निखालस शुद्ध देसी शैली है…एकदम ओरिजिनल.
इस ट्वीट के जरिये लालू किस पर निशाना साध रहे ये ट्वीट देखकर साफ पता चलता है. लालू यादव सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहते हैं. अपनी हर बात वह एक ट्वीट के जरिये कह दते हैं. लालू यादव की हेयरस्टाइल और उनका देसी अंदाज ही उनको दूसरे नेताओं से अलग करता है. लालू यादव इसे बेहतर समझते हैं यही कारण है कि वह ट्वीट करते वक्त भी इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं.
सरकारी नौकरी के लिए रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप सरकारी नौकरी करना चाहते हैं और मेहनत भी कर रहे हैं, लेकिन नौकरी नहीं मिल रही हैं, तो परेशान होने की कोई बात नहीं है. कई बार आप खुद ही ऐसी गलती करते रहते हैं, जिसके बारे में आपको पता नहीं चलता और वो आपके करियर में रुकावट बनती है. ऐसी ही गलतियां लगातार होने से आप उसके आदि हो जाते हैं, लेकिन उस गलती को पहचानना आवश्यक है.
इंटरव्यू पर ध्यान दें- अधिकतर लोग लिखित परीक्षा में तो पास हो जाते हैं, लेकिन इंटरव्यू में पास नहीं हो पाते हैं. इसलिए हमेशा इंटरव्यू में अपने कॉन्फिडेंस, व्यक्तित्व का ध्यान रखते हुए हर बात का जवाब देना चाहिए. साथ ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप सही और सटीक जवाब दें. साथ ही कभी भी नौकरी की चाह में युवा अपने सीवी में बढ़ा चढ़ाकर लिखते हैं.
ज्यादा स्मार्ट ना बनें- कभी भी नौकरी के लिए आवेदन करते समय फर्जी सर्टिफिकेट , जॉनिंग लेटर और आपनी सैलरी स्लीप जो असली नहीं ऐसी चीज़े न केवल सामने आने पर आपकी छवि खराब करती है बल्कि अगर आपका बॉस नाराज होता है तो आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाई भी कर सकता है.
नौकरी के लिए अलर्ट- कई बार ऐसी भर्तियां होती है, जिसके लिए आप योग्य होते हैं और आपको पता नहीं रहता कब वो आपके हाथ से चली जाती है. इसलिए सभी नौकरियों पर ध्यान रखना आवश्यक है. इसके लिए जॉब्स वेबसाइट से लेकर अन्य वेबसाइट निरंतर पढ़ते रहें.
शेड्यूल बनाकर करें तैयारी- किसी भी परीक्षा में चाहे वो स्कूली परीक्षा हो या फिर नौकरी की परीक्षा, अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए टाइम टेबल या शेड्यूल बनाकर पढ़ना काफी फायदेमंद होता है. अगर आप अपना एक स्टडी टाइम टेबल बना लेते हैं और उसे हर रोज ध्यान में रखकर तैयारी करते हैं तो आपकी सफलता निश्चित है.
दिग्गज गोलकीपर हुडा की खेल के दौरान हुई मौत
एक मैच के दौरान अपनी टीम के साथी खिलाड़ी से टकराने के कारण इंडोनेशिया के दिग्गज गोलकीपर चोइरुल हु़डा की मौत हो गई। पार्सेला लामोनगन क्लब के लिए मैच के दौरान पहले हाफ में 38 वर्षीय गोलकीपर हुडा की अपनी टीम के साथी खिलाड़ी रामोन रोड्रिगेज से टक्कर हो गई थी।
पर्सेला लैमनगन और सेमेन पेडांग टीम के बीच चल रहे फुटबॉल मैच के फर्स्ट हाफ में ये दुखद घटना हुई. पर्सेला की टीम मैच में 1-0 से आगे चल रही थी. चोइरुल हुडा विपक्षी टीम का गोल बचाने के लिए आगे बढ़े, तब एक साथी खिलाड़ी से उनकी टक्कर हो गई. सिर पर गहरी चोट लगने के कारण वो जमीन पर गिर पड़े.
मेडिकल स्टाफ ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया. लेकिन, वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों ने फुटबॉलर के मौत की वजह सिर पर गहरी चोट बताई है. 38 साल के फुटबॉलर- गोलकीपर चोइरुल हुडा ने 1999 में अपना करियर शुरू किया था. पर्सेला टीम ने उनकी मौत पर शोक जाहिर किया है.
जन्मदिन विशेष- हेमा मालिनी से ड्रिम गर्ल बनने तक का सफर
बॉलीवुड की स्वप्न सुंदरी यानि ड्रीम गर्ल से हेमा मालिनी ने सफल राजनीतिज्ञ बनने तक का लंबा सफर तय किया है। 2003 से 2009 तक राज्यसभा में और 2014 से लोक सभा में भाजपा की सांसद के बारे शायद ही ऐसा कुछ हो जो सुपर स्टारडम को जीने वाली पहली एक्ट्रेस हेमा के बारे में उनके फैंस ना जानते हों। इसके बावजूद उनके जन्मदिन पर चलिए उनकी कहानी की कुछ खास बातें बताते फिर से दोहराते हैं।
करियर की शुरूआत में हेमा मालिनी को एक तमिल निर्देशक श्रीधर ने अपनी फिल्म में काम देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया था कि उनमें स्टार अपील नहीं है। हालांकि सत्तर के दशक में जब हेमा सुपर स्टार बन चुकी थीं श्रीधर ने उनकी लोकप्रियता को कैश कराने के लिए 1973 में फिल्म ‘गहरी चाल’ का निर्माण किया।
सालों तक संघर्ष करने बाद हेमा मालिनी को जिक्र के काबिल काम नहीं मिला था। इसके बाद 1968 उनके कैरियर का सुनहरा साल साबित हुआ जब उन्हें बॉलीवुड के शोमैन राजकपूर की फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ में पहली बार लीड रोल मिला। इसी फिल्म के प्रचार के दौरान हेमा को ड्रीम गर्ल के रूप में प्रमोट किया गया हालांकि फिल्म फ्लॉप हुई लेकिन अभिनेत्री के रूप में हेमा मालिनी को दर्शकों ने पसंद कर लिया।
तीन महीने में भाजपा की तीन बड़ी चुनावी हार से मोदी परेशान
नई दिल्ली। भाजपा सरकार भले ही देश की जनता को अच्छे दिनों का सपना दिखाकर अपना उल्लू सीधा कर रही हो. लेकिन पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग जगहों से भाजपा की हार की जो खबरें मिली है, उससे साफ जाहिर होता है कि देश की जनता हिंदुत्व के सपनों की हकीकत जान चुकी है. चाहे वो गुरदासपुर का उप चुनाव हो या फिर दिल्ली और इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव. इन सभी चुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. बीजेपी के लिए सबसे बुरी खबर गुरदासपुर लोकसभा उप-चुनाव से आई है. जहां से कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील जाखड़ ने भाजपा प्रत्याशी सवर्ण सिंह सलारिया को लगभग दो लाख मतों के अंतर से हरा दिया है. ये सीट पहले भाजपा के ही खाते में थी. भाजपा की इस हार में हार का अंतर शर्मनाक है.
वहीं यूपी में योगी सरकार बनने के बाद बीते रविवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में पांच में से चार सीटों पर भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी को हार का मुंह देखना पड़ा. यानि हिन्दुत्व का दम भरने वाली योगी सरकार की हकीकत से जनता अब वाकिफ हो चुकी है. जिस युवा वर्ग के भरोसे मोदी 2014 का चुनाव जीते थे, वही मोदी की उम्मीदों पर पानी फेरने को अमादा है. इधर केरल में भी भाजपा के लिए बुरी खबर है. हाल ही में केरल की वेंगाना सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था. लेकिन जीतना तो दूर की बात है. वोट का प्रतिशत भी पहले के मुकाबले कम हो गया. लगातार हो रही भाजपा की हार का असर इन दिनों सियासत में साफ देखा जा रहा है. क्योंकि चुनाव आयोग ने हिमाचल और गुजरात में एक साथ चुनाव कराने की घोषणा करने का फैसला किया था. लेकिन जिस तरह से गुजरात चुनाव की तारीख की घोषणा रोक दी गई है. इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा और मोदी डरे हुए हैं.

