जाति, लैंगिक, राजनीति और दलित मुक्ति का प्रश्न कोविंद बनाम कुमार

Ramnath Kovind

समाज और संस्थानों में भले ही दलितों का शोषण, भेदभाव और अत्याचार बदस्तूर जारी हो, लेकिन राजनीति में ‘दलित’ शब्द अब तक ब्रांड वैल्यू बनाए हुए है, इसका बाजार गर्म है. कम से कम इतना तो मानना पड़ेगा कि डॉक्टर आंबेडकर और संविधान द्वारा प्रदत्त राजनीतिक समानता अर्थात एक व्यक्ति और एक वोट के अधिकार ने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को विवश किया है कि सांकेतिक रूप से ही सही, लेकिन सदियों से उपेक्षित जमात को स्वीकार करें.

भारत में एक व्यक्ति बहुल अस्मिताओं के साथ जन्म लेता है, जिसमें सबसे प्रमुख जातिगत पहचान है. ‘जाति’ जन्मना है और ‘वर्ग’ कर्मणा. धर्म, क्षेत्र, राष्ट्रीयता, भाषा, वर्ग इत्यादि बदले जा सकते हैं, पर जाति नहीं. गर्भधारण से लेकर देहावसान तक जाति वजूद का हिस्सा बनी रहती है.

भारतीय लोकशाही की एक दिलचस्प त्रासदी है कि जब कोई ‘गैर-दलित’ किसी सार्वजनिक संस्था के लिए उम्मीदवार होता है या चुना जाता है तब उसकी जातीय पहचान की नहीं बल्कि उसके तथाकथित ‘गुणों’, अनुभवों और ‘काबिलियत’ की चर्चा होती है. लेकिन अगर कोई अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग से आए तो उसके समुदाय की चर्चा पहले होती है. इसके ऐतिहासिक कारण हैं. गैर-दलित के लिए यह उम्मीदवारी या अधिकार नैसर्गिक मान लिया जाता है, अर्थात यह उसका जन्मजात अधिकार है. ‘दलितों’ का यह अधिकार नहीं है, इसलिए खबर बन जाती है. वहीं दलित अस्मिता के शोर में जस्टिस कर्णन के मामले पर घोर चुप्पी बरती जाती है.

बहरहाल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया, जो अगले तीन दिन तक मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक चर्चा का विषय रहा. उसके बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना कर तुरुप का पत्ता खेला. कई मामलों में यह चुनाव दिलचस्प होने वाला है– विशेष रूप से जाति और लैंगिक प्रश्न को लेकर. जरा दोनों उम्मीदवारों के अनुभव और परिचय पर एक नजर डालें.

दोनों उम्मीदवार लगभग एक ही आयु वर्ग के हैं. मीरा कुमार स्वतंत्रता-सेनानी व भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं. राजनीति में आने से पहले मीरा कुमार कुछ सालों तक भारतीय विदेश सेवा में कार्य कर चुकी हैं. बिजनौर से पहली बार 1985 में सांसद बनीं, पांच बार सांसद रह चुकी हैं. इसके साथ उनके पास केंद्रीय मंत्री और लोकसभा स्पीकर होने का अनुभव भी है. पहली महिला और दूसरी दलित लोकसभा अध्यक्ष.

रामनाथ कोविंद उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. पेशे से वकील हैं, लोकसभा या विधानसभा में नहीं आए, 1994-2006 तक राज्यसभा के सांसद बेशक रहे हैं और अभी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर बिहार के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया है.

चूंकि इस चुनाव की उम्मीदवारी में दलित अस्मिता का खेल खेला जा रहा है, इसलिए जातिगत समीक्षा जरूरी लगती है. मीरा कुमार जाटव जाति से हैं, जो पूरे भारत में अनुसूचित वर्ग से संबद्ध हैं. रामनाथ कोविंद, कोरी/कोली जाति से हैं जो उत्तर प्रदेश से अनुसूचित जाति से संबद्ध हैं. कई प्रदेशों में उनकी जाति पिछड़े वर्ग से संबंधित है, जैसा कि गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघाणी बाकायदा पोस्टर निकाल कर यह प्रचार कर रहे हैं कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद इस समुदाय के एक प्रतिष्ठित नेता हैं.

बहरहाल, दोनों उम्मीदवारों में एक बात समान है, दोनों दलित आंदोलन या किसी भी प्रगतिशील आंदोलन की उपज नहीं हैं. एक को अगर विरासती कांग्रेसी दलित नेता कहा जा सकता है तो दूसरे को कागजी भाजपाई दलित नेता! लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि क्या राष्ट्रपति जैसे पद की उम्मीदवारी के लिए उम्मीदवार की घोषणा करते समय उसकी जातीय पहचान की घोषणा जरूरी थी? क्या किसी गैर-दलित की उम्मीदवारी के मामले में ऐसा कभी हुआ? फिर, 19 जून 2017 को कोविंद की उम्मीदवारी की घोषणा करते समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को क्यों कहना पड़ा कि रामनाथ कोविंद दलित समाज से उठकर आए हैं और उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए बहुत काम किया है.

शाह सत्ताधारी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं इसलिए उनकी यह घोषणा कहीं रोहित वेमुला, उना, और सहारनपुर की घटनाओं से उपजे दलित आक्रोश, जिसकी अभिव्यक्ति 21 मई और 18 जून की जंतर मंतर की ऐतिहासिक और अप्रत्याशित रैली में देखी गई, के प्रति हताशा का परिणाम तो नहीं? क्या कोविंद, सरकार और भाजपा के विरुद्ध उभरे दलित आक्रोश को शांत करने की रणनीति के प्रतीक स्वरूप पेश किए गए? जाहिर है इन घटनाओं के अलावा अबाध निजीकरण और आरक्षण जैसे संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना से दलित वर्ग आक्रोशित तो है ही. इन मुद्दों पर दलित नेताओं की चुप्पी ने पूना पैक्ट की याद ताजा कर दी है.

अब प्रश्न है कि क्या किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री बनना दलितमुक्ति का पर्याय है? क्या इससे दलितों के सम्मान, सुरक्षा, रोजगार, अधिकार की समस्या हल हो जाएगी? यदि नहीं तो जाहिर है इस तरह किसी व्यक्ति की जाति को प्राथमिकता देकर उम्मीदवार बनाने का महत्त्व सिर्फ श्रृंगारिक ही है. व्यक्तिगत मुक्ति संभव है, लेकिन जमात की मुक्ति नहीं. इस परंपरा की जड़ें भारतीय इतिहास में देखी जा सकती है– ‘शूद्र’ के राजा बनने के बाद ‘पुरोहित’ घोषणा करता है. अब आप शूद्र नहीं क्षत्रिय हुए और आपका धर्म है वर्णाश्रम धर्म की रक्षा. नंद, मौर्य से लेकर शिवाजी तक में इस परंपरा के साक्ष्य देख सकते हैं. यह अकारण नहीं था कि शिवाजी को काशी के ब्राह्मण के बाएं पैर के अंगूठे से राजतिलक कराना पड़ा था.

लोकशाही की मर्यादा है, किसी न किसी को तो चुनना है. मायावती ने वादे के अनुसार मीरा कुमार के समर्थन में घोषणा कर दी है. बिहार के दलित नेता रामविलास पासवान ने घोषणा की थी कि कोविंद का विरोध दलित का विरोध समझा जाएगा, अब उन्हें बताना होगा कि क्या मीरा कुमार का विरोध दलित महिला का विरोध होगा या नहीं? बिहार में महिला ‘सशक्तीकरण’ के प्रतीक और महादलितों के ‘शुभचिंतक’, कांग्रेस के गठबंधन में चुनाव जीतने और सरकार चलाने वाले नीतीश कुमार के राजनीतिक व्याकरण में राजेंद्र प्रसाद के बाद बिहार से दूसरी राष्ट्रपति उम्मीदवार जगजीवन बाबू की बेटी ‘महादलित’ महिला मीरा कुमार कहां फिट बैठती हैं? महिला आरक्षण और सशक्तिकरण पर मुखर आवाज बुलंद करने वालीं सुषमा स्वराज जैसे नेताओं का निर्णय भी दिलचस्प होगा– पार्टी लाइन या महिला?

-डॉ. रतन लाल, लेखक हिंदू कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के इतिहास विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. जनसत्ता से साभार प्रकाशित

जातिवादी गुंडों ने दलित परिवार पर किया हमला, दिव्यांग बेटे को जमकर पीटा

crime against dalit

शामली। सदर कोतवाली के शांति नगर मोहल्ले में भाजपा नेता के करीबी गुंडों ने अपने आधा दर्जन साथियों के साथ मिलकर दलित परिवार पर हमला कर दिया. हमले में एक महिला सहित कई लोग घायल हो गए. जिसमें एक युवक की हालत नाजुक बनी हुई है.

पीड़ित दलित परिवार ने जब पुलिस से शिकायत की तो पुलिस आनाकानी करने लगी. पुलिस मामले में कार्रवाई करने के बजाए गुंडों की हिमायत करती नजर आई. इतना ही नहीं पीड़ित दलित परिवार और घायलों को पुलिस कोतवाली में ही बैठाए रखा. घायल लोग कोतवाली में ही तड़पते रहे.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शांति नगर में एक दलित विकलांग युवक की हस्थचलित रिक्शा घर के बाहर खड़ा था. रिक्शा वहां खड़ा देख जातिवादी गुंडा विफर पड़ा और विकलांग युवक की पिटाई शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद दोबारा से जातिवादी गुंडे ने अपने आधा दर्जन अन्य साथियों के साथ मिलकर दलित परिवार पर हमला कर दिया. लोगों के हमले से एक महिला सहित कई लोग घायल हो गए. आरोप है कि जातिवादी गुंडा भाजपा नेता का करीबी है. जिससे वह लगातार मोहल्ले में लोगों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम देता रहता है.

कोतवाली में शिकायत करने पहुंचे पीड़ित दलित परिवार को पुलिस वहीं बैठा लिया. आरोप है कि गंभीर रूप से घायल युवक को न तो पुलिस ने घर भेजा और ना ही इलाज के लिए अस्पताल. उल्टा पुलिस गुंडों की हिमायत करते हुए पीड़ित परिवार को ही धमकाना शुरू कर दिया.

पीड़ित महिला का आरोप हें कि जातिवादी गुंडें उन्हें जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल करते हुए घर छोड़ने की धमकी दी है. महिला ने बताया कि जातिवादी गुंडें कहते हैं कि यह दूसरी जाति का मोहल्ला है यहां से तुम लोग चले जाओ नहीं तो जान से मार दिए जाओगे.

गुजरात में भाजपा की करारी हार

अहमदाबाद. भारतीय जनता पार्टी के किले में इस बार बड़ी सेंध लगी है. भाजपा को  अपने ही घर में ही करारी हार का सामना पड़ा है. कुल 13 सीटों में 10 सीटों पर भाजपा को करारी हार मिली है.कल 3 जुलाई को गुजरात के दीव नगर पालिका परिषद चुनाव के परिणाम आए हैं. यहां कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 13 में से 10 सीटें प्राप्त की हैं. इस चुनाव में भाजपा कीरट वाजा के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही थी, लेकिन वो अपनी ही सीट खुद नहीं बचा पाये.

 चुनाव परिणाम आने के कुछ देर बाद ही कीरट ने अपने पार्टी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कीरट को कांग्रेस उम्मीदवार ने 17 मतों से हराया. कीरट के नेतृत्व में भाजपा ने बडी जीत की कामना की थी और फिर से 14 साल बाद इस नगर पालिका परिषद पर अपना कब्जा जमाना चाहती थी.

इस चुनाव में फिलहाल के नगरनिगम के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता हितेश सोलंकी ने भी जीत दर्ज की है. उन्होंने भाजपा के जीतेंद्र भारया को 598 मतों से हराया. दीव नगर निगम पर बीते दस सालों से कांग्रेस का राज है. बीते शनिवार इस चुनाव का प्रतिशत 72.70 रहा था. इस चुनाव से जाहिर है की बीजेपी का किला दरकना शुरू हो रहा है, जिसका असर अक्टूबर- नवम्बर में होने जा रहे उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में दिख सकता है.

दलित-उत्पीड़नः यूपी पुलिस ने 31 दलित कार्यकर्ताओं को किया गिरफ्तार

dalit activists arrested

लखनऊ। यूपी पुलिस ने बीते सोमवार को लखनऊ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे कई दलित कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया. पुलिस ने कहा कि उन्होंने इन कार्यकर्ताओं को इसलिए गिरफ्तार किया, क्योंकि उन्होंने प्रेस वार्ता के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास तक मार्च करने की योजना बनाई थी, जिसकी उन्हें इजाजत नहीं मिली हुई थी.

गिरफ्तार किए गए दलित कार्यकर्ताओं में शामिल रमेश दीक्षित, राम कुमार और रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट एसआर दारापुरी ने बताया कि उन्होंने ‘दलितों के उत्पीड़न’ पर चर्चा के वास्ते प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. दारापुरी ने कहा कि झांसी में रविवार को करीब 50 दलितों को लखनऊ आने से रोक दिया गया. ये लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना चाहते थे और उन्हें एक विशाल साबुन की टिकिया भेंट करना चाहते थे. यह समूह गुजरात के अहमदाबाद से आ रहा था और वे अपने साथ 125 किलो के साबुन की टिकिया यूपी के सीएम को देना चाहते थे.

dalit activists arrested

गौरतलब है कि मई महीने में यूपी के कुशीनगर जिले के अनुसूचित जाति के लोगों ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले स्थानीय प्रशासन ने उन्हें साबुन और शैंपू दिए थे. राज्य के सबसे गरीब समझे जाने मुसहर तबके के लोगों ने कहा था कि कुशीनगर में योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम से पहले उनसे स्थानीय प्रशासन ने अच्छे ढंग से नहा-धोकर आने को कहा था.

गुजरात के दलित समुदाय के लोगों ने कहा कि वह इस मामले को लेकर सांकेतिक विरोध के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निजी तौर पर साबुन भेंट करना चाहते थे. पुलिस ने बिना कोई कारण बताए उन लोगों से झांसी में ट्रेन से उतरने को कहा. हालांकि जिन लोगों को ट्रेन से उतारा गया, उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से उन्हें ट्रेन से उतरने को कहा गया. इन लोगों को एक स्थानीय गेस्ट हाउस में ले जाया गया और बाद में ट्रेन से वापस अहमदाबाद भेज दिया गया.

GST: सदर और चावड़ी बाजार में 90% बिजनेस ठप

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नई दिल्ली। GST के लागू होते ही बाजारों में इसका गहरा प्रभाव दिखना शुरू हो गया है. दिल्ली के चावड़ी बाजार, सदर और चांदनी चौक मार्केट से इन दिनों बाहरी खरीदार बिल्कुल गायब हैं.  इससे स्थानीय कारोबारियों की परेशानी बढ़ गयी हैं. कारोबारियों का कहना है कि मार्केट में रिटेल का ग्राहक तो है, लेकिन थोक बाजार में ग्राहक नहीं आ रहे हैं. दूसरी तरफ कच्‍चे बिल की वजह से कस्‍टमर को अभी तक कम रेट चुकाने के रूप में जो लाभ मिल था, उस पर भी काफी हद तक लगाम लग गई है. भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी विजय प्रकाश बताते हैं की दिल्ली के थोक बाजारों में 90 फीसदी कारोबार ठप है. माल का कोई खरीदार नहीं है. जीएसटी की जटिलता के कारण ट्रांसपोर्टर्स भी माल नहीं बुक रहे हैं.  उनका कहना है कि जीएसटी इतना आसान नहीं है जितना बताया गया था. हमसे कहा गया था कि नई टैक्स व्यवस्था पारदर्शी और आसान होगी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया जटिल हो गई है. उन्होंने बताया कि कपड़ा कारोबारियों ने तो अभी तक GST रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया है. दिल्ली में करीब 5 लाख छोटे-बड़े कारोबारी हैं और यहां रोजाना का 1,500 करोड़ रुपये का बिजनेस होता है.

चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी संजय भार्गव के मुताबिक  थोक मार्केट में सन्नाटा है. कस्टमर बिल्कुल नहीं हैं. भार्गव का कहना है कि कारोबारियों को जीएसटी के ढांच को समझने में दिक्कत हो रही है.यह नया नियम पूरे भारत पर भारी पड़ रहा है जिसका नुकसान व्यापारियों के साथ-साथ आम जनता को भी हो रहा है.

मान्यवर कांशीराम के पदचिन्हों और आदर्शों पर चलें बहुजन छात्रः दद्दू प्रसाद

Mau confrence

मऊ। डॉ. भीमराव अम्बेडकर युवा कल्याण समिति के द्वारा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर युवा छात्र सम्मेलन एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया. यह आयोजन रविवार दो जुलाई को मऊ नगर पालिका कम्यूनिटी हॉल में सुबह 10 बजे से शुरू हुआ. सम्मेलन एवं संगोष्ठी का विषय ‘वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका’ था. जिसमें वक्ताओं ने अपने अपने विचार रखें.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री माननीय दद्दू प्रसाद जी ने कहा कि आज के परिवेश में युवाओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. ऐसे में उन्हें दिशा-निर्देश के साथ जागरूक कर कर्तव्यों के प्रति सचेत करने की आवश्यकता है. हर क्षेत्र में युवाओं को बढ़-चढ़ कर अपनी हिस्सेदारी लेनी चाहिए. युवाओं को बाबा साहेब अम्बेडकर और मान्यवर कांशीराम के पदचिन्हों और आदर्शों पर चलकर विकास की ओर चलने की बात कही.

विशिष्ट अतिथि एमपी अहिरवार समेत कई अन्य वक्ताओं ने भाग लिया. इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में समता सैनिक दल के अध्यक्ष बी.डी. सुजात और वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसर अपना वक्तव्य दिया. कार्यक्रम के संयोजक प्रवीण कुमार एडवोकेट ने ही मंच का संचालन किया.

संयोजक प्रवीण कुमार एडवोकेट ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन देश के विभिन्न शहरो के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में आयोजित कराए जाएंगे. बहुजन समाज के छात्रों की ये पहल राष्ट्रीय स्तर पर बहुजन छात्रों को सशक्त करना है. इसमें बहुजन छात्रों के राजनितिक सूझ-बुझ व रणनीति के साथ ही भविष्य की योजनाओं पर मंथन कर आगे की दिशा और दशा तय की जायेगी.

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पूर्व ब्लॉक प्रमुख शिवदेनी उर्फ साधू ने कहा कि आज युवाओं में अम्बेडकरवाद पैदा करने की जरूरत है तभी बाबा साहब के सपनो का भारत बनेगा. अख़्तर अली ने युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत और बौद्धिक क्रांति के लिए प्रेरित किया. कुनाल किशोर ने राष्ट्रीय बहुजन युवा संगठन बनाने पर बल दिया. रामकन निर्मल ने दलित समाज के युवाओं पर होने वाले शोषण पर चिंता जाहिर की.

डॉ. संजय सुमन ने युवाओं को शिक्षा पर जोर देने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट प्रवीण कुमार ने किया. इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से अजीत कुमार, सुधीर कुमार चंचल, अश्विनी चौधरी, अभिनव रंजन, राजकुमार, योगेन्द्र. रामअवतार, अनिल, मोहन, मानवेंद्र, विश्राम, राजेश, मुन्ना आदि छात्र मौजूद रहे.

दिल्ली के 5 लाख SC/ST और अल्पसंख्यक छात्रों को नहीं मिली स्कॉलरशिप

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नई दिल्ली। गूगल हैंगआउट के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल को कुछ छात्रों ने स्कॉलरशिप ना मिलने की शिकायत की तो सरकार हरकत में आ गई. सरकार ने सारी फाइलों की जांच करवाई जिससे एक बड़ा खुलासा सामने आया. शिकायत में बताया गया कि छात्रों को 16 महीने से स्कॉलरशिप का इंतजार है और केंद्र व दिल्ली सरकार की अलग-अलग स्कीम के तहत 5 लाख से ज्यादा स्कॉलरशिप अभी तक नहीं दी गई है.

रिपोर्ट सामने आने के बाद केजरीवाल ने चीफ सेक्रेटरी को आदेश दिया है कि 15 जुलाई तक हर हाल में करीब 5.57 लाख स्कॉलरशिप जारी कर दी जाए और चाहे इसके लिए रात- दिन काम क्यों न करना पड़े. साथ ही सीएम ने निर्देश दिया है कि रिपोर्ट में जिन अधिकारियों की लापरवाही की बात सामने आई है, उनसे जवाब मांगा जाए. रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीएम ने चीफ सेक्रेटरी को लिखा है कि स्कॉलरशिप को लेकर फाइलें पूरे साल किसी मंत्री के सामने पेश नहीं की गई और किसी मंत्री के सामने इस मामले को नहीं रखा गया. संबंधित विभाग के अफसरों ने दिल्ली सरकार को पूरी तरह से अंधेरे में रखा और इस मामले की जांच होनी चाहिए कि ऐसा कहीं जानबूझकर तो नहीं किया गया.

शिकायत मिलने के बाद सीएम केजरीवाल ने डिपार्टमेंट ऑफ एससी, एसटी, ओबीसी, माइनोरिटीज से रिपोर्ट मांगी और डिपार्टमेंट की रिपोर्ट को जांच करने की जिम्मेदारी डॉयलॉग एंड डेवेलपमेंट कमिशन (DDC) को दी. DDC ने स्कॉलरशिप से जुड़ी 34 फाइलों की जांच की, जिसका जिक्र सीएम ने अपने आदेश में भी किया है. सीएम ने लिखा है कि गरीब छात्रों को लंबे समय तक स्कॉलरशिप नहीं दी गई है और वे समझ सकते हैं कि अगर 15 दिन तक भी स्कॉलरशिप मिलने में देर हो जाए तो कितनी मुश्किल होती है. सीएम ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल करते हुए पूरे मामले की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए हैं.

डीडीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केंद्र सरकार द्वारा 7 और दिल्ली सरकार द्वारा 5 स्कॉलरशिप स्कीम को स्पांसर किया जाता है. एससी, एसटी, ओबीसी और माइनोरिटीज स्टूडेंट को इन स्कीमों का फायदा मिलता है. स्कूल और कॉलेज जाने वाले गरीब स्टूडेंट (प्राइवेट व गवर्नमेंट स्कूल) इस स्कॉलरशिप के जरिए अपनी पढ़ाई को आगे जारी रखते हैं. लेकिन सामने आया है कि दिल्ली सरकार की 2015-16 की स्कॉलरशिप जो मार्च 2016 तक मिल जानी चाहिए थी, वह अभी तक नहीं मिल सकी है. इसी तरह से 2016-17 की स्कॉलरशिप मार्च 2017 तक मिलनी चाहिए थी, वह भी छात्रों को नहीं मिल पाई है. डीडीसी ने रिपोर्ट में कहा है कि यह अफसरों की घोर लापरवाही है और ये फाइलें कभी भी सीएम या दूसरे मंत्रियों के सामने नहीं रखी गई. रिपोर्ट में बताया गया है कि 12 में से 2 केंद्र और 5 दिल्ली सरकार की स्कीम के तहत 77 हजार 745 एससी, एसटी, ओबीसी, माइनोरिटी कम्यूनिटी के छात्रों को स्कॉलरशिप का इंतजार है.

केंद्र सरकार की स्कीम के लिए दिल्ली सरकार ने कैंडिडेट्स से ऐप्लीकेशन मांगे और 30 नवंबर 2016 तक 66882 ऐप्लीकेशन आए. केंद्र के निर्देशों के मुताबिक 20 मार्च 2017 तक सभी कैंडिडेट्स का वेरिफिकेशन होना था. डिपार्टमेंट को ज्यादा समय दिए जाने के बाद भी 23 मार्च तक 293 कैंडिडेट्स का ही वेरिफिकेशन किया गया. डीडीसी ने रिपोर्ट में कहा है कि यह दिखाता है कि दिल्ली सरकार के अफसरों ने इस स्कीम को लेकर कितनी लापरवाही बरती है. इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से जो भी दिशा- निर्देश मिल रहे थे, उससे जुड़ी फाइलों को सीएम, डिप्टी सीएम या किसी मंत्री के पास नहीं भेजा गया.

कॉमेडी शो के जज बनकर आ रहे हैं अक्षय कुमार

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मुंबई। अक्षय कुमार अब एकदम नई जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं. वे जल्द ही टीवी पर एक कॉमेडी बेस्ड रिएलिटी शो को जज करते हुए नजर आने वाले हैं. जल्द शुरू हो रहे ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ को अक्षय जज करने वाले हैं. इससे पहले वे जज बने हैं लेकिन कुकिंग और ब्रेवरी शो के. उन्होंने टीवी पर ‘खतरों के खिलाड़ी’ और ‘मास्टरशेफ इंडिया’ को जज किया है.

अब वे सुपर जज बनकर पहली बार किसी कॉमेडी शो पर आएंगे. यह इस शो का पांचवा सीजन है. यह शो 2005 में स्टार प्लस पर शुरू हुआ था. इसी शो ने सुनील पाल, कपिल शर्मा और एहसान कुरैशी जैसे बड़े कॉमेडियन इस इंडस्ट्री को दिए हैं.

हाल ही में अक्की ने इस बारें में अपने इंस्टाग्राम पर भी बात की है. वैसे फिल्मों के लिहाज से अक्षय कुमार काफी व्यस्त हैं. उन्होंने हाल ही में ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ की शूटिंग पूरी की है. अब वे इसके प्रचार में व्यस्त हो जाएंगे क्योंकि इसे 11 अगस्त को रिलीज किया जाना है.

इसके अलावा उन्होंने एक और नई फिल्म ‘गोल्ड’ की शूटिंग भी शुरू कर दी है. इस फिल्म को रीमा कागती निर्देशित करने वाली हैं. फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी इसे प्रोड्यूस कर रहे हैं.

खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

GST: साबुन, डिटर्जेंट और टू-व्हीलर हुए सस्ते

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नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनीलिवर (एचयूएल) ने अपने कुछ डिटर्जेंट और साबुन के दामों को कम कर दिया है. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत टैक्स में मिले लाभ को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है. यही कारण बताकर देश की सबसे बड़ी दोपहिया निर्माता कंपनी हीरो मोटो कॉर्प ने भी बाइक, स्कूटरों के दामों में 1800 रुपये तक की कटौती की है.

कंपनी ने 250 ग्राम के डिटर्जेट साबुन रिन बार की कीमत 18 रुपये से घटाकर 15 रुपये कर दी है. दस रुपये की कीमत वाली सर्फ एक्सेल की बट्टी के वजन (ग्राम) को 95 ग्राम से बढ़ाकर 105 ग्राम कर दिया है. नहाने के साबुन डव पर भी 33 फीसद ज्यादा की पेशकश की है. कंपनी ने बताया है कि अन्य उत्पादों की कीमतों में बदलाव को भी जल्द बताया जाएगा.

कंपनी के होम केयर ब्रांडों में व्हील, रिन, सर्फ एक्सेल, कम्फर्ट, सनलाइट, विम, होमेक्स इत्यादि शामिल हैं. जबकि पर्सनल केयर में लक्स, लिरिल, हमाम, सनसिल्क, रेक्सोना, लाइफबॉय, डव, पियर्स आदि जैसे ब्रांड हैं. जीएसटी काउंसिल ने साबुन, हेयर ऑयल, डिटजेर्ंट पाउडर, साबुन, टिशू पेपर और नैपकिन जैसे दैनिक उपयोग के सामान को 18 फीसद के टैक्स स्लैब में रखा है.

हीरो मोटोकॉर्प ने भी दिया लाभ: हीरो मोटोकॉर्प ने भी अलग-अलग मॉडलों पर 400 रुपये से लेकर 1,800 रुपये तक की कटौती की है. फिलहाल वास्तविक लाभ अलग-अलग राज्यों में भिन्न होगा, जो जीएसटी से पहले और बाद की दरों पर निर्भर करेगा. कुछ प्रीमियम मॉडलों पर 4,000 रुपये तक की छूट भी है. कंपनी 40 हजार से 1.1 लाख रुपये की रेंज में बाइकों की बिक्री करती है.

एयरलाइंस को देनी होगी जानकारी: नई कर व्यवस्था के तहत लाभ प्राप्त करने लिए कर्मचारियों के टिकट खरीदने वाले बिजनेस हाउसों को जीएसटी पंजीकरण के बारे में एयरलाइंस को जानकारी प्रदान करनी होगी. एक जुलाई से प्रभावी हुआ जीएसटी एयर टिकट पर कुछ इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रदान करता है.

पाठ्यपुस्तकों में नहीं होने चाहिए जाति आधारित संघर्ष के विषयःICSSR प्रमुख

braj bihari kumar

नई दिल्ली। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के प्रमुख ब्रज बिहारी कुमार के अनुसार वर्तमान समय में पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य कार्यकर्ता तैयार करना हो गया है, शिक्षित विद्यार्थी नहीं. उन्होंने कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम दंगे और जाति आधारित संघर्ष जैसे विषयों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध करने वाले प्रमुख संस्थान का कार्यभार संभालने वाले मानवविज्ञानी कुमार का मानना है कि जवाहरलाल नेहरू जैसे विश्वविद्यालय कार्यकर्ताओं को पोषित-पल्लवित करने का स्थान बनते जा रहे हैं. 76 वर्षीय कुमार का यह भी मानना है कि जाति आधारित संघर्ष और देश में असहिष्णुता जैसे विषय सतही हैं और इन्हें भारतीय समाज के प्रतिबिंब के तौर पर नहीं देखा जा सकता.

उन्होंने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा,‘पाठ्यपुस्तकें छात्रों को कार्यकर्ता (एक्टिविस्ट) बनाने के लिए नहीं बल्कि उन्हें शिक्षित करने के लिए होती हैं. दुर्भाग्य से आज पुस्तकें एक एजेंडा के साथ तैयार की जाती हैं और पाठ्यक्रमों में बदलाव जरूरी हो गया है.छात्रों की सोच और उनके विकास में हिंदू-मुस्लिम दंगे और जाति आधारित टकराव जैसे विषय नहीं होने चाहिए.’

कुमार ने कहा,‘आज पाठ्यपुस्तकें बुरी स्थिति में हैं. मैंने सामाजिक विज्ञान की किताब में एक नक्शा देखा जिसमें जम्मू कश्मीर को भारत के बाहर दिखाया गया, वहीं एक और नक्शे में पूर्वोत्तर को भारत में नहीं दिखाया गया. हमारी पाठ्यपुस्तकों में कई खामियां हैं.’उन्होंने बताया,‘मैंने इस मुद्दे को रेखांकित करते हुए पूर्व एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी को दो पत्र भी लिखे थे लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला.

उन्होंने जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों पर निशाना साधते हुए कहा,‘जब छत्तीसगढ़ में एक ही परिवार के कई लोगों का सामूहिक संहार कर दिया जाता है और जेएनयू में उल्लास मनाया जाता है और हत्यारों के समर्थन में मार्च निकाला जाता है, तो इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता कि यह किस तरह का विश्वविद्यालय है.’

कुमार ने जेएनयू के संदर्भ में कहा कि वे खुद को सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक दिखाते हैं लेकिन जब वे राष्ट्रीयता की भावनाओं को आहत कर रहे हैं और शिक्षा का नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं को तैयार करने का स्थान बनते जा रहे हैं तो वे उत्कृष्ट होने का दावा नहीं कर सकते. करदाता इसलिए अपना पैसा नहीं देते कि कार्यकर्ता तैयार किये जाएं.

 

मुसलमानों के खिलाफ नियम बनाने वाली संस्था है संसदः औवेसी

नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर से अपने भड़काऊ बयान से देश की विधायिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है.

अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि आज मुल्क के सेकुलर लोग कहां हैं. अखलाक को मारा गया, नोमान को मारा गया, जुनैद को मारा गया…टोपी पहनना गुनाह है क्या? मुसलमान होना गुनाह है क्या? ओ विश्व हिंदू परिषद वालों, आरएसएस वालों, नरेंद्र मोदी सुन लो ये मुल्क किसी एक का नहीं. ये जितना तेरा है, मुल्क मेरा भी है. अगर हिंदू तिलक लगाकर घूम सकता है, तो मुसलमान भी टोपी पहन सकता है.

अकबरुद्दीन ओवैसी यहीं नहीं रुके. उन्होंने देश की विधायिका पर मुसलमानों के खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों की बर्बादी के कानून किसी चौक-चौराहे पर नहीं बल्कि संसद, विधानसभा जैसे सदनों में बनते हैं.

हो सकता है चीन-भारत युद्धः चाइनीज थिंकटैंक

China India conflict बीजिंग। सिक्किम सेक्टर में सीमा विवाद के चलते भारत और चीन के मध्य हो रही तनातनी के बीच चीनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बीजिंग पूरी प्रतिबद्धता से अपनी सम्प्रभुता की रक्षा करेगा, फिर चाहे उसे युद्ध ही क्यों न करना पड़े. चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि हालात नहीं सुधरे तो दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो सकता है. डोका ला क्षेत्र में तीसरे सप्ताह भी गतिरोध जारी रहने के बीच चीन की सरकारी मीडिया और थिंकटैंक्स ने कहा, “यदि भारत और चीन के बीच विवाद को उचित ढंग से सुलझाया नहीं गया तो युद्ध संभव है.” दोनों देशों के बीच यह सबसे लंबा तनाव है. जम्मू-कश्मीर से लेकर अरणाचल प्रदेश तक चीन के साथ जुड़ी भारत की 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा का 220 किलोमीटर हिस्सा सिक्किम सेक्टर में ही पड़ता है. ‘शंघाई म्युनिसिपल सेन्टर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज’ में प्रोफेसर वांग देहुआ ने कहा, “चीन भी 1962 से बहुत अलग है.” वे रक्षा मंत्री अरुण जेटली के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2017 का भारत 1962 से बहुत अलग है. जेटली ने कहा था, “यदि वे हमें याद दिलाना चाहते हैं तो 1962 के हालात अलग थे और 2017 का भारत अलग है.” वांग का कहना है, “भारत 1962 से ही चीन को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता आ रहा है, क्योंकि दोनों देशों में कई समानताएं हैं. उदाहरण के लिए दोनों ही बहुत बड़ी जनसंख्या वाले विकासशील देश हैं.” ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, “यदि भारत और चीन के बीच हालिया विवाद उचित ढंग से नहीं सुलझाया गया तो जंग के हालात पैदा हो सकते हैं, यह कहते हुए पर्यवेक्षकों ने रेखांकित किया कि चीन किसी भी सूरत में अपनी सम्प्रभुता और सीमा की रक्षा करेगा.” अखबार का कहना है, “1962 में, चीन ने भारत के साथ जंग की थी, क्योंकि वह चीन की सीमा में घुस आया था. इसके परिणाम स्वरूप चीन के 722 और भारत के 4,383 सैनिक मारे गये थे.” इसने कहा कि विशेषज्ञों ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए विवाद का हल निकालने को कहा है. अखबार के अनुसार, शंघाई इंस्टिट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में सेन्टर फॉर एशिया-पैसिफिक स्टडीज के निदेशक जाओ गांचेंग ने कहा, “दोनों पक्षों को संघर्ष या युद्ध की जगह विकास पर ध्यान देना चाहिए.” उन्होंने कहा, “दोनों के बीच संघर्ष अन्य देशों को फायदा उठाने का अवसर दे सकता है, जैसे अमेरिका को.” वांग ने कहा, “भारत को चीन के प्रति अपना द्वेषपूर्ण रवैया छोड़ना चाहिए क्योंकि बेहतर संबंध दोनों पक्षों के लिए लाभप्रद हैं.” जाओ ने कहा, “भारत सीमावर्ती रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में चीन के साथ बराबरी करने की कोशिश कर रहा है.”

महिला को गर्भपात कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 26 सप्ताह की गर्भवती महिला को गर्भपात कराने की अनुमति आज यानि 3 जुलाई प्रदान कर दी क्योंकि उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण दिल की गंभीर बीमारी से ग्रस्त है. जज दीपक मिश्रा और जज ए. एम खान्विलकर की खंडपीठ ने कहा कि इस महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण का तत्काल चिकित्सीय प्रक्रिया से कोलकाता स्थित एसएसकेएम अस्पताल में समापन किया जाना चाहिए.

कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड और एसएसकेएम अस्पताल की रिपोर्ट के अवलोकन के बाद यह निर्देश दिया. रिपोर्ट में यह सलाह दी गयी थी कि गर्भ में पल रहे भ्रूण का समापन किया जाना चाहिए क्योंकि यदि गर्भावस्था जारी रखी गयी तो मां को गंभीर मानिसक आघात हो सकता है और बच्चे का यदि जन्म हुआ भी तो दिल की बीमारियों के लिये उसकी कई सर्जरी करनी पडे़गी.

पीठ ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मद्देनजर हम यह अनुरोध स्वीकार करते हैं और इस महिला के गर्भ का चिकित्सीय प्रक्रिया से समापन करने का निर्देश देते हैं. गर्भ में पल रहे बच्चे के गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होने की जानकारी मिलने के बाद इस महिला और उसके पति ने गर्भपात कराने की अनुमति के लिये उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था क्योंकि भ्रूण की विसंगति मां के लिये भी घातक हो सकती थी.

जातिवादी गुंडें नहीं उठने दे रहे थे दलित बेटी की बंदौली, लिया पुलिस का सहारा

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जयपुर। देश आजाद हुए 70 साल हो गए हैं लेकिन आज भी लोग आजाद नहीं है. लोग मानसिक गुलामी में जी रहे है. समाज में आज भी दलितों को घृणा की दृष्टि से देखा जा रहा है, ऐसा ही मामला खिंवाड़ा थाना क्षेत्र के गुड़ा दुर्जन गांव में सामने आया है.

दरअसल, गुड़ा दुर्जन गांव के निवासी ने पुलिस-प्रशासन को शिकायत की थी कि उनकी पुत्री की शादी 3 जुलाई को है. रविवार को पुत्री को घोड़ी पर बंदौली निकालने का गांव के कुछ जातिवादी लोग विरोध कर रहे हैं. एसपी दीपक भार्गव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ बाली गुलाबसिंह के साथ खिंवाड़ा थाना प्रभारी राजूराम चौधरी को पुलिस दल के साथ मौके पर भेजा.

गांव पहुंची पुलिस अफसरों ने दोनों पक्षों से काफी समझाइश की, जिसके बाद पुलिस सुरक्षा में दुल्हन की बंदौली निकाली गई. तय कार्यक्रम के अनुसार दुल्हा सोमवार सुबह युवती के घर बरात आएगी और शादी का आयोजन होगा जिसको देखते हुए भी गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस को तैनात किया गया है.

GST: 32 रूपए महंगा हुआ घरेलू LPG सिलेंडर, कमर्शियल हुआ सस्ता

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नई दिल्ली। 1 जुलाई से देश भर में GST लागू हो चुका है और अब इसका असर आम आदमी पर दिखने लगा है. जीएसटी लागू होते ही घरेलू सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं जिससे आम आदमी को बड़ा झटका लगा है. अब लोगों को एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए 32 रुपए ज्यादा खर्च करने होंगे. दरअसल, ये दाम जीएसटी लागू होने और सब्सिडी में कटौती से बढ़ेंगे. नए दाम 1 जुलाई से लागू हो चुके हैं.

जानकारी के मुताबिक, जीएसटी के लागू होने से पहले कई राज्यों को एलपीजी के लिए टैक्स नहीं देना होता था, लेकिन कुछ राज्यों में इस पर 2-4 प्रतिशत का वैट लगता था. लेकिन अब क्योंकि एलपीजी को 5% के स्लैब में रखा गया है, तो इसकी कीमत में 12-15 रुपए की बढ़ौतरी हो रही है. कमर्शियल सिलेंडर हुआ सस्ता जून से सब्सिडी में कटौती का असर भी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. उदाहरण के तौर पर, जो ग्राहक सब्सिडी के पात्र हैं, उन्हें जून तक दी गई 119.85 रुपए की सब्सिडी में कटौती की गई है.

नई अधिसूचना के मुताबिक, अब सिर्फ 107 रुपए ही उनके बैंक खाते में आएंगे.’ इन दोनों का संयुक्त प्रभाव यह होगा कि हर सिलिंडर पर 32 रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे. अलग-अलग राज्यों की कीमत में अंतर होगा. जीएसटी के आने से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर में 69 रुपए तक की कटौती हुई है. इससे पहले कमर्शियल सिलेंडर पर 22.5% तक का टैक्स लगता था, लेकिन अब इसे 18% स्लैब में रखा गया है जिसके कारण दाम घटे है.

भारतीय महिला टीम ने पाकिस्तान को 95 रन से हराया

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india vs pakistan women cricket

डर्बी। एकता बिष्ट के पांच विकेट की बदौलत भारत ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप के राउंड रॉबिन मैच में आज यहां पाकिस्तान को 95 रन से हराकर जीत की हैट्रिक बनाई. भारतीय टीम के 170 रन के साधारण से लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की टीम एकता (18 रन पर पांच विकेट) की बलखाती गेंदों के सामने 48 .1 ओवर में मात्र 74 रन पर ढेर हो गई. तेज गेंदबाज मानसी जोशी ने दो जबकि झूलन गोस्वामी, हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने भी एक-एक विकेट चटकाया. पाकिस्तान की ओर से कप्तान सना मीर ने सर्वाधिक 29 रन बनाए. उनके अलावा सलामी बल्लेबाज नाहिदा खान (23) ही दोहरे अंक में पहुंच पाई. एकता को उनके प्रदर्शन के लिए प्‍लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया. इससे पहले भारतीय टीम नासरा संधू (26 रन पर चार विकेट) और सादिया यूसुफ (30 रन पर दो विकेट) की घातक स्पिन के सामने नौ विकेट पर 169 रन ही बना सकी. तेज गेंदबाज डायना बेग ने भी 28 रन देकर एक विकेट हासिल किया. भारत की ओर से सलामी बल्लेबाज पूनम राउत ने सर्वाधिक 47 रन की पारी खेली जबकि दीप्ति शर्मा ने 28 रन बनाए. सुषमा वर्मा (33) और झूलन गोस्वामी (14) ने सातवें विकेट के लिए 34 रन जोड़कर टीम का स्कोर 150 रन के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. भारत तीन मैचों में तीन जीत से छह अंक के साथ अंक तालिका में सबसे ऊपर है जबकि पाकिस्तान को अपने तीनों मैचों में हार का सामना करना पड़ा है. भारतीय टीम के लक्ष्य का पीछा करने उतरे पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही और उसने आठवें ओवर में 14 रन तक ही चार विकेट गंवा दिए. एकता ने दूसरे ओवर में अपनी चौथी ही गेंद पर आयशा जफर (1) को रणआउट किया. नाहिदा हालांकि झूलन के अगले ओवर में भाग्यशाली रही जब दीप्ति शर्मा ने गली में उनका मुश्किल कैच टपका दिया. जावेरिया खान (4) ने झूलन पर पारी का पहला चौका जड़ा लेकिन एक गेंद बाद रणआउट हो गईं. उन्होंने डीआरएस का सहारा भी लिया लेकिन तीसरे अंपायर ने मैदानी अंपायर के फैसले को सही करार दिया. एकता ने इसके बाद लगातार ओवरों में सिदरा नवाज (0) और इराम जावेद (0) को रणआउट करके पाकिस्तान के बल्लेबाजी क्रम की कमर तोड़ी. दीप्ति ने नैन अबीदी (5) को बोल्ड करके पाकिस्तान को पांचवां झटका दिया जबकि मानसी ने असमाविया इकबाल को विकेटकीपर सुषमा के हाथों कैच कराके टीम का स्कोर छह विकेट पर 26 रन किया. नाहिदा और कप्तान सना ने आठ ओवर से अधिक तक कोई विकेट नहीं गिरने दिया. नाहिदा इसके बाद हरमनप्रीत की गेंद को सुषमा के हाथों में खेल गई. उन्होंने 62 गेंद में तीन चौकों की मदद से 23 रन बनाए. सना ने एकता पर चौके के साथ 27वें ओवर में टीम के 50 रन पूरे किए लेकिन बायें हाथ की इस स्पिनर ने अगले ओवर में नासरा (1) और डायना (0) को लगातार गेंदों पर पेवेलियन भेजा. सना और सादिया (नाबाद 3) ने नौ ओवर से अधिक समय तक पाकिस्तान की हार को टाला लेकिन मानसी ने विरोधी कप्तान को बोल्ड करके भारत को जीत दिला दी. इससे पहले, मैच में बल्‍लेबाजी करते हुए मैच में भारत की शुरुआत खराब और बेहद धीमी रही टीम का स्कोर जब सात रन था तभी चौथे ओवर की तीसरी गेंद पर शानदार फॉर्म में चल रही मंधाना (2) पेवेलियन लौट गईं. पूनम और दीप्ति ने हालांकि विकेट पर अपने पैर जमाए लेकिन रनों की गति को बढ़ा नहीं सकीं. दोनों ने 18.5 ओवरों में 3.55 की औसत से सिर्फ 67 रन जोड़े. अर्धशतक से तीन रन दूर पूनम को संधु ने अपना शिकार बनाया और यहां से भारत के विकेट ताश के पत्तों की तरह गिरने लगे. कप्तान सिर्फ आठ रन ही बना सकीं. अंत में सुषमा और झूलन ने सातवें विकेट के लिए 34 रनों की साझेदारी कर टीम को इस स्कोर तक पहुंचाने में मदद की. मानशी जोशी चार रन और पूनम यादव छह रनों पर नाबाद लौटीं. पाकिस्तान की तरफ से नाशरा संधू ने सर्वाधिक चार विकेट लिए. सादिया युसूफ को दो सफलता मिलीं. डायना बेग और असमाविया इकबाल के हिस्से एक-एक विकेट आया.

चौथे वनडे में विंडीज ने भारत को 11 रनों से हराया

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west indies win

नार्थ साउंड। चौथे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में रविवार (दो जुलाई) को वेस्‍टइंडीज की टीम ने भारत को 11 रन से हरा दिया और श्रृंखला में पहली जीत दर्ज कर ली. पहले खेलते हुए वेस्‍टइंडीज की टीम मात्र 189 रन पर ढेर हो गई, लेकिन गेंदबाजों की शानदार गेंदबाजी के दम पर मेजबान टीम ने भारत पर जोरदार जीत दर्ज कर ली. भारत की ओर से ओपनर अजिंक्य रहाणे ने 60 रन और महेंद्र सिंह धौनी ने 54 रन की पारी खेली. इन दोनों के अलावा सभी खिलाड़ी असफल रहे. कप्तान कोहली मात्र 3 रन बनाये.

इससे पहले उमेश यादव की अगुआई में गेंदबाजों के अनुशासित प्रदर्शन की बदौलत भारत ने को नौ विकेट पर 189 रन के स्कोर पर रोका. पिछले दो मैच गंवाकर श्रृंखला में 0-2 से पिछड़ रही वेस्टइंडीज की टीम करो या मरो के इस मुकाबले में उमेश (36 रन पर तीन विकेट), हादर्कि पंड्या (40 रन पर तीन विकेट), और कुलदीप यादव (31 रन पर दो विकेट) की धारदार गेंदबाजी के सामने कभी सहज स्थिति में नजर नहीं आई.

मेजबान टीम का कोई बल्लेबाज टिककर नहीं खेल पाया. टीम की ओर से सलामी बल्लेबाजों एविन लुईस और काइल होप ने सर्वाधिक 35-35 रन बनाए जबकि शाई होप (25) और रोस्टन चेज :24: भी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलने में नाकाम रहे. वेस्टइंडीज के कप्तान जेसन होल्डर ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया जिसके बाद काइल और लुईस ने टीम को धीमी लेकिन ठोस शुरआत दिलाई. विश्व कप 2015 के बाद पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे मोहम्मद शमी (बिना विकेट के 33 रन) और उमेश की धारदार गेंदबाजी के सामने दोनों ने पहले 10 ओवर में 31 रन जोड़े. इस दौरान शमी ने दो जबकि उमेश ने एक ओवर मेडन फेंका. पहले 10 ओवर में सिर्फ दो चौके लगे जबकि लुईस ने उमेश पर एक छक्का भी मारा. वर्ष 2015 के बाद 40 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में यह सिर्फ तीसरा मौका है जब वेस्टइंडीज ने पहले 10 ओवर में कोई विकेट नहीं गंवाया. होप ने रविंद्र जडेजा के लगातार ओवरों में चौके मारे. उन्होंने पंड्या पर भी चौका जड़ा लेकिन अगली गेंद पर स्वीपर कवर में केदार जाधव को कैच दे बैठे. लुईस ने जडेजा पर जारी का दूसरा छक्का जड़ा. विराट कोहली ने इसके बाद गेंद कुलदीप को थमाई और बायें हाथ के इस चाइनामैन गेंदबाज ने लुईस को कप्तान के हाथों कैच करा दिया. वेस्टइंडीज के रनों का शतक 27वें ओवर में पूरा हुआ. कुलदीप ने पिछले मैच की तरह इस बार भी रोस्टन चेज को बोल्ड किया. जेसन मोहम्मद ने कुलदीप पर चौका जड़ा लेकिन पंड्या ने शाई होप को विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के हाथों कैच कराके वेस्टइंडीज को चौथा झटका दिया.

कप्तान जेसन होल्डर भी 10 गेंद में 11 रन बनाने के बाद उमेश की गेंद पर धौनी को कैच दे बैठे जिससे वेस्टइंडीज का स्कोर पांच विकेट पर 154 रन हो गया. उमेश ने रोवमैन पावेल (02) को जडेजा के हाथों कैच कराया जबकि जेसन मोहम्मद (20) अगले ओवर में पंड्या की गेंद पर तेज प्रहार करने की कोशिश में बैकवर्ड प्वाइंट पर जडेजा को ही कैच थमा बैठे. एश्ले नर्स (04) और देवेंद्र बिशू (15) ने कुछ समय विकेट पर बिताया लेकिन तेजी से रन बनाने में नाकाम रहे। उमेश ने नर्स को अपनी ही गेंद पर लपककर इस साझेदारी को तोड़ा. बिशू इसके बाद जडेजा से सटीक निशाने का शिकार बने. वेस्टइंडीज की टीम अंतिम 10 ओवर में सिर्फ 35 रन ही जोड़ सकी.

बुद्ध की आकृति वाला साबुन ले जा रहे 50 से ज्यादा दलितों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

jhansi dalit arrested

झांसी। गुजरात से लखनऊ जा रहे 50 से अधिक लोगों को झांसी रेलवे स्टेशन पर भारी पुलिस बल के साथ साबरमती एक्सप्रेस से उतार लिया गया है. उतारे गये सभी यात्री दलित समाज के बताये जा रहें हैं. उनका दोष इतना है कि वे तथागत बुद्ध की आकृति बना 125 किलो का साबुन लेकर यूपी के सीएम योगी को देने जा रहे थे. उनका कहना है कि कुशीनगर में सीएम योगी ने अपने अधिकारियों से दलितों को साबुन और सैम्पू बांटकर यह दर्शाने का प्रयास किया है कि दलित नहाते नहीं हैं. इसलिए वह उन्हें यह 125 किलों का साबुन देकर बताना चाहते है कि दलित नहाते है भी हैं और साफ-सुथरे भी रहते हैं.

रविवार की शाम अहमदाबाद से चलकर झांसी पहुंची साबरमती एक्सप्रेस को झांसी जनपद के भारी पुलिस बल ने अचानक घेर लिया. इसके बाद स्लीपर कोचों से तकरीबन 50 लोगों से अधिक को प्लेटफार्म पर उतार लिया गया. उतारे गये लोगों ने जब पुलिस से इसका कारण पूछने का प्रयास किया तो उन्हें बस यह कहते हुए नहीं बताया गया कि ऊपर से आदेश हैं इसलिए उन्हें यहीं पर उतारा गया है.

jhansi dalit arrested

प्लेटफार्म पर उतारे गये लोगों ने परेशान होकर वहीं बैठकर धरना शुरु कर दिया. जब धरना दे रहे लोगों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया वे सभी दलित समाज से हैं. पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिकारियों ने कुशीनगर में पहुंचकर दलित समाज के लोगों को साबुन और सैम्पू वितरण करते हुए कहा था कि यदि उन्हें सीएम योगी की सभा में आना है तो नहा धोकर आओ. इसका मतलब सीएम योगी यह दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं कि दलित नहाते नहीं हैं और वे गंदे रहते है. सीएम योगी के इस रवैये से दलित समाज के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है.

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी को बताने के लिए उन सभी ने निर्णय लिया और गुजरात में 125 किलों का भगवान बुद्ध की आकृति बना साबुन बनाया. इसके बाद उस साबुन लेकर वे उत्तर प्रदेश के लखनऊ में सीएम योगी को देने के लिए जा रहे थे. जहां वे सीएम योगी को बताना चाहते है कि दलित साफ-सुधरे भी रहते हैं और मन के साफ भी हैं. वह इस साबुन को देकर सीएम योगी से कहना चाहते है कि वह अपने मन को साफ करें. केवल दलित और सभी समाज को एक साथ होने की बात कहकर ही सहानुभूति नहीं ली जाती है.

वहीं जैसे ही मीडिया को पुलिस प्रशासन ने आते देखा तो उनके हाथ-पैर फूल गये. इसके बाद पुलिस प्रशासन ने आनन-फानन में गुजरात से आये प्रर्दशनकारियों को स्टेशन से बाहर निकाला. इसके बाद उन्हें बस में भरकर माताटीला के गेस्ट हाउस में नजर बंद कर दिया. वहीं जब पुलिस अधिकारियों से उक्त लोगों को उतारे जाने का कारण जानने का प्रयास किया तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया.

साभारः झांसीटाइम्स

गुजरातः 12 शेरों से घिरी महिला ने दिया बच्चे को जन्म

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अहमदाबाद। गुजरात के गिर के जंगल में यहां बसने वाले शेरों के कारण पूरी दुनिया में मशहूर हैं. लेकिन आधी रात के बाद गिर के जंगल में कुछ ऐसा हुआ जैसा पहले कभी नहीं हुआ. जंगल में 12 शेरों के बीच एक बच्चे ने रोते हुए दुनिया में कदम रखा.

मंगूबेन मकवाना कभी भी 29 जून की रात नहीं भूल सकेंगी. एक तो प्रसव पीड़ा ऊपर से शेरों की दहशत. अमरेली जिले के इस सुदूरवर्ती गांव में गिर के जंगलों के पास से आधी रात में जब वे एक एंबुलेंस से अस्पताल जा रही थीं तभी एंबुलेंस को 12 शेरों ने घेर लिया. वाहन आगे नहीं बढ़ सका लेकिन प्रसव पीड़ा बढ़ती गई.

करीब 20 मिनट तक ऐसे ही हालात बने रहे. इस दौरान ‘108’ एंबुलेंस में तैनात पैरामेडिकल स्टाफ ने बेहद साहस दिखाया और प्रसव प्रक्रिया में मंगूबेन की मदद की. आखिरकार शेरों से घिरी एंबुलेंस में मंगूबेन के बच्चे ने जन्म लिया. इस बीच तीन नर शेरों समेत 12 शेर वाहन का रास्ता रोककर खड़े रहे.

अमरेली में ‘108’ के आपातकालीन प्रबंधन कार्याधिकारी चेतन गाढे ने कहा कि यह वाकया गुरुवार को देर रात करीब ढाई बजे का है. लुनासापुर गांव की निवासी मंगूबेन मकवाना को जाफराबाद कस्बे के सरकारी अस्पताल ले जाया जा रहा था.

एक देश और दो टैक्स है ‘जीएसटी’

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नई दिल्ली। देशभर में आज से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू हो गया है. जीएसटी को लेकर चल रही हवाई अटकलें आज से खत्म हो गई. वास्तविक जीवन में जीएसटी असर आज से दिखने लगा है. लोगों को जीएसटी लागू होने से आर्थिक समस्याएं आने लगी है. सरकार के प्रति लोग अपना गुस्सा सोशल मीडिया पर भी जाहिर कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने रेस्टोरेंट में खाने-पीने के बिल के साथ अन्य खरीददारी के बिल भी पोस्ट कर रहे हैं. इन बिलों पर दो तरह के टैक्स लग रहे हैं. आप कुछ भी समान खरीदते हैं तो बिल में आपको दो तरह के टैक्स दिखाई देंगे. एक टैक्स राज्य सरकार के नाम से तो दूसरा टैक्स केंद्र सरकार के नाम से. ग्राहक अपने आप को ठगा से महसूस कर रहे हैं. प्रधानमंत्री सहित केंद्रिय मंत्रियों ने भी जीएसटी के जितने गुणगान किए थे, लागू होने के बाद सब फीके दिख रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि जीएसटी के बाद पूरे देश में एक ही टैक्स लगेगा और अलग-अलग राज्यों में लगने वाले अलग-अलग टैक्स से आजादी मिलेगी. लेकिन वास्तविकता में केंद्र और राज्य अलग सर्विस टैक्स लग रहा है. इससे मीडिल और लोवर क्लास को नुक्सान होगा. उन्हें शॉपिंग मॉल से चीजें खरीदनी महंगी पड़ेंगी.

बीती रात संसद भवन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी लॉन्च किया. इस दौरान सिनेमा और उद्योग जगत से लकेर राजनीति की दिग्गज हस्तियां मौजूद थीं. करीब 800 लोगों की मौजूदगी में आधी रात को एक भव्य कार्यक्रम कर जीएसटी को लागू किया गया.