बीजेपी मंत्री के गांव में दलितों के खिलाफ शर्मनाक फरमान

हरियाणा। बीजेपी सरकार के राज में दलितों के उत्पीड़न की घटनाऐं लगातार सामने आ रहीं हैं पर अब एक फरमान मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के गांव से आया है. मंत्री के पैतृक गांव में दलितों के खिलाफ शर्मनाक फरमान सुनाया गया है. जिस पर भारी विवाद हो रहा है. यह घटना हरियाणा के जींद जिले के गांव की है जहां एक मंदिर में शुरू हुए हवन यज्ञ में दलितों को भाग नहीं लेने को कहा गया है.

गांव डूमरखा खुर्द के एक मंदिर में मंगलवार को हवन शुरू किया गया है. यह हवन नौ जुलाई तक चलेगा. बताते हैं कि यज्ञ से पहले गांव के लोगों की बैठक हुई,  जिसमें एक पंडित ने हवन से दलित समाज को दूर रहने का फरमान जारी कर दिया. यह सुनकर दलित समाज के लोगों ने पंडित के फरमान का विरोध कर दिया. जब उन पर पंडित के आदेश का पालन करने के लिए दबाव डाला गया तो उन्होंने सदर थाने में लिखित शिकायत कर दी. दलित समाज के लोगों ने पुलिस से गुहार लगाई कि जात-पांत का जहर फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. लिखित शिकायत मिलने के बाद सदर थाना प्रभारी रमेश कुमार मंदिर पहुंचे और गांव के लोगों से बात की.

दलित समाज के लोगों ने कहा कि उन्होंने मंदिर और हवन के लिए चंदा दिया है. इसके अलावा दूसरे कार्यों में भी सहयोग दिया है. हवन गांव में भाईचारा बनाए रखने और सुख समृद्धि के लिए कराया जा रहा है. मंदिर और हवन से दूर रखना उनके अधिकारों का हनन है. प्रशासन को मामले की तह तक जाकर फरमान सुनाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. दलित समाज के लोगों का कहना है कि लोगों की उपस्थित में पंडित ने कहा कि मंदिर में होने वाले हवन में दलितों का प्रवेश नहीं होना चाहिए. हवन में अगर दलितों का प्रवेश हुआ तो विघ्न पड़ जाएगा और गांव में शांति नहीं रहेगी. दलित सिर्फ भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं.

दलितों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने मामले में कार्रवाई नहीं की तो वह धरना प्रदर्शन करेंगे और प्रशासन के आला अधिकारियों से शिकायत करेंगे. जिसके बाद अगर ऐसी कोई भेदभाव की घटना उनके साथ हुई तो वे बड़े स्तर पर प्रर्दशन करेगें.

 

बाबा साहेब अम्बेडकर की प्रतिमा के फेरे लेकर रचाई शादी

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर में एक गरीब दलित जोड़े ने मंगलवार (चार जुलाई)  को अलग अंदाज में शादी की. इस गरीब जोड़े ने अग्नि के फेरे लेने की जगह संविधान निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर की मूर्ति के सामने सात फेरे लेकर अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की.

यह शानदार शादी सीहोर के मुरदी क्षेत्र में डॉक्टर अम्बेडकर पार्क में संपन्न हुई. इस क्षेत्र के अत्यंत गरीब परिवार की वधु वैजयंती और वर पंकज जाटव ने अपनी शादी एक अलग ही अंदाज में की. फेरे से पहले दोनों ने बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने एक दूसरे के गले में वरमाला पहनाई और एक सफल वैवाहिक जीवन जीने की की शपथ ली.

इस कार्य के लिए प्रेरणा बनी क्षेत्र की वार्ड पार्षद अनीता खंगराले ने इस शादी को लोगों के लिए प्रेरणा लेने वाला बताया. उन्होंने संविधान निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर को ही दलितों के भगवान मानकर उनकी मूर्ति के सामने हुई इस शादी को दलित समाज के लिए एक नई प्रेरणा बताया.

इस शादी में शामिल होने पूरे मोहल्ले के लोग आए, महिलाओं ने शादी के गीत गाए. दूल्हा- दुल्हन को मिठाई खिलाई गई और शादी के बाद दोनों को विदाई दी गई. इस अनूठी शादी में समाज के लोगो ने अपना आशीर्वाद दिया और इसे अनुकरणीय पहल बताया. इस शादी की चर्चाएं पूरे देश में हो रही है जोड़े की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर किया जा रहा है और खूब शुभकामनाऐँ दी जा रही हैं.

 

जातिवादी गुंडे ने भाजपा राज कहकर दलित महिला को पीटा

mirzapur

मिर्जापुर। यूपी में एक बार फिर दलित महिला की पिटाई का सामने आया है. मामला मिर्जापुर के मड़िहान थाना क्षेत्र का है, जहां मामूली कहासुनी के बाद दबंग ने महिला को बेरहमी से पीट दिया. पुलिस ने इस मामले में जातिवादी गुंडें के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

मड़िहान थाना के रेकसा खुर्द गांव में दलित महिला जीरा भारती अपने लड़के के साथ साइकिल से अपने घर जा रही थी. गांव में बीच सड़क पर गांव जातिवादी गुंडा तसनू पटेल खड़ा था. जब दलित महिला ने उनसे रास्ता छोड़ने की बात कही तो वह पहले तो धमकी दिया की यह भाजपा राज है, सपा और बसपा राज नहीं है. बहुत नेतागिरी करती हो नेता गिरी भूल जाओगी. इसके बाद जातिवादी गुंडे महिला को गाली देने लगे और विरोध करने पर वह घर की तीन से चार महिलाओं को बुला लिया और सब लोगों ने मिलकर उनकी लात-घूंसों से जमकर पिटाई की. महिला का आरोप है कि उसे जातिसूचक गालियां दी गई, जब डॉयल-100 पर सूचना तब जाकर उसकी जान बची.

जीरा भारती कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की नेता भी हैं और इलाके मजदूरों के हक के लिए लड़ती रहती है. उनका कहना था कि वह मजदूरों के हक लगातार में लगातार आवाज उठती रहती है, पिछले साल भी उन्होंने इलाके में मजदूरी की मांग की थी. जीरा भारती का आरोप है कि उनकी पिटाई इसी को लेकर हो सकती है. वहीं थानाध्यक्ष मड़िहान भुवनेश्वर पांडे ने जीरा भारती की तहरीर पर उनका मेडिकल कराते हुए मुकदमा हुए दर्ज करने की बात कह रहे हैं.

वहीं मारपीट के आरोपी के घर वालों का कहना है कि मामला सिर्फ मामूली विवाद का है, दलित महिला के साथ कोई मारपीट नहीं हुई है. फिलहाल मामले की जांच पुलिस कर रही है.

सोशल मीडिया पर SC/ST के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी पर होगी सजा :हाईकोर्ट

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग अक्सर दुर्भावना का शिकार होते हैं. उनकी भावनाओं को आहत किया जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. फेसबुक और वॉट्सऐप यूजर्स को अब सतर्क होने की जरुरत है क्योंकि सोशल मीडिया पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपमानजक बातें लिखना उन पर भारी पड़ सकता है. दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशानुसार ऐसे व्यक्तियों को जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने 3जुलाई को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि SC और ST समुदाय के किसी व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया यहां तक कि ग्रुप में चैट में की जाने वाली अपमानजनक बातें भी दंडनीय अपराध हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि SC और ST (अत्याचार निषेध) ऐक्ट, 1989 इस समुदाय के लोगों पर सोशल मीडिया पर की गई जातिगत टिप्पणियों पर भी लागू होगा. कोर्ट ने यह बात एक फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान कही. कोर्ट ने कहा कि इस अधिनियम के दायरे में वॉट्सऐप चैट भी आ सकता है.

जस्टिस विपिन सांघी ने कहा, ‘फेसबुक यूजर अपनी सेटिंग को ‘प्राइवेट’ से ‘पब्लिक’ करता है, इससे जाहिर होता है कि उसके ‘वॉल’पर लिखी गई बातें न सिर्फ उसके फ्रेंड लिस्ट में शामिल लोग, बल्कि फेसबुक यूजर्स भी देख सकते हैं. हालांकि, किसी अपमानजनक टिप्पणी को पोस्ट करने के बाद अगर प्राइवेसी सेटिंग को ‘प्राइवेट’ कर दिया जाता है, तो भी उसे एससी/एसटी ऐक्ट की धारा 3(1)(एक्स) के तहत दंडनीय माना जाएगा.’

कोर्ट में यह सुनवाई एक SC महिला की याचिका पर हो रही थी, जिसने अपनी देवरानी जो कि एक राजपूत समुदाय से है, पर आरोप लगाया था कि वह उसे सोशल नेटवर्क साइट/फेसबुक पर प्रताड़ित कर रही हैं और उसने धोबी के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल किया. अपने बचाव में राजपूत महिला ने कहा कि उसका फेसबुक पोस्ट जिसे अगर सच भी माना जाए तो वह उसका अपना फेसबुक ‘वॉल’ है और इसका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था. आरोपी ने यह दलील भी दी कि उसके पोस्ट में उसने कभी अपनी देवरानी का जिक्र नहीं किया और कहा कि उसने धोबी समुदाय की महिलाओं को लेकर पोस्ट लिखा था. यह किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं था. अंत में उसने अपना बचाव करते हुए कहा कि फेसबुक वॉल प्राइवेट स्पेस है और किसी को हक नहीं है कि वह खुद आहत महसूस कर उसके अधिकारों का हनन करे.

इधर बचाव पक्ष की वकील नंदिता राव ने कोर्ट से कहा कि आरोपी ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत अपराध किया है, क्योंकि राजपूत महिला ने जानबूझ कर अपनी दलित देवरानी का अपमान करने के लिए फेसबुक पर पोस्ट डाला था. हालांकि, कोर्ट ने राजपूत महिला को राहत देते हुए उसके खिलाफ दायर एफआईआऱ को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने माना कि अगर कोई बात सामान्य तौर पर कही गई है और उसे किसी जाति विशेष के व्यक्ति को लक्ष्य बना कर नहीं कहा गया है, तो फिर वह अपराध नहीं माना जाएगा. वहीं, कोर्ट ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि फेसबुक उसका प्राइवेट स्पेस है. SC और ST समुदाय के लिए लोगों का रवैया हमेशा नकारात्मक ही रहा है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट का यह निर्णय किस हद तक एससी एसटी को राहत दे पाएगा.  

रिलायंस जियो के 500 रुपये का VoLTE फोन इस माह होगा लॉन्च

नई दिल्ली: लम्बे समय से रिलायंस जियो फ्री इन्टरनेट और कालिंग के लिए द्वारा करोड़ो लोगों को सुविधा देते हुए आ रहा है, अब रिलायंस जियो एक और धमाका करने वाली है. टेलिकॉम इंडस्ट्री में जबरदस्त धमाका पेश करने के बाद रिलायंस जियो अब अपना बहुप्रतीक्षित फीचर फोन 4G VoLTE आधारित इसी महीने पेश कर सकती है, जिसकी कीमत जाहिर तौर पर फोन निर्माताओ के पसीने छुड़ा देने वाली है. रिलायंस जियो अपने इस 4जी वोल्ट फोन की कीमत 500 रुपये तक रख सकती है.

माना जा रहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की सालाना बैठक में इसकी घोषणा की जा सकती है. यह बैठक 21 जुलाई को होगी, जिसमें रिलायंस जियो के नए टैरिफ प्लान को लेकर भी घोषणा की जा सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जियो अपने 4जी फीचर फोन की कीमत बेहद कम रख सकता है और यह 500 रुपये भी हो सकती है. 2जी सब्सक्राइबर्स को आकर्षित कर 4जी पर शिफ्ट होने के लिए ऐसा किया जा सकता है. इसका मतलब यह भी हुआ कि जियो प्रत्येक हैंडसेट पर 10 से 15 डॉलर की सब्सिडी दे रहा है. ईटी ने एचएसबीसी के डायरेक्टर और टेलिकॉम ऐनालिस्ट राजीव शर्मा के हवाले से यह कहा.

एक बड़ी टेलिकॉम कंपनी के ऐग्जीक्यूटिव के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह लॉन्च एक बार फिर टेलिकॉम इंडस्ट्री में खलबली मचा देगा. एक बार यह 4G फीचर फोन लॉन्च हो गया तो मौजूदा खिलाड़ियों के भी लो-ऐंड वॉयस कस्टमर्स छूट जाएंगे. 4G VoLTE नेटवर्क पर चलने वाला जियो इकलौता ऑपरेटर है जो की जनहित के लिए काफी फायदेमंद रहा है.

 

शिक्षा पर खर्च के मामले में बहुत पीछे है भारत

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मुंबई। भारत में अभिभावक अपने बच्चे की शिक्षा पर प्राइमरी से लेकर ग्रेजुएट डिग्री तक औसतन 18,909 डॉलर (करीब 12.22 लाख रुपये) खर्च करते हैं. यह वैश्विक स्तर पर औसत खर्च 44,221 डॉलर (करीब 28.40 लाख) के मुकाबले काफी कम है. इसमें बच्चे की शिक्षा की पूरी लागत शामिल हैं. एचएसबीसी के एक अध्ययन में यह जानकारी दी गई है. 15 देशों से जुड़े इस सर्वे में भारत का स्थान 13वां हैं. उसके पीछे केवल मिस्र और फ्रांस हैं.

रोजगार में भारी स्पर्धा के कारण अभिभावक अपने बच्चे को जिंदगी में अच्छी से अच्छी शुरुआत देने के लिए समय और पैसे खर्च करने को तैयार हैं. वे अपने खर्चों में कटौती करके इसके लिए पैसे जुटाते हैं. एचएसबीसी इंडिया में रिटेल बैंकिंग ऐंड वेल्थ मैनेजमेंट के हेड एचएसबीसी की ‘वैल्यू ऑफ एजुकेशन’ रिपोर्ट में 15 देशों के 8,481 अभिभावकों की राय को शामिल किया गया.

इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, मिस्र, फ्रांस, हॉन्ग कॉन्ग, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, सिंगापुर, ताइवान, यूएई, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं. भारत में खर्च कब 89% अभिभावक बच्चे की शिक्षा के मौजूदा दौर में उसे फंड मुहैया कराते हैं 94% अभिभावक अपने बच्चे की पोस्ट ग्रैजुएट शिक्षा को लेकर विचार कर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना में फेसबुक पोस्ट से बिगड़ा माहौल

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के एक पोस्ट से स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ गयी, जिसके बाद जिले में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई. वहां की स्थिति पर काबू करने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस की मदद के लिए बीएसएफ के 400 जवान मौके पर भेज दिये हैं. पुलिस ने पोस्ट करने वाले को गिरफ्तार कर लिया है. सरकार ने हिंसा वाली जगह पर धारा 144 लागू दी है. साथ ही इंटरनेट सेवा भी ठप कर दी गई है.

जानकारी के मुताबिक बसीरहाट अनुमंडल के बदुरिया में दो समुदायों के लोगों के बीच मंगलवार रात एक फेसबुक पोस्ट को लेकर झड़प शुरू हुईं. जिसके बाद एक युवक को गिरफ्तार किया गया. हिंसक भीड़ ने कई स्थानों पर सड़कों को जाम कर दिया और दूसरे समुदाय के लोगों पर हमला किया तथा कई घरों को जला दिया. BSF के जवानों को स्थिति पर काबू करने के लिए पुलिस की मदद के लिए तैनात किया गया है. इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी पर उन्हें फोन पर धमकाने का आरोप लगाया और कहा कि वह भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष की तरह बर्ताव कर रहे हैं.

ममता ने कहा कि मैं यहां किसी की दया पर नहीं हूं, पर जिस तरीके से राज्यपाल ने मुझसे बातचीत की, एक बार तो मैंने कुर्सी छोड़ने की सोची. वहीं राज्यपाल ने ममता के रूख और भाषा पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि हमारी बातचीत में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे ममता बनर्जी को लगे कि उनकी बेइज्जती हुई या उन्हें धमकाया गया या उन्हें अपमानित किया गया.

 

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की किताबें जल्द

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है. सरकार यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की किताबों को लगाने पर विचार कर रही है. इसके संदर्भ में समितियों की बैठक सोमवार से शुरू हो गई. कक्षा 9 से 12 तक के सवा करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए कोर्स में व्यापक बदलाव पर 14 जुलाई तक चर्चा होगी. इस दौरान कुल 33 पाठ्यक्रम समितियों की बैठक होनी है. पहले दिन कम्प्यूटर और मानव विज्ञान विषयों की बैठक होनी थी, लेकिन कम्प्यूटर विषय की ही बैठक हो पायी.

मानव विज्ञान की बैठक अब 10 जुलाई को होगी. बैठक में मुख्य रूप से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम को हूबहू लागू करने और 2018 की इंटरमीडिएट परीक्षा से दो की जगह एक पेपर करने पर विचार हो रहा है. अप्रैल 2018 से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है.

अगर ऐसा होता है तो 2020 की 10वीं एंव 12वीं की परीक्षा एनसीईआरटी के कोर्स पर होगी. इससे पहले 2018 व 2019 की बोर्ड परीक्षा में इंटरमीडिएट में दो की जगह एक पेपर करने के निर्देश शासन से मिले हैं ताकि परीक्षा अवधि को कम किया जा सके. गौरतलब है की एनसीईआरटी की किताबों की मांग लम्बे समय से हो रही है जिस पर सरकार अब जाकर इसे अमल में लाने की सोच रही है.

 

GST: विरोध में तमिलनाडु के 1100 सिनेमाघर बंद

strike in cinema hall

नई दिल्ली। देशभर में 1 जुलाई से GST लागू कर दिया गया है. इस टैक्स के विरोध में तमिलनाडु के थिएटर मालिकों ने हड़ताल कर दी है और लगभग 1100 सिनेमा हॉल बंद कर दिए हैं. इस बिल का पहले से विरोध कर रहे साउथ के सुपरस्टार कमल हासन ने भी इस हड़ताल को सही बताया है.

कमल हासन का कहना है कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री एक साथ आ रही है और जल्द ही एक आवाज में बोलेगी. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री को काफी नुकसान होने वाला है. बता दें कि इससे पहले भी कमल हासन सिनेमा के क्षेत्र में जीएसटी के लागू करने को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. उन्होंने इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से गुजारिश करते हुए कहा था कि सिनेमा टिकट पर जीएसटी की दर को 12 से 15 फीसदी ही रखा जाए.

अभिनेता कमल हासन ने कहा था कि नोटबंदी काले धन को खत्म करने के लिए लागू की गई थी, लेकिन जीएसटी हमें दो कदम पीछे ही ले जाएगा. बता दें कि केन्द्र सरकार ने फिल्मी टिकटों पर 28 फीसदी टैक्स प्रस्तावित किया है. वेबसाइट इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक टीडीपी नेता यनामला रामकृष्णानंदु ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर क्षेत्रीय सिनेमा पर जीएसटी का भार कम करने को भी कहा था. उनका कहना था कि अगर ऐसा नहीं होता है तो फिल्म इंडस्ट्री को काफी नुकसान होगा.

बता दें कि GST लागू होने होने से 100 रुपए से ज्यादा वाले टिकटों पर 28 फीसदी टैक्स लगेगा. वहीं 100 रुपए से नीचे वाले टिकटों पर 18 फीसदी टैक्स लगेगा. राज्य के सिनेमा थिएटर ओनर फेडरेशन के एक सीनियर पर्सन ने एक वेबसाइट से बात करते हुए बताया था कि हमें 53 फीसदी टैक्स देने को मजबूर किया जा रहा है.

खुशखबरी: यूपी के निकायों में 1500 पदों पर भर्तियां

लखनऊ: यूपी सरकार ने तय किया है की यूपी के निकाय में खाली भर्तियों को बहुत जल्दी भरा जायेगा. नगर निगम, पालिका परिषद और नगर पंचायतों में कई सालों से खाली समूह ग्रुप C  के अधिकारियों व कर्मचारियों के करीब 1500 पदों पर जल्द भर्तियां करने की तैयारी हैं. इस समय उत्तर प्रदेश में मौजूदा कुल 652 निकाय हैं.

इनमें 16 नगर निगम, 198 पालिका परिषद और 438 नगर पंचायतें हैं. सपा सरकार में निकायों में समूह ‘ग’ तक के पदों पर भर्ती के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन किया गया था. लेकिन नगर विकास विभाग ने कैबिनेट से प्रस्ताव पास करते हुए समूह ‘ग’ के करीब 1500 पदों पर भर्ती का अधिकार अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से लेकर स्थानीय निकाय निदेशालय को दे दिया. स्थानीय निकाय निदेशालय को भर्ती का अधिकार मिलने के बाद भी समूह ‘ग’ के खाली पदों पर भर्तियां नहीं हो पाई.

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद निकायों में खाली पदों का ब्योरा मांगा गया था. उच्चधिकारियों की बैठक में इन खाली पदों पर भर्ती न होने का कारण बताया गया. सूत्रों के मुताबिक इसलिए उच्च स्तर पर सहमति बनी है कि इन पदों पर भर्ती का अधिकार अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को फिर से दे दिया जाए, जिसके लिए इन पदों पर जल्द ही भर्तियां की जाएं.

निकायों में अवर अभियंता सिविल के 50, अवर अभियंता जलकल के 150, अवर अभियंता ट्रैफिक के 15, नगर पंचायतों में अवर अभियंता के 20, नगर पंचायतों में अधिशासी अभियंता के 220, कर निरीक्षक के 510, सहायक लेखाकार के 57 तथा लिपिक के 400 पद रिक्त बताए जा रहे हैं. कैबिनेट से मंजूरी के बाद नगर विकास विभाग इन पदों पर भर्ती का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोकसेवा अयोग को भेज देगा.

ट्रांसजेंडर्स को फ्री एजुकेशन देगा IGNOU

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नई दिल्ली। देश के ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए एक खुशखबरी है. ट्रांसजेंडर्स की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फैसला लेते हुए इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) ने सभी ट्रांसजेंडर्स स्टूडेंट्स को मुफ्त में एडमिशन देने का फैसला लिया है. अभी तक इग्नू सेक्स वर्कर्स, जेल में बंद कैदियों और बुनकरों को फ्री एजुकेशन मुहैया कराती रही है.

लखनऊ की क्षेत्रीय निदेशक मनोरमा सिंह के अनुसार, ‘ट्रांसजेंडरों को फ्री एजुकेशन की यह सुविधा देश भर के सभी सेंटरों पर चलाई जाएगी. हमने इस संदर्भ में ट्रांसजेंडर्स ऐक्टिविस्ट से मदद मांगी है. हमारी इस मुहिम का मकसद थर्ड जेंडर्स में भी एजुकेशन को प्रमोट करना है.’ भारत में 54 क्षेत्रीय सेंटरों के साथ ही 3 हजार से अधिक स्टडी सेंटर्स हैं. अकेले यूपी में ही करीब 150 स्टडी सर्कल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि किसी भी यूनिवर्सिटी में रेग्युलर बैचलर कोर्स करने के लिए ट्रांसजेंडर्स के लिए शायद ही कोई प्रोविजन है. अगर कहीं ट्रांसजेंडर्स के लिए ऐडमिशन फॉर्म में कोई विकल्प है भी, तो उन्हें फॉर्मल डॉक्युमेंट के अभाव में दूर कर दिया जाता है. इग्नू में ऐडमिशन के लिए ट्रांसजेंडर्स को ट्रांसफर और माइग्रेशन के जैसा कोई डॉक्युमेंट नहीं प्रोवाइड कराना पड़ेगा.

उनकी पहचान को आधार या फिर किसी अथॉरिटी से जारी सर्टिफिकेट से ही वेरिफाई किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अन्य स्टूडेंट्स की ही तरह ट्रांसजेंडर्स भी अपनी पसंद के किसी प्रोग्राम में इनरोल हो सकते हैं. इस दौरान उन्हें सभी तरह की मदद दी जाएगी. सोशल साइंस, साइकोलॉजी, साइंस, टूरिज्म, मैनेजमेंट, एजुकेशन में इग्नू 228 ऐकडेमिक और प्रोफेशनल कोर्स ऑफर करता है. इग्नू के जुलाई सत्र में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए अप्लाई करने का अंतिम दिन 16 जुलाई और अन्य प्रोग्राम के लिए अंतिम दिन 31 जुलाई है.

भारत के बौद्धों की स्थिति पर जारी इस उत्साहजनक रिपोर्ट को पढ़िए

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भारत में बौद्ध धर्म तेजी से बढ़ रहा है, ना सिर्फ बढ़ रहा है बल्कि इस धर्म को मानने वाले लोगों का विकास भी तेजी से हो रहा है. वह आगे बढ़ने में तमाम वर्ग और धर्म के लोगों को पीछे छोड़ रहे हैं. हाल ही में आई इंडिया स्पैंड की रिपोर्ट बताती है कि अन्य धर्मों के मुकाबले बौद्धों का विकास तेजी से हो रहा है.

इस रिपोर्ट से जुड़ा दूसरा सच यह भी है कि भारत में बौद्ध धर्म को मानने वाले ज्यादातर लोग दलित हैं. इस धर्म में आने से पहले उनकी शिक्षा दर और विकास दर बहुत धीमी थी, लेकिन बौद्ध धर्म में आते ही उनके हालत में आश्चर्यजनक रूप से सुधार हुआ है. खास कर नवबौद्धों के शिक्षादर में विशेष रूप से बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 84 लाख बौद्ध में 87 प्रतिशत दूसरे धर्म से परिवर्तित लोग हैं. इनमें से भी अधिकतर दलित समाज से आने वाले लोग हैं. आंकड़ों के अनुसार ऐसे बौद्धों की लैंगिक समानता और शिक्षा की दर देश के बाकी दलितों से काफी बेहतर है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में शिक्षा के मामले में बौद्ध समाज 81.29 प्रतिशत, हिंदू 73.27 प्रतिशत, एससी 66.07 प्रतिशत है. अगर इसको राष्ट्रीय औसत के तौर पर देखें तो यह 72.98 प्रतिशत है. इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि बौद्धों का शिक्षा स्तर अन्य धर्मों से ऊपर है.

रिपोर्ट में महिलाओं की हालत सुधरने की बात भी कही गई है. बौद्ध धर्म में महिलाओं को जितना सम्मान और बराबरी का दर्जा मिलता है, शायद यही वजह है कि बौद्ध धर्म में लिंगानुपात का स्तर भी अन्य सभी धर्मों से बेहतर है. बौद्ध धर्म में प्रति एक हजार पुरूष पर 965 महिलाएं हैं. अगर राष्ट्रीय स्तर पर इसका औसत निकाला जाए तो प्रति हजार पुरूष पर 943 महिलाएं हैं. छोटे परिवार में यकीन करने में भी बौद्ध धर्म के लोग सबसे आगे हैं. इस धर्म में 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों का राष्ट्रीय औसत 13.59 प्रतिशत के विपरीत बौद्ध समुदाय में बच्चों की दर 11.62 प्रतिशत है.

मध्य प्रदेश: कर्ज न चुका पाने के कारण किसान ने की आत्महत्या

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नई दिल्लीमध्यप्रदेश के किसानों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. हर दिन किसी न किसी किसान की मौत की खबर सामने आ रही है. अब तक, मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्याओं के दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं. उसमें एक नाम और शामिल हो गया है. सीहोर में एक 50 वर्षीय किसान कर्ज से परेशान होकर फांसी के फंदे पर झूल गया.

इससे पहले कर्ज से परेशान एक और किसान ने 1 जुलाई को सागर जिले के खुराई इलाके में चलती ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली थी. मृतक किसान प्रेमलाल अहिरवाल (24) निवासी सेमराहाट थाना खुरई का रहने वाला था. ग्रामीणों के अनुसार युवक ने 2.5 लाख रुपये में अपनी जमीन साहूकार के पास गिरवी रखी हुई थी. इसके साथ ही गांव व क्षेत्र के अन्य लोगों का भी उसे लगभग 30 हजार रुपए कर्ज देना था.

इससे पहले 2 जुलाई को मंदसौर जिले के दौरवाड़ी गांव के अन्य किसान लाल सिंह ने भी जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी. उनके पास से 9 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है. शुक्रवार को भी वित्तीय संकट के चलते एक और किसान देना महारिया ने अपने घर में फांसी के फंदे से लटकर आत्महत्या कर ली. राज्य के मंदसौर जिले में कर्ज माफी के लिए हुए किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद से अब तक, मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्याओं के दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आंदोलन के बाद प्रदेश में अब तक 50 किसान खुदकुशी कर चुके हैं.

गौरतलब है कि किसान आंदोलन के दौरान 6 जून को भड़की हिंसा के चलते पुलिस की गोली से 5 किसानों की मौत हो गई थी. इसके बाद 6 व 7 जून को आक्रोशित भीड़ ने राजमार्ग पर लगभग 30 ट्रकों को आग लगा दी थी.

 

राजस्थान के 3 छात्रों ने एजुकेशन के लिए बनाए 95 ऐप

राजस्थान। स्टार्टअप के दौर में युवाओं की क्रिएटिविटी उन्हें बेहतर मुकाम दिला रही है. शहरों में ही नहीं, कस्बे से लेकर गांवों तक युवाओं का टैलेंट अब देश-दुनिया में छाने लगा है. यहां हम आपको कॉलेज ड्रॉप आउट कर कुछ क्रिएटिव करने वाले दोस्तों की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने अपने यूनीक आइडिया से न केवल स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ हल्का कर दिया, बल्कि किताबी ज्ञान को विस्तृत कर टेक्सटबुक्स की जरूरत ही खत्म कर दी. इन्होंने ज्ञान-विज्ञान के 95 मोबाइल ऐप बनाए हैं.

दरअसल, हम बात आरडीएस यानि राहुल, देवेन्द्र और साहिल की कर रहे हैं. अलवर जिले के तीनों युवा जिन्होंने अपने नाम के आधार पर ही आरडीएस एजुकेशन कार्यक्रम तैयार किया है. बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद तीनों दोस्तों ने आगे की पढ़ाई की शुरुआत की, लेकिन इंट्रेस्ट कुछ अलग करने का था इसलिए कॉलेज ड्रॉपआउट किया और स्कूली सिलेबस से किताबी ज्ञान को डिजिटलाइज्ड कर दिया.

तीनों दोस्तों ने एनसीईआरटी सिलेबस की सभी बुक्स को फेसबुक के मैंसेजर पर मैंसेजर इंटेलिजेंट बोर्ड बनाकर समेट लिया. यानि किसी भी क्लास का स्टूडेंट किसी भी विषय का कोई चेप्टर पढ़ना चाहे तो मैसेंजर पर आरडीएस एजुकेशन टाइप कर पढ़ सकते है. हालांकि, अभी उनका कार्य सीबीएसई और राजस्थान बोर्ड के पाठ्यक्रम पर भी चल रहा है. इसे भी वे जल्द डिजिटलाइज्ड करेंगे.

एनआईटी छोड़कर आए साहिल का कहना है कि इसका उन्हें देशभर से रिस्पोंस मिल रहा है. रशिया में एमबीबीएस कोर्स के लिए राहुल यादव का सिलेक्शन भी हो गया, लेकिन अपने दोनों दोस्तों के साथ किए काम को आगे बढ़ाने के मकसद से उन्होंने मोबाइल ऐप तैयार करने पर जोर दिया. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जीके, जीएस और तमाम स्कूली विषयों से जुड़े 95 ऐप तैयार कर डाले.

साथी देवेन्द्र के साथ युवाओं ने इस आइडिया को इंप्लीमेंट किया. इनका मानना था कि बच्चे केवल मोबाइल पर गेम खेलने का ही काम करते हैं, लेकिन इसे पढ़ाई में भी काम लिया जाना चाहिए. इस कार्य के लिए उन्हें गूगल की ओर से भी सराहना मिली है. बहरहाल, ये युवा भी उसी अलवर जिले से ताल्लुक रखते हैं जहां कुछ समय पर मोबाइल ऐप बनाने वाले इमरान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सराहा था. अब इन्हें उम्मीद है कि इस कार्य में उन्हें सरकार से भी प्रोत्साहन मिल सके ताकि स्टूडेंट्स के लिए वे अपने काम को और आगे बढ़ा सकें.

अंडर 17 विश्व कप का ऐसे राजनीतिक फायदा उठाएगी मोदी सरकार

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Fifa football world cup

नई दिल्ली। केंद्र सरकार इस वर्ष 6 से 28 अक्टूबर तक भारत में पहली बार होने वाले अंडर-17 फुटबॉल विश्व कप का राजनीतिक फायदा उठाने की पूरी तैयारी कर रही है. फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा के इसका खर्च उठाने से इनकार करने के बावजूद केंद्रीय खेल मंत्रलय टूर्नामेंट की शुरुआत के एक दिन पहले ही खुद दस करोड़ रुपये खर्च करके उद्घाटन समारोह आयोजित करने को तैयार है. इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.

खेल मंत्रलय के एक अधिकारी ने कहा कि पांच अक्टूबर को राजधानी के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में यह समारोह आयोजित होगा. 90 मिनट के कार्यक्रम में 15 मिनट प्रधानमंत्री के भाषण के लिए रखे गए हैं. दिल्ली में होने वाले मैच जवाहर लाल नेहरू (जेएलएन) स्टेडियम में होने हैं, लेकिन उद्घाटन ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित करने के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि फीफा के हिसाब से टूर्नामेंट में उद्घाटन समारोह की कोई जगह नहीं है, लेकिन हम यह करना चाहते थे.

सूत्रों के मुताबिक फीफा ने विश्व कप की आयोजन समिति को साफ कह दिया है कि इसके लिए उसके द्वारा इस टूर्नामेंट के आयोजन के लिए दिए जा रहे करीब 70-80 करोड़ रुपये से एक भी पैसा नहीं खर्च किया जाए. यही नहीं, वह इसमें होने वाले मार्च पास्ट के लिए भाग लेने वाली टीमों के खिलाड़ियों को भी नहीं भेजेगा और जेएलएन स्टेडियम भी नहीं देगा.

इसके बाद आयोजन समिति ने इस कार्यक्रम को हॉकी के लिए प्रयोग में आने वाले ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित कराने का निर्णय लिया. उद्घाटन समारोह पर फिजूलखर्ची के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि यह देश के गौरव की बात है कि यहां पर पहली बार अंडर-17 फीफा विश्व कप हो रहा है. हम अपनी संस्कृति दुनिया को दिखाना चाहते हैं. कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है. इसके अलावा उद्घाटन में समारोह दुनिया के कुछ बड़े फुटबॉल खिलाड़ियों को भी बुलाने की योजना है.

पाकिस्तानी लड़की को भारत में शादी के लिए नहीं मिल रहा वीजा

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कराची की सादिया और लखनऊ के सईद की प्रेम कहानी बस एक वीजा की मोहताज बन कर रह गई है. एक अगस्त को इन दोनों की शादी होनी है, लेकिन वीजा नहीं मिल पाने की वजह से शादी रुकने की कगार पर पहुंच गई है. सादिया और सईद की शादी तय होने के बाद उनके परिजनों ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग पर वीजा के लिए अर्जी दी थी, लेकिन उनकी यह अर्जी खारिज हो गई थी. इस बात से परेशान होकर, सादिया ने अब विदेश मंत्री विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मदद की गुहार लगाई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सादिया ने कहा, “मुझे काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. उच्चायोग ने हमारी अर्जी को दो बार खारिज कर दिया था और ऐसा करने के पीछे कोई कारण भी नहीं दिया. हम लोग बीते एक साल से वीजा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.”

सादिया के मुताबिक दोनों देशों के संबंधों के बीच आई कड़वाहट के चलते उनके परिवार को वीजा नहीं मिल पा रहा. खबर के मुताबिक, सादिया ने ट्वीट कर विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज से मदद मांगी है.उन्होंने ट्वीट किया है कि, “इस बेटी की मदद करिए प्लीज. अब मेरी आखिरी उम्मीद आप ही हैं.” सादिया और सईद की शादी साल 2012 में तय की गई थी. सादिया अपने परिवार के साथ लखनऊ में शादी की तारीख पक्की करने आई थीं. रिश्ता तय होने के बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत जारी रही लेकिन उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि उनकी शादी एक वीजा की मोहताज हो जाएगी.

वहीं पहले कई बार ऐसी खबरें सामने आई हैं, जब दोनों मुल्कों के लोगों ने शादी करने का फैसला लिया हो और बाद में उन्हें अलग होना पड़ा हो. इसी साल मार्च महीने में ऐसे ही एक जोड़े के अलग होने की खबर सामने आई थी. पाकिस्तान के अकबर दुरानी को एक हिंदू लड़की से प्यार हो गया था. दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया पर हुई थी. दोनों ने शादी की,लेकिन अकबर को मार्च महीने मे वापिस उसके देश पाकिस्तान भेज दिया गया था. वहीं हाल ही में भारतीय महिला उजमा के पाकिस्तान से वापिस लौटने की खबर भी सुर्खियों में रही थी. उजमा ने दावा किया था कि उसे पाकिस्तान में जबरन शादी को मजबूर किया गया था.

 

दिल्ली: SC/ST आयोग का गठन जल्द

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नई दिल्ली। राजधानी में दलितों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए दिल्ली सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के गठन के लिए तेजी से कार्यरत हो गई है. विधानसभा सत्र के दौरान दिल्ली के एससी/एसटी विभाग के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि सरकार इस मामले में अन्य राज्यों में स्थित आयोग का अध्ययन कर रही है और जरूरी जानकारियां जुटा रही है.

उन्होंने कहा कि इस आयोग के बनने के बाद राजधानी में दलित वर्ग पर होने वाले किसी भी अत्याचार, अपराध को रोकने में इस आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी. बनने वाला आयोग प्रशासन से भी जवाब-तलब कर सकता है. इसके अलावा तेलंगाना राज्य की तर्ज पर दिल्ली में भी दलित वर्ग के सहयोग के लिए एससी/एसटी वेलफेयर फंड के लिए एक्ट बनाया जाएगा. मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि तेलंगाना सहित अन्य राज्यों में गठित वेलफेयर फंड का अध्ययन कर रहे हैं, रिपोर्ट तैयार होते ही सरकार बिल लाएगी जो दलितों के लिए सुरक्षा और सम्मान के स्तर में इजाफा करेगा.

उन्होंने कहा कि दलित वर्ग के विकास के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं लाई गई हैं, लेकिन कई बार इन योजनाओं से जुड़े फंड का दूसरे मद में इस्तेमाल कर दिया जाता है. इस समस्या से निजात पाने के लिए दिल्ली सरकार इस एक्ट को लागू करने के लिए सक्रिय हो गई है, ताकि दिल्ली में रहने वाले दलित वर्ग के विकास में किसी तरह की कोताही न बरती जाए और उन पर किसी भी तरह का अत्याचार न हो सके.

अपनी विचारधारा को मूलरूप में पहचान दिलानी होगीः सूरजपाल चौहान

Dalit Lekhak manch

नई दिल्ली। दलित लेखक संघ ने दो जुलाई (रविवार) को ‘समकालीन दलित साहित्य की वैचारिकी के औजार’ पर विचार-विमर्श का आयोजन किया गया. जिसमें अनेक दलित विचारकों ने हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय कर्मशील भारती ने इस अवसर पर कहा कि हमें अपने मुहावरे, शब्द और विचार खुद ही गढ़ने होंगे जिससे समतामूलक समाज की परिकल्पना की जा सके. उन्होंने आगे कहा कि हमें सामाजिक बदलाव के लिए साहित्य लिखना होगा न कि बदला लेने हेतु.

मुख्य वक्ताओं में शामिल जगदीश प्रसाद जेंद ने कहा कि हमें पहले अपनी समकालीनता को पहचानना होगा कि एक दलित साहित्यकार की क्या जिम्मेदारी हो. क्योंकि यह हमारा भोगा हुआ समय और व्यथा है. प्रलोभनों से आंदोलन को होने वाले नुक्सान से बचाना होगा. इसके लिए जन-सामान्यों को इसकी वैचारिकी से अवगत करना अतिआवश्यक है.

कार्यक्रम का संचालन कर रहे हीरालाल राजस्थानी ने शुरुआती भूमिका बनाते हुए कहा कि हमें अपने नायकों के वैचारिक टूल्स से वर्तमान परिस्थितियों का समाधान निकालते हुए आगे बढ़ना होगा. उनके विचारों को दोहराने भर तक सीमित ना रहकर उन्हें जीवन में उतरना जरुरी. शीलबोधि ने कहा कि दलित साहित्य के नाम पर बहुत कुछ लिखा जा रहा है. जबकि दलित साहित्य कि वैचारिकी क्या है, किस तरह स्थापित हो और कैसे विचार को कार्यविन्त करना है. इस पर विचार, चिंतन और मंथन कर दर्शन में बदलने की आवश्यकता है तथा अपने कार्मिक विकास को समझना और जानना होगा.

डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अनेकों उत्पीड़न की घटनाओं को सिरे से समझना होगा जो लगातार बढ़ती जा रही हैं. दलित साहित्य में समताजनक भाषा के प्रयोग की जरुरत जान पड़ती है तथा गैर सामाजिक लोगों के प्रलोभनों से बचना होगा. डॉ. मुकेश मिरोठा ने कहा कि दलित विमर्श पर अब भी हम एक मत नहीं हैं. अतिवादियों ने डॉ. अम्बेडकर और गौतम बुद्ध को पूजापाठ तक सीमित करने की कोशिश की है. जबकि उनके मूल विचारों को समझना व मानना बहुत जरूरी है, वरना इससे आंदोलन वैचारिक रूप से कमजोर पड़ जायेगा.

रजनी तिलक ने दलित लेखन में समग्रता बनाये रखने की बात को प्रमुखता से रखा तथा साथ ही यह भी अपील कि के लेखक और कार्यकर्ताओं को एक साथ मिलकर अमानवीयता के खिलाफ आंदोलन करने होंगे. सूरजपाल चौहान ने कहा हमें अपनी विचारधारा को मूलरूप में पहचान दिलानी होगी क्योंकि यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है. हमें दिग्भ्रमिता से बचते हुए जातियों के खोल से बहार आना होगा. संजीव कौशल ने संक्षेप में अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी साहित्य के टूल्स जन संवाद से ही आते हैं. जब तक लेखनी में पैनापन नहीं आएगा तब तक सामाजिक बदलाव की अपेक्षा ख्याल भर ही है.

पूनम तुषामड़ ने अपने आलेखपाठ में कहा कि पिछले दो दशक में दलित साहित्य जितना समृद्ध हुआ है. यह दलित साहित्य का स्वर्ण काल कहा जा सकता है. डॉ. कुसुम वियोगी ने अपने वक्तव्य में कहा हमें अलग- अलग जातियों में बंटने से बचना होगा. चाहे सामाजिक हो, राजनैतिक हो या फिर साहित्य की ही बात क्यो ना हो! इन सब में डॉ. अम्बेडकर की वैचारिकी ही कारगर साबित होती है. डॉ. अम्बेडकर के मूल चिंतन से भटकी बिखरी छितरी जातियो को एक छतरी के नीचे आकर आज जुड़ना बहुत जरुरी है. दलित लेखको को वैश्वीकरण के दौर मे अपनी दृष्टि को सम्रगता से विस्तार देना होगा. तभी दलित लेखन की सार्थकता है.

इसके आलावा राजेंद्र कुमार, वेद प्रकाश, ड़ा .धर्मपाल पीहल, नरेंद्र भारती व रामसिंह दिनकर ने भी अपने-अपने विचार रखे. उपस्थिति बतौर महिला अधिकार अभियान की सम्पादिका कुलीना, श्री सुधीर, जसवंत सिंह जन्मेजय, एम. एल. मौर्य, सुनीता, कान्ता बौद्ध, अनुराधा कनोजिया, हरपाल सिंह भारती, दिनेश, सलमान, चंद्रकांता सिवाल, पूनम तुषामड़, पुष्पा विवेक, अंजलि भी मौजूद रहे. तथा शोधार्थियो ने भी भाग लिया अंत मे धन्यवाद ज्ञापन बलविंद्र सिंह बलि ने किया.

चलती बस में BJP नेता ने किया रेप

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महाराष्ट्र। बीजेपी नेताओं के कारनामें रूकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. अब एक संगीन मामला महाराष्ट्र के गडचिरौली से सामने आया है. बीजेपी के एक नेता का चलती बस में शारीरिक संबंध बनाने का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया है. वायरल वीडियो में सत्ताधारी बीजेपी का एक युवा नेता युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए दिखाई दे रहा है. उस युवती ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता ने नौकरी और शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया है.

यह मामला गडचिरौली जिले के चंद्रपुर इलाके का है. बस में लगे सीसीटीवी  कैमरे में यह पूरा मामला रिकार्ड हो गया है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि बीजेपी नेता रविन्द्र बावनथड़े एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बना रहा है. बस में कई यात्री सवार हैं और यह मामला बस की पिछली सीट का है.

वीडियो में मौजूद महिला ने पुलिस में रेप का केस दर्ज कराया. युवती का आरोप है कि उसे नौकरी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया गया. साथ ही आरोपी ने उससे शादी का वादा भी किया था वो उससे भी मुकर गया.पुलिस ने युवती की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है. आरोपी नेता रविन्द्र बावनथड़े अभी फरार चल रहा है. पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है. सत्ताधारी पार्टी के नेता से जुड़ा मामला होने के चलते पुलिस इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर रही है.

वहीं सेक्स वीडियो वायरल होते ही सियासी गलियारों में भूचाल आ गया. बीजेपी नेताओं ने इस पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है. वह मामले से बचने की कोशिस कर रहे हैं और किसी भी बयान को देने से लगातार बच रहे हैं.

 

देश के सबसे अमीर मंदिर में चोरी

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केरल। केरल की राजधानी तिरुअनंतपुरम के पद्मनाभस्वामी मंदिर से हीरे गायब होने की घटना एकदम चौकाने वाली हुई थी, जिसका मामला कोर्ट तक पंहुच गया है. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार यानी आज इसकी सुनवाई होगी. मंदिर ट्रस्ट की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में सोमवार को यह दावा किया गया था कि मंदिर के खजाने से आठ हीरे गायब हैं.

असल में मंदिर के संचालन की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है. इस मामले में सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम एमिक्स क्यूरी के तौर पर लगातार सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने उच्चतम न्यायालय में एक रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि 6 अगस्त 2016 को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी.

नियम यह है कि मंदिर में रत्नों की कीमतों का एक रजिस्टर मेंटेन किया जाता है. इस रजिस्टर में कम से कम 70-80 साल पहले के आभूषणों की कीमत का लेखा-जोखा है. सुब्रमण्यम की रिपोर्ट के मुताबिक गायब हुए रत्नों और आभूषणों की आधिकारिक कीमत 21.7 लाख रुपए है. हालांकि ये हीरे प्राचीन धरोहर बताए जा रहे हैं, ऐसे में इनका मार्केट रेट कई गुणा ज्यादा हो सकता है. खबरों के मुताबिक जो हीरे गायब हुए हैं, उनका इस्तेमाल भगवान पद्मनाभस्वामी के तिलक में किया जाता है और उन्हें गर्भगृह के पास ही तिजोरियों में रखा जाता था. अब सवाल यह खड़ा हो गया है की ये हीरे गये तो कहां गये क्योंकि मंदिर के खजाने तक किसी भी आम आदमी की पहुंच नहीं है.