अमरनाथ यात्रा: बस ड्राइवर सलीम को मिलेगा बहादुरी पुरस्कार

नई दिल्ली।  सोमवार 10 जुलाई  को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा के लिए जा रही बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया था. इस हमले में 7 लोगों की मौत हो गयी थी. गौरतलब है कि मरने वालों में ज्यादातर श्रद्धालु गुजरात के रहने वाले हैं. अगर ड्राइवर ने सही समय पर बस ना भगाई होती तो इस मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती थी. सेना के विशेष विमान से सूरत पहुंचे सलीम ने बताया कि “आतंकियों ने लगातार फायरिंग की, इसलिए मैं रुका नहीं, लगातार बस चलाता रहा. अल्लाह ने मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत दी और मैं वैसा करता गया.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने खुद ड्राइवर सलीम की सराहना की है. मुख्यमंत्री ने सलीम को बहादुरी पुरस्कार के लिए नामित करने की भी बात भी कही. इस बस के ड्राइवर सलीम के भाई जावेद मिर्जा ने वलसाड में मीडिया से बात की.

जावेद ने कहा कि सलीम ने उन्हें सोमवार रात को करीब 9.30 बजे फोन किया था और बस पर हुई फायरिंग के बारे में बताया था. उसने कहा था कि फायरिंग के दौरान उसने बस नहीं रोकी, उसने सिर्फ श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए गाड़ी चलाना जारी रखा.

रिलायंस JIO  के ग्राहकों का आंकड़ा लीक

मुंबई। रिलायंस  जियो  फ्री इंटरनेट और कालिंग की वजह से भारत में सबसे बड़ा नेटवर्क बनकर उभरा है. पर अब JIO  के ग्राहकों के आंकड़े लीक होने का मामला सामने आया है. इस आरोप में महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार रात राजस्थान के एक 35 वर्षीय व्यक्ति इंजीनियर को गिरफ्तार किया है जिसको ​रिलायंस जियो के आंकड़ें लीक करने में लिप्त पाया गया है. महाराष्ट्र साइबर पुलिस के अधीक्षक बालसिंह राजपूत ने बताया कि एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है जिससे पूछताछ की प्रक्रिया जारी है. आरोपी की पहचान ‘इमरान सिंपा’ के तौर पर की गई है और उसे राजस्थान के चुरू जिले से हिरासत में लिया गया है. उन्होंने कहा कि संदिग्ध कंप्यूटर साइंस में स्नातक की पढ़ाई बीच में छोड़ चुका है. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र साइबर पु​लिस के महानिरीक्षक बृजेश सिंह के नेतृत्व में जांच अधिकारियों ने उस स्थान पर ध्यान केंद्रित किया जहां से डाटा की चोरी हुआ. उन्होंने कहा कि चुरू में स्थानीय पुलिस से मदद मांगी गई और संदिग्ध को जांच शुरू होने के24 घंटे के भीतर हिरासत में लिया गया. उन्होंने बताया कि संदिग्ध के कंप्यूटर, मोबाइल और स्टोरेज उपकरण को जब्त कर लिया गया है और उसे जांच के लिये भेजा जाएगा. फिलहाल महाराष्ट्र साइबर पुलिस, नवी मुंबई पुलिस और रिलायंस जियो अधिकारी मिलकर राजस्थान में तलाशी और जब्ती अभियान चला रहे हैं.

गोपालकृष्ण गांधी उपराष्ट्रपति पद के सही उम्मीदवारःमायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उपराष्ट्रपति पद के लिए 18 विपक्षी पार्टियों द्वारा पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाए जाने की पहल का स्वागत किया. गोपालकृष्ण गांधी महात्मा गांधी के पड़पोते भी हैं।

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी योग्यता व बौद्धिकता स्वीकार करते हुए भाजपा और एनडीए जिम्मेदारी बनती है कि वे भी व्यापक देशहित में उन्हें स्वीकार करके उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी न खड़ा करें और गोपालकृष्ण गांधी निर्विरोध उपराष्ट्रपति पद पर चुने जा सकें.

मायावती ने कहा कि विपक्षी पार्टियों द्वारा आज की बैठक में उपराष्ट्रपति पद के लिये अपना संयुक्त उम्मीदवार चुनना काफी शुभ संकेत है. सत्ताधारी भाजपा व एनडीए को यह सब कतई अच्छा नहीं लगने वाला है, खासकर तब जबकि वे लोग विपक्षी एकता को तोड़ने व विपक्षी पार्टियों को राजनीतिक तौर से ब्लैकमेल करने के लिये अनेकों प्रकार के हथकण्डे लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं. सीबीआई, इनकम टैक्स व प्रवर्तन निदेशालय आदि सरकारी मशीनरी का भी खुलकर ग़लत राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं.

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि योगी सरकार द्वारा विधानसभा आमचुनाव के लगभग चार महीने के बाद आज विधानसभा में पेश किये गये बजट ने प्रदेश के करोड़ो आमजनता, गरीब, मजदूर, किसान व अन्य मेहनतकश लोगों के साथ-साथ बेरोजगार युवकों को बहुत ही मायूस किया है. इस बजट में कहा गया है कि ’हमें आर्थिक विपन्नता’ मिली परन्तु इसके निदान के मामले में केन्द्र की सहायता नहीं हासिल कर पाना वास्तव में केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा दोनों ही स्तर पर प्रदेश की जनता के साथ धोखाधड़ी है. मोदी सरकार ने यूपी में भाजपा सरकार बन जाने पर भरपूर केन्द्रीय सहायता देकर उत्तर प्रदेश को ’उत्तम प्रदेश’ बनाने का बार-बार वायदा किया था, परन्तु योगी सरकार के बजट में इसकी कोई झलक नहीं मिलती है, जो प्रदेश की 22 करोड़ जनता के लिये काफी दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण बात है.

बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी व राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं के खिलाफ विद्वेश की कार्रवाई आदि इसके पक्के प्रमाण हैं जबकि भाजपा के नेताओं व उनके समर्थकों आदि को हर प्रकार का अपराध करने की खुली छूट दे दी गयी है और उन पर कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा है, यह देश व लोकतंत्र के लिये चिन्ता की बात है.

किसान विरोधी है योगी का पहला बजट

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लखनऊ। योगी सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में अपना पहला बजट पेश किया. बजट पेश करने के बाद सीएम योगी ने इसे गरीब, किसान, महिलाओं, बेरोजगारों को समर्पित बजट करार दिया. लेकिन विपक्षी दलों की राय सीएम योगी राय से अलग रही. उन्होंने इस बजट को किसान विरोधी और निराशाजनक करार दिया.

वहीं बसपा विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि योगी सरकार का बजट निराशाजनक रहा. इसमें किसानों की अनदेखी की गई है. बजट पूरी तरह से खोदा पहाड़ निकली चुहिया रहा.

विधानसभा में नेता विपक्ष समाजवादी पार्टी के रामगोविंद चौधरी ने बजट पर कहा कि योगी सरकार का यह बजट किसान विरोधी है. इस बजट से कोई लाभ नहीं मिलेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार ने पूर्व की सपा सरकार द्वारा चलाई गईं कई लाभकारी योजनाओं को बदल दिया है. उन्होंने इस बजट को पूरी तरह से महिला विरोधी करार दिया.

विधानपरिषद में नेता विरोधी दल समाजवादी पार्टी के अहमद हसन ने कहा कि योगी सरकार द्वारा पेश किया गया बजट महज आंकड़ों का पुलिंदा भर है. बीजेपी सरकार आंकड़ों पर खेल रही है. सरकार कानून व्यवस्था पर जवाब नहीं दे पाई है. उन्होंने कहा कि सपा किसानों के मुद्दे सदन में उठाती रहेगी.

उन्होंने कहा कि बजट में किसानों, गरीबों, पिछड़ों की उपेक्षा की गई है. ये बजट महज केंद्र की योजनाएं यूपी में चलाने वाला ही है. बजट में बुंदेलखंड की उपेक्षा की गई. यही नहीं बजट में जितना घाटा लिखा है, उससे ज्यादा का घाटा होगा. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल को 200 और बुंदेलखंड को 300 करोड़ रुपए निराशाजनक हैं.

Wimbledon: डबल्स में टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की हार

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नई दिल्ली। गुरुवार को सानिया मिर्जा साल के तीसरे ग्रैंड स्लैम विंबलडन के महिला युगल वर्ग के दूसरे दौर में पहुंच गईं थीं. सानिया ने अपनी बेल्जियाई जोड़ीदार क्रीस्टीन फ्लिपकिंस के साथ जापान की नाओमी ओसाका और चीन की शुआई झांग को पराजित किया था.

पर आज सानिया मिर्जा और कर्स्टन फ्लिपकेंस को विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के महिला युगल में स्विट्जरलैंड की दिग्गज मार्टिना हिंगिस और युंग जान चेन के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. सानिया और बेल्जियम की उनकी जोड़ीदार को तीसरे दौर के मुकाबले में तीसरी वरीय जोड़ी के खिलाफ 71 मिनट में 2-6 4-6 से हार झेलनी पड़ी. सानिया की चुनौती हालांकि मिश्रित युगल में बरकरार है जहां वह क्रोएशिया के इवान डोडिग के साथ हिस्सा ले रही हैं.

जूनियर प्रतियोगिता में भारत की महक जैन ने लड़कियों के एकल वर्ग में क्रोएशिया की लिया बोसकोविच को 7-6 4-6 6-4 से हराकर दूसरे दौर में जगह बनाई. सिद्धांत बंठिया को हालांकि लड़कों के एकल के पहले दौर में फ्रांस के मातियो मार्टिन्यू के खिलाफ 6-3 2-6 5-7 से हार का सामना करना पड़ा.

 

SC ने केंद्र सरकार को फिर दिया झटका

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Supreme Court

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पशुओं के वध मामले में खरीदफरोख्त के लिए जारी की गयी अधिसूचना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए कहा है कि जब तक इसके नियमों में बदलाव नहीं किया जाता यह लागू नहीं होगा साथ ही कोर्ट ने अधिसूचना के दोबारा जारी होने के बाद लोगों को पर्याप्त वक्त मुहैया कराने का भी आदेश दिया है.

दूसरी ओर अदालत में केंद्र सरकार ने कहा कि इन नियमों पर राज्य सरकारों द्वारा बताए गए सभी सुझाव व आपत्ति विचाराधीन हैं. फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से ये नियम लागू नहीं किए जाएंगे और इसके बदलाव में करीब तीन माह का समय लग जाएगा. केंद्र सरकार ने आगे बताया कि राज्यों को पशुओं के लिए बाजारों की पहचान करने में तीन महीने का वक्त लगेगा और अगस्त के आखिर तक नियमों में बदलाव किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने सारी याचिकाओं का निपटारा किया और कहा कि जब नए नियम बनेंगे तो कोई भी कोर्ट में चुनौती दे सकता है. केंद्र सरकार द्वारा पशुओं को वध के लिए बेचने ओर खरीदने को लेकर जारी अधिसूचना के विरोध में दायर याचिका अपना पक्ष रखा गया.

केंद्र सरकार के इस नोटिफिकेशन का केरल समेत देश के कई राज्यों में विरोध किया गया है. केरल में तो विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में हिस्सा लेने से पहले विधायकों ने नाश्ते में गोमांस का सेवन कर विरोध जताया था.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पशु बाजार में वध के लिए मवेशियों को खरीदने और बचने पर रोक लगाने वाली अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था. हैदराबाद निवासी याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी और कहा था कि केंद्र का नोटिफिकेशन ‘भेदभाव पूर्ण और असंवैधानिक’ है क्योंकि यह मवेशी व्यापारियों के अधिकारों का हनन करता है. याचिकाकर्ता मोहम्मद फहीम कुरैशी ने पशु क्रूरता रोकथाम (जब्त पशुओं की देखभाल तथा इलाज) कानून, 2017 को भी चुनौती दी है. पेशे से वकील फहीम कुरैशी ने दलील दी है कि पशु क्रूरता रोकथाम (मवेशी बाजार विनियमन) कानून, 2017 तथा पशु क्रूरता रोकथाम (जब्त पशुओं की देखभाल तथा इलाज) कानून, 2017 मनमाना, अवैध तथा असंवैधानिक है.

याचिकाकर्ता ने 23 मई को जारी दोनों अधिसूचनाओं के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी है. फहीम कुरैशी ने उस नियम पर सवाल उठाया है, जिसमें कम उम्र के मवेशियों को तब तक बाजार में नहीं बेचा जा सकता, जबतक कि खरीदार एक हलफनामा भरे, जिसमें वह बताए कि वह एक किसान है, मवेशी का केवल कृषि उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगा और उसे छह महीनों तक नहीं बेचा जाएगा.

 

6000 NGO से छिन सकता है विदेशी दान पाने का लाइसेंस

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नई दिल्ली। विदेश से लाइसेंस पाने वालो के लिए बुरी खबर है. 6000 एनजीओ के विदेशी दान पाने का लाइसेंस खतरे में पड़ गया है. पांच साल के आय-व्यय का रिकार्ड नहीं देने पर गृह मंत्रालय ने उन्हें जारी किया है. आठ जुलाई को जारी नोटिस का 23 जुलाई तक जवाब मांगा गया है. ऐसा नहीं करने पर उनका लाइसेंस रद हो सकता है. जिन एनजीओ नोटिस भेजा गया है उनमें नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) भी शामिल हैं.

गृह मंत्रालय ने इस साल मध्य मई में 18,523 गैर सरकारी संगठनों को 14 जून तक अपने आय और व्यय का विवरण देने का अंतिम मौका दिया था. विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत इन एनजीओ को पांच साल (2010-11 से 2014-15) के रिटर्न दाखिल करने के लिए कहा गया था. गृह मंत्रालय के अनुसार सभी एनजीओ को बिना किसी जुर्माने के अपना सालाना रिटर्न भरने के लिए 14 जून तक का अंतिम मौका दिया गया था.

इस बाबत उन्हें ईमेल और एसएमएस अलर्ट भी भेजे गए थे. इसके बावजूद 5,922 संगठनों ने निर्धारित समय में अपना सालाना रिटर्न अपलोड नहीं किया. इन सभी एनजीओ को आठ जुलाई को भेजकर कहा गया है कि क्यों न इनका एफसीआरए पंजीकरण रद कर दिया जाए. इसका जवाब देने के लिए 23 जुलाई तक का समय दिया गया है अब देखना यह है कि इन सभी एनजीओ पर कैंची चलती है या नहीं.

अब घर बैठे दाखिल होगी आरटीआई

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नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने आरटीआई को आनलाईन कर दिया है अब से प्रत्येक कामकाज को ऑनलाइन कर दिया गया है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को ऑनलाइन आरटीआई सेवा rti.online.delhi.gov.in का शुभारंभ किया. कहा कि यह दिल्ली के लोगों के लिए ऐतिहासिक दिन है. समाजसेवी अन्ना हजारे और अरुणा रॉय ने आरटीआई के क्षेत्र में काफी काम किया है. सरकार द्वारा ई-आरटीआई सुविधा को लेकर केजरीवाल ने बताया कि अब किसी को भी दफ्तर आने की जरूरत नहीं है अब घर बैठे ऑनलाइन आरटीआइ फाइल कर सूचना हासिल कर सकेंगे. सरकार के प्रत्येक विभाग नोडल अधिकारी हैं, जो इसमें मदद करेंगे. उन्होंने निर्देश दिए कि जितनी भी आरटीआई आएं, उनके जवाब भी नेट पर डाले जाएं, इससे कई आरटीआई कम हो जाएंगी. अगर राशन दुकानों का प्रतिदिन का बही-खाता ऑनलाइन कर दें, तो राशन वालों को लगेगा कि वो पकड़ा जाएगा. सभी विभाग अपने मेजरमेंट बुक और बिल वेबसाइट पर डाल दे, तो सबको डर रहेगा कि कहीं पकड़े न जाएं. इस दायरे में मंत्री ही नहीं मुख्यमंत्री भी होंगे. दिल्ली के प्रशासनिक सुधार मंत्री कैलाश गहलोत ने बताया कि इस पोर्टल से सभी विभागों को लिंक किया गया है जिसके बाद सारी प्रक्रिया आनलाईन हो गयी है.

मैला ढोने वाली 44 दलित महिलाएं दिल्ली में करेंगी मंत्रोच्चार

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अलवर। अलवर में कभी मैला ढोने की कुप्रथा से जुड़ी दलित महिलाएं अब वेद मंत्रों का उच्चारण कर धार्मिक अनुष्ठान भी करवाएंगी. डेढ़ साल के अभ्यास के बाद अब अलवर की दलित महिलाएं बुधवार को दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मंत्रोच्चार करेंगी. इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शरीक होंगे.

अलवर में सुलभ इंटरनेशनल स्कूल ऑफ सोशल चेंज यू नॉन वायलेंस कार्यक्रम में नई दिशा संस्था से जुड़ी करीब 44 महिलाएं बुधवार को दिल्ली जाकर वेद मंत्रों का उच्चारण कर कार्यक्रम को शुरू करवाएंगी.

नई दिशा संस्था से जुड़ी नीतू अरोड़ा ने बताया कि यह कार्यक्रम दिल्ली में बुधवार (12 जुलाई) को सुबह साढ़े 10 बजे रफी मार्ग स्थित मावलंकर ऑडिटोरियम में होगा. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य अथिति होंगे. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा मुख्य रूप से इस कार्यक्रम में होंगे और इस कार्यक्रम में ही अलवर में कभी मैला ढोने वाली प्रथा से जुड़ी महिलाएं वेद श्लोकों को स्वस्वर सुनाएंगी.

इस अवसर पर सुलभ इंटरनेशनल के संचालक डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक द्वारा लिखित पुस्तक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया जाएगा. यह पुस्तक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित है.

न्यूज 18 के मुताबिक नई दिशा की कोऑर्डिनेटर नीतू अरोड़ा ने बताया कि 44 महिलाएं मंगलवार को दोपहर बाद 4 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी. इन महिलाओं के साथ इनके जिजमान भी जाएंगे. जिजमान का मतलब कि जिन परिवारों में यह मैला ढोने का काम करती थीं. इन महिलाओं को दिल्ली व बनारस के विद्वानों ने चार माह का प्रशिक्षण दिया है. इनमें अधिकतर महिलाएं न तो कभी स्कूल गईं न कभी किताब उठाई, लेकिन समारोह के लिए इन महिलाओं ने नियमित अभ्यास किया. इस संस्था में रहकर स्वरोजगार का काम कर रही हैं.

ललिता नंदा ने बताया की जब 2003 में इस संस्था से जुड़े थे. उससे पहले हम मैला ढोने का काम करते थे. धीरे-धीरे इस प्रथा को खत्म किया और आज हम देश-विदेश में होकर आए हैं और नए अनुभव लिए हैं. यहां की महिलाओं ने अमेरिका के न्यूयार्क में जाकर नामी मॉडल्स के साथ कैटवॉक भी किया है. उन्होंने बताया कि जब हम मैला ढोने का काम करते थे तो हमें इस काम से घृणा आती थी, लेकिन पेट पालने के लिए हमें यह काम करना पड़ता था और हमारा स्वास्थ्य भी खराब रहता था. जब से हमने यह काम बंद किया है तब से हम सुखी जीवन व्यतीत कर रही हैं.

भारत का अमेरिका, जापान संग नौसैनिक अभ्यास शुरू

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चेन्नई। भारतीय नौसेना ने अमेरिकी व जापानी नौसेनाओं के साथ सोमवार को सबसे बड़ा अभ्यास शुरू कर दिया है. बता दें की बंगाल की खाड़ी में पांच दिनों तक तीनों देश एक दूसरे से अपनी रणनीति साझा करेंगे. इससे तीनों के बीच सैन्य गठबंधन में मजबूती आने की संभावना है.

युद्धाभ्यास में 95 विमान, 16 जहाज व दो पनडुब्बियों को शामिल किया गया है. बंगाल की खाड़ी में अमेरिकी जहाज निमित्ज, गाइडेड मिसाइल क्रूज प्रिंसटन, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर हावर्ड, शूप, किड, ए पॉसीडान पी-8ए विमान व लॉस एंजिलिस की तेज रफ्तार पनडुब्बी की क्षमता का प्रदर्शन हो रहा है. इसके साथ जापान का जहाज जेएस आइजूमो, एसएस सजानी और भारत का जलस्वा व आइएनएस विक्रमादित्य भी अपने शौर्य का एहसास करा रहा है.

भारत के समुद्री क्षेत्र में अतिक्रमण करने के साथ जिस तरह से बीजिंग दक्षिण चीन सागर में अपनी हरकतें बढ़ा रहा है उसमें अमेरिका व जापान के साथ भारत की नौसेना का साथ आना अहम है. इससे चीन को कड़ा संदेश मिलेगा. अमेरिका के रियर एडमिरल विलियम डी बर्न जूनियर का कहना है कि साझा अभ्यास न केवल चीन के लिए रणनीतिक संदेश है बल्कि उत्तर कोरिया व उस जैसे कई और देशों को भी हमारी चेतावनी है. उधर भारत के फ्लैग अफसर ईस्टर्न नेवल कमांड के कमांडिंग इन चीफ एचसीएस बिष्ट ने कहा कि इससे हमें एक दूसरे की तकनीक व मजबूत पक्ष को समझने में सहायता मिलेगी.

रवि शास्त्री बने टीम इंडिया के कोच

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Ravi Shastri

नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री को भारतीय क्रिकेट टीम का कोच नियुक्‍त किया गया है. उन्हें दो साल के लिए टीम इंडिया का कोच बनाया गया है. शास्त्री वर्ल्‍ड कप 2019 तक टीम की कमान संभालेंगे. कोच की दौड़ में शास्‍त्री के अलावा वीरेंद्र सहवाग और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर टॉम मूडी का नाम चल रहा था, लेकिन सीएसी ने शास्त्री के नाम पर मुहर लगा दी, जो कप्तान विराट कोहली की भी पसंद हैं.

इससे पहले मंगलवार को उस समय भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के चयन में एक और मोड़ आ गया, जब सर्वोच्च अदालत द्वारा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) का कामकाज देखने के लिए बनाई गई प्रशासकों की समिति (सीओए) ने बोर्ड से कहा कि राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के नाम की घोषणा आज ही (मंगलवार को) की जाए. सूत्रों की मानें तो सीओए मानना था कि कोच के नाम की घोषणा के लिए किसी का इंतजार नहीं किया जाए और क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) अपना फैसला बोर्ड को बताए. पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की तीन सदस्यीय सीएसी ने सोमवार को कोच चयन को नाटकीय मोड़ देते हुए अपना फैसला रोक लिया था और कहा था कि वह टीम के कप्तान विराट कोहली से बात करने के बाद कोच के नाम का ऐलान करेगी. सीएसी ने सोमवार को पांच लोगों के इंटरव्यू लिए थे. इन पांच लोगों में रवि शास्त्री, वीरेंद्र सहवाग, रिचर्ड पायबस, लालचंद राजपूत और टॉम मूडी शामिल रहे. गांगुली ने सोमवार को कोच पद के लिए इंटरव्यू लेने के बाद कहा था, “हमने फैसला किया है कि हम कुछ समय के लिए कोच पद के नाम की घोषणा को रोकेंगे. हमें इसके लिए कुछ और दिनों की जरूरत है और साथ ही हम कुछ संबंधित लोगों से बात करना चाहते हैं. इसके बाद हम अंतिम फैसला लेते हुए कोच के नाम का ऐलान करेंगे. हम इस समय किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं हैं.” दरअसल, सीओए के अध्यक्ष विनोद राय हैं और इसके सदस्यों में विक्रम लिमिए और डायना इडुल्जी शामिल हैं. कोच की दौड़ में शास्त्री का नाम सबसे आगे माना जा रहा था. इसकी वजह कप्तान कोहली और शास्त्री के संबंध थे. कोहली, शास्त्री के पक्ष में खड़े थे. गौरतलब है कि अनिल कुंबले ने कप्तान कोहली से मतभेद की बात स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उनका कार्यकाल 18 जून को संपन्न हुए आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी तक का था, बोर्ड ने विंडीज दौरे तक उनके कार्यकाल को विस्तार दिया था, लेकिन, कुंबले ने अचानक इस्तीफा दे दिया और विंडीज दौरे पर भारतीय टीम के साथ नहीं गए.

दलित महिला का हुआ गैंगरेप, जिससे शिकायत की उसने भी किया शोषण

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crime against women

जयपुर। केंद्र सरकार और राज्य सरकारे महिलाओं की सुरक्षा के लिए आए दिन कड़े कानून बनाते है. लेकिन उन कानूनों से महिलाओं को सुरक्षा नहीं मिल रही है. आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाएं होती है. ऐसा ही एक मामला जयपुर के गढ़टकनेत से सामने आया. घर से खेत जाते समय युवती का अपहरण कर लिया. आरोपी उसे लेकर घूमते रहे और इस दौरान कई बार उसके साथ गैंग रेप किया. सीकर जिले के अजीतगढ़ थाना इलाके में दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है. इस संबंध में पीड़िता ने गांव के ही दो युवकों सहित आठ लोगों के खिलाफ अपहरण और ज्यादती करने का मामला दर्ज करवाया है.

पुलिस ने युवती का मेडिकल करवाया और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी. अजीतगढ़ थाना के प्रभारी मंगलाराम ने बताया कि गढ़टकनेत निवासी युवती ने रिपोर्ट दी है कि गिरिराज वर्मा और संदीप योगी सहित आठ लोग उसका अपहरण कर ले गए. उसे पहले जयपुर और यहां से अहमदाबाद सहित कई शहरो में ले जाकर उससे सामूहिक रूप से दुष्कर्म किया. बाद में आरोपी उसे जयपुर के सिंधी कैम्प बस स्टैंड पर छोड़कर फरार हो गए.

बदहवास हालत में युवती जैसे—तैसे घर पहुंची और परिजनों को आपबीती बताई. इस पर परिजन उसे लेकर आज थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया. पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर युवती का मेडिकल करवाया है. अब पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है. गौरतलब है कि युवती 29 मई को घर से खेत में जाने के दौरान लापता हो गई थी.

साउथ के सुपरस्टार दिलीप यौन उत्पीड़न में गिरफ्तार

केरल। साउथ के मशहूर अभिनेता दिलीप पर एक अभिनेत्री के अपहरण और यौन के आरोप लगे हैं. सोमवार को केरल पुलिस ने दिलीप को गिरफ्तार किया था. यौन उत्पीड़न मामले में अभिनेता दिलीप को 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. केरल के पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा ने बताया कि अभिनेता दिलीप को तमिल और तेलुगु फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री के अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में अभिनेता दिलीप मुख्य आरोपी हैं. पुलिस के पास उनके खिलाफ काफी सबूत हैं.

दिलीप की पैरवी के लिए अदालत में पेश हुए मशहूर वकील के. रामकुमार ने बताया कि अभिनेता पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत आरोप लगाया गया है. उन्होंने कहा कि दिलीप की जमानत के लिए अर्जी दायर की गई है. मुमकिन है, बुधवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई हो.

जानकारी के अनुसार 17 फरवरी को तमिल, तेलुगु फिल्मों की एक मशहूर अभिनेत्री का त्रिशूर से कोच्चि जाते हुए बीच में अपहरण कर लिया गया था. अपहरण किए जाने के करीब दो घंटे बाद अभिनेत्री को निर्देशक-अभिनेता लाल के घर के बाहर फेंक दिया गया था. इस घटना ने राज्य के लोगों को सकते में डाल दिया था. अभिनेता की गिरफ्तारी के बाद लोगों ने जगह-जगह प्रदर्शन कर उनका पुतला फूंका.

 

किताब में रोजे को बताया ‘संक्रमण वाली बीमारी’

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अहमदाबाद। किताबें बच्चों को सही गलत का फर्क समझाती है. किताबों पढ़ने से बच्चों को नई-नई जानकारियां मिलती है. लेकिन गुजरात में पढ़ाई जाने वाली हिंदी की किताब बच्चों को गलत जानकारी दे रही है. ये जानकारी सिर्फ गलत ही नहीं, एक समुदाय की भावना को भी ठेस पहुंचा रही है. गुजरात में पढ़ाई जा रही एक हिंदी की किताब में रोजे को एक संक्रामक रोग बताया गया है. गुजरात राज्य विद्यालय पाठ्यपुस्तक बोर्ड (जीएसएसटीबी) की उस किताब में लिखा है कि इस रोग में दस्त और उल्टी आती है. जिस किताब में ऐसा लिखा गया है वह वहां चौथी क्लास को पढ़ाई जा रही है.

यह घटना असामान्य इसलिए नहीं है क्योंकि इससे पहले जीएसएसटीबी की नौंवी की किताब में जीसस क्राइस्ट के बारे में अपमानजनक बात लिखी थी. किताब की प्रेमचंद की कहानी ईदगाह में यह गड़बड़ मिली है. किताब के तीसरे पाठ के अंत में रोजा शब्द का मतलब समझाते हुए लिखा गया है कि यह एक संक्रामक रोग है जिसमें दस्त और काई आती है.

इस मामले पर जब जीएसएसटीबी के चेयरमैन नितिन पेठानी से बात की तो उन्होंने इसको प्रिंटिग में हुई गलती बताया. उन्होंने कहा कि वहां रोजा की जगह हैजा होना था. लेकिन गलती से दोनों शब्द आपस में बदल गए. नितिन ने बताया कि 2015 से वह किताब पढ़ाई जा रही है और उसमें पहले कभी ऐसी गड़बड़ नहीं देखी गई. उन्होंने कहा 2017 वाले एडिशन में ही ऐसा हुआ है. नितिन ने कहा कि ऐसी कुल 15,000 प्रतियां छपी होंगी जिनको तुरंत ठीक करवा दिया जाएगा.

जीएसएसटीबी ने दावा किया है कि उनको अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है. लेकिन अहमदाबाद के एक संगठन ने बात को ऊपर तक लेकर जाने को कहा है. उस संगठन को चलाने वाले मुजाहिद नफीस ने कहा कि वह जीएसएसटीबी और राज्य सरकार के खिलाफ शिकायत करेंगे. मुजाहिद ने कहा कि धर्म को लेकर ऐसी गलतियां बर्दाशत नहीं की जाएंगी.

ग्रेजुएट्स के लिए नैनीताल बैंक में नौकरी

नैनीताल बैंक लिमिटेड में ग्रेजुएट्स के लिए कई पदों पर आवेदन निकाले गए हैं. इसके लिए विज्ञापन जारी हो चुका है. पदों का विवरण: क्लर्क आयु सीमा: न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 27 वर्ष शैक्षणिक योग्यता: मान्यता प्राप्त संस्थान से 45% अंकों के साथ स्नातक होना जरूरी. अंतिम तिथि: 24 जुलाई, 2017 ऐसे करें आवेदन: इच्छुक उम्मीदवार संबंधित वेबसाइट पर क्लिक करके सावधानीपूर्वक ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करें. उम्मीदवार आगे की चयन प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें. सैलरी: 40000 रुपये प्रति माह संबंधित वेबसाइट का पताः www.nainitalbank.co.in  

अमेरिकी सेना का विमान दुर्घटनाग्रस्त, 12 लोगों की मौत

वाशिंगटन।  अमेरिका के मिसिसिपी में सेना का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई. चालक दल के लापता सदस्यों की तलाश की जा रही है. मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार सैन्य विमान अपने अधिकार क्षेत्र में सोमवार शाम को दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 16 लोग सवार थे. मरीन कॉर्प्स ने दुर्घटना की पुष्टि कर दी है लेकिन इसके बारे में और जानकारी नहीं दी.

मरीन कोर के एक अधिकारी ने बयान में कहा कि सोमवार शाम एक विमान दुर्घटना का पता चला था. उन्होंने कहा, “हम कई उच्च तीव्रता वाले विस्फोटों से दूर थे.” विमान के मलबे करीब 5 मील के क्षेत्र में हाईवे के दोनों तरफ बिखरे हुए थे.  अधिकारियों के पास इस बात की जानकारी नहीं थी कि दुर्घटना का कारण क्या था और उड़ान कहाँ से शुरू हुई.

यह दुर्घटना सोमवार शाम चार बजे सनफ्लावर और लेफ्लोर काउंटी के बीच में हुई. दुर्घटनाग्रस्त विमान लॉकहीड मार्टिन केसी-130  चार इंजन वाला टैंकर लगा था, जिसका इस्तेमाल उड़ान के दौरान दोबारा ईंधन भरने और परिवहन के लिए होता है.

सावधान! फिर सक्रिय हो रहे हैं साधु-संत

ram mandir

आमतौर पर लोग अप्रतिरोध्य बनकर उभरी भाजपा की शक्ति के प्रमुख स्रोत के रूप में डॉ.हेडगेवार द्वारा स्थापित आरएसएस को ही चिन्हित करते हैं, जो गलत भी नहीं है. किन्तु हरि अनंत हरि कथा अनंता की भांति भाजपा की शक्ति के स्रोत भी अनंत हैं. संघ के बाद इसके दूसरे प्रमुख शक्ति के स्रोत में नजर आते हैं, वे साधु-संत जिनका चरण-रज लेकर देश के पीएम-सीएम और राष्ट्रपति-राज्यपाल तक खुद को धन्य महसूस करते रहे हैं.

मंडलोत्तर काल में गृह-त्यागी व अपार शक्तिसंपन्न प्रायः 90 प्रतिशत इसी साधू समाज का आशीर्वाद भाजपा के साथ रहा है. अगर साधु-संतों के प्रबल समर्थन से भाजपा पुष्ट नहीं होती, अप्रतिरोध्य बनना शायद उसके लिए दुष्कर होता. बहरहाल जिन संतों ने भाजपा को अप्रतिरोध्य बनने में अब तक बड़ा योगदान दिया. वे एक बार उसके राम मंदिर निर्माण अभियान में योगदान करने के लिए फिर सक्रिय हो उठे हैं. इसका अनुमान अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की नई खेप आने से उनमे बढ़ी सरगर्मियों से लगाया जा सकता है. विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति रखने के आरोपी रहे अभिरामदास के शिष्य एवं उत्तराधिकारी महंत धर्मदास ने पत्थरों की नयी खेप पहुंचने से उत्साहित होकर कहा है कि पत्थरों की आवक अत्यंत उत्साहजनक है और इससे जाहिर होता है कि मंदिर निर्माण की तैयारियां पुख्ता हैं. पूरा विश्व राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण चाहता है और उन्हीं लोगों को आपत्ति है , जो राजनीतिक और वैक्तिक स्वार्थ की वजह से मंदिर का विरोध कर रहे हैं.

वहीँ इस पर राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं शीर्ष पीठ मणिरामदास की छावनी के महंत नृत्यगोपालदास ने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा है कि केंद्र में मोदी एवं प्रदेश में योगी की सरकार होने से मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ है और प्रबल उम्मीद है कि राम मंदिर का निर्माण अति शीघ्र शुरू होगा. लेकिन साधु-संत राम मंदिर निर्माण में अपनी भूमिका अदा करने का मन बना चुके हैं. इसका बेहतर संकेत रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष एवं शीर्ष पीठ मणिराम दास जी की छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास के 79 वें जन्मोत्सव के अंतिम दिन छावनी परिसर में आयोजित संत सम्मलेन में ही देखने को मिल गया था.

वह सम्मलेन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के 31 मई की चर्चित व विवादित अयोध्या यात्रा के ठीक एक सप्ताह बाद आयोजित हुआ था. उसका संचालन रामकुंज के महंत डॉ.रामानंददास एवं अध्यक्षता जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद ने किया था. जिसमें भाजपा के नेता सुब्रह्मणयम स्वामी, केंद्र सरकार के पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानन्द, मंदिर आन्दोलन को धार दे चुकीं विदुषी ऋतंभरा, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास, रामायणी रामशरणदास, मध्य प्रदेश के मंत्री एवं बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक जयभान सिंह पवैया ने भी विचार रखे थे . लेकिन उक्त सम्मलेन जिनके भाषण में संतों की भावना का सम्पूर्ण प्रतिबिम्बन हुआ, वह थे विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ.प्रवीण तोगड़िया.

तोगड़िया ने राम मंदिर निर्माण में मोदी सरकार की ढिलाई पर निशाना साधते हुए कहा था कि राम जन्मभूमि पर राम मंदिर और देश में रामराज्य चाहिए. उन्होंने अयोध्या में ढांचा ध्वंस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेताओं को साजिशकर्ता बताये जाने पर रोष प्रकट करते हुए आगे कहा था कि ‘मौजूदा सरकार के अधीन काम करने वाली संस्था सीबीआई ने कैसे अपने आरोपपत्र में आडवाणी, ऋतंभरा, विनय कटियार जैसे मंदिर आन्दोलन के नायकों को साजिशकर्ता बताया. सीबीआई न्यायालय में एडीशनल चार्ज शीट प्रस्तुत कर बताये कि ध्वंस में मंदिर आन्दोलन से जुड़े नेताओं ने कोई साजिश नहीं की. ध्वंस की साजिश में कोई हिन्दू नेता जेल गया तो माना जाएगा कि देश में एक भी हिन्दू सुरक्षित नहीं है.

लेकिन उनका असल संदेश यह था- ‘राम मंदिर निर्माण का एक ही रास्ता है कि सरकार कानून पारित करे. राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है तो, संसद का संयुक्त अधिवेशन आहूत किया जाय. आपसी सहमति के लिए वार्ता करने की सलाह उसी तरह है कि बाप के हत्यारे से समझौते का सुझाव दिया जाय. राम तो हमारे बाप के बाप हैं, उनका मंदिर तोड़ने वालों की वकालत करने वालों से बात-चीत संभव नहीं. राम जन्मभूमि जमीन का टुकड़ा या कोई भवन का सवाल नहीं है, बल्कि यह सौ करोड़ लोगों की श्रद्धा का विषय है और इसका निर्धारण न्यायालय नहीं कर सकता.

बहरहाल तोगड़िया के उपरोक्त भाषण को, योगी के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण के नए अभियान का जो आगाज हो रहा है उसमें, साधु-संतों की नयी भूमिका से जोड़कर देखने से भिन्न कोई उपाय नहीं है. यह साफ़ दिख रहा है कि संघ व भाजपा से जुड़े तमाम लेखक-पत्रकार, धन्ना सेठ और मीडिया राम मंदिर निर्माण में अपना-अपना योगदान देने के लिए तत्पर हो गए हैं. ऐसे में उसके स्वाभाविक संगी संत ही पीछे क्यों रहते. लिहाजा मौका माहौल देखकर संतों ने भी भाजपा नेतृत्व को आश्वस्त कर दिया है.

बहरहाल यह काबिले गौर है कि संघ के राजनीतिक संगठन भाजपा की मुख्य राजनीतिक रणनीति हिन्दू धर्म-संस्कृति के उज्जवल पक्ष के गौरवगान तथा अल्पसंख्यक, विशेषकर मुस्लिम विद्वेष का प्रसार है, जिसके लिए वह मुख्यतः गुलामी के प्रतीकों के उद्धार का अभियान चलाती है. ऐसा करने के क्रम में उसे हिन्दू धर्म संस्कृति को गौरवान्वित करने व आक्रान्ता के रूप में मुसलमानों के खिलाफ विद्वेष प्रसार का अवसर मिल जाता है. इस अभियान के साथ आमजन का जुड़ जाना उतना विस्मित नहीं करता. किन्तु जो साधु-संत दिन-रात जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्य का उपदेश देते हैं, उनका गुलामी के प्रतीकों के उद्धार अभियान में भाजपा से सोत्साह जुड़ जाना जरुर विस्मित करता है.

साधु-संतों का गुलामी के प्रतीकों की मुक्ति अभियान से जुड़ना इतिहास का एक बड़ा परिहास ही कहा जायेगा. कारण, इन्हीं संतों के पूर्ववर्तियों ने जाति-व्यवस्था का निर्माण कर देश को इतना कमजोर कर दिया कि मुट्ठी-मुट्ठी भर विदेशी आक्रान्ताओं को इस देश को लूट का निशाना बनाने में कभी दिक्कत ही नहीं हुई. इनके पूर्ववर्तियों द्वारा बहुजनों के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई की अधिकत्तम संपदा देवालयों में जमा करने और उन देवालयों को वेश्यालयों में परिणित करने के कारण ही मुसलमान आक्रमणकारी हमला करने के लिए ललचायें, जिससे शुरू हुआ गुलामी का सिलसिला. परवर्तीकाल में मुसलमान और अंग्रेज शासकों ने भवनों, सड़कों, रेल लाइनों, शिक्षालयों, अस्पतालों और कल-कारखानों इत्यादि के रूप में भारत के चप्पे-चप्पे पर खड़ा कर दिए गुलामी के असंख्य प्रतीक.

लेकिन मुसलमान और अंग्रेज भारत में एक-एक करके खड़े होते उन गुलामी के प्रतीकों को देखकर भी संतों का ध्यान कभी भंग नहीं हुआ . वे ब्रह्म सत्य,जगत मिथ्या के सिद्धांत में आस्था रखते हुए दूध-मलाई , भांग-धतूरों और देवदासियों का भोग लगाने में मस्त रहे . लेकिन जो परजीवी साधु-संत इस्लाम और इसाई भारत में गुलामी के प्रतीकों से निर्लिप्त रहे, वे मंडल उत्तरकाल में सत्ता की लगाम बहुजनों के हाथों जाते देख चैतन्य हो गए. वे तुलसी, सूर, रामानुज स्वामी, भोलानाथ गिरी, बाबा गंभीरनाथ, तैलंग स्वामी, बामा क्षेप, रामदास काठिया बाबा जैसे पूर्ववर्ती संतों की परम्परा का परित्याग कर मिथ्या जगत पर ध्यान केन्द्रित किये.

उन्होंने बहुजनों की जाति चेतना का मुकाबला धार्मिक चेतना के राजनीतिकरण से करने के लिये सबसे पहले निशाना बनाया गुलामी के प्रतीक बाबरी मस्जिद को. बाबरी मस्जिद के टूटने के फलस्वरूप देश-विदेश में टूटे असंख्य मंदिर. टूटा मुंबई का शेयर बाजार, किन्तु सबसे बड़ी टूटन राष्ट्रीय एकता की हुई. किन्तु भारी नुकसान के विनिमय में जिस तरह ब्राह्मण वाजपेयी के नेतृत्व में सवर्णवादी सत्ता कायम हुई, उससे संतों को गुलामी के प्रतीकों की अहमियत का अहसास हो गया. अहसास हो गया इसलिए संत के रूप विद्यमान ब्राह्मणों का गिरोह एक बार फिर भीषणतम आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी से उपजी भूख-कुपोषण, अशिक्षा, विच्छिन्नता, राष्ट्र की सुरक्षा इत्यादि की पूरी तरह अनदेखी कर गुलामी के प्रतीकों की मुक्ति की लड़ाई के जरिये, भाजपा के मिशन-2019 को अंजाम देने में जुट गया है.

लेकिन जिस दिन गुलामी के प्रतीकों की मुक्ति–आन्दोलन से मिली सत्ता का उपयोग कर संघ का राजनीतिक संगठन निजीकरण-विनिवेशिकरण के जरिये आरक्षण को महज कागजों की शोभा बनाने में कामयाब हो जाएगा, उस दिन से संत फिर हरि-भजन में निमग्न हो जायेंगे. कारण, तब भारत आर्थिक रूप से विदेशियों का गुलाम बन जायेगा. तब संघ परिवार को गजनी-गोरी, बाबर-ऐबक जैसे पुराने विदेशी खलनायकों की जगह बहुराष्ट्रीय निगमों के रूप में अत्याधुनिक दुश्मन मिल जायेंगे. फिर स्वदेशी की चादर लपेट कर संघ परिवार दलित-आदिवासी-पिछड़ों के साथ मुसलमानों को भी गले लगाकर अत्याधुनिक दुश्मनों के खिलाफ ध्रुवीकरण की नयी पारी का आगाज कर देगा.

-एच.एल.दुसाध. लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.संपर्क- 9454816191

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष ने गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर मुहर लगाई

नई दिल्ली।  उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर मोहर लगाने के लिए आज हुई बैठक में महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी के नाम पर सहमती बन गयी है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में जेडीयू, आरजेडी, टीएमसी, सपा, बसपा समेत 18 दलों के प्रमुख शामिल थे. इस बार राष्ट्रपति चुनाव में अलग राह अपनाने वाली जेडीयू भी विपक्ष के साझा उम्मीदवार के साथ खड़ी दिख रही हैं. बता दें कि इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की तरफ से गोपाल कृष्ण गांधी को उतारने की बातें सामने आ रही थीं, लेकिन बाद में मीरा कुमार के नाम पर मुहर लगी. गोपालकृष्ण गांधी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं. वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते हैं. विपक्ष की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, सपा की ओर से नरेश अग्रवाल, बसपा की ओर से सतीश मिश्रा, नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला, जदयू की ओर से शरद यादव मौजूद थे. महात्‍मा गांधी के सबसे छोटे पौत्र गोपाल गांधी की पारिवारिक जड़ें गुजरात में हैं. इस लिहाज से विपक्ष का मानना है कि उनके उम्‍मीदवार बनने से पीएम मोदी के लिए भी राजनीतिक स्थिति सहज नहीं होगी. गौरतलब है कि नौकरशाह से लेकर राजदूत पद के लंबे अनुभव के धनी गांधी लेखन और बौद्धिक जगत में अपनी खास पहचान रखते हैं. जिनके नाम पर सभी की सहमति बन गयी है अब सभी की नजर भाजपा के उम्मीदवार पर होगी, जिसकी घोषणा जल्द ही होगी.    

कब्रिस्तान के गड्ढे में गिरी गाय, मुस्लिमों ने बचाई जान

मुरादाबाद। जहां एक तरफ गाय को लेकर चौतरफा राजनीति जारी है ऐसे में कुछ अच्छी खबरें भी सामने आ रही हैं. देश में गौहत्या को लेकर इस वक्त खूब बवाल वहीं यूपी के मुरादाबाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की है. वहां के एक कब्रिस्तान में घास चरने गई गाय क्रब के लिए खोदे गए गड्ढे में जा गिरी. जिसे वहां मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मेहनत के बाद बाहर निकाला.

जानकारी के अनुसार ये घटना रविवार 9 जुलाई की है. मुरादाबाद के शाहबाद रोड के पास स्थित कब्रिस्तान में दोपहर के समय एक गाय घास चरने गई थी. वहां बारिश के कारण कीचड़ भी हो रही थी ऐसे में गाय फिसलकर एक कब्र के पास गहरे गड्ढे में जा गिरी. करीब एक घंटे तक गाय गड्ढे में पड़ी रही. तभी वहां से गुजर रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 100 नंबर पुलिस को इसकी सूचना दी. इसके बाद लोगों ने गाय को निकालने की कोशिश शुरू कर दी. तभी 100 नंबर पुलिस व कोतवाली के नगर हल्का इंचार्ज अजीत सिंह भी मौके पर पहुंच गए.

गाय को निकालने के रेस्क्यू आपरेशन में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. तकरीबन डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद गाय को सकुशल बाहर निकाला जा सका. इसके बाद दोनों समुदाय के लोगों ने गले मिलकर आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की.

अमरनाथ यात्राः आतंकी हमले में 7 की मौत और 32 घायल

amarnath

अनंतनाग। सोमवार की रात दक्षिण कश्‍मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा से लौट रहे यात्रियों से भरी बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया. दरअसल ये बस पुलिस पार्टी और आतंकियों के बीच चल रही मुठभेड़ के बीच आ गई और इसमें सात यात्री मारे गए. यात्रियों से भरी बस गुजरात में रजिस्टर्ड थी, बस में चालीस यात्री सवार थे, मारे गए सात यात्रियों में पांच गुजरात के और दो महाराष्ट्र के हैं. करीब 15 यात्री जख्मी भी हुए जिनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है. ज्यादातर यात्रियों की हालत स्थिर बनी हुई है. दो को एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है, उन्होंने कायराना हमला बताया और कहा कि इस तरह के हमलों से आतंकवाद को खत्म करने के भारत के इरादों को कोई डिगा नहीं सकता. रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा कि इस हरकत से भारत के इरादे और मजबूत हुए हैं. हमले के बाद सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है. जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस हमले को कश्मीरियत और मुसलमानों के लिए एक दाग बताया है. श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है.

विपक्षी दल के नेताओं ने भी इस हमले की निंदा की है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि फिर ऐसा ना हो. नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारुक अब्दुल्ला ने इस हमले को कश्मीरियत के खिलाफ बताया है.

हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का नाम सामने आ रहा है. जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के आईजी मुनीर खान ने कहा है कि पाकिस्तान के आतंकी इस्माइल ने इस हमले की साजिश की. उनकी मानें तो लश्कर का आतंकी इस्माइल ही इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है. जम्मू कश्मीर पुलिस को शक है कि पाकिस्तान में इस हमले की साजिश रची गई और इसका मकसद देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था.

अधिकारियों की मानें तो यह भी हो सकता है कि यह हमला सुरक्षाबलों से बदला लेने के मकसद से अंजाम दिया गया हो. खास बात यह है कि हमला उत्‍तर प्रदेश के संदीप शर्मा की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद हुआ. संदीप कश्‍मीर में लश्‍कर का आतंकी था और पहला गैर-कश्मीरी आतंकी भी है जो पुलिस के हत्थे चढ़ा है.

नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, विहिप और जेकेएनपीपी सहित कई राजनीतिक दलों ने कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के विरोध में आज जम्मू बंद का आव्हान किया है. बंद को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बाद घाटी में तनाव को देखते हुए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. किसी तरह की अफवाहें ना फैलें, इसलिए ऐहतियातन सरकार ने ये कदम उठाया है.

हमले से बेखौफ अमरनाथ यात्रियों का अगला जत्था यात्रा के लिए रवाना हो चुका है. इस जत्थे में करीब 3 हजार यात्री शामिल हैं. पूरे मार्ग में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं.

ये पहला मौका नहीं है जब आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया है. इससे पहले भी वो इस तरह की कायराना हरकत करते रहे हैं. एक अगस्त 2000 को अमरनाथ यात्रा पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में 30 लोगों की जान चली गई थी. उस हमले को भी लश्‍कर ने ही अंजाम दिया था. लश्‍कर के आतंकियों ने पहलगाम में यात्रा के बेस कैंप को निशाना बनाया था.