शरद यादव के मंच से भाजपा के खिलाफ एकुजट हुए 17 दल
शरद यादव द्वारा आय़ोजित ‘साझी विरासत बचाओ सम्मेलन’ में एकजुट विपक्ष ने केंद्र के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है. दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस सम्मेलन में विपक्षी दलों के तमाम दिग्गज नेता मौजूद थे. शरद यादव को समर्थन देने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, सपा के रामगोपाल यादव, सीपीआई के सीताराम येचुरी, बसपा के वीर सिंह, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला सहित 17 दलों के दिग्गज नेता मौजूद थे.
बिहार के घटनाक्रम के बाद हालांकि इस सम्मेलन को शरद यादव बनाम नीतीश कुमार बना दिया गया था, लेकिन असल में यह केंद्र की राजग सरकार के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता थी, जो रंग भी लाई. सारे दिग्गज नेताओं ने भाजपा और मोदी पर जमकर हमला किया.
राहुल ने संघ पर वार करते हुए कहा कि इन लोगों ने तिरंगे को सलाम करना भी सत्ता में आने के बाद सीखा है. राहुल ने कहा कि संघ के लोग जानते हैं कि ये चुनाव नहीं जीत सकते हैं इसलिए हर जगह अपने लोगों को डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम लोगों को इनके खिलाफ एक साथ होकर लड़ना है. पिछले 2 साल में 1 लाख 30 करोड़ रुपए 10-15 करोड़पतियों का माफ कर दिया है. तमिलनाडु के किसान जंतर-मंतर पर नंगे होकर प्रदर्शन कर रहे हैं, किसान पूरे देश में मर रहे हैं.राहुल ने कहा कि मोदी जी मेक इन इंडिया की बात करते हैं लेकिन हर जगह मेक इन चाइन ही दिखता है. राहुल बोले कि जब गुजरात में इन्होंने मेरे ऊपर पत्थर फेंके तो मैंने उनसे बात करनी चाही. लेकिन जब मैं रुका तब पत्थर फेंकने वाले लोग भाग गए.
इस मौके पर शरद यादव ने कहा, बहुत बंटवारे हुए, ऐसा बंटवारा नहीं देखा. उन्होंने कहा कि लोगों को लग रहा था कि मैं खिसक न जाऊं, मंत्री से संत्री न बन जाऊं. उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब हिंदुस्तान और विश्व की जनता एक साथ खड़ी हो जाती है तो कोई हिटलर भी नहीं जीत सकता.
विपक्षी दलों ने एक मंच पर आकर यह ऐलान कर दिया है कि भाजपा और राजग के लिए 2019 का चुनाव आसान नहीं होने जा रहा है. लेकिन यह भी देखना होगा कि राज्य औऱ केंद्र में सत्ता से बाहर रहे इन दलों की एकजुटता कम तक कायम रहती है और पूरे देश को भगवा रंग में रंगने की जिद पाले बैठे नेता और दल भाजपा के लिए कितनी चुनौती पेश कर पाते है.
पीएम मोदी की नई मेट्रो रेल नीति जनविरोधी- मायावती
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बुधवार को घोषित नई मेट्रो रेल नीति को लेकर उन पर निशाना साधा है. मायावती ने इस मेट्रो रेल नीति जनविरोधी ठहराते हुए पीएम मोदी की तीखी आलोचना की. मायावती ने कहा कि इस नीति से उत्तर प्रदेश में खासकर कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद आदि में मेट्रो रेल की स्थापना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव हो गयी है. और लखनऊ में मेट्रो के संपूर्ण विस्तार पर भी संकट के बादल छा गए हैं. असल में नई मेट्रो रेल नीति में केंद्र सहयोग नहीं करेगी, साथ ही अब मेट्रो निर्माण में निजी क्षेत्र की भागेदारी को ज़रूरी कर दिया गया है.
पूर्व राज्यसभा सांसद ने आशंका जताई कि केंद्र सरकार के इस कदम से मेट्रो का विकास रुक जाएगा क्योंकि पूंजीपति वर्ग कम मुनाफे वाली परियोजनाओं में हाथ नहीं डालता है. मीडिया को जा़री प्रेस विज्ञप्ति में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किसानों की कर्ज़माफी व सभी लघु एवं सीमान्त किसानों के फसली ऋण माफ नहीं करके केवल एक लाख रुपये तक के हीं फसल ऋण माफ करने को ‘हर कदम किसानों के साथ विश्वासघात’ की संज्ञा दी. कुमारी मायावती ने कहा कि ऐसा करना भाजपा के शीर्ष नेताओं की चुनावी घोषणाओं व उस समय जा़री पार्टी के मेनीफेस्टो का ही उपहास है. मायावती ने इसे भाजपा सरकार की एक और जबर्दस्त चुनावी वादाखिलाफी कहा. ‘बिसाही डायन‘ के आरोप में महिला को जिंदा जलाया
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में बिसाही डायन के अंधविश्वास के नाम पर मानवता को शर्मसार करने वाली एक बार फिर से घटना को अंजाम दिया गया. जिले के पांकी थाना क्षेत्र में लोगों ने एक महिला पर डायन होने का आरोप लगाते हुए पहले तो जमकर पीटा. जब वह पिटाई से अधमरी हो गई तो उसे खींचकर जंगल में ले गए. इसके बाद उसे जिंदा जलाकर मार डाला.
घटना के बाद पुलिस महिला का शव बरामद कर लिया. इस मामले में 10-12 लोगों को नामजद किया गया है. पुलिस ने मुख्य आरोपी सह ठेकही गांव की निवासी सेवंती देवी सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
जानकारी के अनुसार ठेकही-अंदाग के सुदेश्वर नामक ग्रामीण के बच्चे की 13 अगस्त की रात में संभवत सर्पदंश से मौत हो गई थी. लेकिन सुदेश्वर के परिजनों ने गांव की कांति देवी को इसके लिए दोषी माना. उन्होंने महिला को घर से बाहर निकाला डायन करार देकर बुरी तरह पीटा. पिटाई से महिला बेहोश हो गई. बाद में आरोपियों ने महिला को जंगल में ले जाकर जला दिया.
घटना की सूचना पर पुलिस वहां बुधवार को पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया. वारदात को लेकर पांकी थाना में लगभग दर्जन भर लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. पुलिस ने मुख्य आरोपी सेवंती देवी और इलाके के एक ओझा को गिरफ्तार किया है. अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है.
असम, बिहार और बंगाल में बाढ़ से 1 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित, 120 लोगों की मौत
नई दिल्ली। भारत में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. बाढ़ के कारण असम, बिहार और पश्चिम बंगाल की हालत दयनीय हो गई है. बिहार में 14 जिलों में 74.44 लाख आबादी प्रभावित है. बाढ़ के चलते असम 11 लोगों की और बिहार में 72 लोगों की मौत हो गई हैं.
बाढ़ की हालात को देखते हुए असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलेंगे. राज्य के मुख्यमंत्री पीएम को बाढ़ की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा देंगे. अभी तक असम के 24 जिलों में 33.45 लाख लोग प्रभावित हैं और 11 लोगों की मौत हो चुकी हैं. राज्य की हालत ये है कि 3 हजार गांवो की 1.43 लाख हेक्टर फसल खराब होने की खबरें हैं बिहार और यूपी में बाढ़ ने कहर ढा रखा है. जिसकी वजह से अब तक बिहार में 72 लोगों की मौत हो गई है और वहीं, उत्तर प्रदेश में 33 लोगों की मौत हो चुकी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ बाढ़ प्रभावित बेतिया एवं वाल्मीकिनगर का हवाई सर्वेक्षण करने वाले थे, लेकिन खराब मौसम के कारण वे अपनी यात्रा नहीं कर सकें. वहीं पश्चिम बंगाल में अभी तक 32 लोगों की मौत हो चुकी हैं और 14 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. बाढ़ की वजह से यातायात, बिजली, ट्रेनों की आवाजाही ठप पड़ी हैं.
रोहित वेमुला केस को दफ़नाया जा रहा है!

दोनों ने हॉस्टल के कमरे में ख़ुदकुशी की. दोनों मामलों में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ- पहले जनवरी 2016 में, फिर दूसरा अक्टूबर 2016 में. शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर पी अप्पा राव हैं, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्रा संध्या रानी के मामले में गुंटूर मेडिकल कॉलेज के गायनेकॉलोजी प्रोफ़ेसर वीएए लक्ष्मी हैं. गुंटूर पुलिस ने एक महीने के अंदर पांच अन्य लोगों के साथ लक्ष्मी को गिरफ़्तार कर लिया, जिन पर लक्ष्मी की मदद करने का आरोप है. विरोधाभास देखिए कि साइबराबाद पुलिस रोहित वेमुला की मौत के 11 महीने बाद भी अप्पा राव और पांच अन्य नामज़दो लोगों को गिरफ़्तार नहीं सकी. ये तब है, जब रोहित के साथी डोनथा प्रशांत की ओर से दर्ज कराई गई एफ़आईआर कहीं ज़्यादा गंभीर है. इसकी वजह है. ये मामला आईपीसी की धारा 306 के तहत केवल आत्महत्या के लिए उकसाने भर का नहीं बल्कि प्रीवेंशन ऑफ़ एट्रॉसिटीज़ (पीओए) एक्ट में भी आता है. ये उन मामलों में लागू होता है जब पीड़ित दलित या आदिवासी हों. इसके तहत आत्महत्या के लिए उकसाने पर 10 साल की सज़ा उम्रक़ैद में बदल जाती है.
मगर विडंबना ये है कि पीओए के ये प्रावधान ही इस राजनीतिक मामले को लटकाने का बहाना साबित हुए.
साल भर बाद होने वाली रिव्यू मीटिंग में पिछले हफ़्ते साइबराबाद पुलिस कमिश्नर संदीप शांडिल्य ने दावा किया कि जब तक आधिकारिक तौर पर ये साबित नहीं हो जाता कि रोहित दलित था, तब तक इस मामले में कोई प्रगति नहीं हो पाएगी.
पुलिस कमिश्नर की ओर से इस स्पष्टीकरण की मांग ताज्जुब पैदा करती है क्योंकि रोहित के पास अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र था, जिसकी वैधता पर उसके जीवन में कभी सवाल नहीं उठे.
रोहित ख़ुदकुशी केस की जांच में अगर उसकी जाति की पहचान का सवाल अभी तक बना हुआ है तो इसकी वजह उसके राजनीतिक विरोधियों यानी भगवा ब्रिगेड का चलाया अभियान है, ज़ाहिर है कि एफ़आईआर में जिन लोगों के नाम हैं, उन्हें बचाने की कोशिश हो रही है.
हालांकि रोहित को उसकी अंबेडकरवादी राजनीति के चलते ही आत्महत्या के लिए मज़बूर किया गया, फिर ये अभियान चलाया गया कि रोहित ख़ुद दलित नहीं थे. हिंदुत्ववादी ताक़तों ने पहले तो इस बात का फ़ायदा लेने की कोशिश की कि रोहित के तलाक़शुदा पिता दलित नहीं थे.
फिर उन्होंने रोहित के भाई के जन्म प्रमाणपत्र के आवेदन में ख़ामी को भुनाने की कोशिश की. नतीजा ये हुआ कि केस लटक गया, जिसमें अप्पा राव के अलावा केंद्रीय मंत्री बंदारू दत्तात्रेय, दो स्थानीय बीजेपी नेता और दो एबीवीपी नेता आरोपी थे.
इसमें केंद्र ही नहीं तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्य के भी सत्ता पक्ष के साथ क़ानून का अनुपालन करने वाली मशीनरी के लोग शामिल थे.
हालांकि रोहित को गुंटूर में उनकी दलित और पेशे से दर्ज़ी मां राधिका वेमुला ने अकेले पाल-पोसकर बड़ा किया था, लेकिन विरोधियों ने उसके पिता और सिक्योरिटी गार्ड मणि कुमार वेमुला को तलाश लिया, जिनका अपने बच्चों से लंबे समय से कोई संपर्क नहीं था.
चूंकि मणि कुमार अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय से थे तो कहा गया है कि रोहित दलित नहीं हैं.
रोहित के पिता गुंटूर से 100 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर गुराज़ाला गांव में रहते हैं.
ये बहुत कुछ हिंदू पितृसत्तात्मक धारणा के मुताबिक था कि रोहित की जाति उसके पिता की जाति होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के 2012 के निर्देश के मुताबिक़ अंतर्जातीय विवाह के मामले में बच्चों की जाति का केवल पिता की जाति से मतलब नहीं होता.
इस फ़ैसले में कहा गया था, “ऐसी शादियों में बच्चे पर निर्भर है कि वह साबित करे कि उसका पालन-पोषण उसकी मां ने किया है जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है.”
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के दो प्रावधानों में बच्चा दलित या आदिवासी माना जा सकता है.
पहली बात कि उसने अपना जीवन सुख सुविधाओं में शुरू न किया हो, बल्कि वह भी अपनी मां के समुदाय के दूसरे लोगों की तरह ही अभाव, अपमान और बाधाओं का सामना कर रहा है.
दूसरी बात ये कि वह हमेशा उसी समुदाय का सदस्य रहा हो, जिस समुदाय की उसकी मां हों. न केवल समुदाय में बल्कि समुदाय के बाहर के लोग भी उसे मां के समुदाय का सदस्य मानें.
जिस व्यक्ति और चार अन्य दलित छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़े और जिसने अपनी आत्महत्या से पहले लिखे पत्र में लिखा था, “मुझे मेरी पहचान और नज़दीकी संभावना तक सीमित कर दिया गया है.”
रोहित वेमुला निश्चित ही सुप्रीम कोर्ट के दोनों प्रावधान पूरे करते थे, जिसके मुताबिक़ वे ग़ैरदलित पिता के बेटे होने बावजूद दलित हो सकते थे.
इसलिए कोई ताज्जुब नहीं कि जब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने गुंटूर ज़िले के ज़िलाधिकारी कांतिलाल डांडे से रोहित की जाति की पहचान को लेकर छानबीन करने को कहा तो उन्होंने अप्रैल में लिखित तौर पर बताया था कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड्स से ज़ाहिर होता है कि रोहित दलित थे.
डांडे ने आधिकारिक तौर पर कहा कि रोहित की मां दलित हैं, जिन्हें उनके बचपन में एक अन्य पिछड़ा परिवार ने अपना लिया था और तलाक़ के बाद वे गुंटूर की अपनी दलित बस्ती में बच्चों के साथ रहने आ गईं थीं.
इन तथ्यों की रौशनी में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने साइबराबाद पुलिस कमिश्नर को जून में लिखा था, “अदालत के सामने जितनी जल्दी हो सके जांच पूरी करके रिपोर्ट फ़ाइल कीजिए.”
लेकिन पुलिस ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की जल्द कार्रवाई की अपील की अनदेखी की, जिसके अध्यक्ष तब कांग्रेसी सांसद पीएल पुनिया थे.
हालांकि इस मामले में कार्रवाई न कर पाने के लिए जो ताज़ा बहाना दिया गया है वह गुंटूर के ज़िलाधिकारी का यू-टर्न है.
रोहित वेमुला की जाति पहचान के मामले को फिर से खोलने के बारे में डांडे ने आयोग को बताया कि जिलास्तरीय समिति को इस मामले में कुछ नई जानकारी मिली है और ऐसे में इस मामले में छानबीन करने में और भी वक़्त लगेगा.
हिंदुत्ववादी कैंप इस मामले को जिस जानकारी के आधार पर तबाह करना चाह रहा है, वह रोहित के छोटे भाई राजा वेमुला के 2014 में जन्म प्रमाण पत्र के लिए दिए गए आवेदन पत्र में मौजूद विसंगति है.
केंद्रीय सामाजिक न्याय के मंत्री थावर चंद गहलोत ने एक इंटरव्यू में कहा कि राजा के अन्य पिछड़ा वर्ग वाले आवेदन पर उनकी मां राधिका के हस्ताक्षर थे.
मगर गहलोत उस अहम तथ्य को नज़रअंदाज़ कर गए, जो गुंटूर के ज़िलाधिकारी ने अप्रैल में भेजी अपनी मूल रिपोर्ट में कहा था, जिसके मुताबिक़ राजा ने 2007 में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया था, ऐसे में उसके जन्म प्रमाण पत्र के आवेदन के लिए राजा की जाति की पहचान का मसला अप्रसांगिक ही था.
राई को पहाड़ बनाने की ये कोशिश तब भी ख़त्म नहीं हुई जबकि रोहित के दादा वेंकटेश्वरालु वेमुला ने राजा के आवेदन को लेकर हुई ग़लती के कारणों पर स्पष्टीकरण भी दिया था.
गहलोत के बयान का खंडन करते हुए वेंकटेश्वरालु ने गुंटूर ज़िलाधिकारी को जून में लिखा कि जन्म प्रमाणपत्र गुराज़ाला से लेना था, जहां राधिका तलाक़ से पहले रह रहीं थीं और राधिका से ख़ाली कागज़ पर हस्ताक्षर लिए गए थे और उन्होंने आवेदन लिखने के लिए एक अधिकारी को वह कागज़ सौंपा था.
इस मामले के कुछ आरोपियों को अंतरिम राहत देने के बाद हैदराबाद हाईकोर्ट ने पिछले आठ महीनों में उनकी याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं की है.
नतीजा ये हुआ कि शिकायतकर्ताओं को प्रभावशाली आरोपियों पर कार्रवाई न होने को चुनौती देने का मौक़ा नहीं मिला है.
इस बीच रोहित की ख़ुदक़ुशी की न्यायिक जांच कर रहे जस्टिस रूपनवाल आयोग ने उनकी दलित पहचान को ख़ारिज़ कर दिया. अगर जन्म प्रमाणपत्र के लिए हाथ से लिखे आवेदन में एक छोटी सी चूक क़ानूनी जाति प्रमाणपत्र को अमान्य कर रही हो तो यह न्याय का मखौल ही तो है.
प्रीवेंशन ऑफ़ एट्रॉसिटीज़ (पीओए) एक्ट के प्रावधानों का इस्तेमाल पहले ही रोहित की मौत को उसकी जाति की जांच में बदलने में हो रहा है.
अपने उत्पीड़कों के उलट रोहित ने अपनी मौत के बाद भी ख़ुद को कटघरे में रख रखा है.
अगर क़ानूनी तौर पर रोहित को अन्य पिछड़ा वर्ग का ही मान लें तो उनको आत्महत्या के लिए उकसाने वाले छह आरोपियों पर सामान्य अपराधिक क़ानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए.
ज़रा इस केस को रोहित के ही ज़िले की अन्य पिछड़ा वर्ग की मेडिकल छात्रा संध्या रानी की आत्महत्या से जोड़कर देखें, किस तेज़ी के साथ दो महीने पहले ही छह आरोपियों पर कार्रवाई हो चुकी है.
एक जैसे दो मामलों के अलग-अलग नतीजे, इससे ज़्यादा इस पर क्या कहा जा सकता है?
यह लेख मनोज मिट्टा का है. (ये लेखक के निजी विचार हैं. मनोज मिट्टा ‘द फ़िक्शन ऑफ़ फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग: मोदी एंड गोधरा’ के लेखक और ‘व्हेन ए ट्री शुक डेल्ही: द 1984 कार्नेज एंड इट्स आफ़्टरमाथ’ के सह लेखक हैं.)
साभारः बीबीसी हिंदी
जब सड़क पर ईद की नमाज नहीं रोक सकता, तो थानों में जन्माष्टमी कैसे रोकूं?: योगी आदित्यनाथ
लखनऊ। लखनऊ के केजीएमयू के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में संघ की एक पत्रिका का लोकार्पण करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमाज और जन्माष्टमी को लेकर सवाल उठाया. योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अगर मैं सड़क पर ईद के दिन नमाज पढ़ने पर रोक नहीं लगा सकता तो मुझे कोई अधिकार नहीं कि मैं थानों में जन्माष्टमी के पर्व को रोकूं.
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बाल गंगाधर तिलक दो कारण से जाने जाते हैं. उन्होंने गणेश पूजन को सांस्कृतिक उत्सव बनाया और गीता पर टीका लिखी. इससे सामूहिक आयोजन हुए. सामूहिक ताकत का अहसास हो तो भारत से टकराने की हिम्मत किसी में नहीं है. गणेश उत्सव गावों, शहरों में मनाए जाते हैं और इससे किसी को आपत्ति नहीं है. यहां क्रिसमस मनाइये कौन रोक सकता है. नमाज पढ़िये. कानून के दायरे में रहेंगे तो कोई नहीं रोकेगा. टकराव तो कानून का उल्लंघन करने पर होता है.’
योगी ने कार्यक्रम में कहा कि गाजियाबाद से हरिद्वार के बीच इस बार चार करोड़ कांवरियों ने यात्रा की. कांवर यात्रा पर बैठक के दौरान अधिकारियों ने कहा कि कोई डीजे या माइक नहीं बजेगा. तब हमने पूछा क्या यह शवयात्रा है? उनसे कहा कि माइक हर जगह प्रतिबंधित करो. कांवर यात्रा में डीजे और बाजा से प्रतिबंध हटाया गया. कांवरियों पर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा कराई गई. योगी ने कहा कि ईद पर सड़क पर नमाज नहीं रोक सकते हैं तो जन्माष्टमी पर थानों में आयोजन पर रोक क्यों?
समाजवादी सरकार पर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘यदुवंशी कहलाने वालों ने थानों में जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगा दी थी. श्रीकृष्ण के नाम पर एक ही तो पर्व है. भगवान कृष्ण का कीर्तन, स्मरण करते हुए न जाने किस पर प्रभाव पड़ जाए, पुलिस की व्यवस्था में सुधार हो जाए इसलिए भव्य आयोजन के निर्देश दिए.’
भाजपा-जदयू गठबंधन के खिलाफ शरद यादव ने किया शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी भी हुए शामिल

नई दिल्ली। बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने नीतीश कुमार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया हैं. गुरुवार (17 अगस्त) को उन्होंने दिल्ली में ‘सांझी विरासत बचाओ’ के नाम का सम्मेलन का आयोजन किया. इस बैठक में 17 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया.
सम्मेलन की शुरुआत में शरद यादव ने कहा कि देशभर में किसानों और दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है, देश भर में बेचैनी है. शरद यादव ने कहा कि मैंने किसी को नहीं बुलाया है फिर भी हजारों लोग मेरे साथ जुड़ रहे हैं. कार्यक्रम में राहुल गांधी गुलाम नबी आजाद, रामगोपाल यादव, सीताराम येचुरी और डी राजा भी पहुंचे हैं.
साझा विरासत के संविधान की आत्मा होने की बात पर जोर देते हुए शरद यादव ने कहा कि ऐसी बैठकों का आयोजन देश भर में किया जायेगा. बिहार के मुख्यमंत्री के भाजपा के साथ गठजोड़ किये जाने के फैसले पर अपनी असहमति से जुड़े सवालों पर जवाब देने से इनकार करते हुए जदयू के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि इस आयोजन के लिये फैसला हफ्तों पहले लिया गया जब उनकी पार्टी कमजोर विपक्षी समूह का हिस्सा थी. उन्होंने कहा कि साझा विरासत बचाओ सम्मेलन किसी के खिलाफ नहीं बल्कि देशहित में है. यह देश के 125 करोड़ लोगों के हित में है.
राहुल गांधी ने भी नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार हर संस्था में आरएसएस के लोगों को बिठाना चाहती है. जदयू के बागी नेता शरद यादव की ओर से बुलाए गए ‘साझा विरासत बचाओ सम्मेलन’ में राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस, प्रशासन, जज, मीडिया हर जगह अपने लोग बिठाने में लगी है. जिस दिन हर सरकारी संस्था के शीर्ष पदों पर आरएसएस के लोग बैठ जाएंगे तो वे हमे कहेंगे अब ये देश हमारा है. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया. कहा, प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं कुछ न कुछ झूठ बोल जाते हैं. राहुल गांधी ने कहा, ‘पीएम मोदी कहते हैं, हमें स्वच्छ भारत चाहिए, मैं कहता हूं हमे सच भारत चाहिए.’सम्मेलन में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि शरद यादव के नेतृत्व वाली जेडीयू ही असली जेडीयू है, नीतीश वाली जेडीयू तो बीजेपी (यू) है. नीतीश का दावा सही नहीं है. उन्होंने कहा कि आज अंग्रेज नहीं हैं, लेकिन उनके समर्थक हैं जो भारत छोड़ो आंदोलन के समय में शामिल नहीं हुए थे.
गुलाम नबी ने आगे कहा कि ये जो समय चल रहा है वो आपातकाल का बाप है. लोग सड़क पर भी बात करने से डर रहे हैं. इन्होंने टॉयलेट में भी जासूसी के लिए माइक्रोफोन लगाया हुआ है. उन्होंने कहा कि शरद यादव को बधाई भी दी कि उन्होंने मंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया.
DM ने सौंपी गोरखपुर हादसे की रिपोर्ट, बीते दो दिन में हुई 35 बच्चों की मौत
गोरखपुर। बाबा राघवदास (बीडीआर) मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय लापरवाही से बीते 48 घंटों के दौरान 35 अन्य बच्चों की मौत हो गयी है. जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि बीते 10 से 12 अगस्त के बीच करीब 35 बच्चों की जानें चली गयी हैं. बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में डीएम की ओर से दी गई रिपोर्ट नए विवाद को जन्म दे दिया है.
स्थानीय प्रशासन की जांच में मौतों का सही कारण नहीं बताया गया है. वहीं, ऑक्सिजन सप्लायर को जिम्मेदार ठहराया गया है. हैरानी की बात यह है कि अभी तक यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार इन मौतों के लिए ऑक्सिजन की कमी को जिम्मेदार मानने से इनकार करती रही है.
डीएम की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑक्सिजन की खरीद और रीफिलिंग से जुड़ी लॉग बुक में कई जगह ओवर राइटिंग है. रिपोर्ट में पुष्पा सेल्स को लिक्विड ऑक्सिजन की सप्लाइ रोकने का जिम्मेदार ठहराया गया है. इसके अलावा, तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ आरके मिश्रा और एनिसथीजिया डिपार्टमेंट के हेड डॉ सतीश कुमार की 10 अगस्त को कॉलेज से अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं. बता दें कि कुमार पर ही अस्पताल के विभिन्न वॉर्ड्स में ऑक्सिजन की सप्लाइ कायम रखने की जिम्मेदारी थी.
10 और 11 अगस्त को अस्पताल में 30 बच्चों की मौत हो गई थी. 10 अगस्त को ऑक्सिजन की सप्लाई बाधित हुई थी. हालांकि, यूपी सरकार का कहना है कि मौतों की वजह यह नहीं है. डीएम की रिपोर्ट में मौत का कारण तो नहीं बताया गया, लेकिन यह जरूर लिखा है कि डॉ. कुमार के अलावा चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल ने जानबूझकर ऑक्सिजन सिलिंडरों की खरीद का रेकॉर्ड नहीं रखा. यह भी कहा गया है कि डॉ. सतीश कुमार ने न तो कभी लॉग बुक चेक किया और न ही इस पर हस्ताक्षर किए.
रिपोर्ट कहती है, ‘बीआरडी अस्पताल के ऑक्सिजन सिलिंडर के स्टॉक बुक में कई जगह ओवरराइटिंग है. यहां तक कि जिस लॉग बुक को डॉ. सतीश द्वारा मेंटेन रखना था, उस पर न ही हस्ताक्षर हैं और न ही अंगूठे के निशान.’ रिपोर्ट के मुताबिक, लॉग बुक में सिलिंडरों से जुड़े आंकड़ों में अनियमितताएं वित्तीय गड़बड़ियों की ओर इशारा करती हैं.
अमित शाह पर भड़के दलित समाज ने फूंका शाह का पुतला
जिंद। हरियाणा के जुलाना में दलितों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का पुतला फूंका. दलित हित की मांगों को लेकर दलितों ने कस्बे में प्रदर्शन किया.
16 अगस्त बुधवार को दलित समुदाय के लोग जुलाना बस अड्डे पर इकट्ठा हुए. यहां से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मैन बाजार से होते हुए तहसील कार्यालय के पास पहुंचे. तहसील कार्यालय के सामने दलित समुदाय के लोगों ने अमित शाह का पुतला फूंका.
दलित महापंचायत के प्रदेशाध्यक्ष देवी दास ने कहा कि भाजपा सरकार दलित वर्ग की आवाज को दबाने का काम कर रही है. 2 अगस्त को रोहतक में जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आए हुए थे तो वह कुछ मांगों लेकर अमित शाह से मिलने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें किलाजफरगढ़ गांव के पास गिरफ्तार कर लिया.
दलितों ने इसका विरोध किया और कहा कि यह पूर्ण रूप से असंवैधानिक है. भाजपा सरकार जातीय भेदभाव करती है. लोकतंत्र में हर किसी को अपने अधिकारों की आवाज उठाने का अधिकार है.
केंद्र सरकार की नौकरियों में दलितों को 1300 में से सिर्फ 109 पद
नई दिल्ली। जबसे केंद्र में भाजपा सरकार आई है तबसे दलितों के साथ भेदभाव और बढ़ गया है. यह भेदभाव हर स्तर पर हो रहा है. सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक भेदभाव के अलावा अब रोजगार के मामले में दलितों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.
रोजगार में भेदभाव से जुड़ा यह मामला गृह मंत्रालय का है. जहां इंटेलिजेंस ब्यूरो में सहायक केंद्रीय खुफिया अधिकारी की 1300 भर्तियां निकली है. गृह मंत्रालय की वेबसाइट जारी विज्ञापन में इसका विवरण दिया गया है. इस विवरण में 1300 में 951 सीटें अनारक्षित वर्ग के लिए है. ओबीसी के लिए 184 सीट जबकि 109 सीट एससी और 56 सीट एसटी वर्ग के लिए दी गई है. विज्ञापन में दिव्यांगों के लिए कोई वैकेंसी नहीं है.
इसके अलावा एक्स सर्विसमेन की 130 भर्तियों में 95 अनारक्षित वर्ग के लिए पद है जबकि ओबीसी के लिए 19, एससी के लिए 11 और एसटी के लिए मात्र 5 पद दिए गए हैं.विज्ञापन में दिया गया उपरोक्त विवरण संवैधानिक रूप से अनुचित है. भर्ती के हिसाब से 1300 में 650 सीटें अनारक्षित वर्ग की बनती है. जबकि एससी 204 , ओबीसी 351 और एसटी के लिए 91 सीटों का अधिकार बनता है.
पूरा विज्ञापन देखन के लिए यहां क्लिक करेंगृह मंत्रालय के इस विज्ञापन में ओबीसी, एससी और एसटी को कुल मिलाकर 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है जबकि ये आबादी का 85 प्रतिशत हिस्सा है. इन सभी को 49.5 प्रतिशत आरक्षण देना इनका संवैधानिक हक है. अगर इससे कम आरक्षण मिलता है तो यह संविधान का उल्लंघन है. इस विज्ञापन में अनारक्षित वर्ग को लगभग 73 प्रतिशत सीटों का लाभ मिल रहा है.
इस तरह से सरकार दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ भेदभाव कर रही है. इससे यह भी साबित होता है कि सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है. सरकार अपने आप को दलित हितैषी बताती है लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है.
CBSE NET एग्जाम में थर्ड जेंडर का मिला विकल्प
नई दिल्ली। यूजीसी नेट एग्जाम का आयोजन इस साल 5 नवंबर को आयोजित किया जाएगा. ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस साल सीबीएसई यूजीसी नेट में कई अहम बदलाव किए गए है जिसमें से एक महत्वपूर्ण बदलाव जेंडर को लेकर भी किया गया है. सीबीएसई नेट की फॉर्म में अब थर्ड जेंडर का भी कॉलम होगा. अभी तक सिर्फ पुरुष और स्त्री का ही कॉलम होता था, लेकिन सीबीएसई ने ट्रांसजेडर्स की सहूलियत के लिए अब ऑनलाइन फॉर्म में लिंग वाले कॉलम में ट्रांसजेंडर का भी विकल्प दिया है. बता दे इससे पहले रेलवे रिजर्वेशन फॉर्म और इग्नू में भी थर्ड जेंडर के लिए कॉलम बनाया गया है.
सीबीएसई नेट के लिए 11 सितंबर तक आवेदन किया जा सकता है. वही12 सितंबर तक इसके लिफ फीस भर सकते है. इसके अलवा बोर्ड ने पिछले चार सालों में तीसरी बाद नेट की फीस बढ़ाई है. 2013 में जनरल कैटेगरी के लिए 400 रुपए थे. 2016 में इसे बढ़ाकर 600 रुपए कर दिए गए वही इस साल जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को 1000 रुपए शुल्क देना होगा.
नेट एग्जाम में तीन पेपर आयोजित है. पहले पेपर में जनरल कैटेगरी के अभ्यार्थी को 40 प्रतिशत, दूसरे पेपर में भी 40 प्रतिशत और थर्ड पेपर में 50 प्रतिशत माक्र्स लाने होते थे. लेकिन इस बार तीनों पेपरों में 40 प्रतिशत माक्र्स लाने होंगे.
मिलेगा गलती सुधारने का मौका
इस बार यूजीसी नेट एग्जाम में कैंडीडेट्स को ऑनलाइन त्रुटि सुधार करने का मौका दिया जाएगा. कई अभ्यर्थी जल्दबाजी में गलत एंट्री कर देते हैं. ऐसे में एग्जाम पास करने वाले कैंडीडेट्स के प्रमाण पत्र में कोई त्रुटि न रह जाए. इसलिए त्रुटि सुधारने का मौका दिया जाएगा. फॉर्म में गलती सुधारने के लिए 19 से 25 सितंबर तक का मौका दिया जाएगा.
आधार कार्ड जरूरी
इस बार फॉम फील करने के दौरान अभ्यार्थी को आधार कार्ड का नंबर भी मेंशन करना होगा. यूजीसी का मानना है कि आधार का उपयोग करने से आवेदकों के विवरण में प्रमाणिकता आएगी. इसमें परीक्षा केंद्र में सुविधाजनक तथा बिना परेशानी के आवेदकों के पहचान को सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी. आवेदक ऑनलाइन आवेदन करते समय अपनी आधार संख्या, नाम, जन्मतिथि एवं लिंग डालना होगा ताकि उसका पहचान और प्रमाणिकता सुनिश्चित की जाए.
मायावती ने दी भाजपा को नसीहत

लखनऊ। बसपा अध्यक्ष मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी को नसीहत दी है। पार्टी की ओर से जारी एक प्रेस कांफ्रेंस में बसपा प्रमुख के हवाले से कहा गया है कि भाजपा अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही आम चुनाव भी कराना चाहते हैं। इसलिए भाजपा को कम से कम अब तो जनहित के प्रति ईमानदार होकर अपनी कथनी और करनी में सत्यता लाकर जनहिताय का पाठ पढ़ लेना चाहिये.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से 15 अगस्त को दिये गए सम्बोधन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मायावती ने कहा कि देश की आमजनता वर्षों से भाजपा सरकार की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान के अन्तर की त्रासदी से पीड़ित रही है और अब यह इस अभिशाप से हर हाल में मुक्ति चाहती है. परन्तु मोदी सरकार तो इस मामले में हमें नया कीर्तिमान स्थापित करती हुई लगती है जिससे लोगों में निराशा फैलती जा रही है.
इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा बेंगलुरू में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान गोरखपुर मेडिकल कालेज अस्पताल में घोर सरकारी लापरवाही व उदासीनता के कारण अब तक लगभग 90 से अधिक हुई मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत पर यह कहना कि ’इतने बड़े देश में इस प्रकार की घटनायें होती रहती है.’ इनका यह स्तब्ध कर देने वाला बड़ा ही गै़र-ज़िम्मेदाराना बयान है. वास्तव में भाजपा जैसी सत्ता के नशे में चूर और अहंकारी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही ऐसा असंवेदनशील व अमानवीय बयान देने की हिम्मत कर सकता है.
मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार के दावे अनोखे व निराले हैं क्योंकि ये सभी जमीनी हकीकत से काफी दूर हैं. भाजपा सरकार अपने चौथे वर्ष में भी देश के करोड़ों ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं, बेरोजगारों, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों का कुछ भी ऐसा भला नहीं कर पायी है जिससे उनके जीवन में थोड़ा भी सुख व समृद्धि आयी हो. इसके विपरीत भाजपा सरकार की जातिवादी, द्वेषपूर्ण, संकीर्ण व साम्प्रदायिक नीतियों व कार्यकलापों से देश की दिशा व दशा दोनों सुधरने के बजाय बिगडत़ी ही चली जा रही है.
देश की आमजनता बड़े पैमाने पर व्याप्त सरकारी भ्रष्टाचार से पहले से ज्यादा पीड़ित दिखाई पड़ती है. जबकि अपने भ्रष्ट मंत्रियों आदि के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने से भाजपा सरकारें घबराती हुई नजर आ रही है. छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा व गुजरात आदि भाजपा शासित राज्य इसके खास उदाहरण हैं. वैसे भी केन्द्र सरकार ने ’लोकायुक्त’ का गठन पिछले लगभग सवा तीन वर्षों में नहीं किया हैं, इसलिये मोदी सरकार द्वारा सरकारी भ्रष्टाचार से लड़ने का दावा कितना ज़्यादा खोखला है, यह देश की आमजनता अच्छी तरह से समझ रही है.‘इंदिरा’ कैंटीन को ‘अम्मा’ कैंटीन बोल गए राहुल गांधी
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में इंदिरा कैंटीन की शुरुआत की. लेकिन इस कार्यक्रम में कुछ ऐसा हुआ जो कि हंसी का पात्र बन गया. कैंटीन लॉन्च करने के बाद राहुल जब भाषण दे रहे थे, तब उनकी जुबान फिसली और उन्होंने इंदिरा कैंटीन को अम्मा कैंटीन बोल दिया.
भाषण देते हुए राहुल ने कहा कि हर किसी को ‘अम्मा कैंटीन’ का फायदा उठाना चाहिए. हालांकि बाद में उन्होंने इसे ठीक करते हुए इंदिरा कैंटीन कहा. राहुल ने कैंटीन को लॉन्च करते हुए यहां खुद भी खाना खाया. राहुल ने कहा कि मुझे खुशी है कि अब यहां से कोई भी भूखा नहीं जाएगा. राहुल ने कहा कि ये अभी बस एक शुरुआत है, मुझे खुशी है कि कांग्रेस सरकार ने इसे लॉन्च किया है. इस दौरान राहुल ने कहा कि आप देखना कि कुछ दिनों में बीजेपी नेता भी यहां पर खाना खाते हुए दिखेंगे.
गौरतलब है कि प्रारंभिक चरण में, 101 कैंटीन हर दिन 5 रुपये में शाकाहारी टिफिन (नाश्ता) और 10 रुपये में दोपहर का भोजन और इसी दाम में रात का भोजन मुहैया कराएंगे. उन्होंने कहा, ‘हम इस कैंटीन का शहर के गरीब पर पड़े अच्छे और बुरे प्रभाव का अध्ययन कर राज्य के अन्य शहरों और कस्बों में भी इसी तरह के कैंटीन खोलेंगे.’
वरुण धवन ने जारी किया ‘जुड़वा 2’ का पोस्टर
नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने अपनी आने वाली फिल्म ‘जुड़वा 2’ का पोस्टर सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के लिए शेयर किया. पोस्टर में वरुण दो डिफ्रेंट अंदाज में नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि वरुण ने यह पोस्टर अपने पिता डेविड धवन के जन्मदिन के मौके पर साझा किया. फिल्म वर्ष 1997 में आई सलमान खान अभिनीत ‘जुड़वा’ का रीमेक है. ‘जुड़वा 2’ का निर्देशन भी डेविड धवन ने किया है. फिल्म की रिलीज डेट के साथ-साथ फिल्म की रिलीज डेट का भी खुलासा कर दिया गया है.
फिल्म में जैकलीन फर्नांडीज और तापसी पन्नू भी मुख्य भूमिका में हैं. वरुण ने सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा करते हुए लिखा, ‘दशहरा धमाका जुडवा 2 पोस्टर. राजा और प्रेम. यह मेरे पिता की 43वीं फिल्म है, जो (डेविड धवन) आज 65 साल के हो गए. कुछ घंटो में हम फिल्म का मोशन पोस्टर जारी करेंगे.’ फिल्म में वरण राजा और प्रेम नाम के दो किरदारों में नजर आएंगे और कुछ इसी अंदाज में वह फिल्म के पोस्टर में भी दिख रहे हैं. वरुण ने इस फिल्म के लिए कड़ी मेहनत की है.
पोस्टर में वरुण के दोनों किरदार एक टैक्सी से उतरते नजर आ रहे हैं और टैक्सी की नंबर प्लेट पर लिखा है 29\09\2017 (यह फिल्म की रिलीज तारीख है). ‘जुडवा 2’ में अनुपम खेर भी मुख्य भूमिका नजर आयेंगे.

