
भाजपा के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ मारपीट

अपडेटः मुजफ्फर नगर रेल हादसे में 40 से अधिक की मौत सैकड़ों घायल

मुजफ्फर नगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में देर शाम हुए भयंकर रेल हादसे ने 23 लोगों की जान ले ली है। इस दुर्घटना में 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. दुर्घटना उत्कल एक्सप्रेस की 13 बोगियों के रेल पटरी से उतर जाने के कारण हुआ. उत्कल एक्सप्रेस पुरी-हरिद्वार रुट पर चलती है. घटना मुजफ्फरनगर जिले के खतौनी में घटी. हालांकि इस हादसे के बारे में रेलवे और यूपी पुलिस के आंकड़े अलग-अलग हैं. यूपी पुलिस मरने वालों की संख्या 40 के आस पास बता रही है. दुर्घटना इतनी भयावह थी कि ट्रेन में फंसे लोगों को बोगी काटकर निकालना पड़ा.
घटना को लेकर आम लोगों में काफी गुस्सा है. लोग इसे रेलवे की लापरवाही बता रहे हैं. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मरने वालों के लिए 2 लाख और घायलों के लिए 50 हजार रुपये देनेहकी घोषणा की है. तो वहीं रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने मरने वालों को 3.5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है. गौरतलब है कि नई सरकार में रेलवे अधर में लटक गया है और रेलवे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है. इस दुर्घटना पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गहरा दुख जताया. एक प्रेस रिलिज जारी कर उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से पीड़ितों को तत्काल राहत देने, उनका बचाव करने और घायलों के बेहतर और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने की मांग की.कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के 6 डिब्बे पटरी से उतरे, 6 की मौत और कई घायल

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बड़ी ट्रेन दुर्घटना हुई है. मुजफ्फरनगर में खतौली के पास कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है. इस दुर्घटना में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की सूचना है. ये ट्रेन पुरी से हरिद्वार जा रही थी. ट्रेन के 6 डिब्बे पटरी से उतर गए हैं.
पुलिस और प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंच गए है. राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू कर दिए गए हैं. घायलों को निकट के अस्पताल में पहुंचाया गया है. इनमें कई की हालत गंभीर है.
इस रेल हादसे में अभी तक छह लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों यात्रियों के घायल होने की खबर है. बता दें कि ट्रेन पुरी से हरिद्वार जा रही थी. हताहतों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. हादसा शनिवार की शाम 5 बजकर 46 मिनट पर हुआ है.
हादसे की तस्वीरों से कई लोगों के हताहत होने की आशंका है. हालांकि अभी तक कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिली है. हादसा खतौली के रिहाइशी इलाके में हुआ है. ट्रेन आज अपने समय से आधे घंटे लेट चल रही थी. दोपहर 12 बजे के पास इसे कोशी कालान स्टेशन पहुंचना था. हरिद्वार पहुंचने का इसका समय रात के 9 बजे है.
बता दें कि यह ट्रेन पुरी से हरिद्वार जाती है. कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस इस सफर में कई राज्यों से होकर गुजरती है. इनमें उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा शामिल हैं. यह ट्रेन रोजाना रात 9 बजे पुरी से चलती है.
रोती हुई बच्ची की वीडियो देख भावुक हुए विराट-शिखर
कोलंबो। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने इस बार सोशल मीडिया पर एक अहम मामला उठाया है. इन दोनों खिलाड़ियों ने एक बच्ची का रोते हुए वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस वीडियो में बच्ची को उसकी कोई महिला परिजन (शायद बच्ची की मां) काउंटिंग यानी गिनती सिखाने की कोशिश कर रही है. बच्ची इस दौरान रो रही है और यही बात विराट और शिखर को चुभ गई. पढ़ाई के दौरान बच्ची शिकायत कर रही है कि उसे बिना डांटे हुए आराम से पढ़ाया जाए, जबकि उसके साथ शारीरिक हिंसा भी की जा रही है.
इस बारे में शिखर ने लिखा- ‘आज तक मैंने जितने भी वीडियो देखे हैं, यह उनमें सबसे ज्यादा परेशान करने वाला है. परिजन होने के नाते हमें यह जिम्मेदारी मिलती है कि हम अपने बच्चों को आगे बढ़ाएं. हम बच्चों को मजबूत बनाने के लिए हैं. हम बच्चों को उनके सपनों तक पहुंचाने के लिए हैं. मुझे यह बात बहुत खराब लगी कि वीडियो में महिला बच्ची को मार रही है, रुला रही है और परेशान कर रही है ताकि बच्ची पांच तक गिनती सीख सके. किसी भी इंसान की पहचान इससे होती है जब उसके हाथ में कुछ करने की ताकत होती है और वह इस ताकत का इस्तेमाल अपने से कमजोर लोगों पर कैसा करता है.
जीवन एक चक्र की तरह होता है और मैं कामना करता हूं कि यह खूबसूरत छोटी लड़की एक दिन मजबूत महिला बने! सोचो, तब क्या होगा जब यह बच्ची बड़ी और मजबूत हो जाएगी और यह महिला बूढ़ी और कमजोर हो जाएगी? तब इसी छोटी लड़की की मर्जी चलेगी! तब क्या यह महिला उस बच्ची से थप्पड़ खाकर खुश रहेगी? इस महिला को बच्ची के साथ ऐसा व्यवहार करने पर खुद पर शर्म आनी चाहिए. यह महिला इस धरती पर सबसे कायर और कमजोर इंसान है, जो इस मासूम बच्ची पर ताकत आजमा रही है. बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाना चाहिए न कि डरा, धमका कर. शिक्षा बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए बच्चे की आत्मा को घायल नहीं किया जाना चाहिए.
विराट ने भी इंस्टाग्राम पर यह पोस्ट शेयर कर इसे दर्दनाक बताया है. उन्होंने लिखा है- बच्ची को सिखाने वाली अपने अहम को आगे रख रही है और बच्ची के दर्द और भावनाओं को नहीं समझ रही है. इसमें प्यार का नामोनिशान नहीं है. यह काफी दुखद और आश्चर्यजनक है. बच्चे को धमकाकर नहीं सिखाया जा सकता है. यह पीड़ादायक है.
उम्मीद है कि जो परिजन बच्चों को किसी भी तरह सिखाने में यकीन रखते हैं, वे विराट और शिखर की इन बातों से सीख लेंगे.
29 साल बाद रिलीज होगी गुलजार की ‘लिबास’
नई दिल्ली। गुलजार के फैंस के लिए एक अच्छी खबर है. हाल ही में अपना 83वां जन्मदिन मनाने वाले गुलजार को यूं तो उनके जन्मदिन पर कई सारे अलग-अलग तोहफे मिले होंगे लेकिन अब उनको एक अनमोल तोहफा मिलने वाला है.
दरअसल, खबर है कि 1988 में बनाई गई गुलजार की फिल्म ‘लिबास’ अब भारत में रिलीज की जाएगी. कहा जा रहा है कि यह फिल्म अडल्ट मुद्दों पर आधारित थी और इसी वजह से इस फिल्म को उस दौर में रिलीज नहीं किया गया था.
बता दें कि इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी ने अभिनय किया था. हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के बीच मनमुटाव के चलते फिल्म को रिलीज नहीं किया गया था. अब खबर आ रही है कि जाने माने ट्रेड एनालिस्ट विकास मोहन के बेटे अमुल और अंशुक मोहन इस फिल्म को रिलीज करने वाले हैं.
इस फिल्म में नसीर और शबाना के अलावा राज बब्बर, सुषमा सेठ, उत्पल दत्त, अनु कपूर और सविता बजाज भी मुख्य भूमिका में हैं. फिल्म में आर.डी.बर्मन ने संगीत दिया था. अगर आपको पुराने गाने सुनने का शौक है तो आपने ‘सीली हवा छू गई’ गाना जरूर सुना होगा. यह गाना इसी फिल्म का है. यह फिल्म इस साल के अंत तक रिलीज की जाएगी.
कॉल ड्रॉप होने पर टेलीकॉम कंपनियों पर लगेगा 5 लाख रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक(ट्राई) ने कॉल ड्रॉप को लेकर कड़े नियमों की घोषणा की और कहा कि जो दूरसंचार ऑपरेटर मानदंडों को पूरा नहीं करेंगे, उन पर कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. कॉल ड्रॉप प्रतिशत को अब पूरे सर्किल के औसत के बजाय मोबाइल टावर के स्तर पर मापा जाएगा. ट्राई की ओर से मोबाइल कॉल की गुणवत्ता के बारे में निर्धारित नए नियमों में ये कड़ी शर्तें लादी गई हैं. ये नियम एक अक्टूबर से लागू होंगे.
ट्राई ने कहा कि अगर सेवा प्रदाता नए शुरू किए गए कॉल ड्रॉप की दर (डीसीआर) बेंचमार्क तक पहुंचने में नाकाम होते हैं तो उन पर ग्रेडेट फाइनेंसियल डिसइंसेटिव कार्रवाई की जाएगी, जिसके तहत जुर्माना लगाया जाएगा. जुर्माने की रकम इस पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बेंचमार्क से कितनी दूर हैं.
ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा कि हमने 1-5 लाख रुपए तक के वित्तीय दंड का प्रावधान किया है. नेटवर्क के प्रदर्शन के आधार पर यह गे्रडवार जुर्माने की व्यवस्था है.
इसमें बताया गया कि बेंचमार्क को पूरा नहीं करने पर सर्विस प्रोवाइडर पर प्रत्येक पैरामीटर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. नियामक ने कहा, ‘अगर लगातार दो तिमाहियों तक कंपनी बेंचमार्क पर खरा नहीं उतरती तो जुर्माने की रकम डेढ़ गुनी हो जाएगी और दो तिमाही से भी ज्यादा वक्त बीतने पर सुधार नहीं हुआ तो जुर्माने की रकम दो गुनी हो जाएगी.’
ट्राई ने कहा कि ‘सेवाओं की गुणवत्ता’ को लेकर संशोधित विनियमन 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा. संशोधित नियमों के तहत किसी दूरसंचार सर्किल में 90% मोबाइल साइटें, 90% समय तक, 98% तक कॉल्स को आसान तरीके से चलाने में सक्षम होनी चाहिए. यानी कुल कॉल्स में से दो प्रतिशत से अधिक ड्रॉप की श्रेणी में नहीं आनी चाहिए. किसी खराब स्थिति या दिन के व्यस्त समय में एक दूरसंचार सर्किल के 90 प्रतिशत मोबाइल टावरों पर कॉल ड्रॉप की दर 3 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए.
SC/ST, OBC संघर्ष समिति ने BHU में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले का किया खुलासा
वाराणसी। अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति ने काशी हिन्दू विश्वद्यालय में प्रेस कांफ्रेस की. इस प्रेस कांफ्रेस में विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति-प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी का खुलासा किया. इससे पहले छात्रो ने यहां विरोध प्रदर्शन भी किया. छात्र पिछले एक महीने से विश्वविद्यालय प्रशासन के विरोध कर रहे थे. विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति-प्रक्रिया में गड़बड़ी के खिलाफ किया गय.
अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति ने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में आरक्षण नियमों की घोर अवहेलना, रोस्टर में गड़बड़ी, संभावित रोस्टर के द्वारा पदों की हेराफेरी कर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को समाप्त करके वंचित वर्गों के संवैधानिक आरक्षण को निष्प्रभावी किया जा रहा है. अभ्यर्थियों के दस्तवेजों की जांच व साक्षात्कार के लिए किए जाने वाले चयन(shortlisting) में इस बार भयंकर गड़बड़ियां की जा रही हैं.
प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे पदों में नियुक्तियां बिना किसी नियम और कायदे के कानून की धज्जियाँ उड़ा कर की जा रही हैं. ये सभी नियुक्तियां पूरी तरह असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी हैं जैसे पिछली बार लोग निकाले गए थे, ये गैर कानूनी नियुक्तियां भी उसी श्रेणी मे आती है।
एक तरफ जहां अनारक्षित वर्ग के कुल सीटों की संख्या 103 है, वहीं एससी के लिए सिर्फ 03 तो ओबीसी और एसटी के लिए शून्य हैं. छात्रों ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय हुई अनियमतताओं को लेकर प्रशासन से लिखित में सवाल भी पूछें हैं. छात्रों का कहना है कि बिना यूजीसी के अनुमति के रोस्टर प्रणाली में परिवर्तन लाया गया है जो की साफ तौर पर अनुचित है. यही नहीं बल्कि कुल आरक्षित पदों की संख्या 241 से घटाकर 41 कर दी गई है.
उनका कहना है कि डीओपीटी 2006 में नहीं लागू होने पर इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय मे नियुक्तियों पर रोक है, लेकिन काशी हिन्दू विश्वविद्यालाय मे नहीं है. नई 13 पॉइंट रोस्टर प्रक्रिया को डीओपीटी 2006 के अनुसार 02/07/1997 से लागू नहीं किया जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन बैक लॉग वैकेंसी भी नहीं निकाल रहा है.
संघर्ष समिति ने कहा कि काशी हिन्दू विवि में विभिन्न पदों की नियुक्तियां निर्धारित योग्यता को ताक पर रखकर की जा रही हैं. चिकित्सा विज्ञान संस्थान के हृदय रोग विभाग में ऐसे दो लोगों को पहले असिस्टेंट प्रोफेसर और फिर असोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया जो दोनों पदों के लिए मेडिकल कौंसिल आफ इण्डिया और यूजीसी द्वारा निर्धारित योग्यता के मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं.
कार्डियोलाजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर का एक और एसोसिएट प्रोफेसर के तीन पद एक साथ विज्ञापित किये गये थे. जिसमें एसोसिएट प्रोफेसर के एक पद को स्क्रूटनी के समय और एक पद को इंटरव्यू के बाद मनमाने तरीके से डाउन ग्रेड करके असिस्टेंट प्रोफेसर में तब्दील कर दिया गया तथा डा. धर्मेन्द्र जैन और डा. विकास अग्रवाल की गैर-क़ानूनी ढंग से नियुक्तियां कर दी गयीं. ये दोनों ऐसे आवेदक हैं जो अपने पद के लिए आवश्यक अर्हताएं भी नहीं रखते थे. इनमें से एक डा. धर्मेन्द्र जैन के पास DM cardiology की फर्जी डिग्री है जो मेडिकल काउन्सिल आफ इण्डिया से मान्यता प्राप्त नहीं है और दूसरे डा. विकास अग्रवाल के पास अर्हता की डिग्री के स्थान पर केवल DNB (Diplomat in National Board) का डिप्लोमा है.
बाद में अब इन्हीं अयोग्य लोगों को कार्डियोलाजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर बनाया गया है. इनमें भी डा. विकास अग्रवाल के एसोसिएट बनाये जाने की भी अद्भुत कहानी है. इन्हें बीएचयू के नान टीचिंग कर्मचारियों की भांति पीपीसी से ही एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया. इसके अतिरिक्त इनके पास एसोसिएट प्रोफेसर के लिए किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल कालेज में तीन वर्षों का जरूरी शिक्षण अनुभव का भी अभाव है. इस तरह बीएचयू अपने अजब-गजब के कारनामों के लिए कुख्यात हो चुका है. जिनके पास न तो आवश्यक डिग्रियां हैं और न ही चिकित्सा शिक्षण का अनुभव है. ऐसे लोग चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मरीजों का क्या हाल करेंगे इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है.
असली जदयू और चुनाव चिन्ह तीर को लेकर दावे की तैयारी में शरद गुट
पटना। तेरह साल पहले 2003 में नीतीश कुमार के समता दल और शरद यादव के जनता दल के विलय के बाद अस्तित्व में आए जनता दल (यू) का चुनाव चिन्ह तीर हो गया था. इससे पहले समता दल का चुनाव चिन्ह मशाल था, जबकि जनता दल का चुनाव चिन्ह तीर था. नीतीश कुमार से अलगाव के बाद शरद यादव खेमा एक बार फिर तीर चुनाव चिन्ह पर दावा करने की तैयारी में है. साथ ही यह गुट खुद के असली जनता दल होने का दावा पेश करने की तैयारी में है. शरद यादव खेमा इसके लिए जल्द ही चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाएगा.
जदयू के महासचिव पद से हटाए गए अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि शरद गुट ही असली जदयू है. यह दावा इसलिए भी किया जा रहा है कि पार्टी के 14 राज्यों के अध्यक्ष उनके साथ हैं. 17 अगस्त को शरद यादव के संयोजन में दिल्ली में हुए साझी विरासत सम्मेलन में भी इनमें से सात से आठ अध्यक्ष मौजूद थे.
इससे पहले नीतीश कुमार ने अरूण श्रीवास्तव को महासचिव, राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से और शरद को राज्यसभा में नेता सदन के पद से हटा दिया था. बिहार में भी रमई राम समेत विभिन्न जिलों के 21 नेताओं को बर्खास्त कर दिया. यादव खेमा इस बात से ज्यादा नाराज है कि भाजपा के साथ जाने का फैसला नीतीश ने शरद यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं को बिना विश्वास में लिए किया.
अब जनता दल और चुनाव चिन्ह तीर को लेकर शुरू हुई लड़ाई नीतीश कुमार के लिए सरदर्द बन सकती है. अगर चुनाव आयोग ने अगर शरद यादव गुट को असली जनता दल मान लिया तो नीतीश कुमार के लिए बतौर राजनैतिक दल पहचान का संकट खड़ा हो सकता है.
ममता के सामने नहीं टिकी भाजपा, 148 में से जीती 140 सीटें
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सामने भारतीय जनता पार्टी टिक नहीं पाई है. बंगाल में हुए निकाय चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को बुरी तरह हरा दिया है. चुनाव में टीएमसी ने विपक्षी दलों को लगभग कुचलते हुए जबरदस्त जीत हासिल की है. 13 अगस्त को हुए निकाय चुनाव का परिणाम 18 अगस्त को आया. यह परिणाम चौंकाने वाला हैं. इस चुनाव में देश भर में अपनी सरकार बनाने का दावा करने वाले पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दावे को जबरदस्त धक्का लगा है.
148 वॉर्डों पर हुए इस निकाय चुनावों में से 140 पर ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली है. चुनाव पश्चिम बंगाल के बुनियादपुर, धूपगुड़ी, दुर्गापुर, हल्दिया, पांसकुरा, कूपर्स कैम्प और नैहाटी में हुए थे. बुनियादपुर की 14 सीटों में से 13 पर टीएमसी के उम्मीदवार जीते हैं जबकि एक सीट भाजपा के खाते में गई है.वहीं धूपगुड़ी की कुल 16 सीटों में से टीएमसी को 12 और भाजपा को चार सीटें हासिल हुई हैं. कूपर्स कैम्प में तो भाजपा खाता तक नहीं खोल पाई. यहां की सभी 12 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है. दुर्गापुर में भी सभी 43 सीटों तृणमूल को जीत मिली है. नैहाटी में 16 में से 14 पर तृणमूल, एक पर वाममोर्चा और एक पर अन्य प्रत्याशी विजयी हुए हैं. पांसकुरा में 18 सीटों में से तृणमूल ने 17 और बीजेपी ने एक सीट पर जीत हासिल की है. हल्दिया में भी सभी 29 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज कराई है. इस चुनाव के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि भारत को जीतने का सपना देखने वाली भाजपा के लिए राह आसान नहीं है. बंगाल में ममता बनर्जी, ओडिसा में नवीन पटनायक, तामिलनाडु में जयललिता की पार्टी और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य में चंद्रबाबु नायडू जैसे नेता अमित शाह के 350+ के दावे की हवा उड़ाने के लिए काफी हैं.भाजपा नेता की गौशाला में मरी 200 से ज्यादा गायें
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक की भारतीय जनता पार्टी के नेता की गोशाला में 200 से ज्यादा गायों की मौत हो गई है. राजपुर गांव के ग्रामीणों ने इलाके के SDM को शिकायत करके बताया है कि मृत गायों को गांव के एक सुनसान इलाके में दफना दिया गया है.
आरोप है कि कम से कम 200 गाय भुखमरी और दवाओं की कमी के चलते राज्य के दुर्ग स्थित राजपुर गांव में मर गईं. कई गायों को गोशाला के करीबी ही दफन कर दिया है जबकि कुछ शवों को जिन्हें दफनाया नहीं गया था वो आस-पास पाए गए हैं.
भाजपा नेता हरीश वर्मा जो जमूल नगर निगम के उपाध्यक्ष भी हैं, वो यह गोशाला बीतें सात सालों से चला रहे हैं. पुलिस ने कहा कि हरीश वर्मा को छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण संरक्षण-2004, पशु अधिनियम के लिए क्रूरता की धारा 190 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409 की धारा 4 और 6 के तहत शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था.
राजपुर सरपंच के पति सेवा राम साहू ने कहा कि हमने देखा कि दो दिन पहले गोशाला के पास जेसीबी मशीनें चल रही थीं और हमने कुछ मीडिया के व्यक्तियों को बताया. जब हम यहां पहुंचे, तो हमने पाया कि जमीन पर मृत गायों को दफनाने के लिए की गड्ढे खोदें जा रहा थे. वो कम से कम 200 की संख्या में थीं.
दुर्ग जिले के पशु चिकित्सा विभाग के उप निदेशक एमके चावला ने कहा कि पिछले दो दिनों में 27 गायों का पोस्टमार्टम किया गया है. चावला ने कहा कि अन्य 50 गायों कि स्थिति गंभीर है जिनका इलाज किया जा रहा है. मौतों की संख्या बढ़ सकती है. कहा जा रहा है कि गोशाला की क्षमता 220 गायों तक हैं लेकिन यहां 650 से अधिक गाय हैं.
प्रधानमंत्री मोदी हुए लापता, वाराणसी में लगे पोस्टर
वाराणसी। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं खो गए हैं. हो गए ना हैरान! जी हां, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं लापता हो गए हैं. वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ढूंढने के लिए पोस्टर लगवाए गए हैं. लेकिन ये पोस्टर किसने लगवाए इसका पता नहीं चल पाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उनके लापता होने के पोस्टर दिखे हैं.
पोस्टर में यह लिखा गया है कि पीएम मोदी लापता हैं और लाचार, बेबस और हताश काशीवासियों की तरफ से यह पोस्टर लगवाया गया है. पोस्टर पर एक नारा भी लिखा गया है, “जाने वह कौन सा देश जहां तुम चले गए”. इस पोस्टर के नीचे लिखा गया है लाचार, बेबस और हाताश काशीवासी.
प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ पोस्टर के नीचे लिखे संदेश में यह भी लिखा है कि आखिरी बार इन्हें वाराणसी में वोट मांगने के लिए आए हुए देखा गया था. उसके बाद से अब तक लापता हैं. लापता होने के कारण मजबूरी में गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज करानी पड़ रही है.
प्रधानमंत्री के लापता होने वाले इन पोस्टर की सूचना जैसे ही प्रशासन को लगी तो पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया जिसके बाद तुरंत ही पुलिस को इन्हें पूरे जिले से हटाने के निर्देश दे दिए गए. काशी पुलिस मोदी के लापता होने का पोस्टर लगाने वाले की तलाश में पुलिस जुट गई है. कई इलाको में सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं.

