मेरिट में नाम आने के बाद भी नहीं दिया दलित छात्रा को एडमिशन

भोपाल। देश के सभी शिक्षा संस्थान एक खास वर्ग के साथ भेदभाव कर रहे हैं. शिक्षा संस्थान विशेषरूप से दलितों, पिछड़ों की दाखिला प्रक्रिया में हेर-फेर कर रहे हैं. ताज्जुब की बात है की प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा और मनमाने तरीके से सामान्य वर्ग के लोगों को दाखिला कर रहा है.
पहले इसी वर्ष में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और जनसंचार में विभाग में दाखिला प्रक्रिया में हेरफेर हुआ. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भी एससी/एसटी और ओबीसी के छात्रों के साथ दाखिला प्रक्रिया में भेदभाव हुआ. यहां पूरी तरह से असंवैधानिक प्रक्रिया के तहत दाखिला हुआ. जिसका छात्रों ने विरोध किया और कई विभागों को शिकायत पत्र लिखे. लेकिन छात्रों को कोई लाभ नहीं मिला. उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में भी यही हाल रहा, जिसके विरोध में दलित, पिछड़े और आदिवासी छात्रों ने 28 अगस्त को प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया. यहां भी दलित, पिछड़े और आदिवासी छात्रों की फरियाद किसी ने नहीं सुनी.
अब भोपाल स्थित मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय से भी ऐसे भेदभाव की घटना सामने आई है. जहां दलित छात्रा पूनम दहिया को दाखिला न देकर किसी सामान्य वर्ग के लड़के को दाखिला दे दिया. यह नाट्य विद्यालय मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन आता है. दो दिन से छुट्टी के कारण उसकी अधिकारियों से बात नहीं हो पायी है.
नाट्य विद्यालय के निदेशक संजय उपाध्याय का कहना है कि पूनम ग्रेजुएशन का अपना सर्टिफिकेट समय पर जमा नहीं करा पाई इसलिए नामांकन एक लड़के को दे दिया गया. संजय उपाध्याय का जबाव अटपटा और गैर जिम्मेदाराना था. क्योंकि दाखिले के दौरान कोई भी दस्तावेज कम होता है. उसका अंडरटेकिंग लेकर दाखिला लिया जाता है और उसे एक निश्चित समय में विद्यालय में दस्तावेज जमा कराना होता है. लेकिन नाट्य विद्यालय ने ऐसा नहीं किया.
पूनम दहिया ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है:
मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल में इस साल मैं भी चयनित हुई थी, लेकिन शिक्षा से वंचित कर दी गई. मुझे कारण बताया गया कि “आप का रिजल्ट नहीं आया है इसलिए आप को एडमिशन नही मिलेगा .” बाद में मेरी ही जैसी स्थिति में एक दूसरे लड़के को एडमिशन दे दिया गया. मुझे लगातार फोन में कहा गया की ‘इस साल तुम चुप रहो, तुम्हे अगले साल ले लिया जायेगा. लेकिन मेरा जो ये साल खराब हुआ, उसका क्या? मेरी जगह कोई वेटिंग का पढ़ रहा है, और मैं चयनित हो कर भी अगले साल का इंतेजार करूँ? एक ही आधार पर एक का चयन कर लिया गया और मेरा नहीं, ये कैसी रंगशाला है? और जब मैंने पूछा कि ऐसा क्यों किया गया ये गलत है तो मुझे कहा गया कि ‘हमे सही गलत मत बताओ’ मेरी इस लड़ाई में कोई मेरा साथ नहीं है मैं अकेली हूँ. क्या आप मेरा साथ देंगे.
कहा जाता है कि यह दाख़िला भोपाल के एक अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि के रंग-निर्देशक की इच्छा से लिया गया, जिनका विद्यालय के प्रशासन पर अप्रत्यक्ष रूप से लगभग वर्चस्व और एकाधिकार रहता आया है.
पूनम ने इस अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ने का फ़ैसला लिया और न केवल फेसबुक पर अपनी आपबीती लिखी, बल्कि एमपी के संस्कृति सचिव को एक औपचारिक शिकायत पत्र दिया है, और उसकी प्रतियां सभी सम्बंधित अधिकारियों को भेजी हैं. उसने मामले की जांच करने के साथ-साथ यह भी मांग रखी है कि उसे इसी सत्र में दाख़िला दिया जाये, ताकि उसके जीवन का क़ीमती एक साल बर्बाद होने से बचे.
शिक्षक दिवस पर लखनऊ में शिक्षकों पर हुआ लाठीचार्ज
लखनऊ। यूपी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे शिक्षक प्रेरक संघ के शिक्षकों और शिक्षा मित्रों पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया. प्रेरक शिक्षक तीन साल के वेतन और नियमित नियुक्ति की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे थे.
वहीं, शिक्षक कल्याण समिति ने शिक्षक दिवस के मौके पर विधानसभा के घेराव का ऐलान बहुत पहले ही किया था. लंबे समय से शिक्षा मित्रों का आंदोलन चल रहा है. पिछले दिनों शिक्षा मित्रों ने लखनऊ में धरना प्रदर्शन कर आंदोलन का बिगुल फूंका था.
#WATCH UP: Teachers of Shiksha Prerak Sangh, demanding permanent jobs, baton-charged by Police outside Lucknow Vidhan Sabha. pic.twitter.com/AgayNJbQzj
— ANI UP (@ANINewsUP) September 5, 2017
पुलिस की चेतावनी के बावजूद वहां से वापस नहीं जाने पर पुलिस ने इन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस लाठीचार्ज में कई प्रेरक शिक्षक और शिक्षा मित्र घायल हो गए. कई शिक्षकों के सर पर गहरी चोट आई है.
गांव में सरकार की योजनओं को जन-जन तक फैलाने के लिए इन प्रेरक शिक्षकों को संविदा पर नियुक्त किया जाता है. शिक्षकों का आरोप है कि इन्हें पिछले तीन साल से वेतन नहीं मिला है. साथ ही ये नियमित नियुक्ति की मांग भी कर रहे थे. पुलिस ने लाठीचार्ज कर इन्हें वापस खदेड़ दिया.
शिक्षामित्रों को समान कार्य, समान वेतन से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं है. वहीं अधिकतम भारांक भी 25 से बढ़ा कर 30 किया जाए. इसके अलावा मेरिट अंकों से तय की जाए, न कि ग्रेड पद्धति से.
पीवी सिंधू ने कोच गोपीचंद को कहा-आई हेट यू
रियो ओलंपिक में देश के लिए रजत पदक जीतने वाली पीवी सिंधू और उनके कोच पुलेला गोपीचंद का रिश्ता आज शिक्षक दिवस के दिन उल्लखनीय है. पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन के ऐसे कोच हैं, जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग से देश को साइना नेहवाल, पीवी सिंधू और किदांबी श्रीकांत जैसे खिलाड़ी दिये.
पीवी सिंधू ने अनोखे अंदाज में दी शुभकामनाएं#TeachersDay is here & this is a story of students who hate their teacher. @Pvsindhu1 is 1 of them. Tag ur teacher who made u #SweatForGold pic.twitter.com/AijgbLgnpD
— Gatorade India (@GatoradeIndia) September 4, 2017
आज शिक्षक दिवस के मौके पर पीवी सिंधू ने अनोखे अंदाज में अपने कोच को शिक्षक दिवस के दिन याद किया है. एक वीडियो संदेश में पीवी सिंधू कहती नजर आती हैं- आई हेट माई टीचर. इस वीडियो संदेश में वह कहतीं नजर आ रही हैं कि मेरे कोच मेरे दर्द की वजह हैं. इसलिए मैं उनसे नफरत करती हूं. वे तब खुश होते हैं जब मेरा पसीना बहता है. मैं उनसे नफरत करती हूं क्योंकि वे मुझपर जरूरत से ज्यादा विश्वास करते हैं. अंतिम में वे कहती नजर आ रही हैं थैंक्यू कोच.
पुलेला गोपीचंद ने साइना नेहवाल और पीवी सिंधू को बैडमिंटन की दुनिया में जीतना सिखाया और उनके मार्गदर्शन में दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनीं. पीवी सिंधू ने ओलपिंक में जो रजत पदक जीता उसका श्रेय गोपीचंद को ही जाता है, वहीं साइना नेहवाल की नंबर वन रैंकिंग में भी गोपीचंद का ही हाथ है. हालांकि साइना का गोपीचंद से बीच में विवाद हुआ था, लेकिन अब वह फिर गोपीचंद के पास लौटना चाहती है, यह गोपीचंद की खूबी है.
जब पीवी सिंधू ओलंपिक का पदक जीत आयीं, तो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच विवाद शुरु हो गया था. दोनों प्रदेश उसे लेकर अपना-अपना दावा ठोंकने लगे थे, उस वक्त पुलेला गोपीचंद ने यह कहकर पीवी सिंधू का पक्ष रखा था कि वह पूरे हिंदुस्तान की है. पुलेला गोपीचंद प्रकाश पादुकोण के बाद दूसरे ऐसे भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2001 में आल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीता था. आज उनके बैडमिंटन एकेडमी से एक से एक खिलाड़ी निकल रहे हैं, जो देश के भविष्य हैं.
BRICS2017: चीन और भारत में अब नहीं होगी डोकलाम जैसी स्थिति
श्यामन। ब्रिक्स देशों के सम्मेलन का आज तीसरा दिन है. तीसरे दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. इस द्वीपक्षीय वार्ता में कई मुख्य मुद्दों पर बात हुई. डोकलाम विवाद खत्म होने के बाद मोदी और जिनपिंग के बीच यह पहली बैठक थी.
मोदी-जिनपिंग में 1 घंटे से ज्यादा बात हुई. दोनों नेताओं के बीच इस पर सहमति बनी कि आगे से डोकलाम जैसी स्थिति पैदा ना हो. विदेश मंत्रालय ने बताया कि चर्चा बहुत रचनात्मक थी. विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति बनी है. मतभेदों को विवाद नहीं बनने दिया जाएगा. बॉर्डर पर शांति की बातचीत हुई. रक्षा और सुरक्षा पर आपसी सहयोग की सहमति बनी.
डोकलाम विवाद पर जवाब देते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि हमारे पास प्रगतिशील दृष्टिकोण है. दोनों देश जानते हैं कि अतीत में क्या हुआ, इसलिए यह पिछली बातें करने वाली बैठक नहीं थी.
एस जयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच ब्रिक्स के मुद्दों पर बातचीत हुई. दोनों देशों ने द्विपक्षीय बैठक में ‘प्रगतिशील दृष्टिकोण’ अपनाया है. BRICS को और प्रासंगिक बनाने की बात हुई है. चीन ने ब्रिक्स के लिए प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोम की सराहना की.
चीनी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि भारत और चीन के बीच स्वस्थ्य, स्थिर रिश्ते दोनों देशों के लोगों के लिए जरूरी हैं. हम विश्व के 2 सबसे बड़े और उभरते देश हैं. जिनफिंग ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर पंचशील के सिद्धांत के तहत काम करने के लिए तैयार है.
ईडी ने सील किया मीसा भारती का फॉर्म हाउस
नई दिल्ली। लालू यादव परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही. आए दिन परिवार के किसी न किसी सदस्य के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. मीसा भारती पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने मीसा भारती के बिजवासन इलाके स्थित फॉर्म हाउस को सील कर दिया है. यह फॉर्म हाउस मीसा और उनके पति शैलेश का है.
ईडी मीसा और शैलेश के जवाबों से संतुष्ट नहीं है. यह फार्म हाउस शैल कंपनियों के जरिए आए धन से खरीदा गया था. चार शैल कंपनियों के जरिए 1 करोड़ 20 लाख रुपये आए थे. इसी पैसे से यह खरीद हुई. साल 2008-09 में शैल कंपनियों के जरिए पैसा आया था जब लालू यादव रेलमंत्री थे. इस मामले में जांच की आंच लालू तक भी पहुंच सकती है. सीबीआई और ईडी इस मामले में जांच कर रही है.
ईडी ने मीसा और शैलेश के ठिकानों पर 8 जुलाई को भी छापेमारी की थी और दोनों से पूछताछ हुई थी. वहीं मीसा के सीए राजेश अग्रवाल के खिलाफ ईडी आरोपपत्र दायर कर चुका है. राजेश फिलहाल तिहाड़ जेल में है.
ईडी ने सीए राजेश अग्रवाल, व्यवसायी भाइयों सुरेंद्र जैन व वीरेंद्र जैन और अन्य कंपनियों सहित 35 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है. अग्रवाल पर जैन बंधुओं, सुरेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन की मदद से संदिग्ध लेनदेन के जरिए काले धन को सफेद करने का आरोप है. ईडी ने जैन बंधुओं को 20 मार्च को गिरफ्तार किया था. ईडी ने मई में इस मामले में अपना पहला आरोप-पत्र दायर किया था. इसके बाद 22 मई को अग्रवाल को गिरफ्तार किया था.
शिवसेना के निशाने पर योगी सरकार, सामना में लिखा- उत्तर प्रदेश में ‘यमदूत’
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार संचालित अस्पतालों में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत को लेकर पूरा देश सदमे में है. वहीं इसको लेकर योगी सरकार अब शिवसेना के निशाने पर है. पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में इस तरह की घटनाओं की आलोचना करते हुए बच्चों की मौत को हत्या का मामला करार दिया गया है.
गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज और फर्रुखाबाद डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में मरे बच्चों के गरीब परिवार से होने का हवाला देते हुए शिवसेना ने कहा कि गरीबों के भगवान बनने की बजाय ये सरकारी अस्पताल उनके लिए मौत के भगवान साबित हो रहे हैं.
शिवसेना के अनुसार, स्वास्थ्य से जुड़ी संकटकालीन स्थिति के बीच सरकार संचालित अस्पताल ही सिर्फ और सिर्फ गरीबों के लिए आश्रय होते हैं. ऐसे में अगर ये अस्पताल ही इस तरह की लापरवाही बरतेंगे तो जरूरतमंद कैसे जीवित रह पाएंगे.
वहीं ऑक्सीजन की कमी के कारण गोरखपुर में बच्चों की मौत के लिए यूपी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए शिवसेना ने कहा कि इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि अस्पताल में सुविधाओं को लेकर सरकार कितनी बेपरवाह है. इसके कारण बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 70 से ज्यादा बच्चों की मौत के बाद फर्रुखाबाद में भी इस तरह की घटना सामने आ गई, जिसमें कम से कम 50 बच्चों की मौत होने की बात कही जा रही है.
यूपी के दो जिलों में हुई दलितों की हत्या
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है. योगी सरकार के आने से राज्य अपराध भी तेजी बढ़ रहा है. पुलिस प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में नाकाम साबित हो रही है. आए दिन दलितों के साथ भेदभाव और अत्याचार हो रहा है.
यूपी के दो अलग-अलग जिलों फर्रुखाबाद और बांदा में दलितों के साथ अत्याचार हुआ. एक मामले में दलित छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई जबकि दूसरे मामले में दलित किशोर की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई.
फर्रुखाबाद के कायमगंज थाना क्षेत्र के लहरा गांव में शौच के लिए निकली दलित छात्रा का शव नग्न अवस्था में खेत में पड़ा मिला. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
लहरा निवासी छात्रा प्रिया पुत्री संजय जाटव(दोनों काल्पनिक नाम) सोमवार सुबह शौच के लिए खेतों की तरफ गई थी. लेकिन वह लौट कर घर नहीं आई. काफी देर के बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की. घर से लगभग 800 मीटर दूर उसका नग्न शव खेत में पड़ा मिला. जिससे दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही है. उसके चेहरे और गर्दन पर चोटों के निशान थे.
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच पड़ताल कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. कोतवाल अतर सिंह ने बताया कि पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच की जा रही है.
वहीं दूसरा मामला यूपी के बांदा का है. बांदा के मर्का थाना क्षेत्र के समगरा गांव में मवेशी चराने गए एक दलित किशोर की शनिवार की शाम लाठी से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई. साथ ही उसके चचेरे भाई को अधमरा कर दिया गया. पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है.
मर्का थानाध्यक्ष रामचरन वर्मा ने रविवार को बताया, समगरा गांव निवासी अनुसूचित जाति का कुलदीप (16) अपने चचेरे भाई संदीप (11) के साथ जंगल में मवेशी चराने गया था. शाम के वक्त उसका पड़ोसी युवक राजा शराब के नशे में धुत वहां पहुंचा और बिना कुछ कहे ही उसे लाठी से पीटना शुरू कर दिया. कुलदीप को बचाने गए उसके चचेरे भाई को भी पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया.
थानाध्यक्ष ने बताया, कुलदीप को उसके परिजन उपचार के लिए सरकारी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उन्होंने बताया कि आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने के साथ घायल को गंभीर अवस्था में इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर मलाला ने आंग सान सू ची से पूछे सवाल
नई दिल्ली। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार का नोबल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई ने विरोध किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ जो हो रहा है उससे मैं दुखी हूं.
मलाला ने स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची इस अत्याचार पर हस्तक्षेप करने की अपील की है. उन्होंने लिखा, “बीते कई सालों में मैंने इस दुखद और शर्मनाक व्यवहार की निंदा की है. मैं इंतज़ार कर रही हूं कि नोबल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची भी इसका विरोध करें. पूरी दुनिया और रोहिंग्या मुसलमान इंतज़ार कर रहे हैं.”
My statement on the #Rohingya crisis in Myanmar: pic.twitter.com/1Pj5U3VdDK
— Malala (@Malala) September 3, 2017
मलाला ने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हो रही हिंसा रोकनी की अपील करते हुए कुछ सवाल भी किए हैं. उन्होंने कहा कि हिंसा बंद करो. आज मैंने तस्वीरें देखीं जिनमें म्यांमार के सुरक्षाबल बच्चों की हत्या कर रहे हैं. इन बच्चों ने किसी पर हमला नहीं किया लेकिन फिर उनके घर जला दिए गए.
मलाला ने सवाल किया कि अगर उनका घर म्यांमार में नहीं है तो उनकी पीढ़ियां कहां रह रही थीं? उनका मूल कहां है? उन्होंने कहा, “रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार की नागरिकता दी जाए. वह देश जहां वे पैदा हुए हैं.”
पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए मालाला ने कहा कि दूसरे देशों, जिनमें मेरा अपना देश पाकिस्तान शामिल है, उन्हें बांग्लादेश का उदाहरण अपनाना चाहिए और हिंसा व आतंक से भाग रहे रोहिंग्या परिवारों को खाना, शरण और शिक्षा दें.
भारत में व्हाट्सऐप बिजनेस की टेस्टिंग शुरु
नई दिल्ली। इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने बिजनेस करने लिए एक अलग ऐप लॉन्च की है. इस ऐप में अकाउंट्स को वेरिफाइड किया जाएगा. जिसके जरिए कंपनियां ग्राहकों से संवाद कर पाएंगे. बता दें कि इस ऐप के जरिए यूजर्स आने वाले समय में पीले चैटबॉक्स से कंपनियों से सीधे संवाद भी स्थापित कर पाएंगे. इस चैट मैसेज को डिलीट करना भी नामुमकिन होगा लेकिन यूजर्स बात नहीं करने की स्थिति में कंपनियों को ब्लॅाक कर पाएंगे.
सूत्रों के अनुसार, भारत में व्हाट्सऐप ने इस फीचर की शुरू कर दी है. बता दें कि यह सर्विस कथित तौर पर बुक माय शो के साथ शुरू की गई है. बुक माय शो ने अपने यूजर्स को टिकट बुकिंग की कन्फर्मेशन भेजी है. एक यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट ट्विटर पर शेयर भी किया है. स्क्रीनशॉट में लिखे मैसेज में कंपनी ने यूजर को जानकारी दी है कि हम इस चैट में आपको टिकट की कन्फर्मेशन भेजेंगे. अगर आप मैसेज नहीं चाहते तो Stop लिखकर भेजें.
वहीं, बुक माई शो से भी पता चला हे कि यह फीचर पायसट टेस्टिंग फेज से आगे निकल गया है तथा वो इसका पूरी तरह से यूज कर रहे हैं. व्हाट्सएप बिज़नेस सर्विस अब बुक माई शो के अलावा कैब प्रवाइडर ओला और होटल रूम कंपनी ओयो भी करने जा रही है. इसके बाद हो सकता है कि जल्द ही ओला भी ओटीपी मैसेज और इनवॉइस व्हाट्सएप के जरिए भेजे.
जम्मू-कश्मीर में CRPF काफिले पर आतंकी हमला
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया है. इस हमले में 4 जवान घायल हो गए हैं. ये हमला जम्मू हाइवे पर काजीगुंद में किया गया. आतंकियों ने ग्रेनेड से सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया है.
सीआरपीएफ की 163 बटालियन के जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे. इसी दौरान उनके काफिले पर ग्रेनेड फेंका गया. जिससे चार जवान घायल हो गए. घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इससे पहले सोमवार को जम्मू कश्मीर के सोपोर में हुए मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आंतकियों को मार गिराया. सुरक्षाबलों को बारामूला जिले के सोपोर के शंकर गुंड क्षेत्र में आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी, जिसके उन्होंने इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन किया. खुद को घिरा हुआ देख कर आतंकियों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी.
J&K: Four jawans injured after terrorists lobbed grenade on CRPF patrolling party in Anantnag’s Qazigund (visuals deferred) pic.twitter.com/ijxgKswOjV
— ANI (@ANI) September 4, 2017
सुरक्षाबलों ने भी इसका जवाब देते हुए दोनों आतंकियों को मार गिराया. इन आतंकियों के पास से एक AK47 रायफल और पिस्टल बरामद हुई है. शनिवार को भी दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम के बेहीबाग में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया था. मारा गया लश्कर आतंकी इश्फाक पद्दार लेफ्टिनेंट उमर फयाज की हत्या भी शामिल था.
वहीं शनिवार को दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम के बेहीबाग में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया था. मारा गया लश्कर आतंकी इश्फाक पद्दार लेफ्टिनेंट उमर फयाज की हत्या में भी शामिल था.
सिरसा डेरा आश्रम से पुलिस को मिला हथियारों का जखीरा
सिरसा। दो साध्वियों के रेप केस में 20 साल की जेल की सजा काट रहे डेरा सच्चा प्रमुख बाबा राम रहीम के काले कारनामों का एक-एक कर खुलासा हो रहा है. डेरा सच्चा सौदा के सिरसा डेरे से पुलिस को भारी मात्रा में हथियार मिले हैं. पुलिस ने एक अभियान के दौरान ये हथियार डेरे से बरामद किये हैं. इनमें कई राइफल, रिवॉल्वर और गन शामिल हैं. हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा के डेरों से हथियार बरामद होने का सिलसिला जारी है.
अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए डेरे से हथियार बरामद किए हैं. रोहतक की सुनरिया जेल में कैद गुरमीत राम रहीम के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय से पुलिस को भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा मिला है. इन हथियारों में कई राइफल, रिवॉल्वर और अलग-अलग तरह की बंदूकें शामिल हैं. हरियाणा और पंजाब में अबतक डेरा सच्चा सौदा के कई डेरों और नामचर्चा घरों से हथियार बरामद हो चुके हैं.
सदर थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस ने अपील की थी कि जिन लोगों के पास लाइसेंस हथियार है वो जमा करवाए. अब तक पुलिस को 33 हथियार जमा करवाए गए हैं. बाकी जिन्होंने हथियार जमा नहीं करवाए हैं पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रही है. सिरसा डेरे से इतने हथियार बरामद होने से पुलिस भी हैरान है. डेरे से बरामद किए गए हथियारों को पुलिस ने सिरसा के सदर थाने में रखा गया है. पुलिस डेरे से बरामद हुए हथियारों की जांच कर रही है. इसके साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में यहां हथियार क्यों जुटाए गए थे.
दिल्ली पुस्तक मेले में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए ‘सम्यक प्रकाशन’ को मिला कांस्य पदक
नई दिल्ली। दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे नौ दिवसीय 23वें पुस्तक मेले का समापन रविवार को हो गया. पुस्तक मेले के आखिरी दिन प्रकाशकों को पदक देकर सम्मानित किया गया. इस मेले में सम्यक प्रकाशन को श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए कांस्य पदक सम्मान दिया गया. सम्यक प्रकाश तथागत बुद्ध, अम्बेडकराइट और दलित आधारित पुस्तकों का प्रकाशन करता है.
सम्यक प्रकाशन को यह सम्मान हिंदी भाषा में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मिला. यह सम्मान फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (एफआईपी) के अध्यक्ष एन. के. मेहरा, महासचिव नवीन गुप्ता और मुख्य अतिथि कुमार ई.डी. ने दिए.हिंदी भाषा में श्रेष्ठ प्रदर्शन में किताब घर प्रकाशन को स्वर्ण पद, साहित्य अकादमी को रजत पदक और सम्यक प्रकाशन को कांस्य पदक मिला.
अंग्रेजी भाषा में श्रेष्ठ प्रदर्शन में उपकार को स्वर्ण पदक , फुल मार्क्स प्राइवेट लिमिटेड को रजत पदक और नवनीत एजुकेशन लिमिटेड को कांस्य पदक मिला.
प्रादेशिक भाषा में श्रेष्ठ प्रदर्शन में प्रकाशन विभाग (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) को स्वर्ण पदक, अक्षर पब्लिकेशन को रजत पदक और नेशनल बुक ट्रस्ट को कांस्य पदक मिला.
मंत्रीमंडल विस्तार पर मोदी और जेटली में ठनी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेन्द्र मोदी और भाजपा के चार बड़े नेताओं के बीच मतभेद की खबर है. मामला इतना बढ़ गया है कि मोदी को गुजरात से दिल्ली लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक केंद्रीय मंत्री ने तो मंत्रीपद से इस्तीफे की ही पेशकश कर दी. मामला संघ के शीर्ष पदाधिकारियों तक जा पहुंचा और मोदी को अपने पैर पीछे खींचने पड़े.
रविवार को मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के दौरान मोदी की निगाह गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर भी थी. इसकी भनक मिलते ही एक सितंबर की रात को गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर एक बैठक हुई. इस बैठक में राजनाथ सिंह के अलावा अरुण जेटली, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी मौजूद थे.
असल में प्रधानमंत्री मोदी सुविधा के लिहाज से बड़े मंत्रियों से और ज्यादा समर्पण चाहते थे, जबकि इन मंत्रियों को लगता था कि वो अपना काम ठीक से कर रहे हैं. यह भी कहा गया कि नोटबंदी को एक साल बीतने के बावजूद गरीब तबके की उम्मीदें पूरी नहीं हुई. इस मामले का ठीकरा सरकार का शीर्ष नेतृत्व जेटली के सिर पर फोड़ना चाहता था. इससे जेटली भी अनमने हुए.
इस बैठक में तीन घंटे तक इन चारों नेताओं के बीच मंथन चला. बैठक में आम राय यह थी कि वे साढ़े तीन साल से अपने मंत्रालय जिम्मेदारी से चला रहे हैं. कार्यकाल के अंतिम दौर में वे अपने मंत्रालय छोड़कर दूसरे मंत्रालयों में जाते हैं तो चुनाव के समय उनके कामों का श्रेय दूसरों को जाएगा. साथ ही चुनावी साल में नए मंत्रालयों की चुनौती होगी.
गडकरी सड़क परिवहन में किए कामों को चुनाव से पहले अंतिम मुकाम तक पहुंचाना चाहते हैं. वहीं सुषमा स्वराज को लगता है कि विदेश मामलों और खासकर चीन के साथ हाल में मिली रणनीतिक सफलता का श्रेय उन्हें जाता है. ऐसे में उनके मंत्रालय से छेड़छाड़ ठीक नहीं है.
आखिरकार बाजी चली राजनाथ सिंह ने. राजनाथ सिंह ने वृंदावन के केशवधाम में चल रही संघ और उसके संगठनों की बैठक में यह संदेश भिजवाया कि वे मंत्रिपद छोड़कर संगठन में काम करना चाहते हैं, ताकि खुलकर काम करने की आजादी मिल सके. राजनाथ सिंह का संदेश वृंदावन में उस समय पहुंचा जब पार्टी और संघ दोनों का शीर्ष नेतृत्व मौजूद था.
खबर पहुंचते ही खलबली मच गई. असल में ऐसा कर राजनाथ सिंह ने विरोध दर्ज करा दिया था. राजनाथ की नाखुशी और बड़े मंत्रियों की सोच को वृंदावन की बैठक ने भी बल दिया. और आखिरकार मोदी और अमित शाह को अपने पैर खिंचने पड़े.
इस मामले ने भाजपा के शीर्ष नेताओं और मोदी-शाह की जोड़ी के बीच एक लकीर तो खिंच ही दी है.
ब्रिक्स ने आतंकी समूहों पर जताई चिंता
श्यामन। ब्रिक्स देशों ने सोमवार को तालिबान, अल-कायदा और पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा एवं जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर गंभीर चिंता जाहिर की. इसके साथ ही इन देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक समझौते को शीघ्रता से अंगीकार करने की मांग की. अपनी घोषणा में ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका ने सभी देशों से अपील की कि वे आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र रूख अपनाए.
आतंकवाद से निपटने के क्रम में चरमपंथ से निपटने और आतंकियों के वित्त पोषण के स्रोतों को अवरूद्ध करने की भी बात की गई. समूह ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के साथ-साथ तालिबान, आईएसआईएस, अल-कायदा और लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद एवं हक्कानी नेटवर्क समेत इसके सहयोगी संगठनों द्वारा की जाने वाली हिंसा पर चिंता जाहिर की.
समूह ने ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट और इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, तहरीक-ए-तालिबान और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठनों का भी जिक्र किया. ब्रिक्स ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से कंप्रीहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेरेरिज्म अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र समझौते को जल्दी ही अंतिम रूप दिए जाने और इसे अंगीकार किए जाने की मांग करते हैं.
योगी सरकार का महिला सुरक्षा दावा फेल, राजधानी में हुआ गैंगरेप
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिला विकास और महिला सुरक्षा के दावे करने वाली योगी सरकार लगातार असफल होती जा रही है. योगी सरकार की नाक के नीचे ही यूपी की राजधानी लखनऊ में सामूहिक बलात्कार की घटना हुई है. पुलिस प्रशासन समय पर एक्शन लेता तो एक महिला का बलात्कार होने से बच जाता.
लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके में कार सवार युवकों ने ग्रेजुएशन की छात्रा का अपहरण कर लिया. इसके बाद उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया है. आरोप है कि दरिंदों में एक युवती को जानता था. उसने फोन करके उसे अपने पास बुलाया. युवती बताई जगह पहुंची, तो मुंह पर कपड़ा बांधकर बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया.
पीड़िता के मुताबिक, उसको जब होश आया तो वह एक कमरे में बंद पड़ी थी. उसके साथ उन बदमाशों ने बारी-बारी से गैंगरेप किया. उसने जब विरोध किया, तो दरिंदों ने उसकी बुरी तरह से पिटाई भी कर दी. इसके बाद आरोपियों ने उसे कुछ पैसे देकर बस से वापस भेज दिया. पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुंची. डरी-सहमी उसने परिजनों को आपबीती सुनाई.
परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे. पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करके इस मामले की जांच शुरू कर दी है. पीड़िता का मेडिकल जांच कराया जा रहा है. पीड़िता के परिजनों के मुताबिक, उन लोगों ने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की वरना आज उसकी इज्जत बच जाती.
अब भूल से भी किसी महिला को न कहना ‘छम्मकछल्लो’, मिलेगी सजा
ठाणे। अब किसी लड़की को ‘छम्मकछल्लो’ कहा तो खैर नहीं है. जी हां ठाणे की एक अदालत ने ‘छम्मकछल्लो’ शब्द का इस्तेमाल कर उसे बुलाना ‘एक महिला का अपमान करने’ के बराबर कहा है. अमूमन स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में पुरुष बिना सोचे-समझे लड़कियों के लिए कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर देते हैं जो गलत इशारा देते हैं. अदालत के इस फैसले के बाद उम्मीद है कि इन शब्दों को बोलते हुए वो दो बार सोचेंगे. क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो कोर्ट में पेशी के लिए जाते ही नजर आएंगे.
एक मजिस्ट्रेट ने पिछले सप्ताह शहर के एक निवासी को ‘अदालत के उठने तक’ साधारण कैद की सजा सुनाई थी और उस पर एक रुपए का जुर्माना लगाया था. आरोपी के एक पड़ोसी ने उसे अदालत में घसीटा था. पड़ोसी महिला की शिकायत के अनुसार, 9 जनवरी 2009 को जब वह अपने पति के साथ सैर से लौट रही थी, तब उसे एक कूड़ेदान से ठोकर लग गई. महिला ने कहा कि यह कूड़ेदान उक्त आरोपी ने सीढ़ियों पर रखा था.
आरोपी इस दंपति पर चिल्लाने लगा और उन्हें कई चीजें कहने के बीच उसने महिला को ‘छम्मकछल्लो’कहकर पुकारा. इस शब्द से गुस्साकर महिला ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया. तब महिला ने अदालत का रुख किया. 8 साल बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट आर टी लंगाले ने उनके मामले को उचित ठहराते हुए कि आरोपी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 509 (शब्द, इशारे या किसी गतिविधि से महिला का अपमान) के तहत अपराध किया है.
मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा, यह एक हिंदी शब्द है. अंग्रेजी में इसके लिए कोई शब्द नहीं है. भारतीय समाज में इस शब्द का अर्थ इसके इस्तेमाल से समझा जाता है. आम तौर पर इसका इस्तेमाल किसी महिला का अपमान करने के लिए किया जाता है. यह किसी की तारीफ करने का शब्द नहीं है, इससे महिला को चिढ़ होती है और उसे गुस्सा आता है.
क्या है पूरा मामला? दरअसल कोर्ट में साल 2009 में एक मामला आया था. जिसमें एक महिला ने अपने पड़ोसी को अदालत में घसीटा था क्योंकि उसने उस महिला को ‘छम्मकछल्लो’ कह दिया था. महिला की शिकायत के मुताबिक, 9 जनवरी 2009 को जब वह अपने पति के साथ सैर से लौट रही थी, तब उसे एक कूड़ेदान से ठोकर लग गई. महिला ने कहा कि वो कूड़ेदान उनके पड़ोसी ने ही सीढियों पर रखा था.
आरोपी इसके बाद दंपति पर चिल्लाने लगा और उन्हें बुरा-भला कहने के बीच उसने महिला को ‘छम्मकछल्लो ‘ कहकर पुकारा. इस शब्द से गुस्सा होकर महिला ने पुलिस से संपर्क किया लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया. तब महिला ने अदालत का रुख किया.
अब राम मनोहर लोहिया अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 49 बच्चों की मौत
लखनऊ। उत्तरप्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में भी गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसा हादसा हुआ है. यहां ऑक्सीजन और दवा की कमी से 49 बच्चों की मौत हो गई है.
फर्रुखाबाद के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 30 दिनों में में करीब 49 बच्चों की मौत पर जिला प्रशासन ने जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज करा दी है. जांच में बच्चों की मौत लापरवाही और इलाज में अभाव होना बताया गया है. यह मौतें 21 जुलाई से 20 अगस्त तक के बीच में हुई है. फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल में यह मौतें हुई है. मौत की वजह भी ऑक्सीजन की कमी ही सामने आ रही है.
यहां डीएम के आदेश पर हुई एक जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. मृतक बच्चों के परिवार वालों को भी अंदेशा था कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से ही हुई है.
रविवार(3 सितंबर) को डीएम के आदेश के बाद जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है, इस मामले में देर रात अस्पताल के चीफ मैडिकल ऑफिसर (सीएमओ) और चीफ मैडिकल सुप्रीटेंडेंनट (सीएमएस) के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है.बीते महीने 10 अगस्त को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी ऐसा ही मामला सामने आया था जहा ऑक्सीजन की कमी से मात्र दो दिन के अंदर 36 बच्चों की मौत हो गई थी.
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि लोहिया अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में जांच कराई गई थी. जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है. जांच रिपोर्ट में प्रकाश में बिंदुओं आए अन्य पर भी कार्रवाई की जाएगी. जांच रिपोर्ट में सामने में आए अन्य बिंदुओं पर भी कार्रवाई की जाएगी. चिकित्सकों के खिलाफ आइपीसी की धारा 176, 188 व 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उपनिरीक्षक बनी सिंह को मामले की विवेचना सौंपी गई है.

