यूपी में एकजुट होने लगे दलित संगठन

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में दलितों के साथ हो रहे शोषण और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए तमाम बहुजन संगठन एकजुट हो रहे हैं. यह संगठन एकजुट होकर संयुक्त फोरम बनाएंगे. यहा फोरम दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक समुदाय के विकास और हित के लिए काम करेगी.

गोरखपुर में रहने वाले हरिशरण गौतम की पहल पर एक संयुक्त फोरम बनाया जाएगा. हरिशरण गौतम ‘डा. बीआर अम्बेडकर ग्रंथालय एवं जनकल्याण समिति’ के अध्यक्ष है. गौतम यहां बच्चों को पढ़ाते भी है. और प्रत्येक महीने के पहले रविवार को राप्ती नगर स्थित बुद्ध विहार में विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ मिलकर बैठक करते है. इस बैठक में दलितों और पिछड़ों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है.

हरिशरण गौतम ने दलित हित के लिए बहुत काम किया है. उन्होंने यूपी की अखिलेश सरकार (दिसंबर 2016) और मुलायम सरकार (2005) में पिछड़ी जातियों को दलित जाति में शामिल करने वाले कानून को अदालत में चुनौती दी थी. और उस पर स्टे लगवाया था.

हरिशरण गौतम के साथ-साथ समिति के संयोजक पारसनाथ जिज्ञासु (रिटा. उपायुक्त), विश्वनाथ (रिटा. बैंक मैनेजर) और वकील उदयराज जिला स्तर पर बैठक भी आयोजन करते है. हरिशरण गौतम ने दलित दस्तक को बताया कि तमाम दलित संगठन को एकजुट करने के लिए संयुक्त फोरम का निर्माण किया जाएगा. जिसमें प्रदेश के 27-28 संगठन होंगे. इन संगठनों में मुख्य रूप से अखिल भारतीय बाबासाहेब डा. अम्बेडकर समाज सुधार समिति, बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया, रविदास सभा, अम्बेडकर जागरण मंच, लार्ड बुद्धा सोसाइटी शामिल है.

गौतम ने आगे बताया कि संयुक्त फोरम का पूरी तरह से स्थापित होने के बाद यूपी के विभिन्न जिलों और मंडल में जाकर दलित मुद्दों पर विमर्श करेगी. सरकार और उच्च जातियों द्वारा दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ और मुखरता से अपनी आवाज को बुलंद करेंगे.

लालू और तेजस्वी यादव को सीबीआई ने दिल्ली तलब किया

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिजनों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लालू परिवार पर तमाम जांच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीबीआई ने अब रेलवे होटल के टेंडर घोटाला मामले में लालू और तेजस्वी यादव को नोटिस भेजा है। और उन्हें पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया है। सीबीआई ने लालू यादव को 11 और तेजस्वी यादव को 12 सितंबर को हाजिर होने का नोटिस जारी किया है। यह पूछताछ दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में होगी।

सीबीआई ने लालू प्रसाद और उनसे संबंधित आधा दर्जन लोगों के पटना से लेकर दिल्ली स्थित कुल 12 ठिकानों पर पिछले 7 जुलाई को बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में सीबीआई को कई कागजात मिले थे। इन कागजातों से यह पता चला है कि प्रसिद्ध होटल व्यवसायी विनय कोचर और विजय कोचर को रांची व पुरी में रेलवे के दो बड़े होटल लीज पर दिए जाने के एवज में कोचर बंधुओं से बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्ति ली गई है। इस संपत्ति में पटना के बेली रोड पर तेजस्वी यादव की जमीन भी शामिल है। छापेमारी में बरामद दस्तावेज बताते हैं कि पूर्व में कोचर बंधुओं को रांची और पुरी के होटल 30 साल की लीज पर दी गई थी, लेकिन बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 60 साल कर दी गई। लालू प्रसाद पर आरोप है कि होटलों की लीज की अवधि बढ़ाने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लालू यादव ने कहा है कि मुझे कई सालों से परेशान किया जा रहा है और मैं इस तरह की नोटिस से अब नहीं डरता। अब मुझे इसकी आदत हो गई है।

गौरी लंकेश की हत्या की NIA से जांच कराये केंद्र सरकारः मायावती

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने गौरी लंकेश की हत्या को साजिश बताया है. मायावती ने इस हत्या के साथ-साथ दाभोलकर, गोविन्द पंसारे और कलबुर्गी जैसे लेखकों व साहित्यकारों की हत्याओं की जांच एनआईए से कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में निंदा के साथ-साथ गंभीरता भी दिखानी होगी.

गौरी लंकेश की हत्या की निंदा करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि स्वतंत्र व निष्पक्ष विचारों वाले लेखकों, पत्रकारों व बुद्धिजीवियों की जिस प्रकार लगातार हत्या हो रही हैं और देशभर में विभिन्न प्रकार से अन्य लोगों को भी आतंकित किया जा रहा है उसकी गंभीरता को समझते हुये केन्द्र सरकार की एनआईए की जांच जरूरी है. क्योंकि प्रथम दृष्टया ये सभी मामले एक बड़ी साजिश का हिस्सा लगते हैं जिसके पीछे मजबूत लोगों का दिल, दिमाग व धन लगा हुआ है.

मायावती ने कहा कि इन हत्याओं के पीछे एक खास घातक पैटर्न पूरे देश को नजर आ रहा है, जैसा कि गोरक्षा, लव जिहाद, एण्टी-रोमियों, घर वापसी आदि मामलों में पूरे तौर पर स्पष्ट है. देशहित में इन मामलों के प्रति केन्द्र व राज्य सरकारों को गंभीरता दिखानी चाहिये जो कि अब तक कहीं भी देखने को नहीं मिला है.

मायावती ने कहा कि देश के लिये बड़ी चिन्ता की बात है. लोग देश भर में सड़कों पर निकलकर अपनी चिंताओं को प्रकट भी कर रहे हैं. अब सरकारों को अवश्य ही जाग जाना चाहिये. जिस प्रकार से केन्द्र की सरकार कश्मीरी नेताओं की एनआईए से जांच करवा रही है, उसी प्रकार विभिन्न राज्यों में हो रही इस लोकतंत्र-विरोधी हत्याओं व इससे जुड़ी आतंकी घटनाओं की भी जांच एनआईए से होनी चाहिए.

पानी की छीटें पड़ने पर ठाकुरों ने किशोरी सहित दलितों को पीटा

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छपरा। सारण जिले के अमनौर प्रखंड के परशुरामपुर गांव में रास्ते पर लगे पानी का छीटा पड़ने पर दबंगों ने दलितों की जमकर पीटायी कर दी है. इस बर्बरता से करीब छह दलित बुरी तरह ज़ख्मी हो गए हैं. इसको लेकर स्थानीय थाने में 14 लोगों पर एससी, एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है.

पीड़ितों ने बताया कि परशुरामपुर दियर से रामचंद्र राम का पुत्र पप्पु कुमार राम घास लेकर घर वापस लौट रहा था. इसी रास्ते से ध्रुप सिंह का पुत्र मिथिलेश कुमार सिंह भी आ रहा था. सड़क पर पानी जमा होने के कारण गलती से मिथिलेश कुमार पर पानी का थोड़ा छिटें पड़ गई. इस बात पर आक्रोशित होकर उच्च जाति के लोगों ने जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए पप्पु कुमार राम की जमकर पिटाई कर दी. इसके बाद दलित बस्ती के लोगों ने जब घटना का विरोध किया तो उनकी भी गोलबंद होकर जमकर पिटाई कर दी गई. इसके बाद करीब दो बजे राजू राम की पुत्री जब मजदूरी मांगने गई तो राकेश सिंह व अरूण सिंह ने अभद्र व्यवहार करते हुए उसकी भी पीटाई कर दी. कई दलितों के झोपरीनुमा घर भी उजार दिया गया है.

घटना के बाद दलितों में भय व्याप्त हो गया है. इस घटना में छह दलित घायल हो गए है. इन सभी दलितों का इलाज़ अमनौर पीएचसी में किया जा रहा है. इसके बाद पप्पु मांझी के बयान पर स्थानीय थाने में ध्रुप सिंह, मिथिलेश सिंह, राहुल सिंह, रत्नेश सिंह, मनु सिंह, राकेश सिंह, अरूण सिंह, रणवीर सिंह, कन्हैया सिंह, बिट्‌टू सिंह, रामदरन सिंह, जितेन्द्र सिंह, शेरू सिंह, साहेब सिंह समेत 14 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. इस बावत थानाध्यक्ष से पुछे जाने पर उन्होंने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है और किसी भी सूरत में आरोपियों को नहीं बख्शा जाएगा.

दलितों को ना मिले पीने का पानी इसलिए सवर्णों ने कुएं में मिलाया जहर

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कलबुर्गी। कर्नाटक और पी. सिद्दारमैया इन दिनों खूब चर्चा में है. दो दिन पहले कर्नाटक की राजधानी में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई. गौरी लंकेश ब्राह्मणवाद और जातिवाद के खिलाफ लड़ने वाली निर्भीक पत्रकार और समाजसेविका थी. आप इस घटना से ही अंदाजा लगा सकते है कि जब एक पढ़-लिखे और जागरूक वर्ग के लोगों के साथ हिंसा हो रही है तो अन्य लोगों के साथ क्या होता होगा?

गौरी लंकेश की हत्या हुए अभी दो ही दिन हुए है. जातिवादियों एक और घटना को अंजाम दे दिया. मामला बेंगलुरू से 640 किलोमीटर दूर कलबुर्गी के चन्नूर गांव का. जहां जातिवादियों ने एक कुएं में जहर मिला दिया, ताकि इस कुएं के पानी को यहां रहने वाले दलित नहीं पी सके.

इस गांव में सात कुएं हैं, जिसमें से दलित समुदाय के लोगों को सिर्फ एक कुएं से पानी पीने की इजाजत है. यहां के दलितों की जिंदगी कितनी मुश्किल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस कुएं का पानी पीने की इजाजत सवर्णों ने इन्हें दी है वो कुआं इनके घरों से लगभग 200 मीटर दूर है.

दलितों को यहीं से पानी सप्लाई किया जा रहा था. गांव के बाकी कुओं पर सवर्णों का कब्जा है. पहले तो सब कुछ ठीक चला आ रहा था समस्या की शुरुआत तब हुई जब दलित जिस कुएं से पानी पी रहे थे उस जमीन का लीज एक उच्च जाति के व्यक्ति को दे दिया गया. इसके बाद दलितों को इस कुएं से पानी खींचने की मनाही कर दी गई. जमीन की लीज सवर्ण समुदाय के व्यक्ति को कैसे मिली इसकी पड़ताल हो रही है.

बाद में कुएं में एक मोटर पंप बिठाया गया और इसी के जरिये दलितों के घर तक पानी की सप्लाई की जाने लगी. कुछ दिन पहले महंतप्पा नाम का एक दलित कुएं से पानी लाने गया क्योंकि बिजली ना होने की वजह से कई दिनों से पानी की सप्लाई नहीं हुई थी. लेकिन इस शख्स ने देखा कि कुएं से तेज बदबू आ रही है. इस शख्स ने तुरंत इस बात की सूचना दलित समुदाय के अन्य लोगों को दी. जांच में पता चला कि कुएं के पानी में इंडोसल्फान नाम का जहरीला केमिकल मिलाया गया था. पुलिस ने शिकायत के बाद कुएं के मालिक के खिलाफ दलित उत्पीड़न एक्ट की धारा-3 के तहत केस दर्ज कर लिया है.

शक्तिपुंज एक्सप्रेस के 7 डिब्बे पटरी से उतरे, घटनास्थल पर बिखरे थे पटरियों के टुकड़े

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रेल के पटरियों से उतरने का सिलसिला लगातार जारी है. उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में गुरुवार सुबह एक और रेल हादसा हुआ. हावड़ा से जबलपुर जा रही शक्तिपुंज एक्सप्रेस के 7 डिब्बे पटरी से उतर गए. यह हादसा उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बॉर्डर पर ओबरा थाना क्षेत्र के फफराकुंड इलाके में हुआ. हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. ट्रेन संख्या 11448 HWH-JBP शक्तिपुंज एक्सप्रेस ने ओबरा केबिन सुबह 6.13 पर पार किया था, इस दौरान उसके 7 डिब्बे पटरी से उतर गए. ट्रेन में कुल 21 डिब्बे थे. हादसे के चलते पटरियां पूरी तरह से टूट गई हैं. मौके पर रेलवे अधिकारी और पुलिस भी पहुंच गई है.

दूसरी ओर गुरुवार को ही उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक नौजवान की समझदारी से बड़ा रेल हादसा होने से बच गया. फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ रेल लाइन के पास पटरी कटी हुई थी, तभी वहां पवन नाम के युवक ने अपनी लाल बनियान दिखाकर कालिंदी एक्सप्रेस को रुकवाया और हादसा होने से बच गया.

इससे पहले 19 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के पास पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई थी. खतौली रेल हादसे के 5 दिन के अंदर कानपुर और इटावा के बीच औरैया जिले में आजमगढ़ से दिल्ली आ रही कैफियत एक्सप्रेस औरैया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई.

पीयूष गोयल के रेल मंत्री का पद संभालने के बाद यह पहला रेल हादसा है. लगातार हुई रेल दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए सुरेश प्रभु ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफे की पेशकश की थी. इसके बाद कैबिनेट फेरबदल में पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय का जिम्मा दे दिया गया.

श्रीलंका को तीनों फोर्मेट में हरा कर भारत ने रचा इतिहास

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कोलंबो। कप्तान विराट कोहली की अगुवाई में भारत ने बुधवार को एक एकमात्र टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जीत हासिल कर श्रीलंका दौरा 9-0 से समाप्त किया.

इस तरह से टीम इंडिया ने एक विदेशी दौरे पर विरोधी टीम का 9-0 से सफाया करने वाली पहली टीम बन गई है. हालांकि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने भी पाकिस्तान को इसी अंतर से हराया था, लेकिन उसने यह जीत अपने घर में ही दर्ज की थी.

भारत ने टेस्ट शृंखला में 3-0 और एकदिवसीय शृंखला में 5-0 से क्लीन स्वीप किया था. इस तरह से उसने इस दौरे में 9-0 से श्रीलंका का सूपड़ा साफ किया.

कप्तान विराट कोहली की एक और बेहतरीन पारी के दम पर भारत ने श्रीलंका को एकमात्र टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में सात विकेट से करारी शिकस्त दी. श्रीलंका ने टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 170 रन बनाए.

दिलशान मुनावीरा ने 29 गेंदों पर पांच चौकों ओर चार छक्कों की मदद से 53 रन की तेजर्तार पारी खेली. अशान प्रियरंजन 40 गेंदों पर नाबाद 40 रन बनाए और इसुरू उदाना (नाबाद 19) के साथ डेथ ओवरों में अच्छे रन बटोरकर आठवें विकेट के लिए 20 गेंदों पर 36 रन की अटूट साझेदारी की.

अपना 50वां मैच खेल रहे कोहली के सामने हालांकि इन तीनों का प्रयास फीका पड़ गया. भारतीय कप्तान ने सलामी जोड़ी के जल्दी पवेलियन लौटने के बाद 54 गेंदों पर 82 रन की पारी खेली जिसमें सात चौके और एक छक्का शामिल है.

उन्होंने मनीष पांडे (36 गेंदों पर नाबाद 51) के साथ तीसरे विकेट के लिए 119 रन जोड़े. इससे भारत ने 19.2 ओवर में तीन विकेट पर 174 रन बनाकर आसानी से लक्ष्य हासिल किया.

टीम इंडिया ने टेस्ट और वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप करने के बाद दौरे का इकलौता टी-20 मैच भी जीत कर श्रीलंका का 9-0 से सफाया कर दिया है. इसी के साथ ही टीम इंडिया विदेशी धरती पर ये कारनामा करने वाली पहली टीम बन गई है.

हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 7 साल पहले पाकिस्तान को 2009-10 में हुई सीरीज में टेस्ट में 3-0, वनडे में 5-0 और 1 टी20 में हराकर पूरी सीरीज में 9-0 से सफाया किया था, लेकिन वो रिकॉर्ड उसने अपनी धरती पर बनाया था.

1993 मुंबई धमाका मामले में आज टाडा कोर्ट सुनाएगी फैसला

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मुंबई। मुंबई की विशेष टाडा कोर्ट आज मुंबई ब्लास्ट के दोषियों की सजा का ऐलान करेगी. इस मामले में कुख्यात अबू सलेम समेत 5 लोगों को सजा सुनाई जाएगी. एक दोषी की पहले ही मौत हो चुकी है. 12 मार्च, 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में ढाई सौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी. मामले में कुल 7 आरोपी थे, जिनमें से एक अब्दुल कयूम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था और छह को दोषी पाया था. छह दोषियों में एक मुस्तफा डोसा की मौत हो चुकी है.

टाडा अदालत ने इस मामले में अबू सलेम, मुस्तफा दौसा, उसके भाई मोहम्मद दौसा, फिरोज अब्दुल राशिद खान, मर्चेंट ताहिर और करीमुल्लाह शेख को दोषी ठहराया था. इनमें से एक मुस्तफा दौसा की मौत हो चुकी है.

अबु सलेम यूं तो साजिश की धारा 120बी और हत्या के तहत दोषी पाया गया है. ऐसे में मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन अबु सलेम को पुर्तगाल से सशर्त लाया गया है कि उसे 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जा सकती. सीबीआई के विशेष सरकारी वकील दीपक साल्वी ने भी उसके लिए मौत की सजा की मांग ना करते हुए अधिक से अधिक सजा की मांग की है. वहीं ताहिर मर्चेंट, करीमुल्लाह खान और फ़िरोज़ अब्दुल राशिद खान ये सभी भी साजिश की धारा 120 बी, टाडा और हत्या के तहत दोषी पाए गए हैं. विशेष सरकारी वकील ने इनके लिए मौत की सजा की मांग की है.

आदित्य सचदेवा रोड रेज केस में रॉकी यादव को मिली उम्रकैद की सजा

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पटना। बिहार में गया के चर्चित आदित्य सचदेवा रोड रेज केस में जेडीयू की निलंबित एमएलसी मनोरमा देवी के बेटे रॉकी यादव को जिला अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके अलावा दो लोगों को उम्रकैद और आरोपी को शरण देने के मामले में रॉकी के पिता बिंदी यादव को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई.

गया व्यवहार न्यायालय के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश सच्चिदानंद प्रसाद सिंह की अदालत ने बुधवार को छात्र आदित्य सचदेवा हत्या मामले में रॉकी, उसके भाई टेनी यादव और एमएलसी के अंगरक्षक राजेश कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके अलावा बिंदी यादव को पांच वर्ष की सजा सुनाई.

लोक अभियोजक सरताज अली खान ने बताया कि रॉकी को आर्थिक दंड के रूप में एक लाख रुपए, जबकि टेनी और राजेश को 50-50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है.

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उन्होंने बताया कि अदालत ने इस मामले में 31 अगस्त को मुख्य आरोपी रॉकी यादव, उसके भाई राजीव उर्फ टेनी यादव और एमएलसी के बॉडीगार्ड राजेश कुमार को हत्या का दोषी करार दिया, जबकि बिंदी यादव को भादंवि की धारा 212 और 177 के तहत आरोपी को शरण देने का दोषी ठहराया था. अदालत ने इस मामले में सजा के लिए बुधवार की तारीख मुकर्रर की थी.

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रॉकी यादव सत्तारूढ़ जनता दल (युनाइटेड) की निलंबित एमएलसी मनोरमा देवी का बेटा है. सात मई, 2016 को 12वीं के छात्र आदित्य सचदेवा की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने दोस्तों के साथ अपनी कार से बोधगया से अपने गया स्थित घर आ रहा था. रास्ते में साइड नहीं देने से नाराज रॉकी ने ओवरटेक कर सचदेवा की कार रोक दी थी और उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी.

रिक्शा चालक के बेटे ने एथलेटिक्स में बनाया ऑल इंडिया रिकॉर्ड

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नई दिल्ली। कहते हैं अगर इंसान जिंदगी में कुछ पाने की ठान ले तो वो किसी भी परिस्थितियों में कठिन से कठिन रास्ते को भी पार कर लेता है. उसकी हिम्मत और मेहनत उसका नसीब बदल देती है. ऐसा ही कारनामा दिल्ली की मलीन बस्ती में रहने वाले निसार अहमद ने कर दिखाया.

आजादपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित बड़ा बाग की झुग्गियों में रहने वाले निसार ने दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है. निसार ने 100 और 200 मीटर की स्प्रिंट प्रतियोगिता में ये मेडल हासिल किया है. इससे भी खास बात यह है कि उन्होंने नेशनल लेवल के अंडर-16 खिलाड़ियों के रिकॉर्ड तोड़े हैं.

100 मीटर की रेस उन्होंने सिर्फ 11 सेकंड में पूरी की, पुराना रिकॉर्ड 11.02 सेकंड का था. 200 मीटर की रेस में भी उनकी फुर्ती काबिल-ए-तारीफ रही, महज 22.08 सेकंड में उन्होंने रिकॉर्ड अपने नाम किया है, जोकि पिछले रिकॉर्ड से 0.3 सेकंड कम है.

निसार अहमद के पिता ननकू अहमद रिक्शा चलाते है और मां घरों में साफ-सफाई का काम करती हैं. प्रतियोगिता जीतने के बाद जब निसार पदक लेने के लिए जा रहे थे उस समय उनके पिता रिक्शा चलाने में और मां घर में काम करने में व्यस्त थीं.

16 साल के निसार आजादपुर के बड़ा बाग के पास रेलवे ट्रैक की बस्ती के दस बाई दस के कमरे में रहते हैं. इसी कमरे में उनके मां-पिता और बहन रहती हैं. घर के एक कोने में निसार की ट्रोफी और मेडल उनकी तस्वीर के साथ सजे हैं.

निसार अहमद की दौड़ का सफर चार साल पहले शुरू हुआ. अशोक विहार- 2 के गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकंडरी स्कूल में पढ़ने वाले निसार कहते हैं, ‘स्कूल में मेरे टैलंट को मेरे फिजिकल एजुकेशन टीचर सुरेंद्र कुमार ने पहचाना. उन्होंने मुझे काफी प्रेरित किया, यहां तक दूध पीने के लिए पैसे तक दिए.’

वो आगे बताते है, ‘तीन साल पहले उनकी मुलाकात कोच सुनीता राय से हुई. फिर छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग की शुरुआत हुई. यहां से मेरी स्ट्रेंथ और बढ़ी, मैं रोज 6-6 घंटे एक्सरसाइज और प्रैक्टिस करता हूं.’

निसार ने 2014-15 में नेशनल लेवल पर खेला और सेमी फाइनल तक पहुंचे. इंटर जोनल लेवल पर कई रिकॉर्ड इनके नाम दर्ज है. 2016 में स्कूल लेवल पर नेशनल गेम्स-कालीकट में दो गोल्ड और दो ब्रॉन्ज जीते.

इसी साल दिल्ली स्टेट ऐथलिटिक मीट में 100 मीटर में गोल्ड और 400 मीटर में सिल्वर मेडल उनके नाम रहा. पिछले तीन साल में हर बार उन्हें बेस्ट ऐथलीट का खिताब मिला है.

निसार कई बार अपने घर के हालात के बीच हताश हो जाते हैं मगर उनकी कोच सुनीता राय उन्हें रुकने नहीं देतीं. वह कहती हैं, ‘हम उसे अकेला नहीं छोड़ सकते. वह जूनियर नेशनल गेम्स में चुना जा चुका है, मुझे यकीन है कि वो इंटरनेशनल लेवल पर कॉमनवेल्थ, ओलिंपिक्स के लिए जा सकता है.’

स्वादिष्ट भोजन में कंकड़ की तरह है कर्नाटक का हिंदी विरोध!

छात्र जीवन में अनायास ही एक बार दक्षिण भारत की यात्रा का संयोग बन गया. तब तामिलनाडु में हिंदी विरोध की बड़ी चर्चा होती थी. हमारी यात्रा ओडिशा के रास्ते आंध्र प्रदेश से शुरू हुई और तामिलनाडु तक जारी रही. इस बीच केरल का एक हल्का चक्कर भी लग गया. केरल की बात करें तो हम बस राजधानी त्रिवेन्द्रम तक ही जा सके थे. यह मेरे जीवन की अब तक कि पहली और आखिरी दक्षिण भारत यात्रा है.

80 के दशक में की गई इस यात्रा के बाद फिर कभी वहां जाने का संयोग नहीं बन सका. हालांकि मुझे दुख है कि करीब एक पखवाड़े की इस यात्रा में कर्नाटक जाने का सौभाग्य नहीं मिल सका. दक्षिण की यात्रा के दौरान मैंने महसूस किया कि तामिलनाडु समेत दक्षिण के राज्यों में बेशक लोगों में हिंदी के प्रति समझ कम है. वे अचानक किसी को हिंदी बोलता देख चौंक उठते हैं. लेकिन विरोध का स्तर दुर्भावना से अधिक राजनीतिक है.

तामिलनाडु समेत दक्षिण के सभी राज्यों में तब भी वह वर्ग जिसका ताल्लुक पर्यटकों से होता था, धड़ल्ले से टूटी–फुटी ही सही लेकिन हिंदी बोलता था. उन्हें यह बताने की भी जरूरत नहीं होती थी कि हम हिंदी भाषी है. बहरहाल समय के साथ समूचे देश में हिंदी की व्यापकता व स्वीकार्यता बढ़ती ही गई. अंतरराष्ट्रीय शक्तियों व बाजार की ताकतों ने भी हिंदी की व्यापकता को स्वीकार किया और इसका लाभ उठाना शुरू किया. लेकिन एक लंबे अंतराल के बाद कर्नाटक में अचानक शुरू हुआ हिंदी विरोध समझ से परे हैं. वह भी उस पार्टी द्वारा जिसका स्वरूप राष्ट्रीय है.

आज तक कभी कर्नाटक जाने का मौका नहीं मिलने से दावे के साथ तो कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हूं. लेकिन मुझे लगता है कि इस विरोध को वहां के बहुसंख्य वर्ग का समर्थन हासिल नहीं है. यह विरोध सामाजिक कम और राजनीतिक ज्यादा है. क्योंकि मुझे याद है कि तकरीबन पांच साल पहले एक बार बेंगलुरू में उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ कुछ अप्रिय घटना हो गई थी. इसी दौरान मुंबई समेत महाराष्ट्र के कुछ शहरों में भी परप्रांतीय का मुद्दा जोर पकड़ रहा था. जिसके चलते हजारों की संख्या में इन प्रदेशों के लोग ट्रेनों में भर–भर कर अपने घरों को लौटने लगे. लेकिन कुछ दिनों बाद आखिरकार अंधेरा मिटा और उन राज्यों के लोग फिर बेंगलुरू समेत उन राज्यों को लौटने लगे, जो उनकी कर्मभूमि है.

मुझे याद है तब अखबारों में एक आला पुलिस अधिकारी हाथ जोड़े उत्तर-पूर्व से वापस बेंगलुरू पहुंचे लोगों का स्वागत करते हुए खबर और फोटो प्रमुखता से अखबारों में छपी थी. यह तस्वीर देख मेरा मन गर्व से भर उठा था. मुझे लगा कि देश के हर राज्य को ऐसा ही होना चाहिए. जो धरतीपुत्रों की तरह उन संतानों को भी अपना माने जो कर्मभूमि के लिहाज से उस जगह पर रहते हैं. आज तक मैंने कर्नाटक में हिंदी विरोध या दुर्भावना की बात कभी नहीं सुनी थी. लेकिन एक ऐसे दौर में जब भाषाई संकीर्णता लगभग समाप्ति की ओर है, कर्नाटक में नए सिरे से उपजा हिंदी विरोध आखिर क्यों स्वादिष्ट भोजन की थाली में कंकड़ की तरह चुभ रहा है, यह सवाल मुझे परेशान कर रहा है.

आज के दौर में मैंने अनेक ठेठ हिंदी भाषियों को मोबाइल या लैपटॉप पर हिंदी में डब की गई दक्षिण भारतीय फिल्में घंटों चाव से निहारते देखा है. अक्सर रेल यात्रा के दौरान मुझे ऐसे अनुभव हुए हैं. बल्कि कई तो इसके नशेड़ी बन चुके हैं. और अहिंदीभाषियों की हिंदी फिल्मों के प्रति दीवानगी का तो कहना ही क्या. मुझे अपने आस–पास ज्यादातर ऐसे लोग ही मिलते हैं जिनके मोबाइल के कॉलर या रिंगटोन में उस भाषा के गाने सुनने को मिलते हैं जो उनकी अपनी मातृभाषा नहीं है.

मैं जिस शहर में रहता हूं वहां की खासियत यह है कि यहां विभिन्न भाषा के लोग सालों से एक साथ रहते आ रहे हैं. यहां किसी न किसी बहाने सार्वजनिक पूजा का आयोजन भी होता रहता है. प्रतिमा विसर्जन परंपरागत तरीके से होता है, जिसमें युवक अमूमन उन गानों पर नाचते–थिरकते हैं, जिसे बोलने वाले शहर में गिने–चुने लोग ही है. शायद उस भाषा का भावार्थ भी नाचने वाले लड़के नहीं समझते. लेकिन उन्हें इस गाने का धुन अच्छा लगता है तो वे बार–बार यही गाना बजाने की मांग करते हैं, जिससे वे अच्छे से नाच सके. एक ऐसे आदर्श दौर में किसी भी भाषा के प्रति विरोध या दुर्भावना सचमुच गले नहीं उतरती. लेकिन देश की राजनीति की शायद यही विडंबना है कि वह कुछ भी करने-कराने में सक्षम है.

जातिवादियों ने दलित महिला को निर्वस्त्र कर पीटा

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सीकर। देश में ऐसा कोई भी राज्य नहीं हैं जहां दलितों के साथ भेदभाव न होता है. आए दिन भारत किसी न किसी राज्य में दलितों के साथ जातिगत आधार पर भेदभाव और मारपीट की घटना सामने आती है. भारतीय संविधान ने जो ताकत दलितों को दी सवर्णों ने उसे भी छीन लिया और अपना वर्चस्व स्थापित करने में लगे रहते हैं.

राजस्थान के सीकर से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है. सीकर के दांतारामगढ़ थाना क्षेत्र के दुल्हेपुरा गांव में दलित महिला के साथ मारपीट का मामला सामने आया है. एक छोटी सी बात को लेकर आरोपी ने महिला के कपड़े फाड़ दिए और भरे बाजार में निर्वस्त्र कर लाठियों से पीटा. गनीमत रही कि आसपास के लोगों ने उसे बचा लिया. जिससे महिला को ज्यादा गंभीर चोट नहीं आई. अब पीड़ित महिला ने पुलिस को मामले की जानकारी दी है. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर पूरी घटना की जांच शुरू कर दी है.

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महिला के बच्चे एक खेत से होकर गुजर रही पगडंडी से जा रहे थे. इन बच्चों का वहां से गुजरना खेत मालिक मंगलचंद जाट को नागवार लगा. इससे नाराज जातिवादी मानसिकता वाले मंगलचंद ने बच्चों की मां के साथ मारपीट की.

पुलिस ने कहा कि दुल्हेपुरा गांव की एक महिला ने मंगलचंद जाट नामक व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया है. घटना के अनुसार बीते दिन महिला का बेटा व बेटी मंगलचंद के खेत के पास से पगडंडी से होकर जा रहे थे. महिला का आरोप है कि मंगलचंद जाट व उसकी भाभी पप्पूड़ी ने दोनों बच्चों को पकड़कर पिटाई शुरू कर दी. महिला बच्चों को छुड़ाने गई तो देवर-भाभी उसको भी पीटने लगे.

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आरोपियों ने उसके कपड़े फाड़ दिए व जाति सूचक गालियां भी दी. इसके बाद आरोपी उसे पीटते हुए घसीटकर बाजार में ले गए वहां पूरी तरह से निर्वस्त्र कर हाथ, पैर व जांघों पर लाठियों से बुरी तरह से पीटा. शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोगों ने छुड़वाया. थानाप्रभारी सुरेन्द्र सैनी ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है. मामले की जांच एसटी सेल के पुलिस उपाधीक्षक कर रहे हैं.

गोरक्षकों पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, हर राज्य में तैनात होंगे नोडल अधिकारी

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नई दिल्ली। गोरक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों को नया निर्देश जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को हर जिले में नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए जो इस तरह की हिंसा की घटनाओं को रोकने और इसे अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएं.

कोर्ट ने राज्यों को एक सप्ताह में अपना टास्क फोर्स बनाने के लिए कहा है, जिसमें वरिष्ठ पुलिसकर्मियों को नोडल अधिकारी के रूप में रखा जाएगा. कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिवों से कहा कि वे गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा को काबू में करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश राज्यों को देने की उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है या नहीं?

गोरक्षा के नाम पर बने संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और छह राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला ने राजस्थान के अलवर इलाके में हुई एक घटना का हवाला देते हुए गोरक्षा के नाम पर दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने की मांग की थी.

21 जुलाई को हुई अंतिम सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को किसी भी तरह की हिंसा की रक्षा नहीं करने के लिए कहा था और साथ ही गाय सुरक्षा की आड़ में हिंसक घटनाओं पर प्रतिक्रिया मांगी थी.

पहले ही दिन खराब हो गई लखनऊ की मेट्रो, 2 घंटे फंसे यात्री

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लखनऊ। बड़े जोर शोर से शुरू की गई लखनऊ मेट्रो में पहले ही दिन खराबी आ गई. मंगलवार को इसका उद्घाटन हुआ था और बुधवार से ये आम लोगों के लिए शुरू हो गई थी. लेकिन मेट्रो की पहले ही दिन की यात्रा अच्छी नहीं रही.

यह करीब एक घंटे तक आलमबाग स्टेशन पर खड़ी रही और बाद में इसे ले जाने के लिए दूसरी मेट्रो बुलानी पड़ी. इस दौरान मेट्रो में फंसे यात्रियों को सीढ़ी की मदद से उतारा गया. करीब एक घंटे तक मेट्रो में फंसे रहने के बाद ये लोग जब बाहर आए तो उनके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था.

हालांकि दो घंटे की मशक्कत के बाद समस्या का समाधान कर लिया गया. मेट्रो फिर लखनऊ की पटरियों पर दौड़ पड़ी. मंगलवार सुबह छह बजे के आसपास आम लोगों के लिए यह मेट्रो ट्रांसपोर्ट नगर से चली. इसमें LMRC के एमडी सहित बड़े अधिकारी और मीडिया के कई लोग सफर कर रहे थे. टीपी नगर से यह चारबाग स्टेशन पहुंची और इसके बाद आलमबाग पहुंची. वहीं जाकर यह मेट्रो खराब हो गई. करीब एक घंटे तक वह वहां खड़ी रही.

एक दिन पहले मंगलवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल राम नाइक की उपस्थिति में मेट्रो की शुरुआत की गई. उद्घाटन के दौरान सीएम योगी ने कहा कि समय पर योजना का पूरा होना काफी बड़ी बात है. मेट्रो की शुरुआत सीमित समय पर पूरा करने पर श्रीधरनजी और उनकी पूरी टीम को बधाई. उन्होंने कहा कि लोगों को इसमें सफर करने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बुधवार से ही लोगों को इसका लाभ मिलेगा.

योगी ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के कई शहरों में मेट्रो चलवाने की योजना पर काम कर रही है. अब अलग-अलग मेट्रो कॉर्पोरेशन के तहत काम ना होकर बल्कि राज्य में एक ही यूपी मेट्रो कॉर्पोरेशन की शुरुआत करेंगे. मैं चाहूंगा कि श्रीधरनजी उस कॉर्पोरेशन के प्रधान सलाहकार बनें.

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस मेट्रो रेल को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में रखते थे. यही वजह है कि मेट्रो के शिलान्यास से लेकर मेट्रो के बनने तक के हर सफर में वह साथ रहे, लेकिन चुनाव हार गए तो इसका उद्घाटन नहीं कर सके.