संकल्प भूमि पर बसपा के कार्यक्रम से डरी भाजपा कार्यक्रम फेल करने में जुटी

बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के अपमान की बात कह कर चीख रहा यह शख्स एक अम्बेडकरवादी है, जो यह मानता है कि भारत के निर्माण में संविधान निर्माता और देश के पहले कानून मंत्री बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर का योगदान किसी अन्य से कम नहीं है. यह वीडियो गुजरात के वडोदरा की है, जहां 23 सितंबर को बहुजन समाज पार्टी द्वारा संकल्प दिवस के सौ साल पूरा होने के मौके पर विशाल कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

असल में सारी दिक्कत यहीं से शुरू होती है. वडोदरा में संकल्प दिवस के दिन देश भर के अम्बेडकरवादियों का जमावड़ा लगता है. देश-विदेश के अम्बेडकरवादी यहां आकर सियाजी पार्क की उस धरती को नमन करते हैं, जहां बाबासाहेब ने उत्पीड़ित और उपेक्षित वर्ग को हजारों साल की गुलामी से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया था. बाबासाहेब ने यह संकल्प 23 सितंबर 1917 को लिया था. 23 सितंबर 2017 को इस सम्यक संकल्प के 100 साल पूरे हो रहे हैं.

बाबासाहेब को अपना आदर्श मानकर राजनीति करने वाली बहुजन समाज पार्टी इस शताब्दी वर्ष पर वडोदरा में एक बड़ा कार्यक्रम कर रही है. इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती हैं. इस मौके पर मायावती वडोदरा के नौलखी ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करेंगी और फिर सियाजी पार्क जाकर बाबासाहेब को श्रद्धांजली देंगी.

बसपा के इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा बौखला गई है. कार्यक्रम को लेकर शहर भर में पोस्टर और होर्डिंग्स लगे थे, जिसे उतार कर फेंक दिया गया. बहुजन समाज पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं और अन्य अम्बेडकरवादियों में इसको लेकर काफी रोष है. इस बारे में बसपा के गुजरात प्रभारी रामअचल राजभर कहते हैं- “बाबासाहेब के द्वारा दलितों, पीड़ितों और वंचित समाज के कल्याण के लिए वड़ोदरा में 1917 में संकल्प लिया गया था, उसी के 100 साल हो रहे हैं. बसपा के गुजरात इकाई की ओर से शताब्दी वर्ष का कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस समारोह में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश बहन कुमारी मायावती जी हैं.

भाजपा बसपा के इस कार्यक्रम से बौखला गई है और ओछी राजनीति पर उतर गई है. इस कार्यक्रम के लिए बसपा के बैनर और पोस्टर लगे हैं. हमने प्रशासन से कार्यक्रम की इजाजत भी ली है. बावजूद इसके हमारे बैनर और पोस्टर को हटाया जा रहा है. भाजपा बसपा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम से डर गई है, मोदी नहीं चाहते कि बहनजी गुजरात आएं. वो बहन कुमारी मायावती के इस कार्यक्रम से डर गए हैं और दिल्ली में बैठकर गुजरात सरकार को निर्देश दे रहे हैं. गुजरात में बहुजन समाज की एकजुटता से मोदी जी और भाजपा इतना डर गए हैं कि गुजरात में रोड शो करने आ गए.” राम अचल राजभर प्रभारी, बसपा गुजरात इकाई असल में बसपा की रैलियों में जुटने वाली भीड़ रिकार्डतोड़ होती है. संकल्प दिवस के मौके पर वैसे ही देश भर के लोग वडोदरा में रहेंगे. कार्यक्रम में बसपा प्रमुख मायावती का संबोधन देश भर में एक बड़ा मैसेज दे जाएगा. भाजपा की परेशानी यही है. भाजपा इस कार्यक्रम को विफल बनाने में जुट गई है. यही वजह है कि शहर में लगे होर्डिंग्स को हटाकर वह बसपा कार्यकर्ताओं का उत्साह तोड़ने में जुटी है.

पाकिस्तानी सेना ने फिर तोड़ा सीजफायर, गोलीबारी में 1 जवान शहीद और 2 जख्मी

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कुपवाड़ा। पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन किया और घुसपैठ करने के कोशिश की. पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में भारतीय सेना के गश्ती दल पर गोलीबारी भी की. इस गोलीबारी में एक भारतीय जवान शहीद हो गया और दो जवान घायल हो गए.

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी गोलीबारी का जरूरी और समुचित जवाब दिया जा रहा है. पहले सेना के अधिकारी ने कहा था कि पाकिस्तानी सैनिकों ने सुबह नियंत्रण रेखा पर बिना किसी उकसावे के गोलीबारी की.

वहीं, बुधवार को ही पाकिस्तान की तरफ से पंजाब इंटरनेशनल बॉर्डर पर घुसपैठ की कोशिश को सीमा सुरक्षा बल ने नाकाम किया है. BSF ने अमृतंसर की तहसील अजनाला की पोस्ट बीएसएफ ने 2 पाकिस्तान हथियार बन्द घुसपैठियों को को मार गिराया है.

BSF ने दोनों घुसपैठियों के पास से एके-47 राइफल और एक मैगजीन के साथ ही 4 किलो हीरोइन बरामद किया है. आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक इन घुसपैठियों के पास से 9 एमएम पिस्टल, उसकी मैगजीन के अलावा 4 राउंड फायर भी मिली है. इनके पास से पाकिस्तान का मोबाइल और उसका SIM कार्ड भी मिला है. इन घुसपैठियों के पास से 20,000 पाकिस्तान की करेंसी भी मिली है.

रोजगार पैदा करने में मोदी सरकार भी नाकाम- राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज अमेरिका के प्रिंस्टन यूनीवर्सिटी में छात्रों से मुखातिब हुए. छात्रों से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को भारत में सत्ता इसलिए मिली क्योंकि लोग कांग्रेस पार्टी से बेरोजगारी के मुद्दे पर नाराज थे.

हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी भारत में इस समस्या के लिए पर्याप्त में काम नहीं कर रहे हैं. गांधी यहां दो हफ्ते की अमेरिका यात्रा पर हैं. प्रिंस्टन यूनीवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने ने कहा कि आज किसी भी लोकतांत्रिक देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार को लेकर है फिर चाहे वह अमेरिका हो या फिर भारत. उन्होंने कहा कि लोग रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं लेकिन शहरों में भी उनके लिए रोजगार नहीं है. ये एक बड़ी चुनौती है.

राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि लोग कांग्रेस पार्टी से बेरोजगारी के मुद्दे पर नाराज थे और यही कारण है कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को भारत में सत्ता मिली. उन्होंने कहा कि रोजगार का पूर्ण मतलब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में लोगों को सशक्त करना और शामिल करना है. उन्होंने छात्रों से कहा, मैं सोचता हूं, मोदी के उभार का मुख्य कारण और ट्रंप के सत्ता में आने की वजह, अमेरिका और भारत में रोजगार का प्रश्न होना है. हमारी बड़ी आबादी के पास कोई नौकरी नहीं है और वह अपना भविष्य नहीं देख सकते हैं. और इसलिए वह परेशान हैं, और उन्होंने इस तरह के नेताओं को समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि एक अन्य समस्या यह है कि बेरोजगारी को कोई समस्या मान ही नहीं रहा है. राहुल गांधी ने कहा, मैं ट्रंप को नहीं जानता. मैं उस बारे में बात नहीं करूंगा. लेकिन, निश्चित ही हमारे प्रधानमंत्री (रोजगार सृजन के लिए) पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं. उन्होंने अमेरिका में विशेषज्ञों, व्यापारिक नेताओं और कांग्रेस के सदस्यों के साथ अपनी बैठक में बेरोजगारी का मामला बार-बार उठाया है.

‘आदिवासियों को उखाड़ फेंकना चाहती है झारखंड सरकार’

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हजारीबाग। झारखंड में आदिवासियों ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया. आदिवासियों का कहना है कि सरकार लगातार आदिवासी विरोधी नीतियां और कानून बनाकर आदिवासियों का शोषण कर रही है. रघुवर सरकार के विरोध में आदिवासी समुदाय ने मंगलवार (19 सितंबर) को समाहरणालय के गेट के पास धरना दिया. धरना कार्यक्रम का आयोजन सुशील ओडेया की अध्यक्षता में हुआ. धरना सभा का संचालन पीटर पॉल टोप्पो ने किया.

सुशील ओडया ने कहा कि राज्य की रघुवर सरकार आदिवासियों की दुश्मन है. वह आदिवासियों को झारखंड से उखाड़ फेंकना चाहती है. उसे पूरी तरह से बर्बाद करना चाहती है. सरकार आदिवासियों की जमीनों को अधिग्रहण करने के लिए विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपना रही है. जिनमें लैंड बैंक की स्थापना, गैरमजरुआ जमीन की बंदोबस्ती, झारखंड निजी भूमि सीधी क्रय नीति बनाना, सीएनटी एसपीटी एक्ट में संशोधन प्रस्ताव एवं धर्मांतरण निषेध विधेयक आदि इसके प्रमाण हैं.

वहीं अन्य वक्ताओं ने भी आदिवासियों की समस्याओं पर अपने विचार रखते हुए रघुवर सरकार को घेरा. आदिवासियों की अन्य मांगों में सरना कोड को यथाशीघ्र बहाल करना, पी पेसा कानून लागू करना, विनोबा भावे विश्वविद्यालय में पीजी विभाग में आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण आदि शामिल है.

कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में आदिवासियों ने भाग लिया. धरने की समाप्ति के बाद उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में आदिवासी समुदाय ने रघुवर सरकार के द्वारा किए जानेवाले कार्यों का विरोध जताया. साथ ही सरकार के द्वारा आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए आजमाए जाने वाले हथकंडों की भी शिकयत की. इसके अलावा अन्य मांगों में शराब विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, सरकारी नौकरियों के लिए ली जानेवाली परीक्षाओं में जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा को शामिल करना, सभी स्कूल कॉलेजों में जनजातीय भाषा की पढ़ाई आरंभ करने, लैंड रेवेन्यू एक्ट 1921 को अविलंब लागू करना शामिल है.

केरल परीक्षा भवन ने जारी किया KTET 2017 के रिजल्ट

केरल परीक्षा भवन ने केरल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (KTET) 2017 का रिजल्ट जारी कर दिया है. जिन उम्मीदवारों ने अगस्त 2017 में आयोजित परीक्षा में भाग लिया था, वे सभी अब आधिकारिक वेबसाइट bpekerala.in पर जाकर अपने परिणाम देख सकते हैं. इसके अलावा अभ्यर्थी परिणाम संबंधित अपडेट keralapareekshabhavan.in इस लिंक पर जाकर भी देख सकते हैं. अगर वेबसाइट थोड़ा स्लो चल रही हो तो किसी भी तरह से परेशान होने की जरूरत नहीं है. इसके लिए बस थोड़ा इंतजार करें.

KTET के लिए आधिकारिक सूचना जुलाई में जारी की गई थी और परीक्षा 12 अगस्त और 19 अगस्त को हुई थी. इसके लिए एडमिट कार्ड 1 अगस्त को जारी किए गए थे. बता दें कि KTET परीक्षा में 60 प्रतिशत या उससे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को KTET के लिए योग्य माना जाएगा. सभी कैटगरी के लिए यही पासिंग मार्क्स हैं. इस टेस्ट में किसी भी तरह की नेगेटिव मार्किंग के लिए नंबर नहीं काटे गए हैं. इसके अलावा K-TET परीक्षा में हिस्सा लेने वालों के लिए कोई भी आयु सीमा तय नहीं है.

सबसे पहले आपको केरल परीक्षा भवन की आधिकारिक वेबसाइट keralapareekshabhavan.in पर जाना होगा. इसके बाद वहां पर लिखे KTET 2017 रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें. कंप्यूटर स्क्रीन पर कैटगरी, रोल नंबर और जन्म तिथि का विकल्प आएगा. इन तीनों को भरकर सबमिट के बटन पर क्लिक करें. इस स्टेप को फॉलो करने के बाद आपके सामने आपका रिजल्ट होगा.

राम रहीम के डेरे में दबे हैं 600 नरकंकाल

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सिरसा। बलात्कारी बाबा राम रहीम के बारे में एक और बड़ा खुलासा हुआ है. खुलासे में पता चला है कि सिरसा स्थित डेरे में 600 से ज्यादा लोगों को दफनाया गया है और खुदाई में इनके कंकाल मिल सकते हैं.

ये खुलासा डेरा प्रबंधन कमिटी के डा. पीआर नैन ने किया. मामले की जांच कर रही एसआईटी ने लगातार डेरे और राम रहीम से संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है. इस प्रकिया के तहत एसआईटी ने पीआर नैन से भी पूछताछ की.

नैन ने एसआईटी को बताया कि डेरे में मोक्ष के लिए भी शव दफनाए जाते थे. दरअसल, अनुयायियों का मानना था कि मौत के बाद उनका शव डेरे में दफनाया जाएगा तो उन्हें मोक्ष मिलेगा. उसने यह भी कहा कि एक वैज्ञानिक ने सलाह दी थी कि अस्थियों से जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी.

हालांकि एसआईटी इसकी जांच कर रही है. बता दें कि डेरा प्रमुख के जेल जाने के बाद एसआईटी ने डेरे की तलाशी ली थी और वहां से कई चीजें जब्त हुई थी. यह भी दावा किया जा रहा था कि डेरे की खुदाई में नरकंकाल मिल सकते हैं.

पूछताछ में नैन ने हनीप्रीत को लेकर भी खुलासा किया और कहा कि वो 25 अगस्त को डेरे में आई थी. नैन ने कहा कि 25 अगस्त की रात विपासना ने हनीप्रीत को डेरे में बुलाया. मुझे पता है कि हनीप्रीत आई थी, लेकिन मेरी उसकी बात नहीं हो पाई.

जन्मदिन स्पेशल, 69 साल के हुए महेश भट्ट

दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट बुधवार को 69 साल के हो गए. महेश भट्ट का जन्म 20 सितंबर 1948 में हुआ था. इन्होंने 1974 में ‘मंजिलें और भी हैं’ से अपने निर्देशन कार्य की शुरुआत की थी. इनके द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सारांश’ (1984) मॉस्को अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सव में दिखाया गया था और साथ ही इसके कहानी लिखने के कारण इन्हें सर्वश्रेष्ठ कहानी का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला. यह अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ ‘कब्जा’ (1988) नामक फिल्म के निर्माण के साथ ही निर्माता भी बन गए.

चार दशक के करियर में महेश ने खुद को एक बड़े मुकाम तक पहुंचाया है. ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘डैडी’, ‘आवारगी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करके महेश ने अपने असाधारण निर्देशक होने का रिकॉर्ड साबित कर दिया था। महेश भट्ट के जन्मदिन पर उनकी बेटियों- फिल्मकार पूजा और अभिनेत्री आलिया ने ट्विटर पर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है.

महेश भट्ट ने ‘जख्म’ और ‘अर्थ’ जैसी लीक से हटकर फिल्में बनाई है. महेश भट्ट की कुछ प्रशंसनीय फिल्मों में ‘सारांश’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘सड़क’, ‘आशिकी’ और ‘जख्म’ शामिल हैं. इसके अलावा उन्हें बॉलीवुड में कई प्रतिभाशाली कलाकारों और गायकों के करियर की शुरुआत का श्रेय जाता है. कंगना रनौत, इमरान हाशमी, आशुतोष राणा महेश भट्ट की ही खोज हैं.

सुनील ग्रोवर के शो का हिस्सा नहीं बनेंगे कीकू शारदा

मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा इन दिनों अपनी खराब हेल्थ और शो के ऑफएयर होने की वजह से चर्चा में बने हुए हैं. कपिल शर्मा से विवाद के बाद सुनील ग्रोवर एक बार फिर छोटे पर्दे पर वापसी करने के लिये तैयार हैं. साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अली असगर और सुंगधा मिश्रा के साथ कॉमेडियन कीकू शारदा भी सुनील ग्रोवर के नये शो का हिस्सा बनने जा रहे हैं. इन खबरों पर कीकू शारदा ने चुप्पी तोड़ते हुए कपिल शर्मा के शो का हिस्सा बने रहने की बात कही है.

बता दें कि कीकू शारदा ने कपिल शर्मा के सबसे मुश्किल वक्त में भी उनका साथ दिया है और वह ‘द कपिल शर्मा शो’ के ऑफएयर होने तक इसका हिस्सा बने रहे. कीकू शारदा ने सुनील ग्रोवर के नये शो का हिस्सा बनने की बातों को अफवाह बताया है. कीकू ने ट्वीट करते हुए लिखा है, ”मैं सब टीवी के नये शो का हिस्सा बन रहा हूं पर मैं पहले की तरह ‘द कपिल शर्मा शो’ का हिस्सा भी बना रहूंगा.”

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि सुनील ग्रोवर एक बार फिर सोनी टीवी पर नये शो के साथ वापस आने के लिये तैयार हैं. बताया जा रहा है कि उनका नया शो ‘ड्रामा कंपनी’ को रिप्लेस करेगा. वैसे कपिल शर्मा भी यह साफ कर चुके हैं कि वह अपनी तबीयत ठीक होते ही शो को वापस ला रहे हैं.

नरायणा गुरू परिनिर्वाण दिवसः दक्षिण में ब्राह्मणवाद पर करारा प्रहार किया

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लगभग सौ वर्ष पहले ट्रावनकोर और कोचीन (वर्तमान केरल राज्य) ऐसा क्षेत्र था जहां निम्न जाति वालों के लिये मंदिर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश वर्जित था. कुंओं का इस्तेमाल वे कर नहीं सकते थे. इस जाति के मर्द और औरतों के लिये कमर से ऊपर कपड़े पहनना तक बड़ा गुनाह था. गहने पहनने का तो सवाल ही नहीं था. इन्हें अछूत तो समझा जाता ही था, उनकी परछाइयों से भी लोग दूर रहते थे. तथाकथित बड़े लोगों से कितनी दूर खड़े होना है वह दूरी भी जातियों के आधार पर निर्धारित थी. यह 5 फुट से 30 फुट तक था. कुछ जातियों के लोगों को तो देख भर लेने से छूत लग जाती थी. उन्हें चलते समय दूर से ही अपने आने की सूचना देनी पड़ती थी, वे लोग जोर – जोर से चिल्लाते जाते थे –“ मेरे मालिकों, मै इधर ही आ रहा हूं, कृपया अपनी नजरें घुमा लें.” ये लोग अपने बच्चों के सुन्दर और सार्थक नाम भी नहीं रख सकते थे. नाम ऐसे होते थे जिनसे दासता और हीनता का बोध हो. ऐसे किसी भी सामाजिक नियम का उल्लंघन करने पर मौत की सजा निर्धारित थी. भले ही उल्लंघन गलती से हो गया हो. इन सारे अत्याचारों के बीच एक शख्स ने ऐसा चमत्कार कर दिखाया था, जिसने पूरे समाज को ही बदल दिया. इस स्थिति के खिलाफ संघर्ष करने वाले और दलितों को इस गुलामी से बाहर निकालने वाले महापुरुष का नाम था नरायणा गुरू. उनका जन्म इसी केरल में 26 अगस्त 1854 को हुआ, जिन्होंने अपने अटल निश्चय से समाज की सूरत बदल दी और मनुवादी व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी.

नरायणा गुरु जैसे महान युगपुरुष को देश के कई हिस्सों के लोगों द्वारा ज्यादा नहीं जानना दुर्भाग्यपूर्ण है. नरायणा गुरु का जन्म दक्षिण (केरल) के एक साधारण परिवार में हुआ था. समाज की दशा को देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ. केरल में नैयर नदीं के किनारे एक जगह है अरुविप्पुरम. तब यहां घना जंगल था. नरायणा गुरु यहीं एकांतवास में आकर रहने लगे. उसी दौरान गुरुजी को एक मंदिर बनाने का विचार आया. नारायण गुरु एक ऐसा मंदिर बनाना चाहते थे जिसमें किसी किस्म का कोई भेदभाव न हो. जाति, धर्म, मर्द और औरत का कोई बंधन न हो. अरुविप्पुरम में उन्होंने एक मंदिर बनाकर एक इतिहास रचा. अरुविप्पुरम का मंदिर इस देश का शायद पहला मंदिर है, जहां बिना किसी जातिभेद के कोई भी पूजा कर सकता था. नरायणा गुरु के इस क्रांतिकारी कदम से उस समय जाति के बंधनों में जकड़े समाज में हंगामा खड़ा हो गया था. वहां के ब्राह्माणों ने इसे महापाप करार दिया था. दरअसल वह एक ऐसे धर्म की खोज में थे जहां समाज का हर आदमी एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस कर सके. वह एक ऐसे ‘बुद्ध’ की खोज में थे जो सभी मनुष्यों को समान दृष्टि से देखे. वह ढ़ोगी समाज द्वारा निम्न ठहरा दी गई जातियों के लोगों को स्वाभिमान से जीते देखना चाहते थे.

लोगों ने शिकायत की कि उनके बच्चों को स्कूलों में नहीं जाने दिया जाता, उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के लिये स्कूल स्वयं बना लो और इतनी अच्छी तरह चलाओ कि वे भी तुम्हारे स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने को इच्छुक हो जाएं. लोगों ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता, उन्होंने कहा कि न तो जबरदस्ती प्रवेश करने की जरूरत है और न प्रवेश की अनुमति के लिये गिड़गिड़ाने की आवश्यकता है.

गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उनसे मिलने के बाद कहा था- ‘मैंने लगभग पूरी दुनिया का भ्रमण किया है और मुझे अनेक संतों और महर्षियों से मिलने का सौभाग्य मिला है. लेकिन मैं खुलकर स्वीकार करता हूं कि मुझे आजतक ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं मिला जिसकी आध्यात्मिक उपलब्धियां स्वामी श्री नरायणा गुरु से अधिक हों, बल्कि बराबर भी हो.’ नरायणा गुरु अपने धुन के पक्के थे. नारायण गुरु के कार्यों की सफलता से प्रभावित महात्मा गांधी उनसे मिलकर बातचीत करने को बहुत इच्छुक हुए और उन्होंने पूछा कि क्या गुरुजी अंग्रेजी जानते हैं, गुरुजी ने पलटकर पूछा कि क्या गांधीजी संस्कृत में बातचीत करेंगे? नरायणा गुरु ने हमेशा अपने अनुयायियों को शिक्षा के माध्यम से जानकार और जागरूक बनने, संगठित होकर मजबूत बनने और कठिन परिश्रम से समृद्धि प्राप्त करने की शिक्षा दी.

प्रो कबड्डी लीग: पटना ने बेंगलुरू को दी 36-32 से शिकस्त

रांची। आखिरी पलों में कप्तान रोहित कुमार का जुझारू प्रदर्शन भी बेंगलुरू बुल्स को जीत नहीं दिला सका. उसे मंगलवार को प्रो कबड्डी लीग के सीजन-5 में मेजबान टीम पटना पाइरेट्स ने चार अंकों के अंतर हरा दिया. हरिवंश ताना भगत इंडोर स्टेडियम में पटना ने बेंगलुरू को 36-32 से मात दी. पूरे मैच में पिछड़ती दिखी मेहमान टीम को कप्तान ने किनारे लगाने की कोशिश की लेकिन असफल रहे.

रोहित ने 14 रेड अंक लिए. पटना के कप्तान प्रदीप नरवाल ने 11 अंक लिए, मोनू ने 12 अंक अपने खाते में डाले. पहले हाफ से ही बेंगलुरू प्रदीप और मोनू के दबाव में दिख रही थी. पाचवें मिनट तक आते-आते उसने 5-2 की बढ़त ले ली थी. खेल जैसे आगे बढ़ता गया बेंगलुरू पिछड़ती चली गई. प्रदीप और मोनू ने उसे बैकफुट पर ढकले दिया. इन दोनों को पकड़ने के प्रयास में बेंगलुरू ने हड़बड़ी की और अंक लुटाए.

दूसरे हाफ में पटना ने 25-13 की बढ़त ले ली थी. पटना ने यहां से अपने स्कोरबोर्ड को लगातार चालू रखा और 34-17 की बढ़त ले ली. अंतिम बचे तीन मिनट में बेंगलुरू ने पटना को ऑल आउट कर स्कोर 28-36 कर वापसी की उम्मीद जगाई. रोहित ने यहां सफलता हासिल करते हुए अंक लिए लेकिन बेंगलुरू अंत में चार अंकों के अंतर से हार गई.

सरकार ने नहीं मानी मांगे तो आदिवासी करेंगे अलग राज्य की मांग

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सर्व आदिवासी समाज

बस्तर। बस्तर के आदिवासी केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर सकते हैं. आदिवासियों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार आदिवासियों से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लागू करने में असफल साबित हुई है. ‘सर्व आदिवासी समाज’ ने राज्य और केंद्र सरकार को अगले छह महीने में आदिवासियों से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लागू करने की समयसीमा दी है. आदिवासियों का कहना है कि अगर सरकारें इस निश्चित समय में आदिवासियों की मांगें नहीं मानती है तो अलग बस्तर राज्य के लिए आंदोलन शुरू होगा.

दरअसल, आदिवासियों पर सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा हो रहे है अत्याचार और शोषण के खिलाफ ‘सर्व आदिवासी समाज’ के सदस्यों ने कमिश्नर दिलीप वासनीकर और आईजी विवेकानंद के साथ बैठक की. आदिवासी समाज ने सरकार और सुरक्षा बलों द्वारा हो रहे अत्याचारों की शिकायत की. कई घटनाओं को भी बताया.
  • पालनार घटनाः 31 जुलाई 2017 को दंतेवाड़ा जिला के पालनार कन्या आश्रम में रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में कुछ आदिवासी छात्राओं के साथ सुरक्षा बल के कुछ जवानों पर छेड़छाड़ करने का आरोप है. मामले में दो आरोपी जेल में हैं. इस घटना को लेकर आदिवासियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
  • परलकोट घटनाः 9 अगस्त 2017 को विश्व आदिवासी दिवस के दिन आदिवासी समाज की रैली और सभा में एक समुदाय विशेष के लोगों ने खलल डाला था. जिसे लेकर आदिवासी समाज ने आज भी काफी आक्रोशित है.
  • विनिवेशः नगरनार में निर्माणाधीन स्टील प्लांट के विनिवेश के केन्द्र सरकार के फैसले का आदिवासियों ने विरोध किया है. आदिवासियों का कहना है कि विनिवेश का फैसला बस्तर और यहां के आदिवासियों के साथ धोखा है.
  • कानून लागू करनाः पांचवी अनुसूची और पेशा कानून का कड़ाई से पालन नहीं करने का अरोप भी आदिवासी समाज का मुख्य मुद्दा है. इसके अलावा कई और छोटी-बड़ी मांगे समाज ने शासन-प्रशासन के समक्ष रखी है.

कमिश्नर कार्यालय सभागार में प्रशासन और आदिवासी समाज के पदाधिकारियों के बीच चली बैठक के बाहर निकलकर मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम और पूर्व सांसद सोहन पोटाई ने आदिवासियों की बातों को रखा. अरविंद नेताम ने कहा कि पहली बार प्रशासन ने आदिवासी समाज के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास किया है जिसका वे लोग स्वागत करते हैं. अब बारी समाज के द्वारा सामने लाए गए विषयों पर कार्रवाई करने की है.

सोहन पोटाई ने कहा कि कांकेर जिले के परलकोट क्षेत्र बंगीय समुदाय के ऐसे लोग जिन्हें शरणार्थी के रूप में सरकार ने बसाया है उनसे उन लोगों को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन बीते तीन-चार दशक में काफी संख्या में अवैध रूप से भी इस समुदाय के लोग घुसपैठ कर स्थापित हो चुके हैं. ऐसे सभी लोगों को चिन्हित कर परलकोट क्षेत्र से बाहर निकाला जाए.

पोटाई ने कहा कि पालनार, परलकोट जैसी घटनाओं ने समाज को आहत किया है. नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेशीकरण का फैसला बस्तर के साथ धोखा है. उन्होंने कहा कि छह माह के भीतर समाज के द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर अलग बस्तर राज्य की मांग ही ‘सर्व आदिवासी समाज’ के लिए अंतिम विकल्प होगा.

युवराज सिंह की माँ ने टीम में शामिल न करने पर जताई निराशा

युवराज सिंह को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय टीम में न शामिल किए जाने को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच उनकी माँ ने कप्तान विराट कोहली का बचाव किया है. युवराज सिंह की माँ शबनम सिंह ने कहा कि भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने हमेशा ही उनके बेटे युवराज सिंह की मदद की है और अगर फिटनेस को लेकर उनकी जागरूकता सराहनीय है. हालांकि शबनम सिंह ने अपने बेटे को टीम में नहीं लिये जाने से हुई निराशा भी जाहिर की. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि युवराज सिंह को फिटनेस टेस्ट में खरे न उतरने की वजह से ही टीम में नहीं लिया गया.

टीवी चैनल आज तक को दिए इंटरव्यू में शबनम सिंह ने कहा, “विराट ने युवराज की हमेशा मदद की है. और जब उनकी तरह फिट आदमी नेतृत्व कर रहा हो तो जाहिर है कि वो चाहेगा कि उसके आसपास भी वैसा ही माहौल हो और ये अच्छी बात है. उम्र युवी के आड़े आ रही है लेकिन मुझे भरोसा है कि वो अपनी मेहनत से इसे हासिल कर लेगा.” शबनम सिंह ने कहा कि युवराज सिंह की फिटनेस पहले से बेहतर हुई है और टीम के मौजूदा फिटनेस स्तर को जल्द हासिल कर लेंगे. शबनम सिंह ने कहा की जाहिर है कि युवी टीम में न लिए जाने से निराश हैं, लेकिन फिटनेस के नियम सबके लिए एक जैसे हैं. शबनम सिंह ने कहा, “वो आसानी से हार नहीं मानता और मुझे उम्मीद है कि वो इसे चुनौती की तरह लेगा. आपने पिछले कुछ सालों में इस पर गौर किया होगा.”

ई-कॉमर्स कंपनियों की फेस्टिव सेल में कंज्यूमर्स को होगा फायदा

ई-कॉमर्स कंपनियों की सालाना फेस्टिव सेल लग रही है, जिसमें सबसे अधिक प्रॉडक्ट्स और मोस्ट एक्सक्लूसिव ऑफर्स के दावों के साथ भारी डिस्काउंट और कैशबैक दिए जा रहे हैं. बुधवार से शुरू होने वाली सेल में ग्राहकों को कम दाम में सामान खरीदने का मौका मिलेगा.

वहीं इंडस्ट्री ऐनालिस्टों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में ऑनलाइन रीटेल कंपनियां 15,000 करोड़ रुपये के सामान बेच सकती हैं.

इस सेगमेंट में सबसे बड़ी कंपनी फ्लिपकार्ट है. उसने अपने अधिकारियों को प्रतिद्वंद्वी ऐमजॉन इंडिया के मुकाबले में 70-30 की बढ़त बनाने का लक्ष्य दिया है तो अमेरिकी कंपनी ने कहा है कि फ्लिपकार्ट को इस साल ‘दो ऐमजॉन’ से मुकाबला करना पड़ेगा. फेस्टिव सेल के इस महा-मुकाबले में अलीबाबा का पेटीएम मॉल, शॉपक्लूज और स्नैपडील जैसी कंपनियां भी शामिल होंगी.

20 से 24 सितंबर तक चलने वाली फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन सेल में मोबाइल की भी सेल रखी गई है. हालांकि, कंपनी इसे कल यानि 21 सितंबर से डिस्काउंट के साथ बेचेगी. इस सेल में सैमसंग गैलेक्सी एस 7 की कीमत 29,900, 32 जीबी इंटरनल मेमोरी और 3 जीबी रैम के साथ आने वाले रेडमी 4 ए को 6,999 रुपये में बेचा जाएगा.

1 अक्टूबर से सस्ती हो सकती हैं कॉल दरें

► जियो को फायदा, बाकी ऑपरेटरों को झटका, ग्राहकों को मिल सकती हैं सस्ती कॉल ► आईयूसी को 14 पैसे से घटाकर 6 पैसे प्रति मिनट किया ► नई दर 1 अक्टूबर से लागू होगी ► 1 जनवरी, 2020 से नहीं लगेगा कॉल टर्मिनेशन शुल्क ► जियो को होगा फायदा, पुरानी दूरसंचार कंपनियों की आय पर चोट

दूरसंचार नियामक ट्राई ने इंटर कनेक्शन उपयोग शुल्क (आई.यू.सी.) को 14 पैसे से घटाकर 6 पैसे प्रति मिनट कर दिया. नियामक के इस कदम से काल दरें घटने की राह खुल सकती है. आई.यू.सी. वह शुल्क होता है जो कोई दूरसंचार कम्पनी अपने नेटवर्क से दूसरी कम्पनी के नेटवर्क पर कॉल के लिए दूसरी कम्पनी को देती है.

ट्राई ने कहा कि 6 पैसे प्रति मिनट का नया कॉल टर्मिनेशन शुल्क 1 अक्तूबर, 2017 से प्रभावी होगा और 1 जनवरी, 2020 से इसे पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि आई.यू.सी. को लेकर हाल ही में खासा विवाद रहा है और इसमें कटौती का ट्राई का आज का फैसला भारती एयरटैल जैसी प्रमुख दूरसंचार कम्पनियों के रुख के विपरीत है जोकि इसमें बढ़ौतरी की मांग कर रही थीं. एक अन्य कदम में नियामक ने दूरसंचार क्षेत्र में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए एक परामर्श पत्र आज जारी किया है. इस परिपत्र में समयबद्ध मंजूरियों, शुल्कों को युक्ति संगत बनाए जाने व श्रेणीबद्ध जुर्माने का प्रस्ताव है.

मैक्सिको में 7.1 तीव्रता का भूकंप, 250 की मौत

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  Mexico Earthquake

मैक्सिको। मेक्सिको में बुधवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप से लगभग 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. मरने वालों की संख्‍या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. भूकंप का झटका इतना तेज था कि दर्जनों इमारतें जमींदोज हो गयी. राहतकर्मी मलबों में जीवित बचे लोगों को तलाशने का काम कर रहे हैं. भूकंप के बाद मेक्सिको सिटी एयरपोर्ट की सभी उड़ानें फिलहाल रोक दी गयी हैं.

मेक्सिको के राष्ट्रपति ने टीवी पर दिए एक संदेश में कहा कि सेना बुलाई गई है और बचाव और राहत कार्य रात में भी जारी रखा जाएगा. भूकंप के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुख जताते हुए अपने ट्विटर वॉल कर लिखा है कि हम आपके साथ हैं और हमेशा आपके साथ रहेंगे.

भूकंप की वजह से दहशत में आये लोग सड़कों पर निकल आये. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. घनी आबादी वाली मैक्सिको सिटी और आसपास के राज्यों में भूकंप की वजह से देखते ही देखते कई इमारतें ध्वस्त हो गयी और हर ओर मलबा नजर आने लगा.

यह भूकंप 1985 के विनाशकारी भूकंप की 32वीं बरसी पर आया है. 1985 में मेक्सिको में इसी दिन एक भीषण भूकंप आया था, जिसमें 10,000 लोगों की मौत हो गई थी. आइए दुनिया के उन 10 बड़े भूकंप को एक नजर में जानें, जब भारी जान-माल का नुकसान हुआ था.

अपनी अलग पार्टी बनाएंगे मुलायम सिंह यादव?

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के पूर्व मुखिया मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव जल्द ही नई पार्टी बनाने की योजना बना रहे हैं. उनके इस कदम का सीधा असर अखिलेश यादव पर होगा. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को ये खबर परेशान कर सकती है.

यूपी चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी में हुई फूट को दूर करने वाले अखिलेश यादव के लिए एक बार फिर से बड़ी मुसीबत आने वाली है. उनकी मुश्किलें बढ़ाने की योजना कोई और नहीं बना रहा बल्कि उनके अपने पिता और चाचा ही हैं. न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर के आखिर में सपा के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनके भाई शिवपाल यादव नई पार्टी बनाने का ऐलान कर सकते हैं.

अखिलेश यादव के चाचा और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने मई में ऐलान किया था कि वो नई पार्टी बनाएंगे. उन्होंने नई पार्टी का नाम ‘समाजवादी सेक्युलर मोर्चा’ दिया था. उस समय उन्होंने ये भी कहा था कि समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव इस पार्टी के अध्यक्ष हो सकते हैं. उस समय शिवपाल यादव ने दावा किया था कि उनके नेतृत्व वाली नई पार्टी असली समाजवादी पार्टी है.

‘जन विकल्प’ पार्टी में शामिल हुए शंकर सिंह वघेला

अहमदाबाद। पूर्व कांग्रेस नेता शंकर सिंह वाघेला ने मंगलवार को गुजरात में एक तीसरे मोर्चे के गठन की घोषणा की. वाघेला ‘जन विकल्प’ के सदस्य बने हैं. यह पार्टी उनके समर्थकों ने बनाई है. वाघेला ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोग भाजपा और कांग्रेस से ऊब गए हैं और एक विकल्प के लिए बेताब हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वाघेला ने कहा कि यह कहना मिथक है कि गुजरात में कोई वैकल्पिक राजनीतिक बल काम नहीं कर सकता. हालांकि उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह स्वयं चुनाव नहीं लड़ेंगे.

जनता की समस्याओं को लेकर वाघेला लगातार भाजपा व कांग्रेस को निशाने पर लेते रहे हैं. राजनीति के जानकार बताते हैं कि राज्य में भाजपा से नाराज वोट कांग्रेस के पाले में जाने से रोकने के लिए वाघेला यह सब कर रहे हैं.

गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व नेता शंकरसिंह वाघेला ने गुजरात विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इस दौरान उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे. वाघेला के इस्तीफा देने के समय भाजपा के बड़े नेताओं की मौजूदगी से उनके इस साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में वापसी के बारे में अटकलें शुरू हो गई थीं, जिस पर शंकर सिंह वाघेला ने आज तीसरे मोर्चे के गठन की बात कर विराम लगा दिया है.

गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान भी शंकर सिंह वाघेला ने सबको यह कहकर चौंका दिया था कि उन्होंने अहमद पटेल को वोट नहीं दिया. शंकर सिंह वाघेला ने कहा था कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब ही नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुझे अहमद पटेल को वोट न देने का अफसोस है.

MP सरकार ने डा. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाया

Dr. RS kureel

भोपाल। राजनीति और नेताओं का हस्तक्षेप शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों में बढ़ता ही जा रहा है. केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार, अपने अधीन आने वाले विश्वविद्यालयों पर बराबर नजरें गढ़ाई बैठी है. विश्वविद्यालयों में होने वाले कार्यक्रमों को भी एक खास विचारों से देखा जा रहा है.

विश्वविद्यालयों में एक खास विचारधारा के लोगों को घुसाया जा रहा है. जिससे की केंद्र और राज्य सरकार मनमाने तरीके से काम कर सके. कोई सरकारी नीतियों और कानूनों का विरोध न कर सके. ऐसी ही एक खास विचारधारा को स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक विश्वविद्यालय के कुलपति को हटा दिया है.

मध्यप्रदेश के महू में स्थित डा. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरएस कुरील को राज्य प्रशासन ने हटा दिया है. सोमवार को उच्च शिक्षा विभाग ने धारा 44 लगाकर उन्हें हटाने के आदेश जारी कर दिए.

जानकारी के मुताबिक डा. कुरील पर नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप लगे थे. यह भी बताया जाता है कि प्रदेश में हुए किसान आंदोलन के दौरान डा. कुरील ने कांग्रेस के कुछ नेताओं को विश्वविद्यालय में बुलाकर कार्यक्रम का आयोजन किया था. इस वजह से भी वे चर्चा में रहे थे.

हालांकि विभाग ने जारी आदेश में उल्लेख किया है कि विश्वविद्यालय के हित में ऐसा किया गया है. उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बीआर नायडू ने आदेश जारी किया है.

विश्वविद्यालय का नया कुलपति कौन होगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है. एक-दो दिन में इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएंगे. गौरतलब है कि विवि यहां हुई नियुक्तियों को लेकर भी विवादों में रहा था.