साथ आने को तैयार है अखिलेश और मुलायम

akhilesh yadav

लखनऊ। आपसी खिंचतान के बाद एक दूसरे के धुर विरोधी हो गए बेटे अखिलेश यादव और पिता मुलायम सिंह यादव फिर से साथ आने लगे हैं. यूपी की सत्ता गंवाने के बाद जहां अखिलेश यादव के तेवर भी ढीले हुए हैं तो वहीं अब मुलायम सिंह यादव को भी लगने लगा है कि इस उम्र में बेटे से मतभेद ठीक नहीं है. ऐसे में मुलायम और अखिलेश के रिश्ते सुधरने लगे हैं और अब मुलायम धीरे-धीरे खुलकर अखिलेश के साथ आने लगे हैं.

पिता औऱ बेटे के बीच कल यानि 28 सितंबर को मुलाकात होने के बाद मुलायम सिंह बेटे अखिलेश के पक्ष में बात करते दिखे. तो वहीं अपने भाई शिवपाल यादव को भी अखिलेश यादव के साथ रिश्ते सुधारने की नसीहत दे डाली. मुलायम और अखिलेश यादव के साथ आने से शिवपाल यादव की अलग पार्टी बनाने की योजना को झटका लगा है.

अगर सब कुछ ठीक रहा और शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच का झगड़ा सुलझ गया तो अखिलेश के अलावा मुलायम और शिवपाल भी सपा के राष्ट्रीय सम्मेलन में दिख सकते हैं. पिता और बेटे के बीच हुई इस मुलाकात में अखिलेश यादव अपने पिता और पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव को आगामी पांच अक्तूबर को आगरा में होने वाले सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन का न्यौता देने पहुंचे थे. इस सम्मेलन में पार्टी का नया अध्यक्ष चुना जाना है. इस पर सबकी नजर रहेगी कि 5 अक्टूबर को पिता मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद बेटे अखिलेश यादव को मिल पाता है या नहीं.

यूपी के मंत्री बोले- 2019 से पहले अयोध्या में बनेगा राममंदिर

siddarthanth singh

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जबसे भाजपा की सरकार बनी है तबसे राममंदिर को लेकर यूपी के मंत्री आए दिन बयानवाजी करते आ रहे हैं. इसी कड़ी में यूपी के स्वास्थय मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अयोध्या में 2019 से पहले राम मंदिर बन जाएगा. और कोर्ट का फैसला भी राममंदिर बनने के पक्ष में होगा.

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि स्वामी ब्रह्मयोगानंद ने पहले भविष्यवाणी की थी कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे. उनकी ये भविष्यवाणी सही सबित हुई थी. अब स्वामी ब्रह्मयोगानंद ने भविष्यवाणी की है कि 2019 से पहले राम मंदिर बनेगा. इतना ही नहीं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि अब हमारे देश में परिस्थितियां बदल रही हैं. पहले लोग राम मंदिर का विरोध करते थे लेकिन अब लोग राम मंदिर चाहते हैं.

सिद्धार्थनाथ सिंह ने दावा किया है कि 2019 में इलाहाबाद के अर्द्धकुंभ मेले से पहले अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा. सिंह ने कहा कि 2019 अर्द्धकुंभ से पहले अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य शुरू होगा, क्योंकि इसके पक्ष में देश के करीब 90 प्रतिशत मुस्लिम भी तैयार हो गए हैं. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धर्मनिरपेक्षता को बदल दिया है. उन्होंने हर वर्ग को राष्ट्रहित से जोडा है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश अखंड भारत की ओर अग्रसर है.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वामी योगानंद के ‘सम्पूर्ण भारत-परम वैभव भारत’ पुस्तक विमोचन समारोह में गुरूवार रात को कहा कि उन्होंने गुरुकुल में ए फार एप्पल और बी फार बाल की जगह ‘ए फार अखंड और बी फार भारत’ की तरफ अग्रसर होना शुरू कर दिया है.

सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि सरकार हर व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है. चिकित्सकों की कमी को दूर करके सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों के लिए बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि समाज के गरीब तबकों को भी बेहतर उपचार की सुविधा मिले, सरकार इसके लिए सतत प्रयत्नशील है.

‘पुलिस सुधार पैकेज’ से क्या लाभ, जब सरकार ही पुलिस का दुर्पयोग कर रही हैः मायावती

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नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि देशभर में पुलिस का मनोबल बढ़ाकर ऊंचा रखने के लिए जरूरी है कि देश में कानून का राज हो. कानून को अपने हाथ में लेने और कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी प्रकार का शह व संरक्षण देने के बजाय उन्हें कानूनी तौर पर दण्डित किया जाये. मायावती ने आशंका जताते हुए कहा कि इस मामले में केन्द्र सहित भाजपा की राज्य सरकारें भी नाकाम साबित होकर अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी से विमुक्त नजर आ रही है. ऐसे में 25 हजार करोड़ रूपये के कथित ’’पुलिस सुधार पैकेज’’ की घोषणा शायद ही जनोपयोगी साबित हो.

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में भी ख़ासकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखण्ड और मध्यप्रदेश में पुलिस का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भाजपा के हिंसक कट्टरवादी और आपराधिक तत्वों को खुलेआम गुण्डागर्दी करने और क़ानून के साथ खिलवाड़ करते है. इसके साथ-साथ कानून के रखवालों से ही दुर्व्यवहार और मारपीट करके उन्हें अपमानित करने की जो खुलेआम छूट दे दी गयी है उससे पूरे पुलिस प्रशासन में हताशा और निराशा है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी ड्यूटी सही तौर से निभाने में अपने आपको असमर्थ पा रहे हैं.

मायावती ने कहा कि यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है. ऐसे जंगलराज जैसे हालातों में पुलिस की साज-सज्जा व नये आधुनिक हथियार किस काम के हैं? क्या इनका इस्तेमाल अपराधियों के खिलाफ करने के बजाय जनान्दोलन व जनाक्रोश दबाने के लिये किया जायेगा? आज यह सवाल पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले वरिष्ठ लोग उठा रहे हैं जो अत्यन्त ही सार्थक प्रश्न है.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तप प्रदेश पुलिस फोर्स के नये मुखिया की नियुक्ति अथवा वर्तमान पुलिस प्रमुख की ही सेवाकाल में वृद्धि के बारे में आज अन्तिम समय तक कोई फैसला नहीं कर पाने से समस्त पुलिस बल के मनोबल में जो गिरावट आई है उसका सही अन्दाज़ा ना तो राज्य सरकार को है और ना ही केन्द्र सरकार को है. बड़े पर्वों के समय में भी ऐसी हरकतों को घोर लापरवाही नहीं तो और क्या कहा जायेंगा? क्या केन्द्र व प्रदेश भाजपा सरकारों के ऐसा बर्ताव इनकी गै़र-जनहितैषी कार्य प्रणाली को नहीं दर्शाता है?

मायावती ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के प्रति केन्द्र सरकार बार-बार अपनी चिंता जाहिर करती रहती है, लेकिन दिन-प्रतिदिन की आमजन की कानून-व्यवस्था समस्या व अपराध-नियंत्रण के अत्यन्त ही गंभीर मुद्दों में कोई ख़ास दिलचस्पी लेती हुई दिखाई नहीं पड़ती है जबकि आमजनजीवन पर इस बात का व्यापक बुरा प्रभाव पड़ रहा है तथा लोगों का जीना काफी कठिन व असुरक्षित होता जा रहा है.

भगदड़ में मरने वालों पर दुख जताया मायावती ने मुम्बई के एलफिन्स्टन रेलवे स्टेशन के फुट ओवर ब्रिज पर भगदड़ मच जाने से 22 लोगों की मौत होने और 45 लोगों के घायल होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि ख़ासकर त्यौहार के समय में इस प्रकार का हादसा बहुत ही तकलीफ देने वाला है. केन्द्र व राज्य सरकार न केवल मृतक लोगों के परिवारों को समुचित अनुग्रह राशि दे बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम पर भी गंभीर होकर पूरा-पूरा ध्यान दे.

खुला खतः तुम्हारी लड़ाई सिर्फ BHU से नहीं, समाज में फैली पुरूषवादी मानसिकता से भी है

bhu

कौन हैं आप लोग और आंदोलन भी किसके खिलाफ कर रही हो..? मेरी नजर में आप सभी लोग निहायती बेवकूफ हो. आप पुरुषों के खिलाफ आंदोलन कर रही हो. आपको चाहिए भी क्या कि छेड़-छाड़ बन्द हो, यूनिवर्सिटी में हर जगह कैमरे लगे, और लाइट की पर्याप्त व्यवस्था हो ताकि आप सुरक्षित महसूस कर सके, इतनी बड़ी मांगें, आपको शर्म नहीं आ रही ये मांगने में..?

शायद आपको पता नहीं ये सब पाना आपका हक ही नहीं है. क्या आपको नहीं पता की ये तुसली दास जी का देश है, जहां वे कहते है कि ढोर गंवार शुद्र पशु ‘नारी’, सकल ताड़न के अधिकारी.

आपको इतनी सी बात समझ नहीं आती की जो आपके साथ छेड़-छाड़ की घटनाएं हो रही हैं, इसमें कुछ गलत नहीं हैं. इस देश की महान संस्कृति में आप पशु के बराबर हो. और ये क्या कम है कि वो महान पुरुष जो आपके साथ बदसलूकी कर रहे हैं, वे कम से कम आपको इंसान तो समझ रहे हैं. नहीं तो आपको ये महान भारतीय सभ्यता पशुतुल्य या प्रताड़ना के लायक ही समझती है. और यहां मैं मनुस्मृति की तो बात ही नहीं कर रहा अगर उस पर गया तो ये लेख पत्र की जगह एक किताब बन जाएगा.

और आप क्या समझ रही हैं BHU में सुरक्षा प्राप्त करके आप जीत जाओगी. आप बच कर जाओगी कहां… जब आप पैदा होने वाली थी तो आपकी मां को ताने मारे जाते थे की लड़की पैदा नहीं होनी चाहिए, पर आप पैदा हो गई. फिर आपकी मां के साथ दोयम दर्जे के नागरिक सा व्यवहार होने लगा. फिर आपकी एक और बहन हुई होगी तो आपकी मां को प्रताड़ित किया जाने लगा होगा. फिर भी अगर एक और लड़की हो गयी तो हो सकता था आपकी मां को घर से बाहर निकाल दिया गया होता या फिर आपके पिता दूसरी शादी कर लेते. नहीं तो अगर 2 या 3 लड़कियों के बाद एक लड़का हो भी गया होता तो, जीवन भर आपको उससे कम प्यार में निकलना पड़ता.

फिर चलो ये क्या कम है कि आपको उसके बाद स्कूल पढ़ने भेज दिया बरना क्या करोगी आप लोग पढ़ कर. शादी के पहले और शादी कि बाद करना तो आपको घर के काम ही है, चाहें फिर आपके पास डिग्री कोई भी हो. और लो इस पुरुषवादी समाज ने आप पर इतना बड़ा उपकार फिर कर दिया, कि आपको कॉलेज भेज दिया पढ़ने के लिए. पर फिर वही बात… कर लो आप पीएचडी भी. फिर भी आपका काम तो बच्चे पैदा करना ही है. उन्हें संभालना ही है और अपने पति की हवस मिटानी है.

और स्कूल, कॉलेज जाने के बीच आपको घर के बाहर और कभी कभी घर के अंदर बैठे हवसी पुरुषों की हवसभरी निगाह से बचना भी है. वो स्कूल जाते समय आपको छेड़ेंगे, ताने कसेंगे फिर आप कॉलेज जाओगी तो रोड-चौराहे पर बैठे ये पुरुष आपके शरीर की बनावट के हिसाब से आपको देखेंगे.

कॉलेज में हर लड़का आपसे दोस्ती इसलिए नहीं करेगा क्योंकि आप पढ़ने में होशियार हो या कमजोर हो बल्कि इसलिए क्योंकि आप एक लड़की हो और आज दोस्ती होगी तो एक न एक दिन आपको प्यार की झूठी बातों में फंसा कर आपके शरीर से अपनी हवस मिटा सकेगा. और हवस मिटाते है फिर किसी बहाने से रिश्ता तोड़ कर फिर वो पुरुष नए शरीर की तलाश में निकल पड़ेगा.

ऐसा नहीं है कि पुरुष की प्रवृति कोई जानता नहीं, पर उस पुरुष को आज की पीढ़ी में स्टंट माना जायेगा या फिर कूल करके सराहा जायेगा और अगर आप लड़की के बारे में इन्हीं लोगों को पता चलेगा कि आपके बॉय फ्रेंड रहे है तो आपको ये समाज ‘चरित्रहीन’ की उपमा देगा. पर आपको तब भी खुश होना चाहिये क्योंकि कम से कम पुरुष आपको इंसान तो समझ रहा है.

आपका सफर यहीं खत्म नहीं होता इसी दौर में आपको समाज की निगाह से बचना भी है आप कैसे कपड़े पहन रही हैं, आप कहां और किसके साथ जा रही हैं, आप किस तरह बोल रही है, किस तरह उठ रही हैं.

जो समाज के 4 लोग है, ‘4 लोग क्या कहेंगे वाले’ ये अपने बच्चे से ज्यादा आपकी फ़िक्र करेंगे और कहीं किसी लड़के के साथ बाजार में या बाइक पर आपको देख लिया. तो बस समाज में आपका और आपके माता-पिता का जीना मुश्किल हो जायेगा, हर कोई आपके माथे पर चरित्रहीन लिखने के लिए दौड़ेगा.

उसके बाद शुरु होता है असली जीवन, आपके पिता आपकी शादी की चिंता में रात भर खोये रहेंगे, वे खाना नहीं खाएंगे, जवान लड़की की शादी करनी है. पूरा परिवार मिल कर आपको ये एहसास कराएगा की आप बोझ है उन पर. फिर आपके पिता निकलेंगे एक लड़का खरीदने जो अब बाकि जीवन उनका बोझ ढो सके.

फिर एक दिन लड़का आएगा आपको देखने और आपकी सारी डिग्रियां एक तरफ रख कर लड़के की मां आपसे पूंछेगी कि… बेटा खाना बना लेती हो? और ये सवाल काफी होगा आपको ये बताने के लिये की आपका बाकी जीवन कैसा होने वाला है. नहीं तो मान लो लड़के के घर वाले ये दावा करें की वो प्रगतिशील हैं. तब वे कहेंगे देखो बेटे आप को जॉब करनी हो शादी के बाद तो आप कर सकती है. लेकिन साथ में ऑफिस जाने से पहले आपको घर के सारे काम करने पड़ेंगे, फिर ऑफिस से आ कर काम करने पड़ेंगे और रात को सास-ससुर की सेवा के साथ पति के लिए बिस्तर तैयार करना पड़ेगा. इस बीच लड़के और लड़की के माता-पिता दहेज़ की बात करने के लिए आपका मन बहलाने के लिए कहेंगे की बेटा आप लोग अकेले में बात कर लो. और एक पूरी तरह से अंजान लड़के से पांच मिनट बात करके आपको तय करना होगा की अगले 50 साल अपने जीवन के आप इस लड़के के साथ बिताओगे की नहीं? और नब्बे प्रतिशत उम्मीद मानिये की आपके माता-पिता को लड़का पसन्द है तो आपको भी लड़का पसन्द करना ही होगा क्योंकि पैसे की डील तय हो गयी होगी.

और लड़का आपसे केवल 2 सवाल पूछेगा की आपका कोई बॉयफ्रेंड रहा है? और दूसरा अगर लड़का मेट्रो सिटी से है तो पूछेगा की क्या आप वर्जिन हो? और मायने ये बिलकुल नहीं रखता की लड़के का इतिहास कैसा रहा हो बल्कि मायने ये रखता है कि आपका इतिहास कैसा है. और आपको पहले सवाल के जबाब में ‘नहीं’ कहना है और दूसरे सवाल के जबाव में ‘हां’ कहना है और लो शादी तय!

और फिर शादी के बाद दिन भर काम और रात को पति के लिए कपड़े उतार कर जब उसका मन हो तब तैयार रहना है. हो सकता है ये आपके लिए ‘मेरिटल रेप’ हो, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट में भारत सरकार ये कहती है कि हम ‘मेरिटल रेप’ की अवधारणा को नहीं मानेंगे. क्योंकि अगर ऐसा होने लगे तो परिवार नाम की संस्था खत्म होने का डर है. तो इस प्रकार ये महान देश आपको आपके ‘शरीर पर भी हक़ नही देता’ शादी के बाद आपका शरीर आपके पति के लिए खिलौना बन जाता है आप मनो या ना मानो.

असल में हम भारतीय दुनिया के सबसे दोगले प्राणी है जो गाय को अपनी माता मानते है और उसके लिए जान लेने को तैयार बैठे है. हम वर्ष में 18 दिन देवी की पूजा करते है और वो देवी जिसने हमें जन्म दिया है, जो पत्नी या पुत्री के रूप में है, उसे हर रोज किसी ना किसी तरह से प्रताड़ित करते हैं. हम कहते हैं कि हमारी सभ्यता बहुत महान है क्योंकि हमारे देश में कहा जाता है कि.. “यत्र नारी पूज्यंते रमन्ति तत्र देवताः” पर फिर भी दुनिया में सबसे ज्यादा महिलाओं के खिलाफ अपराध हमारे ही देश में होता है, हमारे ही देश में सबसे ज्यादा महिला भ्रूण हत्या होती है, सबसे ज्यादा महिलाओं के साथ बलात्कार होता है.

महिलाओं के साथ अन्याय को तो ये समाज गिनता ही नहीं है. तभी अपनी पत्नी को छोड़ने के बाद श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम बन जाते हैं, सिद्धार्थ गौतम अपनी पत्नी को छोड़ कर महात्मा बुद्ध बन जाते हैं. लोग इन दोनों पुरुषों की महानता का बखान करते नहीं थकते. पर कोई ये नहीं देखता की पत्नी के रूप में सीता ने और यशोधरा ने क्या खोया.

क्या उनकी आकांक्षा कोई मायने नहीं रखती. एक पत्नी और महिला होने के नाते? क्या केवल पुरुष की मर्यादा और उनकी ज्ञान प्राप्ति की ललक ही सब कुछ है? क्यों शादी के बाद महिला को अपना घर छोड़ना पड़ता है? क्यों शादी के बाद महिला को अपना पहनावा बदलना पड़ता है ? क्यों मंगलशूत्र और करवाचौथ केवल महिलाओं के लिए है, पुरुषों के लिए ऐसे विधान क्यों नहीं है? आप इन सवालों के जबाब मांगिए इस समाज से तब आपकी लड़ाई सार्थक होगी. तब वो समस्या के मूल पर प्रहार करेगी.

आप BHU के बाहर धरना दे कर अगर सोच रही हो क़ि आपकी लड़ाई केवल BHU प्रशासन से है तो आप गलती कर रही हो, आपकी लड़ाई इससे कहीं बड़ी है. उस मां और दादी से है जो केवल लड़का चाहती है, आपकी लड़ाई उस पिता से है जो लड़के की पढ़ाई पर पूरा पैसा खर्च करता है पर लड़कियों की नहीं, आपकी लड़ाई उस पिता से भी है जो अपनी लड़की के साथ गलत हुआ किसी ने छेड़ा है या व्यभिविचार किया है पर उस गलत करने वाले के खिलाफ कुछ नहीं बोलता क्योंकि इसे डर इस बात का है कि लोग उसकी लड़की पर ऊंगली उठाएंगे. आपकी लड़ाई उस मां के साथ भी है जो अपनी लड़की पर पहले शक करती है जब उसके साथ छेड़-छाड़ हुई हो. आपकी लड़ाई उस समाज के साथ भी है जो लड़की के कपड़ो से उसका चरित्र तय करता है. आपकी लड़ाई उन पुरुषों से भी है जो महिलाओं को मात्र सम्भोग की वस्तु समझता है. आपकी लड़ाई उस सास से भी है जो अपनी बहू को काम वाली बाई समझती है.

इस लड़ाई को इतनी छोटी मत समझो, आप रामलीला मैदान में इस देश की सभी महिलाओं को बुलाओ और मिल कर आवाज़ उठाओ इस पुरुषों के समाज और देश के खिलाफ. आओ घेर लेते हैं पूरी दिल्ली और फिर आज़ादी के लिये आज के हुक्मरानों को मजबूर कर देते है. आओ क्रांति करे और आज़ाद करे 2000 साल से गुलाम महिला को. आओ दिल्ली…

– सम्राट बौद्ध का खुला पत्र

रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से 22 की मौत, 20 घायल

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Mumbai

मुंबई। मुंबई के एलफिंस्टन रेलवे स्टेशन के फुट ओवर ब्रिज पर भगदड़ मच जाने से 22 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. बताया जा रहा है कि अफवाह के बाद भगदड़ मची थी. ब्रिज पर भारी भीड़ भी थी.

केईएम अस्‍पताल की केजुअल्‍टी से मिले आंकड़ों के अनुसार, अभी तक 22 शव अस्‍पताल में पहुंच चुके हैं और कई लोगों के घायल होने की खबर है जिन्‍हें तुरंत इलाज दिया जा रहा है. यह जानकारी केईएम हॉस्पिटल के सीएमओ प्रवीण बांगर ने दी. हालांकि आधिकारिक तौर पर 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है.

आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती है. बारिश की वजह से लोगों ने रेलवे ब्रिज पर शरण ले रखी थी जिस वक्त यह हादसा हुआ. यह हादसा सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर हुआ. यह वह वक्त होता है जब लोअर परेल और एलफिंस्टन स्टेशनों पर काफी भीड़ होती है.

इस मामले पर पुलिस का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है. उधर, पश्चिम रेलवे ने कहा है कि घटनास्थल पर मेडिकल टीम पहुंच गई है और घायलों को सहायता मुहैया कराई जा रही है. वरिष्ठ अधिकारी स्टेशन पर राहत और बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं. रेलवे के प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया कि रेल मंत्री पीयूष गोयल मुंबई पहुंच रहे हैं.

सेंट्रल लाइन के परेल स्टेशन और वेस्टर्न रेल लाइन के एलफिंस्टन स्टेशन को कनेक्ट करने वाले ब्रिज पर पीक ओवर की भीड़ थी. घटना के समय जब अचानक बारिश आई, तब सभी लोग ब्रिज पर ही रुक गए. ब्रिज पर भीड़ बढ़ने लगी, जबकि कोई उतरने को तैयार नहीं था. ऐसी स्थिति में सेंट्रल लाइन की ट्रेन पकड़ने के लिए धक्का-मुक्की होने लगी और इसी घटना ने भगदड़ का रूप ले लिया.

दलित ने रखी स्टाइलिश मूंछें तो मनुवादियों ने कर दी पिटाई

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गांधीनगर। कई जगह अब तक दलितों को सरकारी नल से पानी पीने से रोका जाता था, घर के सामने से निकलने से रोका था लेकिन अब गुजरात में हैरान करने वाली घटना सामने आई है. जहां कुछ सवर्णों ने एक 24 वर्षीय दलित से मारपीट की. ये मारपीट सिर्फ इसलिए हुई कि दलित युवक ने स्टाइलिश मूंछ रखी थी.

गांधीनगर के कालोल तालुका के लिंबोदरा गांव के रहने वाले 24 वर्षीय पीयूष परमार ने शिकायत की है कि 25 सितंबर को उसके साथ कुछ लोगों ने मूंछ को लेकर मारपीट की. पीयूष के मुताबिक, दरबार समुदाय के तीन लोगों को यह पसंद नहीं आया कि दलित समुदाय का युवक मूंछ बनवाए.

पुलिस ने एक ही गांव के रहने वाले तीनों आरोपी मयूर सिंह वाघेला, राहुल विक्रम सिंह सेराठिया और अजित सिंह वाघेला के खिलाफ 26 सितंबर को शिकायत दर्ज की. केस की जांच डेप्युटी एसपी लेवल का एक अधिकारी कर रहा है.

एफआईआर में उल्लेख किया गया है, ‘मामले में आरोपियों ने शिकायतकर्ता को गालियां दीं, पीटा और कहा कि वह मूंछ कैसे बनवा सकता है.’

एफआईआर के मुताबिक, गांधीनगर की एक निजी कंपनी में काम करने वाला परमार अपने चचेरे भाई दिगांत महेरिया के साथ गरबा देखकर लौट रहा था. रास्ते में कुछ लोगों ने उनको जातिसूचक गालियां दीं.

परमार ने टीओआई को बताया, ‘जब हम जा रहे थे तो गालियों की आवाज आई. अंधेरा होने के कारण हम उनको दूर से देख नहीं पाए थे. जब हम उस स्थान पर गए जहां से आवाज आ रही थी तो दरबार समुदाय के तीन लोग वहां थे. किसी तरह के झगड़े से बचने के लिए हमने उनको नजरअंदाज किया. जैसे ही हम घर पहुंचे, वे लोग हमारे घर पहुंच गए और फिर गालियां देने लगे. उनलोगों ने पहले मेरे चचेरे भाई दिगांत को पीटा और उसके बाद मुझे पीटने लगे. वे लोग बार-बार मुझे कह रहे थे कि निचले संप्रदाय से होने के बावजूद मैं मूंछ कैसे बनवा सकता हूं.’

सेना में होगी 47 लाख नागरिकों की भर्ती

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प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के करीब 4.7 मिलियन लोग उत्तर कोरियाई सेना में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से आगे आए हैं. राज्य मीडिया की तरफ से आई रिपोर्ट से ये खबर सामने आई है, जिसमें कहा गया है सेना में शामिल होने वालों में 1.22 मिलियन महिलाओं सहित छात्र-छात्राएं और श्रमिक शामिल हैं.

बताया जाता है कि उन्हें पिछले छह दिनों से कोरियाई पीपुल्स आर्मी की सेना रैंकों में शामिल होने के लिए कहा जा रहा था. उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने 22 सितंबर को एक बयान जारी कर अमेरिका के उस धमकी की कड़ी निंदा की थी जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तरी कोरिया को पूरी तरह से नष्ट करने की धमकी दी थी.

दैनिक जागरण के मुताबिक इस दौरान किम ने ट्रम्प को मानसिक रूप से उकसाने वाला बताया और कहा कि प्योंगयांग अमेरिकी राष्ट्रपति के इस अपमान और धमकी का कड़े रुप से प्रतिक्रिया देगा. उत्तर कोरिया की तरफ से 3 सितंबर को सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण सहित निरंतर अन्य तरह के हथियार परीक्षण से कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव काफी बढ़ गया है. इसे लेकर ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उत्तर कोरिया के लिए किसी भी तरह की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई विनाशकारी होगी.

सरकारी प्रपंचों ने घोटा एक और दलित का गला

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कौशांबी। डेरा सच्चा सौदा का 29 लाख रुपये का बिजली बिल बाकी था. महीनों से बिजली बिल बकाया होने के बावजूद राम रहीम की गिरफ्तारी से पहले यहां बे रोक टोक बिजली जलती रही. एक तरफ जहां देश के पीएम और प्रदेश के सीएम भले ही दलितों को लेकर भरे मंच पर दरियादिली दिखाते हैं वहीं दूसरी ओर बड़े बकायेदारों पर हाथ डालने के बजाय छोटे बकायेदारों को उनके दरवाजे पहुंच आए दिन धमकाते और परेशान करते हैं.

कौशांबी के कसिया पूर्व गांव की एक घटना आपको अंदर तक झकझोर कर रख देगी. चौखट पर अपने सर को कभी पटकती तो कभी दहाड़े मार कर चीखती और चिल्लाती दुखियारी दलित महिला सावित्री देवी का आरोप है कि उसके पति के मौत का जिम्मेदार बिजली विभाग का जेई और उसके ठेकेदार हैं. दलित महिला का कहना है कि इस विभाग के जेई और ठेकेदार ने उसके पूरे परिवार को बेसहारा बना दिया.

कोखराज थाना क्षेत्र के कसिया पूर्व गांव में यह दलित परिवार रहता है. बुधवार की शाम बकाया बिजली बिल की वसूली करने आए मूरतगंज उपकेन्द्र के जेई आशीष मौर्या व बिल रीडिंग ठेकेदार उत्तम शुक्ला ने उसके पति अजय को धमकाया था कि बिल का बकाया 56141 रुपया नहीं जमा किया तो उसे जेल भेज दिया जाएगा. बिजली का कनेक्शन अजय के पिता रामू के नाम है. रामू की तीन महीने पहले मौत हो चुकी है. अजय ने जेई से कुछ दिनों की मोहलत मांगी लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया. जेई की बात से अजय को इस कदर सदमा लगा कि उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई.

शिवसेना के सामना ने किया भाजपा की बत्ती गुल

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मुंबई। शिवसेना ने एक बार फिर अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में मोदी सरकार पर हमला बोला है. सामना ने संपादकीय में लिखा है कि “गुजरात के विकास का क्या हुआ? ‘ये पुछते ही विकास पागल हो गया है’ ऐसा खुद गुजरात की जनता कह रही है”. सिर्फ गुजरात ही क्यों पूरे देश में विकास पागल हो गया है कि तस्वीर खुद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सामने ला रहे हैं.

सामना ने आगे लिखा है कि राहुल गांधी ने बड़ी समझदारी भारी टिप्पणी की है कि विकास के बारे में कुछ लोगों ने बड़ी गप हांकी इसलिए विकास पागल हो गया होगा. ईवीएम मशीन में घोटाला करके तथा पैसों का इस्तेमाल करके चुनाव जीत लिया तो विकास हो गया ऐसा कुछ लोगों को लगता है, लेकिन विकास की अवस्था विकट हो गई है.

मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम जैसे वित्त विशेषज्ञों ने कल तक जब यही कहने की कोशिश की तब उन्हें पागल कहने की कोशिश की गई, लेकिन अब तो खुद बीजेपी के ही पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने ही विकास की हवा निकाल दी है. देश की विकास दर 5.7 प्रतिशत होने की बात कही जा रही है जबकि असल में यह 3.7 फीसदी है. ये दावा करने के बाद यशवंत सिंहा भी बेइमान या राष्ट्रद्रोही ठहराए जा सकते हैं. रशिया में स्टॅलिन राज के खिलाफ बोलने वाले एक-एक रात में गायब हो जाते हैं. यशवंत सिन्हा को सच बोलने की क्या सजा मिलती है ये देखना होगा.

पूर्व वित्तमंत्री अगर गलत हैं तो सिद्ध करो कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं. बीजेपी के भी कई लोगों में गिरती अर्थव्यवस्था के प्रति नाराजगी है, लेकिन अनजाने भय के चलते कोई बोलने को तैयार नहीं है. देश का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है.

यशवंत सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्तमंत्री थे इसलिए उनका बयान सिर्फ सोशल मीडिया पर नियुक्त किए गए वेतनधारी प्रचारकों की फौज झुठा साबित नहीं कर सकती. संपादकीय में दावा किया गया है कि ये सब हमने साल भर पहले कह दिया था तब हम देशद्रोही ठहराए गए थे. अब यशवंत सिन्हा ठहराए जाएंगे.

भाषा की राजनीति और पिछड़ता भारत!

भाषा

हमें ये सोचना चाहिए कि हमारे देश में 22 ऑफिशियल भाषाओं के होने बावजूद भी हम हर मामले में पीछे क्यों हैं? या कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत इसिलए पीछे है क्योंकि यहां इतनी ऑफीशियल भाषाएं हैं?

क्योंकि सवाल ये है कि अगर इतनी सारी ऑफीशियल भाषाओं से ही किसी देश की तरक्की होती तो अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की एक भी ऑफीशियल भाषा क्यों नहीं है? क्यों अमेरिका की सिर्फ एक De facto (वास्तविक) भाषा अंग्रेजी है? बोलने को अमेरिका जैसे देश भी हमारी तरह बहुभाषिय हैं. लेकिन ऑफीशियल भाषा के मामले में अमेरिका ने सिर्फ अंग्रेजी को ही क्यों रखा? क्यों नहीं भारत की तरह वहां भी भाषाओं का वर्गीकरण हुआ? क्यों इंग्लैण्ड ने सिर्फ अंग्रेजी को ही अपनी ऑफीशियल भाषा रखा?

कैसे अपनी जेपैनीज भाषा का इस्तेमाल कर जापान वाले आज विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश में शुमार हो गए हैं? कैसे चाईना वाले सिर्फ चाइनीज भाषा का प्रयोग कर आगे बढ़ रहे हैं? क्यों सभी विकासशील देशों में ऑफीशियल भाषा 2 या 4 से ज्यादा नहीं? क्योंकि उन्हें लगता है कि भाषा संवाद का माध्यम है. जहां एक भाषा होगी वहां आमजन में आपसी संवाद भी आसानी से होगा. कोई क्रान्ति भी करनी हो तो आसानी से होगी. हमारी तरह क्षेत्रीय भाषाओं में उलझकर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित रहकर कमजोर नहीं नहीं पड़ जाएगी. क्रांति सबसे पहले आपसी संवाद खोजती है. और ये संवाद न होने देना ही भाषीय राजनीति है.

इस देश को अगर तरक्की पर ले जाना है तो सरकार को यह तय करना चाहिए भारत की “मेन स्ट्रीम” यानी मुख्य धारा में कौन सी भाषा होनी चाहिए. अब वो अंग्रेजी हो, हिंदी हो या अन्य कोई भी.

दअरसल भाषा के मामले भारत का लगभग हर क्षेत्र तीन नावों की सवारी कर रहा है. पहला तो उस क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा, फिर अंग्रेजी और भूले बिसरे इस देश में 40% जनसंख्या द्वारा बोले जाने वाली “हिंदी भाषा.

और इन दो-तीन नावों की सवारी के चक्कर सबसे ज्यादा किसी का घाटा होता है, तो वो है इस देश की 70 फीसदी आबादी जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं. भारत के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत से शायद ही कोई अंजान हो. और शायद यही वजह है कि लोग अपने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए प्राइवेट स्कूलों की तरफ रुख करते हैं अपने. वो प्राइवेट स्कूल जहां आधुनिकता है, जहां सब कुछ डिसिप्लीन आर्डर में है, जहां प्रयोगशालाएं हैं और अंग्रेजी भाषा की अनिवार्यता भी है.

लेकिन ये “लोग” हैं कौन? याद रहे ये “लोग” उस 70 फीसदी आबादी का हिस्सा नहीं हैं. फिर खुद सोचिए कि उन 70 फीसदी बच्चों का क्या होता होगा भविष्य में जो सरकारी स्कूल से पढ़ कर निकलते हैं? क्या उनमें वो आत्मविश्वास होगा जो एक प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थी में होगा? मेरा अपना मत है कि बिल्कुल भी नहीं. और चलिए अगर हम मान भी लें कि दोनों के पास बराबर का ज्ञान है. और दोनों किसी नौकरी के बराबर के हकदार हैं. लेकिन क्या ये दोनों तब भी उतने ही बराबर के माने जाएंगे जब नौकरी की अनिवार्यता में अंग्रेजी भाषा की निपुणता को सर्वोपरि रखा जाएगा?

नहीं बिल्कुल नहीं. तब सरकारी स्कूल वाले छंट जाएंगे. फिर वो इंग्लिश स्पोकेन का कोर्स करेंगे, कोचिंग करेंगे इंग्लिश की और सालों साल फॉर्म भरते रहेंगे और छंटते रहेंगे और अंत में जाकर कहीं नौकरी ले पाएंगे कोई. लेकिन यहां भी गौर करने वाली बात ये है कि ये सब करने के लिए जिसके पास पैसे होंगे वही ये सब कर पाएंगे. जिनके पास पैसे नहीं वो घर गृहस्ती में लग जाएंगे. और रोजी रोटी के लिए मजदूरी से लेकर फैक्टरी या ठीकेदारी या और भी छोटे मोटे कामों में लग जाएंगे. और लड़कियों को तो कोई इतना वक़्त भी नहीं देता कि वो अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. इसलिए 70 फीसदी में 10 फीसदी और जोड़कर कहें तो 80 फीसदी इस देश की लड़कियां अपने बल बूते जीने से पहले ही ब्याह दी जातीं हैं.

ये सिलसिला क्रमवार यूं ही चलता रहता है और भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिति यूं ही कमजोर होती चली जाती है. जाहिर सी बात है कि जिस देश की 70-75 प्रतिशत जनसंख्या विकसित नहीं होगी वो देश भला किस सर्वे के हिसाब से विकसित माना जाएगा?

भारत सरकार और राज्य सरकारों को ये निश्चित करना चाहिए कि आखिर सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था कैसे प्राइवेट स्कूलों की गुणवत्ता से लैश हो. और सरकारों को ये भी सोचना चाहिए कि वो जिस भाषा में अपने छात्र छात्राओं को पढ़ाते हैं, क्या उस भाषा में आगे चलकर उन्हें नौकरी पाने में दिक्कत होगी या नहीं?

जैसा कि हम जानते हैं कि उत्तर भारत के स्कूलों में अंग्रेजी की कोई अनिवार्यता नहीं है, सारे विषयों की पढ़ाई हिंदी में होती है, तो सरकार को ऐसे में सुनिश्चित करना चाहिए कि क्या ये सरकारी स्कूल के बच्चे जब कल को नौकरी लिए तैयार होंगे तो क्या उन्हें अंग्रेजी की वजह से दिक्कत आयेगी या नहीं?

ऐसी हर उस बिंदु पर हमें पहल करने की जरूरत है जिसकी वजह से भारत की आबादी 1.3 बिलियन तो बढ़कर दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले देशों में से एक तो हो गया मगर आर्थिक और सामाजिक मामले पिछड़ा का पिछड़ा हुआ है.

– दामिनी वर्षा, बक्सर (बिहार)

सरकारी हैंडपंप से पानी भरने पर दलित लड़की पर हमला

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक जातिवादी महिला ने दलित लड़की को लहूलुहान कर दिया. लड़की का जुर्म सिर्फ इतना था कि वह सरकारी हैंडपंप से पानी भरकर ला रही थी.

दरअसल, जयपुर के चाकसू तहसील के सावलिया गांव में रहने वाली 13 साल की दलित लड़की आरती बैरवा सरकारी हैंडपंप से पानी भर कर ला रही थी. तभी कालू गुर्जर की पत्नी विनोदी गुर्जर ने उसे रोक लिया. जातिसूचक गाली दी. लड़की से कहा कि तूने हैंडपंप से पानी कैसे भरा. हैंडपंप को अपवित्र कर दिया. इतना कुछ बोलने के बाद भी विनोदी गुर्जर ने दलित लड़की पर हथौड़ी से हमला कर दिया. जिससे लड़की लहूलुहान हो गई.

लड़की के पिता को जब घटना का पता चला तो वो विनोदी गुर्जर का विरोध करने पहुंचा और थाने में शिकायत करने की धमकी दी. लेकिन विनोदी गुर्जर और उसके पति सहित गुर्जर समुदाय के लोगों ने उसे धमका कर भगा दिया और थाने में शिकायत ने करने की चेतावनी भी दी.

लड़की के पिता कल्याण बैरवा किसी की धमकी से नहीं डरा और पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने भी रिपोर्ट लिखने में आनाकानी करी. लेकिन 20 सितंबर को पुलिस ने शिकायत तो दर्ज कर लिया. लेकिन आरोपी अब भी बाहर घूम रहे हैं. पीड़ित परिवार को केस वापस लेने के लिए धमका रहे हैं.

पुलिस ने आरोपियों पर एससी/एसटी एक्ट के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया. लेकिन आरोपी पूरी तरह से आजाद घूम रहे हैं. पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल रहा है.

बच्चों ने पेश की मिसाल, महिलाओं के नाम कर रहे हैं पौधारोपण

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गोपालगंज। मजाक में ही सही लेकिन कभी-कभी लोग कहते हैं कि बच्चे बड़ों से ज्यादा समझदार होते हैं. यही समझदारी कुछ बच्चे दिखा रहे हैं. इन बच्चों ने ‘द क्राईंग अर्थ’ नाम से एक संस्था बनाई है. कुछ अलग है न?

नाम से आप समझ गए होंगे की यह नाम किसके रोने की बात कर रहा है. 27 सितंबर को इन बच्चों ने एक मुहीम की शुरूआत की. यह शुरूआत बिहार के गोपालगंज जिले के बसडिला ग्राम पंचायत से हुई, जहां बच्चों ने पौधारोपण का काम किया. लेकिन ऐसे-वैसे नहीं इनकी एक नई सोच के साथ. अलग सोच यह थी कि यह पौधारोपण का काम वहां होगा जहां नारी होगी. और जब वह नारी पौधारोपण कर देगी तब उस पौधे का नाम भी नारी के नाम पर हो जाएगा. और उस पौधे की जिम्मेदारी उस नारी की हो जाएगी.

बच्चे कहते हैं कि आज हमारी धरती धीरे-धीरे विनाश की ओर अग्रसर होती जा रही है तो हमें अपनी धरती को बचाने के लिए कुछ काम करना होगा. क्योंकि आज हमारी धरती रो रही है. ये बच्चे गोपालगंज केंद्रीय विद्यालय के छात्र है. यह बच्चे विडियो बना कर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं. इन बच्चों में केंद्रीय विद्यालय के छात्र गौरव प्रियदर्शी, सिद्धार्थ गौतम, टिंकू केडिया, सौरव प्रियदर्शी, शौरव राज, आदित्य प्रकाश, अमृत राज आदि छात्र भी है. छात्रों ने वेदांत और रंजय को भी धन्यवाद कहा. वेदांत और रंजय दोनों ने इन छात्रों का मार्गदर्शन भी किया और मदद भी की.

रिपोर्ट -सिद्धार्थ गौतम

दिल्ली सरकार की सहमति से बढ़ा दिल्ली मेट्रों का किराया

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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो 3 अक्टूबर से मेट्रो का किराया बढ़ाने जा रहा है. किराया बढ़ने के बाद मेट्रो का अधिकत्तम किराया 60 रूपए हो जाएगा. दिल्ली की जनता इससे नाराज है. दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी इस पर नाराजगी जाताई और ट्वीट कर कहा कि मेट्रो किराए में बढ़ोतरी को जनविरोधी बताया है. दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत को आदेश दिए हैं कि एक हफ्ते में किराया बढ़ोतरी को रोकने के उपाय निकालें. साथ ही एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है.

लेकिन केजरीवाल दिल्ली की जनता से धोखा कर रहे हैं. क्योंकि मेट्रो के किराए बढ़ोतरी पर दिल्ली सरकार ने ही मोहर लगाई थी और उस वक्त इस बढ़ोतरी का विरोध नहीं किया था. मई महीने में मेट्रो किराए को लेकर बनाई गई उच्चस्तरीय किराया निर्धारण समिति ने मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी की थी. ये किराए 10 मई से ही बढ़ा दिए गए थे.

समिति ने यह भी घोषणा की थी कि मेट्रो के किराए एक बार और अक्टूबर माह में बढ़ाए जाएंगे. जिसके बाद माना जा रहा है कि अगले माह 10 तारीख से पांच किलोमीटर से ऊपर मेट्रो के किराए में 10 रुपये की बढ़ोतरी हो जाएगी. असल में मेट्रो के दोनों बार किराए बढ़ाने पर दिल्ली सरकार ने रजामंदी जताई थी और उस वक्त इसका विरोध नहीं किया था.

मेट्रो सूत्रों के अनुसार इस समिति का गठन केंद्र सरकार करती है, जिसकी अध्यक्षता रिटायर जज करते हैं. कमिटी में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव और दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी सदस्य होते हैं और इनकी अनुशंसा के आधार पर ही मेट्रो के किराए बढ़ा गए थे.

मेट्रो सूत्रों के अनुसार मेट्रो के किराए में दखल देने का अधिकार दिल्ली सरकार के पास नहीं है. न वह किराए बढ़ा सकती है और न घटा सकती है. अगर सरकार को किराए घटाने थे तो उच्चस्तरीय कमिटी की बैठक में दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि चीफ सेक्रेटरी को विरोध दर्ज कराना था, लेकिन उन्होंने नहीं करवाया.

मेट्रो के एक अधिकारी से यह पूछे जाने पर कि क्या दिल्ली सरकार बिजली की तरह राहत देने के लिए मेट्रो को भी सब्सिडी दे सकती है ताकि यात्रियों पर किराए का बोझ न बढ़े, उनका कहना था कि इस मामले में लीगल ओपिनियन चेक की जाएगी, उसी के बाद कुछ कहा जा सकता है.

गुर्जरों ने दलितों के घरों पर किया पथराव, वाहनों में की तोड़फोड़

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मेरठ

मेरठ। मेरठ के टीपी नगर के पूठा गांव में दलितों और गुर्जरों के टकराव हो गया. गुर्जरों ने दलितों के घरों पर पथराव किया. दलितों के वाहनों में तोड़फोड़ भी की. दोनों पक्षों में टकराव के बाद गांव में भय का माहौल बना हुआ है. हालांकि गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है.

दरअसल रिठानी गांव के रहने वाला दलित युवक लक्की की 26 सितंबर को पूठा गांव के गुर्जर युवक अनिकेत से हाथापाई हगो गई थी. लेकिन गांव के बड़े लोगों ने झगड़ा शांत करवा दिया था. झगड़े की खबर पाकर पुलिस आई तो ग्रामीणों पुलिस को भी वापस भेज दिया.

ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार दोपहर लक्की पूठा गांव में अपने समुदाय के एक व्यक्ति के यहां आया था. तभी गुर्जर समुदाय के कुछ युवकों ने उसकी पिटाई कर दी. जिसके विरोध में कुछ देर बाद जीवनपुरी रिठानी में कुछ दलित युवकों ने बाइक से गांव जा रहे पूठा निवासी अर्चित को पीट दिया.

अर्चित से मारपीट का पता चलते ही गुर्जर बिरादरी के दर्जनों युवक एकत्रित हो गए. दलित पक्ष का आरोप है कि गुर्जर युवकों ने उनके घर लाठी-डंडों से धावा बोल लिया. घरों पर पथराव किया. महिलाओं से बदसलूकी की. दरवाजे बंद कर लिए तो उन पर डंडे मारे. आंगन में खड़ी गोल्डी, नरेश और चंदर की बाइक और चीनू की कार में तोड़फोड़ की.

हिंसा की सूचना पर पहुंची टीपी नगर पुलिस को दलित महिलाओं ने घेर लिया. पूछा कि गुर्जर युवकों का झगड़ा जीवनपुरी के युवक से हुआ तो हमारे घरों पर हमला क्यों किया. दलित पक्ष की ओर से 18 नामजद लोगों के खिलाफ तहरीर दी गयी.

एसपी सिटी मान सिंह चौहान के अनुसार दो युवकों में मारपीट के बाद दो पक्षों में गलतफहमी पैदा हो गई. कुछ युवकों की नासमझी से माहौल गर्म हुआ. गांव के दोनों बिरादरी के बुजुर्ग इस विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते. वे लोग आपस में पंचायत कर समस्या का हल निकाल रहे हैं.

गांव में पहुंचे विधायक सोमेंद्र तोमर, एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने गलियों में घूमकर दलित महिलाओं का दर्द सुना. महिलाओं ने आरोप लगाते हुए बताया कि हमने घर के दरवाजे बंद किए तो गुर्जर पक्ष के युवकों ने दरवाजों पर डंडे बरसाए. अमित नाम के दलित दिव्यांग को भी युवकों ने डंडे मारे.

पनामा पेपर्स मामले में अमिताभ को समन भेज सकता है ईडी

अमिताभ बच्चन और उनके परिवार ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पनामा पेपर्स मामले में भेजे गए नोटिस का जवाब सौंप दिया है. केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में शीघ्र ही उन्हें समन भेजा जा सकता है.

मनी लांड्रिंग विरोधी एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि कुछ समय पहले बच्चन परिवार को नोटिस जारी किया गया था. उनसे आरबीआइ के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत अपने विदेशी रेमिटेंस के बारे में बताने के लिए कहा गया था.

अधिकारियों ने बताया कि ईडी को विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत भेजे गए नोटिस का जवाब मिल गया है. जांच के तहत शीघ्र ही समन भेजा जा सकता है. पनामा पेपर्स मामले में अमिताभ बच्चन का नाम आया था. आयकर विभाग भी उनके खिलाफ जांच कर रहा है.