इस सीरियल रेपिस्ट ने किया 50 महिलाओं का रेप

0
mathur

चेन्नई। चेन्नई पुलिस ने गुरुवार को 28 साल के एक युवक को गिरफ्तार किया है. एक सॉफ्टवेयर कंपनी के पूर्व कर्मचारी इस युवक पर लूटपाट करने और सीरियल रेपिस्ट होने का आरोप है. पुलिस की मानें तो युवक 50 से ज्यादा महिलाओं का रेप कर चुका है.

कृष्णागिरि जिले के माथुर के रहने वाले माधन अरिवालगन के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच की जा रही है. एक जांच अधिकारी ने बताया, ‘आरोपी युवक लड़कियों को घर में फंसाकर उनका रेप करता था और ऐसे कई मामलों में उसने फोन में रिकॉर्डिंग भी की. इन रिकॉर्डिंग की मदद से वह पीड़ित महिलाओं को धमकाता और उन्हें जबरन संबंध बनाने पर मजबूर करता था.’ पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन और बाकी सामान जब्त कर लिया है, इसकी मदद से बाकी बातें सामने आने की उम्मीद है.

पुलिस अधिकारी ने बताया,’आरोपी के खिलाफ पहले कुछ रेप के मामले दर्ज हुए और फिर एक के बाद एक मामले सामने आते गए. आरोपी कृष्णगिरि कॉलेज से मैथ्स ग्रेजुएट है और इससे पहले बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर फर्म में काम करने के बाद 2015 में चेन्नई आया था.’ आरोपी ने पुलिस से बताया कि चेन्नई में उसके पास काम नहीं था इसके बाद उसने लोगों को लूटना शुरु कर दिया और बाद में ऐसे अपराध करने लगा.

तेजस्वी ने शेयर की राहुल गांधी के साथ लंच की तस्वीरें

0
rahul-tejasvi

पटना। गुजरात विधानसभा चुनावों की तैयारियों में पूरे जी-जान से लगे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने बिजी शेड्यूल में से समय निकाल कर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी चीफ लालू यादव के बेटे तेजस्वी के साथ लंच किया. तेजस्वी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी.

तेजस्वी ने ट्विटर पर राहुल के साथ लंच करते हुए तस्वीर पोस्ट कर कहा, ‘मुझे शानदार लंच के लिए ले जाने के लिए राहुल गांधी का बहुत धन्यवाद. मैं राहुल का आभारी और कृतज्ञ हूं. अपने बिजी शेड्यूल से समय निकालते हुए लंच के लिए जाने के लिए आपका फिर से धन्यवाद.’ हालांकि तेजस्वी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह तस्वीर कहां की है.

एक दिन पहले ही तेजस्वी ने राहुल गांधी की तारीफों के पुल बांधे थे. एक के बाद एक लगातार ट्वीट करते हुए तेजस्वी ने प्रधानत्री नरेंद्र मोदी को ‘गप्पू’ बताया. तेजस्वी यादव ने ट्वीट में कहा कि ‘पप्पू’ जहां एक ओर लोकप्रियता में ऊपर जा रहे हैं, वहीं ‘गप्पू’ नीचे आ रहे हैं.

आरजेडी और कांग्रेस का साथ कोई नया नहीं है. वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-आरजेडी-जेडीयू ने बीजेपी के खिलाफ गठबंधन किया था. इस दौरान तेजस्वी-राहुल की जोड़ी भी साथ में नजर आई थी.

सिंबल को लेकर जेडीयू में तकरार खत्म, नीतीश के पाले में गिरा तीर

nitish

पटना। जनता दल यूनाइटेड में सिंबल को लेकर चल रही तकरार खत्म हो गई. चुनाव आयोग ने जदयू के चुनाव चिन्ह तीर पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि चुनाव चिन्ह ‘तीर’ पर शरद यादव का नहीं, बल्कि नीतीश कुमार का हक है. चुनाव आयोग के फैसले के बाद नीतीश गुट में खुशी की लहर है.

जदयू नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि पार्टी के पक्ष में चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला दिया है और इस फैसले का गुजरात चुनाव पर बड़ा असर पड़ेगा, उन्होंने कहा कि सच्चाई की जीत हुई है. उन्होंने कहा कि यह शरद यादव के साथ ही कांग्रेस की भी बड़ी हार है.

संजय झा ने कहा कि कांग्रेस इस पूरे खेल में शामिल थी और अब कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा है, इससे सबसे बड़ा घाटा शरद यादव को ही हुआ है.

जदयू नेता नीरज कुमार ने शरद यादव पर हमला करते हुए कहा कि अब शरद जी लालू यादव-लालू यादव करेंगे. चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुना दिया है, अब शरद यादव क्या करेंगे? दरअसल वो लोगों के बहकावे में आकर बेवजह की जिद पाल लिए थे, अब तेजस्वी और तेजप्रताप के चाचा बनेंगे.

बता दें कि शरद यादव और नीतीश कुमार के गुट ने पार्टी सिंबल पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश की थी और फैसला चुनाव आयोग को देना था और आज आयोग ने नीतीश के पक्ष में फैसला दे दिया है.

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक, 23 अप्रैल 2016 को नीतीश कुमार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने अक्टूबर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें शरद यादव सहित कुल 195 लोगों के नाम शामिल हैं. वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में से 138 लोगों का समर्थन नीतीश कुमार को प्राप्त है, जो कि हलफनामे के साथ चुनाव आयोग को सौंपा गया था.

मेट्रो स्टेशन पर महिला पत्रकार से छेड़छाड़, वीडियो वारयल

0
metro

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो में एक महिला पत्रकार के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया तो पता चला कि उसने 10 मिनट में ही दो लड़कियों के साथ छेड़खानी की है. मामला 13 नवंबर की रात का है.

दिल्ली मेट्रो से सफर करने वाली महिला पत्रकार ने पुलिस शिकायत में बताया कि आईटीओ स्टेशन पर छेड़खानी की इस वारदात तो अंजाम दिया गया. पीड़ित ने यमुना बैंक थाने में शिकायत दर्ज कराई.

मेट्रो पुलिस के मुताबिक आईटीओ मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक की सीढ़ियों से उतरते वक्त एक शख्स ने पत्रकार के साथ छेड़छाड़ की. महिला पत्रकार ने कहा, पहले उन्हें लगा कि गलती से हुआ होगा लेकिन जब दोबारा उसने मुझे छुआ तो मुझे संभलने में कुछ वक्त लगा. वहां कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था.

पुलिस ने सीसीटीवी खंगाली तो आरोपी की तस्वीर निकल आई. इसके बाद पुलिस को बहुत मेहनत करनी पड़ी उस तक पहुंचने में, करीब 5 हजार लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस ने आखिरकार 25 साल के अखिलेश नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में आरोपी ने गुनाह कुबूल कर लिया है.

गुजरात चुनावः भाजपा ने जारी की पहली लिस्ट, जताया पटेलों पर भरोसा

gujarat नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात चुनाव के लिए अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में कुल 70 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया है. भाजपा ने कांग्रेस के उन चार विधायकों को भी टिकट दिया है जिन्‍होंने राज्‍यसभा चुनाव के दौरान भाजपा का समर्थन किया था. वहीं, भाजपा ने पहली लिस्‍ट में एक मौजूद विधायक का टिकट काटा है. पहली सूची में भाजपा ने 12 पटेल उम्‍मीदवारों को टिकट दिया है. भाजपा ने गोधरा सीट पर कांग्रेस से शामिल हुए विधायक सी के राउलजी को टिकट दिया है. bjp गुजरात चुनाव भाजपा के लिए साख का सवाल बना हुआ है. यही कारण है कि भाजपा अपना हर पासा सोच समझ कर डाल रही है. भाजपा ने अपनी इस लिस्ट में 49 विधायकों को दोबारा मौका दिया है. कांग्रेस से आने वाले नेताओं को भी टिकट दिया गया है. अपनी पहली लिस्ट में बीजेपी ने जातीय समीकरण का पूरा ख्याल रखा है. गौरतलब है कि गुजरात में पहले चरण के 19 जिलों की 89 सीटों के नामांकन की अंतिम तारीख 21 नवंबर है. इसलिए बीजेपी के पास अभी अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करने के लिए समय है. वहीं दूसरे चरण के 93 सीटों के नामांकन की अंतिम तारीख 27 नवंबर है.

गुजरात चुनाव- कांग्रेस की आज आ सकती है पहली लिस्ट

गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आज अपनी पहली उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर सकती है. गुजरात चुनाव उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लगाने के लिए कांग्रेस केंद्रीय समिति की बैठक है. कांग्रेस ने 89 उम्मीदवारों के नाम को तय कर लिया है, केंद्रीय समिति की बैठक में इन नामों पर अंतिम मंजूरी दी जानी है. वहीं बीजेपी ने 145 उम्मीदवारों के नाम तो तय कर लिए हैं, लेकिन अभी इसकी लिस्ट जारी नहीं की है. बीजेपी की इस रणनीति को देख माना जा रहा है कि वो फिलहाल वेट एंड वॉच मोड में है.

गुजरात विधानसभा चुनाव के मतदान 9 दिसंबर और 14 दिसंबर को है. ऐसे में समय बहुत कम बचा है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी नहीं की है. दोनों पार्टियां एक दूसरे के उम्मीदवारों के लिस्ट के इंतजार में है, जिसके चलते देर हो रही थी. कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाने के लिए केंद्रीय समिति की बैठक बुलाई है. ये बैठक शाम को होनी है. केंद्रीय समिति में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं तथा पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता इसमें शामिल है. सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की केन्द्रीय चुनाव समिति ने राज्य के पहले चरण में 89 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में कुछ उम्मीदवारों के नाम पर पिछले हफ्ते सप्ताह हुई बैठक में चर्चा कर ली थी, लेकिन किसी नाम की घोषणा नहीं की गयी. कांग्रेस सूत्रों ने मुताबिक 182 सीटों के लिए सभी उम्मीदवारों के बारे में आज बैठक में चर्चा होगी, इसके बाद देर शाम उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति ने गुजरात चुनाव के लिए 182 विधानसभा सीटों में से लगभग 145 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बना ली है. 145 उम्मीदवारों के नाम पर सहमति के बाद पीएम मोदी, अमित शाह, विजय रुपाणी और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष जीतू वघानी ने लगभग 50 मिनट तक मीटिंग की और ये तय किया कि अभी अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं करनी चाहिए. उसके बाद अमित शाह ने अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किया है. बीजेपी अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करने से पहले एक बार फिर हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी के करीबी लोगों को तोड़कर बीजेपी में शामिल करा उन्हें टिकट देकर कांग्रेस को बड़े झटके देना चाहती है. बीजेपी नेतृत्व हार्दिक की सीडी आने के बाद पाटीदार समाज का रुख हार्दिक को लेकर कैसा रहेगा उस पर भी नज़र बनाए हुए हैं. इसीलिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने में देर कर रही है.

गुजरात में पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 14 नवंबर से ही शुरू हो गई और पर्चा दाखिल करने की अंतिम तारीख 21 नवंबर है. जबकि दूसरे चरण के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया 20 नवंबर से शुरू होगी. ऐसे में समय बहुत कम बचा है.

शगुन चौधरी ने राष्ट्रीय महिला ट्रैप खिताब पर किया कब्ज़ा

0

नई दिल्ली। शगुन चौधरी ने 61वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप में महिला ट्रैप स्पर्धा का खिताब जीता। ओएनजीसी का प्रतिनिधित्व कर रही चौधरी ने फाइनल में पंजाब की राजेश्वरी कुमारी को 41-38 से हराया।

बिहार की ओर से खेल रही मौजूदा चैंपियन श्रेयसी सिंह टूर्नामेंट के दूसरे दिन फाइनल राउंड में 29 का स्कोर कर तीसरे स्थान पर रहीं। श्रेयसी ने क्वालीफिकेशन राउंड में 72 स्कोर के साथ शीर्ष पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाई।

तमिलनाडु की एन निवेत्ता ने 37 का स्कोर कर ट्रैप स्पर्धा का जूनियर महिला का खिताब जीता। दिल्ली और पंजाब के लिए टूर्नामेंट का दूसरा दिन शानदार रहा। राजेश्वरी की अगुआई में सुखरीत कौर ने इनाया विजय सिंह के साथ महिला टीम ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, जबकि मध्य प्रदेश ने सीनियर और जूनियर महिला टीम स्पर्धा में पदक जीते। पुरुष ट्रैप स्पर्धा में पूर्व विश्व चैंपियन मानवजीत सिंह संधू दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद क्वालीफिकेशन में 75 में से 73 का स्कोर बनाकर शीर्ष पर है। जोरावर सिंह संधू और केनान चेनाई 71 के स्कोर के साथ क्रमश तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।

Paytm और ICICI बैंक ने किया करार

0

नई दिल्ली। प्राइवेट सेक्टर के बैंक ICICI ने पेटीएम के साथ मिलकर एक करार किया है, जिसके तहत बिना ब्याज का छोटा लोन दिया जाएगा. इसके लिए आपको ICICI बैंक का कस्टमर होना होगा. इसके बाद यदि आप 20 हजार रुपए तक की खरीदारी पेटीएम के जरिए लोन लेकर करते हैं, तो आपको 45 दिनों तक कोई ब्याज नहीं देना होगा.

नई सेवा के जरिए अब कोई भी रोजमर्रा की चीजों का पेमेंट करने के लिए 20,000 रुपए तक डिजिटल क्रेडिट मिलेगा. इस नई सेवा को पोस्टपेड सेवा नाम दिया गया है. इसकी मदद से उपभोक्ता अपनी जरूरतों की चीजें जैसे बिजली-पानी का बिल, ग्रॉसरी का बिल डिजिटल क्रेडिट पर मिले इस लोन से कर सकेंगे.

बैंक के मुताबिक, 45 दिनों के बाद यदि पैसा वापस नहीं किया जाता है तो कस्टमर को 50 रुपए लेट फीस और 3 फीसद ब्याज के साथ रकम लौटानी होगी. पेटीएम-ICICI बैंक पोस्टपेड नाम का ये डिजिटल क्रेडिट अकाउंट तुरंत ऐक्टिवेट हो जाएगा और बैंक का दावा है कि जरूरत पड़ने पर ग्राहकों को तुरंत पैसा ट्रांसफर हो जाएगा.

एक बार में आप 20 हजार रुपए तक का लोन ले सकते हैं और अगली बार इसका इस्तेमाल बकाया चुकता होने पर ही कर सकते हैं. लोन कितनी बार ले सकते हैं इस पर कोई सीमा नहीं है, लेकिन पेटीएम-ICICI बैंक पोस्टपेड कार्ड पर बकाया राशि लिमिट तय है.

पेटीएम-ICICI बैंक पोस्टपेड के लिए किसी डॉक्युमेंटेशन या बैंक ब्रान्च में जाने की जरूरत नहीं है. यह एक प्राइवेट क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है. इस सर्विस के तहत ICICI बैंक ग्राहकों को 3000 रुपए से लेकर 20,000 रुपए तक का क्रेडिट मिल सकता है. हालांकि, यह लिमिट ग्राहक के क्रेडिट स्कोर पर निर्भर करेगी. जिसका क्रेडिट स्कोर जितना अच्छा होगा, उसे उतना ज्यादा लोन मिलेगा.

जिम्बाब्वे में गहराया राजनीतिक संकट

0
zimbabwe

हरारे। जिम्बाब्वे में बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रीय प्रसारक ‘जेडबीसी’ के मुख्यालय पर सैनिकों ने कब्जा कर लिया है. ‘बीबीसी’ ने बुधवार को बताया, राजधानी हरारे में विस्फोट की खबरें भी मिलीं हैं लेकिन इसका कारण स्पष्ट नहीं है. वहीं, इससे पहले दक्षिण अफ्रीका में देश के राजदूत ने तख्तापलट की खबरों को खारिज कर दिया था.

जिम्बाब्वे की सत्तारूढ़ पार्टी ने देश के सेना प्रमुख द्वारा संभावित सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी देने के बाद राजद्रोह करने का आरोप लगाया था. जनरल कॉन्स्टेंटिनो चिवेंगा ने राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे द्वारा उप राष्ट्रपति को बर्खास्त करने के बाद चुनौती दी थी. वहीं, तनाव मंगलवार से बढ़ा है जब बख्तरबंद वाहन हरारे के बाहर की सड़कों पर तैनात कर दिए गए थे और इनका यहां तैनात होने का उद्देश्य भी स्पष्ट नहीं था.एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि राष्ट्रपति रोबर्ट मुगाबे के शासन की महत्वपूर्ण समर्थक रही सेना और 93 वर्षीय नेता के बीच तनाव गहरा गया है और बुधवार तड़के बोरोडाले में लंबे समय तक गोलीबारी हुई.

मुगाबे की जेडएएनयू-पीएफ पार्टी ने सेना प्रमुख जनरल कांन्सटैनटिनो चिवेंगा पर मंगलवार को ‘‘राजद्रोह संबंधी आचरण’’ का आरोप लगाया. इस विवाद ने मुगाबे के लिए ऐसे समय में बड़ी परीक्षा की घड़ी पैदा कर दी है, जब पहले कह वहां हालात खराब चल रहे हैं. चिवेंगा ने मांग की है कि मुगाबे उपराष्ट्रपति एमरसन मनांगाग्वा की पिछले सप्ताह की गई बर्खास्तगी को वापस लें

जेडएएनयू-पीएफ ने कहा कि चिवेंगा का रुख ‘‘स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय शांति को बाधित करने वाला है… और यह उनकी ओर से राजद्रोह संबंधी आचरण की ओर इशारा करता है क्योंकि इसका मकसद विद्रोह को भड़काना है.’’ मनांगाग्वा को बर्खास्त किए जाने से पहले उनका मुगाबे की पत्नी ग्रेस (52) से कई बार टकराव हुआ था. ग्रेस को अगले राष्ट्रपति के लिए मनांगाग्वा का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है.

हालात खराब होने के मद्देनजर हरारे में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को चेताया है कि ‘‘जारी राजनीतिक अस्थिरता’’ के कारण वे ‘‘शरण ले लें’’. चिवेंगा ने संभावित सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी दी थी. इसके मद्देनजर हरारे के बाहर सशस्त्र वाहनों ने निवासियों को चिंतित कर दिया है. इस संबंध में टिप्पणी के लिए सेना के प्रवक्ता से बात नहीं हो पाई.

पद्मावती फिल्म के विरोध में चित्तौड़गढ़ किले पर प्रदर्शन

padmavati

जयपुर। फिल्म पद्मावती के विरोध में ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ किला शुक्रवार को पर्यटकों के लिए बंद किया गया है. भारत के सबसे बड़े किलों में शामिल चित्तौड़ दुर्ग के पाडनपोल में बीते कई दिनों से फिल्म पद्मावती के विरोध में सर्व समाज की ओर धरना दिया रहा है.

जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष उम्मेद सिंह ने बताया कि आज फिल्म के विरोध स्वरुप पर्यटकों को किले में प्रवेश नहीं दिया जाएगा जबकि किले में रहने वाले लोगों की आवाजाही पर कोई असर नहीं होगा. इस बंद के कारण आज यहां आने वाली शाही ट्रेन के पर्यटकों को भी यहां नहीं लाया जाएगा.

संस्थान की ओर से चेतावनी दी गई थी कि यदि 16 नवंबर तक फिल्म पर बैन नहीं लगा तो 17 नवंबर को किले में पर्यटकों को नहीं जाने दिया जाएगा. इसी क्रम में आज यह कदम उठाया गया है. दुर्ग की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए है. साथ ही प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है. जानकारी के अनुसार इससे पूर्व दुर्ग केवल तीन बार पर्यटकों के लिए बंद रहा है. जिसमें दो बार दुर्ग कर्फ्यू व सांप्रदायिक तनाव के चलते अघोषित रुप से बंद था.

गौरतलब है कि फिल्म पद्मावती का पिछले कई दिनों से करणी सेना सहित तमाम हिंदूवादी संगठन और भाजपा नेता विरोध कर रहे हैं. फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है. फिल्म में दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शहीद कपूर जैसे बड़े अभिनेता शामिल है.

सैनेटरी नैपकिन पर हाईकोर्ट ने लगायी केंद्र सरकार को फटकार

0
napkin

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सेनेटरी नैपकिन को टैक्स फ्री ना करने पर केंद्र सरकार से सवाल पूछा है. सेनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब काजल-बिंदी टैक्स फ्री हो सकते हैं तो फिर सेनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने के पीछे क्या मंशा है? कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या नैपकिन पर जीएसटी की दर कम करने की कोई गुंजाइश है या नहीं?

याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि जीएसटी रेट तय करने वाली कमेटी में किसी भी महिला को शामिल नहीं किया गया. हाल ही में सरकार ने करीब 200 सामानों पर लगे जीएसटी रेट कम किए, लेकिन सेनेटरी नैपकिन को 12 फीसदी जीएसटी के दायरे में ही रहने दिया. याचिकाकर्ता का तर्क है कि जीएसटी लगने से महिलाएं इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं. सरकार ने इसे महिलाओं की पहुंच से भी दूर कर दिया है.

याचिकाकर्ता ने कहा है कि महिलाओं के सिंदूर, चूड़ियां, कुमकुम सहित कंडोम जैसी वस्तुओं पर पूरी तरह जीएसटी में छूट दी गई है. जबकि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तु सेनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाई जा रही है. याचिकाकर्ता ने 12 प्रतिशत जीएसटी का विरोध करते हुए फैसले को वापस लेने की मांग की है. हालांकि इस मामले में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी.

चंद्रशेखर की गिरती सेहत के मद्देनजर तुरंत हटे रासुका

Chandrashekhar ravan

सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में 5 मई 2017 को दलितों पर हमले हुआ. इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई न करने के विरोध में दलितों ने प्रदर्शन किया. पुलिस के साथ टकराव करने के आरोप में भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर जून से सहारनपुर जेल में बंद है. सितम्बर महीने के आखिरी सप्ताह से चंद्रशेखर की सेहत खराब चल रही है. सितम्बर में उसे जेल में कई दिन तक बुखार, पेट दर्द तथा सांस लेने में तकलीफ की शिकायत रही थी जो बाद में टाईफाईड में बदल गई. सेहत में अधिक गिरावट आने पर उसे 27 अक्टूबर को जेल से जिला अस्पताल सहारनपुर भेजा गया, जहां पर उसे आईसीयू में रखा गया. पर यह बड़ी हैरानी की बात है कि उसे उसी शाम अस्पताल से फिर जेल भेज दिया गया था.

इसके बाद जेल में उसकी सेहत निरंतर बिगड़ती रही और अंततः 8 नवम्बर को उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ा. वहां पर उसे ट्रॉमा सेंटर में 13 नवम्बर तक रखा गया और उसी दिन फिर से सहारनपुर जेल वापस भेज दिया गया. इस बीच उसके घर वालों को छोड़ कर किसी को भी उससे मिलने नहीं दिया गया. डॉक्टरों द्वारा न तो उसके घर वालों और न ही किसी और को चंद्रशेखर की बीमारी तथा उसके इलाज के बारे में कोई जानकारी दी गयी है. सरकार के इस रवैये से आम लोगों में चंद्रशेखर की सेहत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और शंकाएं पनप रही हैं.

सूत्रों के अनुसार चंद्रशेखर की सेहत में भारी गिरावट आई है. उसका वजन काफी कम हो गया है. उसके फेफड़ों में संक्रमण है तथा उसे सांस लेने में भी कुछ दिक्कत है. उसके पेट में भी संक्रमण तथा सूजन है. उसे चलने फिरने में काफी कमजोरी महसूस हो रही है. उसे तरल भोजन लेना पड़ रहा है. पता नहीं सरकार उसे अस्पताल में रख कर उचित इलाज कराने की बजाये उसे जेल में बंद रखने पर क्यों तुली हुई है?

इधर चंद्रशेखर की बिगड़ती सेहत के मद्देनजर रासुका हटाने की मांग को लेकर 13 नवम्बर को लखनऊ में भीम आर्मी डिफेंस कमेटी के तत्वाधान में एक प्रेस कांफ्रेंस की गई, जिसमें चंद्रशेखर की गिरती सेहत के मद्देनज़र मानवीय आधार पर रासुका हटाने की मांग की गई. इसके अतिरिक्त चंद्रशेखर तथा शब्बीरपुर के दो दलितों पर रासुका लगाने तथा चंद्रशेखर को उचित डॉक्टरी इलाज उपलब्ध न कराए जाने के विरोध में सहारनपुर के चार गांव में 6 दिन से दलित महिलाएं भूख हड़ताल पर बैठी हैं, जिनमें से दो की तबियत काफी बिगड़ चुकी है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है. ऐसी सम्भावना है कि यदि सरकार द्वारा इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम शीघ्र नहीं उठाया गया तो यह विरोध और तेज़ी पकड़ सकता है.

अतः डिफेंस कमेटी फॉर भीम आर्मी और उत्तर प्रदेश जनमंच एवं स्वराज अभियान योगी सरकार से मांग करता है कि चंद्रशेखर की बिगड़ती सेहत के मद्देनज़र उस पर लगाया गया रासुका तुरंत वापस लिया जाए और उसे जमानत पर जेल से रिहा किया जाये ताकि वह अपना उचित इलाज करा सके. एस.आर. दारापुरी, संयोजक उत्तर प्रदेश जनमंच एवं सदस्य उत्तर प्रदेश स्वराज अभियान समिति

पाकिस्तान में मिली 1700 वर्ष पुरानी तथागत बुद्ध की मूर्ति

0
pakistan buddha

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह में तथागत बुद्ध की 1700 वर्ष पुरानी मूर्ति मिली है. धार्मिक सौहार्द और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान ने मूर्ति को लोगों के सामने रखा है. खैबर पख्तूनख्वाह में प्राचीन बौद्ध स्थल की खोज पहली बार 1929 में हुई थी. 88 साल बाद खुदाई फिर से शुरू हुई और 14 मीटर ऊंची बुद्ध की मूर्ति पाई गई.

भामला के संग्रहालय और पुरातत्व विभाग के निदेशक अब्दुल सामद ने कहा कि बुद्ध की यह मूर्ति तीसरी शताब्दी की है. यह दुनिया की सबसे पुराने ध्यानमग्न बुद्ध की मूर्ति हैं. उन्होंने कहा कि तथागत बुद्ध की यह मूर्ति कंजूर के पत्थर से बनी है और 14 मीटर ऊंची (48 फीट ऊंची) है. उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा हमने 500 से अधिक तथागत बुद्ध से संबंधित सामग्रियों को खोज निकाला है.

सामद ने कहा कि यह हमारे देश की संपत्ति है. हमें इसका संरक्षण करना चाहिए. इस तरह की बुद्ध की मूर्ति दुनिया में दूसरी नहीं है. इस प्रतिमा को संभालकर रख दिया गया है, जिसे लोग देख सकते हैं. खैबर पख्तूनख्वाह 2300 साल पहले मौर्य सम्राट अशोक के साम्राज्य में बौद्ध सभ्यता का केंद्र रहा था.

देश के विपक्षी नेता और क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान बौद्ध देशों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर सकता है. उन्होंने देश में तथागत बुद्ध से संबंधित पुरातात्विक स्थलों को सुरक्षित रखने और बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया.

चमार रेजीमेंट को लेकर चंद्रशेखर रावण का बड़ा बयान

3
Chamar regiment

पुलिस की हिरासत में मेरठ के मेडिकल कॉलेज में इलाज करवा रहे भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण ने एक बड़ा बयान दिया है. रावण ने चमार रेजीमेंट को फिर से सक्रिय करने के लिए देशभऱ में आंदोलन चलाने की बात कही है. उन्होंने कहा है कि देश भर के युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ा जाएगा. उन्होंने मांग किया कि सरकार को इस रेजीमेंट की फिर से सेना में बहाली करनी होगी. चंद्रशेखर आजाद के इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई है.

दरअसल सेना में चमार रेजीमेंट थी, जो सिर्फ 3 साल ही अस्‍तित्‍व में रही. सेना में इस रेजीमेंट की बहाली के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी गई, लेकिन अभी तक मामला कागजों और मंत्रालयों में उलझा हुआ है. इसकी मांग को लेकर होने वाले कुछ प्रदर्शनों की खबरों पर राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया था. फरवरी 2017 में आयोग ने रक्षा मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर इस रेजीमेंट के बंद होने को लेकर सवाल भी पूछा था. असल में आजादी के बाद से ही तमाम राज्यों और मंचों से चमार रेजीमेंट को बहाल किए जाने की मांग कई बार उठाई गई, लेकिन आवाज दबकर रह गई.

चमार रेजीमेंट को 1943 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों ने बनाया था. यह थलसेना थी. कोहिमा में चमार रेजीमेंट ने जपानियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. यह लड़ाई इतिहास की सबसे खूंखार लड़ाइयों में से एक थी. इस युद्ध में चमार रेजीमेंट की बहादुरी को देखते हुए इसे “बैटल ऑनर ऑफ कोहिमा” से नवाजा गया. इस रेजीमेंट ने देशभक्ति की मिसाल भी पेश की. इस रेजीमेंट की बहादुरी को देखते हुए अंग्रेजों ने इसे आजाद हिंद फौज से लड़ने सिंगापुर भेजा. लेकिन चमार रेजीमेंट के जवानो ने देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाली आजाद हिंद फौज से लड़ने से इंकार कर दिया और सुभाष चंद्र बोस से प्रभावित होकर आईएनए में शामिल हो गए. इससे भड़के अंग्रेजों ने रेजीमेंट के कैप्टन मोहनलाल कुरील को युद्धबंदी बना लिया. इस तरह इसके गठन के तीन साल बाद ही 1946 में इस रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया.

चमार रेजीमेंट पर किताब लिखने वाले सतनाम सिंह के मुताबिक इस रेजीमेंट के तीन सैनिक अभी जिंदा हैं. इसके सैनिक चुन्नीलाल हरियाणा के महेन्द्रगढ़ में हैं, जबकि जोगीराम भिवानी और धर्म सिंह सोनीपत के रहने वाले हैं.

दलित लड़के और पाटीदार लड़की की शादी से गुजरात में बवाल

0

राजनैतिक मंच पर जिग्नेश मेवाणी और हार्दिक पटेल की जुगलबंदी भले ही रंग ला रही हो, सामाजिक तौर पर इन दोनों की जातियों के बीच खाई बनी हुई है। ऐसा तब देखने को मिला जब एक दलित लड़के और पाटीदार समाज की लड़की को आपस में प्यार हो गया। इस खबर के बाहर आते ही बवाल मच गया। लेकिन अपने विरोधियों से डरने और हार मानने की बजाय इन दोनों ने आपस में शादी कर ली।

मामला गुजरात में खेड़ा ज़िले के काठलाल शहर का है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक यहां के पाटीदार समुदाय की एक लड़की 11 नवंबर को एक दलित युवक के साथ शादी कर घऱ से निकल गई थी। लेकिन जरा ठहरिए, ये दोनों कोई आम प्रेमी युगल नहीं हैं। लड़की डॉक्टर है और युवक काठलाल बीजेपी यूनिट का नेता है। जाहिर सी बात है कि घऱवालों के राजी नहीं होने की स्थिति में ही उन्होंने यह कदम उठाया होगा।

घटना को लेकर पाटीदारों का कहना है कि पुलिस ने लड़की को खोजने में दिलचस्पी नहीं दिखाई, वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि दोनों वयस्क हैं और दोनों अभिभावक की मर्ज़ी के बिना शादी कर सकते हैं। पुलिस ने कहा कि इस युगल ने तीन महीने पहले शादी की थी और इसे आणंद जिले के सोखरत तालुका में पंजीकृत किया है।

एक तरफ जहां पाटीदार समुदाय इस शादी का विरोध कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ दलित समुदाय ने अभी तक इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। गुजरात में चुनाव के मद्देनजर यह मामला राजनैतिक रूप से भी तूल पकड़ सकता है।

मानवीय उच्चादर्शों के बड़े कवि कुंवर नारायण का अवसान

kunwar narayan कुंवर नारायण को यह पता था. ‘घर रहेंगे, हमीं उनमें रह न पाएंगे समय होगा,हम अचानक बीत जाएंगे. अनर्गल जिंदगी ढोते किसी दिन हम एक आशय तक पहुंच सहसा बहुत थक जाएंगे.. मृत्यु होगी खड़ी सम्मुख राह रोके, हम जगेंगे यह विविधिता,स्वप्न, खो के और चलते भीड़ में कन्धे रगड़कर हम अचानक जा रहे होंगे कहीं सदियों अलग होके. (घर रहेंगे : तीसरा सप्तक 1959) नजरिया साफ हो तो क्या काव्य और क्या जीवन दोनों जगह आदमी अलमस्त फक्कड़ सा चलता चला जाता है. साफ ‘आशय’ यात्रा को सरल बना देता है. तीसरे सप्तक के अपने ‘वक्तव्य’ में कुंवर नारायण ने लिखा था- ‘साहित्य जब सीधे जीवन से संपर्क छोड़कर वादग्रस्त होने लगता है, तभी उसमें वे तत्व उत्पन्न होते हैं जो उसके स्वाभाविक विकास में बाधक हों.’ अपने मत को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि ‘कलाकार या वैज्ञानिक के लिए जीवन में कुछ भी अग्राह्य नहीं. उसका क्षेत्र किसी वाद या सिद्धांत विशेष का संकुचित दायरा न होकर वह सम्पूर्ण मानव परिस्थित है जो उसके लिए एक अनिवार्य वातावरण बनाती है.’ उनके लिए कवि जीवन के ‘कार्निवल’ में उस ‘बहुरूपिये’ की तरह था जिसके हजारों रूप थे और जिसका हर रूप ‘जीवन की एक अनुभूत व्याख्या’ था. इसी काव्य-संवेदना ने उनके काव्य को जीवन की अगण्य भाव-विविधता से भर दिया. यह विविधता उनके जीवन और काव्य का सदा से एक सचेत हिस्सा बनकर रही. सचेत होना दुखी हो उठने की पूर्व और अपरिहार्य मनो-स्थित है. कबीर भी थे. सुखिया सब संसार है, खाबे अरु सोबे. कुंवर नारायण भी जानते थे- जो सोता है उसे सोने दो वह सुखी है, जो जगता है उसे जगने दो उसे जगना है जो भोग चुके उसे भूल जाओ वह नहीं है, जो दुखता है उसे दुखने दो उसे पकना है … (तीसरा सप्तक : 1959) कुंवर नारायण जीवन भर पके. अपने ‘कलपते प्राणों के साथ.’ उनके काव्य-लक्ष्य जितने उजले थे, उतनी ही उजली मनुष्य-मात्र में उनकी आस्था थी. उनकी एक कविता में एक ‘मुश्किल’ थी. वह मुश्किल यह थी- ‘एक अजीब सी मुश्किल में हूं इन दिनों- मेरी भरपूर नफरत कर सकने की ताकत दिनों-दिन क्षीण पड़ती जा रही, मुसलमानों से नफ़रत करने चलता तो सामने ग़ालिब आकर खड़े हो जाते अब आप ही बताइए किसी की कुछ चलती है उनके सामने? अंग्रेजों से नफ़रत करना चाहता जिन्होंने दो सदी हम पर राज किया तो शेक्सपियर आड़े आ जाते जिनके मुझ पर न जाने कितने अहसान हैं और वह प्रेमिका जिससे मुझे पहला धोखा हुआ था मिल जाए तो उसका खून कर दूं! मिलती भी है, मगर कभी मित्र, कभी मां, कभी बहन की तरह तो प्यार का घूंट पीकर रह जाता …. (इन दिनों : 2002) कुंवर नारायण की कविताएं अपने समय से संवाद थीं. उनमें अस्तित्व की अनुगूंज है. उनकी चर्चित रचना आत्मजयी (1965) में वाजश्रवा और नचिकेता औपनिषदिक कथानक के ऊपर स्थापित दो ऐसे तनावग्रस्त चरित्र हैं जिनके तर्क,विषाद, प्रलोभन, इच्छा, कामना सब कुछ आज के पीड़ित और परेशान मनुष्य के जीवन के चित्र बन जाते हैं. उन्होंने खुद’आत्मजयी’की भूमिका में लिखा था- ‘आत्मजयी में उठाई गई समस्या मुख्यतः एक विचारशील व्यक्ति की समस्या है- केवल ऐसे प्राणी की नहीं जो दैनिक आवश्यकताओं के आगे नहीं सोचता.’ उनके लिए नचिकेता की कल्पना एक ऐसे मनुष्य की कल्पना है जिसके लिए, उन्हीं के शब्दों में- ‘केवल सुखी जीना काफी नहीं, सार्थक जीना जरूरी है.’ नचिकेता प्रलाप करता है- आह,तुम नहीं समझते पिता,नहीं समझना चाह रहे, कि एक-एक शील पाने के लिए कितनी महान आत्माओं ने कितना कष्ट सहा है… सत्य, जिसे हम सब इतनी आसानी से अपनी-अपनी तरफ मान लेते हैं, सदैव विद्रोही- सा रहा है. नचिकेता पिता से तर्क करता है. वह अपने लिए उनसे असहमति का अवसर मांगता है. ‘असहमति को अवसर दो सहिष्णुता को आचरण दो कि बुद्धि सिर ऊंचा रख सके.’ वह कहता है – ‘मैं जिन परिस्थितियों में जिंदा हूं उन्हें समझना चाहता हूं- वे उतनी ही नहीं जितनी संसार और स्वर्ग की कल्पना से बनती हैं क्योंकि व्यक्ति मरता है और अपनी मृत्यु में वह बिल्कुल अकेला है, विवश असांत्वनीय.’ नचिकेता की यम से मृत्यु को जानने की इच्छा वस्तुतः आधुनिक मनुष्य के चरम औत्सुक्य का विस्तार है. वह सब कुछ जानना चाहता है जो उसके जीवन-परिवेश को निर्धारित करती है. नचिकेता विद्रोही है क्योंकि उसके सवाल’ तुम्हारी मान्यताओं का उल्लघंन करते हैं.’ इसलिए उनका ‘नचिकेता’ भी भटकता है और उनका ‘सरहपा’ भी. ‘अकेला कवि सरहपा भटकता है राज्ञी से श्रीपर्वत तक खोजता मुक्ति का अर्थ.’ उनका ‘अमीर खुसरो’ बादशाहों से ऊबकर ‘ग़यास’ से कहता है- हां गयास ऊब गया हूं इस शाही खेल तमाशे से यह तुग़लक़नामा-बस, अब और नहीं बाकी जिंदगी मुझे जीने दो… एक कवि के ख़यालात की तरह आज़ाद एक पद्मिनी के सौंदर्य की तरह स्वाभिमानी एक देवलरानी के प्यार की तरह मासूम एक गोपालनायक के संगीत की तरह उदात्त और एक निज़ामुद्दीन औलिया की तरह पाक. कुंवर नारायण खुद इसी तरह जिये और अमीर खुसरो की ही तरह ‘एक गीत गुनगुनाते हुए इतिहास की एक बहुत कठिन डगर से गुजर’ गए. धर्मेंद्र सिंह भारतीय पुलिस सेवा के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं… एनडीटीवी से साभार