दरिंदगी की सारी हद पार, 12 साल की दलित बच्ची का किया बलात्कार

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झालावाड़। भारत में दलित चेतना के नवउभार के बीच दलितों पर अत्याचार के आंकड़े भी भयावह तेजी से बढ़े हैं. बात सिर्फ प्रगति और जागरूकता की होती तो दलितों के खिलाफ हिंसा का ग्राफ कम होना चाहिए था, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है.

राजस्थान के झालावाड़ जिले में 12 वर्षीय एक दलित बच्ची का उसके पड़ोसी द्वारा कथित रूप  से अपहरण और बलात्कार किए जाने का मामला सामने आया है. खानपुर पुलिस थाने में उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह ने सोमवार को बताया कि छठी कक्षा की छात्रा खानपुर कस्बे के तैलियो का मोहल्ला की निवासी है. बच्ची जब रविवार को अपने घर के बाहर खेल रही थी, तभी विजय सिंह (22) ने उसका कथित अपहरण कर लिया. उन्होंने बताया कि आरोपी अपराध करने के बाद कस्बे से फरार हो गया.

अधिकारी ने बताया कि बच्ची के माता-पिता दिहाड़ी पर काम करने वाले श्रमिक हैं. वे काम पर गए थे इसलिए बच्ची उस समय अकेली थी. आरोपी जन्मदिन की एक पार्टी में ले जाने का बहाना बनाकर उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गया. उन्होंने बताया कि पीड़िता ने अपने माता-पिता को आप बीती सुनाई जिसके बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. अधिकारी ने बताया कि इस बीच पीड़िता और उसके माता पिता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जा रही खानपुर पुलिस थाने की पुलिस वैन सोमवार को पलट गई.

पुलिस अधीक्षक झालावाड़ आनंद शर्मा का कहना है कि पीडि़ता के थाने पहुंचते ही हैड कांस्टेबल ने रिपोर्ट लिखाने को कहा. लड़का पुलिस में कार्यरत लांगरी का पुत्र है. उसे गिरफ्तार कर लिया गया. वाहन चालक के शराब सेवन की बात सामने आई है. उसे लाइन हाजिर कर पुलिस उपअधीक्षक को जांच के आदेश दे दिए हैं. डयूटी अफसर पर भी कार्रवाई की जाएगी.

जिग्नेश मेवाणी ने भरा पर्चा, लड़ेंगे निर्दलीय चुनाव

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jignesh mewani

अहमदाबाद। दलित नेता और सामाजिक कार्याकर्ता जिग्नेश मेवाणी ने बनासकांठा जिले की वडगांव-11 सीट गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने इस सीट से अपना चुनावी पर्चा भी भर दिया है. वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. जिनेश ने ट्वीट कर कहा कि वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गुजरात के बनासकांठा जिले की वडगांव-11 सीट से गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. इससे पहले ऐसी अटकलें थीं कि वह अल्पेश ठाकोर की तरह ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं जिसे उन्होंने खारिज कर दिया था.

जिग्नेश ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैं वड़गांव 11 चुनावक्षेत्र से गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ूंगा. पिछले कुछ महीनों से, खास तौर पर चुनाव की घोषणा होने के बाद अनगिनत आंदोलनकारी साथियों का और युवा वर्ग का न केवल यह अनुरोध था बल्कि यह ख्वाहिश थी कि हम इस बार जमकर चुनाव लड़ें और भाजपा के सामने सड़कों के साथ-साथ चुनाव में भी मुकाबला करें.’

उन्होंने लिखा, ‘भाजपा हमारी परम शत्रु है, इसलिए भाजपा को छोड़कर कोई भी राजनीतिक दल (या निर्दलीय प्रत्याशी) हमारे सामने अपना उम्मीदवार खड़ा ना करे. यह हमारा अनुरोध है. लड़ाई सीधी हमारे और भाजपा के बीच में होने दें. पिछले 22 साल से गुजरात में जो तानाशाही चल रही है, उसके सामने ऊना से लेकर अब तक हमने जो संघर्ष किया है , जो माहौल बनाया है, उससे न केवल गुजरात लेकिन पूरे देश की जनता वाकिफ है.’

जिग्नेश ने कहा, ‘हम जिन मुद्दों को लेकर संघर्ष करते आए हैं और जिस ऊर्जा, प्रतिबद्धता और जोश के साथ अब तक सड़कों पर दलित-शोषित तबकों की आवाज़ बने हैं, उन्हीं मुद्दों की बात करने के लिए और इसी आवाज़ को बुलंद करते हुए गुजरात विधानसभा में भी जाएंगे. चुनाव जीतने के बाद जनता की लड़ाई को और भी तेज करेंगे. यह हमारा वादा है.’

1207 शिक्षा मित्रों को स्थाई नियुक्ति, बनेंगे सहायक अध्यापक

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने डीएलएड टीईटी पास 1207 समायोजित शिक्षा मित्रों को स्थाई नियुक्ति का तोहफा दिया है. कोर्ट ने शिक्षक बनने की योग्यता हासिल कर चुके शिक्षा मित्रों को स्थाई नियुक्ति दिए जाने का फैसला राज्य सरकार पर छोड़ा था. टीईटी उत्तीर्ण करने वालों के साथ ही बीटीसी और डीएलएड उत्तीर्ण कर चुके शिक्षा मित्र भी प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक बनेंगे. उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार सरकार ने शिक्षा मित्रों को पक्का किया है, जिससे स्थाई किए गए शिक्षा मित्रों में खुशी की लहर है.

31 मार्च 2015 से पहले नियुक्ति पाने वाले शिक्षा मित्र, जिन्होंने टीईटी नहीं किया है, उनके पास 31 मार्च 2019 तक निर्धारित योग्यता हासिल करने का मौका है. सचिव, विद्यालयी शिक्षा डॉक्टर भूपिंदर कौर औलख ने सोमवार को यह शासनादेश जारी किया. उन्होंने निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को औपबंधिक रूप से सहायक अध्यापक (प्राथमिक) के पद पर कार्यरत पात्र शिक्षकों को सहायक अध्यापक (प्राथमिक) के पद पर नियुक्ति के लिए अग्रेत्तर कार्रवाई करने के निर्देश दिए.

आदेश के अनुसार सचिव के अनुसार सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति पाने के वही शिक्षा मित्र पात्र होंगे, जिन्होंने उत्तराखंड प्रारंभिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली-2012 के प्रावधानों के अनुसार द्विवार्षिक बीटीसी अथवा डीएलएड योग्यता हासिल कर ली हो. साथ ही वे टीईटी प्रथम वर्ष उत्तीर्ण भी कर चुके हों. शिक्षकों को नियुक्ति देने के लिए राजकीय प्रारंभिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली-2012 में संशोधन किया जाएगा. शिक्षा निदेशक को इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार के इस नए आदेश से हजारों कार्यरत शिक्षा मित्रों को लाभ मिलेगा. प्रदेश में कुल 3652 शिक्षा मित्र कार्यरत हैं, जिनमें से 1207 टीईटी और सीटीईटी पास कर चुके हैं. वहीं, 2445 शिक्षा मित्र अभी स्थायी नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं हैं. उत्तराखंड टीईटी उत्तीर्ण प्राथमिक शिक्षक संगठन के अध्यक्ष सूर्य सिंह पंवार ने शासनादेश जारी होने पर सीएम त्रिवेंद्र रावत, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख और प्रांरभिक शिक्षा निदेशक राकेश कुंवर का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि 17 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद उन्हें सफलता मिली है. वर्षों से दुर्गम में सेवा दे रहे शिक्षकों में इससे नई ऊर्जा का संचार होगा.

कश्मीर में महेंद्र सिंह धोनी के सामने लगे अफरीदी के नारे

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श्रीनगर। भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी रविवार को जम्मू-कश्मीर के बारामूला स्थित कुंजर में चिनार क्रिकेट प्रीमियर लीग के चीफ गेस्ट बनकर पहुंचे. यह कार्यक्रम भारतीय सेना की तरफ से आयोजित कराया गया था. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान को देखने के लिए काफी लोग जुटे थे, लेकिन तभी वहां शाहिद अफरीदी के नारे लगने लगे.

धोनी सेना में आनरेरी लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर हैं. इस दौरान उन्हें एक अजीब स्थिति से गुजरना पड़ा जब उनको देखने उमड़ी ने अफरीदी -अफरीदी के नारे लगाए. शाहिद अफरीदी पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और कप्तान हैं और वह भारत में भी काफी लोकप्रिय हैं. कश्मीर के स्थानीय मीडिया में इस खबर को जोर-शोर से उठाया गया और घटना का विडियो वायरल हो गया है.

स्थानीय मीडिया में रिपोर्ट्स आने के बाद इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसी कार्यक्रम में धोनी ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट पर अपनी राय रखी थी. भारत-पाक सीरीज पर धोनी ने कहा, ‘भारत-पाकिस्तान सीरीज महज खेल नहीं है. यह इससे कहीं अधिक है. भारत सरकार को फैसला करना चाहिए कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट खेला जाए या नहीं क्योंकि इस मुद्दे पर भारत सरकार सही निर्णय करेगी.’

धोनी एक हफ्ते से कश्मीर में हैं. इस दौरान 22 नवंबर को वह श्रीनगर के एक स्कूल पहुंचे और बच्चों के साथ वक्त बिताया था. इसके बाद उन्होंने उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के उभरते क्रिकेटरों से मुलाकात कर उन्हें फिटनेस पर ध्यान देने की सलाह दी थी. इस टूर के दौरान धोनी ने कश्मीर की सुंदर नजारों की भी तारीफ की थी.

ज्योतिबा फुलेः वंचितों को शिक्षा का रास्ता दिखाने वाले महानायक

jyotiba phule

डॉ. अम्बेडकर ने बुद्ध तथा कबीर के बाद महामना फुले को अपना तीसरा गुरू माना है. महामना ज्योतिबा फुले ऐसे महान विचारक, समाज सेवी तथा क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे जिन्होंने भारतीय सामाजिक संरचना की जड़ता को ध्वस्त करने का काम किया. महिलाओं, दलितों एवं शूद्रों की अपमानजनक जीवन स्थिति में परिवर्तन लाने के लिए वे आजीवन संघर्षरत रहे. ज्योतिबा फुले का पूरा नाम जोतिराव गोविंदराव फुले था. उनका जन्‍म 11 अप्रैल 1827 को पुणे में महाराष्‍ट्र के एक माली परिवार में हुआ. ज्योतिबा को पढ़ने की ललक थी सो पिता ने उन्हें पाठशाला में भेजा था मगर सवर्णों के विरोध ने उन्‍हें स्‍कूल से वापिस बुलाने पर मजबूर कर दिया. शायद यही कसक रही कि उन्होंने वंचित वर्ग की भलाई के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया.

1 जनवरी, 1848 को उन्होंने पुणे में एक बालिका विद्यालय की स्थापना कर दी. 15 मई, 1848 को पुणे की अछूत बस्ती में अस्पृश्य लड़के-लड़कियों के लिए भारत के इतिहास में पहली बार विद्यालय की स्थापना की. थोड़े ही अन्तराल में उन्होंने पुणे और उसके पार्श्ववर्ती इलाकों में 18 स्कूल स्थापित कर डाले. चूंकि हिन्दू धर्मशास्त्रों में शुद्रातिशुद्रों और नारियों का शिक्षा-ग्रहण व शिक्षा-दान धर्मविरोधी आचरण के रूप में चिन्हित रहा है इसलिए फुले दंपति को शैक्षणिक गतिविधियों से दूर करने के लिए धर्म के ठेकेदारों ने जोरदार अभियान चलाया. उस स्कूल में पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक न मिलने पर ज्योतिबा फुले की पत्नी सावित्रीबाई फुले आगे आईं. इस दौरान उन्हें तमाम अन्य मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा लेकिन फुले दंपत्ति ने हार नहीं मानी. एक वक्त ऐसा भी आया जब फुले दंपत्ति ने 1849 में घर छोड़ देने का फैसला किया. निराश्रित फुले दंपति को पनाह दिया उस्मान शेख ने. फुले ने अपने कारवां में शेख साहब की बीवी फातिमा को भी शामिल कर अध्यापन का प्रशिक्षण दिलाया. फिर अस्पृश्यों के एक स्कूल में अध्यापन का दायित्व सौंपकर फातिमा शेख को उन्नीसवीं सदी की पहली मुस्लिम शिक्षिका बनने का अवसर मुहैया कराया. सामाजिक बहिष्‍कार का जवाब महात्‍मा फुले ने 1851 में दो और स्‍कूल खोलकर दिया. सन् 1855 में उन्होंने पुणे में भारत की प्रथम रात्रि प्रौढ़शाला और 1852 में मराठी पुस्तकों के प्रथम पुस्तकालय की स्थापना की. यही वजह है कि बहुजन समाज 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का विरोध करता रहा है और रुढ़िवादियों को चुनौती देकर वंचित तबके के लिए पहला स्कूल खोलने वाले ज्योतिबा फुले और प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के सम्मान में ‘शिक्षक दिवस’ की मांग करता रहा है.

नारी–शिक्षा, अतिशूद्रों की शिक्षा के अतिरिक्त समाज में और कई वीभत्स समस्याएं थीं जिनके खिलाफ पुणे के हिन्दू कट्टरपंथियों के डर से किसी ने अभियान चलाने की पहलकदमी नहीं की थी. लेकिन फुले थे सिंह पुरुष और उनका संकल्प था समाज को कुसंस्कार व शोषणमुक्त करना. लिहाजा ब्राह्मण विधवाओं के मुंडन को रोकने के लिए नाइयों को संगठित करना, विश्वासघात की शिकार विधवाओं की गुप्त व सुरक्षित प्रसूति, उनके अवैध माने जानेवाले बच्चों के लालन–पालन की व्यवस्था, विधवाओं के पुनर्विवाह की वकालत, सती तथा देवदासी-प्रथा का विरोध भी फुले दंपति ने बढ़-चढ़कर किया.

फुले ने अपनी गतिविधियों को यहीं तक सीमित न कर किसानों, मिल-मजदूरों, कृषि-मजदूरों के कल्याण तक भी प्रसारित किया. इन कार्यों के मध्य उन्होंने अस्पृश्यों की शिक्षा के प्रति उदासीनता बरतने पर 19 अक्तूबर, 1882 को हंटर आयोग के समक्ष जो प्रतिवेदन रखा, उसे भी नहीं भुलाया जा सकता. अपने उद्देश्य को संस्थागत रूप देने के लिए ज्योतिबा फुले ने सन 1873 में महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया. उनकी छोटी-बड़ी कई रचनाओं के मध्य जो सर्वाधिक चर्चित हुईं वे थीं- ब्राह्मणों की चालाकी, किसान का कोड़ा और ‘गुलामगिरी’. इनमें 1 जून, 1873 को प्रकाशित गुलामगिरी का प्रभाव तो युगांतरकारी रहा.

मुम्‍बई सरकार के अभिलेखों में भी ज्योतिबा फुले द्वारा पुणे एवं उसके आस-पास के क्षेत्रों में शुद्र बालक-बालिकाओं के लिए कुल 18 स्‍कूल खोले जाने का उल्‍लेख मिलता है. समाज सुधारों के लिए पुणे महाविद्यालय के प्राचार्य ने अंग्रेज सरकार के निर्देश पर उन्‍हें पुरस्‍कृत किया और वे चर्चा में आए. 28 नवम्बर 1890 को उनका महापरिनिर्वाण हो गया. बहुजन समाज महात्मा ज्योतिबा फुले को ‘राष्ट्रपिता’ का दर्जा देता है. – राजकुमार

AIIMS ने निकाली कई पदों पर वैकेंसी, जल्द करें अप्लाई

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने ‘Junior Residents (Non-Academic)’ पदों पर भर्ती निकाली है. इन पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 9 दिसंबर, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई हैं.

संस्थान का नाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)

पद का नाम Junior Residents (non Academic)

पद की संख्या नोटिफिकेशन के अनुसार डिप्टी मैनेजर के 194 पदों पर भर्तियां होनी है.

योग्यता इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से MBBS/BDS की डिग्री ली होनी आवश्यक है.

सैलरी 15,600 से 56,100 रुपये.

अंतिम तिथि 09 दिसंबर 2017

कैसे करें आवेदन आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) की आधिकारिक वेबसाइट aiims.ac.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

यूपी पुलिस ने 8 गधों को 4 दिन बाद किया जेल से रिहा

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जालौन। आपने इंसानों को जेल से छूटकर निकलते हुए जरूर देखा या सुना होगा. लेकिन आपने गधों को जेल से छूटते हुए नहीं देखा होगा. ऐसी ही एक घटना उत्तर प्रदेश के जालौन में घटी है. गधों का आरोप बस इतना था कि गधों ने जेल के बाहर लगे पेड़ पौधों और जेल स्टाफ की कॉलोनी के बाग को चर लिया था. बाग में चरना आठ गधों को महंगा पड़ गया. जेल स्टाफ ने गधों को कैद कर बच्चा जेल में बंद कर दिया. पुलिस ने इन गधों को 4 दिन बाद रिहा किया.

जानकारी के मुताबिक जेल अधिकारियों ने गधे के मालिक को कई बार मना किया था वो अपने गधे इदर ना छोड़े. जेल पुलिस ने सबक सिखाने के लिए चार दिन के लिए गधों को जेल में बंद कर दिया. गधों की रिहाई भी इतनी आसानी से नहीं हुई, गधे के मालिक ने पहले तो जेलर से गुहार लगाई. इसके बाद स्थानीय बीजेपी नेता शक्ति गहोई से कहलवाने के बाद ही गधों को आजादी मिली.

इस पूरे मामले पर जेलर का कहना है कि पचास-साठ हजार रुपये खर्च करके पौधे लगवाए गए हैं, गधों को ना तो अरेस्ट किया जा सकता है और ना ही एडजस्ट किया जा सकता है. गधों के मालिकों को बुलाकर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया.

सलमान खान की ‘रेस 3’ में दिख सकती हैं सपना चौधरी

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नई दिल्ली। बिग बॉस ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कई लोगों की जिंदगी बदल चुका है. अपने करियर में अस्त हो चुके लोगों की जिंदगी बदल गई तो कई नए लोग आए और उन्हें काम मिला. इस बात को जिक्र खुद सलमान खान भी इस बार वीकेंड का वार में कर चुके हैं. फिर कॉमनर्स के लिए बिग बॉस में आकर अपनी पहचान कायम करना एक बहुत बड़ा मौका होता है. शायद सपना चौधरी भी इस बात को जानती हैं और तभी तो उन्होंने माना है कि इस शो के बाद वे अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करना चाहती हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने की भी इच्छा जताई है.

लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह कि सपना चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि वे फिल्मों में काम करना चाहती हैं और सलमान खान की फिल्म में डांस नंबर करना उनकी हसरत है. चलिए अच्छा है जो उन्होंने अपनी हसरत जता दी है, सलमान खान सबकी सुनते हैं. लेकिन सलमान खान सपना के बिहेवियर से थोड़ा उखड़े हुए थे.

फ्लिपकार्ट के फाउंडर्स पर लगा 9.96 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप

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धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के फाउंडर्स और कंपनी के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. बेंगलुरू के एक बिजनसमैन ने फ्लिपकार्ट पर 9.96 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है.

इंदिरा नगर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने कहा कि यह मामला लैपटॉप्स की सप्लाई के बदले फ्लिपकार्ट द्वारा सी-स्टोर कंपनी को बकाये का भुगतान नहीं करने से जुड़ा है. इस मामले में फ्लिपकार्ट के सचिन बंसल, बिनी बंसल और कंपनी के दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

पुलिस ने कहा कि शिकायत के मुताबिक सी-स्टोर का अन्य इलेक्ट्रॉनिक गुड्स सहित लैपटॉप्स की बिक्री के लिए फ्लिपकार्ट के साथ कॉन्ट्रैक्ट था और उसने लगभग 14 हजार लैपटॉप्स की सप्लाई की थी. शिकायतकर्ता ने कहा कि उसके 1480 यूनिट्स लौटा दिए गए, जबकि बाकी का कोई भुगतान नहीं किया गया. इसके अलावा शिपिंग सहित अन्य चार्जेस का भुगतान भी नहीं किया गया.

पटना हॉफ मैराथन में दौड़ेंगे ओलंपियन एथलीट मिल्खा सिंह

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पटना। पटना हाफ मैराथन में ओलंपियन एथलीट मिल्खा सिंह भी दौड़ेंगे. 17 दिसंबर को होने वाली रन फॉर बिहार थीम पर पटना हॉफ मैराथन में देश के कई हिस्सों से धावक आ रहे हैं. जीविका के निदेशक डी बाला मुरूगन 21 किमी तो पटना प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर चार किमी दौड़ लगाएंगे.

कई और अधिकारी भी मैराथन में भाग लेंगे. मैराथन के लिए बिहार सहित दूसरे राज्यों के 600 से अधिक लोग निबंधन करा चुके हैं. अगले वर्ष फुल मैराथन का आयोजन होगा. प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर ने बताया कि पटना हॉफ मैराथन के लिए फ्लैग ऑफ दौड़ का आगाज 29 नवंबर को ज्ञान की स्थली नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर से होगा. 101 किमी दूरी तय करते हुए 30 नवंबर को शाम चार बजे गांधी मैदान पहुंचेंगे.

पटना मैराथन में भाग लेने के लिए निबंधन 10 दिसंबर तक कराया जा सकता है. तीन तरह की दौड़ होगी. हाफ मैराथन 21.1 किमी की होगी. सुबह 6.45 बजे गांधी मैदान से दौड़ शुरू होगी. सुबह 8.15 बजे 10 किमी लंबी और सुबह नौ बजे चार किमी के लिए दौड़ होगी. तीनों स्तर के दौड़ में देश और विदेश के प्रतिभागी भाग लेने जा रहे हैं. आयुक्त ने कहा कि उम्र के हिसाब से 10 केटेगरी में दौड़ को बांटा गया है. महिलाएं भी इसमें शामिल होंगी. पहला निबंधन दानापुर की प्रियंका कुमारी कराया है. 10 लाख रुपये का पुरस्कार 126 प्रतिभागियों के बीच वितरित होगा. पहला पुरस्कार 40 हजार, दूसरा 20 हजार तथा तीसरा पुरस्कार 15 हजार मिलेगा. इसके साथ अन्य श्रेणी में प्रथम 20 हजार, द्वितीय 10 हजार और तृतीय पांच हजार रुपये मिलेगा.

मैराथन के दौरान जगह-जगह नुक्कड़ नाटक और मनोरंजन के साधन उपलब्ध रहेंगे. शराबबंदी, दहेजप्रथा, बाल विवाह, नुक्कड़ नाटक, गीत एवं पोस्टर के माध्यम से सामाजिक सरोकार के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा. पटना मैराथन के एक दिन पहले एक्सपो में सभी प्रतिभागियों को टी-शर्ट और बैग दिया जाएगा. पटना मैराथन के लिए ऑफ लाइन निबंधन बोरिंग रोड और राजेंद्र नगर स्थित गोल्ड जिम में हो रहा है. आवदेक ऑनलाइन निबंधन करा सकते हैं.

  •  दिसंबर को रन फॉर बिहार थीम पर होगी मैराथन
  •  किमी दौड़ेंगे जीविका निदेशक, चार किमी आयुक्त
  • नवंबर को पटना हॉफ मैराथन के लिए फ्लैग ऑफ दौड़
  •  विजेताओं के बीच वितरित होगा दस लाख का पुरस्कार

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर कम करेगा है EPFO

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नई दिल्ली। कर्मचारी ​भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भविष्य निधि (पीएफ) जमाओं पर ब्याज दर को घटा सकता है. ईपीएफओ ने 2016-17 में अपने 4.5 करोड़ अंशधारकों को 8.65 प्रतिशत ब्याज दिया.

श्रम मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ईपीएफओ ब्याज दर घटा सकता है. उन्होंने कहा, ‘बांडों पर निम्न आय तथा ईटीएफ निवेश सीधे अंशधारकों के खातों में डालने की योजना के मद्देनजर ईपीएफओ 2017-18 के लिए भविष्य निधि जमाओं पर रिटर्न की दर में कटौती कर सकता है.’

अधिकारी के अनुसार हालांकि ईपीएफओ को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए आय अनुमानों को गणना अभी करनी है. इसी के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अंशधारकों के खाते में डाले जाने वाले ब्याज का फैसला होगा.

पद्मावती विवादः राजपूतों के समर्थन में आया खाप

संजयलीला भंसाली द्वारा निर्मित फिल्म पद्मावती में दिखाए गए आपत्तिजनक दृश्यों फिल्म रिलीज नहीं करने की मांग को लेकर सोमवार को राजपूत समाज क्षेत्र की खापों सामाजिक संगठनों ने विरोध जताते हुए प्रदशर्न किया साथ ही लघु सचिवालय पहुंचकर डीसी विजय कुमार सिद्दप्पा को ज्ञापन सौंपा प्रदर्शन की अगुवाई पंवार खाप नेता सतेंद्र परमार कर रहे थे.

सोमवार सुबह पंवार खाप नेता सतेंद्र परमार की अगुवाई में सर्वप्रथम पंवार खाप 32 सर्वजातिय के बैनर तले विभिन्न खापों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य एवं मौजिज व्यक्ति रोज गार्डन में एकत्रित हुए. यहां मौजूद विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि फिल्म की कहानी में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने पैसे कमाने के उद्देश्य ये राजपूत इतिहास ही नहीं अपितु पूरे हिंदू समाज के इतिहास को नीचा दिखाने का दुस्साहस किया है. पद्मावती का जौहर केवल राजपूत इतिहास के सम्मान की बात नहीं है ये तो भारतवर्ष के नारी मान की बात है.

फिल्म की कहानी के अनुसार जो कुछ रानी पद्मावती के बारे में दिखाया गया है वह पूरी तरह से सरासर झूठ है, क्योंकि कभी भी राजपूत रानियों ने नाच गाना नहीं किया.

कॉल सेंटर्स में काम करने वाले हो रहे हैं नस्लभेद का शिकारः रिसर्च

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नई दिल्ली। भारत को भले ही कॉल सेंटर्स का हब माना जाने लगा हो, लेकिन देश-विदेश को सर्विस उपलब्ध करा रहे बीपीओ कर्मचारी खासे तनाव में रहते हैं. विदेश से आने वाली कॉल्स पर उन्हें नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है. अमेरिका जैसे देशों के लोग उन्हें ‘जॉब चोर’ तक कह देते हैं.

‘बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग (बीपीओ) सेंटर्स इन इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइंट से बात करते हुए कर्मचारियों को नस्लवादी गालियां सुननी पड़ती हैं, जो तनाव का कारण बनती हैं. इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ केंट की श्वेता राजन ने यह रिपोर्ट तैयार की है. वह बताती हैं, ‘यह मंदी के बाद की सच्चाई है. पश्चिमी देशों के क्लाइंट्स का स्वभाव कॉल सेंटर्स वालों के लिए काफी रूखा होता है. यदि उन्हें लगता है कि कॉलर भारतीय है तो उनका सबसे बड़ा डर यह होता है कि ये लोग उनकी नौकरी चुरा रहे हैं और सारी चीजें आउटसोर्स हो रही हैं.’

एक कॉल सेंटर वर्कर ने बताया, ‘अपशब्द यह रोज की बात है, दिन में एक या दो बार. कॉल के बीच में कोई क्लाइंट कहता है, यू इंडियंस!’ रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने भी बीपीओ कर्मचारियों को प्रभावित किया है. श्वेता का कहना है कि ब्रेग्जिट और अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेदी टिप्पणियां बढ़ गई हैं.

90 के दशक में जब विदेशी कंपनियां भारत आई थीं, तब उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि कॉलर्स को पता न चल पाए कि उनकी मदद करने वाला कोई भारतीय है. इसका एक कारण यह भी था कि लोग विदेश में बैठे किसी व्यक्ति से मदद लेने के बजाय उनके देश के व्यक्ति से प्रोडक्ट या सर्विस पर मदद लेना चाहेंगे. 90 के दशक में भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका तक भेजा गया, ताकि वे वहां बात करने के तौर-तरीके सीख जाएं.

टेस्ट इतिहास की 100वीं हार श्रीलंका के लिए बनी सबसे बड़ी हार

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नागपुर। श्रीलंका के लिए उसके टेस्ट इतिहास की 100वीं हार सबसे बड़ी टेस्ट हार बन गई. श्रीलंका को कल भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में पारी और 239 रन से हार का सामना करना पड़ा जो उसकी 266 टेस्टों में 100वीं हार है.

श्रीलंका के टेस्ट इतिहास की यह सबसे बड़ी हार है. श्रीलंका इससे पहले 2001 में केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पारी और 229 रन से हारा था. श्रीलंका की 2017 में यह 7वीं टेस्ट हार है और उन्होंने इस तरह एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक पराजय के अपने रिकार्ड की बराबरी भी कर ली है.

श्रीलंका ने 2015 में 7 टेस्ट गंवाए थे. इस साल 7 पराजयों में श्रीलंका ने 4 पारी से गंवाये हैं और 2 मैचों में उसे 280 रन से ज्यादा की हार मिली है. श्रीलंका 2017 में कुल 35 मैच गंवा चुका है जो उसके पिछले सबसे खराब प्रदर्शन से 10 हार अधिक है. श्रीलंका भारत में 19 टेस्टों में 11 हार चुका है और उनमें से 9 में उसे पारी की हार मिली है.

GST में बदलाव से 10 हजार करोड़ का घाटा

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GST के टैक्स स्लैब में बदलाव करने से सरकारी खजाने की सेहत पर पड़ी है. जीएसटी में संशोधन के चलते पिछले महीने के मुकाबले इस बार सरकारी राजस्व को 10 हजार करोड़ का घाटा हुआ है. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि 27 नवंबर तक फाइल किए गए रिटर्न्स से सरकार को 83,346 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है. यह राशि अक्टूबर में 95,131 करोड़ जबकि सितंबर में 93,141 करोड़ रुपये थी.

टैक्स कलेक्शन में आई यह कमी जीएसटी के स्लैब में परिवर्तन के चलते हुआ है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक जीएसटी के अंतर्गत अब तक 95.9 लाख टैक्सपेयर्स रजिस्टर हो चुके हैं. इनमें से 15.1 लाख कम्पोजिशन डीलर्स हैं, जिन्हें हर तिमाही में रिटर्न फाइल करने होते हैं. अक्टूबर से 26 नवंबर तक 50.1 लाख जीएसटी रिटर्न्स फाइल हुए हैं.

केंद्र ने राज्यों को जुलाई और अगस्त महीने के लिए 10,806 करोड़ रुपये का मुआवजा भी जारी किया है. इसके अलावा राज्यों को सितंबर और अक्टूबर महीने के लिए 13,695 करोड़ रुपये कंपोजिशन के तौर पर जारी किए गए हैं. जीएसटी लागू होने के बाद यह चौथा महीना है. जीएसटी के अंतर्गत रेवन्यू में गिरावट को समझाते हुए मंत्रालय ने बताया कि शुरुआत में इंटीग्रेटेड जीएसटी गुड्स के एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने पर लिया जाता था. गौरतलब है कि जुलाई में सरकार को 95000 करोड़, जबकि अगस्त में 91000 करोड़ और सितंबर में 92150 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था.

राजस्व संग्रह में आई गिरावट के पीछे जीएसटी दर में कमी को मुख्य वजह बताया गया है. इसके अलावा कर प्रशासन इस समय कारोबारियों की स्व:घोषणा के आधार पर ही कर प्राप्ति कर रहा है. रिटर्न का मिलान, इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट प्रणाली यानी ई-वे बिल और प्रतिकूल शुल्क वसूली जैसे कई प्रावधानों को आगे के लिये टाल दिया गया है. इसके अलावा जीएसटी लागू होने के शुरुआती तीन माह में एकीकृत जीएसटी यानी आईजीएसटी के रूप में अतिरिक्त कर वसूली हुई थी. आईजीएसटी के रूप में दिये गये कर को अब माल की अंतिम बिक्री होने पर उसका क्रेडिट लिया गया है. इससे भी कर वसूली में कम रही है.

जीएसटी लागू होने के बाद अब तक शुरुआती जीएसटीआर-3बी जुलाई में 58.7 लाख, अगस्त में 58.9 लाख, सितंबर में 57.3 लाख और अक्तूबर में 50.1 लाख दर्ज किये गये हैं.

जीएसटी परिषद ने 10 नवंबर को आम इस्तेमाल वाली 177 वस्तुओं पर कर दर को मौजूदा 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था. 28 प्रतिशत के सर्वाधिक कर दर वाले स्लैब में वस्तुओं की संख्या को घटाकर सिर्फ 50 कर दिया जो कि पहले 227 थी. देश में जुलाई 2017 से जीएसटी के तहत 1200 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत कर की श्रेणी में लाया गया था.

शिल्पा शिंदे के बाद अब नई ‘भाबीजी’ शुभांगी अत्रे भी छोड़ सकती हैं शो

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&टीवी के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘भाबीजी घर पर हैं!’ के फैंस को एक बार फिर से तगड़ा झटका लग सकता है. शिल्पा शिंदे के बाद एक बार फिर से शुभांगी अत्रे भी शो को अलविदा कह सकती हैं. इसके बाद फिर शो के फैंस को नई ‘अंगूरी भाभी’ देखने को मिल सकती हैं.

बॉलीवुड लाइफ की रिपोर्ट के मुताबिक शिल्पा शिंदे के बाद अब शुभांगी अत्रे ने भी शो छोड़ने का मन बना लिया है. बताया तो ये भी जा रहा है कि शो के मेकर्स अब नई ‘अंगूरी भाभी’ की तलाश में जुट गए हैं. अगर आपको लग रहा है कि शिल्पा की ही तरह शुभांगी का भी शो के मेकर्स के साथ झगड़ा हो गया है और इसीलिए वो शो छोड़ने वाली हैं. तो ऐसा नहीं है. बल्कि वजह तो कुछ और ही है. खबर है कि शुभांगी ने राजनीति में आने का फैसला किया है जिसकी वजह से वह शो छोड़ना चाहती हैं.

हाल ही में शुभांगी उत्तरप्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव ‘बीजेपी’ के लिए प्रचार करके आई हैं. जहां पर उनसे राजनीति में आने का सवाल किया गया. इसपर उन्होंने कहा, मैं पॉलिटिक्स में आने को लेकर कंफ्यूज हूं. लेकिन मुझे लगता है हमारे जैसे युवाओं के लिए यह एक अच्छा मौका है. बदलाव के लिए इन दिनों युवा राजनीति में आने लगे हैं क्योंकि कुछ भी असंभव नहीं है. फिलहाल शुभांगी राजनीति में आने को लेकर स्पष्ट तो नहीं हैं. लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं अगर एक्ट्रेस को मौका मिला तो वह जरूर इस अवसर को भुनाना चाहेंगी. इसलिए अगर फैंस को टीवी पर नई भाबीजी दिखे तो उन्हें अचंभित नहीं होना चाहिए.

आपको बता दें कि बहुत जल्द ‘भाबी जी..’ में आपको चुनाव वाला ट्विस्ट दिखाई देने वाला है जिसमें अनीता और अंगूरी भाभी चुनाव में खड़ी हुई दिखाई देंगी और जनता से अपने लिए वोट मांग रही होंगी. ये खबर शो के प्रमोशन का भी एक हिस्सा हो सकता है. बहरहाल अगर शुभांगी शो छोड़ कर जाती हैं तो उनके फैंस काफी निराश हो जाएंगे.

आयकर के पूरे आंकलन के आधार पर होगी कार्यवाही

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद भारी मात्रा में नकदी बैंक खातों में जमा करने वालों के खिलाफ आयकर विभाग अगले साल जनवरी से समग्र आकलन कार्यवाही शुरू करेगा. इसके दायरे में ऐसे असेसी खासतौर पर आएंगे, जिन्होंने बैंकों में बड़े पैमाने पर पुराने नोट जमा किए हैं, मगर अब तक कोई आयकर रिटर्न नहीं भरा है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर अधिकारियों को ऐसे लोगों या फर्मो को नोटिस भेजने का काम 31 दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया है. सीबीडीटी विभाग का नीति निर्धारक निकाय है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयकर विभाग भेजी गई नोटिस का असेसी से जवाब मिलने के बाद पूर्ण आकलन की कार्यवाही शुरू कर देगा. कुछ मामलों में नोटिस का जवाब मिल गया है. ऐसे असेसी के जवाबों का विश्लेषण किया जा रहा है. जिन लोगों ने अपने काले धन को सफेद के रूप में दिखाने की कोशिश की है और इस तरह टैक्स चोरी को अंजाम दिया है, उन पर मुकदमा चलाया जाएगा. यह कार्रवाई ऑपरेशन क्लीन मनी का हिस्सा है. विभाग ने यह ऑपरेशन इस साल की शुरुआत में चालू किया था. इसका मकसद नोटबंदी के बीच काले धन के मामलों का पता लगाना था.

विभाग ने इस ऑपरेशन के पहले चरण के दौरान मिले डाटा और जानकारी के आधार पर लोगों का ऑनलाइन सत्यापन किया. इसके बाद करीब 18 लाख ऐसे असेसी की एक सूची बनाई, जिन्होंने अपने बैंक खातों में बीते साल आठ नवंबर से 30 दिसंबर के बीच भारी मात्रा में पुराने नोट जमा किए थे. खास बात यह है कि सूची में वही लोग शामिल किए गए जिन्होंने आकलन वर्ष 2017-18 के लिए अब तक कोई आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है.

ज्योतिबा फुले-बाबासाहेब में एक समानता और प्रवाह

phule-ambedkar

ज्योतिबा फुले और अम्बेडकर का जीवन और कर्तव्य बहुत ही बारीकी से समझे जाने योग्य है. आज जिस तरह की परिस्थितियां हैं, उनमें ये आवश्यकता और अधिक मुखर और बहुरंगी बन पडी है. दलित आन्दोलन या दलित अस्मिता को स्थापित करने के विचार में एक “क्रोनोलाजिकल” प्रवृत्ति है. समय के क्रम में उसमें एक से दूसरे पायदान तक विकसित होने का एक पैटर्न है और एक सोपान से दूसरे सोपान में प्रवेश करने के अपने कारण हैं. ये कारण सावधानी से समझे और समझाये जा सकते हैं.

अधिक विस्तार में न जाकर ज्योतिबा फुले और अम्बेडकर के उठाये कदमों को एकसाथ रखकर देखें. दोनों में एक जैसी त्वरितता और स्पष्टता है. समय और परिस्थिति के अनुकूल दलित समाज के मनोविज्ञान को पढ़ने, गढ़ने और एक सामूहिक शुभ की दिशा में उसे प्रवृत्त करने की दोनों में मजबूत तैयारी दिखती है. चूंकि, कालक्रम में उनकी स्थितियां और उनसे अपेक्षाएं भिन्न है, इसलिए एक ही ध्येय की प्राप्ति के लिए गए उनके कदमों में समानता होते हुए भी कुछ विशिष्ट अंतर भी नजर आते हैं.

ज्योतिबा के समय में जब कि शिक्षा दलितों के लिए एक दुर्लभ आकाशकुसुम था और शोषण के हथियार के रूप में निरक्षरता और अंधविश्वास जैसे “भोले-भाले” कारणों को ही मुख्य कारण माना जा सकता था– ऐसे वातावरण में शिक्षा और कुरीति निवारण –इन दोनों उपायों पर पूरी ऊर्जा लगा देना आसान था. न केवल आसान था बल्कि यही संभव भी था और यही ज्योतिबा ने अपने जीवन में किया भी. क्रान्ति-दृष्टाओं की नैदानिक दूरदृष्टि और चिकित्सा कौशल की सफलता का निर्धारण भी समय और परिस्थितियां ही करती हैं.

इस विवशता से इतिहास का कोई क्रांतिकारी या महापुरुष कभी नहीं बच सका है. ज्योतिबा और उनके स्वाभाविक उत्तराधिकारी अम्बेडकर के कर्तव्य में जो भेद हैं, उन्हें भी इस विवशता के आलोक में देखना उपयोगी है. इसलिए नहीं कि एक बार बन चुके इतिहास में अतीत से भविष्य की ओर चुने गये मार्ग को हम इस भांति पहचान सकेंगे, बल्कि इसलिए भी कि अभी के जाग्रत वर्तमान से भविष्य की ओर जाने वाले मार्ग के लिए पाथ्य भी हमें इसी से मिलेगा.

ज्योतिबा के समय की “चुनौती” और अम्बेडकर के समय के “अवसर” को तत्कालीन दलित समाज की उभर रही चेतना और समसामयिक जगत में उभर रहे अवसरों और चुनौतियों की युति से जोड़कर देखना होगा. जहां ज्योतिबा एक पगडंडी बनाते हैं उसी को अम्बेडकर एक राजमार्ग में बदलकर न केवल यात्रा की दशा बदलते हैं बल्कि गंतव्य की दिशा भी बदल देते हैं. नए लक्ष्य के परिभाषण के लिए अम्बेडकर न केवल मार्ग और लक्ष्य की पुनर्रचना करते हैं, बल्कि अतीत में खो गए अन्य मार्गों और लक्ष्यों का भी पुनरुद्धार करते चलते हैं. फुले में जो शुरुआती लहर है वो अम्बेडकर में प्रौढ़ सुनामी बनकर सामने आती है. एक नैतिक आग्रह और सुधार से आरम्भ हुआ सिलसिला किसी खो गए सुनहरे अतीत को भविष्य में प्रक्षेपित करने लगता है. आगे यही प्रक्षेपण अतीत में छीन लिए गए “अधिकार” को फिर से पाने की सामूहिक प्यास में बदल जाता है.

इस यात्रा में पहला हिस्सा जो शिक्षा, साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जन्माने जैसे नितांत निजी गुणों के परिष्कार में ले जाता था. वहीं, दूसरा हिस्सा अधिकार, समानता और आत्मसम्मान जैसे कहीं अधिक व्यापक, इतिहास सिद्ध और वैश्विक विचारों के समर्थन में कहीं अधिक निर्णायक जन-संगठन में ले जाता है. इतना ही नहीं, इसके साधन और परिणाम स्वरूप राजनीतिक उपायों की खोज, निर्माण और पालन भी आरम्भ हो जाता है.

यह नया विकास स्वतंत्रता के बाद की राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीति में बहुतेरी नई प्रवृत्तियों को जन्म देता है. जो समाज हजारों साल से निचली जातियों को अछूत समझता आया था, उसकी राजनीतिक रणनीति में जाति का समीकरण सर्वाधिक पवित्र साध्य बन गया. ये ज्योतिबा और आम्बेडकर का किया हुआ चमत्कार है, जिसकी भारत जैसे रुढ़िवादी समाज ने कभी कल्पना भी न की थी. यहां न केवल एक रेखीय क्रम में अधिकारों की मांग बढ़ती जाती है बल्कि उन्हें अपने दम पर हासिल करने की क्षमता भी बढ़ती जाती है.

इसके साथ-साथ इतिहास और धार्मिक ग्रंथों के अंधेरे और सड़ांध भरे तलघरों में घुसकर शोषण और दमन की यांत्रिकी को बेनकाब करने का विज्ञान भी विकसित होता जाता है. ये बहुआयामी प्रवृत्तियां जहां एक साथ एक ही समय में इतनी दिशाओं से आक्रमण करती हैं कि शोषक और रुढ़िवादी वर्ग इससे हताश होकर “आत्मरक्षण” की आक्रामक मुद्रा में आ जाता है. एक विस्मृत और शोषित अतीत की राख से उभरकर भविष्य के लिए सम्मान और समानता का दावा करती हुई ये दलित चेतना इस पृष्ठभूमि में लगातार आगे बढ़ती जाती है.

-संजय जोठे

M.A. Development Studies, 
IDS, University of Sussex U.K.
PhD. Scholar, School of Habitat Studies
Tata Institute of Social Sciences (TISS)
Mumbai, India 

सायना के वारियर्स भिड़ेंगे सिंधू के स्मैशर्स से

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नई दिल्ली। प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के तीसरे संस्करण के उद्घाटन मुकाबले में 23 दिसंबर को पीवी सिंधू के चेन्नई स्मैशर्स का मुकाबला सायना नेहवाल के अवध वारियर्स से होगा.

टूर्नामेंट का पहला चरण नार्थ-ईस्टर्न वारियर्स के घरेलू मैदान गुवाहाटी में खेला जाएगा जो दूसरे दिन कैरोलिना मारिन के हैदराबाद हंटर्स से मुकाबला करेंगे. गुवाहाटी चरण 26 दिसंबर तक चलेगा. इसके बाद दिल्ली, लखनऊ और चेन्नई में अगले चरण खेले जाएंगे. अंतिम चरण और सेमीफाइनल तथा फाइनल हैदराबाद में होंगेे.

23 दिन की इस लीग का समापन 14 जनवरी को हैदराबाद में फाइनल के साथ होगा. टूर्नामेंट के सेमीफाइनल 12 और 13 जनवरी को होंगे.