नई दिल्ली। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के 61वें परिनिर्वाण दिवस पर देश-विदेश में मौजूद अम्बेडकरवादी उन्हें श्रद्धांजली देने की तैयारियों में जुटे हैं। देश भर में फैले अम्बेडकरवादी संगठन भी परिनिर्वाण दिवस मना रहे हैं। इस बीच बहुजन समाज पार्टी ने बाबासाहेब के परिनिर्वाण दिवस यानि 6 दिसंबर के दिन मंडल स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया है। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वो हर मंडल में एक स्थान पर इकट्ठा होकर बाबासाहेब का परिनिर्वाण दिन मनाएं। लखनऊ में भी परिनिर्वाण दिवस के आय़ोजन की तैयारी की जा रही है, हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि बसपा अध्यक्ष मायावती इसमें मौजूद रहेंगी की नहीं।
इसी तरह कनाडा और अमेरिका सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में मौजूद अम्बेडकरवादी संगठनों ने भी बाबासाहेब को श्रद्धांजली देने के लिए विशेष कार्यक्रम आय़ोजित किया है। बाबासाहेब का परिनिर्वाण 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली के 26 अलीपुर रोड स्थित उनके सरकारी आवास पर हो गया था। जिस रात को उनका निधन हुआ, उस रात ही उन्होंने अपनी महत्वकांक्षी पुस्तक “भगवान बुद्ध औऱ उनका धम्म” को समाप्त किया था।
बाबासाहेब की मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शरीर को मुंबई भेज दिया गया यहां दादर में 7 दिसंबर को बाबासाहेब का बौद्ध परंपरा से अंतिम संस्कार हुआ। बाबासाहेब की अंतिम संस्कार क्रिया भदन्त आनंद कौशल्यायन ने किया था। इस दौरान एक औऱ महत्वपूर्ण घटना घटी। बाबासाहेब के अंतिम संस्कार से पहले उन्हें साक्षी मान कर उनके 10 लाख अनुयायियों ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली। उन्हें बौद्ध दीक्षा भदन्त आन्नद कौशल्यायय ने दिलवाई। अम्बेडकरवादी इसी जगह को चैत्य भूमि कहते हैं। अम्बेडकरवादियों के लिए इस स्थान का विशेष महत्व है। आज भी हर 6 दिसंबर को अम्बेडकरवादी चैत्य भूमि पर जाकर बाबासाहेब को अपनी श्रद्धांजली देते हैं।
बाबासाहेब के परिनिर्वाण दिवस पर दुनिया भर के अम्बेडकरवादी देंगे श्रद्धांजली
नीतीश कुमार से न्याय चाहता है भागलपुर का दलित परिवार
पटना। परिवार के तीन सदस्यों की हत्या और बेटी के बलात्कार से सदमें में आया दलित परिवार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इंसाफ चाहता है। 25 नवंबर की रात भागलपुर जिले के बिहपुर के झंडापुर गांव में एक दलित परिवार के तीन सदस्यों की बर्बर हत्या कर दी गयी थी। उनकी आंखें निकाल दी गयीं और उनका गला रेत दिया गया। पत्नी मीना देवी का गला रेत दिया। 7वीं में पढ़ने वाली बेटी का सामूहिक बलात्कार किया। उसके सर पर मारा और मरा जानकर चले गए। लेकिन वह बच गई।
घटना के बाद लड़की कोमा में है। जाहिर है कि मां-बाप और भाई की हत्या और खुद का बलात्कार किए जाने के बाद उसने अचेत हो जाना बेहतर समझा होगा। अस्पताल के अधीक्षक के मुताबिक उसके सिर में गहरी चोट है, खून के थक्के जम गए हैं। अस्पताल में लड़की के साथ उसके डरे हुए रिश्तेदार हैं।
घटना किस वक्त हुई किसी को नहीं पता। परिवार के लोग किसी पुरानी रंजिश की बात से इंकार कर रहे हैं। लेकिन चर्चा है कि झंडापुर गांव में दलितों के 70 घरों के बीच कनिक राम थोड़ा सबल था। हाल ही में उसने मछली पालने का तालाब ठेके पर लिया था। हाल तक इस पर ऊंची जाति वालों का कब्जा रहा है और उन्हें एक दलित का तालाब का ठेका लेना खटक रहा था। परिवार मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहा है। लेकिन बिहार की भाजपा औऱ नीतीश कुमार के गठबंधन की सरकार फिलहाल पद्मावती की लाज बचाने में जुटी है।
मायावती के समर्थन में एकजुट होने लगे दलित और मुस्लिम
लखनऊ। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी ने जिस दलित-मुस्लिम गठबंधन के भरोसे सत्ता में आने की रणनीति तैयार की थी, वह एकजुट होने लगा है। निकाय चुनाव में और खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह दोनों तबका बसपा के समर्थन में पूरी तरह एकजुट दिखा। यही वजह है कि बसपा अलीगढ़ और मेरठ में मेयर सीट जीतने में कामयाब रही।
बीते दो चुनाव जिसमें 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 का विधानसभा चुनाव शामिल है, दलित भाजपा तो मुस्लिम सपा के पक्ष में दिखे थे। लेकिन दोनों दलों से छले जाने के बाद दलित और मुस्लिम अब बसपा के पक्ष में आ खड़े हुए हैं। निकाय चुनाव में दलितों ने पूरी तरह भाजपा से किनारा कर लिया है। निकाय चुनाव के नतीजों में ज्यादातर सीटों पर बीएसपी दूसरे नंबर पर रही और भाजपा को कड़ी टक्कर दी है। अब बदले हालात में सपा और भाजपा में साफ तौर पर बेचैनी की खबरें आ रही है। 14 मेयर सीटों पर कब्जे के साथ भाजपा भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, उसे पता है कि जमीन पर उसकी हालात खराब है।
यहां एक पहलू यह भी है कि विधानसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती दलित-मुस्लिम एकता की रणनीति के साथ काम कर रही थीं। तब तमाम विश्लेषक यह दावा कर रहे थे कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ के साथ बसपा यूपी की सत्ता में आ सकती है। लेकिन चुनाव के नतीजे बिल्कुल उल्टे रहे थे। मायावती ने इसका ठीकरा ईवीएम से हुए चुनाव पर फोड़ा था। निकाय चुनाव के नतीजों ने मायावती द्वारा ईवीएम पर उठाए गए सवाल को औऱ मजबूत किया है।मारुति के चार मॉडलों पर 40 हजार तक डिस्काउंट
मारुति सुजुकी अपने ग्राहकों के लिए अच्छी खबर लेकर आई है. मारुती अपने चार अलग-अलग मॉडल पर 40 हजार रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है. सूचना के मुताबिक यह छूट ऑल्टो 800 से लेकर डियर टूर तक पर है. हालांकि कंपनी ने अपनी नई गाड़ियों को डिस्काउंट से दूर ही रखा है.
किस पर कितना छूट अर्टिगा के डीजल वेरिएंट पर 40 हजार रुपये का डिस्काउंट बैगनआर पर 35 हजार का डिस्काउंट स्विफ्ट पर 30 हजार की छूट ऑल्टो 800 पर 35 हजार की छूट
जाहिर सी बात है कि कोई भी छूट ग्राहकों के लिए फायदे का सौदा होता है. ऑल्टो और वैगनआर मारुति की ऐसी गाड़ियां हैं, जो लगातार डिमांड में रहती हैं. इस डिस्काउंट से इसके खरीदादारों को बड़ा फायदा होगा.
25 लाख रोजगार और 25 लाख घर के वादे के साथ गुजरात कांग्रेस का मेनिफेस्टो जारी
अहमदाबाद। कांग्रेस पार्टी की गुजरात इकाई ने गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सोमवार को अपना मेनिफेस्टो जारी कर दिया है. पार्टी ने युवाओं को 25 लाख रोजगार और पांच सालों के भीतर 25 लाख घर देने का वादा किया है. बिजली में सुधार, किसानों की कर्जमाफी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती सहित ऐसे नौ मुद्दे हैं, जिस पर पार्टी का फोकस है.
कांग्रेस के घोषणापत्र में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की भी छाप दिख रही है. कांग्रेस ने इसमें पाटीदारों के लिए अलग कैटेगरी बनाने की बात कही है. कांग्रेस ने इसे “खुश रहे गुजरात, खुशहाल गुजरात” थीम पर जारी किया है. गुजरात में दो फेज 9 और 14 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे. रिजल्ट 18 दिसंबर को आएगा. हालांकि भाजपा ने अभी तक अपना घोषणापत्र जारी नहीं किया है. संभव है कि वह कांग्रेस के घोषणापत्र की राह देख रही हो और अब वह भी जल्दी ही कांग्रेस से ज्यादा लुभावने वादों के साथ अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर सकती है.
कांग्रेस के मेनिफेस्टो की 9 बड़े वादे 1) 25 लाख युवाओं को रोजगार 2) पेट्रोल-डीजल में 10 रुपए तक की कटौती की जाएगी। 3) किसानों को कर्ज माफी। 4) हेल्थ कॉर्ड दिया जाएगा, जिसके तहत फ्री दवाएं मुहैया कराई जाएंगी। 5) बिजली की दरों में 50% की कटौती की जाएगी। 6) 16 घंटे बिजली देने का वादा। 7) 5 सालों में 25 लाख घर देने का वादा। 8) बिजली चोरी के केस वापस लिए जाएंगे। 9) पाटीदारों के स्पेशल कैटेगरी बनाई जाएगी।
तू-तू मैं-मैं के बीच मायावती ने सीएम योगी को जमकर लताड़ा
लखनऊ। यूपी निकाय चुनाव में भाजपा के शहरों तक ही सिमट जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती और भाजपा नेता योगी के बीच जुबानी जंग जोरों पर है. चुनाव के रिजल्ट के बाद मायावती ने भाजपा को यह कह कर घेरा कि अगर बैलेट पेपर से चुनाव हुए होते तो भाजपा मेयर की सीटें भी नहीं जीत पाती. इस पर बौखलाई भाजपा ने मायावती से बसपा द्वारा जीती दोनों मेयर सीटों पर इस्तीफा देकर फिर से चुनाव कराने को कहा था.
इससे गुस्साई मायावती ने सीएम योगी और भाजपा को जमकर लताड़ लगाई है. मायावती ने एक बार फिर भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा सभी 16 मेयर सीटों पर बैलेट पेपर से दुबारा चुनाव करा ले उन्हें अपनी पार्टी और अपने नेता मोदी के विजन का पता चल जाएगा. पार्टी द्वारा जारी बयान में बसपा प्रमुख ने कहा कि बसपा के जीते मेयरों का इस्तीफा मांगना चोरी और ऊपर से सीनाजोरी की बदतर मिसाल है.
बहुजन समाज की नेता मायावती ने 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजीपी की जीत को ईवीएम की जीत बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा को वैसा जनसमर्थन बिल्कुल हासिल नहीं है, जैसा कि चुनाव परिणाम जताते हैं. मायावती ने कहा कि अलीगढ़ और मेरठ में बी.एस.पी के पक्ष में जबरदस्त जन उबाल था, जिसकी वजह से भाजपा ने गड़बड़ी नहीं की. क्योंकि इससे भाजपा की और फजीहत हो सकती थी।
पुजारी बनने के ऑफर को दलित युवाओं ने ठुकराया!
बंगलुरू। केरल के बाद अब पड़ोसी बंगलुरू ने दलित समाज के युवाओं को पुजारी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. राज्य सरकार ने देवस्थानम विभाग के मंदिरों में यह प्रक्रिया शुरू की है. नियम के मुताबिक पुजारी नियुक्त होने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को पहले आगम शाला में पढ़ाई पूरी करनी होती है. इसके बाद ही उन्हें इस सेवा के लिए अभिप्रमाणित किया जाता है.
हालांकि इससे पहले जब विभाग ने दलित वर्ग के पुजारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी तो दलित वर्ग से किसी ने भी आगम शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा नहीं जताई थी. इस बार भी दलितों में इसको लेकर कोई खास रुचि नहीं है. देवास्थानम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि अब लगभग सभी नामांकनकर्ता ब्राह्मण वर्ग से ताल्लुक रखते हैं. गौरतलब है कि देवस्थानम विभाग 34 हजार से अधिक मंदिरों का प्रबंधन करता है, जिनमें करीब 1.2 लाख पुजारी कार्यरत है.
कुमार विश्वास पर भड़के अम्बेडकर वादियों ने की विश्वास की ऐसी-तैसी
नई दिल्ली। कुमार विश्वास जैसे दो कौड़ी के इंसान द्वारा विश्वविभूति बाबासाहेब पर की गई टिप्पणी के बाद दलित संगठनों, बुद्धीजीवियों और एक्टिविस्टों में काफी उबाल है. आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास का एक वीडियो सामने आने के बाद दलित संगठन कुमार विश्वास पर भड़के हुए हैं. इस वीडियो में विश्वास आरक्षण को लेकर टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में विश्वास ने भारत रत्न से सम्मानित देश के पहले कानून मंत्री और संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की है. हालांकि विश्वास ने सीधे-सीधे डॉ. अम्बेडकर का नाम तो नहीं लिया है लेकिन वीडियो देखने पर साफ पता चलता है कि उनका इशारा बाबासाहेब की ओर है.
वीडियो के वायरल होते ही विश्वास को लेकर दलित संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. और जगह-जगह उनके खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू हो गया. रविवार 3 दिसंबर को हरियाणा के बहादुरगढ़ सहित देश भर में दलित संगठन कुमार विश्वास का पुतला फूंक कर विरोध जता रहे हैं. तो रविवार को तमाम अम्बेडकरवादी विरोध जताने विश्वास के घर पहुंच गए, लेकिन डरे विश्वास पीछे के दरवाजे से भाग खड़े हुए. सोशल मीडिया पर भी तमाम एक्टिविस्ट अपने-अपने तरह से विरोध जता रहे हैं.
विश्वास ने एक सप्ताह पहले राजस्थान की एक सभा में डॉ. अम्बेडकर के खिलाफ टिप्पणी की थी. विश्वास जैसे चिरकुट द्वारा डॉ. अम्बेडकर के खिलाफ की गई इस टिप्पणी के बाद आम आदमी पार्टी और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल से विश्वास को पार्टी से निकालने की मांग की है, नहीं तो राजस्थान चुनाव में आप को धूल चटा देने को कहा है. देखना होगा कि केजरीवाल इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर क्या कार्रवाई करते हैं.
कुमार विश्वास और ब्राह्मणवादी धर्म की असलियत
हाल ही में कुमार विश्वास ने डॉ. अम्बेडकर पर जो टिप्पणी की है उसके मद्देनजर कुछ बातें समझनी और समझानी जरुरी हैं. एक सुशिक्षित व्यक्ति द्वारा अम्बेडकर पर जातिवाद के बीज बोने का आरोप लगाना और उसकी अगली ही सांस में अपने खुद के घर में पलते आये जातिवाद और सामंतवाद को बड़े अजीब तरीके से एक अच्छा उदाहरण बनाकर पेश करना एक विचित्र बात है. वे मात्र डेढ़ मिनट के अंदर अम्बेडकर पर जातिवादी होने का आरोप लगा देते हैं और अपनी दादी से साथ दहेज़ में गुलाम की तरह आई एक दलित सफाईकर्मी महिला का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि किस तरह वह महिला हमारी मां और चाची को ठीक से घूँघट न काढ़ने पर गालियां दिया करती थीं और उस गाली के भय से ब्राह्मणी परिवार की ये महिलायें उनसे घबराती थीं.
कुमार विश्वास कहते हैं कि आजकल यह बदल गया है. गांव पहले जैसे नहीं रहे हैं. कोई नेता आरक्षण और जातिवाद की राजनीति करने आया और कुमार विश्वास के गांव और परिवार में जो ‘आदर्श स्थिति’ बनी हुई थी उसे भंग करके चला गया. ये व्यक्ति या नेता कौन है जिसने कुमार विश्वास के राम-राज्य को नष्ट कर दिया? वे स्वयं इसका उत्तर देते हैं- कहते हैं “एक व्यक्ति आया जिसने आरक्षण की जातिवाद की राजनीति शुरू की” निश्चित ही ये आदमी डॉ. अम्बेडकर हैं. अब सवाल ये उठता है कि क्या कवि कुमार विश्वास किसी भूल चूक में ऐसा वक्तव्य दे रहे हैं? या वे बीजेपी आरएसएस स्टाइल ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं? या क्या वे सच में अपनी नैतिकताबोध और सभ्यताबोध का परिचय दे रहे हैं? इन तीनों संभावनाओं को समझिये, वे किसी भूल चूक में वक्तव्य नहीं दे रहे हैं. ये कोई स्टिंग ओपरेशन की सीडी नहीं है बल्कि वे सार्वजनिक रूप से एक जिम्मेदार मंच से और सोच समझकर बोल रहे हैं. दूसरी संभावना ये है कि क्या वे ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं? कुमार संभवतया आम आदमी पार्टी की तरफ से दलित और हिन्दू ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं कर सकते.
ठीक से देखें तो अभी के हालात में कोई भी पार्टी दलित-हिन्दू ध्रुवीकरण करके जीत नहीं सकती क्योंकि राजनीतिक रूप से सफलता तय करने की स्थिति में अभी भी हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण ही जरुरी बना हुआ है, अभी इसी गाय में इतना दूध बचा हुआ है कि इससे अगले कई चुनाव जीते जा सकेंगे, इसलिए इस मुद्दे को छोड़कर कोई नये ध्रुवीकरण की कल्पना केजरीवाल या कुमार विश्वास नहीं कर सकते. दलित –हिन्दू ध्रुवीकरण को चुनावी राजनीति की सफलता की रणनीति बनाना अभी कम से कम आम आदमी पार्टी के लिए असंभव है.
तीसरी संभावना को देखिये, क्या वे इमानदारी से अपने सभ्यताबोध और नैतिकताबोध का परिचय दे रहे हैं? मेरा मानना है कि यही बात सच है. वे एक बहुत गहरी ब्राह्मणवादी मानसिकता को सहज ही उजागर कर रहे हैं. उनके मन में कभी ये बात नहीं उठती कि कोई स्त्री किसी दुसरी स्त्री के साथ आजीवन गुलाम की तरह दहेज़ में कैसे दी या ली जा सकती है? फिर वे ये भी नहीं सोच पाते कि उस महिला को आजीवन सफाई का काम ही क्यों करना है? आगे वे ये भी नहीं सोच पा रहे कि अपने ही ब्राह्मण परिवार की स्त्रियों को घुंघट क्यों करना है? आगे वे ये भी नहीं सोच पा रहे हैं कि उस ‘गुलाम’ दलित महिला को किस स्त्रोत से इतना साहस मिल जाता है कि वह एक ब्राह्मण स्त्री को घुंघट न कर पाने की स्थिति में उसी के पति के सामने चुनौती दे दे?
इन बिन्दुओं को ध्यान से समझिये. ये असल में भारत में फैले ब्राह्मणवाद और उसके गर्भ से निकले बर्बर धर्म के जहर का असली स्वरुप है जिसने इस मुल्क को गुलाम अन्धविश्वासी और असभ्य बनाये रखा है. इन बिन्दुओं में प्रवेश करते हुए आप एक विशेष तरह की नैतिकता, न्याय और सभ्यता को देख पायेंगे जो आपको सिर्फ भारत के ब्राह्मणवादियों के घर में ही मिलेगी.
राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का पर्चा भरा, बधाईयों का तांता लगा
नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की तैयारी में हैं. आज सोमवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय जाकर अध्यक्ष पद का नामांकन भर दिया. इसके बाद उनका पार्टी का अध्यक्ष बनने का रास्ता करीब-करीब पूरी तरह साफ हो चुका है. राहुल के नामांकन दाखिले के दौरान उनके साथ सोनिया गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. आज नामांकन की आखिरी तारीख थी. नामांकन के बाद कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेताओं ने राहुल गांधी को बधाई दी है.
पांच तारीख को नामांकन पत्रों की जांच होगी. 11 तारीख को नाम वापिस लेने की आखिरी तारीख है और उसी दिन नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा. हालांकि राहुल गांधी का निर्विरोध चुना जाना तय है. राहुल अपनी मां सोनिया गांधी के उत्तराधिकारी होंगे जो इस पद पर 19 साल से इस पद पर हैं. सूचना है कि राहुल गांधी नामांकन पत्र के चार सेट दाखिल करेंगे. वरिष्ठ पार्टी नेता सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, एके एंटनी और अहमद पटेल तथा पार्टी के मुख्यमंत्री प्रस्तावक के रूप में पत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे. इस मौके पर देश के पूर्व पीएम डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के डार्लिग हैं और वह पार्टी की महान परंपरा को आगे बढ़ाएंगे.
विराट कोहली ने फिर मारा 200
भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने फिर से दोहरा शतक जमाया है. कोहली ने अपने होम ग्राउंड दिल्ली के फिरोजशाह कोटला के मैदान पर अपने करियर का 6वां दोहरा शतक बनाया. खास बात यह है कि अपने छह के छह दोहरे शतक कोहली ने बतौर कप्तान लगाए हैं. इसके साथ ही कोहली वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान और महान खिलाड़ी ब्रायन लारा से आगे निकल गए हैं. लारा ने बतौर कप्तान पांच दोहरा शतक लगाया था.
कोहली ने दूसरे दिन 156 रन से आगे खेलना शुरू किया और कुछ ही देर में अपनी छठी टेस्ट डबल सेंचुरी भी पूरी कर ली. इससे पहले नागपुर में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में विराट कोहली ने 5वां दोहरा शतक लगाया था. दिल्ली में भारत औऱ श्रीलंका के बीच टेस्ट मैच हो रहा है, जिसमें कोहली ने यह शानदार खेल दिखाया है.
कश्मीर के लिए चुनाव लड़ेगा यह आतंकवादी
लाहौर। मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने चुनाव लड़ने की घोषणा की है. शनिवार को इस बात की पुष्टि करते हुए उसने कहा कि उसकी पार्टी जमात उद दावा साल 2018 में पाकिस्तान में होने वाले आम चुनाव में मिल्ली मुस्लिम लीग के बैनर तले भाग लेगी.
बकौल सईद, “मिल्ली मुस्लिम लीग अगले वर्ष आम चुनाव में उतरने की योजना बना रही है. मैं भी 2018 को उन कश्मीरियों के नाम करता हूं जो स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सईद ने कहा, ‘मैं भारत को बताना चाहता हूं कि मैं कश्मीरियों को समर्थन देना जारी रखूंगा. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वहां क्या मुसीबतें हैं.” गौरतलब है कि इस साल जनवरी से नजरबंद रहे सईद को पाकिस्तान सरकार द्वारा किसी अन्य मामले में आगे और हिरासत में न रखने का फैसला करने के बाद 24 नवंबर को रिहा कर दिया गया था. दलित साहित्य के लिए बड़ी खबर, ऑक्सफोर्ड ने छापी एक दलित साहित्यकार की जीवनी
नई दिल्ली। दलित साहित्य के लिए एक बड़ी खबर है. दुनिया के बड़े पब्लिकेशन हाउस ऑक्सफोर्ड प्रेस ने दलित साहित्यकार श्योराज सिंह बेचैन की आत्मकथा “मेरा बचपन मेरे कंधे पर” का अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित किया है. ऑक्सफोर्ड ने यह किताब ‘My Childhood on my Shoulders’ शीर्षक से प्रकाशित किया है. अंग्रेजी संस्करण का विमोचन बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर के 61वें परिनिर्वाण दिवस पर होगा, जिसके बाद यह पाठकों के लिए उपलब्ध होगी. श्योराज सिंह बेचैन दलित साहित्य और हिन्दी साहित्य का एक बड़ा नाम हैं.
दलित दस्तक से बात करते हुए श्योराज सिंह ने इसे पूरे दलित साहित्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इससे हमारी आगामी पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलेगी कि जब इतनी गरीबी से उठकर मैं दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रोफेसर बन सकता हूं तो वो भी बहुत कुछ कर सकते हैं.
यह पहली बार है जब किसी दलित साहित्यकार की जीवनी ऑक्सफोर्ड जैसे दुनिया के बड़े प्रकाशन से प्रकाशित हो रही है. 278 पन्नों की इस किताब का अंग्रेजी अनुवाद दीपा जफर और तपन बासु ने किया है. इस किताब का हिन्दी में प्रकाशन सन् 2009 में वाणी प्रकाशन ने किया था. तब से इसके चार संस्करण आ चुके हैं. यह आत्मकथा देश के तकरीबन दर्जन भर विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है तो देश के बाहर 17 विश्वविद्यालयों ने अपने सिलेबस में रखा है. दलित साहित्य के क्षेत्र में इसका एक बड़ा योगदान है. जाहिर है कि बाबासाहेब के परिनिर्वाण के दिन श्योराज सिंह बेचैन की इस आत्मकथा का ऑक्सफोर्ड जैसे नामी-गिरामी पब्लिकेशन से अंग्रेजी संस्करण आना दलित साहित्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा.
इस तरह घर बैठे ही लिंक करे आधार को मोबाइल नंबर से
नई दिल्ली। मोबाइल फोन यूजर्स को 1 जनवरी 2018 तक अपने मोबाइल नंबर को आधार से री-वेरिफाई करने के लिए इंतजार करना होगा. इसके लिए यूज़र्स को टेलिकॉम कंपनी के आउटलेट पर जाने की ज़रुरत नहीं है. मोबाइल को आधार से लिंक करने के लिए कस्टमर्स आईवीआरएस सर्विस का इस्तेमाल कर सकते है.
टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने फॉरेन नेशनल्स, एनआरआई, सीनियर सिटीजंस, फिजिकली चैलेंज्ड लोगों और आधार रजिस्टर्ड सब्सक्राइबर्स के लिए मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के लिए प्रक्रिया जारी कर दी है.
ऐसे करें अपने मोबाइल को आधार कार्ड से लिंक
- 1 दिसंबर से यूजर्स के लिए मोबाइल नंबर के साथ आधार कार्ड लिंक करने की प्रक्रिया आसान हो गई है. अब आप वन टाइम पासवर्ड (OTP) के जरिए आधार वैरिफिकेशन कर सकेंगे. आगे जानिए इसके लिए आपको क्या करना होगा.
- अपना नंबर आधार के साथ लिंक करने के लिए सबसे पहले UIDAI की वेबसाइट पर जाएं.
- इसके बाद आपको कई सारे ऑप्शन मिलेंगे जिसमें से एक होगा Verify Email/Mobile Number, इस पर क्लिक करें.
- इस पर क्लिक करते ही आप दूसरे वेब पेज पर पहुंच जाएंगे. यहां आपको अपना आधार नंबर, ईमेल, मोबाइल नंबर और सिक्योरिटी कोड (दिया गया होगा) डालना होगा. इन डिटेल को भरें और ‘Get one time password’ पर क्लिक करें.
- इसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा. इस ओटीपी को पेज पर नजर आ रहे ओटीपी सेगमेंट में भरें और वैरिफाई बटन पर क्लिक करें.
- ऐसा करते ही आपकी स्क्रीन पर Congratulation का मैसेज आएगा और रि-वैरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.
- याद रहे इस ओटीपी के जरिए उन्हीं नंबर को वैरिफाई किया जा सकता है जो आपके आधार के डेटा बेस में पहले से उपलब्ध हों. अगर आपको ऐसा नंबर वैरिफाई कराना है जिसकी जानकारी आधार कार्ड में नहीं दी गई है तो उसके लिए आपको नजदीकी अपने सर्विस प्रोवाइडर के स्टोर पर जाना होगा.
ओखी से अब तक 17 लोगों की मौत, हजारों मछुआरे लापता
चेन्नई। केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश जारी है, जिससे सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. दोनों राज्यों में वर्षाजनित घटनाओं में मरने वालों की संख्या आज 17 हो गई. कन्याकुमारी में चक्रवात ओखी के कारण मरने वालों की संख्या पांच हो गई वहीं दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बन रहा कम दबाव का क्षेत्र अगले 48 घंटे में गहरे दबाव में बदल सकता है जिससे तमिलनाडु में और बारिश होने की संभावना है.
एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने चक्रवात के कारण हुई घटनाओं में मारे गए लोगों के लिए चार लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है. तिरुवनंतपुरम से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल के कम से कम 218 मछुआरे खराब मौसम के कारण समुद्र में फंसे हुए थे जिन्हें आज सुरक्षित तरीके से तट पर लाया गया. वहीं राज्य में मरने वालों की संख्या सात हो गई है. चेन्नई में पलानीस्वामी ने चक्रवात से पैदा हुई स्थिति का जायजा लिया.
एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि कन्याकुमारी और तिरूनेलवेली जिले में भारी बारिश से प्रभावित 1200 लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है. सबसे बुरी तरह प्रभावित कन्याकुमारी में राहत कार्य तेज करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की दो टीम और राज्य आपदा प्रतिक्रिया एजेंसी की सात टीमों को तैनात किया गया है. इसमें बताया गया है कि कन्याकुमारी, तिरूनेलवेली और तूतीकोरिन जिले में भारी बारिश और तेज हवाओं से 579 पेड़ उखड़ गए और उन्हें हटाने का प्रयास जारी है.
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एस. बालचंद्रन ने कहा कि दक्षिण अंडमान सागर और इसके आसपास के इलाकों के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके अगले 48 घंटे में गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के अगले चार दिन में उत्तर तमिलनाडु और दक्षिण आंध्र तट की तरफ बढ़ने के आसार हैं. नीलगिरी, कोयम्बटूर, थेनी और डिंडिगुल में भारी बारिश होने की संभावना है.
बाबासाहेब को धम्म दीक्षा देने वाले भदंत प्रज्ञानंद महास्थवीर को मायावती ने दी श्रद्धांजलि
लखनऊ। बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने लखनऊ के रिसालदार पार्क में बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अंतिम दर्शन किए…बाबासाहेब अम्बेडकर को धम्म दीक्षा दिलाने वाले गुरु भदंत प्रज्ञानंद महास्थवीर का बीते गुरुवार को परिनिर्वाण हो गया था…उन्हें सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी…जिसके बाद प्रज्ञानंद को केजीएमयू में भर्ती कराया गया था…
मायावती को वैसे भी बौद्ध धर्म से काफी लगाव रहा है…उन्होंने अपने शासन काल में गौतम बुद्ध नगर नाम का शहर बनाया है. हाल ही में बीएसपी प्रमुख का एक बयान भी आया था…जिसमें उन्होंने बौद्ध धर्म को अपना लेने की बात भी कही थी…क्योंकि उनका मानना है कि बुद्ध के पदचिन्हों पर चलकर ही समतामूलक समाज की स्थापना की जा सकती है…
देश के संविधान को बनाने वाले बाबासाहेब अंबेडकर ने भी लाखों समर्थकों के साथ 14 अक्टूबर 1956 को सात भंतों की मौजूदगी में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी…जिसके बाद समाज में बदलाव का एक नया दौर शुरु हो गया था…और वो बदलाव आज भी देखने को मिल रहा है…भले ही भदंत प्रज्ञानंद महास्थवीर आज हमारे बीच नहीं रहें हों … लेकिन उनके द्वारा दी गई ज्ञान की रौशनी से आज समाज का एक बड़ा तबका रौशन है…
बीजेपी के ‘जनेऊ जाल’ में फंस गई कांग्रेस!
निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की निर्णायक जीत का मतलब 45 साल के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने घरेलू राज्य में और निखरकर सामने आना है. योगी ने पूरे उत्तर प्रदेश मे तूफानी प्रचार अभियान चलाया और चुनाव के परिणाम यह साबित करते हैं कि उनका यह बड़ा दांव पूरी तरह से सही था. बीजेपी ने 16 में से 14 नगरपालिका अपनी झोली में डालीं, तो दो परिणाम मायावती के पाले में गए. यह बताता है कि जमीनी स्तर पर यह बीएसपी का पुनरुत्थान है. मार्च में योगी आदित्यनाथ के बतौर मुख्यमंत्री आश्चर्यजनक ‘अभिषेक’ के बाद नगर निकाय चुनाव के परिणाम उनके नए ‘हिंदुत्व ऑयकॉन’ के ओहदे को और मजबूती प्रदान करता है. इससे पहले इसी काम के लिए योगी की पहले हिमाचल प्रदेश और फिर अब गुजरात में तैनाती की गई है. इस बात ध्यान रखें कि योगीनाथ की शासन दक्षता पर अभी भी खुले तौर पर सवाल लगा हुआ है. यह भी सही है कि यह सवाल अगस्त में उनके विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल में हुए हादसे में मारे गए लगभग 60 नवजात बच्चों की मौत के कारण नहीं खड़ा हुआ. बहरहाल, इस नगर निकाय चुनाव का एक बड़ा शीर्षक यह है और होना भी चाहिए कि गोरखपुर में वार्ड नंबर-68 में बीजेपी की माया त्रिपाठी हार गईं. यह उस गोरखनाथ मंदिर का घर है, जिसके मुख्य पुजारी योगी आदित्यनाथ हैं.
यहां रुचिकर बात यह है कि उनके सबसे बड़े आलोचक और अमित शाह के पसंदीदा उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी अपने घरेलू शहर में जोर का झटका लगा है. केशव के घरेलू शहर कौशांबी की सभी छह नगर पंचायतों में बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है. वास्तव में बीजेपी ने कांग्रेस की बड़ी पराजय के प्रचार-प्रसार (जहां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बहुत ही टकटकी लगाकर नजरें गड़ाए हुए थीं) के लिए राहुल गांधी के लोकसभा सीट अमेठी को चुना है. यहां से बीजेपी ने शहरी निकाय चुनाव जीता है. निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश के नगर निकाय के चुनाव वित्त मंत्री अरुण जेतली जैसे बीजेपी के नेताओं को यह कहने का अवसर देते हैं कि यह परिणाम नोटबंदी और जीएसटी की सफलता का जनमत संग्रह रहा. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परिणाम को बहुत ही गर्मजोशी के साथ लड़े जा रहे गुजरात चुनाव में अग्रदूत के रूप में पेश कर सकते हैं. अमित शाह पहले से ही यह कह चुके हैं कि यूपी के निकाय चुनाव गुजरात में उनके साहसी ‘मिशन 150’ का संकेत हैं.
अब जबकि बीजेपी ने निकाय चुनावों के प्रति ऐसा जुनून, जज्बा और ध्यान दिखाया है, जो किसी भी तरह के चुनावों के प्रति उसका रवैया और खास गुण में तब्दील हो चुका है. लेकिन बाकी दूसरी पार्टियां इन तमाम बातों के प्रति ढीली दिखाई पड़ीं. ऐसा पहली बार हुआ, जब बीजेपी ने निकाय चुनावों के लिए घोषणा-पत्र जारी किया. वहीं, बाकी पार्टियों ने बीजेपी का अनुसरण करते हुए अपनी पार्टी का चुनाव चिह्न उम्मीदवारों को बांटा. वहीं, विधानसभा चुनाव के बाद पूरी तरह खारिज कर दी गईं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती दो नगरपालिका कब्जाने के साथ इस छोटी वापसी पर थोड़ी राहत महसूस कर सकती हैं. लेकिन यहां अखिलेश यादव को चिंतित होना चाहिए क्योंकि अभी भी प्रदेश के वोटरों का उनको लेकर मोहभंग बना हुआ है. इनके अलावा देश के सबसे बड़े राज्य की आखिरी पायदान के चुनाव में भी कांग्रेस पतन की राह पर दिखाई पड़ी. यह एक ऐसी पार्टी के लिए चिंता की बात है, जो खुद पर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में गर्व करती है. उसे ध्यान रखना होगा कि अगले आम चुनाव के बीच बमुश्किल ही 18 महीने का समय बाकी बचा है. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटे हैं और दिल्ली में सत्ता का रास्ता इस प्रदेश से होकर गुजरता है.
एक समय था, जब राष्ट्रीय चुनावी परिदृश्य के तहत कांग्रेस और बाकी दो क्षेत्रीय पार्टियों सपा और बसपा के गठजोड़ की चर्चाएं हो रही थीं. खुद अखिलेश यादव सार्वजनिक तौर पर इस तरह की बातें कर रहे थे, लेकिन अब यूपी के वोटरों को लेकर यह गठजोड़ भी नाकाम दिखाई पड़ता है. निकाय चुनाव के परिणाम साफ तौर पर बताते हैं कि योगी आदित्याथ ने उच्च जातियों के वोट बैंक पर अपनी पकड़ बरकरार रखी है. परिणाम यह भी बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में उनके द्वारा अपनाया गया अगड़ों और गैर-जाटव दलितों का विजयी फॉर्मूला विफल नहीं हुआ है. वर्तमान में विपक्ष और बीजेपी इस पर बहस में जुटे हैं कि राहुल गांधी ‘वास्तविक हिंदू’ हैं या नहीं, कैसे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू गुजरात में सोमनाथ मंदिर का निर्माण नहीं चाहते थे, कैसे मोरबी में इंदिरा गांधी ने अपनी नाक पर रुमाल ढक लिया था. हालिया समय तक कांग्रेस आर्थिक मुद्दों और गुजरात मॉडल पर बीजेपी को घेर रही थी. लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरजेवाला के यह कहने के बाद कि राहुल गांधी एक जनेऊधारी ब्राह्मण हैं, कांग्रेस अब ‘जनेऊ’ में उलझती दिखाई पड़ रही है. सुरजेवाला के इस बयान पर एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इस पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि हमने खुद को बीजेपी के जाल में फंसा लिया है. बीजेपी हमसे बड़ी हिंदू है. हम ‘भगवाधारी’ योगी आदित्यनाथ का मुकाबला नहीं कर सकते.
यह बहुत ही अजीब सी बात है कि काग्रेस ऐसा सोचती जान पड़ती है कि बीजेपी के साथ ‘हिंदुत्व गेम’ खेलने की कोशिश चुनावी फायदा हासिल करने का एक तरीका हो सकता है. वास्तव में इस बाबत नरेंद्र मोदी के मुकाबले दूसरा कोई बेहतर ‘कलाकार’ नहीं है. उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव विपक्ष के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए. कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि जो भी वैकल्पिक कहानी-किस्से वह लोगों के समक्ष पेश कर रही है, उसमें बेचने के लायक आकर्षक कुछ भी नहीं है. यह साफ दिखाई पड़ता है.
स्वाति चतुर्वेदी लेखिका तथा पत्रकार हैं, जो ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘द स्टेट्समैन’ तथा ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’ के साथ काम कर चुकी हैं… एनडीटीवी से साभार
UP निकाय चुनावः शहर में दबदबा, लेकिन बाहर महज 15% सीटें जीत पाई भाजपा
नई दिल्ली। यूपी में निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की लहर बरकरार रहने का दावा किया जा रहा है. परिणाम घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं बंपर जीत का दावा किया. यहां तक कि यूपी की गली-गली भगवा होने की चर्चा की जाने लगी.
लेकिन चुनावी नतीजों का आंकलन किया जाए तो तस्वीर इससे थोड़ा अलग नजर आती है. बड़े शहर यानी नगर निगमों में बीजेपी ने 2012 की तरह ही अपना दबदबा बनाए रखा है. पार्टी ने 16 में से 14 नगर निगम सीटों पर जीत दर्ज की है. नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर भी पार्टी की परमोर्फेंस पहले से बेहतर हुई है.
हालांकि नगर पालिका वार्ड और नगर पंचायत वार्ड की बात की जाए तो परिणाम थोड़े चौंकाने वाले हैं. सूबे में नगर पालिका के 5261 वार्डों में चुनाव हुए, जिनमें से बीजेपी के सिर्फ 17.51% उम्मीदवार ही जीत पाए. जबकि 64.21% वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.
इसके अलावा नगर पंचायत की बात की जाए तो बीजेपी का प्रदर्शन यहां और भी कमजोर रहा है. नगर पंचायत सदस्य के लिए 5446 वार्ड में चुनाव हुए और इनमें से 664 पर ही भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे. यानी बीजेपी को नगर पंचायत के 12.22% वार्डों में जीत मिली. नगर पालिका परिषद सदस्य और नगर पंचायत सदस्यों का कुल आंकड़ा देखा जाए तो करीब 15 फीसदी वार्डों पर ही बीजेपी के उम्मीदवारों को जीत मिली है.
ये है विजयी सीटों का प्रतिशत
नगर निगम पार्षद (कुल वार्ड-1300)
बीजेपी-596 (45.85%)
सपा- 202 (15.54%)
बसपा-147 (11.31%)
कांग्रेस-110 (8.46%)
इनके अलावा 17.23% सीटों पर निर्दलीय या अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.
नगर पालिका परिषद सदस्य (कुल वार्ड-5261)
बीजेपी-922 (17.51%)
सपा- 477 (9.07%)
बसपा-262 (4.98%)
कांग्रेस-158 (2.98%)
64.21% निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.
नगर पंचायत सदस्य (कुल वार्ड-5446)
बीजेपी-664 (12.22%)
सपा- 453 (8.34%)
बसपा-262 (4.01%)
कांग्रेस-126 (2.32%)
71.29% वार्ड पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी.
नगर निगम मेयर (कुल सीट-16)
बीजेपी-14 (87.5%)
बसपा-02 (12.5%)
सपा-0
कांग्रेस-0
नगर पालिका अध्यक्ष (कुल सीट-198)
बीजेपी-70 (35.3%)
बसपा-29 (14.6%)
सपा-45 (22.7%)
कांग्रेस-9 (4.5%)
निर्दलीय व अन्य- 45 (22.7%)
नगर पंचायत अध्यक्ष (कुल सीट-438)
बीजेपी-100 (22.83%)
सपा-83 (18.9%)
बसपा-45 (10.27%)
कांग्रेस-17 (3.8%)
निर्दलीय व अन्य-193 (44.06%)
यानी नगर निगम मेयर से लेकर पार्षद और नगर पालिका से लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों पर बीजेपी ने परचम लहराया है. जबकि नगर पालिका और नगर पंचायत सदस्यों के लिए वार्डों में हुए चुनाव पर बीजेपी बड़ा स्कोर नहीं कर पाई है. हालांकि, ये भी एक तथ्य है कि बीजेपी अपने इस स्कोर के साथ भी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली पार्टी है और सपा, बसपा समेत कांग्रेस तीनों प्रमुख दल उनसे पीछे हैं.
आजतक से साभारशिक्षा में खर्च पर गुजरात देश में 26 वें स्थान पर क्यों?
नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनावमें पीएम मोदी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने हर रोज एक सवाल पूछने का फैसला किया है. इसी के तहत आज उन्होंने चौथा सवाल दागा है. गुजरात मॉडल पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने ट्वीटर पर पूछा कि सरकारी शिक्षा में खर्च पर गुजरात देश में 26 वें स्थान पर क्यों है. सरकारी स्कूल और कॉलेजों की कीमत पर शिक्षा का व्यापार किया गया है. महंगी फीस की मार हर छात्र पर पड़ी है. इस तरह न्यू इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा.
आपको बता दें कि शुक्रवार को भी राहुल गांधी ने तीसरा सवाल किया था उन्होंने पूछा ‘‘प्रधानमंत्री से मेरा तीसरा सवाल है कि वर्ष 2012 से 2016 के बीच 62,549 करोड़ रुपये की बिजली खरीदकर चार निजी कंपनियों का खजाना क्यों भरा गया.’
22 सालों का हिसाब#गुजरात_मांगे_जवाब प्रधानमंत्रीजी- चौथा सवाल सरकारी स्कूल-कॉलेज की कीमत पर किया शिक्षा का व्यापार महँगी फ़ीस से पड़ी हर छात्र पर मार New India का सपना कैसे होगा साकार? सरकारी शिक्षा पर खर्च में गुजरात देश में 26वें स्थान पर क्यों? युवाओं ने क्या गलती की है?
— Office of RG (@OfficeOfRG) December 2, 2017
गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर इस समय बीजेपी और कांग्रेस के बीच जमकर जुबानी जंग चल रही है. एक ओर जहां बीजेपी ने राहुल गांधी के धर्म पर सवाल उठाए हैं तो राहुल ने खुद को शिवभक्त बताते हुए कहा है कि वह धर्म के नाम पर दलाली नहीं करना चाहते हैं.

