इस तरह घर बैठे ही लिंक करे आधार को मोबाइल नंबर से

0
    uidai

नई दिल्ली। मोबाइल फोन यूजर्स को 1 जनवरी 2018 तक अपने मोबाइल नंबर को आधार से री-वेरिफाई करने के लिए इंतजार करना होगा. इसके लिए यूज़र्स को टेलिकॉम कंपनी के आउटलेट पर जाने की ज़रुरत नहीं है. मोबाइल को आधार से लिंक करने के लि‍ए कस्टमर्स आईवीआरएस सर्विस का इस्तेमाल कर सकते है.

टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने फॉरेन नेशनल्स, एनआरआई, सीनियर सिटीजंस, फिजिकली चैलेंज्ड लोगों और आधार रजिस्टर्ड सब्सक्राइबर्स के लिए मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के लिए प्रक्रिया जारी कर दी है.

ऐसे करें अपने मोबाइल को आधार कार्ड से लिंक

  • 1 दिसंबर से यूजर्स के लिए मोबाइल नंबर के साथ आधार कार्ड लिंक करने की प्रक्रिया आसान हो गई है. अब आप वन टाइम पासवर्ड (OTP) के जरिए आधार वैरिफिकेशन कर सकेंगे. आगे जानिए इसके लिए आपको क्या करना होगा.
  • अपना नंबर आधार के साथ लिंक करने के लिए सबसे पहले UIDAI की वेबसाइट पर जाएं.
  • इसके बाद आपको कई सारे ऑप्शन मिलेंगे जिसमें से एक होगा Verify Email/Mobile Number, इस पर क्लिक करें.
  • इस पर क्लिक करते ही आप दूसरे वेब पेज पर पहुंच जाएंगे. यहां आपको अपना आधार नंबर, ईमेल, मोबाइल नंबर और सिक्योरिटी कोड (दिया गया होगा) डालना होगा. इन डिटेल को भरें और ‘Get one time password’ पर क्लिक करें.
  • इसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा. इस ओटीपी को पेज पर नजर आ रहे ओटीपी सेगमेंट में भरें और वैरिफाई बटन पर क्लिक करें.
  • ऐसा करते ही आपकी स्क्रीन पर Congratulation का मैसेज आएगा और रि-वैरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.
  • याद रहे इस ओटीपी के जरिए उन्हीं नंबर को वैरिफाई किया जा सकता है जो आपके आधार के डेटा बेस में पहले से उपलब्ध हों. अगर आपको ऐसा नंबर वैरिफाई कराना है जिसकी जानकारी आधार कार्ड में नहीं दी गई है तो उसके लिए आपको नजदीकी अपने सर्विस प्रोवाइडर के स्टोर पर जाना होगा.

ओखी से अब तक 17 लोगों की मौत, हजारों मछुआरे लापता

0
cyclone

चेन्नई। केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश जारी है, जिससे सामान्य जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. दोनों राज्यों में वर्षाजनित घटनाओं में मरने वालों की संख्या आज 17 हो गई. कन्याकुमारी में चक्रवात ओखी के कारण मरने वालों की संख्या पांच हो गई वहीं दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बन रहा कम दबाव का क्षेत्र अगले 48 घंटे में गहरे दबाव में बदल सकता है जिससे तमिलनाडु में और बारिश होने की संभावना है.

एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने चक्रवात के कारण हुई घटनाओं में मारे गए लोगों के लिए चार लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है. तिरुवनंतपुरम से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल के कम से कम 218 मछुआरे खराब मौसम के कारण समुद्र में फंसे हुए थे जिन्हें आज सुरक्षित तरीके से तट पर लाया गया. वहीं राज्य में मरने वालों की संख्या सात हो गई है. चेन्नई में पलानीस्वामी ने चक्रवात से पैदा हुई स्थिति का जायजा लिया.

एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि कन्याकुमारी और तिरूनेलवेली जिले में भारी बारिश से प्रभावित 1200 लोगों को राहत शिविरों में रखा गया है. सबसे बुरी तरह प्रभावित कन्याकुमारी में राहत कार्य तेज करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की दो टीम और राज्य आपदा प्रतिक्रिया एजेंसी की सात टीमों को तैनात किया गया है. इसमें बताया गया है कि कन्याकुमारी, तिरूनेलवेली और तूतीकोरिन जिले में भारी बारिश और तेज हवाओं से 579 पेड़ उखड़ गए और उन्हें हटाने का प्रयास जारी है.

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एस. बालचंद्रन ने कहा कि दक्षिण अंडमान सागर और इसके आसपास के इलाकों के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके अगले 48 घंटे में गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के अगले चार दिन में उत्तर तमिलनाडु और दक्षिण आंध्र तट की तरफ बढ़ने के आसार हैं. नीलगिरी, कोयम्बटूर, थेनी और डिंडिगुल में भारी बारिश होने की संभावना है.

बाबासाहेब को धम्म दीक्षा देने वाले भदंत प्रज्ञानंद महास्थवीर को मायावती ने दी श्रद्धांजलि

0
mahasthveer

लखनऊ। बीएसपी सुप्रीमों मायावती ने लखनऊ के रिसालदार पार्क में बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अंतिम दर्शन किए…बाबासाहेब अम्बेडकर को धम्म दीक्षा दिलाने वाले गुरु भदंत प्रज्ञानंद महास्थवीर का बीते गुरुवार को परिनिर्वाण हो गया था…उन्हें सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी…जिसके बाद प्रज्ञानंद को केजीएमयू में भर्ती कराया गया था…

मायावती को वैसे भी बौद्ध धर्म से काफी लगाव रहा है…उन्होंने अपने शासन काल में गौतम बुद्ध नगर नाम का शहर बनाया है. हाल ही में बीएसपी प्रमुख का एक बयान भी आया था…जिसमें उन्होंने बौद्ध धर्म को अपना लेने की बात भी कही थी…क्योंकि उनका मानना है कि बुद्ध के पदचिन्हों पर चलकर ही समतामूलक समाज की स्थापना की जा सकती है…

देश के संविधान को बनाने वाले बाबासाहेब अंबेडकर ने भी लाखों समर्थकों के साथ 14 अक्टूबर 1956 को सात भंतों की मौजूदगी में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी…जिसके बाद समाज में बदलाव का एक नया दौर शुरु हो गया था…और वो बदलाव आज भी देखने को मिल रहा है…भले ही भदंत प्रज्ञानंद महास्थवीर आज हमारे बीच नहीं रहें हों … लेकिन उनके द्वारा दी गई ज्ञान की रौशनी से आज समाज का एक बड़ा तबका रौशन है…

बीजेपी के ‘जनेऊ जाल’ में फंस गई कांग्रेस!

upbjp

निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की निर्णायक जीत का मतलब 45 साल के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने घरेलू राज्य में और निखरकर सामने आना है. योगी ने पूरे उत्तर प्रदेश मे तूफानी प्रचार अभियान चलाया और चुनाव के परिणाम यह साबित करते हैं कि उनका यह बड़ा दांव पूरी तरह से सही था. बीजेपी ने 16 में से 14 नगरपालिका अपनी झोली में डालीं, तो दो परिणाम मायावती के पाले में गए. यह बताता है कि जमीनी स्तर पर यह बीएसपी का पुनरुत्थान है. मार्च में योगी आदित्यनाथ के बतौर मुख्यमंत्री आश्चर्यजनक ‘अभिषेक’ के बाद नगर निकाय चुनाव के परिणाम उनके नए ‘हिंदुत्व ऑयकॉन’ के ओहदे को और मजबूती प्रदान करता है. इससे पहले इसी काम के लिए योगी की पहले हिमाचल प्रदेश और फिर अब गुजरात में तैनाती की गई है. इस बात ध्यान रखें कि योगीनाथ की शासन दक्षता पर अभी भी खुले तौर पर सवाल लगा हुआ है. यह भी सही है कि यह सवाल अगस्त में उनके विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल में हुए हादसे में मारे गए लगभग 60 नवजात बच्चों की मौत के कारण नहीं खड़ा हुआ. बहरहाल, इस नगर निकाय चुनाव का एक बड़ा शीर्षक यह है और होना भी चाहिए कि गोरखपुर में वार्ड नंबर-68 में बीजेपी की माया त्रिपाठी हार गईं. यह उस गोरखनाथ मंदिर का घर है, जिसके मुख्य पुजारी योगी आदित्यनाथ हैं.

यहां रुचिकर बात यह है कि उनके सबसे बड़े आलोचक और अमित शाह के पसंदीदा उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी अपने घरेलू शहर में जोर का झटका लगा है. केशव के घरेलू शहर कौशांबी की सभी छह नगर पंचायतों में बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा है. वास्तव में बीजेपी ने कांग्रेस की बड़ी पराजय के प्रचार-प्रसार (जहां केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी बहुत ही टकटकी लगाकर नजरें गड़ाए हुए थीं) के लिए राहुल गांधी के लोकसभा सीट अमेठी को चुना है. यहां से बीजेपी ने शहरी निकाय चुनाव जीता है. निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश के नगर निकाय के चुनाव वित्त मंत्री अरुण जेतली जैसे बीजेपी के नेताओं को यह कहने का अवसर देते हैं कि यह परिणाम नोटबंदी और जीएसटी की सफलता का जनमत संग्रह रहा. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परिणाम को बहुत ही गर्मजोशी के साथ लड़े जा रहे गुजरात चुनाव में अग्रदूत के रूप में पेश कर सकते हैं. अमित शाह पहले से ही यह कह चुके हैं कि यूपी के निकाय चुनाव गुजरात में उनके साहसी ‘मिशन 150’ का संकेत हैं.

अब जबकि बीजेपी ने निकाय चुनावों के प्रति ऐसा जुनून, जज्बा और ध्यान दिखाया है, जो किसी भी तरह के चुनावों के प्रति उसका रवैया और खास गुण में तब्दील हो चुका है. लेकिन बाकी दूसरी पार्टियां इन तमाम बातों के प्रति ढीली दिखाई पड़ीं. ऐसा पहली बार हुआ, जब बीजेपी ने निकाय चुनावों के लिए घोषणा-पत्र जारी किया. वहीं, बाकी पार्टियों ने बीजेपी का अनुसरण करते हुए अपनी पार्टी का चुनाव चिह्न उम्मीदवारों को बांटा. वहीं, विधानसभा चुनाव के बाद पूरी तरह खारिज कर दी गईं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती दो नगरपालिका कब्जाने के साथ इस छोटी वापसी पर थोड़ी राहत महसूस कर सकती हैं. लेकिन यहां अखिलेश यादव को चिंतित होना चाहिए क्योंकि अभी भी प्रदेश के वोटरों का उनको लेकर मोहभंग बना हुआ है. इनके अलावा देश के सबसे बड़े राज्य की आखिरी पायदान के चुनाव में भी कांग्रेस पतन की राह पर दिखाई पड़ी. यह एक ऐसी पार्टी के लिए चिंता की बात है, जो खुद पर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में गर्व करती है. उसे ध्यान रखना होगा कि अगले आम चुनाव के बीच बमुश्किल ही 18 महीने का समय बाकी बचा है. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटे हैं और दिल्ली में सत्ता का रास्ता इस प्रदेश से होकर गुजरता है.

एक समय था, जब राष्ट्रीय चुनावी परिदृश्य के तहत कांग्रेस और बाकी दो क्षेत्रीय पार्टियों सपा और बसपा के गठजोड़ की चर्चाएं हो रही थीं. खुद अखिलेश यादव सार्वजनिक तौर पर इस तरह की बातें कर रहे थे, लेकिन अब यूपी के वोटरों को लेकर यह गठजोड़ भी नाकाम दिखाई पड़ता है. निकाय चुनाव के परिणाम साफ तौर पर बताते हैं कि योगी आदित्याथ ने उच्च जातियों के वोट बैंक पर अपनी पकड़ बरकरार रखी है. परिणाम यह भी बताते हैं कि विधानसभा चुनाव में उनके द्वारा अपनाया गया अगड़ों और गैर-जाटव दलितों का विजयी फॉर्मूला विफल नहीं हुआ है. वर्तमान में विपक्ष और बीजेपी इस पर बहस में जुटे हैं कि राहुल गांधी ‘वास्तविक हिंदू’ हैं या नहीं, कैसे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू गुजरात में सोमनाथ मंदिर का निर्माण नहीं चाहते थे, कैसे मोरबी में इंदिरा गांधी ने अपनी नाक पर रुमाल ढक लिया था. हालिया समय तक कांग्रेस आर्थिक मुद्दों और गुजरात मॉडल पर बीजेपी को घेर रही थी. लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरजेवाला के यह कहने के बाद कि राहुल गांधी एक जनेऊधारी ब्राह्मण हैं, कांग्रेस अब ‘जनेऊ’ में उलझती दिखाई पड़ रही है. सुरजेवाला के इस बयान पर एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने इस पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि हमने खुद को बीजेपी के जाल में फंसा लिया है. बीजेपी हमसे बड़ी हिंदू है. हम ‘भगवाधारी’ योगी आदित्यनाथ का मुकाबला नहीं कर सकते.

यह बहुत ही अजीब सी बात है कि काग्रेस ऐसा सोचती जान पड़ती है कि बीजेपी के साथ ‘हिंदुत्व गेम’ खेलने की कोशिश चुनावी फायदा हासिल करने का एक तरीका हो सकता है. वास्तव में इस बाबत नरेंद्र मोदी के मुकाबले दूसरा कोई बेहतर ‘कलाकार’ नहीं है. उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव विपक्ष के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए. कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि जो भी वैकल्पिक कहानी-किस्से वह लोगों के समक्ष पेश कर रही है, उसमें बेचने के लायक आकर्षक कुछ भी नहीं है. यह साफ दिखाई पड़ता है.

स्वाति चतुर्वेदी लेखिका तथा पत्रकार हैं, जो ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘द स्टेट्समैन’ तथा ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’ के साथ काम कर चुकी हैं… एनडीटीवी से साभार

UP निकाय चुनावः शहर में दबदबा, लेकिन बाहर महज 15% सीटें जीत पाई भाजपा

0
yogi-stage

नई दिल्ली। यूपी में निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की लहर बरकरार रहने का दावा किया जा रहा है. परिणाम घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं बंपर जीत का दावा किया. यहां तक कि यूपी की गली-गली भगवा होने की चर्चा की जाने लगी.

लेकिन चुनावी नतीजों का आंकलन किया जाए तो तस्वीर इससे थोड़ा अलग नजर आती है. बड़े शहर यानी नगर निगमों में बीजेपी ने 2012 की तरह ही अपना दबदबा बनाए रखा है. पार्टी ने 16 में से 14 नगर निगम सीटों पर जीत दर्ज की है. नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर भी पार्टी की परमोर्फेंस पहले से बेहतर हुई है.

हालांकि नगर पालिका वार्ड और नगर पंचायत वार्ड की बात की जाए तो परिणाम थोड़े चौंकाने वाले हैं. सूबे में नगर पालिका के 5261 वार्डों में चुनाव हुए, जिनमें से बीजेपी के सिर्फ 17.51% उम्मीदवार ही जीत पाए. जबकि 64.21% वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.

इसके अलावा नगर पंचायत की बात की जाए तो बीजेपी का प्रदर्शन यहां और भी कमजोर रहा है. नगर पंचायत सदस्य के लिए 5446 वार्ड में चुनाव हुए और इनमें से 664 पर ही भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे. यानी बीजेपी को नगर पंचायत के 12.22% वार्डों में जीत मिली. नगर पालिका परिषद सदस्य और नगर पंचायत सदस्यों का कुल आंकड़ा देखा जाए तो करीब 15 फीसदी वार्डों पर ही बीजेपी के उम्मीदवारों को जीत मिली है.

ये है विजयी सीटों का प्रतिशत

नगर निगम पार्षद (कुल वार्ड-1300)

बीजेपी-596 (45.85%)

सपा- 202 (15.54%)

बसपा-147 (11.31%)

कांग्रेस-110 (8.46%)

इनके अलावा 17.23% सीटों पर निर्दलीय या अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.

नगर पालिका परिषद सदस्य (कुल वार्ड-5261)

बीजेपी-922 (17.51%)

सपा- 477 (9.07%)

बसपा-262 (4.98%)

कांग्रेस-158 (2.98%)

64.21% निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.

नगर पंचायत सदस्य (कुल वार्ड-5446)

बीजेपी-664 (12.22%)

सपा- 453 (8.34%)

बसपा-262 (4.01%)

कांग्रेस-126 (2.32%)

71.29% वार्ड पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी.

नगर निगम मेयर (कुल सीट-16)

बीजेपी-14 (87.5%)

बसपा-02 (12.5%)

सपा-0

कांग्रेस-0

नगर पालिका अध्यक्ष (कुल सीट-198)

बीजेपी-70 (35.3%)

बसपा-29 (14.6%)

सपा-45 (22.7%)

कांग्रेस-9 (4.5%)

निर्दलीय व अन्य- 45 (22.7%)

नगर पंचायत अध्यक्ष (कुल सीट-438)

बीजेपी-100 (22.83%)

सपा-83 (18.9%)

बसपा-45 (10.27%)

कांग्रेस-17 (3.8%)

निर्दलीय व अन्य-193 (44.06%)

यानी नगर निगम मेयर से लेकर पार्षद और नगर पालिका से लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों पर बीजेपी ने परचम लहराया है. जबकि नगर पालिका और नगर पंचायत सदस्यों के लिए वार्डों में हुए चुनाव पर बीजेपी बड़ा स्कोर नहीं कर पाई है. हालांकि, ये भी एक तथ्य है कि बीजेपी अपने इस स्कोर के साथ भी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली पार्टी है और सपा, बसपा समेत कांग्रेस तीनों प्रमुख दल उनसे पीछे हैं.

आजतक से साभार

शिक्षा में खर्च पर गुजरात देश में 26 वें स्थान पर क्यों?

rahul-modi

नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनावमें पीएम मोदी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने हर रोज एक सवाल पूछने का फैसला किया है. इसी के तहत आज उन्होंने चौथा सवाल दागा है. गुजरात मॉडल पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने ट्वीटर पर पूछा कि सरकारी शिक्षा में खर्च पर गुजरात देश में 26 वें स्थान पर क्यों है. सरकारी स्कूल और कॉलेजों की कीमत पर शिक्षा का व्यापार किया गया है. महंगी फीस की मार हर छात्र पर पड़ी है. इस तरह न्यू इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा.

आपको बता दें कि शुक्रवार को भी राहुल गांधी ने तीसरा सवाल किया था उन्होंने पूछा ‘‘प्रधानमंत्री से मेरा तीसरा सवाल है कि वर्ष 2012 से 2016 के बीच 62,549 करोड़ रुपये की बिजली खरीदकर चार निजी कंपनियों का खजाना क्यों भरा गया.’

गौरतलब है कि गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर इस समय बीजेपी और कांग्रेस के बीच जमकर जुबानी जंग चल रही है. एक ओर जहां बीजेपी ने राहुल गांधी के धर्म पर सवाल उठाए हैं तो राहुल ने खुद को शिवभक्त बताते हुए कहा है कि वह धर्म के नाम पर दलाली नहीं करना चाहते हैं.

अब उत्तराखंड में सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य हुआ बाबासाहेब का फोटो लगाना

0
uttarakhand

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में बाबासाहेब डॉ. भीमराव की फोटो लगाने का आदेश दिया है. सरकारी विभाग के अलावा राज्य के सभी मंत्रालय, सचिवालय और विधानसभा में भी बाबासाहेब की फोटो लगाने के आदेश दिए गए है.

राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने यह आदेश 30 नवंबर को राज्य के सभी विभागों लिखित रूप से आदेश दिया. इस आदेश में लिखा है कि राज्य के सभी मंत्रालयों, सचिवालय, विधानसभा और राजकीय कार्यालयों में डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्र लगाए जाएंगे. इस संबंध में अपने-अपने विभागों के नियंत्राधीन कार्यालयों, प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक संस्थाओं में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का चित्र लगाने का कष्ट करें. इस आदेश का अनिवार्य रूप से अनुपालन करना सुनिश्त करें.

बैलट पेपर से हुआ मतदान तो भाजपा की हार तय: मायावती

mayawati

लखनऊ। यूपी निकाय चुनाव नतीजों पर मायावती ने कहा कि भाजपा ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया, नहीं तो बसपा के और मेयर जीतते. शुक्रवार को निकाय चुनाव के नतीजे आए थे. यूपी के 16 नगर निगमों में हुए चुनाव में बीजेपी को 14 और दो सीटों पर बसपा को जीत मिली.

मायावती ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह लोकतंत्र में यकीन करती है तो चुनाव ईवीएम के बदले बैलेट पेपर से करवाए. अगला लोकसभा चुनाव 2019 में है और यदि भाजपा में साहस है तो वह बैलेट पेपर से चुनाव करके दिखाए. मैं यकीन के साथ कहती हूं कि भाजपा कभी नहीं जीत पाएगी.

मायावती ने कहा कि अगर भाजपा ईमानदार है और उसका लोकतंत्र में भरोसा है तो उसे ईवीएम खत्म कर बैलट पेपर से चुनाव कराना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि लोग उसके साथ हैं तो उसे बैलट पेपर को लागू करना चाहिए. मैं दावा कर सकती हूं कि अगर बैलट पेपर का इस्तेमाल किया गया तो भाजपा सत्ता में नहीं आएगी.

सपा से गठबंधन के सवाल पर मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी सर्व समाज से गठबंधन करना चाहती है. उसमें हर जाति की बात हो. आदिवासियों, पिछड़ों, दलित सभी समाज के लोगों की बात हो.

बसपा के उभार से भाजपा को खतरा!

mayawati

लखनऊ। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की है और माना जा रह है कि योगी का करिश्मा और मोदी लहर अभी भी बरकरार है और 2019 के चुनाव में भाजपा के लिए दोनों ही बड़ा फैक्टर साबित होने जा रहे हैं. लेकिन इन चुनावों परिणामों नजर डालें तो बसपा भी वापसी करती दिख रही है. कई सालों के बाद बसपा के खेमे में थोड़ी राहत वापस लौटी है. लोकसभा चुनाव में जहां बसपा को लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी तो विधानसभा चुनाव में पार्टी लाख कोशिशें करने के बाद भी तीसरे नंबर रही. लेकिन निकाय चुनाव में बसपा ने सपा को तीसरे नंबर पर धकेल दिया है और मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अच्छा प्रदर्शन किया है इसके साथ ही मेरठ और अलीगढ़ में मेयर का चुनाव जीत लिया.

इतना ही नहीं झांसी, आगरा और सहारनपुर में पार्टी दूसरे नंबर रही है. चुनावी नतीजों से साफ है कि मुस्लिम वोटरों का झुकाव बसपा की ओर बढ़ा रहा है. मायावती की कोशिश भी यही है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटर किसी भी तरह से उसके पाले में आ जाएं तो सपा को आसानी से पीछे छोड़ सकती है और खुद को भाजपा के मुकाबले खड़ा कर सकती है. बसपा अभी तक निकाय चुनावों में ज्यादा रुचि नहीं दिखाती रही है. 2006 और 2012 के चुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं उतारे थे. लेकिन जिस तरह से चुनाव अब माइक्रो मैनेजमेंट की ओर बढ़ते जा रहे हैं उससे साफ जाहिर है कि कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए हर चुनाव से गंभीरता लेना होगा. हालांकि इस चुनाव में मायावती हो या अखिलेश यादव कहीं भी रैली करने नहीं गए थे.

सवाल इस बात का है कि अगर उत्तर प्रदेश में बसपा का का उभार होता है तो किसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा, जाहिर यह सपा और कांग्रेस को सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है क्योंकि समाजवादी पार्टी का आधार वोट बैंक मुस्लिम-यादव ही हैं. अगर इसमें सेंध लगने का मतलब है कि सपा को सीधा नुकसान. दलितों और मुस्लिम समीकरण काम कर गया तो कांग्रेस को भी अच्छा-खासा नुकसान हो सकता है क्योंकि उत्तर प्रदेश में इन दोनों का भी वोट कांग्रेस को मिलता रहा है. हालांकि उत्तर प्रदेश के कई चुनाव गवाह रहे हैं कि जब यहां पर हाथी दौड़ा है सभी को रौंदता चला गया. इसलिए बसपा का उभार भाजपा के लिए कम खतरनाक साबित नहीं होगा क्योंकि योगी के सीएम बनने के बाद से ब्राह्णणों में भी कई मु्द्दों पर नाराजगी देखी जा सकती है. अब यह आंकलन का मुद्दा है कि किस पार्टी को ज्यादा नुकसान हो सकता है.

एनडीटीवी से साभार

गुजरात के मुख्यमंत्री के सामने गिड़गिड़ाती रही शहीद की बेटी, पुलिस से करवाया बाहर

0
vijay-rupani

नई दिल्ली। गुजरात में चुनाव को लेकर राजनीति अपने चरम पर है. चुनाव प्रचार में नेता जी-जान लगाकर जुटे हैं. इसी बीच सीएम विजय रूपाणी की एक सभा में शहीद की बेटी के साथ कुछ ऐसा सलूक किया गया जिसे देख कोई भी शर्मिंदा हो जाएगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे शहीद के परिवार का अपमान बताकर बीजेपी पर करारा वार किया है.

गुजरात में एक रैली के दौरान शहीद बीएसएफ जवान की बेटी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से पहुंची थी लेकिन वहां से उसे महिला पुलिस कर्मियों ने रोक लिया और घसीटकर बाहर निकाला. मंच के नीचे उस लड़की के साथ पुलिस ऐसे पेश आई जैसे वो कोई उपद्रवी हो. ये सब मुख्यमंत्री के सामने हो रहा था और वहां पर उन्होंने उसे रोकने के बजाय उसे शांति से बाहर ले जाने के लिए कहते दिखे.

जिस लड़की के साथ पुलिस ने ये सलूक किया है वो कोई और नहीं शहीद अशोक तडवी की बेटी रुपल है जो गुजरात के सीएम विजय रूपाणी के पास अपनी गुहार लेकर पहुंची थी. रूपल 26 साल की हैं और वो कई सालों से इस बात को लेकर प्रदर्शन कर रही है कि उसके पिता अशोक तडवी के शहीद होने के बाद सरकार ने जो जमीन देने का कथित रूप से वादा किया था वह आज तक पूरा नहीं किया.

जब मुख्यमंत्री रैली को संबोधित कर रहे थे उस वक्त वो दर्शकों के बीच बैठी थी और अचानक से चिल्लाते हुए मंच की ओर दौड़ पड़ी, ‘‘ मैं उनसे मिलना चाहती हूं…मैं उनसे मिलना चाहती हूं.’’ इसके बाद मानो वहां कोहराम मच गया. रूपल के कुछ कह पाने से पहले ही पुलिस वालों ने उसे घेर लिया और उसे सभा स्थल से बाहर ले जाने लगे. उस वक्त रूपाणी ने मंच से कहा, ‘‘ मैं आपसे इस कार्यक्रम के बाद मिलूंगा.’’ लेकिन कोई मुलाकात नहीं हुई.

बता दें कि बीएसएफ के जवान रहे अशोक तडवी साल 2002 में जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे. उसके परिवार का कहना है कि 15 साल बीत जाने के बावजूद उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिली.

हिंद महासागर में चीन से खतरा, भारत बना रहा है परमाणु पनडुब्बी

0
indian

नई दिल्ली। भारत ने ऐटमी ताकत से लैस 6 पनडुब्बियां बनाने का प्रोग्राम शुरू कर दिया है, जिससे हिंद महासागर में चीन पर काबू रखने में मदद मिलेगी. नेवी चीफ सुनील लांबा ने बताया है कि इस प्रॉजेक्ट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन रणनीतिक महत्व के कारण इस बारे में और जानकारी नहीं दी जा सकती है. भारत के पास फिलहाल 2 परमाणु पनडुब्बियां हैं- आईएनएस चक्र और आईएनएस अरिहंत. चक्र को रूस से लीज पर लिया गया है. रक्षा जानकार पनडुब्बियों के मामले में चीन को भारत से आगे मानते हैं.

नेवी चीफ ने दिल्ली में शुक्रवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में हिंद महासागर में चीन से मिल रही चुनौतियों का भी जिक्र किया. समुद्री डकैती रोकने के नाम पर चीनी पनडुब्बियों की गश्त को अजीब मानते हुए नेवी चीफ ने कहा कि हमने इन पनडुब्बियों से खतरे पर गौर किया है. 2013 से चीनी पनडुब्बियां साल में 2 बार आती हैं. यह पैटर्न अब भी कायम है. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर अगर भविष्य में चीनी नौसेना के जहाज आते हैं तो यह खतरा होगा.

हाल में सिंगापुर से नौसैनिक करार के बाद उन्होंने बताया कि कई और देशों से लॉजिस्टिक सुविधा के लिए इस तरह के करार की बातचीत चल रही है, लेकिन इस करार को चीन से नहीं जोड़ा जा सकता. हिंद महासागर क्षेत्र में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच गठजोड़ बनने पर नेवी चीफ ने कहा कि हम देखेंगे कि यह आगे कैसे विकसित होता है. भारत, अमेरिका और जापान के बीच होने वाले मालाबार अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया के जुड़ने के सवाल पर कहा कि यह अभी मौजूदा रूप ही कायम रहेगा.

नेवी चीफ बताया कि पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत 2020 तक नेवी में शामिल हो जाएगा, लेकिन इसके लिए स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के मौजूदा वर्जन को शामिल करने की स्थिति नहीं बन रही है. उन्होंने तेजस को अच्छा प्लेन बताते हुए कहा कि इसके नेवी वर्जन के विकास के लिए फंडिंग जारी रहेगी. स्वदेशी प्रॉजेक्ट्स में देरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें इस देरी के लिए तैयार रहना चाहिए.

देश में बनी पहली पनडुब्बी कलवरी के जल्द नौसेना में शामिल होने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरी पनडुब्बी खंदेरी का ट्रायल चल रहा है, जो अच्छा रहा है. इसके बाद दूसरे प्रॉजेक्ट 75 (इंडिया) पर उन्होंने कहा कि हम रणनीतिक भागीदारी मॉडल के तहत इसकी तैयारी कर रहे हैं, जिसमें विदेशी और भारतीय कंपनी का गठजोड़ भारत में पनडुब्बी बनाएगी.

यूपी निकाय चुनावः मतगणना के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर चलाई लाठियां

0
deoria

देवरिया। उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के‌ लिए प्रदेश के 75 जिलों में मतगणना सुबह से हो रही थी. इन जिलों के 334 केंद्रों पर मतगणना की जा रही थी. जिस तरह नगर निकाय के मतदान के दौरान छिटपुट हिंसा देखने को मिली थी, उसी तरह मतगणना के दौरान भी कई जिलों में छिटपुट हिंसा देखने को मिली है. यूपी के देवरिया और मुजफ्फरनगर में पुलिस ने मतगणना केंद्र से भीड़ हटाने के लिए लाठी चार्ज कर दिया, जिसमें कई लोग घायल हो गए.

देवरिया जिले के जीआईसी इंटर कॉलेज में मतगणना स्थल पर कुछ भाजपा के कार्यकर्ता गेट नंबर पर पानी पीकर लौट रहे थे. इन कार्यकर्ताओं पुलिस ने रोका तो इनकी पुलिस से नोकझोंक होने लगी. जब भाजपा के मतगणना एजेंट को पुलिस ने रोका तो विवाद और बढ़ गया. इसके बाद पुलिस ने एजेंट को लाठियों से गिरा-गिराकर पीटा. पीड़ित जान बचाने के लिए जब मीडिया गैलरी में भागा तो पुलिस ने गुंडागर्दी की हद पार करते हुए दौड़ाते हुए मीडिया गैलरी में भी एजेंट को लाठियों से बर्बरता पूर्वक पीटा. इस घटना में एक पत्रकार का सिर फटने से पत्रकारो में आक्रोश फ़ैल गया. पत्रकारों ने कोतवाल को सस्पेंड करने की मांग की है. गुस्साए पत्रकारों से सदर कोतवाल से झड़प भी हुई. बताया जा रहा है कि लाठीचार्ज में कई लोग घायल हो गए हैं.

मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के डीएवी इंटर कॉलेज में चल रही मतगणना के दौरान हंगामा होने लगा और भारी भीड़ एकत्रित हो गई. इसके चलते पुलिस को वहां लाठीचार्ज करना पड़ा. इस लाठीचार्ज में 4 लोग घायल हो गए हैं. इससे नाराज लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. वहीं कानपुर में भी ईवीएम को लेकर जमकर हंगामा होने की सूचना है.

यूपी के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के गढ़ में ही हारी भाजपा

keshav-prasad-maurya

लखनऊ। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया है. लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री का गढ़ कहा जाने वाला क्षेत्र योगी के हाथों से निकल गया है. योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर जिस वार्ड नंबर 68 में है, वहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है. यहां कि निर्दलीय उम्मीदवार नादिरा खातून ने भाजपा की प्रत्याशी माया त्रिपाठी को 483 वोटों से हरा दिया.

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. उनके गृहनगर कौशांबी में भी भाजपा की करारी हार हुई है. कौशाम्बी के सभी छह नगर पंचायतों में भाजपा की हार हुई है. वहां भाजपा का एक भी चेयरमैन नहीं जीत सका है. सिराथू नगर पंचायत क्षेत्र केशव का गृहनगर है. यहां के नगर पंचायत चेयरमैन पद पर निर्दलीय उम्मीदवार राजेन्द्र यादव उर्फ भोला यादव ने जीत दर्ज की है. यादव ने भाजपा प्रत्याशी प्रशांत केसरी को 1680 मतों से शिकस्त दिया है.

हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में बीजेपी की इस जीत के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी है और कहा है कि वो विकास के एजेंडे को आम आदमी तक पहुंचाने में सफल रहे हैं. उन्होंने बंपर जीत के लिए सभी मतदाताओं का भी शुक्रिया अदा किया है. इधर, नादिरा ने भी कहा कि लोगों ने उनके विकास के एजेंडे को वोट दिया है. उन्होंने कहा कि जरूरी हुआ तो वो इलाके के विकास के लिए योगी आदित्यनाथ से भी मिलेंगी.

गौरतलब है यूपी में 22, 26 और 29 नवंबर को वोटिंग हुई, इस चुनाव में 16 नगर निगम 198 नगर पालिका और 438 नगर पंचायत के लिए वोट डाले गए थे.

IBPS RRB 2017: ऑफिसर स्केल I, II, III परीक्षा का रिजल्ट आ गया है, ऐसे देखिए अपना नंबर

IBPS द्वारा CRP RRB VI के ऑफिसर स्केल्स के नतीजे घोषित किए जाने के बाद आईबीपीएस ने अब ऑफिसर स्केल मेन परीक्षा के नंबर भी जारी कर दिए हैं. सभी उम्मीदवार अपने स्कोर्स आईबीपीएस की वेबसाइट ibps.in पर देख सकते हैं. परीक्षा के स्कोर्स वेबसाइट पर 30 नवंबर देर शाम को जारी किए गए थे. मेन परीक्षा में पास होने वाले अभ्यर्थियों का अब इंटरव्यू होगा. इंटरव्यू दिसंबर महीने में ही होंगे. ऑफिसर स्केल I, ऑफिसर स्केल II- स्पेशलिस्ट, ऑफिसर स्केल II- जीबीओ, ऑफिसर स्केल III के स्कोर्स अब वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. उम्मीदवार इन्हें चेक कर सकते हैं. ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट Step 1: सबसे पहले वेबसाइट ibps.in पर जाएं। Step 2: RRB CWE VI के टैब पर क्लिक करें Step 3: स्कोर्स चेक करने के लिए अपनी परीक्षा के लिंक पर क्लिक करें Step 4: अपनी रजिस्ट्रेशन डीटेल्स भरें Step 5: डीटेल्स भरने के बाद सब्मिट बटन पर क्लिक करें Step 6: आपका स्कोर्स खुल जाएंगे, डाउनलोड कर प्रिंटआउट निकाल सकते हैं। 15 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती आईबीपीएस ने कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया था जो इस प्रकार होनी हैं- 15,068 पदों में से ग्रुप A ऑफिसर्स और ग्रुप B में ऑफिस असिस्टेंट (मल्टिपर्पज) के पदों पर भर्ती स्केल 1 ऑफिसर्स- 5,023 स्केल 2 ऑफिसर्स- (कृषि)- 166 स्केल 2 ऑफिसर्स- (मार्केटिंग)- 35 स्केल 2 ऑफिसर्स- (कोषाध्यक्ष मैनेजर)- 13 स्केल 2 ऑफिसर्स- (लॉ)- 27 स्केल 2 ऑफिसर्स- (चार्टेड अकाउंटेंट)- 38 स्केल 2 ऑफिसर्स- (आईटी)- 95 स्केल 2 ऑफिसर्स- (जनरल बैंकिंग)- 1,373 स्केल 3 ऑफिसर्स– 1,169 ऑफिस असिस्टेंट (मल्टिपर्पज)- 8,298

मिताली राज को क्या करते हैं विराट कोहली

नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने एक बार फिर पुरुष टीम के कप्तान विराट कोहली की तारीफ की है. मिताली को कोहली का फिटनेस पर ध्यान देना खूब भाता है. महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली मिताली ने कहा, “कई ऐसे लोग हैं जो मुझे हर दिन प्रेरित करते हैं. लेकिन अगर मुझे किसी का नाम लेना हो तो वो विराट कोहली होंगे. विराट के कारण ही मैं फिटनेस पर ध्यान लगा सकी. भारत को दो बार महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचाने वाली कप्तान मिताली राज सीएनएन-न्यूज-18 के इंडियन ऑफ द ईयर अवॉर्ड के मौके पर दिग्गजों के जमावड़े के बीच बोल रही थीं. इस समारोह में कपिल देव और कोहली के अलावा क्रिकेट जगत की कई जानी मानी हस्तियां मौजूद थीं.