जयराम ठाकुर बने हिमाचल के नए सीएम, 10 मंत्रीयों संग ली शपथ

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बुद्धवार को मंडी के विधायक जयराम ठाकुर ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. खुले मैदान में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, अंनत कुमार गीते, थावर चंद गहलोत, जगत प्रकाश नड्डा और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए. यह पहला मौका है जब कोई प्रधानमंत्री सरकार के गठन में शामिल हुए हैं.

करीब 50 हजार लोगों की मौजूदगी में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जयराम ठाकुर को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई. उनके बाद 10 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की. मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने वालों में महेंद्र सिंह ठाकुर, सुरेश भारद्वाज, रामलाल मरकंडा, सरवीण चौधरी, राजीव सैजल,अनिल शर्मा, विपिन परमार, वीरेंद्र कंवर, विक्रम सिंह, गोविंद सिंह के नाम शामिल हैं.

शपथ लेने से ठीक पहले जयराम ठाकुर ने अपने सवर्गवासी पिता को याद करते हुए कहा कि यदि मेरे पिता आज होते तो बड़ी खुशी होती. आपको बता दें कि जयराम ठाकुर मंडी के एक किसान परिवार से आते हैं, उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और यूनिवर्सिटी के दिनों में ही राजनीति में कदम रखा. शपथ ग्रहण के बाद जनता को संबोधित करते हुए उन्होने कहा कि लोगों ने हम पर विश्वास दिखाया है और हम उस विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे.

पीयूष शर्मा

विजय रुपाणी दूसरी बार बने गुजरात के सीएम, 9 कैबिनेट-10 राज्यमंत्रियों संग ली शपथ

गांधीनगर: गुजरात में मंगलवार को सीएम विजय रूपाणी ने दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. गांधीनगर के सचिवालय मैदान में आयोजित इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा और तमाम बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए.

शपथ ग्रहण समारोह में विजय रुपाणी को राज्यपाल ओपी कोहली ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसी दौरान सौरभ पटेस, दिलीप ठाकोर, कौशिक पटेल, ईश्वर परमार, भूपेंद्र सिंह चूड़ास्मा ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. कैबिनेट मंत्रियों के अलावा राज्य मंत्री के रूप में प्रदीप सिंह जडेजा, बच्चू भाई खाबड़, परबत पटेल, पुरुषोत्तम सोलंकी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. इनमें 6 पाटीदार चेहरे और 6ओबीसी चेहरे भी शामिल हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण से पहले रूपाणी अपनी पत्नी अंजलि के संग पंचदेव मंदिर के दर्शन करने पहुंचे, जहां दोनों ने पूजा-अर्चना की.

राज्य में भाजपा की यह लगातार छठी सरकार है और रूपाणी ने मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ ली है. पार्टी ने हाल ही में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में 182 मे से 99 सीटें जीती हैं. हलांकि इस चुनाव में भाजपा को 2012 के चुनाव के मुकाबले 16 सीटें कम मिली हैं. विजय रूपाणी और नितिन पटेल को 22 दिसंबर को भाजपा विधायक दल का नेता और उपनेता चुना गया. अपको बता दें कि नितिन पटेल गुजरात के मेहसाणा से विधायक हैं, मोदी के करीबी माने जाते हैं और पाटीदार समुदाय से आते हैं. पटेल दूसरी बार राज्य के डिप्टी सीएम बने हैं.

पीयूष शर्मा

प्रताड़ना ज़ाहिर करती सामने आईं जाधव की तस्वीरें।

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नई दिल्ली। हाल ही में पाक जेल में कैद पूर्व भारतीय नेवी ऑफिसर कुलभूषण जाधव को उनकी मां और पत्‍नी से मिलवाया गया था. मुलाकात के दौरान ली गईं कुछ तस्‍वीरें सामने आयी हैं, जिनमें जाधव के सिर पर और कान के पीछे एक लंबा निशान देखा जा सकता है. इन तसवीरों में कुलभूषण जाधव को दी गईं यातनाओं का दर्द साफ बयाँ हो रहा है.

इस मुलाकात के बाद कुछ ऐसे दृश्य भी सामने आए हैं जिनसे साफ ज़ाहिर है कि जाधव को दबाव के चलते परिवार से मिलाया गया था, जैसे जाधव और उनके परिवार के बीच काँच की दीवार थी, जिसमें वह अपनी माँ और पत्नी के सामने कोट पहन कर बैठे थे, ऐसे में माना यह जा रहा है कि शरीर पर लगी चोटों को छुपाने के लिए उन्हे कोट पहनाया गया था. मराठी या हिन्दी में बात करने की जगह पर जाधव अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, दो वर्षों के बाद परिवार से मिलने पर भी उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. इतना ही नहीं मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान ने प्रेस कान्फ्रेंस में एक वीडियो जारी किया जिसमें कुलभूषण अपने परिवार से मुलाकात के लिए पाकिस्तान का धन्यवाद कह रहे हैं और खुद को रॉ का एजेंट भी बता रहे हैं.

इस मुलाकात की तसवीरें तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिसमें कुछ और भी चौकाने वाली बातें सामने आयी हैं. इसमें 47 साल के कुलभूषण किसी 60-65 साल के बुजुर्ग जैसे दिखाई दे रहे थे. और परिवार के मुताबिक उनका वज़न पहले से काफी कम दिखाई दिया. हलांकी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मुलाकात के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर को कुलभूषण जाधव की मैडिकल रिपोर्ट दी, जिसके मुताबिक उनके शरीर में कोई फ्रैक्चर नहीं है साथ ही ईसीजी और अल्ट्रासाऊंड की रिपोर्ट भी नॉरमल बताई जा रही है.

पीयूष शर्मा

राजस्थान में दलितों को मंदिर जाने को रोका|

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राजस्थान। देश के कई हिस्सों में जब मनुस्मृति दहन किया जा रहा था, राजस्थान में मनु की व्यवस्था के मुताबिक दलितों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था. असल में राजस्थान के जालोर जिले के शंखवाली गांव में दलित समाज के लोग मंदिर में जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं मिल रही थी. इसे मुद्दा बनाते हुए लालसोट के विधायक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के नेतृत्व में दलित समाज के लोग मंदिर में प्रवेश करने गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ.

असल में शंखवाली गांव के राजपुरोहित समाज ने मंदिर को निजी बताते हुए दलितों को प्रवेश करने से मना कर दिया. इस तरह दलित और राजपुरोहित समाज आमने-सामने हो गए. पुलिस प्रशासन ने राजपुरोहित समाज और दलित समाज के बीच बातचीत कराने की कोशिश की, जो नाकाम रही, जिससे स्थित और उग्र होने लगी.

इसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कानून और शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सहित पचास लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इस मामले के बाद राजस्थान की सियासत गरमा गई है। विधायक मीणा और उनके समर्थकों का कहना है कि मंदिर प्रवेश सबका अधिकार है और किसी को इससे रोका नहीं जा सकता.

 

लखनऊ में मना 12वां डाइवर्सिटी डे

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लखनऊ। भारत जैसी भीषणतम गैर-बराबरी दुनियां में कहीं नहीं है. यहां 10 प्रतिशत अल्पजन विशेषाधिकार युक्त तबकों का धन-संपदा पर 81 % कब्ज़ा है, जबकि शेष 90 प्रतिशत लोग महज 19-20 धन –संपदा पर गुजर-बसर करने के लिए मजबूर हैं. इस स्थिति को अगर बदलना है तो सरकारी और निजी क्षेत्र की सभी प्रकार की नौकरियों, सप्लाई, डीलरशिप, ठेकों,पार्किंग, परिवहन, फिल्म-मीडिया सहित शासन-प्रशासन इत्यादि तमाम क्षेत्रों में अवसरों का बंटवारा भारत के प्रमुख सामाजिक समूहों- सवर्ण, ओबीसी, एससी/एसटी और धार्मिक अल्पसंख्यकों – के स्त्री-पुरुषों के संख्यानुपात में करना होगा. यह बातें 25 दिसंबर को लखनऊ के अमराई गाँव के अम्बेडकर पार्क में, शक्ति के स्रोतों में सामाजिक और लैंगिक विविधता के प्रतिबिम्बन की लड़ाई लड़ रही बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली द्वारा आयोजित, 12वें डाइवर्सिटी समारोह में जोर-शोर से उठीं.

इसमें देश के जाने-माने दर्जन भर के करीब लेखक-पत्रकार और शिक्षाविदों ने शिरकत किया जिनमें डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, माता प्रसाद, प्रो. रमेश दीक्षित, प्रो. कालीचरण स्नेही, डॉ. प्रो. रामनरेश चौधरी, प्रो (डॉ.) एस. एन. शंखवार, शिल्पी चौधरी, फ्रैंक हुजुर, अरसद सिराज मक्की, डॉ. राजबहादुर मौर्य, डॉ. कौलेश्वर “प्रियदर्शी”, मा. सर्वेश आंबेडकर, चंद्रभूषण सिंह यादव, कॉमरेड प्रेम रंजन इत्यादि प्रमुख रहें.

इस अवसर पर सबसे पहले दिवंगत कॉमरेड प्रभुलाल के अवदानों को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी. उसके बाद डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ इंडिया के रूप में मशहूर एच एल दुसाध की चार किताबों के साथ डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी और डॉ. अनीता गौतम द्वारा लिखी पुस्तक ‘एच. एल. दुसाध: डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ इंडिया’ का विमोचन हुआ. डाइवर्सिटी डे के अवसर पर हर साल शक्ति के स्रोतों में सामाजिक और लैंगिक विविधता के प्रतिबिम्बन के विचार में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ द इयर’ का सम्मान दिया जाता रहा है. इस बार फ्रैंक हुजूर, चंद्रभूषण सिंह यादव और डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी को ‘डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ द इयर’ के खिताब से नवाजा गया.

कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन खुद बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के संस्थापक अध्यक्ष एच.एल. दुसाध ने किया. उन्होंने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि अगर मार्क्स के अनुसार दुनिया का इतिहास धन-संपदा के बटवारे पर केन्द्रित वर्ग संघर्ष का इतिहास है तो भारत का इतिहास आरक्षण पर केन्द्रित वर्ण-व्यवस्था के सुविधाभोगी अल्पजन और वंचित बहुजन के मध्य संघर्ष का इतिहास है. इस कारण ही जब मंडल की रिपोर्ट प्रकाशित होने पर एससी/एसटी के बाद जब पिछड़ों को थोडा आरक्षण मिला, वर्ण-व्यवस्था के सुविधाभोगी वर्ग के हितैषी शासकों ने नव उदारवादी अर्थनीति को हथियार बनाकर आरक्षण को कागजों तक सिमटाने का षड्यंत्र शुरू किया.

इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए बुन्देलखंड विश्वविद्यालय के डॉ. राज बहादुर मौर्य ने कहा कि सारी दुनिया में सामाजिक न्याय पर प्रोफ़ेसर लोग अमेरिकी विद्वान जान रावल की किताब का अनुसरण करते हैं, किन्तु मेरा मानना है कि एच.एल. दुसाध ने रावल से बहुत आगे का चिंतन कर लिया है. आज नहीं तो कल देश के बुद्धिजीवियों को दुसाध के चिंतन का समर्थन करना ही पड़ेगा. प्रोफ़ेसर कालीचरण स्नेही ने कहा कि तुम कुछ भी करो, हमें उसमें हिस्सेदारी दे दो. यहाँ तक भ्रष्टाचार में भी हमें हिस्सदारी चाहिए.

मुख्य अतिथि माता प्रसाद ने अमेरिका के कालों की भांति भारत के दलितों को सप्लाई, डीलरशिप, ठेकों, फिल्म- मीडिया में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. जबतक दलित वाचितों को अमेरिका के कालों की भांति हर क्षेत्र में भागीदारी नहीं मिलती, यह देश आगे नहीं बढ़ सकता. इस बात को बार-बार अमेरिका जाने वाले भारत के हुक्मरानों को समझना चाहिए. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि पूरा देश दुसाध को आज डाइवर्सिटी मैन ऑफ़ इंडिया के रूप जानता है. हमने डाइवर्सिटी के विषय में दुसाध से ही सीखा. उन्होंने बहुत जोर देकर कहा कि आरक्षण और डाइवर्सिटी हासिल करने के लिए बहुजन समाज को एक होना ही होगा. धन्यवाद ज्ञापन रंजन कुमार ने किया.

रिपोर्ट- कविश कुमार

भाजपाई मंत्री ने कहा, हम संविधान बदलने आए हैं

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कोपल। भाजपा के राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के एक बयान से सियासत में उबाल आ गया है. हेगड़े के बयान की संविधान में आस्था रखने वाले तमाम लोगों ने निंदा की है. भाजपा के इस मंत्री ने अपने बयान में कहा है कि भाजपा संविधान बदलने के लिए पावर में आई है और आने वाले समय में जल्दी ही ऐसा होगा. कर्नाटका के कोपल जिले में ब्राह्मण युवा परिषद की एक बैठक में हेगड़े ने यह बात कही.

इस दौरान मंत्री ने देश में धर्मनिरपेक्षता की वकालत करने वाले लोगों पर भी निशाना साधा. हेगड़े ने सेकुलर लोगों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जब कोई यह कहता है कि वह मुस्लिम है, क्रिश्चियन है, लिंगायत हैं या फिर हिन्दू है तो मुझे खुशी होती है क्योंकि वे अपने बारे में जानते हैं. जबकि जो यह कहते हैं कि वो सेकुलर हैं वो खुद को और अपने खून को नहीं जानते. हेगड़े यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है इसलिए इसे स्वीकार करना चाहिए। तो मैं संविधान की इज्जत करता हूं लेकिन यह पहले कई बार बदला जा चुका है और भविष्य में फिर से बदला जाएगा। हम सरकार में संविधान बदलने के लिए ही आए हैं और ऐसा करेंगे.

विवादित बयान देने वाले अनंत कुमार हेगेड़े कर्नाटक के उत्तर कनाडा पांच बार से सांसद हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बीते अगस्त में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें राज्यमंत्री बनाया था. कर्नाटक में अगले साल चुनाव होने हैं और उसी को ध्यान में रखते हुए हेगड़े को मंत्री बनाया गया था। लगता है भाजपा में किसी नेता को तभी प्रोमोशन मिलता है या फिर वो तभी महत्वपूर्ण माना जाता है, जब वो कोई विवादित बयान दे दे, क्योंकि विवादित बयान देना और संविधान पर सवाल उठाना भाजपा नेताओं का शगल बनता जा रहा है.

 

शत्रुध्न सिन्हा ने उमा भारती से जलसमाधि लेने का समय पूछा

नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता और भाजपा नेता शत्रुध्न सिन्हा लगातार भाजपा पर हमलावर हैं. सरकार की खामियों को लेकर भी सिन्हा लगातार सवाल उठाते रहते हैं. चाहे प्रधानमंत्री मोदी हों या फिर सरकार के अन्य मंत्री, सिन्हा सोशल मीडिया पर उनको लेकर अपनी राय जाहिर करते रहते हैं. इसी क्रम में सिन्हा ने आज उमा भारती पर निशाना साधा है. ट्विट कर शॉट गन ने उमा भारती से पूछा है कि वह कब ‘जलसमाधी’ लेंगी.

 सिन्हा ने लिखा है- “आदरणीय उमा भारती जी, आपने कहा था कि अगर माँ गंगा 2018 से पहले साफ नहीं हुईं तो मैं जल समाधि ले लूँगी, कुछ दिन शेष हैं आप कब जल समाधि ले रही हैं?” सिन्हा के ट्विट के बाद हालांकि अभी उमा भारती का जवाब नहीं आया है, लेकिन सिन्हा ने इस मुद्दे को उठाकर उन्हें मुश्किल में डाल दिया है.

असल में उमा भारती को केंद्रीय जल संसाधन और गंगा सफाई मामलों का मंत्रालय दिया गया था. उस दौरान उमा भारती ने कहा था कि ‘मां गंगा के साथ करोड़ों भारतीयों के साथ मेरी भी आस्था जुड़ी है. गंगा के पानी को निर्मल बनाना मेरे जीवन का लक्ष्य है. यदि मेरे कार्यकाल में गंगा का पानी निर्मल नहीं हुआ तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगी.’ हालांकि उमा भारती की इस अभियान के प्रति गंभीरता नहीं होने से गंगा से जुड़ा मंत्रालय छीन लिया गया और उन्हें पेयजल-सैनिटेशन मंत्रालय दे दिया गया था.

उसी दौरान उमा भारती का एक बयान यह भी आया था कि अगर वो 2018 तक गंगा को स्वच्छ नहीं कर पाईं तो जलसमाधी ले लेंगी. जब साल 2018 बीत रहा है तो शत्रुध्न सिन्हा ने उसी मुद्दे को उठाया है.

भीमा कोरेगांव के जश्न से ब्राह्मण महासंघ में कुलबुलाहट

महार रेजीमेंट के सैनिकों के साथ डॉ. अम्बेडकर

पुणे। हर साल की पहली तारीख दलितों के लिए नए साल के साथ एक और जश्न मनाने का होता है. इस दिन दलित समाज के लोग साल 1818 में पेशवाओं पर अछूतों के जीत का जश्न भी मनाते हैं. इस साल इस विजयगाथा के दो सौ साल पूरे हो रहे हैं. दलित समाज के लोग अपने जश्न की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं ब्राह्मण समाज को दलितों का यह जश्न खटकने लगा है.

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने पुणे पुलिस से मांग की है कि दलितों को पेशवाओं की ड्योढ़ी ‘शनिवार वाडा’ में प्रदर्शन करने की अनुमति न दी जाए. ब्राह्मण महासंघ के आनंद दवे का कहना है कि “ऐसे उत्सवों से जातीय भेद बढ़ेगा.” हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसे रोकने की कोई बात नहीं कही है, लेकिन ब्राह्मण महासभा की इस मांग से उनकी कुलबुलाहट का साफ पता चल रहा है.

इसी बीच कई इतिहासकार महारों और पेशवा फ़ौजों के बीच हुए इस युद्ध को विदेशी अँग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारतीय शासकों के युद्ध के तौर पर देखते हैं. उनका तर्क होता है कि अछूत पेशवा के खिलाफ लड़े थे, इसलिए आजाद भारत में इस तरह का जश्न ठीक नहीं है. तथ्यात्मक रूप से वो ग़लत नहीं हैं. पर सवाल यह है कि आखिर महार अँग्रेज़ों के साथ मिलकर ब्राह्मण पेशवाओं के ख़िलाफ़ क्यों लड़े?

असल में भीमा कोरेगांव की लड़ाई महारों के लिए अँग्रेज़ों के लिए लड़ी लड़ाई नहीं थी, बल्कि अपनी अस्मिता की लड़ाई थी. ये उनके लिए चितपावन ब्राह्मण व्यवस्था से प्रतिशोध लेने का एक मौक़ा था क्योंकि उस दौर में पेशवा शासकों ने महारों को जानवरों से भी निचले दर्जे में रखा था. उन्हें गले में हांडी और कमर पर झाड़ू बांध कर रखना पड़ता था, ताकि जमीन से उनके पैरों के निशान साफ होते रहें और उनके द्वारा थूके जाने और उस पर पैर लगने से कोई सवर्ण अपवित्र न हो जाए.

असल में ऐसी अमानवीय व्यवस्था में रहने वाले महार दलित ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की फ़ौज में शामिल होकर लड़े तो वो पेशवा के सैनिकों के साथ साथ चितपावन ब्राह्मण शासकों की क्रूर व्यवस्था के ख़िलाफ़ प्रतिशोध भी ले रहे थे.

जेल में लालू के लिए होगी ये खास सुविधाएं

बिरसा मुंडा जेल जाते लालू यादव

रांची। चारा घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद लालू यादव को पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद इस दिग्गज नेता को रांची के बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया है. हालांकि जेल में होने के बावजूद लालू यादव के लिए स्पेशल सुविधा होगी. उन्हें वीआईपी कैदियों की तरह रखा जाएगा. लालू यादव को यहां अपर डिवीजन सेल में रखा जाएगा. लालू यादव यहां कैदी नंबर 3351 के रूप में रहेंगे.

जेल में लालू यादव को जो कमरा दिया गया है, उसमें अटैच टॉयलेट बाथरूम है. इस कमरे में एक चौकी के अलावा तकिया, कंबल और मच्छरदानी भी है. कमरे में एक टीवी का भी इंतजाम है. रात के खाने में लालू को पालक की सब्जी और रोटी दिए जाने की खबर है. लालू यादव को भोजन बनाने की भी सुविधा मिलेगी. लालू चाहेंगे तो वे बाहर से भी खाना मंगा सकते हैं.

इससे पहले लालू के पीछे पीछे राजद की दर्जन भर गाड़ियां जेल तक आईं. इसमें लालू के दोनों बेटे भी मौजूद थे. तेजस्वी यादव ने जेल प्रबंधन को लालू को पहनने के लिए कुर्ता-पायजामा और गर्म कपड़े के अलावा दवाई भी दी.

 

तो क्या सच में लालू यादव खत्म हो जाएंगे?

खुद को सामाजिक न्याय और गरीबों का मसीहा कहने वाले लालू प्रसाद यादव की राजनीति और परिवार खतरे में है. कई घोटाले और वित्तिय अनियमितता के लिए लालू यादव का पूरा परिवार ही जांच एजेंसियों के शिकंजे में है. तो ताजा घटनाक्रम में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को चारा घोटाले में दोषी करार दिया है. फैसला तीन जनवरी को होगा.

इससे पहले पिछले ही दिनों ईडी यानि प्रवर्तन निदेशालय ने लालू परिवार की पटना स्थित तीन एकड़ भूमि जब्त कर ली है. करीब 45 करोड़ रुपये कीमत वाली इसी जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा था. हालांकि जमीन जब्त करने की कार्रवाई अस्थायी तौर पर की गई है. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय लालू की पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव से पूछताछ कर चुकी है. लालू यादव से भी पूछताछ हुई है. इस मामले में अगर लालू यादव गलत साबित होते हैं तो ईडी जमीन को जब्त कर लेगी. लालू यादव का परिवार और भी कई मामलों में जांच एजेंसियों के निशाने पर है. ऐसे में चारा घोटाले पर फैसला आने के बाद क्या लालू यादव की राजनीति खत्म होने के कगार पर है?

 बीते बिहार चुनाव के बाद लालू यादव जिस मजबूती से उभरे थे, वह इतनी जल्दी धाराशायी हो जाएंगे, इसकी कल्पना बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों ने भी नहीं की होगी. राजनीति को जानने वाले सभी लोगों को लगा कि तमाम बाधाओं को चीरते हुए लालू यादव फिर से सामने आ गए हैं. तेजस्वी यादव के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद लगा कि उन्होंने अपनी अगली पीढी को स्थापित कर दिया है, लेकिन अचानक सब धाराशायी होता दिख रहा है.

लालू यादव जितनी तेजी से और जितने मजबूत होकर बिहार की सियासत में उभरे थे, बिहार में शायद ही कोई दूसरा उभरा होगा. गरीबों के मसीहा, सामाजिक न्याय के पुरोधा, मुसलमानों के हितैषी जैसे तमाम उपाधि लालू यादव को बिहार की जनता ने दी. सत्ता में आने के बाद लालू यादव अक्सर यह दावा करते थे कि वह बिहार में बंगाल के वामदलों से लंबा शासन चलाकर उसका रिकार्ड तोड़ेंगे. और बिहार की राजनीति को समझने वाले जानते थे कि लालू सच बोल रहे हैं. लालू यादव में वो सारी काबिलियत थी, जिसके बूते वह बिहार की सत्ता पर सालों तक रह सकते थे. लेकिन लालू की ताकत कब उनका अहंकार बन गई, उनको खुद पता नहीं चला. वह भूल गए कि लोकतंत्र में सरकारें वोट से बनती हैं और वोट देने वाली जनता को अहंकार पसंद नहीं है. रही सही कसर चारा घोटाले ने निकाल दी.

लालू यादव अदालत द्वारा दोषी ठहराए जा चुके हैं. नियम के मुताबिक अब वह चुनाव नहीं लड़ सकते. कहते हैं किस्मत दुबारा मौका नहीं देती. लेकिन लालू यादव को बिहार की जनता ने दुबारा मौका दिया. हालांकि वह इस मौके को संभाल नहीं पाएं. राजनैतिक विरोधी लालू की हर उस कमजोरी को ढूंढ़ कर सामने ला रहे हैं जिससे वो उन्हें नुकसान पहुंचा सके. शायद राजनीति का यही चरित्र है. लालू यादव के सामने अपने परिवार और अपनी राजनीति दोनों को बचाने की चुनौती है.  लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव का आरोप है कि सभी जांच एजेंसियां दबाव में काम कर रही हैं. वह मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ले जाने की बात कह रहे हैं. तेजस्वी का कहना है कि लालू एक व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा हैं, जिन्हें खत्म करना मुश्किल है. तेजस्वी की बातों में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त बताएगा, लेकिन सच्चाई यह है कि फिलहाल पूरा लालू कुनबा खतरे में है.

ब्राह्मणों को भिखारी कहने वाला मंत्री बर्खास्त

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ओडिशा। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर कृषि मंत्री दामोदर राउत को सरकार से बर्खास्त कर दिया है. बर्खास्तगी का यह फरमान शुक्रवार 22 दिसंबर को आया. पहले राउत से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था लेकिन ऐसा नहीं करने पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें बर्खास्त कर दिया.

अपने बयान में मुख्यमंत्री पटनायक का कहना था कि ‘किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले किसी व्यक्ति को मैं सख्ती से नामंजूर करता हूं. असल में दामोदर राउत की बर्खास्तगी का फैसला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वह बीजू जनता दल (बीजद) के उपाध्यक्ष भी हैं.

यह पूरा विवाद 17 दिसंबर को मल्कानगिरि में एक कार्यक्रम में राउत के दिए एक बयान से शुरू हुआ. इस दौरान ओडिसा के पारादीप से विधायक दामोदर राउत ने कहा कि राज्य के किसी भी हिस्से में कोई भी आदिवासी भीख नहीं मांगता, वहीं जगह-जगह पर ब्राह्मण भीख मांगते दिख जाते हैं. मंत्री के इस बयान के बाद ब्राह्मणों ने जमकर हंगामा काटा. जिसपर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने मंत्री को बर्खास्त कर दिया. ओडिशा में 9 फीसदी ब्राह्मण आबादी है.

 

स्मृति ईरानी के आदर्श गांव में दलितों के लिए अलग पानी और श्मशान|

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने जब सभी सांसदों से एक-एक गांव गोद लेने की अपील की थी, तब भाजपा नेताओं में जैसे इसकी होड़ लग गई थी. पीएम मोदी के गुड बुक में शामिल होने के लिए तमाम सांसदों ने ऐसा किया भी. स्मृति ईरानी भी उनमें से एक थीं. मोदी की करीबी माने जाने वाली गुजरात से राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गुजरात के आनंद जिले के मघरोल गांव को चुना. ईरानी ने सन् 2015 में इस गांव को गोद लिया था, लेकिन इसके दो साल बाद भी यहां की हालत सुधरी नहीं है. यहां जोर-शोर से कार्यक्रमों की घोषणा तो हुई लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा.

इस क्षेत्र के विकास के लिए सांसद निधी से 7 करोड़ रुपये दिए गए. ये पैसे यहां पानी को शुद्ध करने, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार पैदा करने के लिए खर्च होना था, लेकिन ऐसा हो न सका. इसी तरह स्मृति ईरानी के गोद लिए इस गांव में दलितों के साथ भेदभाव भी चरम पर है. इस गांव के दलितों के लिए अलग पानी है. इसी तरह इस गांव के दलित गांव के श्मशान में अपने परिजनों का अंतिम संस्कार नहीं कर सकतें. उन्हें इसके लिए गांव से अलग एक दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है.

इस गांव के विकास के लिए जारी 7 करोड़ रुपये से 41 योजनाओं पर काम होना था. इसके तहत पानी की सुविधा का विकास करना,स्कूल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, अंतिम संस्कार के लिए ग्राउंड, सड़क और पंचायत की बिल्डिंग बननी थी. लेकिन ये सारी घोषणाएं पूरी नहीं हो सकी. तुर्रा यह कि सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए बिना काम के पूरा हुए ही सारा भुगतान कर दिया गया. औऱ आनन फानन में मई 2017 में ही स्मृति ईरानी ने मघरोल को आदर्श गांव घोषित कर दिया. हैरत की बात तो यह है कि बिना पहले की योजनाओं के पूरा हुए 15 करोड़ रुपये की लागत से वाई-फाई कनेक्टिविटी औऱ स्किल डेवलपमेंट सेंटर की योजनाओं की आधारशिला रख दी, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा है.

पिछले साल जुलाई में कांग्रेस के विधायक अमित चावड़ा ने गुजरात हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इसे सांसद निधी का दुरुपयोग का मामला बताया था, जिसके बाद मामले ने तूल भी पकड़ा था. फिलहाल सच्चाई यह है कि गुजरात के आनंद जिले का यह मघरोल गांव आज भी स्मृति ईरानी के विकास के वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहा है. औऱ जो थोड़ा बहुत विकास पहुंचा भी है, वह दलितों से कोसो दूर एक खास समाज के लोगों की जागीर बना हुआ है.

 

अध्यक्ष बनने के बाद मोदी को ऐसे हराएंगे राहुल गांधी

अहमदाबाद। कांग्रेस पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गुजरात विधानसभा चुनाव में भले ही मामूली अंतर से पिछड़ गई हो, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात को लेकर अब भी गंभीर है. विधानसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी की नजर अब 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर टिक गई है. इसके लिए उन्होंने अपनी रणनीति पर काम करना भी शुरू कर दिया है.

राहुल गांधी आज से गुजरात के दौरे पर हैं. इस दौरान गांधी राज्य में पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और नए विधायकों से मुलाकात करेंगे.लेकिन गुजरात पहुंचते ही राहुल सबसे पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए गए. हाल में संपन्न गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान भी राहुल विभिन्न मंदिरों में गए थे जिनमें सोमनाथ मंदिर भी शामिल था.

मंदिर दर्शन के बाद राहुल अहमदाबाद के गुजरात विश्वविद्यालय सभागार में पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होंगे. यहां वह उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात, कच्छ, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के नेताओं से अलग-अलग बैठक करेंगे. असल में यह चिंतन शिविर गुरुवार से चल रहा था. इसके आखिरी दिन अहमदाबाद में बैठक हो रही है, जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.

असल में राहुल गांधी गुजरात विधानसभा चुनाव में मिले वोटों को पार्टी से जोड़कर रखना चाहते हैं, ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा मिल सके. गुजरात में लोकसभा की 26 सीटे हैं और सभी की सभी सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है. जाहिर सी बात है कि राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में इसे भाजपा से छीनकर कांग्रेस की झोली में डालना चाहते हैं. यह मोदी और अमित शाह के लिए भी बड़ा झटका होगा.

   

सलमान की ‘जातिगत’ टिप्पणी पर भड़का वाल्मीकि समाज, थियेटर में तोड़फोड़

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नई दिल्ली. वाल्मीकि समाज को लेकर जातिगत टिप्पणी करते हुए सलमान खान ने कभी नहीं सोचा होगा कि वह इस कदर मुसीबत में फंस जाएंगे. इस मामले में जहां उन पर एफआईआर दर्ज हो चुका है तो वहीं उनकी नई फिल्म का देश के कई शहरों में विरोध शुरू हो गया है. जयपुर में सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का विरोध हो रहा है. लोग इतने भड़के हुए थे कि उन्होंने जयपुर के राज सिनेमाहॉल के बाहर तोड़फोड़ की. प्रदर्शनकारियों ने सलमान खान के पुतले भी जलाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की.

विरोध कर रहे लोगों ने सिनेमाहॉल में लगे फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का होर्डिंग्स हटाकर उसे तोड़ दिया. आगरा और मुरादाबाद में भी फिल्म का विरोध हो रहा है. इससे पहले मामले में नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल ट्राइब ने नोटिस जारी कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली-मुंबई के पुलिस कमिश्नर्स से 7 दिन में जवाब मांगा है. उधर, वाल्मीकि समाज का कहना है कि पब्लिकली गलत शब्द का इस्तेमाल करने से हमारे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है. इस बात से गुस्साए वाल्मीकि समाज ने केस दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

 दरअसल, सलमान खान ने अपनी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ के प्रमोशन के दौरान नेशनल टीवी पर अपने डांस स्टाइल को ‘भंगी जैसा’ करार दिया था. हालांकि यह वीडियो पुराना है लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी वजह से वह मुसीबत में फंस गए हैं. इसी तरह की टिप्पणी शिल्पा शेट्टी भी कर चुकी हैं. हालांकि फिलहाल फिल्म रिलिज होने के कारण सलमान खान वाल्मीकि समाज के निशाने पर हैं.

     

लालू की जिंदगी का फैसला कल

नई दिल्ली। 1996 का चारा घोटाला मामला जिसने राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेर लिया था, उस पर जल्द ही फैसला आने वाला है. यह फैसला 23 दिसंबर यानि कल सुनाया जाएगा. इस अहम फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद व डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित अन्य 22 आरोपीयों के साथ साथ पूरे देश की नजर होगी.

आपको बता दें कि यह मामला 1996 का है जिसमें बिहार में पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये थे, जिसके बाद से लालू यादव को मुख्यमन्त्री के पद से त्याग पत्र देना पड़ा था. इस घोटाले के कई आरोपियों का निधन हो चुका है तो वहीं दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए हैं.

देखा जाए तो सीबीआई की विशेष अदालत में आने वाले इस अहम फैसले पर बिहार की राजनीति पूरी तरह से टिकी हुई है. अगर लालू प्रसाद यादव को कोर्ट ने दोषी ठहराया तो उन्हें तत्काल जेल जाना पड़ सकता है जिससे राजद में बिखराव आने की आशंका जताई जा रही है, यूँ तो तेजस्वी यादव लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी के रूप में आरजेडी की कमान संभालेंगे लेकिन कई नेताओं का कहना ये भी है कि तेजस्वी को अभी राजनीति की उतनी समझ नहीं है, ऐसे में उनके लिए भी पार्टी की कमान को संभालना चुनौतियों से भरा होगा.

इस पूरे मामले में लालू प्रसाद यादव का कहना है कि हम पर और हमारे बच्चों पर केस कर के हमको नीचा दिखाने की कोशिश की गई, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, बीजेपी और आरएसएस जानते हैं कि लालू से मुकाबला नहीं हो सकता है, इसलिए इसे रोक दो. साथ ही कल आने वाले फैसले पर उन्होने कहा कि उन्हे न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और जो भी फैसला आएगा वो उन्हे मंजूर होगा.

पीयूष शर्मा  

मोदी के खिलाफ मोर्चा बनाएंगे जिग्नेश और कन्हैया 

नई दिल्ली। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही उसकी राजनीति से इत्तेफाक नहीं रखने वाले तमाम संगठन उससे नाराज हैं. हैदराबाद में रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या और उसके बाद जेएनयू में कन्हैया कुमार के नेतृत्व में भड़के आंदोलन से इसमें तेजी आई है. तो जिस तरह से गौरी लंकेश की हत्या हुई, उससे विचारों की आजादी की वकालत करने वाले तमाम लोगों को काफी झटका लगा. इस घटना ने विरोधी विचारों को निशाना बनाए जाने के कारण भी भगवा राजनीति की आलोचना को मजबूत किया है.

बीते वक्त में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल औऱ जिग्नेश मेवाणी जैसे तमाम युवा खुलकर भाजपा के खिलाफ उतर आए हैं और भाजपा और मोदी के लिए चुनौती बन चुके हैं. अब ये तमाम युवा नेता एक साझा मंच बनाने पर विचार कर रहे है. जिग्नेश मेवाणी ने बीजेपी और मोदी के खिलाफ अभियान चलाने वाले युवा नेताओं के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाने की बात कही हैं. इसमें कन्हैया कुमार के अलावा शहला रशीद और मोहित पांडेय जैसे युवा नेताओं को शामिल किया जाएगा.

जिग्नेश जिन युवा नेताओं के सहारे अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं, ये सभी 2014 से मोदी और बीजेपी सहित आरएसएस के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. लोकसभा चुनाव में अभी करीब18 महीने का वक्त बचा हुआ है. अगर ऐसा कोई मोर्चा बनता है तो यह आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

 

फिर बाहर आया आरक्षण का जिन्न|

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नई दिल्ली। आरक्षण ऐसा विषय है जिसको लेकर आंदोलन अब आम हो गया है. संविधान में अनुसूचित जाति और जनजाति को आरक्षण मिलने के बाद पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण मिला, लेकिन अब आए दिन अन्य जातियां भी आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करती रहती हैं. राज्यों के चुनाव के दौरान यह आंदोलन और उग्र हो जाता है. गुजरात में पाटीदारों का आंदोलन ताजा उदाहरण है तो अब राजस्थान चुनाव को सामने देख आरक्षण का जिन्न फिर बाहर निकल आया है.

राजस्थान में लंबे समय से पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर समुदाय को राजस्थान सरकार ने आरक्षण देने की घोषणा की है. लेकिन ठहरिए, राज्य सरकार द्वारा दिए आरक्षण को जानकर आप चौंक जाएंगे. सरकार ने उन्हें केवल एक फीसदी आरक्षण देने का निर्णय किया है. और ये एक फीसदी आरक्षण भी गुर्जरों को अकेले नहीं मिला है, बल्कि इसमें गुर्जर सहित पांच जातियां शामिल हैं.

सरकार के इस निर्णय से गुर्जर नेताओं में नाराजगी है. हालांकि इससे पहले राज्य सरकार ने विधानसभा में लाए एक बिल के जरिए गुर्जरों को पांच फीसदी आरक्षण देने का प्रयास किया था, लेकिन सरकार के इस विधेयक पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. इसके बाद चुनावी तैयारियों में लगी भाजपा सरकार ने 21 दिसंबर को गुर्जर सहित पांच अन्य जातियों को एक प्रतिशत आरक्षण देने को निर्णय किया. सर्कुलेशन के जरिए के इस निर्णय को केबिनेट की मंजूरी मिल गई है. हालांकि देखना होगा कि गुर्जर इस हिस्सेदारी वाले आरक्षण से संतुष्ट हो जाते हैं या फिर विधानसभा से पहले फिर से आंदोलन शुरू करेंगे.

क्या फिर होने वाली है नोट बंदी ?

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नई दिल्ली: नोट बंदी हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ था जिसने पुरे देश को लम्बी-लम्बी कतारों में खड़ा होने पर मजबूर कर दिया था . जिस नोट बंदी ने बहुत से मासूम लोगों की भी जान ली थी , माना जा रहा है की वह नोट बंदी फिर से हो सकती है. कुछ अखबारों में प्रकशित हुई खबरों के मुताबिक 8 नवंबर 2016 को हुई नोटेबंदी के बाद चलन में आये 2000 के नोट को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बंद कर सकती है .

“द मिंट” अख़बार में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 2000 के नोट की छपाई बंद करदी गयी है और “द हिन्दू” में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक आर बी आई नोट वापिस ले सकती है या इसकी छपाई बंद कर सकती है और बाजार में सप्लाई कम कर सकती है. एस बी आई की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गयी की आर बी आई 2000 का नोट वापिस ले सकती है या फिर उसकी छपाई पर रोक लगा सकती है. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

गन्धर्व गुलाटी

दलित जज जस्टिस कर्णन को लेकर बड़ी खबर

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के आरोप में छह महीने की सजा पाने वाले कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व दलित जज जस्टिस कर्णन अदालत से रिहा हो गए हैं. अपनी सजा पूरी करने के बाद कर्णन कल 20 दिसंबर को रिहा हो गए. सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर जेल अधिकारियों और पुलिस की सुरक्षा के बीच कर्णन को रिहा कर दिया गया. कर्णन कोलकाता के प्रेसीडेंसी जेल में बंद थे.

जस्टिस कर्णन को लेने के लिए उनकी पत्नी सरस्वती कर्णन और बेटा पहले से मौजूद थे. तामिलनाडु के कोयम्बटूर के रहने वाले जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में 9 मई को छह महीने की सजा सुनाई गई थी. कुछ दिन पुलिस की पकड़ से दूर रहने के बाद 20 जून को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. जस्टिस कर्णन के खिलाफ यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जस्टिस कर्णन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई जज भ्रष्टाचार में लिप्त हैं इसलिए उनकी जांच कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के उठाए सवालों पर संज्ञान लेने की बजाय उनके खिलाफ ही अवमानना का मामला चलाने का फैसला लिया.

केंद्र सरकार की ओर से अटॉनी जनरल ने भी उनके खिलाफ मामला चलाने की वकालत की थी. अदालत में सुप्रीम कोर्ट के जजों और जस्टिस कर्णन के बीच कई बार झड़पें भी हुई. आखिरकार तमाम घटनाक्रम होते हुए पूर्व जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने 9 मई 2017 को 6 महीने कैद की सजा सुनाई थी. पूर्व जस्टिस कर्णन हाई कोर्ट के ऐसे पहले सिटिंग जज थे जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने जेल की सजा सुनाई गई. हाल ही में रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद जस्टिस कर्णन ने अपनी सजा माफ करने की गुहार लगाई थी, लेकिन राष्ट्रपति ने इसका कोई संज्ञान नहीं लिया था.

 

भारत ने दर्ज की श्रीलंका पर 93 रनों की बड़ी जीत, जानिए मैच से जुड़ी ये खास बातें

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कटक: बुधवार को कटक के बाराबती स्टेडियम में खेले गये T-20 के पहले ही मैच में भारत ने शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए श्रीलंका को 93 रनों से बड़ी मात दी. भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में श्रीलंका के सामने जीत के लिए 181 रनों का लक्ष्य रखा था, जिस पर लगातार विकेट खोते हुए श्रीलंकाई टीम 16 ओवरों में 87 रनों पर ही ढेर हो गई. इसी के साथ भारत ने तीन टी-20 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली है. मैच के दौरान जहां श्रीलंकाई टीम के लिए उपुल थरंगा ने सबसे ज्यादा 23 रन बनाए वहीं उनके तीन बल्लेबाज ही दहाई के आंकड़े तक पहुंच सके. भारत की तरफ से युजवेंद्र चहल ने चार, कुलदीप यादव और हार्दिक पांड्या ने दो-दो और जयदेव उनादकट ने एक विकेट लेकर श्रीलंकाई टीम को धूल चटा दी. दिलचस्प बात ये रही की इस मैच में एक ऐसी गेंद भी फेंकी गई जिसमें मनीष पांडे ने 11 रन बटोर लिए. दरअसल, श्रीलंकाई गेंदबाज नुवान प्रदीप ने अपने ओवर की अंतिम गेंद को मनीष पांडे की कमर से ऊपर फेंक दी जिस पर पांडे ने एक शानदार छक्का जड़ दिया. लेकिन अंपायर ने प्रदीप की इस गेंद को नो-बॉल करार कर दिया और पांडे जी को एक और बड़ा शॉट लगाने का मौका मिल गया, मौके का फायदा उठाते हुए मनीष पांडे ने अलगी गेंद पर चौका मार कर 11 रन हासिल कर लिए. आइये नज़र डालते हैं मैच से जुड़ी कुछ खास बातों पर. 1. महेंद्र सिंह धोनी एक T20 मैच में चार विकेट लेने वाले भारतीय विकेटकीपरों में संयुक्‍त रूप से पहले स्‍थान पर आ गए हैं. 2. श्रीलंकाई गेंजबाज एंजेलो मैथ्‍यूज ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में 10वीं बार रोहित शर्मा को पवेलियन का रास्‍ता दिखाया है. मैथ्‍यूज सात बार एकदिवसीय और दो बार टेस्‍ट मैच में उन्‍हें आऊट कर चुके हैं 3. श्रीलंका का T20 मैच में यह दूसरा सबसे कम स्‍कोर है. इससे पहले पिछले साल विशाखापत्‍तनम में श्रीलंकाई टीम भारत के खिलाफ कुल 82 रन बनाए थे. 4. रोहित शर्मा T20 मैच में कप्‍तान के तौर पर 50 मैच जीत चुके हैं. ऐसा करने वाले वह भारत के तीसरे और दुनिया के सातवें खिलाड़ी हैं.

पीयूष शर्मा