राहुल गांधी ने बनाई संचालन समिति, इन दो अहम लोगों को किया शामिल

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के अगले सत्र के लिए नई संचालन समिति (Steering Committee) का गठन किया है. 34 सदस्यीय इस कमेटी में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विशेष रूप से शामिल किया गया है. इसके साथ ही पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी, अहमद पटेल,राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम समेत अन्य को शामिल किया गया है.

यह संचालन समिति कांग्रेस की कार्यसमिति की जगह लेगी. राहुल गांधी द्वारा गठित इस समिति की बैठक 17 फरवरी को कांग्रेस मुख्यालय में होगी. अभी तक कांग्रेस अध्यक्ष समेत कार्यसमिति में कुल 25 सदस्य होते थे, जिसमें 12 का चुनाव होता था और 12 सदस्य पार्टी अध्यक्ष द्वारा मनोनीत होते थे. नई संचालन समिति का गठन होने से राहुल गांधी की टीम सामने आ गई है. इस समिति के जरिए राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वह पार्टी में सीनियर नेताओं की अहमियत को बनाए रखेंगे.

थिएटर ओलंपिक में पाक के नाटक को जगह नहीं

नई दिल्ली। आठवां थिएटर ओलंपिक 17 फरवरी को दिल्ली के लाल किला मैदान से शुरू होगा. रंगमंच की दुनिया का अपनी तरह का यह सबसे खास ओलंपिक 51 दिनों तक चलेगा. इसमें दुनिया के 30 देशों के कलाकार 30 अलग-अलग भाषाओं में नाटक पेश करेंगे. यह पहली बार है जब भारत थिएटर ओलंपिक आयोजित कर रहा है. इस महोत्सव के लिए थीम तय किया गया है “फ्लैग ऑफ फ्रेंडशिप”. लेकिन दोस्ती के इस कारवां में पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्ले को जगह नहीं मिली है.

पाकिस्तान की तरफ से इस रंगमंच महोत्सव में चार थिएटर ग्रुप ने नाटक मंचन का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन एक भी नाटक का चयन नहीं हुआ है. कुछ थिएटर ने इसे स्वीकार कर लिया है तो कुछ ने विरोध जताया है. ‘हुसैन’ नाम का नाटक भेजने वाले आजाद थिएटर के क्रिएटिव डॉयरेक्टर सरफराज अंसारी ने कहा कि ‘उनको भारत से ऐसी ही उम्मीद थी.’ उन्होंने कहा, “बहुत उम्मीद से इस एंट्री को हमने भेजा था. ये पाकिस्तान की कहानी नहीं थी. ये भारत और पाकिस्तान को जोड़ने वाली कहानी थी.”

नीरव मोदी ने पीएनबी में ऐसे किया अरबों का घोटाला

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नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11,360 करोड़ रुपये के घोटाले से देश हिल गया है. इस घोटाले के पीछे जिस शख्स का नाम आ रहा है, वह जाना माना हीरा व्यपारी नीरव मोदी है. यह घोटाला यह बताने के लिए भी काफी है कि अगर भारत में आपका रसूख है तो आप बैंक के अरबों का गबन कर चुपचाप देश छोड़कर जा सकते हैं. हालांकि भारत के सबसे बड़े बैंकों में से एक पंजाब नैशनल बैंक ने इस मामले में लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन बैंक ने इस बात को स्वीकार किया है कि इसमें बैंक के कर्मचारी और खाताधारकों की मिली-भगत है.

2011 से चल रहा यह घोटाला 2018 में सामने आया है. और इसके सामने आने से पहले ही आरोपी नीरव मोदी जनवरी में परिवार सहित देश छोड़कर जा चुका था. पीएनबी का जो घोटाला हुआ है उसमें जो आधारभूत चीज़ है वो है एलओयू यानि कि लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग. जो कि बैंकों में प्रचलित है और आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. असल में जो देश के बाहर से सामान आयात करता है उसे देश के बाहर मौजूद निर्यातकर्ता को पैसे चुकाने होते हैं. इसके लिए अगर आयात करने वाले के पास पैसे नहीं हैं तो बैंक आयातकर्ता के लिए विदेश में मौजूद किसी बैंक को लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग दे देता है. व्यवसायी के लिए बैंक वायदा करता है कि वो निश्चित तारीख को ब्याज के साथ उस बैंक के दिए गए पैसे चुका देगा. बैंकों में आम तौर पर ऐसा होता है.

अब अगर पीएनबी ने विदेश के बैंक को एलओयू दिया है तो वो विदेशी बैंक पीएनबी की गारंटी के ऊपर उस निर्यातकर्ता को जितने पैसे की पेमेंट के बारे में कहा गया है वो कर देता है. एक साल या निश्चित तारीख पर आयातकर्ता पीएनबी को पेमेंट देगा और फिर पीएनबी आगे विदेशी बैंक को ब्याज समेत उनका पैसा लौटा देगा.

नीरव मोदी के मामले में क्या हुआ?

नीरव मोदी के मामले में बैंक ने एलओयू जारी नहीं किए, बल्कि बैंक के दो कर्मचारियों ने फर्जी एलओयू बनाकर दे दिया. इसके लिए इन कर्मचारियों ने स्विफ्ट सिस्टम कंट्रोल का इस्तेमाल किया, जो कि एक अंतरराष्ट्रीय कम्यूनिकेशन सिस्टम है और दुनिया भर के सभी बैंकों को आपस में जोड़ता है. इस सिस्टम के जरिए संदेश को कोड में भेजा जाता है. एलओयू भेजना, खोलना, उसमें बदलाव करने का काम इसी सिस्टम के ज़रिए किया जाता है. यही वजह है कि जब इस सिस्टम के ज़रिए ये संदेश किसी बैंक को मिलता है तो उन बैंक को पता होता है कि ये आधिकारिक और सही संदेश है. और कोई इस पर शक़ नहीं करता.

बैंक की कमी

सबसे पहले तो जिन दो लोगों ने ये किया, उन्हें लंबे समय तक एलओयू डेस्क पर काम नहीं करना चाहिए था. बैंक अक्सर इस डेस्क पर लोगों की अदला-बदली करता रहता है. पीएनबी की ओर से जो एक और कमी हुई वह यह थी कि भेजा गया संदेश स्विफ्ट सिस्टम कोर बैंकिंग से जुड़ा नहीं लगता. क्योंकि कोर बैंकिंग में पहले एलओयू बनाया जाता है और फिर वो स्विफ्ट के मैसेज से चला जाता है. और इस कारण कोर बैंकिंग में दिन, तारीख और राशि को लेकर एक एंट्री बन जाती है. लेकिन इस मामले में स्विफ्ट कोर बैंकिंग से जुड़ा हुआ नहीं था. इन दोनों ने फर्जी मैसेज को स्विफ्ट से भेजा, मैसेज को ग़ायब भी कर दिया और इसकी कोर बैंकिंग में एंट्री नहीं की जिससे कुछ भी पता नहीं चला.

बैंक का सिस्टम बाईपास कैसे हो गया?

अब सवाल उठता है कि बैंक का पूरा सिस्टम बाईपास कैसे हो गया? इसके लिए आपको यह समझना होगा कि अगर कोई चोर कोई निशान या सबूत ना छोड़े तो उसे पकड़ना बहुत मुश्किल होता है. ख़ास कर तब जब कोई संदेह भी नहीं कर रहा है.

असल में आरोपी एक बैंक से पैसे लेते रहे और दूसरे को चुकाते रहें. जैसे कि एक वक्त में पचास मिलियन का एलओयू खोला गया, जब तक अगले साल इसे चुकाने की बारी आई तब तक आरोपियों ने सौ मिलियन का एलओयू और करा लिया. इस तरह उन्होंने पहले लिए गए पचास मिलियन चुका दिए और अगला कर्ज़ किसी और बैंक से खड़ा हो गया. इस प्रकार से ये लेनदेन महीनों तक चलता रहा. इस तरह कर्ज़ की रकम साल दर साल बढ़ती रही.

नियम के मुताबिक इसमें होता यह है कि विदेशी बैंक, भारतीय बैंक के वायदे के मुताबिक पैसे देगा और फिर पैसों के वापिस पाने के लिए दी गई तारीख़ का इंतज़ार करेगा. वो पैसा आ गया तो कोई बात नहीं लेकिन अगर नहीं आया तो उसी सूरत में वो भारतीय बैंक से संपर्क करेगा.

इस मामले में जैसा समझ में आ रहा है कि कुछ साल तक शायद पैसा चुकाने के लिए जो तारीख निर्धारित की जाती होगी, उस दिन या उसके एक दो दिन पहले ही पेमेंट कर दिया जाता होगा. इसीलिए यह घोटाला सामने नहीं आया, और जब ऐसा नहीं हुआ तो यह मामला सामने आ गया. तब तक मामला इतना बड़ा हो गया था कि देश में हड़कंप मच गया.

अब क्या होगा?

जिन कंपनियों ने ये घोटाला किया है उसकी जितनी संपत्ति जब्त होगी, वही पीएनबी को मिलने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि नीरव मोदी ने चिट्ठी दी है और कहा है कि वो पांच-छह हज़ार करोड़ की पेमेंट कर देंगे. लेकिन अगर मोदी के इरादों में इतनी ईमानदारी होती तो वो पहले ही ऐसा कर सकते थे और यह घोटाला होता ही नहीं. जहां तक आगे की बात है तो नीरव मोदी बड़े व्यवसायी और ग्लोबल सिटिज़न हैं. उनकी संपत्ति पूरे विश्वभर में फैली हुई है. उन्हें ढ़ूढ़ना, ज़ब्त करना और फिर उससे पैसों की उगाही करना बेहद मुश्किल है. फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय ने नीरव मोदी के ठिकानों पर छापा मारकर 5 हजार 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. इसलिए जो वसूल हो पाएगा उसके बाद जो रकम नहीं मिल पाएगी, वो एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग एस्सैट हो जाएगा. सीधे तौर पर कहें तो यह बैंक का नुक़सान होगा लेकिन अगर दूसरे तरीके से देखें तो बैंकों के पास मौजूद पैसा ग्राहक का होता है. यानि नीरव मोदी देश के आम आदमी को हजारों करोड़ की चपत लगाकर फरार हो चुके हैं.

कंटेंट साभार बीबीसी

सत्ता के लिए फिर रथयात्रा के मोड में भाजपा

भारत के लोगों ने कभी यह नहीं सोचा होगा कि राम को लेकर एक वक्त देश की राजनीति इतनी गरमा जाएगी कि कोई राजनीतिक दल राम का इस्तेमाल राजनीति और सत्ता के लिए करेगा. राम और रथयात्रा के जरिए पहले ही तमाम प्रदेशों और देश की केंद्रीय राजनीति पर कब्जा कर चुकी भाजपा एक बार फिर रथयात्रा मोड में आ गई है. इसका नाम रामराज्य रथयात्रा दिया गया है, हालांकि इस बार सीधे तौर पर इस यात्रा से न जुड़कर इसको परोक्ष रूप से शुरू किया गया है.

इस बार किसी नेता की जगह महाराष्ट्र स्थित एक कथित धार्मिक संगठन श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसायटी और विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठनों के नेता इसके मुख्य रथयात्री हैं. 12 फरवरी को अयोध्या से विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री ने झंडी दिखाकर इसे रवाना किया. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पहले इस यात्रा को मुख्यमंत्री योगी को रवाना करना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. तो वहीं इस यात्रा को लेकर जितने समर्थन की संभावना जताई जा रही थी, वह भी नहीं मिला.

यहां देखने वाली बात यह है कि यह यात्रा तब शुरू कि गई है जब कुछ समय बाद ही केरल, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में चुनाव होने हैं. तो वहीं 2019 में लोकसभा चुनाव भी तय है. यह महज संयोग नहीं है कि इस रथयात्रा का रास्ता इस तरह तय किया गया है कि यह उन सभी रास्तों से गुजरेगी जहां विधानसभा चुनाव होने हैं. जहां तक भाजपा की बात है तो यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान से उसका दोहरा चरित्र उजागर होता है. मौर्या ने एक बयान में कहा है कि रथयात्रा सरकार की नहीं है लेकिन वह शहर आए तो उसका स्वागत करिए.

यह यात्रा तब शुरू की गई है जब हाल ही में एक अन्य यात्रा के नाम पर यूपी के कासगंज में सांप्रदायिक दंगा हो चुका है. ऐसे में क्या गारंटी है कि राम मंदिर के नाम पर आयोजित इस नई रथ यात्रा में सब ठीक रहेगा. इसी दौरान दिल्ली से एक और रथयात्रा निकाली गई, जिसे इंडिया गेट से हरी झंडी के बजाय भगवा झंडा दिखाकर देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रवाना किया. इस दूसरी रथ यात्रा का नाम ‘जल-मिट्टी रथ यात्रा’ रखा गया है. देश के कोने-कोने से यह रथ-यात्रा जल और मिट्टी लेकर दिल्ली पहुंचेगी, जहां 18 से 25 मार्च के बीच लालकिले पर महायज्ञ होगा. इस महायज्ञ का नाम ‘राष्ट्र रक्षा महायज्ञ’ रखा गया है.

20वीं सदी में इस तरह के महायज्ञ के जरिए देश की रक्षा की बात करना मजाक के सिवा कुछ नहीं है. यह भारत के लोगों को यह उसी सदी में ले जाने की कोशिश है, जिसके बारे में यह प्रचारित किया जाता है कि किसी तपस्वी द्वारा किसी महिला को देख लेने भर से वह गर्भवती हो जाती थी. हालात तब और बुरे हो जाते हैं जब इस तरह के आयोजनों से सीधे सरकार या फिर उसके संगठन जुड़े होते हैं. हालांकि यह तय है कि यह भाजपा द्वारा फिर से सत्ता हासिल करने की एक कोशिश भर है. अपने तमाम वादों औऱ दावों को पूरा करने में फेल हो जाने वाली भाजपा की कोशिश एक बार फिर देश के लोगों को रथयात्रा और महायज्ञ के जरिए बेवकूफ बनाने और उनकी आस्था से खिलवाड़ करने की है.

2019 के लिए मायावती का EBM फार्मूला

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बसपा प्रमुख मायावती

नई दिल्ली। चुनाव चाहे कोई हो बहुजन समाज पार्टी इसकी तैयारी अपने विपक्षियों से पहले शुरू कर देती है. जहां तमाम दल अपनी रणनीति, घोषणा पत्र और प्रत्याशियों के बीच उलझे रहते हैं, बसपा ज्यादातर वक्त सबसे पहले प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर देती है. अब जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में काफी कम वक्त रह गया है, बसपा ने अपनी रणनीति तय कर ली है. खबर है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बसपा ने EBM फार्मूला तैयार किया है.

EBM यानी अति पिछड़ा, ब्राह्मण और मुस्लिम. दलितों के अलावा इन तीनों समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए बसपा प्रदेश भर में भाईचारा सम्मेलन करेगी. अभियान को सफल बनाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कई टीमें बनाई गई हैं. पार्टी ने अपने इस अभियान की शुरुआत पीलीभीत से राजा सुहेलदेव राजभर की 1009वीं जयंती और रविदास जयंती से कर दी है. इन दोनों कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.

पार्टी सूत्रों के अनुसार बहुजन समाज पार्टी ने दलित वोटबैंक के साथ ही सर्वसमाज को जोड़ने के लिए मुहिम तेज कर दी है. इसमें सबसे ज्यादा ध्यान अति पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण और मुस्लिम वर्ग पर है. इसके लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं की एक टीम बनाई है, जिसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर और विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा जैसे पिछड़े समाज के नेता पिछड़े वर्ग को पार्टी से जोड़ने के अभियान की अगुवाई करेंगे. तो वहीं ब्राह्मण समाज को जोड़ने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा कमान संभालेंगे. इनके अलावा मुस्लिम मतदाताओं को पार्टी के समर्थन में लाने की कमान राज्यसभा सांसद मुनकाद अली और नौशाद अली सहित अन्य मुस्लिम नेता संभालेंगे. अपने इस फार्मूले के जरिए बसपा 2019 में अपनी स्थिति बेहतर करने की तैयारियों में जुट गई है. वह कितना सफल होगी यह चुनाव के बाद आने वाला परिणाम बताएगा.

भाजपा मुझे जेल से बाहर नहीं आने देगी – चंद्रशेखर रावण

भीम आर्मी डिफेंस कमेटी के संयोजक प्रदीप नरवाल का एक लेख चिट्ठी चर्चित वेबसाइट ‘द वायर’ में प्रकाशित हुई है. उसका जिक्र करना इसलिए जरूरी है कि यह लेख आपको जेल जाने के बाद से अब तक चंद्रशेखर रावण के बारे में बताते हैं. वैसे जो चंद्रशेखर के जेल जाने के बाद उनसे कई लोग मिलने गए लेकिन प्रदीप उन कुछ एक लोगों में हैं, जिन्होंने हर महीने चंद्रशेखर रावण से जेल में मुलाकात की. इस आलेख में प्रदीप ने उन सारी बातों का जिक्र किया है, जो इन बीते महीनों में चंद्रशेखर औऱ प्रदीप के बीच हुई.

चंद्रशेखर को शेखर बुलाने वाले प्रदीप ने लिखा है- हमारी ये लड़ाई और हमारी दोस्ती 9 मई के बाद शुरू हुई थी. 8 जून 2017 को चंद्रशेखर आजाद को जेल हुई थी, तब से मैं लगभग हर महीने चंद्रशेखर से मिलता रहा हूं. जब पहली बार 18 जून को मैं शेखर से जेल में मिलने गया तो लगा जल्द सब ठीक हो जाएगा, शायद सब जल्द जेल से बाहर आ जाएंगे. तब भीम आर्मी के लगभग 42 कार्यकर्ता और शब्बीरपुर गांव के सोनू पहलवान जेल में थे. देखते-देखते 5 महीने बीते और धीरे-धीरे लगभग सभी लोगों को जमानत मिल गई. आखिरी में बस तीन व्यक्ति जेल में थे, सोनू पहलवान, कमल वालिया और चंद्रशेखर.

1 नवंबर 2017 को चंद्रशेखर और कमल वालिया को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन 2 नवंबर को साथी शेखर पर रासुका लगा दी. रासुका सोनू पहलवान पर भी लगी थी. 25 जनवरी 2018 को मैं आखिरी बार चंद्रशेखर से मिला था, तब उसे एक चिट्ठी मिली थी जिसमें लिखा था कि एडवाइजरी बोर्ड ने साथी शेखर पर 6महीने तक रासुका पक्की कर दी है और ये आगे भी बढ़ाई जा सकती है. साथ ही सोनू सरपंच पे भी रासुका पक्की हो गई है. हर बार की तरह चंद्रशेखर के चेहरे पर वही हंसी थी, जो 18 जून से मैं लगातार देख रहा हूं, चेहरे पर कोई शिकस्त नहीं, मिलते ही मुस्कान और देखते ही जोर से जय भीम बोलना.

18 जून से आज तक करीब 7 महीने से अधिक समय हो चुका है, बीच में कई बार शेखर के परिवार से मिला, उनके भाई से मिला. उनकी मां बहुत हिम्मत वाली है पर वक्त की कठोरता कई बार उनकी आंखों में भी आंसू ला देती है. लगभग 2 महीने पहले शेखर को खराब सेहत के चलते मेरठ अस्पताल में भर्ती कराया गया था पर वहां से भी बिना ठीक इलाज के उन्हें वापस जेल भेज दिया गया.

आज तक शेखर ने कभी कोई शिकायत नहीं की, जब मिलता हूं तो बाबा साहेब की, साहेब कांशीराम, भगत सिंह और नेल्सन मंडेला की बात होती है. हर बार हंसते-हंसते कब मुलाकात का समय खत्म हो जाता है कि पता ही नहीं चलता. लेकिन इस बार बात कुछ और थी. 9 मई के बाद शेखर पर 27 मुकदमे लगे थे जिसमें से उनको सब में जमानत मिल गयी है.

शेखर ने हंसते-हंसते बताया कि उसके आखिरी केस की जमानत का ऑर्डर और रासुका की चिट्ठी एक ही दिन आई. रासुका का लेटर तो पढ़ने से पहले ही उसने दस्तखत कर दिया और बाद में पढ़ा क्योंकि उसे पता था कि इसमें क्या लिखा होगा. उसने कहा, ‘ जो मैंने सोचा था वही लिखा था, दलितों के लिए हुक्मरानों की एक चुनौती और धमकी की दास्तान कि अपने हक मत मांगो वरना ऐसे ही जेल में सड़ोगे.’

आज पूरे देश का शोषित समाज चंद्रशेखर आजाद की रिहाई का इंतजार कर रहा है, लेकिन रिहाई तो दूर है, सवाल आज इस लड़ाई में जिंदा रहने का है. शेखर पिछली बार बोले कि उनकी जेल का तबादला किया जा सकता है. बात ही बात में कई बार शेखर कहते हैं, ‘समाज के लिए काम करने का बहुत मन है लेकिन भाजपा कभी मुझे जेल से बाहर आने नहीं देगी, मैं मायूस नहीं दिख सकता, किसी के सामने आंखों में आंसू लाकर टूट नहीं सकता क्योंकि मेरे समाज को लोगों ने बहुत तोड़ा है, अभी तो बस एक चारा है वो है समाज के लिए संघर्ष.’

अब मेरा भी जेल में जाने का मन नहीं होता क्योंकि जब आप जेल में किसी राजनीतिक साजिश से आरोपी बनाए व्यक्ति से मिलते हैं तो उसे आपसे बड़ी उम्मीद होती है कि आप कुछ करेंगे और उनकी बेगुनाही साबित करेंगे. – द वायर में प्रकाशित प्रदीप नरवाल के आलेख का अंश

इस दिग्गज नेता को फूलपुर से चुनाव लड़वाना चाहते हैं कांग्रेसी

नई दिल्ली। देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू की संसदीय सीट फूलपुर में उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. इस बीच सभी दलों के उम्मीदवार की चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में स्थानीय कांग्रेसियों ने भी अपने उम्मीदवार के तौर पर प्रियंका गांधी को उतारने की मांग तेज कर दी है.

इलाहाबाद की कांग्रेस कमेटी ने फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने के लिए बकायदा प्रस्ताव पास किया है. इलाहाबाद जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने पार्टी दफ्तर में बैठक कर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से न सिर्फ प्रियंका वाड्रा को पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने की मांग की है, बल्कि इस मांग का प्रस्ताव भी पेश कर उसे पार्टी हाईकमान को भेजा है. बैठक में आम सहमति से यह दलील दी गई है कि पंडित नेहरू का चुनावक्षेत्र रही फूलपुर सीट पर प्रियंका वाड्रा को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस न सिर्फ यह सीट जीत लेगी, बल्कि 2019 के आम चुनाव से पहले मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का बिगुल भी फूंक सकती है. फूलपुर की सीट यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने से खाली हुई थी. गौरतलब है कि फूलपुर सीट पर नेहरू गांधी परिवार के सदस्य पांच बार चुनाव जीते हैं. प्रियंका के परनाना पंडित नेहरू यहां से तीन बार सांसद रहे हैं जबकि उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित दो बार.

छत्तीसगढ़ में मनरेगा मजदूरों को नहीं मिल रहा है पैसा

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छत्तीसगढ़। प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मनरेगा का मजाक उड़ाया था. उन्होंने कांग्रेस का मजाक उड़ाते हुए कटाक्ष किया था कि वह मनरेगा को जिंदा रखेंगे, ताकि लोगों को पता चल सके कि कांग्रेस ने कैसी योजना शुरू की थी. लेकिन वही भाजपा की सरकार अब मनरेगा मजदूरों से काम तो करवा रही है, लेकिन उनको पैसे नहीं दे रही है. छत्तीसगढ़ से खबर है कि वहां मनरेगा मजदूरों को 2015 से पैसे नहीं मिले.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह सवाल खुद भाजपा के विधायक ने उठाया. प्रश्नकाल के दौरान बिलाईगढ़ से भाजपा विधायक डॉ. सनम जांगड़े ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के कम से कम 20 ग्राम पंचायतों में काम पूरा होने के बाद भी मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ है. जांगड़े ने कहा कि 2015 से 20 ग्राम पंचायतों में मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है. भाजपा विधायक के सवाल उठाने के बाद विपक्ष ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया. इसके बाद और भी कई अन्य विधायक जांगड़े के प्रश्न के समर्थन में उतर आये और दावा किया कि पूरे प्रदेश मे यही हाल है. विधायकों ने विधानसभा की समिति बनाकर जांच की मांग की. साथ ही मजदूरों को ब्याज समेत भुगतान की मांग करते हुए सदन से वाक आउट कर दिया.

खेत में खड़े होकर सनी लियोनी बचा रही है किसान की फसल

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नेल्लोर। सनी लियोनी इन दिनों एक खेत में खड़े होकर एक किसान की फसल को बुरी नजर से बचा रही है. असल में आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले के बंदकिंडपल्ली गांव में रहने वाले एक शख्स ने अपने खेत में मॉडल और बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोनी की पोस्टर लगा रखी है. किसान का नाम है चेंचू रेड्डी. उनका कहना है कि अपनी फ़सल को बुरी नज़रों से बचाने के लिए उन्होंने ये पोस्टर लगाया है.

रेड्डी के पास 10 एकड़ ज़मीन है और वो बैंगन, गोभी, मिर्च और भिंडी जैसी सब्जियां उगाते हैं. रेड्डी के अनुसार, खेत में इस साल फ़सल बढ़िया हुई है और वो आते-जाते ग्रामीणों और राहगीरों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही है. इसलिए लोगों का ध्यान भटकाने के लिए रेड्डी ने सनी लियोनी का पोस्टर लगाया है. और इस पोस्टर पर लिखा है कि मुझे देखकर रोइये मत.

राम मंदिर को लेकर हो रही है डील, लखनऊ में FIR

लखनऊ। अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने वाली है. इसी बीच मंदिर की जमीन को लेकर एक विवाद सामने आ गया है. खबर है कि राम जन्मभूमि को लेकर डील की बात की जा रही है. असल में श्री श्री रविशंकर के करीबी अमरनाथ मिश्रा ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेंबर रहे सलमान नदवी के खिलाफ लखनऊ के हसनगंज पुलिस स्टेशन में खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में कहा गया है कि नदवी राम मंदिर के नाम पर मस्जिद का दावा छोड़ने के एवज में 5 हजार करोड़ की डील चाहते थे.

राम जन्मभूमि सद्भावना समिति के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा ने नदवी पर 15 फरवरी को अयोध्या का इस्लामीकरण करने का आरोप लगाया. मिश्रा ने कहा था कि यह फॉर्मूला दरअसल उनका था जो उन्होंने 5 फरवरी को सलमान नदवी और दूसरे मुस्लिम नेताओं को दिया था, लेकिन उसी मुलाकात के दौरान सलमान नदवी ने इस डील के एवज में 5000 करोड़ रुपए, अयोध्या में 200 एकड़ जमीन और राज्यसभा की एक सीट मांगी थी.

अमरनाथ मिश्र द्वारा हसनगंज थाने में दिया गया शिकायती पत्र

अमरनाथ मिश्रा के मुताबिक उनसे यह बात इसलिए की गई ताकि नदवी ये बात सुन्नी बोर्ड और मुस्लिम पक्षकारों से करें. ताकि समझौते का कोई फॉर्मूला निकल सके. इस खबर के सामने आने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने नदवी को बोर्ड से बाहर कर दिया है. बोर्ड ने गुरुवार को श्री श्री रविशंकर के साथ नदवी की बैठक में इस संबंध में डील की बात करने को लेकर उन्हें बोर्ड से अलग कर दिया. हालांकि इस खबर के सामने आने के बाद राम जन्मभूमि को लेकर एक नया तरह का विवाद सामने आ गया है.

जानिए कौन हैं आंख मारने वाली वह लड़की?

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सोशल मीडिया पर सनसनी बनकर उभरी लड़की प्रिया प्रकाश है. प्रिया 18 साल की बीकॉम फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हैं. वो केरल के त्रिशूर में रहती हैं. प्रिया की अपकमिंग मलयालम फिल्म ‘उरु आदर लव’ का गाना ‘मानिक्य मलाराया पूवी’ है. ये उनकी डेब्यू फिल्म है. गाना वैलेंटाइन वीक में वायरल हो गया है. यह फिल्म 3 मार्च को रिलीज होगी.

गाने के वायरल होने के बाद प्रिया को इंस्टाग्राम पर एक दिन में 6 लाख से भी ज्यादा लोगों ने फॉलो किया है. इसके साथ ही प्रिया प्रकाश ने काइली जेनर और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी हस्तियों की बराबरी पर पहुंच गईं हैं. ये गाना शान रहमान ने कंपोज किया है. अब इस गाने के पीछे की कहानी सामने आ रही है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रिया का वायरल गाना पीएमए जब्बार के फेमस ‘मप्प‍िला पट्टु’ का नया वर्जन है. इसे 1992 में एक एल्बम में शामिल किया गया था.

गाने में पैगम्बर मोहम्मद साहब की पहली पत्नी, खदीजा बीवी के बारे में जिक्र है. नए वर्जन की तरह इसका ओर‍िजनल गाना भी काफी पॉपुलर हुआ था. इस गाने के कई मॉडिफाइड वर्जन पहले से यूट्यूब पर मौजूद हैं. मप्प‍िला पट्टु पारंपरिक मुस्लिम गाने के तौर पर मशहूर है. इसे नॉर्थ केरल के मलयालम में गाया जाता है, जिसमें अरबी, उर्दू, फारसी के शब्द मौजूद है. इसे खासतौर पर शादी के मौकों, स्कूल में प्रोग्राम के दौरान गाया जाता है.

‘जिस देश में लड़की के आंख मारने से लाखों फालोअर्स हो जाएं वहां का युवा पकौड़े बेंचने के लायक ही है’

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इंटरनेट पर नई सनसनी बन कर उभरी प्रिया प्रकाश

नई दिल्ली। हेडिंग में लिखी गई टिप्पणी मध्य प्रदेश के हौशंगाबाद में बीजेपी खेल प्रकोष्ठ के जिला संयोजक संजीव मिश्रा की है. मिश्रा ने यह बयान इंटरनेट सनसनी प्रिया प्रकाश को लेकर दिया है. असल में प्रिया प्रकाश वारियर के वायरल गाने पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. पहले फिल्म को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में FIR दर्ज हुआ और गाने पर बैन लगाने की मांग की गई है तो वहीं एक बीजेपी नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर इस पर रोक लगाने की मांग की है.

 भाजपा नेता संजीव मिश्रा ने बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर वीडियो पर रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने एक लंबा चौड़ा फेसबुक पोस्ट लिखते हुए इससे नुकसान का भी जिक्र किया है. संजीव मिश्रा ने युवाओं को सलाह देते हुए लिखा, ‘लड़की के फॉलोअर्स बनने से अच्छा है पकौड़े बेचें. उन्होंने यह भी लिखा, जिस देश में केवल लड़की के आंख मारने से 24 घंटे के भीतर लाखों फालोअर्स हो जाएं उस देश का युवा पकौड़े बेंचने के लायक ही है.

 दूसरी ओर प्रिया प्रकाश वारियर के वायरल गाने पर धार्मिक विवाद भी शुरू हो गए हैं. बुधवार को गाने के बोल से धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है. आंध्र प्रदेश में एक FIR भी दर्ज की गई है. शिकायत में गाने के बोल में धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल पर ऐतराज जताया गया.

लोन चाहने वाले छात्रों के लिए जरूरी खबर

पटना। बिहार सरकार ने शिक्षा लोन को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत सामान्य और पिछड़ा वर्ग के छात्रों को 4 प्रतिशत ब्याज दर पर शिक्षा लोन मिलेगा, जबकि अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के साथ-साथ सभी वर्ग की छात्रों को सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर शिक्षा लोन मिलेगा. वित्त निगम के जरिए अप्रैल से इस ब्याज दर पर विद्यार्थी लोन ले सकेंगे. इस बारे में कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही अधिसूचना जारी हो जाएगी. उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम 4 लाख रुपए तक लोन मिलेगा.

वित्त निगम के मुताबिक लोन चाहने वालों को कुल 36 कोर्स के लिए लोन मिलेगा. इसमें ग्रेजुएशन, बीसीए, बीएससी एग्रीकल्चर, बीएड,डिप्लोमा इन प्राइमरी एजुकेशन, फिजियोथैरेपी, फैशन डिजाइनिंग, एएनएम, जीएनएम, होटल मैनेजमेंट, आयुर्वेद व होमियोपैथ में बैचलर या डिप्लोमा डिग्री, एमएससी, पीएचडी, कचरा प्रबंधन, बीए, बीएससी, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग, मेडिकल, आलिम, शास्त्री, डिप्लोमा इन फूड आदि कोर्स शामिल हैं. कैसे करें आवेदन

  • स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शिक्षा ऋण लेने के लिए छात्रों को ऑनलाइन आवेदन देना पड़ेगा. छात्रों की सहायता के लिए सभी जिलों में जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र बनाए गए हैं.
  • आवेदन देने पर छात्र के ई-मेल या मोबाइल पर वन टाइम पासवर्ड मिलेगा. पोर्टल पर पासवर्ड डालने के बाद वेज पेज खुलेगा, जिस पर पूरी जानकारी देनी होगी.
  • परामर्श केंद्र पर छात्रों को 12वीं का प्रमाणपत्र के साथ जिस कोर्स में नामांकन लिया है, उसकी फीस, आधार नंबर, माता व पिता के बैंक अकाउंट की छह माह की जानकारी देनी होती है. नौकरी मिलने के बाद सूद सहित होगी वसूली असल में शिक्षा लोन देने में बैंकों की आनाकानी के बाद वित्त निगम बनाया गया है. लेकिन जरा ठहरिए, लोन लेने से पहले कुछ जरूरी बातों को जान लेना बहुत जरूरी है.
  • जैसे कि शिक्षा विभाग से अनुशंसित आवेदकों पर ही निगम से शिक्षा लोन मिल सकेगा.
  • छात्रों की फीस और संबंधित शहर में रहने पर होने वाला खर्च जोड़ कर लोन स्वीकृत होगा.
  • पढ़ाई पूरी होने व नौकरी पा लेने के बाद लोन की राशि ब्याज सहित चुकानी होगी.
  • इस योजना से लोन लेने के लिए जाति और आय का बंधन नहीं है.
  • बैंकों से शिक्षा लोन 9 से 11 % ब्याज पर मिल रहा है.

“वैलेंटाइन हमारी संस्कृति नहीं है ” 

अपने आपको धर्म और संस्कृति के रखवाले बताने वाले लोगों का दल वैलेंटाइन के दिन ज्ञान बांटेगा की यह हमारे देश की संस्कृति नहीं है. ऐसे त्यौहार भारत देश में नहीं मनाने के लिए दबाब डालेंगे और कोई नहीं मांगी तो उसको लाठी – डंडों से मारेंगे. देश के कानून और संविधान की सरेआम धज्जियाँ उड़ाते हुए प्रेमी – प्रेमिकाओं को लज्जित और बदनाम करें की कोशिश करेंगे. चाहे अपने आप परदे के पीछे कितने भी काण्ड किये हों.

वैलेंटाइन हमारी संस्कृति नहीं है मगर हम अंग्रेजों के बने हवाई जहाज में सफर करेंगे.

अंग्रेज हमे पसंद नहीं हैं मगर उनकी बनी हुई रेलवे, इमारते ,जहाज ,गाड़ियां, घड़ियाँ, जूते, कपडे, साबुन, टीवी इस्तेमाल करेंगे.

अंग्रेज हमें पसंद नहीं मगर उनकी कंपनी , देश में जाकर काम करेंगे.

वैलेंटाइन हमारी संस्कृति नहीं मगर हम उनके बनाये कंप्यूटर, लैपटॉप, नई नई तकनीक इस्तेमाल करेंगे.

वैलेंटाइन हमारी संस्कृति नहीं है मगर हम उनके बनाये फेसबुक, व्हाट्सप्प, इंस्टाग्राम, ट्विटर सब इस्तेमाल करेंगे और अपने आपको आधुनिक भी बताएँगे.

आखिर कौन सी संस्कृति है भाई तुम्हारी, किस संस्कृति की बात करते हो ?

क्या वही संस्कृति जिसके जरिए भिक्षा के नाम पे भीख मांगते थे ?

क्या वही संस्कृति जब घोडा तांगा, पैदल, कच्चे रास्ते, कीचड भरे रस्ते, गु से भरी नालियां होती थी.

क्या वही संस्कृति जिसमें देश के लोगो को जातियों एवं वर्णों में बांटकर अपने आपको ऊँचा और दुसरो को नीचा बताना था ?

क्या वही संस्कृति जिसमें देश के तीन चौथाई लोगों को शूद्र और नीच बताकर उनके सामाजिक अधिकारों को छीनकर अपने घरों में रखा.

क्या वही संस्कृति जिसमें कुछ जाती विशेष को इसलिए नीच बोला गया क्यूंकि वह एक जाती या वर्ग विशेष में पैदा हुआ हो ?

क्या वही संस्कृति जिसमें अगर किसी अन्य जाती के व्यक्ति ने आपको छू भर लिया, आपके नलके से पानी ले लिए तो आप को अछूतपन की बीमारी हो जाती थी.  क्या यही पिछड़ापन, भेदभाव और तिरस्कार ही है तुम्हारी संस्कृति में …दोगले कहीं के.

भारत देश का यह सौभाग्य रह अहइ की यहां पर अंग्रेज आये और उन्होंने इस देश के लोगो को मानवता भी सिखाई. सबके लिए बराबर कानून व्यवस्था और समान शिक्षा के लिए आधुनिक स्कूल, कॉलेज, विश्विद्यालय बनवाये.

लेखक – नवीन कुमार बौद्ध सॉफ्टवेयर इंजीनियर एवं मानव अधिकार कार्यकर्ता ह्यूमन राइट एंड सोशल जस्टिस विंग, गुडगाँव.

मशहूर शायर फैज अहमद फैज की लवस्टोरी

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साल 1941 में फ़ैज़ ने एक अंग्रेज़ महिला एलिस से श्रीनगर में विवाह किया था और उनका निकाह पढ़वाया था उस समय कश्मीर के सबसे बड़े नेता शेख़ अब्दुल्ला ने. फ़ैज़ के नवासे अली मदीह हाशमी उस घटना के बारे में बताते हैं, ”1941 में श्रीनगर में उनका निकाह हुआ था. मेरी नानी ने मुझे बताया कि फ़ैज़ उनके लिए एक अंगूठी लेकर आए थे. एलिस ने पूछा कि पैसे कहां से आए अंगूठी ख़रीदने के, तो उन्होंने कहा कि मियां इफ़्तखारुद्दीन से उधार लिए हैं लेकिन हम उनको वापस नहीं करेंगे.”

पत्नी एलिस के साथ मशहूर शायर फैज अहमद फैज

हाशमी ने बताया, ”एलिस ने अंगूठी पहनी. वो उन्हें बिल्कुल फ़िट आई. उन्होंने फ़ैज़ से पूछा- नाप कहां से मिला? फ़ैज़ ने कहा मैंने अपनी उंगली का नाप दिया. इसे कहते हैं परफ़ैक्ट फ़िट. हमारी उंगलियां भी बराबर हैं. उस शादी में उनकी तरफ़ से तीन बाराती गए थे और शाम को हुए दावते-वलीमा में जोश मलीहाबादी और मजाज़ भी शामिल हुए थे.” 1962 में फ़ैज़ को सोवियत संघ ने लेनिन शांति पुरस्कार से नवाज़ा था. चूंकि फ़ैज़ को दिल का दौरा पड़ चुका था इसलिए उन्हें हवाई जहाज़ से सफ़र करने की मनाही थी. वो कराची से नेपल्स पानी के जहाज़ से गए थे और फिर वहां से तीन दिनों का ट्रेन का सफ़र करते हुए मॉस्को पहुंचे थे.

  • साभार- बीबीसी में रेहान फजल के लिखे आलेख से

क्या 2021 की जनगणना में गिनी जाएगी जाति

नई दिल्ली। भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी. 2021 में देश में अगली जनगणना होनी है. इस संबंध में पिछले महीने की केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. इसमें 2021 की जनगणना के बारे में तमाम बातें तय हुई. जनगणना को लेकर हुई इस बैठक के बाद इसमें जाति को शामिल किए जाने को लेकर बहस शुरू हो गई है.

असल में 1872 से लेकर 1931 तक जनगणना में जाति गिनी गई. 1941 में भी जाति गिनी गई, लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध के कारण इसके आंकड़े सामने नहीं आ पाएं. आज़ादी के बाद सरकार ने तय किया कि जनगणना में अब जाति नहीं गिनी जाएगी. और इस तरह 1951 से लेकर 2011 तक की जनगणना में जाति नहीं गिनी गई. 1872 के बाद से हर जनगणना में धर्म और भाषा के बारे में सवाल पूछे गए, लेकिन आजादी के बाद से जाति का सवाल पूछना बंद हो गया. लेकिन पिछले दो दशक में दलित और पिछड़े वर्ग में आई राजनैतिक जागरूकता के बाद जाति जनगणना का सवाल उठने लगा. इस मामले में संसद तक में बहस हुई जिसमें पिछड़े वर्ग के शरद यादव और गोपीनाथ मुंडे ने इस मामले को जोर शोर से उठाया. खासकर पिछड़े वर्ग के लोग अपनी जाति की संख्या जानने के लिए जातिगत जनगणना की मांग करने लगे. जाति जनगणना के पक्षधर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने भी बीबीसी में एक आलेख लिखकर इस मामले को उठाया है.

वैसे तो इन जानकारियों के लिए सर्वेक्षण भी होते रहते हैं और इसके लिए भारत सरकार का नेशलन सैंपल सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) भी है. लेकिन सर्वेक्षण में आबादी के एक छोटे हिस्से से जानकारियां ली जाती हैं. तमाम आंदोलन के बावजूद जातिगत जनगणना को लेकर सत्ता वर्ग उदासीन रहा है. सवर्ण समाज जो कि आजादी के बाद से ही देश की केंद्रीय सत्ता पर काबिज है, वह जाति जनगणना से डरता आया है. जाति जनगणना के पक्षधर लोगों का आरोप है कि सवर्ण समाज यह सोच कर डरता है कि इससे उनकी मामूली संख्या उजागर होगी औऱ दलितों औऱ पिछड़े वर्ग की जातियां जिनकी संख्या ज्यादा है उन्हें अपनी ताकत का अहसास होगा. फिलहाल देखना है कि इस बार की जनगणना में सरकार जाति का सवाल शामिल करती है या नहीं.

इलाहाबाद के दलित लॉ छात्र की हत्या को लेकर रोष जारी

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मृतक दिलीप

नई दिल्ली। प्रतापगढ़ के रहने वाले और इलाहाबाद में रहकर क़ानून की पढ़ाई करने वाले दलित स्टूडेंट की हत्या का मामला जोर पकड़ता जा रहा है. इस मामले में छात्रों का ग़ुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ है. वहीं दूसरी ओर इस घटना को लेकर विधानसभा में भी हंगामा जारी है. हत्या की पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के ज़रिए लोगों के सामने आने के बाद से हर कोई इस विभत्स घटना की निंदा कर रहा है. देश के तमाम विश्वविद्यालयों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर दिलीप के लिए इंसाफ की मांग की है.

तीन भाइयों और दो बहनों में दिलीप सबसे छोटे थे. उनके बड़े भाई महेश चंद्र बताते हैं कि घटना की रात उन्हें एक पुलिस कांस्टेबल ने जानकारी दी. रायबरेली में सांख्यिकी अधिकारी के पद पर तैनात महेश चंद्र का कहना है कि “मैं तो उस वीडियो को पूरा देखने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाया. कितनी बेरहमी से पीटा गया है मेरे भाई को. कोई देख ले तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं. क्या कहें, सबसे लाडला भाई था हमारा, दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है हम पर.” वहीं दिलीप की मां और बहनों के आंसू अब भी ताजा हैं. हत्या की घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर एक प्रतिनिधमंडल के साथ पीड़ित परिवार से मिल चुके हैं. दिलीप को कुछ लोगों ने बेरहमी से मारा पीटा था, जिसके बाद रविवार को अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी.

ममता बनर्जी ने कहा ‘मोदी केयर’ को ना, जानिए क्यों

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नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना ‘मोदी केयर’ को बंगाल में लागू नहीं करेंगी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार अपनी गाढ़ी मेहनत से जुटाए गए संसाधनों को इस कार्यक्रम में लगाकर बर्बाद नहीं करेगी.

राज्य के कृष्णानगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, ‘केंद्र सरकार एक ऐसी स्वास्थ्य योजना लेकर आई है, जिसमें 40 फीसदी फंड राज्यों को देना होगा. सवाल उठता है कि राज्य सरकारें एक और कार्यक्रम के लिए पैसा क्यों खर्च करें, जब उनके पास पहले से ही ऐसा कार्यक्रम है? राज्य के पास संसाधन होगा तो वह अपनी योजना चलाएगा.’ ममता ने कहा कि बंगाल में तो उनकी सरकार ने अस्पतालों में भर्ती और उपचार को पहले से ही मुफ्त कर रखा है. बंगाल सरकार ने अपने स्वास्थ्य साथी कार्यक्रम का लाभ अब तक 50 लाख लोगों तक पहुंचाया है.

इस घोषणा के साथ ही मोदी केयर से इंकार करने वाला बंगाल देश का पहला राज्य बन गया है. केंद्रीय बजट में घोषित 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा देने की सरकार की यह योजना ‘मोदीकेयर’ के नाम से मशहूर है.

अमेरिका ने दी, पाकिस्तान को 2160 करोड़ की मदद…

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अक्टूबर से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2019 के लिए 40 खरब डॉलर का वार्षिक बजट पेश किया. बजट में पाकिस्तान के लिए 25.6 करोड़ डॉलर (1645 करोड़ रुपए) की असैन्य मदद एवं आठ करोड़ डॉलर (514 करोड़ रुपए) की सैन्य मदद का प्रस्ताव दिया गया है. इस तरह अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान के लिए लगभग 2160 करोड़ रुपए की सहायता का प्रस्ताव रखा है.

पाकिस्तान को मदद के प्रस्ताव से कुछ हफ्ते पहले ट्रंप प्रशासन ने अपनी जमीं से काम कर रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई ना करने के लिए पाकिस्तान को मिलने वाली करीब दो अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता पर रोक लगा दी थी. तब व्हाइट हाउस ने कहा था कि आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने पर वह रोक हटाने पर विचार करेगा.

 

बाइक रैली को लेकर अमित शाह और सीएम खट्टर को जाट समाज ने दी खुली चुनौती

फाइल फोटोः अमित शाह और मनोहर खट्टर

नई दिल्ली। 15 फरवरी को हरियाणा के जिंद में प्रस्तावित भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली को लेकर तनाव बढ़ गया है. भाजपा और प्रदेश सरकार ने इसे जहां अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है तो अमित शाह को किसी भी कीमत पर रोकने के लिए जाट समाज भी जी-जान से जुट गया है. आलम यह है कि जिले में पहले से तैनात सुरक्षा बलों की छह कंपनियों के बाद 10 और कंपनियों की मांग की गई है. तो दूसरी ओर जाट समाज के नेता गांवों का दौरा कर शाह की बाइक रैली को नाकाम करने के लिए समाज के लोगों को एकजुट कर रहे हैं.

असल में जाट समाज जाट आरक्षण की मांग कर रहा है, जिसे सीएम मनोहर खट्टर ने खारिज कर दिया है. जिसके बाद जाट संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती वो अमित शाह की बाइक रैली नहीं होने देंगे. जाट समाज अपने प्रभाव वाले इलाकों को जटैत कहता है. जाट नेताओं ने अमित शाह को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि “मांगें मानै तो जटैत में आवै नहीं तो अमित शाह देश में और किते रैली कर ले.”

शाह की रैली को विफल बनाने के लिए जाट समाज ने पूरी रणनीति तैयार कर ली है. इसके तहत समिति जींद में एंट्री करने वाली सभी सातों सड़कों पर नाके लगाने की घोषणा की है. उन्होंने पुलिस को चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने उन्हें रोका तो वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को वहीं खड़ा कर सड़कें जाम कर देंगे. लिंक मार्गों पर महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है, जो बैल-बुग्गी लेकर सड़कों पर डटेंगी. अब देखना यह है कि 15 फरवरी को भाजपा और अमित शाह अपनी इज्जत बचा पाते हैं या नहीं.