टॉपर है डॉ. आंबेडकर की नई पीढ़ी

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पिछले कुछ दिनों से आप सोशल मीडिया पर घूमती कुछ तस्वीरों को देख रहे होंगे। देश के तमाम राज्यों और जिले से टॉपरों की सूची में शामिल ये नाम गर्व करने वाले हैं। ये वो नाम हैं, जिन्होंने हाल ही में आए दसवीं और 12वीं की परीक्षाओं में टॉप किया है। कुछ ने अपने राज्य में तो कईयों ने अपने जिलों में। खास बात यह है कि इसमें कुछ नाम ऐसे भी शामिल हैं, जिन्होंने तमाम अभाव और गरीबी के बावजूद लाखों मेरिटधारियों को पछाड़ दिया है।

बात देश के टॉपर से शुरू करते हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले तुषार कुमार सिंह ने सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में सौ प्रतिशत अंक हासिल कर देश भर में टॉप किया है। तुषार ने 500 में से 500 अंक हासिल किए हैं। उनके माता पिता दोनों प्रोफेसर हैं। तुषार ने दो साल पहले 10वीं की परीक्षा में भी 97 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। तुषार दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए कोर्स में दाखिला लेकर सिविल सेवा की तैयारी करना चाहते हैं। खास बात यह है कि तुषार के पिता ने अपने बच्चों को आंबेडकरवाद का पाठ पढ़ाया है और पूरा परिवार अंबेडकरवादी है।

अब आपको झारखंड ले चलते हैं। झारखंड में लीजा उरांव सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा में पूरे झारखंड में टॉपर बनी हैं। उन्होंने 99 फीसद अंक हासिल किया हैं। लीजा को इंग्लिश में 99, हिदी में 100, मैथ में 98, साइंस में 99, सोशल साइंस में 98 और आइटी में 100 अंक मिले हैं। कटहल मोड़ की रहने वाली लीजा उरांव के पिता दशरथ उरांव और माता संयुक्त कच्छप दोनों टीचर हैं। माता-पिता और नानी लीजा के प्रेरणास्रोत हैं। लीजा के दिल में अपने समाज के लिए काफी दर्द है, और वह उसकी बेहतरी के लिए काफी कुछ करना चाहती हैं। परिणाम आने के बाद स्थानीय मीडिया से बातचीत में लीजा ने कहा कि वह आगे चलकर आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ना चाहती हैं। लीजा भी तुषार की तरह सिविल सर्विस में जाना चाहती हैं। झारखंड बनने के बाद यह पहला मौका है जब आदिवासी समाज का कोई बच्चा स्टेट टॉपर बना है।

अब पंजाब चलिए। पंजाब में इन दिनों जसप्रीत कौर का नाम चर्चा का विषय है। जसप्रीत ने पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में टॉप किया है। जसप्रीत ने अपनी मेहनत के बूते 99.5 प्रतिशत अंक हासिल किया है। जसप्रीत ने 450 अंकों में से 448 अंक हासिल किया है।

बेहद गरीबी में पलने वाली जसप्रीत के पिता एक नाई हैं, और लोगों के बाल काटते हैं। जसप्रीत ने न तो कोई ट्यूशन किया और न ही उन्हें गाईड करने वाला ही कोई था, बावजूद इसके कड़ी मेहनत के बूते जसप्रीत ने यह मुकाम हासिल किया और बता दिया की नामुमकिन कुछ भी नहीं। जसप्रीत का सपना उच्च शिक्षा का है। वह एम.ए और एम.फिल के बाद इंग्लिश की टीचर बनना चाहती हैं।

जसप्रीत के पिता बलदेव सिंह पिछले 24 साल से नाई का काम करते हैं। मां मनदीप कौर गृहणी हैं। परिवार गरीबी में जीता है। जसप्रीत ने 10वीं में 79 प्रतिशत अंक हासिल किया था। तब उन्हें पता था कि उनके पिता ट्यूशन कराने में सक्षम नहीं हैं, सो उन्होंने कड़ी मेहनत की, खुद पर भरोसा रखा और 12वीं में अव्वल आईँ।

पंजाब के बाद राजस्थान में भी एससी समाज के युवा ने परचम लहराया है। राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन, अजमेर द्वारा जारी 12वीं के परिणाम में प्रकाश फुलवारिया टॉपर बने हैं। प्रकाश 99.20 प्रतिशत लाते हुए 500 नंबरों में 496 अंक हासिल कर टॉपर बने हैं। प्रकाश की तैयारी इतनी शानदार थी कि 496 अंक आने के बावजूद वो असमंजस में हैं कि उनके 4 नंबर क्यों कट गए। उनके पिता का नाम चन्ना राम और मां का नाम संतोष देवी है।

अब प्रकाश के नंबरों पर नजर डालते हैं। अपनी मेहनत के बूते प्रकाश ने हिन्दी में 100 अंक, इंग्लिश में 99 अंक, पोलिटिकल साइंस में 98, हिस्ट्री में 100 और हिन्दी साहित्य में 99 अंक हासिल किया है। प्रकाश के पिता चनणाराम कमठा एक मजदूर हैं। प्रकाश आईएएस बनना चाहते हैं।

जिलों में भी बाबासाहेब के बच्चों ने शानदार सफलता हासिल की है।

हरियाणा की प्रेरणा दयाल ने हरियाणा शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में गुरुग्राम जिले की टापर बनी हैं। प्रदेश में उनका स्थान पांचवा है। प्रेरणा ने 500 अंकों में से 493 अंक हासिल किए हैं। प्रेरणा का परिवार अंबेडकरवादी है। प्रेरणा आगे कानून की पढ़ाई कर जज बनना चाहती हैं। प्रेरणा के आदर्श बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर हैं। उन्हीं के पद चिन्हों पर चलते हुए प्रेरणा देशहित में और महिलाओं के उत्थान की दिशा में काम करना चाहती हैं। प्रेरणा के पिता राम किशोर दयाल और मां सीमा दयाल हैं। प्रेरणा के बड़े पिता आर. के दयाल तो अम्बेडकरी आंदोलन में खासे सक्रिय हैं। गुरुग्राम जिले में ही साईकिल रिपेयर करने वाले पिता की बेटी मीनू ने जिले में दूसरा स्थान हासिल किया है।

तो दूसरी ओर यूपी के मेरठ जिले में आयुषि राज 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में टॉपर बनी हैं।

मैंने जिन बच्चों का भी जिक्र किया, उनमें दो बातें कॉमन है। पहली बात सभी टॉपर हैं। किसी ने प्रदेश में तो किसी ने अपने जिले में टॉप किया है। दूसरी बात सब के सब एससी-एसटी समाज के बच्चे हैं, जिन्हें आमतौर पर अंडरमेरिट मान कर खारिज कर देने का रिवाज रहा है। लेकिन इन बच्चों में कईयों ने अभाव के बीच सफलता हासिल कर बता दिया है कि वो बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के वंशज हैं, जिन्हें दुनिया विद्वान मानती है। वो ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के वंशज हैं, जिन्होंने शिक्षा को सबसे ऊपर रखा था। खासबात यह भी है कि इन टॉपर्स में लड़के भी हैं, लड़कियां भी हैं। और तमाम युवा बाबासाहेब सहित बहुजन नायकों को अपना आदर्श मानते हैं। साफ है कि यह बाबासाहेब आंबेडकर के समाज की नई पीढ़ी है, जिसने मौका मिलते ही साबित कर दिया है कि मेरिट किसी के घर की बपौती नहीं होती, बस मौका मिलना चाहिए।

हां, एक बार और, समाज को जसप्रीत और ऐसे ही अन्य मेधावी बच्चे जो अभाव में हैं, उनकी मदद को आगे आना चाहिए।

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