महागठबंधन के लिए कांग्रेस ने खड़ी की मुश्किल

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नई दिल्ली। 2019 के सियासी संग्राम में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने का जो अभियान कांग्रेस लेकर चली थी, खासकर यूपी में वो बिखरता नजर आ रहा है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी जिस तरह से टिकटों का बंटवारा कर रही है, वह महागठबंधन के लिए मुश्किल पैदा करने वाला है. कांग्रेस ने जिस तरह टिकटों के बंटवारे में मुस्लिम प्रत्याशियों को तरजीह दी है, वह दलित-यादव-मुस्लिम समीकरण के भरोसे उत्तर प्रदेश की 78 सीटें फतह करने का सपना देखने वाली सपा-बसपा गठबंधन के लिए परेशान करने वाला है. इससे बहुजन समाज पार्टी के लिए ज्यादा मुश्किलें दिखाई दे रही हैं.

कांग्रेस की ओर से जारी उम्मीदवारों की लिस्ट में मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर और अमरोहा चार ऐसे लोकसभा क्षेत्र हैं, जिसने कांग्रेस की मंशा बता दी है. इन सभी जगहों पर कांग्रेस ने कद्दावर मुस्लिम चेहरों को मौका दिया है. कांग्रेस पार्टी ने मुरादाबाद से जाने-माने शायर इमरान प्रतापगढ़ी, बिजनौर से नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सहारनपुर से इमरान मसूद और अमरोहा से राशिद अलवी को टिकट दिया गया है. ये चारों सिर्फ प्रत्याशी भर नहीं हैं, बल्कि इनकी अपनी अलग खास पहचान भी है. इमरान प्रतापगढ़ी मशहूर शायर हैं और जनता के बीच उनका क्रेज काफी है. नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी मायावती के राइट हैंड कहे जाते थे, और यूपी के कुछ खास क्षेत्रों में मुस्लिमों के बीच उनकी पैठ से इंकार नहीं किया जा सकता. तो वहीं इमरान मसूद पश्चिम यूपी में कांग्रेस के सबसे मुखर चेहरे के तौर पर उभरे हैं. इसी तरह राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के नाते राशिद अलवी पूरे देश में अपनी पहचान रखते हैं. अल्वी एक दौर में बसपा में भी रह चुके हैं.

इन चारों सीटों के समीकरण को देखें तो गठबंधन के लिए विपरीत परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं. इन चारों लोकसभा क्षेत्रों में मुसलमान वोट निर्णायक भूमिका में है. मुरादाबाद सीट पर वह 45 फीसदी, बिजनौर सीट पर 38 फीसदी, सहारनपुर सीट पर 39 फीसदी और अमरोहा सीट पर37 फीसदी मुस्लिम वोट हैं. मुरादाबाद में तो अब तक इस सीट पर हुए 17 चुनावों में से 11 बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने बाजी मारी है. जहां तकसहारनपुर सीट की बात है तो राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले इमरान मसूद को 2014 में मोदी लहर के बाजवूद 34 फीसदी वोट मिले थे, जबकि बीजेपी से जीतने वाले राघव लखनपाल को 39 फीसदी मत प्राप्त हुए थे. ऐसा की कड़ा मुकाबला अमरोहा सीट पर भी होता दिख रहा है. जेडीएस छोड़कर बसपा में शामिल हुए कुंवर दानिश अली अमरोहा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, इसी सीट पर कांग्रेस ने राशिद अल्वी को उतारकर उनकी चुनौती बढ़ा दी है. ऐसे में इन दोनों की लड़ाई में बीजेपी को भी बड़ा मौका मिल सकता है.

अब सवाल यह है कि कांग्रेस आखिर महागठबंधन और खासकर मायावती को नुकसान क्यों पहुंचाना चाहती है. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस ऐसा एक खास रणनीति के तहत कर रही है. चर्चा यह भी है कि जिस तरह बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस पर एक के बाद एक हमले कर रही थीं, उससे खार खाए कांग्रेस ने भी उन जगहों पर बसपा को घेरना शुरू कर दिया है, जहां वह बड़े नामों को उतार सकती है. अब बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस की इस नीति से महागठबंध और खासकर बसपा को नुकसान होगा या फिर बसपा अपनी रणनीति के जरिए अपने प्रत्याशियों की नैया पार लगाने में कामयाब होगी. या फिर कहीं बसपा और कांग्रेस की इस लड़ाई में कहीं भाजपा तो बाजी नहीं मार ले जाएगी. एक बड़ा सवाल यह भी है कि कहीं कांग्रेस की इस रणनीति का प्रभाव पूरे उत्तर प्रदेश में न हो, क्योंकि अगर ऐसा होता है तो यह महागठबंधन के लिए खतरे ही घंटी होगी.

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