Saturday, February 14, 2026

ओपीनियन

ऐसे ही चलता रहा तो नहीं हो पाएगा दलितों का विकास

देश में प्रमोशन में आरक्षण को खत्म करने का षड्यंत्र 2012 से चला था. उस वक्त देश में सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी कांग्रेस की सरकार थी. जिसको दलितों और पिछड़ों की मसीहा पार्टी माना जाता था. मगर ये सरकार नहीँ सरकाट होगी अब...

What the gods drank

I was amused to read in the media that there was a ruckus in the Rajya Sabha over the alleged association of Hindu deities with alcohol. Since the objectionable remarks were expunged, I am not able to refer specifically to the god or to...

क्या भाजपा का दलित प्रेम खोखला है?

ऩई दिल्ली। रामनाथ कोविंद के रूप में भारत के इतिहास में दूसरी बार एक दलित भारत का राष्ट्रपति बना है. इसके पहले केवल के. आर. नारायणन ही भारत के राष्ट्रपति थे जो कि दलित थे. लेकिन उत्तर भारत से राष्ट्रपति बनने वाले देश के...

‘आम आदमी’ एवं ‘दलित’ की नई राजनीतिक परिभाषा

नई दिल्ली। राजनीति समाज में भ्रम फैलाने वाला सर्वोच्च, संगठित एवं सर्वाधिक शक्तिशाली संस्थान है. और भ्रम फैलाने का सबसे अच्छा माध्यम यह है कि शब्दों के परंपरागत-संस्कारगत अर्थों को भ्रष्ट करके उनकी परिभाषायें बदल दी जायें. इस राजनीतिक औजार की सबसे अधिक जरूरत...

क्या कोविंद के आने से दलितों का भला होगा?

भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले गठबंधन की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने के पहले कोविंद भारतीय राजनीति की आला कतार में नहीं देखे जाते थे. सत्ताधारी गठबंधन ने उनके नाम का एलान किया तो ये राजनीति के जानकारों के लिए एक 'सरप्राइज' था. कोविंद की...

लोकतंत्र के सिर पर बंधा गरीबी का कफन

पिछले दिनों की बात है. उत्तर प्रदेश में एक महिला ने गरीबी और भूख के कारण दम तोड़ दिया. मृत महिला के चार बच्चों के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि अपनी मां का अंतिम संस्कार भी कर सकें. बच्चों ने भीख मांगकर...

तथागत साबुन पर ऐसे निकला था योगी सरकार का गुस्सा

उत्तर प्रदेश के दलित संगठनों (डायनमिक एक्शन ग्रुप, बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, जन मंच, तथा पीयूसीएल) द्वारा मेरे नेतृत्व में 3 जुलाई, 2017 को लखनऊ प्रेस क्लब में 12 बजे से 4 बजे तक “दलित उत्पीड़न तथा समाधान” विषय पर परिचर्चा तथा प्रेस वार्ता...

दलित समाज की चेतना कब जागेगी?

सीवर में लोगों और शहरों की गंदगी साफ़ करने वाले कर्मी सालाना सैकड़ों की संख्या में मर रहे हैं, सालाना हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मजदूरों की मजदूरी और रोजगार के ठिकाने नहीं हैं. पंद्रह लाख रोजगार इसी साल खत्म कर दिए गये....

‘दलितों के लिए देश नहीं, ख़ुद लड़ना होगा उन्हें’

क्या जातीय हिंसा और भेदभाव से देश और इसे भुगतने वाले दलित, दोनों एक बराबर प्रभावित होते हैं? क्या देश के सभी नागरिकों के साथ एक समान व्यवहार करने के मामले में भारत 70 सालों में कुछ बेहतर हो पाया है या फिर हालात पहले...

मोदीराज में भारत के शिक्षण संस्थानों का तेजी से हुआ भगवाकरण

मोदी सरकार के पिछले तीन साल भारतीय शिक्षा प्रणाली पर हमले के तीन साल हैं. इस हमले को किसी एक पक्षीय रूप से ना समझा जा सकता है ना ही परिभाषित किया जा सकता है, वास्तव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राजनीतिक ईकाई...

भारतीय प्रजातंत्र का खेल

भारतीय प्रजातंत्र का यह अजब खेल है कि एनडीए एवं यूपीए दोनों ने ही दलित समाज के व्यक्ति को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. एनडीए ने भाजपा के वरिष्ठ नेता/कार्यकर्ता, दो बार के राज्यसभा सांसद एवं बिहार के वर्तमान गवर्नर रामनाथ कोविंद...

भाजपा की दलित राजनीति का सच

राजनीति की कोई भाषा और परिभाषा नहीं होती. समय, काल, परिस्थितियों के अनुसार जो बात उसके हित में हो, वही उसकी विचारधारा और सिद्धांत बन जाती है. राजनीति नित नए नारे गढ़ती और सीमा विस्तार में अधिक विश्वास करती है. देश की राजनीति और राजनेताओं...

सावधान! फिर सक्रिय हो रहे हैं साधु-संत

आमतौर पर लोग अप्रतिरोध्य बनकर उभरी भाजपा की शक्ति के प्रमुख स्रोत के रूप में डॉ.हेडगेवार द्वारा स्थापित आरएसएस को ही चिन्हित करते हैं, जो गलत भी नहीं है. किन्तु हरि अनंत हरि कथा अनंता की भांति भाजपा की शक्ति के स्रोत भी अनंत...

सरकार का भोंपू बन गया है मीडिया

"Not In My Name" जून के अंतिम सप्ताह में दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के बुद्धजीवियों का जमावड़ा हुआ जिसको किसी मीडिया चैनल पर प्रसारित होते आपने नहीं देखा होगा. केवल एक चैनल जिसपर पिछले दिनों सीबीआई की रेड पड़ी थी उसने अपने प्राइम...

जाति, लैंगिक, राजनीति और दलित मुक्ति का प्रश्न कोविंद बनाम कुमार

समाज और संस्थानों में भले ही दलितों का शोषण, भेदभाव और अत्याचार बदस्तूर जारी हो, लेकिन राजनीति में ‘दलित’ शब्द अब तक ब्रांड वैल्यू बनाए हुए है, इसका बाजार गर्म है. कम से कम इतना तो मानना पड़ेगा कि डॉक्टर आंबेडकर और संविधान द्वारा...

देश में दलितों की स्थिति में क्या कोई सुधार आया है

दलितों से छुआछूत का मामला हो या मंदिर में प्रवेश को लेकर टकराहट या उनसे व्यभिचार की घटनाएं- लगभग हर रोज देश के किसी न किसी कोने से देखने-सुनने को मिल जाती हैं। मंदिर में प्रवेश के मसले पर दलितों की हत्या तक कर...

क्रिकेट एक हिन्दू विरोधी खेल है!

एक बहुत ही गंभीर बात है. 1857 में गाय की चर्बी कारतूस में होने के चलते अंग्रेजों की फौज में जीवन- यापन के लिये काम करने वाले सैनिकों नें हथियार डाल दिये थे और लड़ने से इन्कार कर दिया था. इस धार्मिक आपत्ति को...

दलित दस्तक के पांच साल पर प्रोफेसर विवेक कुमार की टिप्पणी

आज के दिन बर्बस साहिर लुधियानवी का शेर याद आता है. मैं तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग साथ आते गए, कारवां बनता गया. साथियों दलित दस्तक के पांच वर्ष पूरे होने पर पूरे बहुजन समाज को बहुत-बहुत साधुवाद. बहुजन समाज...

भीम आर्मी स्थापित दलित नेतृत्व से निराशा का परिणाम

21 मई, 2017 दलित आंदोलनों के इतिहास में एक खास दिन के रूप में चिन्हित हो गया. इस दिन एक गुमनाम युवा, भीम आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के आह्वान पर दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर नयी सदी में दलित शक्ति का...

मीडिया में सहारनपुर कहां है?

सहारनपुर से लौटे एक युवा रिपोर्टर ने यह कहकर मुझे चौंका दिया कि जिन दिनों वहां पुलिस मौजूदगी में सवर्ण-दबंगों का तांडव चल रहा था, दिल्ली स्थित ज्यादातर राष्ट्रीय न्यूज चैनलों और अखबारों के संवाददाता या अंशकालिक संवाददाता अपने कैमरे के साथ शब्बीरपुर और...
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ओपीनियन

January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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