बेशर्मी भरा है सरकार का यह बयान कि ऑक्सीजन की कमी से देश में कोई नहीं मरा

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एक चौंकाने वाला और बेशर्मी भरा बयान केंद्र सरकार की ओर से आया है, जिसमें कहा गया है कि कोविड के कोहराम के दौरान देश में किसी की भी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई।

थोड़ा पीछे चलिए, मार्च के आखिरी हफ्ते से जून के आखिरी हफ्ते तक के उस तीन महीने के दौर को याद करिए….., जब गंगा में लाशे तैर रही थीं……., जब श्मशान भी रो रहा था। जब लोग अस्पतालों के बाहर अपने नाते-रिश्तेदारों की जान बचाने की गुहार लगा रहे थे। उस तस्वीर को याद करिए जब ऑटो में बैठी एक महिला अपने पति की जान बचाने के लिए उसके मुंह में मुंह लगाकर उसे ऑक्सीजन देने की नाकाम कोशिश करती दिखी थी। जब लोग ऑक्सीजन सिलेंडर की चाहत में एक जिले से दूसरे जिले, यहां तक की एक राज्य से दूसरे राज्य का चक्कर काट रहे थे। और ऑक्सीजन नहीं मिल सकने के कारण उनके परिजन दम तोड़ रहे थे। लेकिन मोदी जी की यह सरकार देश की संसद में दिन दहाड़े यह झूठा बयान दे रही है कि देश में ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा।

हालांकि यह सरकार तो आए दिन झूठ बोलने के कारण एक्सपोज भी हो चुकी है। लेकिन इस बार का झूठ सिर्फ झूठ नहीं, बल्कि अपराध है। क्योंकि यह झूठ देश की संसद में बोला गया। केंद्र सरकार की तरफ से मंगलवार को कहा गया है कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई है। फिलहाल संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है और इस दौरान सदन में कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से पूछा था कि क्या यह सच है कि Covid-19 की दूसरी लहर में कई सारे कोरोना मरीज सड़क पर और अस्पताल में इसलिए मर गए क्योंकि ऑक्सीजन की किल्लत थी? इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार द्वारा दिये गए लिखित उत्तर में बताया कि ‘स्वास्थ्य राज्य का विषय है और किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि किसी की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है।’

आप देश की जनता हैं, आप खुद से पूछिए कि क्या आपका कोई दोस्त, कोई रिश्तेदार, कोई सगा ऑक्सीजन की आस में आखिरी सांस लेने को मजबूर नहीं हुआ? और भीतर से जो जवाब आए उसे मानिए, क्योंकि हमारे देश की सरकार को झूठ बोलने की आदत सी हो गई है। यह झूठ तब बोला जा रहा है जब इसी सरकार का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की डिमांड काफी बढ़ गई थी। महामारी की पहली लहर के दौरान ऑक्सीजन की मांग 3095 मीट्रिक टन थी जो दूसरी लहर के दौरान बढ़ कर करीब 9000 मीट्रिक टन हो गई। ……… और आश्चर्य तो यह है कि केंद्र से अपने सुर में सुर मिलाते हुए तामिलनाडु, बिहार और मध्यप्रदेश राज्य ने भी दावा किया है कि उनके प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत से कोई मौत नहीं हुई।

जब भारत की संसद में कोरोना को लेकर झूठे आंकड़े दिए जा रहे थे, उसी मंगलवार के दिन वाशिंगटन के अध्ययन संस्थान सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट की ओर से जारी रिपोर्ट में कोरोना से 34 से 49 लाख लोगों के मरने का दावा किया गया। इस रिपोर्ट को अभिषेक आनंद, जस्टिस सैंडफर और चार सालों तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन भी शामिल हैं। अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबित इस दावे के पीछे सरकारी आंकड़ों, अंतरराष्ट्रीय अनुमानों, सेरोलॉजिकल रिपोर्टों और घरों में हुए सर्वे को आधार बनाया गया है। अमेरिकी अध्ययन में कहा गया है कि भारत में जनवरी 2020 से जून 2021 के बीच कोविड-19 से लगभग 50 लाख (4.9 मिलियन) लोगों की मृत्यु हुई है। अमेरिकी अध्ययन में इन मौतों को विभाजन और स्वतंत्रता के बाद से देश की सबसे बड़ी मानव त्रासदी बताई गई है।

यह आंकड़ा भारत सरकार के आंकड़ों से 10 गुना से भी ज्यादा है। क्योंकि वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या तीन करोड़ 12 लाख से ज्यादा है जबकि संक्रमण से अब तक चार लाख 18 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, ऐसा बताया जा रहा है।

इस बीच सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार जहां ऑक्सीजन की कमी से मौतों को नकार रही है, वहीं वह टीकाकरण की कमी को भी नकार रही है। जबकि आज भी देश में सिर्फ सात फीसदी से कम आबादी का ही पूरी तरह टीकाकरण हो पाया है। लोग अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोविड वैक्सीन नसीब नहीं हो रहा है। भारत के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगस्त में तीसरी लहर सामने आ सकती है। उससे ठीक पहले सरकार का इतना बड़ा झूठ देश की आम जनता के गले से कैसे उतर पाएगा। क्या झूठ बोलने वाली इस सरकार पर ही मुकदमा नहीं चलना चाहिए।

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