मध्यप्रदेश के सागर में मनुवाद का नंगा नाच, दस महीने में एक दलित परिवार में तीन हत्याएं

पहले उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया, जब भाई ने आवाज उठाई तो उसकी हत्या कर दी गई। मामले में चाचा राजेन्द्र गवाह थे, तो 25 मई को उनकी भी हत्या कर दी गई और जब चाचा का शव लेने के लिए पीड़िता अंजना एंबुलेंस से गई तो एंबुलेंस से संदिग्ध हालात में गिरने पर उसकी भी मौत हो गई है। इस घटना को लेकर दुनिया भर के दलितों में रोष है। कुछ लोग इसे हत्या बता रहे हैं तो पुलिस जांच की बात कह रही है।
मध्य प्रदेश के सागर में घटी इस घटना ने समाज का घिनौना चेहरा एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह सारा घटनाक्रम अगस्त 2023 में शुरू हुआ, जब 18 वर्षीय युवक नितिन अहिरवार की जातिवादी गुंडो ने पीट-पीट कर हत्या कर दी। क्योंकि उसने बहन के साथ हुई यौन उत्पीड़न का विरोध किया था। इस मामले में ऊंची जाति के जातिवादी गुंडे उस पर समझौते के लिए दबाव डाल रहे थे। भाई की हत्या के बाद पीड़िता अंजना ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई। लालू की हत्या के तीन गवाह थे। चाचा राजेन्द्र, दूसरी खुद अंजना और तीसरी उसकी माँ। तब से ऊंची जाति के जातिवादी गुंडे लगातार परिवार पर बयान बदलने के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन परिवार न्याय के लिए लड़ रहा था। इस मामले में अब एक के बाद तीन मौत हो चुकी है।

 पिछले साल अगस्त महीने में जब यह घटना घटी, उसी दौरान सागर में सतगुरु रविदास जी का मंदिर बनाने के लिए 101 करोड़ की लागत से 11.21 एकड़ भूमि में रविदास मंदिर बनाने की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी थी। दलितों को लुभाने के लिए नेता ऐसा ही करते हैं। लेकिन जमीन पर दलितों के साथ हो रहे अत्याचार पर खामोश हो जाते हैं। जब यह घटना घटी उस समय भी मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान थे। इस मामले में शुरू से ही पीड़िता द्वारा अंकित ठाकुर का नाम लिया जा रहा था, लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई। आरोप है कि उसे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। अंजना इस मामले में ज्यादा मुखर थी। वह एक पढ़ी-लिखी लड़की थी जो अपने अधिकारों को लेकर जागरूक थी।

घटना के बाद जब हंगामा मचा है तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार 29 मई को पीड़ित परिवार से मिलने उसके गांव बड़ोदिया नोनागिर पहुंचे और पुलिस चौकी खोलने का आश्वासन दिया। साथ ही मृतक राजेन्द्र अहिरवार के परिवार को 8 लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। हालांकि अब मुख्यमंत्री मोहन यादव चाहे तो वादे करें, भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका इस पूरे मामले में शुरू से ही संदिग्ध रही है। ‘दलित दस्तक’ को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के हवाले से यह खबर मिली है कि परिवार के सदस्यों का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने जो सुरक्षा दी थी और जो कैमरे लगाए गए थे, उसे हाल ही में हटा दिया गया। इस पूरे मामले में एक ही परिवार के दो सदस्यों की हत्या और अंजना की संदिग्ध हालत में हुई मौत तमाम सवाल खड़े करते हैं।

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