दिशा रवि को जमानत मिली हम सबने स्वागत किया, लेकिन दलित एक्टिविस्ट शिवकुमार के बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं हो रही है। मुझे यह कहते हुए बिल्कुल भी संकोच नहीं है कि इस देश में दलित की जान सबसे सस्ती है और इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। सारे सो कॉल्ड लिबरल-प्रोग्रेसिव पत्रकार हों या फिर एक्टिविस्ट अमूमन सभी झूठे और मक्कार हैं। उन्हें दलित-आदिवासी से बिल्कुल भी मतलब नहीं है।
दलित दस्तक (Dalit Dastak) साल 2012 से लगातार दलित-आदिवासी (Marginalized) समाज की आवाज उठा रहा है। मासिक पत्रिका के तौर पर शुरू हुआ दलित दस्तक आज वेबसाइट, यू-ट्यूब और प्रकाशन संस्थान (दास पब्लिकेशन) के तौर पर काम कर रहा है। इसके संपादक अशोक कुमार (अशोक दास) 2006 से पत्रकारिता में हैं और तमाम मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। Bahujanbooks.com नाम से हमारी वेबसाइट भी है, जहां से बहुजन साहित्य को ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। दलित-बहुजन समाज की खबरों के लिए दलित दस्तक को सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलो करिए। हम तक खबर पहुंचाने के लिए हमें dalitdastak@gmail.com पर ई-मेल करें या 9013942612 पर व्हाट्सएप करें।

