शिक्षिका पर धौंस दिखाने वाले मनोज तिवारी इस हीरोईन के आगे लोट गए
नई दिल्ली। बात इसी साल मार्च महीने की है. उत्तर पूर्व दिल्ली के यमुना विहार में एक स्कूल का कार्यक्रम चल रहा था. गायक और अभिनेता के साथ फिलहाल राजनीति में सक्रिय मनोज तिवारी इस कार्यक्रम के अतिथि थे. जब तिवारी के बोलने की बारी आई तो कार्यक्रम का संचालन कर रही महिला शिक्षिका ने मनोज तिवारी को मंच पर आमंत्रित करते हुए उनसे गाने की फरमाइश कर डाली. शिक्षिका की यह फरमाइश सुनते ही मनोज तिवारी भड़क गए और उसे फटकारते हुए मंच से उतर जाने को कहा. तिवारी इस बात से खफा थे कि आखिर एक शिक्षिका ने एक सांसद से गाना गाने को कैसे कह दिया?
अब बड़े नेता बन चुके और दिल्ली में भाजपा के अध्यक्ष वही मनोज तिवारी एक बार फिर से गाने को लेकर चर्चा में हैं. गाने की बात पर एक महिला शिक्षिका को फटकार लगाने वाले तिवारी एक दूसरी महिला के लिए घुटने के बल बैठकर गाते दिखे. यहां न तो उनकी सांसदी आड़े आई और न ही एक सांसद की मर्यादा का ख्याल आया. उन्होंने शायद एक सांसद की तमाम मर्यादा को इसलिए ताक पर रख दिया क्योंकि सामने एक बड़ी फिल्म स्टार थी.
असल में अपनी फिल्म “जब हैरी मेट सेजल” के प्रोमोशन के लिए शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा एक अगस्त को बनारस में थे. इस दौरान मनोज तिवारी ने अनुष्का शर्मा के कदमों में बैठ कर खूब गाने गाए. सवाल उठता है कि पांच महीने पहले ही एक महिला शिक्षिका को फटकारने, तमीज सिखाने, कार्रवाई करने और मंच से नीचे उतार देने वाले भाजपा के दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष और एक सांसद को बॉलीवुड की हीरोइन के सामने घुटने पर बैठकर गाते हुए अपनी मर्यादा क्यों याद नहीं आई?
फूलपुर से चुनाव नहीं लड़ेंगी मायावती, जानिए 5 बड़ी वजह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के फूलपुर लोकसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में बसपा प्रमुख मायावती के लड़ने को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि मायावती विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार हो सकती हैं. लेकिन बसपा के बड़े नेताओं ने ‘दलित दस्तक’ से बातचीत में साफ कर दिया है कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगी. इसके साथ ही मायावती के चुनाव लड़ने की अटकलें खत्म हो गई हैं. हम आपको 5 बड़े कारण बताएंगे कि आखिर मायावती चुनाव क्यों नहीं लड़ेंगी.
पहला कारणः- बसपा प्रमुख के चुनाव नहीं लड़ने की कई वजहें हैं. इसमें सबसे बड़ी वजह यह है कि बहुजन समाज पार्टी उपचुनाव लड़ने के हक में नहीं रहती है. अपनी स्थापना से लेकर अब तक कुछ चुनिंदा मौकों को छोड़कर बसपा ने इससे परहेज किया है. उत्तर प्रदेश में भी कई बार विधानसभा की सीटों पर उपचुनाव की स्थिति में भी बसपा ने खुद को इससे दूर ही रखा.
दूसरा कारणः- मायावती ने हाल ही में राज्यसभा से इस्तीफा दिया है. इस्तीफे के बाद उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन का आगाज भी कर दिया है. 18 सितंबर से इसकी शुरुआत होनी है जो लगातार नौ महीने चलेगी. ऐसे में मायावती फिर से बतौर सांसद काम करने से परहेज करेंगी.
तीसरा कारणः- राज्यसभा से इस्तीफा देते हुए मायावती ने कहा था कि जिस सदन में उन्हें उनके समाज की बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है, उसका सदस्य बने रहना उनके लिए लानत है. यहां यह देखना होगा कि राज्यसभा में भाजपा का बहुमत नहीं होने के बावजूद जब मायावती को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल रहा था तो लोकसभा में तो भाजपा बहुमत में है. इसलिए उन्होंने जिस आधार पर इस्तीफा दिया था, वह जस का तस बना रहेगा.
चौथा कारणः- 2019 के लोकसभा और उससे पहले गुजरात और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मायावती किसी अन्य चुनाव में सीधे उतरने के मूड में नहीं हैं. चुनाव लड़ने की स्थिति में उन्हें अपना सारा ध्यान फूलपुर में प्रचार पर लगाना पड़ेगा और पार्टी की हालत को बेहतर बनाने के लिए बैठक दर बैठक कर रहीं मायावती किसी एक क्षेत्र विशेष पर समय जाया करेंगी इसकी संभावना कम है.
पांचवा कारणः- बसपा और उसकी मुखिया मायावती के लिए सबसे अहम 2019 का लोकसभा चुनाव है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा का कोई भी नेता जीत हासिल नहीं कर पाया था. पार्टी के गठन के बाद पहला सांसद चुने जाने के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है कि लोकसभा में बसपा का कोई सांसद नहीं है. इसको देखते हुए मायावती के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा में बसपा नेताओं को पहुंचाना है. अगले लोकसभा चुनाव में काफी कम वक्त बचा है, इसलिए मायावती सिर्फ उसी पर फोकस करना चाहती हैं, न कि खुद चुनाव लड़कर तमाम महत्वपूर्ण चुनावों को किनारे करेंगी.
दिलीप कुमार की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
बॉलीवुड एक्टर दिलीप कुमार की बुधवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. बताया गया कि बुधवार दोपहर डिहाइड्रेशन के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी जिसके चलते उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पहले खबर आई कि गुरुवार तक उन्हें कुछ ही घंटो के लिए आईसीयू में रखा जाएगा लेकिन अब खबर है कि दिलीप कुमार की हालत में सुधार नहीं है उन्हें अभी भी आईसीयू में रखा गया है.
सूत्रों की जानकारी के मुताबिक दिलीप कुमार साहब को आईसीयू में डॉक्टर्स की निगरानी में रखा गया है. बताया जा रहा है कि उनकी किडनी संबंधी परेशानी अभी ठीक नहीं हुई है उनकी किडनी का ट्रीटमेंट चल रहा है. यह ट्रीटमेंट दिलीप कुमार के डॉक्टर जलील पपारकर और किडनी स्पेशलिस्ट डॉ नीतिन गोखले के अलावा कई दूसरे डॉक्टर्स की निगरानी में हो रहा है. लेकिन फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता कि उनकी तबीयत में सधार है.
हालांकि बुधवार को अस्पताल में भर्ती करवाने से पहले यह भी बताया जा रहा था कि वह कुछ दिनों से ब बुखार से पीड़ित थे. दिलीप कुमार की भतीजी और एक्ट्रेस सायशा की मां शाहीन ने भी ट्वीट कर उनकी तबीयत की जानकारी दी थी. उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि युसूफ अंकल जल्द ठीक हो जाएंगे. दिलीप कुमार के फैन्स भी लगातार सोशल मीडिया पर उनकी हालत में सुधार होने की दुआएं कर रहे हैं.
दलित दस्तक के विरोध के बाद रेलवे ने डॉ. अम्बेडकर का विवादित पोस्टर हटाया
नई दिल्ली। देश की राजधानी में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लगा एक बैनर गुरुवार सुबह से ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े इस पोस्टर में देश के पहले कानून मंत्री और संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर को सफाई करते दिखाया गया था.
इस पोस्टर के सामने आने के बाद देश भर में हलचल शुरू हो गई. भारत सहित विदेशों में भी मौजूद अम्बेडकरवादियों ने सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराया. दलित दस्तक को भी व्हाट्सअप और फेसबुक पर अपने पाठकों और दर्शकों से सूचना मिली तो अम्बेडकरवादी अपनी मीडिया दलित दस्तक से मामले की पड़ताल करने को कहने लगे. बाबासाहेब के सम्मान से जुड़ा मामला होने के कारण ‘दलित दस्तक’ ने इसे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस मामले की पड़ताल की.
डॉ. अम्बेडकर को सफाई करते दिखाया जाने वाला पोस्टर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 16 पर लगाया गया था. बाबासाहेब के दो पोस्टर लगाए गए थे. दलित दस्तक ने जब उसका वीडियो बनाना चाहा तो वहां मौजूद रेलवे पुलिस के जवानों ने रोक दिया और उसी दौरान पोस्टर को तुरंत उतार दिया. हालांकि दलित दस्तक के कैमरे में वहीं मौजूद बाहुबली फिल्म के हीरो का पोस्टर कैद हो गया, जिसे थोड़ी देर बाद उतार दिया गया.
सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण रेलवे स्टेशन पर अम्बेडकरवादी युवा पहुंचें और रोष जताया और बाबासाहेब के अपमान को नहीं सहने की बात कही. हालांकि यह मामला फैलने के बाद रेलवे अधिकारी भी सचेत हो गए. उन्होंने कैमरे के सामने अपना बयान देने से तो मना कर दिया.
डीआरएम ऑफिस की ओर से जारी एक बयान में अधिकारी ने बताया कि स्वच्छता अभियान से जुड़े इस पोस्टर को अंत्योदय नाम के एनजीओ की ओर से लगाया गया था. इसके लिए रेलवे से अनुमति भी नहीं ली गई थी और इसका पता लगते ही इन पोस्टरों को स्टेशन से हटा दिया गया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
-उत्तम ज्योति की रिपोर्टहॉकी खिलाड़ी सरदार सिंह और पैरालंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया को खेल रत्न पुरस्कार
नई दिल्ली। रियो पैरालिंपिक में गोल्ड जीतकर इतिहास रचने वाले खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया और हॉकी के मशहूर खिलाड़ी सरदार सिंह को खेल रत्न पुरस्कार दिया जाएगा. इस बार यह पुरस्कार संयुक्त रूप से इन दोनों खिलाडि़यों को देने का फैसला किया गया है. रियो पैरालिंपिक (2016) में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीतने वाले देवेंद्र झाझरिया (36) जेवलिन थ्रो की एफ46 स्पर्द्धा में हिस्सा लेते हैं. वह 2004 में एथेंस में भी इस स्पर्द्धा में गोल्ड जीत चुके हैं.
इस तरह पैरालिंपिक खेलों में दो स्वर्ण जीतने वाले वह पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. जेवलिन थ्रो में इस वक्त विश्व रैंकिंग में वह तीसरे नंबर के खिलाड़ी हैं. भारत के गोल्ड विजेता की बेटी ने कहा था, ‘पापा मैंने टॉप किया अब आपकी राजस्थान के चुरू जिले से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र जब आठ साल के थे तो पेड़ पर चढ़ने के दौरान एक इलेक्ट्रिक केबिल की चपेट में आ गए. उनका
मेडिकल उपचार किया गया लेकिन उनको बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका बायां हाथ काटने के लिए मजबूर होना पड़ा. डिफेंस और आक्रमण दोनों में ही समान रूप से माहिर हैं सरदार हॉकी के स्टार खिलाड़ी सरदार सिंह का जन्म 15 जुलाई 1986 को हरियाणा के सिरसा जिले में हुआ. उनकी गिनती देश के बेहतरीन मिडफील्डरों में की जाती है. डिफेंस और आक्रमण, दोनों के ही मामले में वे बेजोड़ हैं. भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रह चुके हैं. सरदार सिंह इस समय हरियाणा पुलिस में डीएसपी के रूप में कार्यरत हैं.
आक्रमण के ‘सरदार’
सरदार सिंह ने इंटरनेशनल हॉकी में पदार्पण वर्ष 2006 में पाक के खिलाफ टेस्ट सीरीज में किया. इंचियोन में आयोजित एशियाई खेल 2014 के शुभारंभ समारोह में उन्हें भारतीय दल के ध्वजवाहक बनने का गौरव मिला था. सरदार की कप्तानी में भारत ने हॉकी प्रतियोगिता स्वर्ण पदक प्राप्त किया था. इस जीत के पश्चात भारत ने रियो ओलिंपिक 2016 के लिए अहर्ता भी प्राप्त कर ली थी. भारत सरकार ने वर्ष 2015 में सरदार सिंह को नागरिक सम्मान पद्म श्री प्रदान किया. इससे पहले वर्ष 2012 में उन्हें अर्जुन पुरूस्कार से सम्मानित किया गया था.
चेतेश्वर पुजारा ने जड़ा शतक, भारत का स्कोर 290 के पार
कोलंबो: शानदार फॉर्म में चल रही भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में सीरीज अपने नाम करने के इरादे से उतरेगी. सलामी बल्लेबाज केएल राहुल ने फिट होकर प्लेइंग इलेवन में वापसी की है, उन्हें अभिनव मुकुंद की जगह टीम में लिया गया है. टीम इंडिया के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का यह 50वां और शिखर धवन का यह 25वां टेस्ट मैच है. नियमित सलामी बल्लेबाज केएल राहुल वायरल बुखार की चपेट में आने के कारण पहला टेस्ट नहीं खेल पाये थे. हालांकि उनकी गैर मौजूदगी का हालांकि टीम के प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ा और भारत ने 304 रन से पहला टेस्ट जीता था. भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया है.
रैंकिंग के लिहाज से भी दोनों टीमों के बीच काफी फर्क है. जहां भारतीय टीम टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर है वहीं श्रीलंका टीम शीर्ष पांच टीमों में भी शामिल नहीं है. संगकारा और जयवर्धने जैसे धाकड़ बल्लेबाजों के संन्यास लेने के बाद यह टीम फिलहाल पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रही है. दूसरा टेस्ट जीतते ही भारतीय टीम सीरीज अपने नाम पर कर लेगी क्योंकि यह टेस्ट जीतते ही उसे 2-0 की अजेय बढ़त हासिल हो जाएगी.
…तो इसलिए भारत और पाकिस्तान में हो जाएगी तबाही!
नई दिल्ली। दक्षिण एशिया पर खतरा मंडरा रहा है. इसकी जद में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश आ सकते हैं. इस शताब्दी के अंत तक इन देशों को भयंकर गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसी गर्मी जिसको सहन करना आम इंसान के बस में नहीं होगा. ऐसा दावा एक रिसर्च में किया गया है.
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ती गर्मी और उमस की वजह से दक्षिण एशिया के लाखों लोग पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. हाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक अगर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने वाले उत्सर्जन में कमी नहीं आई तो साल 2100 तक भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बड़े हिस्से में तापमान जीवन को खतरे में डालने के स्तर तक पहुंच जाएगा.
शोधकर्ताओं का कहना है कि खतरनाक उमस भरी गर्म हवाओं के घेरे में 30 फीसद तक आबादी आ सकती है. दक्षिण एशिया में दुनिया की कुल आबादी के बीस फीसद लोग रहते हैं. साल 2015 में ईरान में मौसम विज्ञानियों ने वेट बल्ब के तापमान को 35 सेंटीग्रेट के करीब देखा था. उसी साल गर्मियों में हीट वेव की वजह से भारत और पाकिस्तान में 35 सौ लोगों की मौत हुई थी.
शोध के मुताबिक अगर उत्सर्जन की दर ज्यादा रही तो वेट बल्ब तापमान गंगा नदी घाटी, उत्तर पूर्व भारत, बांग्लादेश, चीन के पूर्वी तट, उत्तरी श्रीलंका और पाकिस्तान की सिंधु घाटी समेत दक्षिण एशिया के ज्यादातर हिस्से में 35 डिग्री सेंटीग्रेट के करीब पहुंच जाएगा.
मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर एलफेथ एल्ताहिर ने बताया कि सिंधु और गंगा नदियों की घाटियों में पानी है. खेती भी वहीं होती है. वहीं आबादी भी तेजी से बढ़ी है. उनका कहना है कि हमारे नक्शे से जाहिर होता है कि किन जगहों पर अधिकतम तापमान है. ये वही जगहें हैं जहां अपेक्षाकृत गरीब लोग रहते हैं जिन्हें खेती का काम करना होता है और वो उसी जगह हैं जहां खतरा सबसे ज्यादा है.
प्रोफेसर एल्ताहिर कहते हैं कि अगर आप भारत को देखते हैं तो जलवायु परिवर्तन सिर्फ कल्पना भर नहीं लगती. लेकिन इसे रोका जा सकता है. दूसरे शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने के लिए उपाय नहीं किए गए तो इस अध्ययन में बताई गई नुकसानदेह स्थितियां सामने आ सकती हैं.
शोपियां मुठभेड़ में मेजर सहित 2 जवान शहीद, सेना ने भी दो आतंकियों को किया ढेर
श्रीनगर। कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में आज हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकी मारे गए. इनमें से एक आतंकी मई माह में बैंक के नकदी वाहन पर हमला करने में शामिल था. पुलिस अधिकारी ने आज बताया कि सुरक्षाबलों ने आतंकियों के छिपे होने की खबर मिलने के बाद कल रात कुलगाम जिले के गोपालपुरा गांव में घेराबंदी करके तलाशी अभियान चलाया. उन्होंने बताया कि दोनों ओर से गोलीबारी के बाद दो स्थानीय आतंकी मारे गए. मारे गए आतंकियों की पहचान अकीब हुसैन इट्टू और सोहेल अहमद राठेर के रूप में हुई है.
अधिकारी ने बताया कि मारे गए आतंकवादियों में एक आतंकी इसी साल एक मई को बैंक के नकदी वाहन पर हमला करने में शामिल था. इस हमले में पांच पुलिसकर्मी और दो बैंक गार्ड की मौत हो गयी थी. इसके अलावा वह पिछले माह कुलगाम जिले के यारीपोरा इलाके में एक पुलिस सिपाही की हत्या के मामले में भी शामिल था. सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ स्थल से दो हथियार बरामद किए हैं. उन्होंने बताया कि अभी मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा की जा रही है.
वहीं शोपियां एनकाउंटर में सेना के एक अधिकारी समेत दो सैन्यकर्मी शहीद हो गए व एक अन्य जवान के घायल होने की खबर है. शहीद मेजर का नाम कमलेश पांडे है. कमलेश 62 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सेना ने शोपियां जिले के जायपोरा इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद रात को इलाके की घेराबंदी कर एक खोज अभियान शुरू किया था.
उन्होंने बताया कि खोज अभियान के दौरान आतंकवादियों ने दल पर गोलीबारी शुरू कर दी जिसमें तीन सैन्यकर्मी घायल हो गए. अधिकारी ने बताया कि घायलों को सेना के अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां एक मेजर सहित दो जवान शहीद हो गए. वहीं एक अन्य घायल जवान का इलाज जारी है. उन्होंने बताया कि जायपोरा में खोज अभियान जारी है.
फोन खरीदते समय इन 11 बातों का खास ख्याल रखें…
स्मार्टफोन आज के युग में दैनिक प्रयोग की प्राथमिक जरुरतों मे से एक बन गया है. स्मार्टफोन का प्रयोग बात करने के साथ साथ इंस्टेंट मैसेजिंग, इंटरनेट ब्राउजिंग, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, तस्वीरें खींचने, डॉक्यूमेंट्स सेव करने, ई-मेल और ऑनलाइन मार्केटिंग तक किया जाने लगा है. अब जब हर किसी की जरुरत बन गयी हो स्मार्टफोन तो जाहीर सी बात है बाजार में कई ब्रैंड्स के असंख्य स्मार्टफोन्स उपलब्ध हैं. ऐसे में कौन सा फोन खरीदा जाए, और कौन सा नही इसको तय करना आसान नहीं होता. अगर आप भी स्मार्टफोन खरीदना चाहते है और आप भी इसी तरह के दुविधा में है तो एक फोन खरीदने से पहले आपको इन 11 बातों को ध्यान में रख कर नया फोन का चयन करें.
1. प्रोसेसर : फोन बिना हैंग हुये स्मुथ चले इसमें प्रोसेसर का अहम योगदान होता है. प्रोसेसर के साथ यूजर इंटरफेस और ब्लोटवेयर आदि पर निर्भर करती है. अगर आप फोन के मल्टीटास्किंग यूजर हैं तो क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन 652 या स्नैपड्रैगन 820/821 प्रोसेसर वाले स्मार्टफोन खरीदें. और अगर आप लाइट यूजर्स में से एक हैं तो आप मीडियाटेक प्रोसेसर वाले स्मार्टफोन भी खरीद सकते हैं.
2. बैटरी : बैटरी का इस्तेमाल यूजर पर निर्भर करता है. आप फोन को कैसे इस्तेमाल करते हैं, बैटरी उसी हिसाब से खर्च होती है. अगर आप हेवी यूजर हैं तो 3,500 mAh से ज्यादा बैटरी वाला फोन खरीदें. ऐवरेज या लाइट यूजर्स में से एक है तो आपके लिए 3000 mAh की बैटरी भी पूरी दिन चलेगी.
3. रैम : स्मार्टफोन में प्रोसेसर के बाद अगर किसी पार्ट की अहम भुमिका है तो वह है रैम. क्योकि रैम में ही फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स के टम्परोरी फाइल एक्टीव रहते है जिसका प्रयोग आपका फोन जरुरत के हिसाब से करता रहता है सो अगर आपके फोन का रैम कम हो तो आपके फोन में हैंगीग या बफरींग की शिकायत आ सकती है. तो अगर आप विड़ियो के शौकिन या हैवी फोन युजर है तो कम से कम 4 जीबी रैम वाला फोन ही खरीदें रेगुलर युजर के लिये 2 या 3 जीबी के फोन भी ठिक हैं.
4. बिल्ड क्वॉलिटी : फोन कितना चलेगा, कितना मजबूत है, यह बिल्ड क्वॉलिटी के ऊपर निर्भर करता है. इस वक्त आपको मार्केट में दो तरह की बिल्ड क्वॉलिटी के फोन मिलेंगे- प्लास्टिक और मेटल. कुछ ऐसे स्मार्टफोन्स भी हैं, जिनकी बॉडी ग्लास कोटेड है. अगर आपसे फोन आपके हाथ से गिरता रहता है तो मेटल या प्लास्टिक बॉडी वाला स्मार्टफोन ही ले क्योकी अगर आपका फोन 2 से 3 फीट की ऊंचाई से गिरता भी है तो भी सुरक्षित रहते हैं, जबकि ग्लास कोटेड स्मार्टफोन टूट जाते हैं और आप परेशानी में पड़ जाते हैं.
5. OS वर्जन : मोबाइल फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम OS का वर्जन काफी महत्व रखता है. क्योकि नये os में कुछ नये फीचर होते है जिससे आपके मोबाइल को बिना रुके आधुनिक सेवाओं के प्रयोग के लिये कोई अलग से ऐप्स को नही इंस्टाल करना पड़ता है और ऐसे में आपका रैम और इन्टरनल स्पेस दोनो की बचत होती है. अगर आपको बेसिक और प्योर ऐंड्रॉयड टाइप फीलिंग चाहिए तो मार्समेलो ऑपरेटिंग सिस्टम का ही चयन करें.ध्यान रखें कि कंपनियां कुछ ऐसे ऐप्स बी डालती हैं, जो आपके काम ही नहीं आएंगे और आप उन्हें अनइंस्टॉल भी नहीं कर सकते. इसलिए कोई हैंडसेट खरीदने से पहले उसे ट्राई करके देखें.
6. सिक्यॉरिटी : आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन एक्स्ट्रा सिक्यॉरिटी फीचर्स के साथ आते हैं, जैसे कि फिंगरप्रिंट सेंसर और आइरिस सेंसर. ये सिर्फ लॉक या अनलॉक करने की ही काम नहीं आते, बल्कि फाइल्स या ऐप्स के लिए पासवर्ड का काम भी करते हैं. फिंगरप्रिंट सेंसर वाले स्मार्टफोन 5000 रुपये तक में आने लगे हैं. आइरिस सेंसर वाले फोन अभी कम ही उपलब्ध हैं. इसलिए आप अगर पर्सनल इन्फर्मेशन को सिक्यॉर रखना चाहते हैं तो इन फीचर्स वाला स्मार्टफोन खरीदने को प्राथमिकता दें.
7. स्टोरेज : आपके स्मार्टफोन में स्टोरेज का भी बहुत बड़ा योगदान होता है क्योकि इन्टरनल स्टोरेज का बड़ा हिस्सा OS और प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स घेर लेता है और युजर के लिए इन्टरनल मेमोरी का बहुत कम स्पेस प्रयोग के लिये मिल पाता है. फोन की मेमरी जितनी भी लिखी हो, उसमें इस हिस्से का जिक्र नहीं होता. अगर आप कम ऐप्स रखते हैं तो कम से कम 32जीबी मेमरी वाला स्मार्टफोन खरीद सकते हैं. पर अगर आप बहुत ज्यादा ऐप्स इस्तमाल करते हैं तो 64 जीबी या 128 जीबी वाले वैरियंट्स ही खरीदें. 16 जीबी वाला मॉडल तभी खरीदें, जब माइक्रोएसडी कार्ड लगाने का फीचर दिया गया हो.
8. डिस्प्ले : डिस्प्ले का साइज और रेजॉलूशन बहुत मायने रखता है. अगर आप ईमेल चेक करने, ब्राउजिंग करने या चैटिंग के सौकीन हैं तो 5 या 5.5 इंच डिस्प्ले वाला फोन खरीद सकते है. अगर आप विडियो स्ट्रीम करते हैं, फोटो और विडियो एडिट करते हैं या मूवीज वगैरह डाउनलोड करते हैं तो आपको 5.5 इंच या 6 इंच डिस्प्ले वाला स्मार्टफोन लेना चाहिए. फुल एचडी या QHD रेजॉलूशन वाला डिस्प्ले लेंगे तो और अच्छा रहेगा. इस बात का भी ध्यान रखें कि 6 इंच के डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन थोड़े भारी होते हैं और कैरी करने में सुविधाजनक नहीं होते.
9. कैमरा : फोन के कैमरे में मेगापिक्सल ज्यादा हों तो इसका मतलब यह नहीं है कि कैमरा अच्छा है. कई सारे स्पेसिफिकेशंस हैं जो कैमरे को को बेहतर बनाते हैं. जैसे कि कैमरा अपर्चर, ISO लेवल, पिक्सल साइज और ऑटोफोकस. 16 मेगापिक्सल कैमरा जरूरी नही कि 12 मेगापिक्सल कैमरे से अच्छा हो. यही बात फ्रंट फेसिंग कैमरे पर भी लागू होती है. ज्यादा मेगापिक्सल का मतलब होता है का इमेज का साइज बड़ा होगा और छोटी स्क्रीन पर ज्यादा शार्प दिखेगी इमेज. फोटोग्राफी पसंद करने वाले लोग 12 या 16 मेगापिक्सल वाले कैमरे में f/2.0 या कम अपर्चर चाहेंगे ताकि कम लाइट में भी अच्छी तस्वीरें खींच सकें. सामान्यत: प्रयोग करने वालो के लिए 8मैगा पिक्सल या 12 मैगा पिक्सल कैमरा, जिसका अपर्चर f/2.0-f/2.2 हो, वो ठिक रहेगा.
10. ऑडियो : स्पीकर और ऑडियो क्वॉलिटी उन लोगों के लिए जरूरी फीचर है, जो विडियो स्ट्रीमिंग करते हैं या विडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हैं. ऐसा स्मार्टफोन खरीदें, जिसमें स्पीकर सामने लगे हों. इससे आपको साफ आवाज सुनाई देगी. अगर आप विडियो स्ट्रीमिंग या विडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं करते तो बॉटम फायरिंग स्पीकर वाला फोन भी आपके लिए ठीक रहेगा. अगर स्पीकर बैक में हों, तब भी कोई दिक्कत नहीं होगी.
11. हेडफोन जैक/ यूएसबी पोर्ट : फोन में पोर्ट कौन सा लगा है, यह बात भी मायने रखती है. मार्केट में माइक्रो-यूएसबी और यूएसबी टाइप-C पोर्ट वाले स्मार्टफोन उपलब्ध हैं. आजकल यूएसबी टाइप-सी वाला स्मार्टफोन लेना ही ठीक है, क्योंकि यह प्लग करने में भी आसान होता है और फ्यूचर प्रूफ भी है. यानी बहुत सी कंपनियां अब यही पोर्ट लगाने लगी हैं. कुछ ने तो 3.5mm हेडफोन जैक को छोड़कर इसी के जरिए हेडफोन कनेक्ट करने का फीचर दिया है. माना जा रहा है कि आने वाले 2 सालों में ज्यादातर कंपनियां यूएसबी टाइप-सी पोर्ट को ही अपनाएंगी.
-श्याम सुन्दर प्रसाद4 राज्यों में चोटी कांड की दहशत, रातभर पहरा दे रहे हैं लोग
नई दिल्ली। दिल्ली और आसपास के राज्यों में चोटी काटने वाले गैंग की दहशत के बीच अफवाहों का बाजार भी गर्म है. वहीं यूपी के आगरा में एक बुजुर्ग विधवा महिला की लोगों ने पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया है. दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में इस अफवाह के चलते लोग रात को जागकर चौकीदारी करने को मजबूर हो गए है. आगरा की घटना की बात करें तो यहां लोगों को शक था कि ये महिला ही लोगों की चोटी काटती है, कुछ ने इस महिला को चुड़ैल तक बताया. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है.
ये मामला मंगलवार देर रात का बताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि 62 वर्षीय मानदेवी शौच के लिए बाहर गईं थीं. अंधेरा होने के चलते वे रास्ता भटक गईं और बघेल समाज की बस्ती में पहुंच गईं. यहां चारपाई पर एक लड़की सो रही थी. उसी दौरान उस लड़की की नींद टूट गई और अचानक सफेद साड़ी में एक महिला को सामने देख युवती ने शोर मचा दिया. बस्ती के लोग निकल आए. उन्होंने महिला को चुड़ैल समझकर पीटना शुरू कर दिया.
आनन-फानन में परिवार के लोग उसे आगरा के एक अस्पताल लेकर पहुंचे. यहां प्राथमिक इलाज के बाद महिला को घर भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद गांव में दहशत और तनाव का माहौल है. डौकी थाना इंसपेक्टर डीपी शर्मा ने बताया कि महिला विक्षिप्त थी. उसके सिर में डंडा लग गया. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है.
यूपी के मथुरा जिले के नगला आख्खा गांव में लोग पहरेदारी को मजबूर हैं. दरअसल गांव के बीचो बीच मौजूद घर की एक महिला की चोटी काटने की घटना कल सुबह साढ़े 9 बजे से 10 बजे के बीच हो गई. जिससे पूरे गांव के लोग खौफ में हैं. गांव में दहशत का माहौल इस कदर है कि अब एक ये अफवाह ये भी फैल गई है कि जिनके पति के नाम की शुरुआत न अक्षर से हो रही है उनके बाल काट रहे हैं.
हरियाणा के फरीदाबाद में चोटी कटने की घटना से लोगों में दहशत का माहौल है. लोग अपनी नींद हराम करके रातभर खुद गांव में पहरा दे रहे हैं. चोटी काटने की घटना ने पूरे गांव की नींद उड़ा दी है. फरीदाबाद में पिछले कुछ दिनों में महिलाओं की चोटी काटने की तीन घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इस घटना को कौन अंजाम दे रहा है. ये जानने के लिए सिकरी गांल के लोग रात भर जाग कर पहरा दे रहे हैं. हरियाणा के हिसार से भी कल चोटी कटने की एक घटना सामने आई है, जिसके बाद हिसार के न्यू योगनगर के लोग डरे हुए हैं. न्यू योग नगर की रहने वाली कमला देवी सो रही थीं सुबह जगीं तो उनकी चोटी जमीन पर कटकर पड़ी थी. राजस्थान के धौलपुर में भी लोग चोटी कटने की घटना से परेशान हैं. लोगों ने बचने के लिए घर के बाहर लोगों ने टोना टोटका शुरू कर दिया है. यहां एक ही नहीं ऐसे दर्जनों घर दिखे जहां पर लोगों ने चोटी कटने से बचने के लिए टोना टोटका शुरू कर दिया है. गांव के लोगों ने दहशत से बचने के लिए या तो नीबू मिर्च लटका रखा है या फिर दीवार पर हल्दी के छाप लगा दिए हैं. राजस्थान के बीकानेर के बाद अब जोधपुर में भी लोगों में एक अजीब सा खौफ दिखने लगा है. इसका कारण यहां रात में सोती महिलाओं के बाल काट ले जाने की घटनाएं हैं. लोगों का कहना है कि ऐसा तंत्र-मंत्र करने के लिए किया जा रहा है. ताजा मामला, जोधपुर के फलौदी से जुड़ा हुआ है जहां मंगलवार आधी रात को मलार रोड पुलिया के पास रहने वाले मेघवाल परिवार की बच्ची के कोई बाल काट ले गया। परिजनों के मुताबिक आधी रात को उनकी 13 वर्षीय बच्ची संतु की रोने की आवाज आई. जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि कोई उसके बाल काट रहा है. इसके बाद से बच्ची की तबीयत खराब है वहीं, मां गवरी देवी काफी डरी हुई है. परिजनों ने पूरी घटना की जानकारी पुलिस को भी दी है. जिसमें उन्होंने बताया है कि लड़की की नाभी पर भी त्रिशुल और चोट के निशान है. उधर, शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची तो लड़की के बाल कटे हुए हैं.जेएनयू में PHD के ढांचे को तोड़ा जाना चाहिए
आखिरकार आज पीएचडी पूरी हो गई. यह संयोग ही था कि आज प्रेमचंद जयंती भी थी. वायवा के लिए प्रोफेसर चौथीराम यादव और हरिनारायण ठाकुर आए थे. मेरा विषय था- “अद्विज हिंदी कथाकारों के उपन्यासों में जाति-मुक्ति का सवाल, 1990 से 2014 तक”. दोनों ने मेरे काम की तारीफ की. उनका आभारी हूं लेकिन सच तो यह है कि मैं विषय के साथ न्याय नहीं कर पाया हूं. शोध प्रबंधों के लिखने का जो बना-बनाया ढांचा है, वह निहायत ही भद्दा है. अन्य अनुशासनों की बात मैं नहीं करता लेकिन साहित्य पर होने वाले शोध को आलोचना के रूप में होना चाहिए और जहां तक संभव हो सके, इसमें रचानात्मकता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. या फिर यह हो कि सचमुच कुछ खोज लाओ, कोई अप्राप्त पाण्डुलिपी, कोई नया ऐतिहासिक तथ्य, तब पीएचडी मिलेगी. शोधार्थी को दोनों रास्तों में से कोई एक रास्ता चुनने की आजादी होनी चाहिए. लेकिन होता इसके उलट है. लोग ठीक ही कहते हैं, कुछ अच्छे अपवादों को छोड़ दें तो पीएचडी का मतलब है घास छीलना. फटाफट छीलो और जो बना-बनाया ढांचा है, जो टोकरी है, उसे भर डालो. विषय कोई भी हो आपको पहले अध्याय में उसकी पृष्ठभूमि लिखनी होगी, दूसरे अध्याय में तुलना करनी होगी. जबरदस्ती लोगों के उद्धरण ठूंसने होंगे. जितने ज्यादा उद्धरण, उतनी ही अच्छी पीएचडी! यह कैसी अजीब बात है!
जेएनयू में 2010 में एमफिल में आया था. विषय था- ‘फणीश्वरनाथ रेणु की पत्रकारिता के सामाजिक सरोकार’. शोध निर्देशक थे, देवेंद्र चौबे. पीएचडी मैंने गंगा सहाय मीणा के साथ करने का निर्णय लिया. दोनों ही निर्देशक मित्रवत् भी थे और अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध भी. लेकिन ढांचा तो वही था, उन्हें भी उसी ढांचे में काम करना-करवाना होता है.
मैं महसूस करता हूं कि जेएनयू जैसे संस्थान में रहकर इस ढांचे को तोड़ा जा सकता है. शोधार्थी चाहे तो यह संभव है. अभी भी वहां पिछली पीढ़ी के जो शिक्षक हैं, वे नएपन को बढ़ावा देने में अपने कदम पीछे नहीं खींचते, अन्यथा पीएचडी के लिए मेरे विषय में जो “अद्विज” शब्द है, वह कतई स्वीकृत नहीं हो पाता. दरअसल समस्या दूसरी है. हिंदी विभागों में हिंदी पट्टी की आर्थिक और बौद्धिक विपन्नता अपना रंग दिखाती है. हिंदी में पीएचडी करने का मतलब है कि शोधार्थी सरकारी नौकरी के लिए सभी जगह हाथ-पांव मार कर हार चुका है. देश के सभी हिंदी विभाग ऐसे ही थके-हारे लोगों के गढ़ हैं. इस मामले में जेएनयू का हिंदी विभाग अंधों में काना राजा है.
जेएनयू से विदा होते हुए अजीब लग रहा है. हालांकि इन सात सालों में भावात्मक स्तर पर मैं जेएनयू का भीतरी आदमी शायद नहीं बन पाया. लेखन और पत्रकारिता की दूसरी जिम्मेवारियां थीं, जिन्हें पूरा करना मुझे ज्यादा प्रिय और महत्वपूर्ण लगता रहा. इन सात सालों में प्रिंट रूप में फारवर्ड प्रेस के संपादन के 5 साल (2011-2016) और वेब पोर्टल के रूप में पिछला एक साल भी समाहित रहा. इस बीच छह साहित्य वार्षिकियां और इतनी ही किताबें भी संपादित कीं. दर्जनों रिपोर्ट्स और लेख लिखे, सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर पुस्तिकाएं भी. इन व्यस्तताओं के कारण गंगा ढाबा की बैठकों में अपनी जगह नहीं बना सका. लेकिन उन्हें चुपके से सुनने और सराहने वालों में हमेशा शुमार रहा.
यहां रहते हुए सबसे दुखद था, अपनी आंखों के सामने एक महान विश्वविद्यालय का, भारत के सर्वश्रेष्ठ बौद्धिक केंद्र को अवसान की ओर जाते देखना. पिछले साल आरएसएस द्वारा प्रायोजित हमले से पहले ही इसकी भूमिका बनने लगी थी. इसके लिए सिर्फ हिंदूवादी ताकतें ही जिम्मेवार नहीं थीं. इसकी गरिमा को नष्ट करने वाले तत्व स्वयं इसके भीतर से भी उभर रहे थे. कम्युनिष्टों की कथित असफल विश्वदृष्टि को अपनी काबीलाई चेतना से चुनौती देने और उनके जातिवाद का विरोध अपने जातिवाद से करने वालों की संख्या बढ़ रही थी. इस नई समस्या से निपटने के लिए कम्युनिस्टों के पास कोई दृष्टि नहीं थी. मजबूरीवश विभिन्न छोटे-बड़े मुद्दे पर वे अपना स्टैंड छोड़कर पीछे हटते जा रहे थे और हिंदूवाद का विरोध करने के लिए इस्लामिक कठमुल्लावाद और ज्यादा प्रश्रय देने की नीति पर काम कर रहे थे.
जेएनयू जैसे उत्कृष्ठ संस्थानों को बर्बाद करने का श्रेय दिवंगत कांग्रेसी नेता अर्जुन सिंह को भी है. ज्ञान के वृत्त से अन्य पिछड़ा वर्ग पूरी तरह बाहर धकिया दिया गया था, इसलिए इनके लिए उच्च शिक्षा में आरक्षण आवश्यक था. लेकिन आरक्षण दिया 27 प्रतिशत और संस्थानों में सीटें बढाईं 52 प्रतिशत. वंचित तबकों से इससे ज्यादा अश्लील मजाक और क्या किया जा सकता था? उच्च तबका यही चाहता था. हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी डुबोएंगे, की तर्ज पर यह तबका तो विदेशों और महंगी निजी यूनिवर्सिटियों की ओर मुड़ गया. सरकारी संस्थानों में रह गए दरिद्र सवर्ण और मध्यवर्ग में प्रवेश पा रहे दलित-आदिवासी और पिछड़ों के बच्चे. नतीजा सामने है. जेएनयू में बहसों को स्तर तेजी से गिर रहा है. उसकी विश्वदृष्टि गंगा के मैदान से आई जातिवाद के धूल-गोबर से धूमिल हो रही है.
2010 में जब नामांकन के लिए जानकारियां लेने आया था तो मुझे याद है कि इसके नार्थ गेट पर कुछ सेमिनारों के पोस्टर थे, जिनमें से कुछ पर मार्क्स और पाब्लो नेरूदा की तस्वीरें थीं. आज वहां से निकलते हुए मुख्य द्वार पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के उस पोस्टर ने विदा किया जिस पर एक और डॉ. अम्बेडकर और दूसरी ओर विवेकानंद की तस्वीर है.
विदा जेएनयू, सैकड़ों प्रतिष्ठित समाज वैज्ञानिकों, इतिहासकारों की तरह इस अकिंचन के जीवन में भी तुम हमेशा बने रहोगे.
यह लेख प्रमोद रंजन ने लिखा है.अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन करेगी ‘डॉ. अम्बेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन’
रोहतक। भाजपा और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शुरू से ही दलित वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं. आजकल शाह की दलित राजनीति चरम पर है. अमित शाह पिछले 15 दिनों में तीन अलग-अलग राज्यों में दलितों के यहां खाना खा चुके हैं. पहले राजस्थान फिर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अमित शाह ने दलित के घर खाना खाया.
अमित शाह पिछले दो दिन से हरियाणा में खट्टर सरकार के विकास जांच कर रहे हैं. यह सब देख कर रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के दलित छात्र अमित शाह का विरोध कर रहे हैं. इस सिलसिले में डॉ. अम्बेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन (एएमवीए) की बैठक विक्रम सिंह डूमोलिया की अध्यक्षता में हुई.
बैठक में फैसला किया गया कि अमित शाह द्वारा दलितों का मजाक उड़ाए जाने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा. डूमोलिया ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दलितों के घर खाना खाने का ड्रामा कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि दलितों पर अत्याचार करने वाली बेगुनाह लोगों की हत्यारी सरकार के मुखिया को खाना खिलाने वाले दलित परिवार का एएमवीए बहिष्कार का ऐलान करती है.
इसके अलावा कोर्स में हो रहे भेदभाव के मुद्दे को भी बैठक में उठाया गया. बैठक में कहा गया कि अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए स्नातकोत्तर कोर्स में दाखिले के लिए देश के सभी मेडिकल कॉलेज में आरक्षण नीति लागू है, हरियाणा की हेल्थ यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेजों में नहीं है.
डोकलाम पर चीन का रुख, भारत से कहा- अपनी सेना हटाओ
नई दिल्ली। चीन ने बुधवार (3 अगस्त) को कहा कि उसने भारत को अपने इस दृढ़ रुख की सूचना दे दी है कि मौजूदा गतिरोध खत्म करने के लिए उसे ‘बिना किसी शर्त के’ सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम से अपनी सेना तत्काल हटा कर ‘ठोस कार्रवाई’ करनी चाहिए. चीनी विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के स्टेट काउंसिलर यांग जेइची के बीच 28 जुलाई को हुई मुलाकात का पहली बार ब्योरा देते हुए बताया कि दोनों अधिकारियों ने ब्रिक्स सहयोग, द्विपक्षीय रिश्तों और प्रासंगिक प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की थी. डोभाल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साझे मंच ब्रिक्स में हिस्सा लेने के लिए पिछले माह बीजिंग में थे. डोभाल और यांग दोनों भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि भी हैं.
चुड़ैल बता दलित महिला को पीट-पीटकर मार डाला
आगरा। यूपी के आगरा में अंधविश्वास ने एक बुजुर्ग दलित महिला की जान ले ली. डौकी क्षेत्र के मुटनई गांव में उच्च जाति के लोगों ने बुजुर्ग दलित महिला चुड़ैल बता और पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया. घटना से गांव में तनाव है. आरोपी पक्ष के लोग घरों से फरार हैं.
मुटनई निवासी 65 वर्षीय मान देवी बुधवार (2 अगस्त) को सुबह साढ़े तीन बजे शौच करने घर से गई थीं. लौटते समय वे रास्ता भटककर बघेल बस्ती में चली गई. मानदेवी के बेटे गुलाब सिंह ने बताया कि वे निहाल सिंह के घर के बाहर पहुंच गई. तभी निहाल सिंह के बेटे मनीष और सोनू ने उन्हें चुड़ैल बताकर पीटना शुरू कर दिया. उन्होंने अपना नाम बताते हुए आरोपियों से कहा कि वे उन्हें जानती हैं. पड़ोस में ही रहती हैं. मगर, किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. डंडों से पीट-पीटकर उन्हें बेहोश कर दिया.
इसके बाद आरोपी महिला को जाटव बस्ती के केपी सिंह के घर के बाहर फेंक गए. केपी सिंह ने महिला के परिजनों को सूचना दे दी. उन्हें लेकर थाने पहुंचे. पुलिस ने उनकी तहरीर पर एनसीआर लिखकर महिला को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. जिला अस्पताल से भी महिला की चोट सामान्य बताकर छुट्टी दे दी गई.
यहां से परिजन उन्हें घर ले जा रहे थे, तभी ताजगंज की गोबर चौकी के पास उनकी मौत हो गई. इसके बाद परिजन उन्हें थाना डौकी लेकर पहुंच गए. थाने के सामने सड़क पर शव रखकर परिजनों ने हंगामा कर दिया. सीओ फतेहाबाद मौके पर पहुंच गए. उन्होंने महिला के परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया.
घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई. आरोपी पक्ष का कहना है कि महिला उनके घर बाल काटने आई थी. निहाल सिंह की पत्नी प्रकाश देवी के रात में ही बाल कटे थे. उन्होंने मान देवी पर बाल काटने का आरोप लगाया. घटना के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है. टकराव न हो इसलिए गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है. मान देवी के बेटे गुलाब सिंह ने मनीष और सोनू के खिलाफ तहरीर दे दी. सीओ डॉ. तेजवीर सिंह ने बताया कि तहरीर के मुताबिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. आरोपियों की तलाश की जा रही है.
सेंकेड्स में बुक करें रेलवे का तत्काल टिकट
नई दिल्ली। IRCTC ने शुरू की नई सेवा अब बिना पैसे के सेंकेड्स में बुक करें तत्काल टिकट, रेलवे के तत्काल कोटा के तहत टिकट करने वालों के लिए अच्छी खबर यह है कि वे पहले टिकट बुककर उसका भुगतान बाद में कर सकेंगे. अब यात्री रेलवे के तत्काल कोटा का टिकट पहले बुक करके उसका पेमेंट बाद में कर सकेंगे.
यह सेवा केवल सामान्य टिकटों की बुकिंग के लिए उपलब्ध थी, अब तत्काल बुकिंग के लिए भी उपलब्ध होगी. इसकी मदद से दो क्लिक से टिकट बुक कर सकते हैं. इसके तहत आईआरसीटीसी वेबसाइट-एप के उपयोगकर्ता अपने घर पर टिकट की डिलीवरी का विकल्प चुनकर कैश, डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिये भुगतान कर सकेंगे.
IRCTC के ‘पे-ऑन डिलीवरी’ पेमेंट प्रोवाइडर एण्डुरिल टेक्नोलॉजिस प्राइवेट लि. ने मंगलवार को यह ऐलान किया गया है. इतना ही नहीं अब तत्काल टिकट सेकेंडों में बुक होगा.
IRCTC रोजाना 1 लाख 30 हजार टिकटें बुक करने का काम करता है. इनमें से ज्यादातर टिकट तत्काल के लिए बुकिंग शुरू होने के कुछ ही मिनटों में बुक हो जाती हैं. अब तक उपयोगकर्ता टिकट कन्फर्म होने से पहले स्टैंडर्ड ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए भुगतान करते थे. इस प्रक्रिया में देरी भी हो जाती थी, जिसके चलते कई बार उपयोगकर्ता कन्फर्म टिकट बुक नहीं करवा पाते थे.
‘पे ऑन डिलीवरी’ सेवा से पेमेंट गेटवे के उपयोग की जरूरत नहीं पड़ती और इससे कुछ ही सेकेंड में टिकट बुकिंग हो जाती है. एण्डुरिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग बाजपेयी ने कहा, तत्काल टिकटों के लिए पे ऑन डिलीवरी उन लाखों रेल यात्रियों के लिए बहुत फायदेमंद होगी, जिन्हें तत्काल कोटा के तहत बुकिंग करवाने की जरूरत होती है. यूजर्स पहले से ही जानते हैं कि तत्काल के अंतर्गत टिकट बुक करवाते समय हरेक सेकेंड कीमती है. हमें पूरा भरोसा है कि पहले टिकट बुक कराकर बाद में पेमेंट करने के ऑप्शन को उपयोगकर्ता बड़ी संख्या में अपनाएंगे.
- ऐसे मिलेगा ‘पे ऑन डिलीवरी’ का लाभ सबसे पहले यूज़र को payondelivery.co.in पर पंजीकरण कराकर आधार कार्ड या पैन कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य है.
- इसके बाद आईआरसीटीसी पोर्टल पर बुकिंग के दौरान, यूज़र को Anduril Technologies के ‘pay-on-delivery’ का विकल्प चुनना होगा.
- टिकट बुक होने के साथ ही टिकट को एसएमएस/ईमेल के माध्यम से डिलीवर कर दिया जाएगा और बुकिंग के 24 घंटे के अंदर भुगतान करना होता है। चाहे तो आप ऑनलाइन भी भुगतान भी कर सकते हैं.
रिपोर्टः भाटला गांव में अब भी जारी दलितों का सामाजिक बहिष्कार
भाटला। 30 July भाटला गांव में हम 3 साथी अमन, अनवर और मै भाटला में हुए दलित उत्पीड़न और उसके बाद सवर्णों द्वारा लगाया गया सामाजिक प्रतिबंध के मौजूदा हालात जानने के लिए एक टीम के रूप में गए. वहां पर कुछ विश्वसनीय साथियों से हमने मुलाकात की और मौजूदा हालात की जानकारी ली. मौजूदा हालात बहुत ही अमानवीय बने हुए है.
भाटला गांव में पिछले महीने नलकूप से पानी भरने को लेकर चमार जाति के युवक और ब्राह्मण जाति के युवक के झगड़े ने बड़ा रूप ले लिया. जिसमें चमार जाति के लड़कों को ब्राह्मण जाति के लड़कों ने इकठ्ठा होकर मारपीट की व जातिसूचक गालियां दी. उसके बाद मारपीट के आरोपियों पर SC/ST एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ. गांव के सवर्णों ने दलितो पर समझौता करने का दबाव बनाया जब दलितो ने समझौता नहीं किया तो जाटों और ब्राह्मणों ने दलित जातियों पर सामाजिक प्रतिबंध लगा दिया था.
पूरे गांव में सामाजिक प्रतिबंध की मुनादी करवाई गई. जिसके बाद दलित समाज ने एडवोकेट रजत कल्सन के नेतृत्व में एकजुटता दिखाते हुए हांसी में प्रदर्शन किया और अनिश्चितकालीन धरना देना शुरू किया. धरने पर लोगों की संख्या हर दिन बढ़ती ही गई. ये धरना एडवोकेट रजत कल्सन के नेतृत्व में चल रहा था. लेकिन कुछेक छद्म दलित नेताओं ने अहम के कारण व कुछ नेताओं द्वारा सिर्फ नेतागिरी चमकाने के चक्कर में धरने पर शुरू दिन से ही विवाद होने लग गया था. कुछ दलित नेता इस धरने को हाईजैक करने की फ़िराक में रहे इसके लिए उन्होंने बहुत गड़बड़ भी की और प्रयास भी किये. इस आपसी खींचतान के चक्कर में प्रशासन ने भी बहुत फायदा उठाया. प्रशासन ने दलितों के पक्ष में कार्रवाई का आश्वसन देकर धरने को खत्म करवा दिया.
इसे भी पढ़िएः दलितों के आगे झुके प्रशासन और सवर्णआज हमारी टीम ने भाटला गांव का दौरा किया. टीम ने दलित बिरादरी के विश्वनीय साथियों से मुलाकात की और गांव के बारे में जानकारी ली. प्रशासन जो दावा कर रहा है कि हमने सामाजिक प्रतिबंध को खत्म करवा दिया है. लेकिन हालात इसके एकदम विपरीत है. आज भी सामाजिक प्रतिबंध जारी है. जाटो और ब्राह्मणों ने दलितो में फूट डालने के लिए अब सिर्फ चमार जाति पर प्रतिबंध जारी रखा हुआ है. बाकी की दलित जातियों से सामाजिक प्रतिबंध खत्म कर दिया गया है. क्योंकि सवर्ण जातियों को अपने खेत में मजदूर भी चाहिए है. मजदूर सिर्फ दलित ही है. इस चाल में सवर्ण कामयाब भी हो गए है. दलितों की एकता टूट गयी है. इसका एक कारण ये भी है कि 8 दिन जब धरना चला तो भाटला गांव की सभी दलित जातियों ने धरने में मजबूती से भागीदारी की थी. लेकिन छद्म दलित नेताओ ने पूरे धरने को सिर्फ चमार जाति से और बसपा का प्लेटफार्म बना दिया. इस कारण भी दूसरी दलित जातियां नाराज थी. जिसका फायदा सवर्णों को मिला.
आज भाटला में चमार जाति पर सामाजिक प्रतिबंध जारी है. न कोई दुकानदार सामान दे रहा है, न कोई मजदूरी पर लेकर जा रहा है, खेतों में घुसने पर रोक अब भी जारी है, न दूध दे रहे है. न चमार बिरादरी के ऑटो में कोई सवर्ण सवारी बैठ रही है. हालात यहां तक है कि दलित आंदोलन की अगुवाई करने वाले एक साथी के पिताजी ने भेड़ रखे हुए थे. अब इस सामाजिक प्रतिबंध के कारण वो भेड़ कहां चराए. इसलिए उन्होंने अपनी सारी भेड़ आधी कीमत पर बेचनी पड़ी.
प्रशासन ने भी जो मांगे मानने का आश्वसन दिया था वो अभी तक पूरा नही किया गया है. पूरे गांव में अफवाहों का दौर जारी है. कुछ अज्ञात सूचनाओं से ये भी खबर आ रही है कि सवर्ण जाति के नौजवान दलित आंदोलन की अगुवाई करने वाले नौजवानों पर हमला कर सकते है. भाटला में आज जो माहौल बना हुआ है वो बहुत ही अमानवीय है. आज के समय भाटला के दलितों को आप सभी प्रगतिशील, बुद्विजीवियों, कलाकारों, क्रांतिकारी साथियों के साथ की मजबूती से जरूरत हैं. आइये मिलकर भाटला के दलितों का साथ दें.
-उदय चे की रिपोर्ट

