‘टॉयलेट…’ को लेकर मथुरा की गलियों में अक्षय कुमार

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नई दिल्ली। ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ का एक वीडियो रिलीज हुआ है जिसमें अक्षय कुमार बता रहे हैं कि जब उन्होंने पहली बार इस फिल्म की कहानी सुनी थी, उसी समय फैसला कर लिया था कि वे इस फिल्म को करेंगे. हाल ही में टॉयलेट… की टीम ने मथुरा की गलियों में नाम से वीडियो रिलीज किया है. जिसमें शूटिंग के दौरान की बातचीत और पूरे माहौल को दिखाया गया है, जो काफी दिलचस्प है.

अक्षय कुमार गांव के लोगों से मिले, और अपने प्यार का इजहार किया. दिलचस्प यह है कि अक्षय कुमार को देखने के लिए अपार भीड़ जुटी. अक्षय बताते हैं कि इस फिल्म की कहानी सुनकर जब टॉयलेट को लेकर मेरी सोच इतनी बदल गई तो इस फिल्म से कितने लोगों की सोच बदलेगी. यही नहीं, शूटिंग के दौरान वे मथुरा के लोगों से खूब मिले और टॉयलेट को लेकर उनकी राय भी जानी.

अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की इस फिल्म को श्री नारायण सिंह ने डायरेक्ट किया है और यह 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता मिशन से प्रेरित है और फिल्म के विषय को लेकर सभी ओर से जबरदस्त समर्थन भी मिल रहा है.

झारखंड की आदिवासी खिलाड़ी सुमराई टेटे को ध्यानचंद लाइफटाइम अवार्ड

आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली झारखंड की हॉकी खिलाड़ी-कोच सुमराई टेटे को ध्यानचंद लाइफटाइम अवार्ड मिलने की घोषणा हो गई है. समुराई टेटे पिछले पांच सालों से इस अवार्ड की दावेदार थीं और इस घोषणा के साथ उनका इंतजार खत्म हो गया है. सुमराई हॉकी की पहली महिला खिलाड़ी हैं, जिन्हें यह अवार्ड मिला है.

समुराई से पहले सन् 2016 में झारखंड के ही सिलवानुस डुंगडुंग को इसी अवार्ड के लिए चुना गया था. डुंगडुंग 1980 ओलंपिक की उस टीम में थे जिसने अंतिम बार भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था. हालांकि उन्हें भी यह अवार्ड काफी देर से दिया गया. सरकार द्वारा इस महान खिलाड़ी की अनदेखी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय सिलवानुस डुंगडुंग को ध्यानचंद अवार्ड देने की घोषणा हुई थी, उस समय उनकी उम्र 68 साल की थी और मास्को ओलंपिक के 36 साल बीत चुके थे.

जहां तक सुमराई की बात है तो उन्होंने 1996 से 2006 तक लगातार हॉकी खेला. वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी रहीं. इसके बाद वह कोच बन गईं. सुमराई को यकीन था कि एक न एक दिन उन्हें हॉकी में दिए गए योगदान के लिए जरूर सम्मानित किया जाएगा, लेकिन यह उनका भ्रम साबित होने लगा. हर बार यह पुरस्कार किसी और को मिल जाता. लेकिन इस जुझारू खिलाड़ी ने यह ठान लिया था कि जब तक उन्हें पुरस्कार नहीं मिलेगा, वह आवेदन भेजती रहेंगी. इस साल भी उन्होंने नॉमिनेशन के लिए आवेदन भेजा था जिसे आखिरकार मंजूर कर लिया गया.

गौरतलब है कि सुमराई एक दमदार खिलाड़ी रही हैं और अपने नेतृत्व में कई प्रतियोगिताएं जीती हैं. उन्होंने अपनी प्रतिभा से झारखंड का नाम भी आगे बढ़ाया.

सुप्रीम कोर्ट में बोला शिया वक्फ बोर्डः अयोध्या में ही बने राम मंदिर

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने श्रीराम जन्मभूमि विवाद को नया मोड़ दे दिया है. अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त से सुनवाई होनी है. शिया वक्फ बोर्ड ने अदालत में हलफनामा दायर किया है. शिया वक्फ बोर्ड ने अपने हलफनामे में कहा है कि मस्जिद को राम जन्मभूमि से थोड़ी दूर मुस्लिम बहुल इलाके में बनाया जाना चाहिए.

वक्फ बोर्ड का कहना है कि दोनों धार्मिक स्थल के पास होने से झगड़े की आशंका होगी, मंदिर और मस्जिद दोनों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है. बोर्ड ने यह भी कहा कि साल 1946 तक बाबरी मस्जिद उनके पास थी अंग्रेजों ने गलत कानून प्रक्रिया से इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया था. शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बकी ने बनवाई थी जो कि शिया था.

11 अगस्त से होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या रामजन्म भूमि विवाद मामले की सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ तय कर दी है. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ अपीलों पर 11 अगस्त से मामले की सुनवाई करेगी. इस विशेष पीठ के गठन के बाद सात वर्षो से लंबित इस मामले में नियमित सुनवाई और जल्दी निपटारे की उम्मीद जगी है.

रामजन्म भूमि विवाद मामले में जमीन के तीन बराबर हिस्सों में बंटवारे के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को भगवान रामलला विराजमान सहित सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा रखी है और पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को दो-एक के बहुमत से फैसला सुनाया था. बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी. साथ ही मामला लंबित रहने तक विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.

जाति-धर्म की आड़ में जनता को गुमराह कर रही है सरकार और मीडिया

14वीं लोकसभा के चुनाव में देश में लंबे-लंबे वादों से बनी मोदी सरकार तीन साल बाद भी जनता के अहम सवालों की जवाबदेही से कतरा रही है. मीडिया को अपने कंट्रोल में लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों को दफनाया जा रहा है.

आज देश के कुछेक ईमानदार पत्रकार भी इस मुददे को उठाने से कतरा रहें है. कारण साफ है या तो उनकी हत्या कर दी जाती है या उनकी पैसों के दम पर क़लम ख़रीद ली जाती है. जिससे न चाहते हुए भी वो पंगु बन जाते है. आख़िर सत्ता का पावर कुछ ऐसा ही होता है.

आप किसी भी शहर के न्यूज़ पेपरों को उठा लीजिये रोजाना की तरह सरकार की भक्ति करते हुए दिखाई देंगे और न्यूज़ चैनलों का और भी बुरा हाल है, लगता है हम किसी लोकतांत्रिक देश में हैं ही नहीं. न्यूज़ चैनलों के हेडलाईनें सरकार की मंशा के अनुरूप लिखी जा रही है. ठीक इन्हीं कारणों से देश के महत्वपूर्ण मुद्दे जानबूझकर दफनाये जा रहे है. कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे देश के विपक्ष को सांप सूंघ गया हो.

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व महिला सुरक्षा पर लिखना या बोलना अपनी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है. 14वीं लोकसभा के लिए चुनी गई सरकर अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए पूर्व की सरकारों का जोरदार विरोध करती रहती है. क्या सरकार के इन विरोधों के कारण देश के महत्वपूर्ण मुद्दे सुलझ जाएंगे?

बिल्कुल नहीं? जाति व धर्म की आड़ में आप जनता को बरगलाने का काम ही कर सकते है. आज सबका-साथ, सबका-विकास का नारा पूरी तरह झूठा साबित हो रहा है. सरकर के नुमाइंदे इस बात को भली भांति जानते है इसलिए देश को फ़र्जी राष्ट्रवाद की ओर ले जा रहे है. सरकार के इस रवैये से देश के दलित, आदिवासी, ओबीसी व अल्पसंख्यक समुदाय अपने आपको कमजोर समझ रहा है.

आज देश में बेरोजगारी अपने पूरे चरम पर है, रोजगार मिलना काफ़ी मुश्किल हो गया है. प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाएं बहुजन समाज के दायरे से बहुत ऊपर निकल गयीं है और सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरफ चरमराई हुईं हैं. वहीं शिक्षा का व्यापारीकरण करके दलितों, आदिवासियों, ओबीसी व अल्पसंख्यक समुदाय को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है.

देश के सरकारी स्कूलों में सबसे ज्यादा बहुजन समाज के बच्चें पढ़ते है जिसे मिड डे मील के चक्कर में अपंग बनाया जा रहा है. जो सरकार की बहुजन समुदाय को शिक्षा से वंचित रखने की बहुत बड़ी सोची समझी रणनीति का हिस्सा मात्र है. वहीं दूसरी ओर कॉलेज व यूनिवर्सिटी में भी शिक्षा का भगवाकरण तो किया ही जा रहा है, वहीं पाठ्यक्रम भी बदले जा रहें हैं ये भी किसी आपातकाल से कम नहीं है.

ग़रीबी, महिला सुरक्षा, अपराध, कानून व्यवस्था के बारे में तो आज कोई अखबार लिखना ही नहीं चाहता है, टीवी चैनलों पर सिर्फ एक विशेष धर्म को चमकाने का लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा है. जो भारत जैसे धर्म निरपेक्ष गणराज्य में रह रहे बहुजन समाज के बहुत बड़े हिस्से के साथ धोखा है.

देखिए, बहुजन समाज का एक छोटा सा हिस्सा होने के नाते हमनें तो अपना दृष्टिकोण आप सबसे शेयर कर दिया. अब आप सब अपने नजरिये से अच्छे-बुरे का अंदाजा लगते रहिये और प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से बहुजन समाज को हर तरह से मजबूत करने की सांझा जिम्मेदारी उठाइये…

यह लेख अशोक बौद्ध ने लिखा है. अशोक बौद्ध एक समाजिक कार्यकर्ता हैं.

चोटी काटने, डायन बता कर मारने की घटनाएं दलित बस्तियों में ही क्यों ?

हिंसा, नफ़रत, भय और उपहास पर आधारित भी क्या कोई धर्म हो सकता है? जी हां! उसका नाम है हिन्दू, वैदिक, सनातनी, मनुवादी आदि. रुकिए! जनाब ये सब एक ही धर्म के नाम हैं, जी कुछ और भी हो सकते हैं. मगर इनके त्यौहार में नाचने, मुस्कुराने, हंसने या गले मिलने सबके पीछे कोई गहरी साज़िश ही रही है.

आज देश के कई हिस्सों में औरतों की चोटी काटने की घटनाएं सामने में आ रही हैं. इसी बीच एक महिला को डायन कह कर मार दिया गया. ये सब घटनाएं गरीब, दलित-आदिवासी बस्तीयों/गांवों में ही क्यों होती हैं? ये सवाल आपके मन क्यों नहीं आता? समाधान के लिए सवाल जरुरी है.

वास्तव में यह सब बहुत सोचा-समझा षडयंत्र है. ये साज़िश सीधे आपके दिमाग को कंट्रोल करने की है. आपके हाथ-पैर बांधने की जरुरत नहीं पड़ती. आपके दिमाग को दुश्मन अपनी मर्ज़ी से चलता है. ये वही हो रहा है.

सोचिए अब होगा क्या? लोग अपनी लड़कियों को घर तक सीमित कर देंगे. सीधे असर लड़कियों की शिक्षा पर असर पड़ेगा. अनपढ़ता की वजह से लोग पहले ही अपनी लड़कियों को गांव से बाहर भेजने को तैयार नहीं होते. अब अगर कुछ जागरूकता आयी थी तो ये षड़यंत्र रच दिया गया.

ये साज़िशें कोई अधार्मिक अर्थात नास्तिक लोग नहीं रचते अपितु तिकलधारी, चोटीधारी, जनेऊधारी, नीकारधारी रचते हैं ताकि दलित-आदिवासी कभी शिक्षित हो ही न पाए. देखिएगा इस घटना के बाद हज़ारों बेटियों का स्कूल/कॉलेज छुड़वा दिया जाएगा.

याद करो! जिन दिनों बच्चों को अपने एग्जाम की तैयारी करनी होती है उन्हीं दिनों तिकल-चोटी व जनेऊधारी पंडित शादी की तारीखें निकालता है. दलितों के लिए कुछ अलग देवता भी गढ़े गए हैं जैसे गोगा, बालक नाथ आदि. उनके बड़े-बड़े मेले भी उन्हीं दिनों में लगते हैं. यह सब मनु के कहने के अनुसार हो रहा है कि दलित-आदिवासी शिक्षा से दूर रहे.

कहते हैं कि मन्त्रमुग्ध करके कोई चोटी काट ले जाता है. ऐसे लोगों को सरहद पर भेजिए. जहां चीन शंकर के हिमालय की चोटियों पर काट रहा है. बकवास है, कुलबुलाहट है, नहीं सहन कर पा रहे कि कल जो चारपाई पर नहीं बैठते अब वो अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर शासन का हिस्सा बनने जा रहे हैं.

इसमें कुछ गुमराह दलित औरतें और महन्त-नुमा लोग भी शामिल हैं. वास्तव में ये मज़ारों और पंडितों के एजेंट हैं जिन्हें नहीं पता कि वो क्या कर रहे हैं. ये स्वयं चोटी काटते हैं और भीड़ में शोर मचा देते हैं. इसके लिए इन्हे कुछ पैसे या दूसरे लालच मिलते होंगे. ऐसा करके ये बाकि मासूम लोगों को फांस लेते हैं.

आप स्वयं सोचिए! आपने कब तक हिन्दू-धर्म को पालना है? धर्म लिखते हुए भी अपने आप पर गुस्सा आता है कि किस प्रकार की नीच, साज़िशी व हिंसक सोच को मैं धर्म कहने को मज़बूर हूं. इन तमाम साज़िशों को समझते हुए अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचिए.

 

       

यह लेख दर्शन ‘रत्न’ रावण ने लिखा है.

महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में इतिहास विषय के पाठ्यक्रम में किया गया बदलाव

महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड (सेकेंडरी-हायर सेकेंडरी) ने सातवीं और नौंवी क्लास के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है. राज्य शिक्षा विभाग और इतिहास विषय पर बनी समिति के सद्सयों का दावा है कि मुग़ल और पश्चिमी देशों का इतिहास मायने नहीं रखता है. अब सातवीं और नौंवी क्लास के नये पाठ्यक्रम में छात्रों को 1960 के बाद की भारतीय राजनीति के अलावा मराठा साम्राज्य और शिवाजी महाराज के इतिहास के बारे में पढ़ाया जाएगा.

एक अंग्रेज़ी दैनिक के अनुसार समिति के सदस्यों का कहना है कि किसी राजनीतिक फ़ैसले के तहत ये बदलाव नहीं किए गए हैं. विषय के विशेषज्ञों और शिक्षकों के साथ गहन विचार विमर्श के बाद ही बदलाव करने का फ़ैसला किया गया है. “नये पाठ्यक्रम में सातवी क्लास के लिए संदर्भ बिंदू मराठा साम्राज्य, महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी के पहले और बाद का भारत है. इसी तरह क्लास नौंवी के लिए संदर्भ बिंदू वे घटनाएं हैं जिनका भारतीय राजनीतिक परिद्रश्य पर प्रबाव पड़ा.”

समिति के अध्यक्ष सदानंद मोरे के अनुसार पहले इतिहास की किताबों में मुग़ल बादशाहों, उनके योगदान और फ़्रांस की क्रांति, यूनानी दर्शन तथा अमेरिका में आज़ादी की लड़ाई से संबंधित अध्याय थे. अब इन्हें या तो पूरी तरह हटा दिया गया है या फिर इनके बारे में चंद लाइने हैं.

मोरे ने कहा कि पाठ्यक्रम बदलने का मक़सद इसे महाराष्ट्र केंद्रित बनाना था ताकि ये राज्य बोर्ड के छात्रों के लिए और प्रसांगिक हो सके. हम महाराष्ट्र से हैं, हमें इस क्षेत्र के बारे में और जानने की ज़रुरत है. मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ ग़लत है. कोई ये क्यों नहीं कह रहा कि सेंट्रल बोर्ड के स्कूलों और जिन स्कूलों में ICSE पाठ्यक्रम है, वहां हमारे राज्य के बारे में एक पेज भी नही है. बस शिवाजी के बारे कुछ लाइने हैं. जिन छात्रों को उन विषयों के बारे में जानना है वे बाद में उच्च शिक्षा के ज़रिये जान सकते हैं. फिलहाल ये प्रसांगिक नही हैं.

नये पाठ्यक्र की किताबों में मध्यकालीन भारतीय इतिहास का केंद्र बिंदू शिवाजी हैं. नयी किताबों में शिवाजी, उनके परिवार और मराठा जनरलों की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसमें औरंगज़ेब के ख़िलाफ़ मराठाओं के 27 साल के संघर्ष पर विस्तृत अध्याय हैं.

एसआईटी जांच से क्यों घबरा रहा शिक्षा विभाग?

शिक्षा विभाग ही शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच में सहयोग नहीं कर रहा है. एक सप्ताह में 1500 में से महज आठ शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की ही सत्यापित प्रतिलिपि विभाग ने एसआईटी को सौंपी है. ये प्रमाण-पत्र भी आधे अधूरे हैं. अब एसआईटी जांच में तेजी के लिए सख्ती करने की सोच रही है. एसआईटी करीब एक माह से बेसिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच में लगी है पर यह जांच भी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है. एसआईटी हर जिले में जांच अधिकारी नामित कर चुकी है. जांच में देरी की वजह शिक्षा विभाग के अफसरों का ही सहयोग ना करना बताया जा है. एसआईटी ने विभाग से अब तक भर्ती हुए बेसिक शिक्षकों की सूची मांगी थी. एसआईटी इस सूची के आधार पर ही शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच का खाका खींच रही थी. विभाग ने 2014 और 2016 में भर्ती 1500 शिक्षकों की सूची एसआईटी को दी. इस पर एसआईटी ने जिलेवार शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की सत्यापित प्रतिलिपि मांगी. लेकिन एक सप्ताह बाद भी विभाग महज आठ शिक्षकों के आधे-अधूरे प्रमाणपत्रों की प्रतिलिपि सत्यापित कर दे पाया है. इस से इनकी भी जांच नहीं हो पा रही है.

शिक्षकों प्रमाणपत्रों की जांच के लिए शिक्षा विभाग शिक्षकों के दस्तावेजों को उन्हीं से सत्यापित करा कर एसआईटी को सौपेंगे. गढ़वाल मंडल के अपर माध्यमिक शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट ने अधिकारियों को इस बाबत निर्देश दिए हैं. बिष्ट ने बताया कि जिन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों पर जरा भी संदेह हो, उन्हें सबसे पहले एसआईटी को दिया जाए.

एसआईटी प्रभारी श्वेता चौबे का कहना है कि शिक्षा विभाग ने 1500 शिक्षकों में से मात्र आठ के आधे-अधूरे प्रमाणपत्रों की ही सत्यापित प्रतिलिपि दी है. देहरादून के इन आठ शिक्षकों की जांच भी पूरे प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही की जा सकेगी. जांच में तेजी लाने के लिए अब कुछ और तरीके अपनाए जाएंगे.

अपर निदेशक बेसिक शिक्षा वीएस रावत का कहना है कि बेसिक शिक्षकों के रिकार्ड ब्लॉक स्तर पर होते हैं. प्रत्येक डीईओ को हर ब्लॉक से रिकार्ड मंगवाकर जिला स्तर पर जमा करने के निर्देश दे दिए गए हैं. यह रिकार्ड एसआईटी को वहीं से उपलब्ध कराया जाएगा. प्रक्रिया लंबी होने के कारण इसमें देरी हो रही है. जो रिकार्ड नाम से मांगे हैं वे प्राथमिकता में उपलब्ध कराए जा रहे हैं. विभाग जांच में पूरा सहयोग कर रहा है.

डीएसपी पर महिला विधायक ने किया दलित उत्पीड़न का केस

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पटना। पटना के मसौढ़ी से आरजेडी की विधायक रेखा देवी ने मसौढ़ी के डीएसपी सुरेंद्र कुमार पंजियार पर दलित उत्पीड़न, धक्का-मुक्की और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाया है. रेखा देवी ने डीएसपी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया है. इसके अलावा डीएसपी पर आईपीसी की धारा 341, 323 और 504 के तहत भी मुकदमा दर्ज हुआ है. रेखा देवी ने एसएसपी मनु महाराज को डीएसपी और धनरूआ के थानेदार रोहन कुमार लिखित शिकायत की है.

एससी-एसटी थानेदार एसडी राम ने बताया कि डीएसपी पर केस दर्ज कर लिया गया है. थाने की महिला दारोगा पुलिस मामले की छानबीन करने में जुटी है. डीएसपी से इस बाबत पूछताछ होगी. विधायक का कहना है कि 2 अगस्त को धनरूआ थाना की पुलिस ने सांडा ग्राम निवासी राजेश बिंद को शराब पीने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. गांव के लोग आक्रोशित हो गए. सूचना मिलने के बाद वह भी धरना पर बैठ गईं.

विधायक ने दर्ज केस में कहा है कि पंजियार ने पुलिस के माध्यम से बातचीत के लिए बुलाया. लेकिन कोई हल नहीं निकलने पर वापस गई. बाहर आने पर डीएसपी ने मुझे रोका. जातिसूचक शब्द कहे, अभद्र व्यवहार किया. डीएसपी के निर्देश पर पुलिसकर्मियों ने धक्कामुक्की किया. विधायक ने कहा कि विधानसभा में इस मामले को उठाऊंगी और उनके पास जो इस घटना का जो वीडियो है, उसे भी दिखाऊंगी.

रेखा ने एसएसपी से धनरूआ थानेदार के खिलाफ लिखित शिकायत की है. एसएसपी को लिखा है कि राजेश बिंद ने कई बार थानेदार रोहन कुमार की करतूतों के बारे में शिकायत की थी. इस वजह से रोहन उससे खफा थे. राजेश के प्रति खुन्नस होने की वजह से ही उसे पकड़ा गया. रेखा ने एसएसपी से मांग की है कि रोहन को इस थाने से हटाया जाए.

बंगाल क्रिकेट संघ झूलन गोस्वामी को करेगा सम्मानित

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नई दिल्ली। बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) मंगलवार को अपने वार्षिक सम्मान समारोह में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे अनुभवी दिग्गज गेंदबाज झूलन गोस्वामी को 10 लाख रुपए का नगद इनाम प्रदान कर सम्मानित करेगा. बंगाल की रहने वाली झूलन ने हाल ही में इंग्लैंड में संपन्न हुए आईसीसी महिला विश्व कप में भारतीय टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. वह भारतीय टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं. 34 वर्षीय झूलन ने हाल ही में आस्ट्रेलिया की कैथरीन फिट्जपैट्रिक का रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट हासिल करने का विश्व कीर्तिमान अपने नाम किया है. इंग्लैंड के खिलाफ हुए फाइनल मैच में झूलन ने शानदार गेंदबाजी की थी और 23 रन देकर तीन विकेट चटकाए थे, जिसकी बदौलत भारत ने इंग्लैंड को 50 ओवरों में सात विकेट पर 228 रनों पर सीमित कर दिया था.

हालांकि भारतीय बल्लेबाज अपने खेल पर नियंत्रण नहीं रख सकीं और एकसमय जीता लग रहा मैच भारत के हाथों मात्र नौ रनों के अंतर से फिसल गया. सोमवार को एक समारोह के दौरान झूलन ने कहा, ‘हमने फाइनल मैच में अपने स्तर पर सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से क्रिकेट में पूर्वानुमान नहीं लगाए जा सकते. मैच के आखिरी एक घंटे में मैच का रुख पलट गया और हम हार गए. यही जीवन है.’

जब हैरी मेट सेजल फिल्म की कमाई में नहीं आया उछाल, इम्तियाज अली ने दिया जवाब

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शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की जब हैरी मेट सेजल 4 अगस्त को रिलीज हो चुकी है. इतने बड़े स्टार की मौजूदगी के बावजूद भी फिल्म ने उतनी कमाई नहीं की जितनी की उम्मीदें थीं. फिल्म वीकेंड पर भी 100 करोड़ की कमाई नहीं कर पाई. शाहरुख खान की यह फिल्म वीकेंड टेस्ट में फेल हो गई है. तरण आदर्श के अनुसार यह एक निराशाजन फिल्म के तौर पर उभरी है. ओपनिंग के दिन फिल्म ने 15,25 करोड़, दूसरे दिन 15 करोड़ रुपए और शनिवार को 15.50 करोड़ रुपए की कमाए. तीन दिन में फिल्म का कलेक्शन 45.75 करोड़ रुपए रहा. तरण आदर्श ने कहा- कुछ महानगरों को छोड़कर, व्यापार साधारण से डल हो गया. फिल्म की कमाई में उछाल गायब है.

जब हैरी मेट सेजल शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की दूसरी रिलीज फिल्म है. इससे पहले जनवरी में किंग खान की रईस और मार्च में अनुष्का की फिल्लौरी रिलीज हो चुकी है. रईस के साथ ऋतिक रोशन की काबिल भी रिलीज हुई थी. इसके बावजूद रईस का कलेक्शन काफी अच्छा रहा था. अपनी ओपनिंग के दिन रईस ने 20.4 करोड़ रुपए की कमाई की थी. वहीं वीकेंड पर इसने 93.24 करोड़ रुपए कमा लिए थे. उस हिसाब से देखा जाए तो शाहरुख की जब हैरी मेट सेजल अपनी ही फिल्म के कलेक्शन को पीछे छोड़ पाने में असफल रही है. शुरुआती आकंड़ों के अनुसार रक्षाबंधन के अवसर पर भी फिल्म की कमाई में उछाल नहीं आया और यह 8.5 करोड़ रुपए ही कमा सकी. इसके साथ ही 4 दिनों में फिल्म ने केवल 54. 25 करोड़ रुपए कमा लिए है.

इम्तियाज आगे कहते हैं,

“कुछ लोग कहते हैं कि इम्तियाज की फिल्में देखने के लिए आपको बहुत ही इंटेलीजेंट और इंटेलेक्चुअल टाइप होना पड़ेगा. यह मेरे लिए एक तरह से झटके जैसे होता है. क्योंकि मैं कभी भी इंटेलीजेंट और इंटेलेक्चुअल क्लब का हिस्सा नहीं रहा. मैं पूरे दिल से बहुत ही साधारण फिल्में बनाता हूं.’’

“मैंने ‘जब हैरी मेट सेजल’ को तारिफें बटोरने के लिए नहीं बनाया है, आप सब जानते हैं कि मैं एक अलग तरह का डायरेक्टर हूं और हर बार नए-नए विषयों पर फिल्म बनाता हूं. इस फिल्म को भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए ही बनाया गया है. न कि मेरी तारीफ के लिए.”

BHIM एप यूजर्स को मिलेगा कैशबैक का तोहफा

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नई दिल्ली। स्वंतत्रता दिवस के मौके पर सरकार भीम एप यूजर्स को तोहफा देने की तैयारी में है. यह लाभ केवल उन्हीं यूजर्स को मिलेगा जो भीम एप के जरिए डिजिटल ट्रांजेक्शन करते हैं. इसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है. यह एप यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेड यानि UPI पर काम करता है. इस एप को नोटबंदी के बाद दिसंबर में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किया गया था.

NPCI के मैनेजिंग डायरेक्टर ए. पी. होता ने कहा, “हमने सरकार को सूचित कर दिया है कि लोगों द्वारा इस एप के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए कैशबैक राशि को बढ़ाया जाना है. इसे लागू करने के लिए हम सरकार के अप्रूवल का इंतजार कर रहे हैं जो 15 अगस्त तक आने की उम्मीद है. इसके साथ ही भीम एप का नया वर्जन भी जारी किया जाएगा.” ए. पी. होता ने बताया कि वर्तमान में यह कैशबैक 10 रुपये से 25 रुपये तक दिया जाता है. वहीं, अभी अगर कोई व्यक्ति भीम एप को किसी दूसरे को रेफर करता है तो उसे 10 रुपये बोनस दिया जाता है. साथ ही जिसे रेफर किया जाता है उसे 25 रुपये का कैशबैक दिया जाता है.

ए. पी. होता ने यहा भी बताया कि भीम एप का वर्जन 1.4 भी फाइनल स्टेज में है. नए वर्जन के तहत यूजर्स एप के जरिए आसानी से डिजिटल पेमेंट कर पाएंगे. साथ ही एप में भारत क्विक रिस्पॉन्स कोड को भी इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे ट्रांजेक्शन्स में इजा़फा होने की उम्मीद लगाई जा रही है.

देखा जाए तो भीम एप में दिए जाने वाले कैशबैक की राशि बढ़ाने पर ऑनलाइन मार्किट में दूसरे पेमेंट एप्स के बीच कॉम्पटीशन और भी ज्यादा बढ़ जाएगा. पेटीएम और फोनपे जैसी कंपनियां भी ग्राहकों को पेमेंट पर कैशबैक देकर लुभाने की कोशिश करती हैं.

दलितों की जमीन पर कब्जा करने के बाद लगाया चोरी का आरोप, विरोध-प्रदर्शन

चंडीगढ़। पंजाब के लौंगोवाल में मंडेर कलां गांव के दलितों ने लौंगोवाल पुलिस स्टेशन के सामने धरना दिया. यह धरना दलितों ने जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी की अगुवाई में किया. दलितों ने मांग की कि दलितों की जमीन पर कब्जा करने वाले सवर्णों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

दरअसल मामला यह है कि दलित परिवारों को पंचायती जमीन ठेके पर मिली हुई है. इस जमीन से लोग-आते जाते भी है. लेकिन सवर्णों को दलितों को जमीन मिलना और दलितों का आना-जाना नगवार लगा जिसके कारण उन्हें इस जमीन पर कब्जा कर लिया. दलितों ने जब इसका विरोध किया तो सवर्ण जाति के लोगों ने दो दलितों के खिलाफ चोरी का झूठा केस दर्ज करवा दिया. दलितों ने थाने के सामने प्रदर्शन करते हुए दलितों पर लगे इस झूठे आरोप को भी हटाने की मांग की.

जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के जिला नेता बलविंदर सिंह ने कहा कि दलित परिवारों ने रिजर्व पंचायती जमीन ठेके पर ली है. इस जमीन को जो रास्ता लगता है उस पर कुछ लोगों ने नाजायज कब्जा करके अपनी जमीन में मिला लिया है. उन्होंने आगे कहा कि सवर्णों ने पहले भी इस जमीन पर कब्जा कर लिया था लेकिन दलितों ने संघर्ष कर इस जमीन को छुड़वा लिया था. इस बार फिर सवर्णों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया.

बलविंदर सिंह ने कहा कि जब भी दलित परिवारों की महिलाएं जमीन से हरा चारा लेने जाती हैं तो सवर्ण जाति के लोग उनके साथ हाथापाई करते हैं और उन्हें जातिसूचक गालियां देते हैं. कुछ दिन पहले इस घटना को लेकर लड़ाई झगड़ा भी हुआ था अस्पताल में महिलाओं ने पुलिस को इस घटना पर बयान भी दिया था.

मामला प्रशासन के ध्यान में भी लाया गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने बताया कि जमीन के जाते रास्ते पर खेतीबाड़ी औजार पड़े थे, जिन्हें दलित व्यक्तियों ने हटा दिया था. लेकिन दो दलित व्यक्तियों पर खेतीबाड़ी औजार चोरी करने के आरोप में झूठा केस दर्ज करवा दिया गया है. जिस कारण दलित परिवारों में इस बेइंसाफी के खिलाफ भारी रोष है. यह खेतीबाड़ी औजार पुलिस थाने में ही पड़े हैं.

हफ्ते में दो दिन बंद रहेंगे बैंक

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नई दिल्ली। आम लोगों के लिए बैंकों के खुलने और बंद होने का समय बदल सकता है. मुमकिन है कि बैंक सुबह 10 बजे के बजाय 9:30 बजे खुले और शाम 4 बजे तक ग्राहकों के काम निपटाए जाएं. ऐसा हुआ तो बैंक कर्मचारी हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम करेंगे. हर शनिवार और रविवार को बैंक बंद रहेंगे. इस बारे में एक प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. बैंकों की संस्था इंडियन बैंक्स असोसिएशन (आईबीए) और बैंक यूनियनों के बीच पहले दौर की बातचीत हो चुकी है. इसी महीने दूसरे दौर की बातचीत के बाद अंतिम फैसला होने की संभावना है. अभी बैंक कर्मचारी आमतौर पर हर दिन करीब साढ़े छह घंटे काम करते हैं.

हालिया बैठकों में बैंक यूनियनों ने कहा कि वे ग्राहकों को अतिरिक्त समय देने को तैयार हैं, पर उन्हें 5-डे वीक चाहिए. अभी बैंकों में हर दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है. नैशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा कि समय बढ़े तो हर शनिवार की छुट्टी मिले. सरकार का मानना है कि बैंकों के पास ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में बैंकों को कैश डिपॉजिट, नए खाते खुलवाना, एफडी बनवाना, एफडी तुड़वाना और पासबुक में एंट्री जैसे कामों के लिए ज्यादा समय देना चाहिए.

फिर लापता हुए राहुल गांधी, ढूंढने वाले व्यक्ति को जनता देगी ईनाम

अमेठी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अपने ही संसदीय क्षेत्र अमेठी में उनके लापता होने के पोस्टर लगाए गए हैं. जगह-जगह लगे पोस्टर्स में राहुल गांधी को ढूंढ़कर लाने वाले को गिफ्ट देने की बात कही गई है. इस पोस्टर के नीचे लिखा है कि ये अमेठी की जनता की ओर से जारी किया गया है.

अमेठी में जगह-जगह लगा पोस्टर चर्चा का विषय बना हुआ है. उधर कांग्रेसी इसे राहुल गांधी की साख गिराने की साजिश बता रहे हैं. फिलहाल पोस्टर में न तो किसी का नाम है और न ही कोई नंबर छोड़ा गया है. अमेठी में आम दीवारों के साथ ही सरकारी कार्यालयों व केंद्रीय कांग्रेस कार्यालय की दीवार पर राहुल लापता का पोस्टर चस्पा किए गए हैं.

अमेठी में 7 अगस्त को शहर व कस्बों की दीवारों पर राहुल गांधी लापता के पोस्टर चस्पा मिले. पोस्टर को देख चर्चा में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई. वहां जायस हो या अमेठी सभी जगह पोस्टर चस्पा दिखाई पड़े. मामले की जानकारी जब कांग्रेसियों को हुई तो उनका आक्रोश भी दिखाई पड़ा. बताते चले कि लोकसभा चुनाव के बाद भी ऐसे ही पोस्टर लगाए गए थे. उस समय भी कांग्रेसियों ने उसे साजिश करार दिया था.

कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि चार-पांच दिन पूर्व राहुल गांधी ने यहां के किसानों की समस्याओं को लेकर लखनऊ में एनएचआइ दफ्तर में शीर्ष अधिकारियों से मिल यहां की समस्याओं को लेकर मुद्दा उठाया था. यही नहीं जिले से भी किसान गए थे. जहां पर उनकी राहुल से मुलाकात भी हुई थी.

उन्होंने कहा राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए विरोधी दल साजिश कर रहे हैं. अमेठी में उनके निधि से कार्य किए जा रहे हैं. इसके अलावा देशभर में जहां पर भी समस्याएं हो रही हैं, वह वहां जा रहे हैं. साल भर पूर्व भी ऐसे पोस्टर लगाए गए थे. इससे किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

भारतीय आर्मी का दिखा दम, पहले राउंड में चीन का टैंक हुआ ध्वस्त

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नई दिल्ली। रूस में इन दिनों बड़े देशों की सेना के टैंक का एक जबरदस्त मुकाबला चल रहा है. रूस में चल रही अंतरराष्ट्रीय आर्मी गेम में इंडिन आर्मी ने भी हिस्सा लिया है. भारतीय आर्मी अब इस प्रतियोगिता के दूसरे राउंड में पहुंच गई है. पहले राउंड में हालांकि रूस ने बाजी मारी, वहीं भारत चौथे स्थान पर रहा.

प्रतियोगिता के दौरान चीन के टैंक के साथ कुछ अटपटा हुआ। गेम के दौरान चीन का टैंक लड़खड़ा गया. टैंक के कई हिस्से अलग-अलग हो गए. दूसरे राउंड में अगले तीन दिनों तक मुकाबला चलेगा, जिसमें टैंक के अलावा हथियार चलाने के भी गेम होंगे. भारतीय सेना का मुकाबला 10 अगस्त को है.

दूसरे राउंड में 48 किलोमीटर की रिले रेस होगी, जिसमें एक ही टैंक होगा और उसके द्वारा ही करतब दिखाए जाएंगे. दूसरे राउंड में शीर्ष पर रहने वाली टॉप 4 टीमें अगले राउंड में जाएंगी. फाइनल रेस 12 अगस्त को होगी।इस साल इस प्रतियोगिता में कुल 19 देशों ने हिस्सा लिया था, जिसमें भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेलों में 28 कार्यक्रम होते हैं जिनका आयोजन रूस, बेलारूस, अजरबैजान, कजाखिस्तान और चीन में होता है.

वर्णिका कुंडू के समर्थन में आए सहवाग, भाजपा अध्यक्ष के बेटे को मिलनी चाहिए सजा

चंडीगढ़। हरियाणा के भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पर आईएएस की बेटी से छेड़छाड़ के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की ढीली कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. विक्टिम वर्णिका का कहना है कि किसी गाड़ी का पीछा करना, उसकी गाड़ी को रोकने की कोशिश करना और गाड़ी पर हाथ मारना यह किडनैपिंग की कोशिश नहीं तो और क्या है? बता दें कि वर्णिका बार-बार यह आरोप लगाती रही हैं कि उसके अपहरण की कोशिश हुई है. इसके बाद भी पुलिस ने किडनैपिंग के प्रयास की धारा 365/511 के तहत केस दर्ज नहीं किया.

शनिवार तक चेहरा छिपाकर मीडिया से बात कर रही पीड़िता ने चेहरे से नकाब हटाते हुए राजनीतिक दबाव के सामने झुकने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वह आखिरी दम तक लड़ेंगी, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि सभी बेटियों की सुरक्षा के लिए है. इस बीच उनकी एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई.

वर्णिका के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में निष्पक्ष जांच के समर्थन में पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग भी उतर आए हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर हमेशा एक्टिव रहने वाले वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट के जरिए इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. साथ ही उन्होंने लड़कियों के साथ छेड़छड़ करने वाले मनचलों की नसीहत भी दी है.

सहवाग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि चंडीगढ़ का वकिया शर्मनाक है. बिना किसी के प्रभाव के निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. कोई भी हो. कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे. सहवाग के इस ट्वीट से साफ है कि उनका इशारा हरियाणा भाजपा के चीफ सुभाष बराला के बेटे विकास बराला की ओर है जिनके ऊपर अपने दोस्त के साथ वर्णिका का पीछा और छेड़छाड़ करने का आरोप है.

योगीराज में शिक्षा व्यवस्था बनी मज़ाक, विद्यालय बना कूड़े का ढेर

शामली। योगीराज में एक बार फिर से शिक्षा व्यवस्था का मजाक बनाया गया है. यूपी के शामली में एक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय को कूड़ा और गंदगी डालने का ढेर बना दिया गया है. विद्यालय में इतनी मात्रा में गंदगी इकट्ठी हो चुकी है कि 1 इंच भी बच्चों के बैठने या आने जाने की जगह नहीं बची है. हालात इतनी खराब हो चुके हैं कि बच्चों ने स्कूल जाना तक छोड़ दिया है. वहीं आला अधिकारियों से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने अपना पुराना राग अलापते हुए कहा कि जांच के बाद कार्रवाई करेंगे.

केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार ‘स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत’ का नारा जोर शोर से लगा रही है. शामली जनपद के ब्लॉक थाना भवन के गांव गढ़ी अब्दुल्ला में विद्यालय ही एक मात्र गांव का कूड़ा डालने का स्थान है. जबकि इसी थाना भवन से भाजपा विधायक सुरेश राणा प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर स्थित हैं. उनका भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं है. वहीं बच्चों को दीवार कूद कर या नाले के पानी में होकर स्कूल आना-जाना पड़ता है. मानसून सीजन में स्कूल का प्रांगण और आने-जाने का रास्ता इस समय नाला बन चुका है जिससे बच्चों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही गंदगी की वजह से उनके बीमार होने का खतरा भी रहता है.

बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं कई बच्चे-अध्यापिका पंजाब केसरी के मुताबिक स्कूल अध्यापिका की मानें तो ये सब कई महीनों से चल रहा है जिस कारण अध्यापक और बच्चे बीमारियों की चपेट में आ गए हैं. काफी बच्चों ने स्कूल आना भी बंद कर दिया है. कई बार ग्राम प्रधान और हेड मास्टर से शिकायत भी कर चुके हैं पर कोई समाधान नहीं हुआ. जब हमने बीएसए शामली से इस पुरे मामले के बारे में बात की तो उन्होंने जांच की बात कही. पर स्कूल में कूड़ा क्यों और किसके कहने पर डाला जाता है इसका जवाब वह भी नहीं दे पाए.