दलितों की मुक्ति में ही मानव और भारतीय समाज की मुक्ति

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पटना। दलितों के साथ सदियों तक समाज में जाति के नाम पर भेदभाव होता रहा है. आज भी दलितों की कुछ विशेष पीड़ा है, जो उच्चजाति के लोगों को नहीं झेलनी पड़ती. दलितों की मुक्ति में ही मानव और भारतीय समाज की मुक्ति है. यह बातें गुरुवार को चर्चित साहित्यकार अरुण कमल ने कही.

वह सेंट जेवियर्स स्कूल, गांधी मैदान के मुख्य हॉल में हिंदी दलित साहित्य में मानव मुक्ति की अवधारणा, के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि यह पुस्तक दलित साहित्य को समझने में काफी मददगार साबित होगी. इससे पूर्व जेवियर इंस्टीच्युट ऑफ सोशल साइंस के प्रो. जोस कलापुरा ने लेखक डॉ. सुशील बिलुंग का परिचय कराया. उन्होंने कहा कि यह पुस्तक दलित साहित्य की पड़ताल करती है. इसे पढ़कर दलित साहित्य की बेहतर समझ विकसित होगी. पुस्तक दलित साहित्य में मानव मुक्ति की अवधारणा को समझने में मददगार साबित होगी.

इस मौके पर साहित्यकार और अरविंद महिला कॉलेज में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शिवनारायण सिंह ने कहा कि इस पुस्तक में साहित्य, दर्शन, विचार और आंदोलन मौजूद हैं. इस पुस्तक में विषम परिस्थितियों से जूझ रहे आमजनों के संघर्ष की दास्तान को पढ़ा जा सकता है. पुस्तक आमजनों के संघर्ष के साहित्य के स्वरूप और उसकी मौजूद उपस्थिति से रूबरू कराती है. चर्चित रंगकर्मी और लेखक हसन इमाम ने कहा कि पुस्तक दलित साहित्य के अंदर मौजूद विभिन्न अंतरविरोधी प्रवृत्तियों, इसके इतिहास और समकालीन समय में चल रहे आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में दलित साहित्य की मीमांसा करता है.

उन्होंने कहा कि समकालीन दलित आंदोलन का विमर्श दलित साहित्य का विमर्श है. यह बात इस पुस्तक में गंभीरता से उठाई गई है. कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक डॉ. सुशील बिलुंग ने पुस्तक की रचना प्रक्रिया, पुस्तक लेखन यात्रा का जिक्र करते हुए पुस्तक में उठाए गए विमर्श को रेखांकित किया. कार्यक्रम का संचालन प्रो. दीप कुमार ने किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रवीण मधु ने किया. इस अवसर पर संत जेवियर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. निशांत, सामाजिक कार्यकर्ता विनय ओहदार, रंगकर्मी पवन यादव, रौनित कुमार, सत्यम परासर, र|ेश पांडे, अरमान कुमार सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी मौजूद थे.

साभार- दैनिक भास्कर

दो ट्रेनों की टक्कर में 42 की मौत और 133 घायल, राष्ट्रपति ने जताया शोक

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काइरो। मिस्र में स्थित तटीय इलाके अलेक्जेंड्रिया में दो ट्रेनों की भिड़ंत में 42 लोगों की मौत हो गई, जबकि 133 घायल हो गए. एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना था कि दोनों ट्रेनों ने भिड़ंत के बाद पिरामिड की शक्ल ले ली.

हादसा दोपहर दो बजकर 15 मिनट पर हुआ. खोरशिद स्टेशन के पास दोनों की आमने-सामने की टक्कर हुई. हादसे के बाद बचाव कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया. राष्ट्रपति ने हादसे पर शोक जताते हुए इसके पीछे के कारणों की तलाश करने का आदेश दिया है. हादसा इतना जबरदस्त था कि अभी तक लोग बोगियों में फंसे हुए हैं.

एक ट्रेन मिस्र की राजधानी काहिरा से आ रही थी और दूसरी ट्रेन पोर्ट सैद से आ रही थी. खुर्शीद इलाके में दोनों ट्रेनों की टक्कर हो गई. स्वास्थ्य मंत्री के सलाहकार शरीफ वादी ने बताया कि हताहतों की संख्या बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘फिलहाल 109 लोग घायल हैं. इसमें कुछ गंभीर रूप से भी घायल भी शामिल हैं. घायलों को समीपवर्ती अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.’

स्वास्थ्य मंत्रालय में अवर सचिव मागदी हेगाजी ने बताया, ‘बचाव दल जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहा है. घायलों को ऐंबुलेन्स के जरिये समीपवर्ती अस्पतालों में ले जाया जा रहा है.’

खुद-ब-खुद ट्रांसफर हो जाएगा PF अकाउंट

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अगर आप जॉब बदल रहे हैं और आपको अपने पीएफ की टेंशन सता रही है तो ये खबर आपके लिए है. चीफ प्रोविडेंट फंड कमिश्नर वीपी जॉय ने कहा है कि अगले महीने से जब आप जॉब बदलेंगे तो आपका पीएफ अकाउंट खुद ट्रांसफर हो जाएगा. यह सबकुछ आधार नंबर के जरिए होगा. इसके अलावा EPFO (ईपीएफओ) को एंप्लॉयीज के लिए और बेहतर बनाने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं.

जॉय ने कहा कि जब कोई कर्मचारी जॉब बदलता है तो उसके कई सारे अकाउंट्स बंद हो जाते हैं, जो उसे दूसरी कंपनी में जाकर दोबारा चालू करने पड़ते हैं. अब EPFO ने आधार के एनरॉलमेंट को जरूरी बना दिया है, जिससे यह अकाउंट बंद न हो, क्योंकि पीएफ एक पर्मानेंट अकाउंट है, जिसे कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के लिए हमेशा रख सकते हैं.

चीफ प्रोविडेंट फंड कमिश्नर ने बताया कि हम इस कोशिश में हैं कि अगर कोई जॉब चेंज करता है तो बिना एप्लीकेशन के पैसे तीन दिन में ट्रांसफर हो जाएं. अगर कर्मचारी के पास आधार आईडी है और उसने वेरिफाइड कराई हुई है तो देश में कहीं भी वह एंप्लॉयी बिना एप्लीकेशन दिए जॉब बदलने पर पीएफ अकाउंट ट्रांसफर करा सकता है, यह व्यवस्था जल्द लागू होने वाली है.

जॉय ने बताया कि हम कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को समझा सकें कि पीएफ का पैसा अधिक जरूरत के समय ही निकाला जाए. यह पैसा घर बनवाने या खरीदने में, बच्चों की शिक्षा या गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ही निकाला जाना चाहिए.

भारत की अच्छी शुरुआत, स्कोर 100 रनों के पार

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कैंडी। भारत और श्रीलंका के बीच कैंडी में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में भारत के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. खबर लिखे जाने तक भारत ने बिना किसी नुकसान के 53 रन बना लिए हैं.

3 टेस्ट मैचों की सीरीज़ का ये आखिरी टेस्ट मैच है और इस श्रृंखला में भारतीय टीम पहले ही 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी है. भारत ने गॉल में पहला टेस्ट 304 रन से और कोलंबो में दूसरा टेस्ट पारी और 53 रन से जीता था. इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी विराट कोहली एंड कंपनी की नजर इस टेस्ट में विदेशी सरजमीं पर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में सूपड़ा साफ करने वाली पहली भारतीय टीम बनने पर लगी है. भारत और श्रीलंका दोनों ही टीमों में इस आखिरी टेस्ट मैच के लिए बदलाव किए गए हैं. भारतीय टीम में एक टेस्ट के लिए सस्पेंड हुए रवींद्र जडेजा की जगह कुलदीप यादव को मौका मिला. वहीं श्रीलंका की तरफ से तीन बदलाव किए गए हैं. लक्ष्मण संदकान, लाहिरू कुमारा और विश्वा फर्नांडो को इस टेस्ट में श्रीलंकाई टीम में क्लीन स्वीप से बचाने के लिए शामिल किया है.

पिछले कुछ समय से बदलाव के दौर से गुजर रही श्रीलंकाई टीम ने औपचारिकता के इस मैच में हरी-भरी पिच तैयार की है. आमतौर पर पल्लेकल की पिच को तेज गेंदबाजों के मुफीद माना जाता है. यहां रफ्तार और उछाल देखने को मिलती है. पिच के रंग से जाहिर होता है कि यहां पहले दो दिन तेज गेंदबाजों को अच्छी मदद मिलेगी. हालांकि, तेज बारिश के कारण भारतीय टीम शुक्रवार को अभ्यास नहीं कर सकी. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस टेस्ट मैच पर बारिश अच्छा खासा खलल डाल सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि टेस्ट के पहले चार दिन काफी बारिश हो सकती है. यदि ऐसा हुआ तो बारिश भारतीय टीम के 3-0 से सीरीज जीतने के इरादों पर पानी फेर सकती है.

टीम इस प्रकार है –

भारत : विराट कोहली (कप्तान), शिखर धवन, केएल राहुल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, ऋद्धिमान साहा (विकेटकीपर), उमेश यादव, हार्दिक पांड्या, मुहम्मद शमी, कुलदीप यादव.

श्रीलंका : दिनेश चांदीमल (कप्तान), उपुल थरंगा, दिमुथ करुणारत्ने, कुशल मेंडिस, एंजेलो मैथ्यूज, लाहिरू थिरिमाने, धनंजय डिसिल्वा, निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर), दिलरुवान परेरा, लाहिरू कुमारा, विश्वा फर्नांडो, दुष्मंथा चमीरा, लाहिरू गमागे, लक्षण संदाकन और मालिंदा पुष्पकुमारा.

‘दिल से दिल तक’ से सिद्धार्थ को किया गया बाहर, मुश्किल है वापसी

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सिद्धार्थ शुक्ला इन दिनों फिर से चर्चा में हैं. वजह उनका कोई नया शो नहीं, बल्कि बैड बिहेवियर है. सुनने में आया है कि वह पिछले कई दिनों से सेट पर लोगों से बुरा बर्ताव कर रहे हैं. इसमें गाली-गलौच करना तक शामिल है.

बताया जा रहा है कि इस मामले की शुरुआत कुछ दिन पहले एक पार्टी के दौरान हुई थी. इस पार्टी में शो से जुड़े एक्टर्स कुनाल वर्मा, रश्मि देसाई और जैस्मीन भसीन भी शामिल थे. सूत्रों की मानें तो इस पार्टी के दौरान शराब के नशे में सिद्धार्थ ने कुनाल के साथ काफी गाली-गलौच की. जब कुनाल ने उनसे कहा कि वह सही नहीं कर रहे हैं, तब भी सिद्धार्थ उन पर चिल्लाते नजर आए. कुनाल ने इस बारे में प्रोडक्शन टीम से भी शिकायत की. इस पर जब प्रोजेक्ट हेड शीतल ने उनसे बात करनी चाही, तो सिद्धार्थ ने उन्हें भी नहीं बख्शा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनके पास कई शो के ऑफर हैं और शो छोड़ने की धमकी देते हुए अपनी अब तक की पेमेंट की मांग भी कर डाली. सिद्धार्थ की इस बात पर बौखलाई शो हेड ने उन्हें तुरंत शो छोड़ने और यहां तक कि सेट से चले जाने के लिए कह दिया.

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले भी सिद्धार्थ ने इसी तरह का व्यवहार किया था और फिर वह माफी मांगकर शो में वापस लौटे थे. मगर ताजा हालात देखकर लगता है कि अब सिद्धार्थ ने शो में वापसी के सभी रास्ते खुद ही बंद कर दिए हैं. अगर ऐसा ही होता है, तो ये देखना होगा कि आने वाले दिनों में दिल से दिल तक का पार्थ कौन बनता है.

बैंक ऑफ बड़ौदा को 203.4 करोड़ का मुनाफा

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नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का मुनाफा 203.4 करोड़ रुपए हो गया है जबकि इस तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा को 459.3 करोड़ रुपए के मुनाफे का अनुमान था.

वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा की ब्याज आय 3,405 करोड़ रुपए रही है. जबकि इस तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा की ब्याज आय 3,519.6 करोड़ रुपए रहने का अनुमान था.

तिमाही दर तिमाही आधार पर अप्रैल-जून तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का ग्रॉस एनपीए 10.46 फीसदी से बढ़कर 11.4 फीसदी रहा है. तिमाही आधार पर अप्रैल-जून तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का नेट एनपीए 4.72 फीसदी से बढ़कर 5.17 फीसदी रहा है.

रुपए में बैंक ऑफ बड़ौदा के एनपीए पर नजर डालें तो तिमाही आधार पर पहली तिमाही में ग्रॉस एनपीए 42,719 करोड़ रुपए से बढ़कर 46,173 करोड़ रुपए रहा है. नेट एनपीए 18,080.2 करोड़ रुपए से बढ़कर 19,519 लाख करोड़ रुपए रहा है.

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले 6 दिनों में 63 बच्चों की मौत

गोरखपुर। इंसेफेलाइटिस जैसी घातक बिमारी से गोरखपुर को हर साल सामना करना पड़ता है. गोरखपुर में हर साल सैंकड़ों बच्चे और नवजात इस खतरनाक बिमारी से मर जाते हैं. लेकिन यूपी सरकार कभी भी इस बिमारी को समाधान नहीं निकाल पाई है. इस साल भी गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले छह दिनों में 63 बच्चों की मौत हो गई. आज सुबह भी एक बच्चे की मौत हो गई. ये बच्चा इंसेफेलाइटिस से पीड़ित था.

यूपी सरकार ने इस मामले मेजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं. बाल चिकित्सा केंद्र में बच्चों की मौतों के लिए इंफेक्शन और ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कत को जिम्मेदार ठहराया गया है, लेकिन अस्पताल और जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण मानने से इनकार किया है. सीएम ने अपने दो मंत्रियों को भेज मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है.

9 तारीख की आधी रात से लेकर 10 तारीख की आधी रात को 23 मौतें हुईं जिनमें से 14 मौतें नियो नेटल वॉर्ड यानी नवजात शिशुओं को रखने के वॉर्ड में हुई जिसमें प्रीमैच्योर बेबीज रखे जाते हैं. यह भी हैरतअंगेज है कि 10 अगस्त की रात को ऑक्सीजन की सप्लाई खतरनाक रूप से कम हो गई. ऑक्सीजन खत्म होने से अबतक 30 बच्चों की मौत हो चुकी है. इस मामले में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो मंत्रियों को मामले की जांच के लिए गोरखपुर भेजा है.

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और तकनीकी व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन वहां पहुंचने वाले हैं. रवानगी से पहले उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उधर मामले को गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अस्पताल की सुरक्षा बढ़ा दी है और वहां काफी संख्या में पुलिस के जवानों को तैनात कर दिया गया है.

दो दिन पहले नौ अगस्त की शाम को सीएम योगी आदित्यनाथ मेडिकल कॉलेज का हाल देखकर गये थे. बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी. लिक्विड ऑक्सीजन तो गुरुवार से ही बंद थी और आज सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों ने दो घंटे तक अम्बू बैग का सहारा लिया. वहीं यूपी सरकार का कहना है कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की कमी के कारण किसी रोगी की मौत नहीं हुई है.

हिंदुस्तान के मुताबिक ताज्जुब है कि इतनी बड़े संकट के बावजूद डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा. जबकि मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों का कहना था कि दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी. प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचते तो क्राइसिस मैनेजमेंट आसान हो जाता. बुधवार को ही लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक पूरी तरह से खाली हो गया था. मंगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गए. इसके बाद कालेज में हाहाकार मच गया. बेड पर पड़े मासूम तड़पने लगे. डॉक्टर और तीमारदार एम्बू बैग से ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे. हालांकि उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरने वालों में जुनैद, अब्दुल रहमान, लवकुश, ज्योति, शालू, खुशबू, फ्रूटी, शिवानी और अरूषी शामिल थी.

गुरुवार से शुरू हुआ संकट बीआरडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति का संकट गुरुवार को तब शुरू हुआ जब लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हो गई. संकट को देखते हुए गुरुवार को दिन भर 90 जंबो सिलेंडरों से ऑक्सीजन की सप्लाई हुई. रात करीब एक बजे यह खेप भी खप गई. जिसके बाद अस्पताल में कोहराम मच गया. साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडरों की खेप लगाई गई. यह सुबह साढ़े सात बजे तक चला.

सुबह फिर मचा कोहराम वार्ड 100 बेड में भर्ती इंसेफेलाइटिस के 73 में से 54 मरीज वेंटिलेटर पर हैं. सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म फिर खत्म हो गई. जिसके बाद वार्ड 100 बेड में हंगामा शुरू हो गया. एम्बुबैग के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई. तीमारदारों के थक जाते ही डॉक्टर एम्बुबैग से  ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे. हालांकि उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरने वालों में जुनैद, अब्दुल रहमान, लवकुश, ज्योति, शालू, खुशबू, फ्रूटी, शिवानी और अरूषी शामिल थी.

30 मौतों की जांच हो, आश्रितों को 20-20 लाख दिए जाएं उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री एवं सपा नेता राधेश्याम सिंह ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो दिन में 30 मासूमों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर मौत की धारा में मुकदमा कायम करने और मृतक आश्रितों को फौरन 20-20 लाख रुपये की मदद करने की प्रदेश सरकार से मांग की है. उन्होंने कहा कि सीएम मेडिकल कॉलेज का जिस दिन दौरा करते हैं, उसके दूसरे ही दिन आक्सीजन की कमी से मासूम तड़प-तड़प कर मरने लगते हैं. यह बताता है कि कॉलेज प्रशासन कितना गैरजिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में लीपापोती नहीं होनी चाहिए. दोषी अधिकारियों को सीधे बर्खास्त किया जाना चाहिए. सपा इस घटना को बहुत गंभीरता से ले रही है. पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है. प्रदेश सरकार इन परिवारों को तत्काल 20-20 लाख रुपये की मदद दे.

चीनी नौसेना की हिंद महासागर पर नजर

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एक तरफ दोकलम क्षेत्र में कब्जे के इरादे से चीन लगातार भारत को युद्ध की धमकी देने से बाज नहीं आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अब चीनी नौसेना की नजर हिंद महासागर पर है. भारतीय समुद्री इलाके के नजदीक चीन की पीएलए की मौजूदगी से बढ़ते दबाव के बीच उसकी नौसेना हिंद महासागर की सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत से हाथ मिलाना चाहती है. शेंजियांग प्रांत स्थित अपने रणनीतिक दक्षिण सागर बेड़े (एसएसएफ) पर पहली बार भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बात करते हुए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) के अधिकारियों ने हिंद महासागर को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक साझा स्थान बताया.

चीन में एसएसएफ के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल कार्यालय के कैप्टन लियांग टियांजुन ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि भारत और चीन हिंद महासागर की सुरक्षा में संयुक्त योगदान दे सकते हैं.’उनकी टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब चीनी नौसेना अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर विस्तार करने में जुटी है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा, ‘हमारे बड़े हथियार सिर्फ खिलौने नहीं हैं.’ उन्होंने युद्धपोत के हथियारों के बारे में भी भारतीय मीडिया को जानकारी दी.

हिंद महासागर में पहली बार हॉर्न ऑफ अफ्रीका स्थित जिबूती में नौसैनिक अड्डा स्थापित करने और वहां चीनी युद्धपोतों व पनडुब्बियों के बढ़ते सशक्त प्रयासों पर लियांग ने अपनी सफाई भी दी. विदेशी समुद्री इलाके में चीन के इस पहले नौसैन्य अड्डे का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, ‘इसे लॉजिस्टिक केंद्र बनाकर हम क्षेत्र में समुद्री डकैती को रोकने, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान चलाने और मानवीय राहत पहुंचाने पर जोर देंगे.’

जिबूती नौसैनिक अड्डे पर उन्होंने कहा, ‘यह चीनी नौसेना के आराम करने की जगह भी रहेगी.’ लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह चीन के बढ़ते राजनीतिक व आर्थिक प्रभाव के बीच वैश्विक पहुंच बढ़ाने की महत्वाकांक्षा का हिस्सा है. कैप्टन लियांग ने हिंद महासागर को एक बहुत बड़ा समुद्र बताया. साथ ही कहा कि क्षेत्र की शांति व स्थिरता में योगदान देने के लिए यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए साझा स्थान भी है.पीएलएएन के युद्धपोत युलिन पर भारतीय मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि चीनी सेना का रुख रक्षात्मक है, न कि आक्रामक. चीन कभी भी अन्य इलाकों में घुसपैठ नहीं करेगा, लेकिन यह भी जरूरी है कि अन्य देश भी उसे रोकें नहीं. भारतीय मीडिया को बुलाने के मकसद पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विभिन्न देशों के साथ नियमित बातचीत का हिस्सा है.

चीनी नौसेना में करीब 70 हजार नौसैनिक हैं, जबकि उसके पास 300 नौसैनिक जहाज हैं. कुछ दिन पूर्व चीन ने यह भी कहा था कि वह सेना और नेवी के लिए अलग से मिसाइल बल बना रहा है. इसके लिए उसका बजट 152 अरब अमेरिकी डॉलर किया जा रहा है. यानी चीन दुनिया का ऐसा दूसरा देश होगा जिसके पास इतना बड़ा बजट होगा. इस संबंध में पहला स्थान अमेरिका का है. कैसा लगा

इमरान खान से भिड़ी नवाज शरीफ की बेटी

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में इमरान खान और नवाज शरीफ के बीच चल रहे राजनीतिक अदावत के बीच नवाज की बेटी मरियम नवाज शरीफ इमरान खान से भिड़ गईं. उन्होंने इमरान खान को आर्मी की ‘कठपुतली’ तक कह दिया. पाकिस्तान की दो राजनीतिक शख्सियतों के बीच ये ट्विटर वार तब शुरू हुआ जब इमरान खान ने पीएमएल (एन) की रैलियों के बारे में ट्वीट किया.

इमरान खान ने पूर्व पीएम नवाज शरीफ की रैली को भ्रष्टाचार बचाओ रैली करार दिया और कहा कि इस रैली से लगातार लोग गायब होते जा रहे हैं. इमरान खान के ट्वीट से बिफरीं नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ ने ट्वीट कर कहा कि आप पूरी तरह से हार चुके हैं और इस हार से आपके दिल में पैदा हुए तूफान को समझा जा सकता है.

इमरान खान ने इसी रैली को निशाना बनाते हुए क्रिकेटिंग कमेंटरी के अंदाज में ट्वीट किया उन्होंने लिखा, ‘ आप महसूस कर रहे होंगे कि आपकी गलत अंपायरिंग की सफाई सुनने आए लोगों की संख्या में लगातार कमी आ रही है.’

ट्विटर पर इमरान ने आगे लिखा कि पटवारियों और किराये की भीड़ से की गई रैली किसी को नेता नहीं बना देती है. इस रैली में नवाज शरीफ बुलेट प्रूफ कार से जनता को संबोधित कर रहे हैं. इमरान खान ने इस पर भी तंज कसा है, उन्होंने लिखा कि बुलेटप्रुफ कार से बोलने से उस भीड़ में भरोसा पैदा नहीं होता जो लगातार कम होती जा रही है, यदि आपको मौत से डर लगता है तो आपको ये रैलियां नहीं करनी चाहिए थीं.

फिल्म रिव्यू- ‘टॉयलेटः एक प्रेम कथा’

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मुंबई। ‘टॉयलेटः एक प्रेम कथा’ को लेकर लंबे समय से चर्चे चल रहे थे, आज फिल्म रिलीज हो गई है. अक्षय कुमार और भूमि पेडणेकर ने फिल्म में जबरदस्त एक्टिंग की है. कहानी भी दिलचस्प है. फिल्म में उत्तर भारत की जो झलक दिखाई गई है, वह काफी रियल लगती है. अक्षय और भूमि का बोलने का अंदाज भी बढ़िया है.

फिल्म की कहानी अपने घर में टॉयलेट ना होने पर पति से तलाक की कई खबरें पढ़ी होंगी. ये कहानी भी कुछ ऐसी है लेकिन थोड़ी बॉलीवुड टाइप की है. साइकिल की दुकान चलाने वाले केशव (अक्षय कुमार) को अमीर खानदार की लड़की जया (भूमि पेडणेकर) से पहली नज़र में ही प्यार हो जाता है. प्यार परवान चढ़ता है और दोनों शादी कर लेते हैं. शादी की पहली रात ही जब महिलाएं सुबह होने से पहले जया को शौच के लिए खेतों के जाने के लिए जगाती हैं तो उसे पता चलता है कि घर में शौचालय नहीं है.

जया का कहना है कि उसे घर में टॉयलेट चाहिए. केशव की मुश्किल उसके पिता हैं जो घर में पंडित हैं और वो मानते हैं कि जिस आंगन में तुलसी है वहां टॉयलेट नहीं बन सकता है. वैसे तो ये कोई बड़ी बात नहीं है कि जैसे सारी महिलाएं लोटा लेकर खेतों में चली जाती हैं वैसे जया भी चली जाए लेकिन वो ऐसा नहीं करती है. वो केशव को छोड़कर मायके चली जाती है और फिर शुरू होती है केशव की शौचालय बनवाने के लिए घर, परिवार और समाज से लड़ाई. बात जया और केशव के तलाक तक पहुंच जाती है लेकिन शौचालय नहीं बन पाता. यहां केशव डायलॉग भी मारता है, ‘आशिकों ने तो आशिकी के लिए ताजमहल बना दिया, हम एक संडास ना बना सके.’ इसके बाद केशव अपना प्यार बचाने और लोगों की सोच से लड़ने के लिए क्या-क्या करता है यही पूरी कहानी है.

फिल्म में भूमिका स्टार कास्ट: अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, अनुपम खेर, दिव्येंदु शर्मा, सुधीर पांडे, डायरेक्टर: श्रीनारायण सिंह

राम मंदिर विवादः सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दिया 3 महीनें का समय

 

नई दिल्ली। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद ने आज (11 अगस्त) सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुवाद के लिए 3 महीने का समय दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले हम दो मुख्य पक्षों को चुनेंगे, सभी पक्ष अपने कागजात तैयार रखें. बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ लंबित चुनौतियों के साथ यूपी शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दायर हलफनामे पर विशेष पीठ सुनवाई करनी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा कि वे जिन दस्तावेज को आधार बना रहे हैं, उनका 12 सप्ताह के भीतर अंग्रेजी में अनुवाद करायें. ये दस्तावेज आठ भाषाओं में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि उच्च न्यायालय में मालिकाना हक के बाद का निर्णय करने के लिये दर्ज साक्ष्यों का अनुवाद 10 सप्ताह के भीतर पूरा कराएं.

रामलला विराजमान, हिन्दू महासभा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड समेत तमाम पक्षकारों हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ के 30 सितंबर 2010 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने दो-एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी बोर्ड मे बांटने का आदेश दिया था.

हिंदुस्तान के मुताबिक सर्वोच्च अदालत ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाएं विचारार्थ स्वीकार की थीं और हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. साथ ही कहा था कि मामला लंबित रहने तक संबंधित पक्षकार विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखेंगे. इसके बाद भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दर्शनार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की जिसका विरोध मुख्य याचिकाकर्ता मोहम्मद हाशिम ने की थी. लेकिन अदालत ने स्वामी की मांग को मुख्य मामले के साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया.

लोकसभा में पेश हुआ लेबर बिल, सैलरी कम देने पर लगेगा 50 हजार रुपये जुर्माना

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नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को लेबर बिल लोकसभा में पेश किया. इसके जरिए असंगठित क्षेत्र में सभी श्रेणियों के 40 करो़ड़ से ज्यादा श्रमिकों के न्यूनतम मजदूरी तय करने का काम केंद्रीय स्तर पर किया जाएगा. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने बताया कि नए बिल में 1936, 1948, 1965 व 1976 के एक्ट का विलय कर दिया जाएगा.

इस बिल का खास प्रावधान यह है कि किसी मजदूर को तनख्वाह कम दी गई तो उसके नियोक्ता पर 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा. पांच साल के दौरान ऐसा फिर किया तो 1 लाख जुर्माना या 3 माह की कैद या दोनों सजाएं एक साथ देने का प्रावधान भी है. हालांकि विपक्ष ने इस बात पर विरोध जताया कि सरकार ने अल्प सूचना पर बिल पेश कर दिया. उधर, श्रम मंत्री का कहना था कि अभी बिल पेश किया गया है, इस पर चर्चा बाद में होगी.

न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा हर पांच साल में विभिन्न मानकों को ध्यान में रखकर की जाएगी. इनका निर्धारण एक पैनल करेगा, जिसमें नियोक्ता, श्रमिकों के प्रतिनिधियों के अलावा स्वतंत्र लोग भी शामिल होंगे.

दिहाड़ी श्रमिकों को शिफ्ट समाप्त होने पर, साप्ताहिक श्रमिकों को सप्ताह के आखिरी कार्य दिवस तथा पाक्षिक श्रमिकों को कार्यदिवस समाप्ति के बाद दूसरे दिन भुगतान करना होगा. मासिक आधार वालों को अगले माह की सात तारीख तक वेतन देना होगा. श्रमिकों हटाने या बर्खास्त करने या उसके इस्तीफा देने पर पगार दो कार्यदिवस के भीतर देनी होगी.

मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने बताया कि नए बिल में 1936, 1948, 1965 व 1976 के एक्ट का विलय कर दिया जाएगा. इसमें जो प्रावधान हैं, उनसे किसी भी श्रमिक के अधिकारों का हनन नहीं हो पाएगा.

स्वतंत्रता दिवस पर मदरसों में होगी वीडियोग्राफी, शिक्षा बोर्ड का आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मंत्री बनने के बाद से राज्य की नीति-नियमों में अचंभित करने वाले बदलाव हो रहे हैं. योगी सरकार ऐसी नीति और कानून बना रही है जोकि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय को रास नहीं आ रहा है.

एक बार फिर योगी राज में ऐसी अचंभित करने वाली नीति बनाई गई है और यूपी में मदरसो को आदेश दिया गया है कि इस बार भारतीय झंडा फहराने के साथ-साथ उसकी फोटो ग्राफी और वीडियोग्राफी भी अनिवार्य रूप से करना है.

दरअसल यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी मदरसों को स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने का आदेश दिया है. इसके साथ-साथ अनिवार्य रूप से कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग करने को भी कहा गया है. स्वतंत्रता दिवस पर इस तरह के निर्देश पहली बार जारी किए गए हैं.

इस आदेश के बाद से विवाद खड़ा हो गया. मदरसों का कहना है कि इस तरह के आदेश जारी करने का सीधा मतलब यह है कि उनकी देशभक्ति पर शक किया जा रहा है. यूपी के मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से 3 अगस्त को लिखे गए पत्र में सभी मदरसों को निर्देश जारी करते हुए कहा गया है कि स्वतंत्रता दिवस पर ऐसे आयोजन सुनिश्चित कराएं और कार्यक्रम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की जाए. पत्र में कहा गया है कि फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का इस्तेमाल भविष्य में प्रोत्साहन के लिए किया जाएगा.

योगी सरकार में मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से जारी इस निर्देश को लेकर विवाद शुरू हो गया है. कई मौलानाओं का कहना है कि यह मामला पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है और सरकार उनकी देशभक्ति पर शक कर रही है. उनका कहना है कि उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन का निर्देश फिर भी समझ में आता है, लेकिन उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करने का निर्देश देना, राजनीति के सिवा और कुछ नहीं.