BBAU की मनमानी, बहुजन समाज के टॉपर छात्रों का प्रवेश रोका

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बसंत कन्नौजिया
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के इतिहास विभाग की एम फिल प्रवेश परीक्षा में 100 में 94 अंक लाने वाले बसंत कनौजिया की सफलता विश्वविद्यालय के दलित विरोधी कुछ लोगों को पच नही रही है. इसलिए बसंत सहित अन्य मेधावी छात्रों का दाखिला रोकने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन नए पैतरे चल रहा है. विवि की अनुशासन समिति ने आनन-फानन में प्रोक्टोरियल बोर्ड की मीटिंग करवाकर एक नोटिस जारी किया है कि इन लोगों के ऊपर विवि प्रशासन द्वारा FIR दर्ज है, उन लोगों का एडमिशन नही होगा. पीड़ित छात्रों का आरोप है कि ऐसा कर विवि द्वारा जारी तुगलकी फरमान व्यक्ति के शिक्षा के मौलिक अधिकार, जो भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 (A) का खुला उल्लंघन है. विवि के ये होनहार छात्र विवि में हो रही अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे, जिसकी वजह से इन पर मामला दर्ज करवाया गया था. छात्रों का आरोप है कि इस विवि में अनुसूचित जाति के छात्रों का शोषण चरम पर है. इस वजह छात्रों के ऊपर हो रहे शोषण के कारण छात्र संवैधानिक दायरों में रहकर अपनी मांगे पूरी करने के लिए विवि प्रशासन के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन करके अपना विरोध जताते हैं. लेकिन विवि प्रशासन की अनुशासन समिति किसी भी छात्र को नियम के अनुसार कोई कारण बताओ नोटिस जारी नही करती है, न ही कोई जांच समिति बनाती है और न ही कोई चेतावनी वाला नोटिस जारी करती है. विवि प्रशासन उनकी मांगें न मानकर सीधे पुलिस प्रशासन की मदद से उक्त छात्रों के खिलाफ FIR करवा देती है. छात्रों का कहना है कि हाल में ही विवि स्थित अम्बेडकर भवन के गेट का कांच अपने आप गिरकर टूट गया. कांच के अपने आप टूटने की वीडियो रिकॉर्डिंग उक्त छात्रों के पास मौजूद है तथा प्रदेश पुलिस के लॉकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) अधिकारी के सामने की बात जिसके वो गवाह भी हैं लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों के खिलाफ झूठी FIR करवा दी. इस वजह से विवि में पढ़ने वाले अधिकतर अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र डरे सहमे रहते हैं और उनका भविष्य अंधकारमय बनाने के लिए FIR करके षड्यंत्र करते हैं. ज्ञात हो विगत जून 2017 में भ्रष्टाचार के आरोप में विवि के एक प्रोफेसर को सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हांथों पकड़ लिया था. छात्रों का कहना है कि जो प्रशासनिक अधिकारी छात्रों के ऊपर उपद्रवी और गुंडे होने के आरोप लगा रहे हैं, उन प्रशासनिक अधिकारियों में ऊपर यौन शोषण, अपनी शोध छात्राओं के साथ छेड़खानी, बदतमीजी, पीएचडी स्कॉलरर्स को परेशान करने तथा उनको पीएचडी छोड़कर जाने के लिए मजबूर किये जाने और छात्रों को गाली गलौच करने का आरोप हैं, लेकिन विवि प्रशासन ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करता बल्कि उनको उल्टे उच्च पद दिया जाता जिससे उनकी मनमानी पढती जाती है. छात्रों का आरोप है कि जिस तरह से विवि प्रशासन छात्रों को झूठे मामले में फंसाकर अपनी मनमानी कर रहा है, उससे विवि की गरिमा को बहुत ठेस पहुंच रही है तथा छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, क्योकि पिछले साल भी विवि प्रशासन ने इतिहास विभाग पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में टॉप करने वाले छात्र श्रेयात बौद्ध और संदीप शास्त्री का एडमिशन नही लिया था, जिससे दोनों छात्रों का एक साल बर्बाद हुआ है. जिन छात्रों के दाखिले को रोकने की बात हो रही है वो न्याय के लिए हाईकोर्ट, अनुसूचित आयोग, यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय का दरवाजा खटखटाने जा रहे है.

रेल मंत्रालयः पीयूष गोयल IN सुरेश प्रभु OUT

नई दिल्ली। सुरेश प्रभु ने रेल मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया गया है. नए रेल मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने वाले पीयूष गोयल का नाम आ रहा है. यह लगभग साफ है कि सुरेश प्रभु के बाद पीयूष गोयल ही रेल मंत्री होंगे. हालांकि खबर लिखे जाने तक उनके नाम का औपचारिक ऐलान होना बाकी था. इससे पहले नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के थोड़ी देर बाद ही सुरेश प्रभु ने ट्विट कर खुद के मंत्रालय छोड़ने की घोषणा की. अपने ट्विट में सुरेश प्रभु ने रेलवे के कर्मचारियों को शुभकामना दिया और मंत्रिमंडल छोड़ने की बात कही. सुरेश प्रभु का रेल मंत्री से इस्तीफा  व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी झटका है. क्योंकि मोदी खुद सुरेश प्रभु को रेल मंत्रालय में लेकर आए थे. मोदी को उम्मीद थी कि प्रभु रेलवे की खामियों को दूर कर उनकी महत्वकांक्षी रेल परियोजनाओं को विस्तार देंगे. इन परियोजनाओं में देश में बुलेट ट्रेन चलाना भी शामिल था, लेकिन एक के बाद एक हुए कई रेल हादसों ने न सिर्फ सुरेश प्रभु की साख को बट्टा लगाया बल्कि यह स्थिति आ गई कि उन्हें मंत्रालय छोड़ना पड़ा.

लालू का नीतीश पर निशाना, गाछ से गिरने पर बंदर को फिर दल में शामिल नहीं किया जाता

लालू यादव
पटना। केंद्रीय मंत्रिमंडल के फेरबदल में नीतीश कुमार को जगह नहीं मिलने पर लालू यादव ने चुटकी ली है. लालू ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा कि अब भाजपा उन्हें अच्छी तरह जान गई है, उसे पता चल गया है कि नीतीश कुमार केवल सत्ता में बने रहने के लिए सीटों के जुगाड़ में लगे रहते हैं, इसलिए उन्हें इस विस्तार में कोई भाव नहीं दिया गया. नीतीश पर चुटकी लेते हुए राजद अध्यक्ष ने कहा कि बंदरों के गिरोह में से जब कोई बंदर गाछ (पेड़) से नीचे गिर जाता है तो उसे फिर से गिरोह में शामिल नहीं किया जाता है. यही हाल नीतीश कुमार का है. वहीं कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी जी के मंत्रिमंडल में कौन आ रहा है कौन नहीं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. मोदी जी एक कंपनी की तरह पार्टी चला रहे हैं जिसमें बस अपने कुछ लोगों को मंत्री बनाकर सम्मानित किया जा रहा है.

मोदी कैबिनेट फेरबदलः चार का प्रोमोशन नौ नए मंत्री

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नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने अपने मंत्रीमंडल का विस्तार किया है. रविवार को हुए इस विस्तार में 13 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. इसमें 4 मंत्रियों का राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रोमोशन हुआ तो वहीं 9 नए राज्यमंत्री को शपथ दिलाई गई है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण के बाद सबकी निगाह इस पर है कि किसको कौन सा मंत्रालय मिलेगा. खास तौर पर सबकी नजर रेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय पर टिका हुआ है. जिन मंत्रियों का राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रोमोशन हुआ है, उसमें धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण और मुख्तार अब्बास नकवी शामिल है. तो वहीं जिन नौ नए राज्यमंत्रियों को शपथ दिलाई गई है उसमें राजस्थान से गजेन्द्र सिंह शेखावत, यूपी से शिव प्रताप शुक्ल, आर.के सिंह, सत्यपाल सिंह, अनंत कुमार हेगड़े, बिहार के बक्सर से सांसद अश्विनी चौबे, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ से वीरेन्द्र कुमार के अलावा आर.के सिंह और अल्फोंस कन्नथनम ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री मोदी चीन के दौरे के लिए निकल गए.

BSNL देेगा आठ रूपए में ये मस्त ऑफर…

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नई दिल्ली। भारत संचार निगम लिमिटेड( बीएसएनएल) ने अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए देशभर में दो नए रेट कटर प्लान पेश किए हैं. ये प्लान 19 रुपए और 8 रुपए के हैं. ये रेट कटर प्लान हैं लेकिन इनके जरिए डिस्काउंट कीमत के साथ वॉयस कॉल का ऑफर मिलेगा.

कंपनी ने ये प्लान्स 4 सितंबर से शुरू करेगी. 19 रुपए वाले प्लान लेने वाले ग्राहकों के लिए ऑन नेट कॉल 15 पैसे/मिनट और ऑफ नेट कॉल 35 पैसे/मिनट की दर से होगी. इस प्लान की वैलिडिटी 90 दिनों की होगी. 8 रुपए वाले प्लान लेने वाले ग्राहकों को यही सुविधा मिलेगी लेकिन इस प्लान की वैलिडिटी अलग होगी.

इस प्लान में ग्राहकों को 30 दिन की वैलिडिटी दी जाएगी. ये प्लान देशभर में बीएसएनएल इस्तेमाल कर रहे हर सर्किल के ग्राहकों के लिए है. लेकिन ये प्लान कंपनी के केवल प्री-पेड ग्राहकों के लिए है.

बता दें कि सूत्रों के अनुसार खबर ये है कि बी.एस.एन.एल. जल्द ही 429 रुपए का एक नया प्लान लेकर आ रहा है. इस प्लान में कंपनी 90 दिनों के लिए 1जीबी प्रतिदिन डेटा के साथ बिना किसी लिमिट के अनलिमिटेड वॉयस कॉल मुहैया कराएगी.

फिल्म रिव्यूः ‘शुभ मंगल सावधान’ हिट, पर कलेक्शन कम

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मुंबई। यौन रोग इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (उत्तेजना ह्रास) पर बेस्ड आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान’ रिलीज हो गई है. ‘शुभ मंगल सावधान’ 2013 की तमिल कॉमेडी फिल्म ‘कल्याना समायल साधम’ पर आधारित है. फिल्म में मुदित नाम के लड़के को सुगंधा नाम की लड़की से प्यार हो जाता है और दोनों की शादी होने वाली होती है. लेकिन बीच में मुदित को एहसास होता है कि उसे लिंग संबंधी एक बीमारी है. फिल्म में इस समस्या को हल करने के लिए मुदित अपने दोस्तों की मदद लेता है.

कई बॉलीवुड सिलेब्स ने फिल्म को देखने की बात की और फिल्म को हि‍ट बताया. लेकिन इस फिल्म की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. इस शुक्रवार रिलीज हुई ‘शुभ मंगल सावधान’ को बी टाउन स्टार्स हिट बता रहे हैं. फिल्म के इस स्टार रिव्यू की फेहरिस्त में सिद्धार्थ रॉय कपूर, आर माधवन, आयुष्मन और उनकी पत्नी, कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा, जैकी भगनानी, डायना पेंटी, रिचा चड्ढा, आनंद एल राय, भूमि पेडनेकर, अश्विनी अय्यर तिवारी, उपेन पटेल, ओमंग कुमार और विद्या बालन जैसी कई बॉलीवुड हस्तियों शामिल हैं.

लेकिन फिल्म की बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को देखा जाए तो ये बेहद निराशाजनक है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्विटर पर बताया कि फिल्म की ओपनिंग कलेक्शन 2.71 करोड़ रुपये रही. जबकि‍ इसके साथ ही रिलीज हुई फिल्म बादशाहो की बॉक्स ऑफिस पर ओपनिंग डे कलेक्शन करीब 14 करोड़ रु रही है.

अनिता की आत्महत्या के बाद NEET के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

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त्रिची। तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलने की वजह से अनिता ने आत्महत्या कर ली. इसके बाद से ही मेडिकल एंट्रेस परीक्षा NEET को लेकर जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इतना ही नहीं लगभग 14 छात्र इसके विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं।

खबरों के अनुसार तमिल राष्ट्रवादी संगठन नाम तालीमार काट्ची और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे संगठन नीट के खिलाफ चेन्नई और त्रिची की सड़कों पर उतर आए हैं. चेन्नई के माउंट रोड पर एसएफआई के प्रदर्शनकारियों रोड जाम कर दिया है. साथ ही अन्नासलाई को जाने वाला रास्ता भी बंद कर दिया है. प्रदर्शनकारियों ने पुतले जलाए हैं और मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की है. प्रदर्शन कर रहे तमिल संगठन नाम तामीलार काटची का कहना है कि मेडिकल एडमिशन के लिए नीट को ही एकमात्र क्राइटेरिया (पैमाना) बना देना गलत है. छात्रों को छूट मिलनी चाहिए ताकि स्टेट बोर्ड के छात्रों को भी बेहतर मौके मिल सके.

इसी बीच एआईएडीएमके नेती टीटीवी दिनाकरन ने अनिता की मौत पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं हैरान हूं कि हम सबकी प्यारी बेटी ने नीट के खिलाफ संघर्ष करते हुए आत्महत्या कर ली.”

इसके बाद दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हसन ने भी अनिता की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया. रजनीकांत ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “अनिता के साथ जो भी हुआ वो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. इस कदम को उठाने के पहले उस पर क्या बीत रही होगी मैं उस दर्द को समझ पा रहा हूं. मेरी संवेदनाएं उसके परिवार के साथ है.”

जबकि कमल हसन ने लिखा, “वे अनिता को अपनी बेटी समान मानते हैं और वे उसके लिए अपनी आवाज उठायेंगे.” उन्होंने इसके पीछे राज्य सरकार और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

दलित बोर्ड की स्टूडेंट अनिता ने मेडिकल में दाखिले के लिए नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था. इसमें असफल होने पर उसने अपने घर पर परिजनों की अनुपस्थिति में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

बताया जाता है कि दाखिला ना मिलने पर वह अवसाद में जी रही थी. अनिता ने तमिलनाडु स्टेट बोर्ड से बारहवीं में 1,200 में से 1,176 नंबर लाए थे. हालांकि मेडिकल के लिए होने वाली नीट की परीक्षा में उसने 86 नंबर ही लाए थे. इधर अनिता के परिजन, रिश्तेदार और गांव वालों ने राज्य और केंद्र को उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरु किया है.

…तो इसलिए बंद होंगे देशभर के 800 इंजीनियरिंग कॉलेज

नई दिल्ली। कभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती और दाखिला न मिलने पर लोग आत्महत्या भी कर लेते थे. लेकिन अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों को निराश होंगे यह जानकार की देश के 800 इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया गया है. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इन कॉलेजों को बंद करने की मंजूरी दे दी है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन कॉलेजों के बंद करने के पीछे एआईसीटीई के रूल है. जिनकी वजह से इन इंजीनियरिंग के कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया गया है. एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे ने कहा कि इन कॉलेजों में न तो मूलभूत ढांचा बेहतर है न इनकी सीटें ही पूरी तरह भर पा रही हैं.

उन्होंने आगे कहा कि एआईसीटीई के नियमों के मुताबिक, अगर किसी कॉलेज में जरूरी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं और लगातार पांच साल तक उसमें 30 फीसदी या इससे कम सीटें भरती हैं तो उसे बंद कर दिया जाता है.

इन्हीं सख्त नियमों की वजह से हर साल 150 से ज्यादा इंजीनियरिंग के कॉलेज बंद हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014-15 से 2017-18 तक देश में 410 से ज्यादा इंजीनिरिंग कॉलेजों बंद किया गया.

वेबसाइट के अनुसार, एआईसीटीई ने 2014-15 से 2017-18 तक पूरे भारत में 410 से अधिक कॉलेजों को बंद करने को मंजूरी दी है. इनमें से 20 संस्थान कर्नाटक में हैं. 2016-17 में सबसे ज्यादा संख्या में संस्थाओं को बंद करने की मंजूरी दी गई थी. तेलंगाना (64), उत्तर प्रदेश (47), महाराष्ट्र(59), आंध्र प्रदेश(29), राजस्थान(30), तमिलनाडु और हरियाणा (31), गुजरात(29), पंजाब(19), कर्नाटक और मध्य प्रदेश(21) में सबसे ज्यादा कॉलेज ऐसे हैं, जो एआईसीटीई के मानकों के हिसाब से बंद होने हैं.

सुशील मोदी की चचेरी बहन भी सृजन घोटाले में शामिल

पटना। बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में एक नया खुलासा सामने आया है. सृजन घोटाले के तार बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की चचेरी बहन रेखा मोदी से जुड़ गए हैं. उन पर करोड़ों रुपये का भुगतान सृजन के खाते से लेने के आरोप लगे हैं. जानकार कहते हैं कि इस घोटाले में अभी और कई बड़ी मछलियों का नाम उजागर होना बाकी है.

जांच एजेंसियों को पता लगा है कि सृजन के कर्ता-धर्ता अफसरों और राजनेताओं को खुश करने के लिए उनके परिजनों को बड़ी मात्रा में गिफ्ट दिया करते थे. इनमें से अधिकांश हीरे की ज्वेलरी होती थी. इन ज्वेलरी की खरीद के लिए सृजन के खाते से रेखा मोदी को भुगतान होता था, फिर रेखा मोदी उन्हें अपनी कंपनी के जरिए या नकद हीरे व्यापारी को देती थीं. पटना के जालान जेम्स के मालिक रवि जालान ने कबूल किया है कि रेखा मोदी ने उन्हें हीरों की खरीद के बदले कई बार भुगतान किया है.

फिलहाल रेखा मोदी पटना से फरार हैं. उनके घर पर कोई यह बताने में सक्षम नहीं है कि वो कहां हैं. रेखा मोदी और सृजन की सचिव मनोरमा देवी के बीच रिश्ते काफी मधुर थे. यह बात भी सबको पता है मगर उनके रिश्ते सुशील मोदी से अच्छे नहीं हैं. साल 2005 में भी सुशील मोदी को रेखा मोदी की वजह से बदनामी झेलनी पड़ी थी. रेखा मोदी ने एक बार अपने ही भाइयों पर कपड़े फाड़ने के आरोप लगाए थे.

इस घोटाले में अभी तक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, पूर्व सांसद शाहनवाज़ हुसैन, झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे, भाजपा से अब निलंबित किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के दीपक वर्मा के नाम भी सामने आए हैं और अब इस मामले में एक नया नाम रेखा मोदी का जुड़ गया है. इन लोगों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से सृजन की दिवंगत सचिव मनोरमा देवी या उनके बेटे अमित कुमार या बहू प्रिया से संबंध रहे हैं.

गौरतलब है कि सृजन घोटाले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है और इस सिलसिले में दर्ज एफआईआर और दूसरे जरूरी कागजातों का बारीकी से अध्ययन कर रही है. साथ ही घोटाले से जुड़े सरकारी व बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के पदधारकों और फायदा लेने वाले लोगों की सूची बनाकर इनकी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में लगी है. मामले की जांच एएसपी सुरेंद्र मल्लिक की अगुआई में 15 सदस्यीय सीबीआई टीम कर रही है. पहले इस मामले की जांच बिहार एसआईटी और आर्थिक अपराध की ईकाई कर रही थी.

सेना ने जलाए 2500 से ज्यादा मुसलमानों के घर

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राखिन। म्यांमार के रोहिंग्या बहुल इलाके में पिछले हफ्ते 2,600 से अधिक घर जलाए गए. सरकार ने शनिवार को बताया कि यह दशकों में मुस्लिम अल्पसंख्यक से जुड़े हिंसा मामलों में सबसे घातक है. संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचआरसी) के अनुसार, करीब 58,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से जान बचाकर पड़ोसी देश बांग्लादेश चले गए.

म्यांमार अधिकारियों ने अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (आरसा) पर घर जलाने का आरोप लगाया. ग्रुप ने दावा किया कि पिछले हफ्ते सुरक्षा चौकियों पर हुए हमले के कारण यह सब हुआ. म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध हैं. कई हजार रोहिंग्या जान बचाकर बांग्लादेश भाग चुके हैं. रोहिंग्या लोग म्यांमार सरकार पर नस्लीय हिंसा का आरोप लगाते रहे हैं.

म्यांमार का कहना है कि कोतांकुक, माइनलुट और काइकानपिन गांवों के कुल 2,625 घरों को आरसा ने जला दिया है. म्यांमार सरकार द्वारा आरसा समूह को आतंकी घोषित कर दिया गया है लेकिन न्‍यूयार्क की ह्यूमन राइट्स वॉच ने इमेजरी सैटेलाइट शोज के जरिए पूरे मामले को देखते हुए कहा म्यांमार के सिक्योरिटी फोर्सेज ने जान बूझकर आग लगायी है.

म्यांमार और बांग्लादेश को अलग करने वाली नाफ नदी के पास पहुंचने वाले रिफ्यूजी साथ में बोरियों में अपना सामान लेकर आए हैं वे वहीं पर झुग्‍गी बना रहे हैं या फिर स्‍थानीय निवासियों के घर में पनाह ले रहे हैं. रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार में नागरिकता से इंकार कर दिया गया और अवैध प्रवासी करार दिया गया. जबकि उन्होंने दावा किया था कि उनके पूर्वज यहीं के थे.

बलात्कारी बाबा के कारण परेशान कैदियों ने जेल में की हड़ताल

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नई दिल्ली। बलात्कारी बाबा राम रहीम से जेल के बाहर ही नहीं बल्कि जेल के अंदर रहने वाले कैदी भी परेशान है. दरअसल, बलात्कारी बाबा को रोहतक के जिस सुनारिया जेल में रखा गया है वहां के कैदियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

राम रहीम के जेल में होने से सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है. अन्य कैदियों को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है. जेल प्रशासन की इस सख्ती से खफा कैदियों ने हड़ताल कर दी है.

सुनारिया जेल के इन हालात का खुलासा पेशी के लिए बाहर आए एक कैदी ने किया. बताया जाता है कि कारौर ग्राम का निवासी अनिल रोहतक की सुनारिया जेल में हत्या के प्रकरण में बंद है. इस मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है. दो दिन पहले अनिल को पेशी के लिए कोर्ट में लाया गया. इस दौरान उसने अपने वकील को बताया कि 26 अगस्त को राम रहीम को जेल में लाने पर जेल प्रशासन ने एक बैरक खाली करा दिया. उस बैरक में रह रहे 13 कैदियों को दूसरे बैरक में भेज दिया.

राम रहीम की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन किसी भी कैदी को उसके परिजन से नहीं मिलने दे रहा है. इस जेल की क्षमता करीब 1300 कैदियों की है जबकि इसमें करीब डेढ़ हजार कैदी बंद हैं. बताया जाता है कि कैदियों को चादर और कंबल नहीं दिए जा रहे हैं. राम रहीम की वजह से कैदी परेशान हैं. इस मामले में कई बार जेल प्रशासन से कहने के बाद भी जब समस्या नहीं सुलझी तो कैदियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.

फोर्ब्स ल‍िस्ट में भारत सबसे भ्रष्ट देश

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नई दिल्ली। फोर्ब्स ने एशिया के सबसे भ्रष्ट देशों की एक सूची जारी की जो सोशल मीडिया पर बहस की वजह बनी हुई है. हालांकि जो स्टोरी फोर्ब्स ने शेयर की है वह मार्च 2017 की है. इसमें भारत को सबसे भ्रष्ट देश बताया गया है और पाकिस्तान इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है. इस लिस्ट में पहले नंबर पर भारत, दूसरे पर वियतनाम, तीसरे पर थाईलैंड, चौथे पर पाकिस्तान और पांचवें नंबर पर म्यांमार है.

इसमें लिखा गया है कि ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल के 18 महीने के सर्वेक्षण से पता चलता है कि अभी बहुत काम होना बाकी है. फोर्ब्स ने अपनी सूची पर भारत के बारे में कहा है कि यहां छह सार्वजनिक सेवाओं में से पांच- स्कूलों, अस्पतालों, आईडी दस्तावेज, पुलिस और उपयोगिता सेवाएं- आधे से ज्यादा उत्तरदाताओं को रिश्वत का भुगतान करना पड़ा है हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लड़ाई ने एक जगह जरूर बनाई है, 53% लोगों का मानना है कि वो काफी अच्छी तरह आगे से जा रहे हैं.

फोर्ब्स के ट्वीट को कुमार विश्वास ने भी ट्वीट किया है. कुमार विश्वास ने लिखा है कि पहले ही कहा था कि नंबर वन बना दूंगा, बना दिया. इसे पीएम नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष माना जा रहा है.बहुत से लोगों ने कुमार विश्वास के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी है. एक ने लिखा है कि पीएम मोदी के कार्यकाल में हम किसी चीज में तो नंबर वन आए. एक ने लिखा है कि हां मोदी जी से पहले तो सारे अन्ना हजारे थे, कोई रिश्वत नहीं लेता था. एक ने लिखा है कि 2 साल बाकी हैं सोमालिया की बराबरी में लाने के प्रयास चल रहे हैं.

हालांकि सवाल यह भी है कि फोर्ब्स ने अपनी पुरानी स्टोरी को आज ट्वीट क्यों किया. एक तरफ जहां नोटबंदी को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं ऐसे में इस लिस्ट का दोबारा जारी होना भी चर्चा का विषय है.

गोरखपुर कांडः क्लीनिक के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर चुराने के आरोप में डॉ. कफील गिरफ्तार

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गोरखपुर।बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफलाइटिस वॉर्ड के इंचार्ज रहे डॉक्टर कफील खान को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है. एसटीएफ अब उन्हें गोरखपुर पुलिस को सौंपेगी. बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में अब तक कुल 9 लोग आरोपी बनाए गए हैं.

डॉ. कफील खान को लखनऊ से पकड़ा गया है. कफील को यूपीएसटीएफ ने एक सूचना के आधार पर धर दबोचा. वो पिछले पंद्रह दिनों से फरार चल रहे थे. वह मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के अध्यक्ष थे. बीआरडी अस्पताल में 10 अगस्त की रात 30 अधिक बच्चों की मौत मामले में डॉक्टर कफील पर यह कार्रवाई की गई है. आरोप है कि ऑक्सिजन की कमी से इन बच्चों की मौत हुई, हालांकि अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार इस बात से इनकार करता रहा है.

DIG एसटीएफ मनोज तिवारी ने कहा कि कफील के लखनऊ और गोरखपुर स्थित घर से कुछ ऐसी बातें पता चलीं, जिनसे लगता है कि अन्य आरोपों के अलावा बच्चों की मौत में भी वह दोषी हैं.

गौरतलब है कि डॉ. कफील उस समय सुर्खियों में आए थे जब मीडिया में इस तरह की खबरें आई थीं कि ऑक्सिजन की कमी के वक्त वह खुद अपनी गाड़ी से अपने दोस्तों और निजी अस्पतालों से ऑक्सिजन सिलिंडर लेकर बीआरडी अस्पताल पहुंचे थे. उस वक्त कफील की छवि एक ‘मसीहा’ के तौर पर सामने आई. हालांकि, बाद में कफील पर प्राइवेट अस्पताल चलाने सहित कई गंभीर आरोप लगे.

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत का तांडव जारी है. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 29 अगस्त की रात 12 बजे से 30 अगस्त की रात 12 बजे तक 24 घंटे में 13 बच्चों की मौत हुई है. इनमें एनआईसीयू में 08 और पीआईसीयू में अलग-अलग बीमारियों से 5 बच्चों की मौत हुई है. बता दें कि एनआईसीयू में कुल 114 और पीआईसीयू में 240 मरीज भर्ती हैं. अगस्त महीने में अब तक 399 बच्चों की मौत हुई है.

NEET के खिलाफ लड़ने वाली दलित छात्रा ने किया सुसाइड

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नई दिल्ली। नेशनल एलिजिबिलिटी एंड एंट्रेस टेस्ट (NEET) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाली दलित स्टूडेंट अनिता ने शुक्रवार(1 सितंबर) को सुसाइड कर लिया. ये घटना तब हुई जब 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को कहा कि मेडिकल में दाखिले की प्रक्रिया के लिए सभी राज्यों को नीट यानी की NEET का ही पालन करना होगा.

अनिता ने कुझुमुर गांव स्थित अपने ही घर में रस्सी से फांसी लगा ली. वह बहुत ही गरीब परिवार से थी. उसके पिता मजदूरी कर परिवार का पेट भरते हैं. तमिलनाडु सरकार ने अनिता के परिवार वालों को 7 लाख की मदद देने का एलान किया है.

अनिता को राज्य सरकार के एडमिशन के नियम के मुताबिक निश्चित ही मेडिकल सीट मिलती, क्योंकि उसे कट ऑफ मार्क्स से दो नंबर ज्यादा मिले थे. NEET लागू होने के बाद उसका स्कोर कम हो गया था और मेडिकल का उसका सपना टूट गया.

गौरतलब है कि तमिलनाडु ने इस साल राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा से राज्य को बाहर रखने के लिए अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद केन्द्र ने भी कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु को छूट नहीं दी जा सकती है. दलित छात्रा एस अनीता ने नरेन्द्र मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था और अदालत में इसे चुनौती दी थी.

इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 6 छात्रों ने याचिका दायर की थी. छात्रों ने राज्य सरकार को NEET में मिले अंकों के आधार पर तैयार मेधा सूची के अनुसार काउंसिलिंग शुरू करने का निर्देश देने की मांग की थी. इसके बाद 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तमिलनाडु सरकार से राज्य में एमबीबीएस और बीडीएस की सीटों पर नामांकन के लिए नीट मेधा सूची के आधार पर काउंसिलिंग शुरू करने को कहा था. कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सितंबर तक प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी कहा था.