प्रद्युमन के कातिल का पता लगाने रेयान स्कूल पहुंची CBI

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गुरूग्राम। प्रद्युमन हत्याकांड के मामल में सीबीआई जांच के लिए रेयान इंटरनेशनल स्कूल पहुंची. शुक्रवार (22 सितंबर) को सीबीआई में केस दर्ज होने के बाद तीन सदस्यों की टीम बनाई गई. सीबीआई के साथ ही 12 सदस्यों वाली फॉरेंसिक टीम भी है जो ‌मौका-ए-वारदात की जांच में जुटी है. सीबीआई ने स्कूल के सभी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को भी पूछताछ के लिए बुलवाया है.

प्रद्युमन के पिता ने धमकी दी थी कि एजेंसी ने यदि शनिवार तक जांच शुरू नहीं की, तो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे. प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने कहा था कि उन्होंने देश के शीर्ष नेताओं से अपील की है कि इस ‘संवेदनशील मामले’ की सीबीआई जांच तेजी से कराई जाए.

सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने शुक्रवार को बताया कि एजेंसी ने केंद्र सरकार से अधिसूचना प्राप्त होने के बाद जांच अपने हाथ में ले ली. प्रक्रिया के अनुसार उसने गुरुग्राम पुलिस की प्राथमिकी फिर से दर्ज की. सूत्रों ने बताया कि सीबीआई की एक टीम ने देर शाम गुरुग्राम पुलिस आयुक्त के कार्यालय का दौरा भी किया था. उल्लेखनीय है कि 8 सितंबर को प्रद्युम्न की स्कूल में हत्या कर दी गई थी. इस मामले में उसी दिन स्कूल के बस कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया था.

प्रद्युम्न के परिजनों द्वारा ऐतराज जताने के बाद रयान इंटरनेशनल स्कूल को 25 सितंबर तक बंद रखने का फैसला किया गया. प्रद्युमन के परिजनों ने आशंका जताई थी कि स्कूल खुलने पर महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं. स्कूल सोमवार यानी 18 सितंबर को खुला था, लेकिन छात्रों की उपस्थिति काफी कम रही. पीड़ित बालक के पिता के आपत्ति जताने के बाद जिला प्रशासन ने स्कूल को अगले हफ्ते सोमवार तक बंद रखने का फैसला किया.

सबका अपना-अपना राष्ट्रवाद

Natioanlim in india

मशहूर फ्रेंच विचारक लुई अल्तुसर से हमारी मुलाकात 1980 के आसपास हुई थी. उन दिनों वे ‘फिलॉसफी ऑफ रीडिंग’ (पाठ का प्रयोजन) के अध्ययन के सिलसिले में भारत आए थे. उनके अध्ययन का सार यह था कि किसी किताब का पाठ हम सभी अलग-अलग ढंग से और अलग-अलग प्रयोजन से करते हैं. जैसे, एक साल के किसी बच्चे के सामने यदि रामचरित मानस रख देते हैं तो वह क्या करेगा? वह उसे उठाने की कोशिश करेगा. उसे इस बात का ज्ञान नहीं होगा कि किताब वह इस तरह उठाए कि उसके पन्ने न फटें. वह सिर्फ जिल्द या कोई एक पन्ना पकड़ कर उठाएगा. उसे मुंह तक ले जाकर खाने की कोशिश करेगा और थक जाने पर उसे छोड़ देगा.

आपकी नजर में वह उस पूजनीय किताब को खराब कर रहा है लेकिन अपनी समझ से वह एक चीज से जान-पहचान बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. यह बच्चे का उस किताब से पहला परिचय है और वह जानना चाहता है कि अपने लिए उससे वह किस तरह का फायदा उठा सकता है. चार या पांच साल का बच्चा मानस के अक्षर या शब्द पढ़ने की कोशिश कर सकता है जो फिलहाल वह अपने स्कूल में सीख रहा है. या फिर दादा-दादी की तरह पूजा घर में बैठकर उनकी नकल उतार सकता है. वह भी पढ़ रहा है लेकिन उसका प्रयोजन अलग है. उसी मानस का पाठ एक कथावाचक और एक गायक करता है. एक उसके रोचक प्रसंग ढूंढता और पढ़ता है ताकि अपने श्रोताओं को मुग्ध कर सके. दूसरा उसकी ज्ञेयता पर ध्यान देता है. कुछ लोग दुख-सुख के अवसर पर अपने आवेगों को सहारा देने के लिए मानस के चुने हुए प्रसंगों का पाठ करते हैं. उनके लिए वह मनोचिकित्सा में काम आने वाली किताब है लेकिन एक भक्त इनसे बिल्कुल अलग सिर्फ धार्मिक कारणों से उसे पढ़ता है और एक शोधार्थी बिल्कुल अलग कारणों से. धर्मगुरु को मानस के अलंकारिक सौंदर्य में रुचि नहीं होती. कथागायक किसी कथावाचक की तरह भावुक नहीं होता. साहित्य का छात्र धर्मगुरु की तरह मानस को पढ़ने से पहले सिर से नहीं लगाता.

अल्तुसर के इस पाठ-दर्शन से हम देश के नए राष्ट्रवादी उभार को समझ सकते हैं. समाज के अलग-अलग तबके के लिए राष्ट्रवाद की परिभाषा अलग-अलग है. राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने का तरीका अलग-अलग है. जैसा कि प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों कहा, ‘एक आदमी वंदे मातरम का नारा लगाता है और सड़क पर पीक थूक देता है. उसे पूरा विश्वास है कि नारा लगाकर उसने राष्ट्र के प्रति अपने प्रेम का इजहार कर दिया है. वह नहीं समझ पाता कि पीक थूककर उसने राष्ट्र का क्या नुकसान किया.’ दूसरा आदमी अपने राष्ट्रप्रेम के आवेश में उन लोगों पीटकर ठीक कर देना चाहता है, जो वंदे मातरम का नारा नहीं लगा रहे. उसे समझ में नहीं आ रहा कि अपने राष्ट्र प्रेम का वह और क्या उपयोग कर सकता है. कुछ लोगों को धर्म और राष्ट्र के बीच का फर्क नहीं समझ में आ रहा जबकि कुछ लोग सरकार और राष्ट्र का भेद नहीं समझ पा रहे. उनकी नीयत अच्छी है लेकिन राष्ट्र की कोई साफ, सर्वमान्य तस्वीर उनके सामने नहीं है. पहले पूरी दुनिया में राजा होते थे. एक राजा दूसरे राजा के देश पर हमला करता था और उसका कुछ इलाका छीन लेता था. कभी-कभी बेटी के साथ दहेज में या आपसी समझौतों के दौरान भी कुछ इलाके एक-दूसरे को दे दिए जाते थे. वे राष्ट्र नहीं थे लिहाजा इलाके के साथ राजभक्ति बदल जाती थी. आधुनिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा हमने अंग्रेजों के जमाने में आयात की जो जाते-जाते एक नया नक्शा खींचकर हमें दे गए.

कुछ विद्वान बताते हैं कि वेदों-पुराणों में भी ‘राष्ट्र’ का उल्लेख मिलता है लेकिन वहां इसका प्रयोग अलग संदर्भों में किया गया है. आधुनिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा बिल्कुल नई है जिसे हमने बरास्ता यूरोप पाया है. अच्छा होगा कि भारत के नागरिक आज स्वयं राष्ट्र की पहचान करें और इसकी परिभाषा गढ़ें लेकिन राष्ट्र को समझने का यह रास्ता लंबा है. नागरिक समूहों के बीच राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर यदि मतभेद ज्यादा गहरे हों और एक तबका, दूसरे को अपने ही ढंग से राष्ट्रभक्ति व्यक्त करने के लिए बाध्य करने लगे तो सामाजिक संघर्ष पैदा हो सकता है. ध्यान रखें कि जिस बांग्लादेशी ने 1947 के पहले भारत के लिए वंदे मातरम गाया होगा शायद उसी के बेटे ने भारत-पाक विभाजन के बाद पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा कर अपनी राष्ट्रभक्ति व्यक्त की होगी और उसका पोता आज ‘जय बांग्ला’ के उद्घोष में अपनी राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति ढूंढ रहा होगा.

यदि मेरठ का राष्ट्रवाद मेवात के राष्ट्रवाद से, सवर्ण का राष्ट्रवाद पिछड़ों के राष्ट्रवाद से, हिंदू का राष्ट्रवाद मुसलमानों के राष्ट्रवाद से, गरीबों का राष्ट्रवाद अमीरों के राष्ट्रवाद से, गांवों का राष्ट्रवाद शहरों के राष्ट्रवाद से और बेरोजगारों का राष्ट्रवाद सरकारों के राष्ट्रवाद से मेल नहीं खाता तो संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है. पूर्वी पाकिस्तान की राष्ट्रवादी आकांक्षाओं को न समझने वाली पश्चिमी पाकिस्तान की जिद ने ही इतिहास का रास्ता बदल दिया. राष्ट्रवाद का ऐसा संघर्ष राष्ट्र की एकता को ध्वस्त करता है. इसलिए जब राष्ट्र के नागरिक अपने राष्ट्र का अर्थ ढूंढ रहे हों, तब ऐसे सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत होती है जो सामाजिक संघर्ष पैदा न होने दे और उस समरसता को आगे बढ़ाए, जो सबके भीतर राष्ट्र के साझेपन की भावना मजबूत कर सके.

बालमुकंद का यह लेख नवभारत टाइम्स से साभार है.

‘ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए किसी भी बैंक के कार्ड पर रोक नहीं’

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indian railway

नई दिल्ली। ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग में कुछ बैंक के कार्डो के इस्तेमाल पर बैन की खबर को भारतीय रेलवे ने गलत बताया है. शुक्रवार को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि भारतीय रेलवे ने भारतीय स्टेट बैंक और ICICI सहित 6 बैंकों के कार्ड से भुगतान पर रोक लगा दी है.

भारतीय रेलवे ने साफ किया है कि सभी बैंकों के कार्ड से रेल टिकट बुक कराया जा सकता है और किसी कार्ड को रोका नहीं गया है. इससे पहले खबर आई थी कि भारतीय रेलवे और बैंकों के बीच सुविधा शुल्क राशि के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है, जिसकी वजह से कुछ बैंकों के कार्ड से पेमेंट बैन कर दिया गया.

बताया गया है कि भारतीय रेलवे ने इस साल की शुरुआत में बैंकों से सुविधा शुल्क की राशि को बराबर-बराबर बांटने के लिए कहा था. हालांकि बैंकों का आरोप है कि भारतीय रेलवे शुल्क की पूरी राशि खुद ही रखना चाहता है. इस मुद्दे को लेकर भारतीय बैंक एसोसिएशन और भारतीय रेलवे के बीच बातचीत भी बेनतीजा रही.

गलत खबरः SBI और ICICI बैंक के कार्ड एक्सेप्ट नहीं करेगा भारतीय रेल

ई-टिकट की बुकिंग के लिए किए गए ऑनलाइन पेमेंट हासिल करने वाले सभी मर्चेंट को एक हिस्सा यानी मर्चेंट डिस्काउंट अमाउंट (MDR) संबंधित बैंक को देना होता है, जिसके कार्ड के जरिए भुगतान होता है. MDR भुगतान राशि के अनुसार तय किया जाता है. बैंकों की ओर से इस मुद्दे पर कहा गया कि सामान्य तौर पर जो मर्चेंट होता है वह संबंधित बैंक को पैसा देता है, लेकिन भारतीय रेलवे ने उन्हें कभी पैसा नहीं दिया, इस वजह से ये राशि ग्राहकों से वसूली जाती रही है.

‘महिलाओं में होता है एक तिहाई दिमाग’

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woman in burqa

रियाद। देश कोई भी हो, धर्म कोई भी हो लेकिन महिलाओं को किसी ने बराबरी का दर्जा नहीं दिया. आए दिन महिलाओं के खिलाफ कोई न कोई बयानवाजी करता है. अब एक धर्मगुरू ने महिलाओं के खिलाफ एक बयान दिया. जिसमें उसने कहा कि महिलाओं को ड्राइविंग की इजाजत नहीं देनी चाहिए, क्योंकि इनके पास पुरूषों के तुलना में एक तिहाई ही दिमाग होता है.

सऊदी अरब के इस धर्मगुरु साद अल हिजरी के इस बयान की अलोचना शुरू हो गई. सऊदी सरकार ने इस धर्मगुरु को सस्‍पेंड कर दिया और उसे सभी प्रकार की धार्मिक गति‍विधियां करने से रोक दिया गया. हिजरी ने एक ऑनलाइन वीडियो में कहा- पुरुषों की तुलना में वैसे तो महिलाओं के पास आधा ही दिमाग होता है. लेकिन बाजार में खरीददारी करने के बाद उनके पास एक तिहाई ही दिमाग बचता हैं. ऐसे में उन्‍हें ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जा सकता.

हिजरी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई. महिला अधिकारों की बात करने वाले लोगों ने उन्‍हें हटाने की मांग की. इसके बाद दक्षिण प्रांत असिर की सरकार ने उन्‍हें हटाने की घोषणा कर दी. सरकार ने अपने बयान में कहा- किसी भी सम्मानीय प्लेटफॉर्म से इस तरह का बयान गलत है. यहां से महिलाओं के खिलाफ इस तरह के गैर बराबरी वाले बयान को मंजूर नहीं किया जा सकता. खासकर जब जब इस्लाम में दोनों को बराबरी की बात कही गई है. भविष्‍य में अगर कोई भी धर्मगुरु इस तरह की बात करेगा तो उसके साथ भी ऐसा ही बर्ताव होगा. इस बारे में जब हिजरी से बात की गई तो उन्‍होंने कहा उन्होंने गलती से ये बात की.

फलाहारी बाबा के कमरे से निकले महिलाओं के गहने और सीडी

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Falahari baba

जयपुर। बलात्कारी बाबा राम रहीम के बाद बलात्कार के आरोप में फंसा फलाहारी बाबा पर कई महिलाओं का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया जा रहा है. हालांकि बाबा अभी तक अस्पताल में ही भर्ती है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली महिला ने फलाहारी बाबा पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. और अब महिला के पिता ने बाबा पर कई संगीन आरोप लगाए हैं.

आरोप लगाने वाली युवती गुरुवार शाम परिजनों के साथ अलवर पहुंच गई थी. पुलिस ने उसके बयान लिए और आश्रम भी ले गई. शुक्रवार को पुलिस ने आश्रम और उससे जुड़े अन्य भवनों की जांच की. युवती ने आश्रम के जिस कमरे में दुष्कर्म का आरोप लगाया था, वहां से महिलाओं के आभूषण बरामद हुए हैं. पुलिस ने कमरे से लैपटॉप और कुछ सीडी भी जब्त की हैं. साथ ही आश्रम के सीसीटीवी पैनल की हार्ड डिस्क से भी जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

इस बीच अस्पताल के आइसीयू में भर्ती फलाहारी बाबा को शुक्रवार को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. डॉक्टरों के अनुसार अब उसकी तबीयत पूरी तरह सामान्य है और पुलिस पूछताछ कर सकती है. उधर, पुलिस अधीक्षक राहुल प्रकाश का कहना है कि फलाहारी बाबा की गिरफ्तारी पूरे मामले की जांच-पड़ताल के बाद ही की जाएगी.

युवती के पिता ने पत्रकारों को बताया कि कि उन्होंने बाबा को भगवान की तरह पूजा है. इसके बाद भी उसने बेटी के साथ जो कार्य किया, उससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है. उन्होंने बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा कि बाबा को इस कृत्य की सजा मिलनी चाहिए. बाबा ने छत्तीसगढ़ में कई महिलाओं के साथ कुकृत्य किया है. उन्होंने पीडि़त महिलाओं की सूची पुलिस को सौंप दी है. राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया का कहना है कि पुलिस जांच कर रही है. कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

एक सम्यक संकल्प के सौ साल (23 सितंबर 1917-23 सितंबर 2017)

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निहित स्वार्थ और विश्वासघात जीवन के वृहत शत्रु होते हैं. स्वार्थी एवं विश्वासघाती व्यक्ति जीवन में कुछ हासिल अवश्य कर लेते हैं लेकिन उसका शाश्वत मूल्य नहीं रहता. वो हमारे नैतिक मूल्य ही होते हैं जो संघर्ष के विकट क्षणों में भी हमें गलत दिशा का रूख नहीं करने देते. संघर्ष के दिनों के कुछ क्षण इतने मूल्यवान होते हैं जो न केवल व्यक्ति विशेष के जीवन के लिए मार्गदर्शक व निर्णायक हो जाते हैं बल्कि समाज की दिशा व दशा बदल देते हैं. इन्ही संघर्ष के व्यापक क्षणों के कुछ मूक गवाह भी होते हैं जो इतिहास में अंकित हो अमर हो जाते हैं. ऐसे ही संघर्षमय उपयोगी जीवन का एक गवाह गुजरात के बड़ौदा शहर के कमेटी बाग़ में मौजूद वह वट वृक्ष है. कम से कम सौ वर्ष पुराना वह वृक्ष भारत के इतिहास के एक निर्णायक घटना का मूक गवाह है. यह घटना आज के वक्त में इसलिए भी ज्यादा महत्वूपर्ण है क्योंकि साल 2017 में उस घटना के सौ साल पूरे हो गए हैं.

घटना सन 1917 की है. उस समय बड़ौदा एक रियासत हुआ करती थी और बड़ौदा नरेश सर सयाजीराव गायकवाड़ ने एक प्रतिभाशाली, होनहार गरीब नौजवान को छात्रवृति देकर कानून व अर्थशास्त्र अध्ययन करने हेतु लन्दन भेज दिया. छात्रवृति के साथ अनुबंध यह था की विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवक बड़ौदा रियासत को अपनी दस वर्ष की सेवाएं देगा. अध्ययन कर उच्च शिक्षा हासिल करने के उपरान्त 28 वर्षीय वह युवक करार के मुताबिक अपनी सेवाएं देने हेतु बड़ौदा नरेश के सम्मुख उपस्थित हुआ और नरेश ने उस युवक को सैनिक सचिव के पद पर तत्काल नियुक्त कर लिया. एक सामान्य घटना आग की लपटों की तरह पुरे रियासत में फ़ैल गई. बस एक ही चर्चा चारो ओर थी कि बड़ौदा नरेश ने एक अछूत व्यक्ति को सैनिक सचिव बना दिया है. लेकिन विडम्बना ही थी की इतने महत्वपूर्ण पद पर आसीन अधिकारी को भी मातहत कर्मचारी दूर से फाइल फेंक कर देते. चपरासी पीने के लिए पानी भी नहीं देता. यहां तक की बड़ौदा नरेश के उस आदेश की भी अनदेखी कर दी गयी जिसमे उन्होंने कहा था की इस उच्च अधिकारी के रहने की उचित व्यवस्था की जाये. दीवान उनकी मदद करने से नरेश से स्पष्ट ही इंकार कर चुका था. इस उपेक्षा और तिरस्कार के बाद अब उन्हें अपने खाने व रहने की व्यवस्था स्वयं करनी थी. किसी हिन्दू लॉज या धर्मशाला में उन्हें जगह न मिली. आखिरकार वह एक पारसी धर्मशाला में अपना असली नाम छुपाकर एवं पारसी नाम एदल सरोबजी बता कर दैनिक किराये की दर पर रहने लगा. अंततः लोगों ने वह पारसी धर्मशाला भी ढूंढ लिया. हाथों में लाठियां लेकर आये लोगों ने उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और सामान निकालकर सड़क पर फेंक दिया. बहुत निवेदन करने के बाद उस युवक को धर्मशाला खाली करने के लिए आठ घंटे की मोहलत दी गयी. चूंकी उस समय बड़ौदा नरेश मैसूर जाने की जल्दी में थे, अतः उस युवक को दीवान जी से मिलने की सलाह दी परन्तु दीवान जी उदासीन रहे. विवश हो उस युवक ने दुखी मन से बड़ौदा नरेश को अपना त्याग पत्र सौंप दिया और रेलवे स्टेशन पहुंच मुंबई जाने वाली ट्रेन का इन्तेजार करने लगा. ट्रेन चार पांच घंटे विलम्ब से चल रही थी अतः वह कमेटी बाग़ के वट वृक्ष के निचे एकांत में बैठ कर फुट फुट कर रोया. रुदन सुनने वाला उस वृक्ष के सिवाय कोई न था. गहन पीड़ा की कोई सीमा न थी. लाखों लाख से योग्य, प्रतिभावान एवं सक्षम होकर भी वह उपेक्षित था. दोष केवल इतना की वह अछूत था. उसने सोचा की मै इतना उच्च शिक्षित हूं, विदेश से पढ़ा हूं, जब मेरे साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है तो देश के करोड़ों अछूत लोगों के साथ क्या हो रहा होगा? तारीख थी 23 सितम्बर 1917.

जब आंसू थमे तो उस युवक ने एक विराट संकल्प लिया – अब मैं सारा जीवन इस देश से छुआछूत निवारण और समानता के लिए कार्य करूंगा तथा ऐसा नहीं कर पाया तो स्वयं को गोली मार लूंगा. वह एक साधारण संकल्प नहीं था बल्कि सम्यक संकल्प था. हम रोज ही संकल्प लेते हैं और ‘रात गयी बात गयी’कि तरह भूल जाते हैं लेकिन न तो उस व्यक्ति के संकल्प साधारण थे और न वह व्यक्ति खुद साधारण था. कमेटी बाग़ के उस वट वृक्ष के नीचे असाधारण संकल्प लेने वाला व्यक्ति कोई और नहीं देश के महान सपूत डॉ. भीम राव अम्बेडकर थे. उनके इस संकल्प से उपजे संघर्ष ने भारत के करोड़ों लोगों के जीवन की दिशा बदल दी. कहा जाता है की दीपक राग संगीत से ज्योति जल उठती है, बुझे हुए दीपक में प्रकाश आ जाता है. बाबा साहेब की सारी जिंदगी दीपकरागमय रही. उन्होंने प्राचीन, दकियानूसी तथाकथित सामाजिक और धार्मिक परम्पराओं के विरोध में कठोर संघर्ष किया. उत्पीड़ित जनता को नविन पाथेय दिया.

यह लेख अजय चन्द्रकीर्ति ने लिखा. लेखक अमेठी (यूपी) में रहते हैं. 

मॉल में बुर्का पहन नाची महिला, मुस्लिम संगठन भड़के

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मंगलुरू। शॉपिंग मॉल में बुर्का पहनी एक लड़की के डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में बुर्का पहने लड़की ‘काला चश्मा’ गाने पर नाच रही है. जिसके बाद मुस्लिम संगठनों ने लड़की के डांस पर आपत्ति जताई और इसे धर्म के खिलाफ बताया.

दरअसल, मंगलुरू के मॉल में एक इवेंट का आयोजन हुआ था. लड़की बॉलीवुड के फेमस सॉन्ग ‘काला चश्मा’ पर थिरकती नजर आ रही है. उसके साथ चार अन्य लड़कियां भी डांस करती हुई दिखाई दे रही हैं. ये मॉल में किसी प्रोमोशनल एक्टिविटी का हिस्सा है. उस वक्त वहां मौजूद लोगों में से किसी ने इसे शूट कर लिया. वीडियो वायरल होने के बाद कई मुस्लिम संगठनों के लोगों ने इसे गैर इस्लामिक करार दिया है और महिला की करतूत की आलोचना की है.

साउथ कन्नड़ सलाफी मूवमेंट के वाइस प्रेजिडेंट इस्माइल शफी ने कहा, ‘सार्वजनिक स्थलों पर इस्लाम के पवित्रता का प्रतीक बुर्का पहनकर नाचना हमारे धर्म में स्वीकार नहीं है. लड़की ने हमारे धर्म की गलत तस्वीर पेश की है.’ सैफी ने यह भी कहा कि बॉलिवुड और फिल्मों की हिस्सा रहीं मुस्लिम महिलाएं काफी वक्त से धर्म की गलत तस्वीर पेश करती रही हैं. उन्होंने कहा, ‘यह गैर इस्लामिक है. विडियो में दिख रही लड़की ने तो इन लोगों (फिल्मों में काम करने वाली मुस्लिम महिलाएं) को फॉलो किया है.’

इस्लाम में आजादी पर उन्होंने कहा, ‘उसे बुर्के के बिना नाचने की आजादी है. इस्लाम में न सिर्फ महिलाओं को, बल्कि हर इंसान को आजादी का हक मिला है. धार्मिक मूल्यों को लड़की द्वारा ताक पर रखने के लिए उसके माता-पिता जिम्मेदार हैं.’ शफी ने कहा कि अब वह उस लड़की को ढूंढने की कोशिश करेंगे, उसके परिवार से मुलाकात करेंगे और उन्हें धर्म का असल मतलब समझाएंगे. उन्होंने कहा, ‘यह पैरंट्स की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को काबू में रखें. आज हमें पता चल चुका है कि मुस्लिम पबों को जाते हैं और नशे के आदी भी हैं. ऐसी चीजें हराम हैं.’

मंदिर में जा रही दलित महिलाओं के साथ मारपीट

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गोपालगंज। दलित महिलाओं को नाली का पानी खुद पर पड़ने की शिकायत करना महंगा पड़ गया. कुछ लोगों ने आठ महिलाओं को पीट दिया, जिसमें वो जख्मी हो गयी. सभी जख्मी महिलाओं का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है.

पीड़िता के मुताबिक कुचायकोट चौराव गांव की दलित महिलाएं नवरात्र के मौके पर गांव के मंदिर में पूजा अर्चना करने जा रही थी. गांव के ही कुछ लोग नाले की सफाई कर रहे थे. इसी दौरान नाले का गन्दा पानी कुछ महिलाओं के शरीर पर पड़ गया. जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया.

विवाद इस कदर बढ़ गया कि एक पक्ष विशेष के द्वारा पूजा करने जा रही सभी महिलाओं की बेरहमी से पिटाई कर दी गयी. जिसमे गांव की गीता देवी, कुमारी देवी, किसनावती देवी, ज्ञान्ति देवी, चंदेश्वर बैठा, आशुतोष बैठा, अंशुमन बैठा और आसिनी बैठा घायल हो गए.

पीड़ित परिजनों ने इस मामले में गांव के ही सफिक मियां, नईम सहित 15 लोगो के खिलाफ फर्द बयान दर्ज कराया है. बहरहाल इस घटना के बाद कुचायकोट पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है. साभारः ईनाडु इंडिया

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘गाय मरे तो लोग सड़क पर, दलित मरे तो ख़ामोशी’

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दिल्ली के हिरण कुदना इलाके में बहने वाले नाले में आसपास के घर, मोहल्लों और फ़ैक्ट्रियों का मल-मूत्र, केमिकल्स और कूड़ा जमा होता है. पास ही सड़क से लगी खाली जगह पर निकाल कर रखा गया पुराना कूड़ा जम कर कड़ा हो चुका था. चारों ओर फैली सड़न से सांस लेना मुश्किल था. नीतू और अजीत नाले में गर्दन तक डूबे हुए थे.

कभी-कभी मैला पानी उनकी नाक की उंचाई जाता था. उन्होंने ज़ोर से मुंह बंद कर रखा था. एक के हाथ में बांस की खपच्ची थी. दूसरे के हाथ में लोहे का कांटा जिससे वो नाले की तली में फंसे कूड़े को खोद रहे थे. कांटे को हिलाते ही कालिख मटमैले पानी की सतह पर तैर गई और उन्हें घेर लिया. नीतू ने इशारा किया, “काला पानी गैस का पानी होता है. वही गैस जो लोगों की जान ले लेती है.”

“हम बांस मारकर देख लेते हैं कि वहां गैस है कि नहीं. फिर हम घुसते हैं. बंदे इसलिए मरते हैं जब वो बिना देखे घुस जाते हैं.” दिन के 300 रुपए कमाने के लिए वो नाले में पाए जाने वाले सांप, मेढक जैसे जानवरों के लिए भी तैयार थे. नाले से निकलकर जांघिया पहने दुबले-पतले नीतू थोड़ी देर धूप में खड़े ही हुए थे तो पसीना उनके नंगे शरीर पर लगे बदबूदार पानी और कीचड़ से मिलकर अजीब सी महक पैदा कर रहा था. सीवर में कांच, कांक्रीट या ज़ंग लगे लोहे के कारण कई बार नीतू का पांव कट चुका था. काले कीचड़ से सने पांव का कुछ घाव अभी भी ताज़ा था क्योंकि उन्हें भरने का मौका ही नहीं मिला.

ग़ैर-सरकारी संस्था प्रैक्सिस ने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि हर साल दिल्ली में करीब 100 सीवर कर्मचारियों की मौत होती है. वर्ष 2017 जुलाई-अगस्त के मात्र 35 दिनों में 10 सीवर कर्मचारियों की मौत हो गई थी. सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन के मुताबिक उसने 1993 से अब तक पूरे भारत में हुईं करीब 1500 मौतों के दस्तावेज़ जुटाए हैं लेकिन असल संख्या कहीं ज़्यादा बताई जाती है.

लाखों लोग आज भी इस काम से जुड़े हैं. ये काम करने वाले ज़्यादातर दलित हैं. सीवर में मौतें हाईड्रोजन सल्फ़ाइड के कारण होती हैं. सीवर में काम करने वालों को सांस, चमड़ी और पेट की तरह तरह की बीमारियों से भी जूझना पड़ता है. नीतू ने ये काम 16 साल की उम्र में शुरू किया.

दिल्ली में वो अपने जीजा दर्शन सिंह की फ़ास्ट फूड दुकान में रहते हैं. दुकान तक पहुंचने के लिए झोपड़पट्टी की तंग गलियों से गुज़रना होता है. इन्हीं झोपड़पट्टियों में कई सीवर कर्मचारी रहते हैं. संकरी गली के दोनो तरफ़ घर के दरवाज़े पर कहीं महिलाएं चूल्हे पर रोटी पका रही थीं तो कहीं दुकानदार सब्ज़ियों के साथ साथ मुर्गियों के अलग अलग हिस्सों को एक पटरी पर करीने से सजा कर ग्राहकों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. आसपास की आबादी इतनी थी कि सांस लेने के लिए ज़ोर लगाना पड़ रहा था. कूड़े को पार कर हम दर्शन सिंह के ढाबे पर पहुंचे.

दर्शन सिंह ने 12 साल मैला साफ़ किया लेकिन पास की इमारत में दो साथियों की मौत होने के बाद उन्होंने ये काम छोड़ने का फ़ैसला किया.

उन्होंने बताया, “एक अपार्टमेंट में एक पुराना सीवर लंबे वक्त से बंद था. उसमें बहुत गैस थी. हमारे झुग्गियों में रहने वाले दो लोगों ने 2000 रुपए में उसे साफ़ करने का कांट्रैक्ट लिया. पहले जो बंदा घुसा वो वहीं रह गया क्योंकि गैस ज़बरदस्त थी. उसके बेटे ने पापा पापा की आवाज़ दी. पापा को ढूंढने वो घुसा लेकिन वापस नहीं आया. दोनो अंदर ही खत्म हो गए. मुश्किल से उन्हें निकाला गया. तबसे हमने ये काम बंद कर दिया.”

नंगे बदन काम कानून के मुताबिक सीवर साफ़ करने का हाथ से काम आपातकाल में ही करना होता है और उसके लिए सीवर कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण देना होता है. लेकिन असल में ज़्यादातर कर्मचारी नंगे बदन सीवर में काम करते हैं. ऐसी घटना में हर मृत के परिवार को 10 लाख की मदद दिए जाने का प्रावधान है लेकिन अखिल भारतीय दलित महापंचायक के मोर सिंह के मुताबिक इसमें कागज़ी कार्रवाई इतनी होती है कि हर व्यक्ति को ये मदद नहीं मिल पाती. ऐसे ही एक घटना में दिल्ली के लोक जननायक अस्पताल का सीवर को साफ़ करने के दौरान 45 वर्षीय ऋषि पाल की मौत हो गई. रविवार का दिन था. ऋषि पाल की बेटी ज्योति को पापा के एक साथी का फ़ोन आया कि वो जल्द अस्पताल पहुंचे क्योंकि पापा की तबियत खराब हो गई है.

ऋषि पाल की पत्नी और तीन बच्चे भागते अस्पताल अस्पताल पहुंचे लेकिन पता चला कि ऋषि पाल की मौत हो चुकी थी. उनका शव एक स्ट्रेचर पर रखा हुआ था. उनके शरीर, कपड़ों पर सीवर की गंदगी अभी भी लगी थी. ज्योति ने धीमी आवाज़ में बताया, “हमें यहां आकर पता चला कि वो (पापा) कोई भी सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल नहीं करते थे.” नज़दीक चादर पर महिलाओं के साथ बैठीं ज्योति की मां अभी भी सदमें में थीं. साथी सीवर कर्मचारी गुस्से में थे. वो मुझे उस सीवर तक ले गए जहां ऋषि पाल की मौत हुई थी. पास खड़े सुमित ने ऋषि पाल को बचाने की कोशिश की थी लेकिन वो खुद मरते-मरते बचे. उन्होंने मुझे बताया, “ऋषि पाल रस्सी बांध कर (सीवर में) नीचे उतरे. मैंने उन्हें आवाज़ दी, उस्ताद क्या आप नीचे पहुंच गए? उन्होंने हाथ उठाया और वो (अचानक) वहीं गिर पड़े. मुझे लगा कि कीचड़ की वजह से उनका पैर फिसल गया है. मैंने नीचे जाने के लिए सीढ़ी पर पांव रखा. इतने में ही मुझे भी गैस चढ़ गई. मैं हिम्मत करके बाहर आया और पास ही लेट गया. उसके बाद का मुझे कुछ याद नहीं.”

पास ही खड़े एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “अगर ये घटना अस्पताल के बाहर कहीं हुई होती तो और लोगों की मौत हो जाती.” कौन ज़िम्मेदार अस्पताल के मेडिकल डायरेक्ट जेसी पासी ने मौत पर शोक जताया लेकिन ज़िम्मेदारी से इनकार किया. वो कहते हैं, “अस्पताल के सीवर की ज़िम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है…. अगर सीवर कर्मचारी को सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए तो ये मेरी ज़िम्मेदारी नहीं.” दिल्ली जल निगम की डायरेक्टर (रेवेन्यू) निधि श्रीवास्तव ने मौतों की जिम्मेदारी ली और कड़े कदमों का भरोसा दिलाया. लेकिन इन वायदों पर कितना भरोसा किया जाए? सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन के बेज़वाड़ा विल्सन कहते हैं, “अगर एक महीने में दिल्ली में 10 गाएं मर जाएं तो हंगामा मच जाएगा और लोग सड़कों पर निकल जाएंगे. इसी शहर में एक महीने में 10 दलित सीवर कर्मचारियों को मौत हो गई लेकिन एक आवाज़ नहीं उठी. ये चुप्पी कचोटने वाली है.” वो कहते हैं, “कोई भी व्यक्ति दूसरे का मल-मूत्र साफ़ नहीं करना चाहता लेकिन सामाजिक ढांचे के कारण दलित ये काम करने के लिए मजबूर हैं. जब हम मंगलयान तक जाने का सोच सकते हैं तो इस समस्या से क्यों नहीं निपट पा रहे हैं.”

विल्सन के मुताबिक जहां सरकार लाखों लाख नए शौचालय बनाने की बात करती है, इन शौचालचों के लिए बनाए जा रहे पिट्स या गड्ढ़ों को साफ़ करने के बारे में कोई नहीं सोचता. नीतू के जीजा दर्शन सिंह कहते हैं, “हम अनपढ़ हैं. हमारे पास कोई काम नहीं है. परिवार को पालने के लिए हमें ये काम करना पड़ता है. अगर हम बंद सीवर के बारे में पूछते हैं तो अफ़सर कहते हैं, आप इसमें घुसिये और काम करिए. पेट के लिए हमें करना पड़ता है.” “कई बार हम बच्चों को नहीं बताते क्योंकि ये गंदा काम होता है. हम कह देते हैं कि हम मज़दूरी करते हैं. हम सोचते हैं कि अगर हमने उन्हें सच बता दिया तो वो हमसे नफ़रत करने लगेंगे. कुछ लोग शराब पीते हैं. मजबूरी में आंख मीच कर काम करते हैं.” “लोग हमें दूर से पानी देते हैं. कहते हैं, वहां रखा है, ले लो. नफ़रत भी करते हैं. बहुत से लोग हमसे नफ़रत करते हैं क्योंकि ये गंदा काम है. हम अगर नफ़रत करेंगे तो हमारा परिवार कैसे चलेगा.”

विनीत खरे की रिपोर्ट बीबीसी से साभार

SBI और ICICI बैंक के कार्ड एक्सेप्ट नहीं करेगा भारतीय रेल

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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अब ऑनलाइन टिकट बुकिंग पर एसबीआई और आईसीआईसीआई सहित 6 बैंकों का कार्ड स्वीकार नहीं करेगा. भारतीय रेलवे ने इन बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिया है. अब केवल इंडियन ओवरसीज बैंक, कैनरा बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के कार्ड के जरिए ही आप ऑनलाइन टिकट बुक कर सकेंगे. बैंकों का आरोप है कि आईआरसीटीसी ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि वह पूरा सुविधा शुल्क खुद रखना चाहती है. आईआरसीटीसी ने बैंकों से मिलने वाले सुविधा शुल्क को उसके साथ बांटने के लिए कहा था, जिस पर बैंकों ने आपत्ति जताई थी. माना जा रहा था कि भारतीय बैंक संगठन, आईआरसीटीसी और भारतीय रेलवे मिलकर इस मसले का हल निकाल लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कुछ महीनों से एसबीआई और आईसीआईसीआई समेत 6 अन्य बैंकों के कार्ड से टिकट बुकिंग में समस्या आने लगी थी. कई लोगों ने इसकी शिकायत भी की थी. अब इसे आईआरसीटीसी के इस नए फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है. बैंकों की ओर से इस मसले पर कहा गया कि सामान्य तौर पर जो मर्चेंट होता है वह संबंधित बैंक को पैसा देता है, लेकिन आईआरसीटीसी ने उन्हें कभी भी पैसा नहीं दिया, इस वजह से हम ये राशि ग्राहकों से वसूल रहे हैं. सालों से ये प्रक्रिया ऐसी ही चलती हुई आ रही है. मर्चेंट जो कार्ड बेस पेमेंट के लिए बैंक की सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें एक चार्ज बैंकों को देना होता है, जो मर्चेंट डिस्काउंट अमाउंट (एमडीआर) के रूप में जाना जाता है. बैंकों ने आईआरसीटीसी की मांग मानने से ये कहते हुए इनकार किया था कि मांग मानना मर्चेंट एक्वाइरिंग बिजनेस के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा. वर्तमान में बैंकों को 1000 रुपए तक के कार्ड ट्रांजेक्शन पर 0.25 फीसदी और 1000 से 2000 रुपए के ट्रांजेक्शन पर 0.5 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट अमाउंट वसूलने की अनुमति है. ज्यादा रकम के ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी तक एमडीआर लगाया जाता है.

आज ही रिलीज हुई राजकुमार राव की ‘न्यूटन’ जाएगी ऑस्कर के लिए

क्रिटिक्स से जोरदार सराहना पाने वाली अमित मासुरकर की फिल्म ‘न्यूटन’ ऑस्कर में जाएगी. भारत की तरफ से बेस्ट फॉरेन फिल्म कैटेगरी में इसे नामित किया गया है. फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की सिलेक्शन कमेटी ने शुक्रवार को ये अनाउंसमेंट की है. 26 फिल्मों में से न्यूटन को ऑस्कर में भेजने का फैसला लिया गया. राजकुमार राव ने फिल्म में मुख्य किरदार निभाया है.

राजकुमार के अलावा पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव ने बहे अहम भूमिकाएं की हैं. ये फिल्म 22 सितंबर को करीब 350 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है. इसी दिन रिलीज हुई संजय दत्त की भूमि को करीब 1800 से ज्यादा स्क्रीन्स मिले हैं. राजकुमार राव ने ऑस्कर में फिल्म भेजे जाने खुशी जाहिर की है.

राजकुमार राव की फिल्म न्यूटन भारत की तरफ से विदेशी भाषी फिल्मों की श्रेणी में ऑस्कर के लिए आधिकारिक एंट्री है। इस फिल्म में लीड किरदार राजकुमार राव ने निभाया है। उन्होंने ट्विटर पर इस खबर को शेयर किया। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा- इस खबर को आपके साथ शेयर करके काफी खुश हूं। इस साल ऑस्कर के लिए न्यूटन भारत की तरफ से आधिकारिक एंट्री है। पूरी टीम को शुभकामनाएं। अमित मासूरकर के निर्देशन में बनी न्यूटन एक सरकारी क्लर्क के इर्द-गिर्द घूमती है जो स्वतंत्र और ठीक तरह से नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनाव करवाने की भरपूर कोशिश करता है।

फिल्म में पंकज त्रिपाठी, रघुबीर यादव, अंजलि पाटिल, दानिश हुसैन और संजय मिश्रा अहम भूमिकाओं में हैं। न्यूटन को ऑस्कर में भेजने का फैसला शुक्रवार को लिया गया। तेलुगू प्रोड्यूसर सीवी रेड्डी की अध्यक्षता में बनी फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा- न्यूटन को कमिटी ने 26 एंट्रीज में से सर्वसम्मति से चुना गया है। कमिटी में मौजूद सभी को यह फिल्म पसंद आई। फिल्म के डायरेक्टर अमित ने कहा- उम्मीद करता हूं कि इससे छत्तीसगढ़ में क्या हो रहा उसकी तरफ ध्यान जाएगा।

नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान BHU की छात्राओं का विरोध प्रदर्शन

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bhu

वाराणसी। एक तरफ सरकार बेटी बचाओं और बेटी पढ़ाओं की बात करती है वहीं दूसरी तरफ पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पढ़ने वाली छात्राएं ही खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से वाराणसी के दो दिन के दौरे पर होंगे और उनके पहुंचने से पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्राओं ने बीएचयू गेट के सामने छेड़खानी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया. यहां तक कि विरोध में एक छात्रा ने अपना सिर तक मुंडवा लिया.

जिस तरह से इन छात्राओं ने प्रदर्शन किया उससे ज़िला प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं और धरना स्थल पर भारी फोर्स को तैनात कर दिया गया. इन छात्राओं का आरोप है इनके साथ कैंपस में लगातार छेड़खानी होती है. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती. इन छात्राओं का आरोप है कि इसमें प्राक्टोरियल बोर्ड के लोग भी शामिल हैं जिसकी वजह से कोई कार्रवाई नहीं होती.

छात्राओं ने बताया कि उनके साथ हॉस्टल के गेट या क्लास में हर जगह आए दिन छेड़खानी होती है. गुरुवार शाम को भी त्रिवेणी हॉस्टल के बाहर कुछ छात्राओं के साथ छेड़खानी हुई तो छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर प्रो.ओएन सिंह को फोन बताया तो कार्रवाई के बजाय उल्टा छात्राओं को ही वे भला बुरा कहने लगे और कहा कि 6 बजे के बाद हॉस्टल के बाहर क्यों घूम रही थीं. फिलहाल छात्राएं कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठी हुई हैं और प्रशासन इस मामले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

भारत ने ऑस्ट्रेलिया को कोलकाता वनडे में 50 रन से हराया

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भारत ने ऑस्ट्रेलिया को कोलकाता वनडे में 50 रन से हरा दिया और पांच वनडे मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली। इस मुकाबले में टॉस जीतकर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया। भारत पहले बल्लेबाज़ी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 252 रन पर ऑल आउट हो गई। इसके जबाव में ऑस्ट्रेलियाई टीम 43.1 ओवर में 202 रन ही बना पाई। भारतीय गेंदबाजों ने एक बार फिर से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की एक नहीं चलने दी। भुवनेश्वर और कुलदीप ने तीन-तीन विकेट चटकाए। विराट कोहली को ‘मैन ऑफ द मैच’ का खिताब मिला।

दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम के ओपनर बल्लेबाज कार्टराइट सिर्फ एक रन बनाकर आउट हो गए। उन्हें भुवनेश्वर कुमार ने क्लीन बोल्ड कर दिया। भुवी ने भारत को दूसरी सफलता दिलाई और वार्नर को अपना शिकार बनाया। वार्नर सिर्फ एक रन पर भुवी की गेंद पर रहाणे के हाथों लपके गए। शानदार बल्लेबाजी कर रहे ट्रेविस हेड को युजवेंद्र ने अपना शिकार बनाया। हेड को 39 रन पर चहल ने मनीष पांडे के हाथों कैच आउट करवा दिया। ग्लेन मैक्सवेल को युजवेंद्र चहल ने विकेट के पीछे स्टंप आउट करवाया। धौनी ने मैक्सवेल को 14 रन पर स्टंप कर दिया। कप्तान स्मिथ ने 59 रनों की शानदार पारी खेली। उन्हें हार्दिक पांड्या ने कैच आउट करवाया। मैथ्यू वेड 2 रन बनाकर कुलदीप यादव की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए। एगर और पैट कमिंग बिना खाता खोले ही कुलदीप का शिकार बने। कूल्टर नाइल 8 रन बनाकर हार्दिक पांड्या की गेंद पर आउट हुए। स्टॉयनिस 62 रन बनाकर नाबाद रहे। रिचर्डसन बिना खाता खोले ही भुवनेश्वर का शिकार बने।

रोहित शर्मा 07 रन बनाकर कपल्टर नाइल की गेंद पर गेंदबाज़ को ही कैच थमा बैठे और भारत को लगा पहला झटका। रहाणे 55 रन बनाने के बाद रन आउट होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद मनीष पांडे ने एक बार फिर से टीम इंडिया को निराश किया और वो 03 रन बनाकर ऐगर की गेंद पर बोल्ड हो गए। अच्छी बल्लेबाजी कर रहे केदार जाधव को नाथन-कूल्टर-नाइल ने 24 रन पर आउट कर दिया। जाधव का कैच बैकवर्ड प्वाइंट पर मैक्सवेल ने पकड़ा। विराट कोहली दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से 92 रन पर नाथन-कूल्टर-नाइल की गेंद पर बोल्ड हो गए। वो अपने शतक से चूक गए। धौनी महज 5 रन बनाकर कैच आउट हो गए। केन रिचर्डसन की गेंद पर धौनी का कैच स्मिथ ने पकड़ा। भुवी 20 रन बनाकर कैच आउट हुए जबकि कुलदीप यादव बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। युजवेंद्र चहल एक रन बनाकर रन आउट हो गए। बुमराह 10 रन बनाकर नाबाद रहे।

बिहार TET में 80 प्रतिशत से ज्यादा फेल

पटना। बिहार प्रारंभिक शिक्षक (प्रशिक्षित) पात्रता परीक्षा-2017 में सिर्फ 17 फीसद अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण हुए हैं, जबकि 80 फीसद से ज्यादा अभ्यर्थी फेल हो गए. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने गुरुवार को रिजल्ट जारी कर दिया.

उन्होंने बताया कि पेपर वन (कक्षा 1 से 5) की परीक्षा में शामिल होने के लिए 49,488 अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया था. परीक्षा में 43,794 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें 7,038 (16.07 फीसद) को सफलता मिली. पेपर टू में 1,91,164 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया. परीक्षा में 1,68,761 शामिल हुए. इसमें से 30,113 (17.84 फीसद) अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं.

बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार पेपर वन में 1954 और पेपर टू में 9397 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट रद कर दी गई है. कुल 11,351 अभ्यर्थियों के ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं किया गया है. रद किए गए ओएमआर शीट के साथ अभ्यर्थियों ने छेड़छाड़ की थी. कई शीट में वाइटनर का उपयोग किया गया था. रद की गई अधिकतर शीट में सभी कॉलम बताए गए तरीके से भरे नहीं गए थे.

बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि टीईटी के प्रश्न पत्र में त्रुटि वाले सभी प्रश्नों को हटाकर कटऑफ सूची जारी की गई है. गलत प्रश्नों की संख्या विषयवार अलग-अलग हैं. किस विषय में कितने प्रश्न गलत हैं. उन्होंने बताया कि कई प्रश्न प्रिंटिंग में त्रुटि के कारण भी हटाए गए हैं. कई प्रश्नों पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी. उन सभी की जांच बोर्ड की विशेषज्ञ टीम ने की. रद किए गए प्रश्न के सभी पहलुओं को पूरी तरह से जांच कराने के बाद ही हटाने का निर्णय लिया गया. सूत्रों की मानें तो लगभग 25 प्रश्नों को हटा दिया गया है.

‘टेररिस्तान बन चुका है पाकिस्तान’

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India in Uno

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए भारत ने कहा है कि पड़ोसी देश इस समय आतंकवाद का पर्यायावाची बन गया है. पाकिस्तान अब ‘टेररिस्तान’ हो गया है और वह आतंकवादियों को संरक्षण दे रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत की सचिव इनाम गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान में बड़े आतंकियों के अड्डे हैं. ओसामा बिन लादेन भी वहीं से पकड़ा गया. वह वैश्विक आतंकवाद को निर्यात करता है. एक पाक देश बनने की कोशिश में पाकिस्तान एक विशुद्ध आतंकवादी देश बन गया है.

इनाम गंभीर ने कहा कि यह असाधाराण है कि एक देश जहां लादेन पकड़ा जाता है और जो मुल्ला उमर को संरक्षण दिए हुए वह पीड़ित बनने का प्रयास कर रहा है.

भारत ने यूएन में कहा कि यह असामान्य स्थिति है, जिस देश ने ओसामा बिन लादेन की सुरक्षा की और मुल्लाह उमर को आश्रय दिया, अब खुद आंतक का शिकार होने का तर्क दे रहा है.

कश्मीर मसले पर भारत ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया. भारत ने कहा कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है. पाकिस्तान सीमापार से कितने भी आतंकी भेज ले लेकिन वह हमारी क्षेत्रीय अखंडता को खत्म नहीं कर सकता. भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि पूरी दुनिया में जो देश आतंकियों की सप्ललाई करता है, वह हमें मानवाधिकार पर भाषण देता है. जो देश खुद के लोगों पर जुल्म करता हो, दुनिया को उससे मानवाधिकार सीखने की जरूरत नहीं है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान दुनिया के आतंकियों को एक करने की जगह है. केवल यही वो देश है जो विनाशकारी सलाह देगा, जिसके परिणाम दुनिया को परेशान करेंगे. पाकिस्तान आतंक को किस तरह खत्म करना चाहता है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र के नामित आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा के नेता हाफिज मोहम्मद सईद को अब एक राजनीतिक दल के नेता के रूप में वैधता की मांग की गई है.