रांची। रांची की रहने वाली आदिवासी बेटी सविता कच्छप के संघर्ष और सपनों को आज एक नई पहचान मिली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सविता और उनके पूरे परिवार से मुलाक़ात की, एक ऐसी मुलाक़ात, जो मेहनत, हौसले और उम्मीद का प्रतीक बन गई। पांच दिन पहले ही सविता कच्छप की कहानी सामने आई थी। वह कहानी, जिसमें मज़दूरी करने वाले परिवार की एक बेटी, सीमित संसाधनों के बावजूद IIIT से पीएचडी कर रही है। सविता आज देश की सबसे कम उम्र की आदिवासी बेटियों में से एक हैं, जिन्होंने यह मुक़ाम हासिल किया है।
सनी शरद द्वारा दिखाई गई उस रिपोर्ट में सविता ने बताया था कि आर्थिक तंगी के कारण वह अपने शोध कार्य के लिए एक अच्छा लैपटॉप तक नहीं खरीद पा रही हैं। यह सिर्फ एक मशीन की कमी नहीं थी, बल्कि एक सपने की राह में खड़ी बाधा थी।
30 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उस बाधा को हटाते हुए सविता को दो लाख रुपये का चेक सौंपा और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उन्हें हर संभव सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सविता जैसी बेटियाँ समाज के लिए मिसाल हैं और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। इस पल में सिर्फ एक बेटी को मदद नहीं मिली, बल्कि मेहनत और प्रतिभा को सम्मान मिला।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दी गई इस मदद की हर ओर काफी चर्चा हो रही है और इसको काफी सराहा जा रहा है मुख्यमंत्री द्वारा की गई इस मदद ने सविता के सपनों को नई उड़ान दे दी है। साफ है कि हेमंत सोरेन ने संवेदनशीलता के साथ इस संघर्ष को समझा और एक नई उम्मीद को मजबूती दी। उनकी इस मदद से सविता कच्छप आज सिर्फ एक शोधार्थी नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की उड़ान का प्रतीक बन चुकी हैं।

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