रांची। केंद्र-राज्य सरकार व संबंधित महकमों के तमाम वादों व दावों को झुठलातें हुए क्षेत्र के कुंदरिया बस्ती आरा में भूख से दम तोड़ने वाले 40 साल के चिंतामण मल्हाह के बाद रांची से सटे रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड के अंतर्गत नावाडीह पंचायत के जरहैया टोला निवासी राजेंद्र बिरहोर लगभग 40 की बुधवार मौत हो गई। राजेंद्र की मौत ने चिंतामण की मौत के मोले में लीपापोती करने वाले प्रषासन की कलई एक बार फिर से खोलकर रख दी है।
राजेंद्र की पत्नी ने बताया कि उसे जांन्डिस था। षरीर में खून की कमी थी। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर में तीन दिन से चूल्हा नहीं जला था। दवा खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे। बताया जाता है कि पूर्व में राजेंद्र का इलाज मुखिया के सहयोग से मांडू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया था। बाद में उसे रिम्स में भर्ती कराया गया था।
रिम्स के डाक्टरों ने दवा देकर उसे घर भेज दिया था। पत्नी नें बताया कि राजेंद्र टैक्टर चला कर परिवार चलाता था। उसकी बीमारी के बाद घर की स्थिति खराब हो गई किसी तरह पड़ोसियों से कुछ मांग कर छह बच्चों का पेट भरती थी। राजेंद्र की मौत की सूचना मिलने के बाद मांडू के बीडीओ व सीओ उसके घर पहुंच कर लीपापोती करते हुए राजेंद्र के परिजनों को मुआवजे के तौर पर 10 हजार रूपये नगद व दो क्विंटल चावल दिया।
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