पंजाब चुनाव के लिए बसपा ने किया अकाली दल से गठबंधन

अगले साल 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में बसपा प्रदेश की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए सुखबीर सिंह बादल की अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने आपस में गठबंधन कर लिया है। प्रदेश की राजधानी चंडीगढ़ में सुखबीर सिंह बादल के साथ बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इसकी घोषणा की। कृषि बिल पर भाजपा के रूख के कारण उससे गठबंधन तोड़ने वाली अकाली दल 25 सालों बाद फिर से सत्ता पाने के लिए बसपा के साथ एक मंच पर आ गई है। गठबंधन के बाद पंजाब की 117 सीटों में से बहुजन समाज पार्टी 20 सीटों पर और अकाली दल बाकी की 97 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इस गठबंधन के पीछे पंजाब का जातीय समीकरण है। प्रदेश में 33 प्रतिशत दलित वोट ही यह तय करते हैं कि प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी। हालांकि विधानसभा चुनाव की बात करें तो बीते 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा कुल 111 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। लेकिन उसे सिर्फ डेढ़ प्रतिशत वोट ही मिल सके। बसपा कोई सीट नहीं जीत सकी थी।

लेकिन शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन के बाद बसपा फिर से प्रदेश की राजनीति में मजबूत वापसी की उम्मीद लगाए है। हालांकि पंजाब चुनाव में इस बार अहम मुद्दा किसान आंदोलन और कृषि कानून रहने की उम्मीद है। लेकिन प्रदेश में जिस तरह से सभी दल दलित वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश में जुटे हैं, उसमें बसपा के निश्चित तौर पर एक मजबूत ताकत बन कर उभरने की उम्मीद है। इस गठबंधन की घोषणा करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने प्रदेश में सरकार बनने पर दलित उपमुख्यमंत्री बनाने की बात कही है, उनका यह दांव कितना चलता है, यह चुनावी नतीजे बताएंगे।

पंजाब में बसपा की राजनीति की बात करें तो साल 1992 विधानसभा चुनाव में बसपा ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा और 9 सीटें जीती। उसके 32 उम्मीदवार दूसरे और 40 उम्मीदवार तीसरे नंबर पर थे। और इस चुनाव में बसपा का वोट प्रतिशत था 16.3 प्रतिशत। बहुजन समाज पार्टी के इस शानदार प्रदर्शन से प्रदेश की राजनीति में हंगामा मच गया था। पंजाब में यह अब तक का बसपा का सबसे शानदार प्रदर्शन रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.