भाजपा अध्यक्ष अमितशाह ने कल (11 जनवरी ) भाजपा के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए पानीपत के तीसरे युद्ध का आह्वान किया। मिस्टर अमित शाह पानीपत का तीसरा यु्द्ध तो लड़ा ही जायेगा, लेकिन पानीपत के इस युद्ध में एकतरफ जै श्रीराम, मनु, पुष्यमित्र शुंग,आदि शंकराचार्य, तुलसी, पेशवा, तिलक,हेडगेवार, गोलवरकर, सावरकर और दीदयाल उपाध्याय के मानस पुत्रों होंगे और दूसरी तरफ बुद्ध, अशोक, शंबूक, एकलव्य, कबीर, फुले, शाहू जी, पेरियार, डॉ. आंबेडकर, पेरियार ललई सिंह यादव, रामस्वरूप वर्मा के मानस पुत्र होंगे।
आप पानीपत के तीसरे युद्ध का आह्वान हिंदू धर्म और संस्कृति रक्षा और पूरी तरफ इसकी पुनर्स्थापना के लिए कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य द्विज मर्दों के वर्चस्व को कायम रखना और उसे और मजबूत बनाना है। जाहिर तौर यह काम वर्ण-जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को कायम रखकर और मजबूत बनाकर ही किया जा सकता है।
हम इस युद्ध का आह्वान डॉ. आंबेडकर के उस संकल्प को पूरा करने के लिए कर रहे हैं, जो संकल्प उन्होंने जाति का विनाश नामक किताब और अन्य किताबों में प्रकट किया है। वह संकल्प है, वर्ण-जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी पितृसत्ता का पूर्ण विनाश और स्वतंत्रता, समता और बंधुता की स्थापना। उन्होंने यह भी कहा था कि यह तभी हो सकता है जब वर्ण-जाति व्यवस्था की जड़ मनुववाद- ब्राह्मणवाद का विनाश हो जाए।
मिस्टर अमितशाह इस युद्ध में आपके हाथ में वेद, मनुस्मृति, गीता, रामचरित मानस और बंच ऑफ थाट होगा। हमारे हाथ में बुद्ध के वचन, कबीर के दोहे, फुले की गुलामगिरी, पेरियार की सच्ची रामायण और डॉ. आंबेडकर का जाति का विनाश और 22 प्रतिज्ञाएं होगीं। आपने पानीपत के युद्ध के के हवाले से कहा यदि इस युद्ध यदि संघ-भाजपा नहीं जीतती है, अंग्रेजों की गुलामी (200 वर्षो) की तरह यह देश एक बार फिल गुलाम हो जायेगा।
हम कह रहे हैं कि यदि इस युद्ध में आप विजयी होते हैं, 2000 वर्षों से चला आ रहा सवर्ण मर्दों का वर्चस्व सिर्फ कायम ही नहीं रहेगा और ज्यादा मजबूत होगा। हम दलित-बहुजन और महिलाएं और अन्याय के शिकार अन्य लोग, इस देश के किसानों, मजदूरों और अन्य मेहनतकशों के साथ मिलकर आपको, संघ-भाजपा को और आपके आका पूंजीपतियों को अवश्य पराजित करेंगे। डॉ. आंबेडकर के शब्दों में हम पानीपत के इस युद्ध में ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद का एक साथ विनाश करेंगे और आपको इस युद्ध में आपकी औकात बता देंगे।
- डॉ. रामू सिद्धार्थ

दलित दस्तक (Dalit Dastak) साल 2012 से लगातार दलित-आदिवासी (Marginalized) समाज की आवाज उठा रहा है। मासिक पत्रिका के तौर पर शुरू हुआ दलित दस्तक आज वेबसाइट, यू-ट्यूब और प्रकाशन संस्थान (दास पब्लिकेशन) के तौर पर काम कर रहा है। इसके संपादक अशोक कुमार (अशोक दास) 2006 से पत्रकारिता में हैं और तमाम मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। Bahujanbooks.com नाम से हमारी वेबसाइट भी है, जहां से बहुजन साहित्य को ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। दलित-बहुजन समाज की खबरों के लिए दलित दस्तक को सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलो करिए। हम तक खबर पहुंचाने के लिए हमें dalitdastak@gmail.com पर ई-मेल करें या 9013942612 पर व्हाट्सएप करें।

