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मा. कांशीराम की जयंती से पहले सियासत तेज, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मान्यवर कांशीराम जी शहरी आवास योजना से अवैध कब्जा हटाकर दलित समाज के लोगों को देने का आदेश दिया है। इससे कांशीराम की जयंती से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत तेज हो गई है।

नई दिल्ली/ लखनऊ। बसपा सरकार में बने मान्यवर कांशीराम जी शहरी आवास योजना से अवैध कब्जा हटाकर दलित समाज के लोगों को दिया जाएगा। इसकी घोषणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की है। इससे अब 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम की जयंती से पहले बसपा से दलित वोट छीनने की सियासत तेज हो गई है।

दरअसल साल 2007 से 2012 की बसपा सरकार में तात्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने एक शानदार फैसला लिया था। गरीबों को घर मुहैया कराने का फैसला। दरअसल यह सपना मान्यवर कांशीराम का था तो उस योजना को नाम दिया गया ‘मान्यवर कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना’।

बीएसपी सरकार द्वारा मान्यवर श्री कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना के तहत केवल दो चरण में ही डेढ़ लाख से अधिक पक्के मकान दिए गए तथा सर्वजन हिताय गरीब आवास मालिकाना हक योजना के तहत काफी परिवारों को लाभ मिला। लाखों भूमिहीन परिवारों को जमीन भी दी गई। लेकिन बाद के दिनों में या तो मान्यवर कांशीराम जी शहरी आवास योजना के तहत मिले मकान आवंटित नहीं किये गए या फिर उस पर अवैध कब्जे हो गए।

15 मार्च को मान्यवर कांशीराम की जयंती के ठीक पहले जब सपा और कांग्रेस उनकी जयंती को जोर-शोर से मनाने की तैयारी कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक बड़ा फैसला किया है। उन्होंने मान्यवर कांशीराम जी शहरी आवास योजना से अवैध कब्जा हटाकर दलित समाज के लोगों को देने का आदेश दिया है। मंगलवार 10 मार्च को मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि जितने भी कांशीराम आवास में अवैध कब्जे हैं उन्हें तत्काल खाली कराया जाए। इन्हें रंगवा-पुतवाकर आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को दिया जाए।

बता दें कि बसपा सरकार में गरीबों के लिए सस्ती दरों पर घर व फ्लैट देने के लिए कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना शुरू हुई थी। कई नगरीय निकायों में कांशीराम आवास बने हुए हैं। कई जिलों में इन आवासों पर अवैध कब्जे हो गए हैं। इन्हें ही मुख्यमंत्री ने खाली कराकर पात्रों को देने के निर्देश दिए हैं। इससे बेघर दलितों के बीच एक नई उम्मीद जगी है।

इससे पहले बीते साल बुलंदशहर में भी मायावती सरकार द्वारा बनाए गए कांशीराम आवासीय योजना के फ्लैटों को गरीबों को किफायती किराए पर देने की खबर आई थी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक,सदर तहसील के पास साल 2010 में बने 400 फ्लैट पिछले 15 सालों से खाली पड़े थे, उसको अफोर्डेबल रेंटल स्कीम के तहत सिर्फ 1000 रुपए के मासिक किराये पर गरीब परिवारों को आवंटित किये जाने की पहल की गई थी।

बता दें कि मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना तात्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती के शासन काल में द्वारा 2008-09 में मायावती के कार्यकाल में शुरू की गई एक कल्याणकारी योजना है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सस्ती दर पर पक्के घर उपलब्ध कराना था, जिसमें दलितों को प्राथमिकता दी जाती थी। इसमें 50% घर SC/ST के लिए आरक्षित किए गए थे, जबकि शेष 50% अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए होते हैं।

हालांकि जिस तरह तमाम दल इस बार मान्यवर कांशीराम जी कि विरासत पर दावा कर दलितों को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं, उसका किसको कितना लाभ मिलेगा, या फिर वो बसपा के साथ बने रहेंगे, यह 2027 के चुनावी नतीजे तय करेंगे।

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