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अंबेडकरवादी इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने क्यों भेजा है 50 करोड़ का मानहानि नोटिस, जानिये पूरा मामला

जब नीतिन गडकरी और उनकी कंपनी CIAN एग्रो जब कारवां को मानहानि का नोटिस भेज चुकी है और उसने अपनी रिपोर्ट को गलत नहीं माना है, ना ही किसी अदालत ने उस रिपोर्ट में दिये तथ्यों को गलत ठहराया है, तो आखिर उस रिपोर्ट के आधार पर वीडियो स्टोरी करने वाले मुकेश मानव के खिलाफ कार्रवाई का आधार क्या है?

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नीतीन गडकरी से जुड़ी ‘द कारवां’ की एक रिपोर्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। बीफ कारोबार में गडकरी और उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के शामिल होने संबंधी द कारवां के आरोप वाले रिपोर्ट पर द कारवां को मानहानि का नोटिस भेजने के बाद अब इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर वीडियो बनाने वाले बहुजन समाज के इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस थमाया गया है। साथ ही नागपुर में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद यह बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
इसकी सूचना खुद मुकेश मानव ने 26 मार्च को एक्स पोस्ट पर दी।

 

दरअसल यह सारा विवाद शुरू हुआ, कारवां पत्रिका की रिपोर्ट में हुए खुलासे से। रिपोर्ट में दावा किया गया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की पारिवारिक कंपनी एक गोमांस एक्सपोर्टर कंपनी से जुड़ी हुई है। पत्रिका ने अपनी जांच में पाया कि मांस व्यापार करने वाले रेंबल जो अब वेनाड फूड है, का सियान एग्रो एंड इंफ्रास्ट्रक्चर से गहरा संबंध है, जो गडकरी की कंपनी है। रिपोर्ट के अनुसार, सियान एग्रो के प्रबंध निदेशक नितिन गडकरी के पुत्र निखिल गडकरी हैं।

पत्रकार कौशल श्राफ की इस रिपोर्ट के अनुसार-
रेंबल के अधिकांश शेयरधारकों और निदेशकों को गडकरी परिवार के स्वामित्व वाली या उनके द्वारा समर्थित कंपनियों द्वारा फंड किया जाता है। इसके बदले में गो मांस के व्यापार से जुड़ी कंपनी के पूर्व और वर्तमान शेयर धारकों ने गडकरी की कंपनी सियान एग्रो में निवेश किया है। रिपोर्ट कहती है कि, गो मांस व्यापार कंपनी रेंबल को सहकारी बैंक से बड़े लोन पास हुए हैं और उस बैंक की अध्यक्ष नितिन गडकरी की पत्नी कंचन गडकरी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गो मांस व्यापार कंपनी रेंबल के प्रबंध निदेशक महेश कुमार बालकृष्ण पिल्लई पहले गडकरी की स्वामित्व वाली कंपनी सियान कैपिटल के निदेशक थे। 1 मार्च 2026 को कारवां पत्रिका में प्रकाशित यह रिपोर्ट काफी विस्तृत है।

मीडिया वेबासाइट भड़ास फॉर मीडिया ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया है कि कारवां की रिपोर्ट के बाद कंपनी ने न सिर्फ कड़ी आपत्ति जताई बल्कि CIAN एग्रो ने कारवां को लगभग 50 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजा। कंपनी का कहना है कि रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोप झूठे, भ्रामक और निराधार हैं तथा इससे कंपनी की प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा है।

कंपनी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि-
CIAN एग्रो का बीफ या किसी भी गोमांस से जुड़े कारोबार से कोई संबंध नहीं है। कंपनी के पास इस तरह के किसी व्यापार, प्रोसेसिंग या निर्यात का न तो लाइसेंस है और न ही कोई व्यावसायिक गतिविधि। कंपनी का मुख्य कारोबार सब्जियां, मसाले, खाद्य तेल और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़ा है।

खबरों के मुताबिक कंपनी ने पत्रिका से रिपोर्ट वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। मामले में आगे दीवानी और आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।

अभी गडकरी और कारवां का विवाद थमा भी नहीं था कि इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन ने इसी रिपोर्ट के आधार पर वीडियो बनाया, जिसके बाद उनको भी 50 करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस भेजकर मामला दर्ज कर लिया गया है। इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन ने इसको लेकर सवाल उठाया है और 50 करोड़ की मानहानि के पीछे की कहानी बताई है। मुकेश का आरोप है कि ऐसा इथोनॉल के मुद्दे पर गडकरी की पीआर टीम के भांडेफोड़ के कारण हुआ है। मुकेश के मुताबिक-

याद है पिछले साल गडकरी जी इथोनॉल का प्रचार कर रहे थे? उस दौरान गडकरी की PR टीम ने मुझे मेल किया और बोला कि आप वीडियो करके एथनॉल के फायदे गिनाइये आपको भी बाकी इंफ़्लुएंसर्स की तरह पैसा मिलेगा। मैंने एथनॉल पर पेड वीडियो न करके, लोगों को वीडियो के माध्यम से बता दिया कि गडकरी जी इन्फ़्लुएंसर्स को पैसे देकर इथोनॉल का प्रचार करवा रहे हैं। यह देखो मुझे भी दे रहे थे।

वो वीडियो सोशल मीडिया पर 2.5-3Cr लोगों ने देखा था। विपक्ष के नेता ने उस वीडियो को शेयर किया था। उस वीडियो के बाद गडकरी ने आजतक के मंच पर बोला था कि एथनॉल और उन्हें बदनाम करने के लिए पेड वीडियो करवाए जा रहे हैं। उनकी टीम के मेल में जो पैसे ऑफर हुए थे वो और उनकी टीम की मेरे साथ हुई चैट मेरे पास मौजूद थी। ऐसे में उस वीडियो के लिए तो मेरे ख़िलाफ़ FIR और डिफ़ैमशन करवा नहीं सकते थे। इसलिए वो मौक़ा खोज रहे थे। वो मौक़ा मिला तब जब मैंने कारवाँ की रिपोर्ट को कोट करते हुए नितिन गडकरी के परिवार का BEEF के बिज़नेस से संबंधित होने पर वीडियो बनाया।

फिलहाल इस मुद्दे में अंबेडकरवादी इन्फ्लुएंसर के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई से मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा है। हर किसी के इस मुद्दे को लेकर अपने तर्क हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब नीतिन गडकरी और उनकी कंपनी CIAN एग्रो जब कारवां को मानहानि का नोटिस भेज चुकी है और उसने अपनी रिपोर्ट को गलत नहीं माना है, ना ही किसी अदालत ने उस रिपोर्ट में दिये तथ्यों को गलत ठहराया है, तो आखिर उस रिपोर्ट के आधार पर वीडियो स्टोरी करने वाले मुकेश मानव के खिलाफ कार्रवाई का आधार क्या है?

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