दिल्ली। भारत के विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी और ओबीसी के साथ भेदभाव को रोकने को लेकर यूजीसी की नई गाईडलाइन के विवाद के बीच यूजीसी ने अब आरक्षण को लेकर एक नए नियम की घोषणा की है। इस नियम से एससी, एसटी और ओबीसी को आने वाले दिनों में यूनिवर्सिटी के भीतर जायज प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद बढ़ी है। आरक्षण को लेकर नया नियम लागू करते हुए यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालयों को अब 45 दिन या उससे अधिक की किसी भी नियुक्ति पर आरक्षण देना होगा।
इसको लेकर यूजीसी ने सभी राज्यों व विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। आरक्षण का यह नया नियम सभी केंद्रीय यूनिवर्सिटी के साथ राज्य व डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी और लॉ यूनिवर्सिटी में भी लागू होगा।
यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने आरक्षण के इस नए नियम के संबंध में सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों को पत्र लिखा है। इसमें साफ कहा गया है कि यदि कोई भी नियुक्ति 45 दिन या उससे ज्यादा के लिए है तो देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को उसमें आरक्षण के मानकों का पालन करना होगा। उन्होंने पत्र में लिखा है कि राज्य सरकार व विश्वविद्यालयों को यह सख्ती से सुनिश्चित करना होगा कि इन नियुक्तियों में आरक्षण के तहत एससी, एसटी व ओबीसी अभ्यर्थियों को लाभ मिले।
यूजीसी के इस नए नियम से आरक्षित वर्गों को अपना हक मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि इस बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि आरक्षण को लेकर तमाम नियम मौजूद होने के बावजूद एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण का कोटा पूरा नहीं होता है। ऐसे में यूजीसी के सामने इस नए नियम की घोषणा करने से आगे इसको लागू करने की भी चुनौती होगी।

वीरेन्द्र कुमार साल 2000 से पत्रकारिता में हैं। दलित दस्तक में उप संपादक हैं। उनकी रुचि शिक्षा, राजनीति और खेल जैसे विषय हैं। कैमरे में भी वीरेन्द्र की समान रुचि है और कई बार वीडियो जर्नलिस्ट के तौर पर भी सक्रिय रहते हैं।

