
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में एक बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. गोरखपुर में सपा के टिकट पर और बसपा के समर्थन से योगी आदित्यनाथ के गढ़ में उन्हें मात देने वाले वर्तमान सांसद प्रवीण निषाद भाजपा में शामिल हो गए हैं. खबर है कि वो भाजपा के टिकट पर गोरखपुर से चुनाव लड़ेंगे. अभी पिछले ही दिनों निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अखिलेश यादव के समक्ष सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होने की घोषणा की थी, लेकिन उसके दो दिन बाद ही वह भाजपा के पीछे घूमने लगे और गठबंधन से नाता तोड़ दिया.
इसके बाद संजय निषाद ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की जिसके बाद आज चार अप्रैल को संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद भाजपा में शामिल हो गए. राजनीतिक स्वार्थ का सौदा किस तरह किया गया वह जानने के लिए इस बात को समझिए. निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे और गोरखपुर से सांसद प्रवीण निषाद ने जहां भाजपा की सदस्यता ले ली है तो वहीं उनके पिता अपनी निषाद पार्टी के साथ एनडीए गठबंधन में शामिल हैं. भाजपा के यूपी प्रभारी जे.पी. नड्डा ने प्रवीण निषाद को गोरखपुर से चुनाव लड़ाने का संकेत भी दिया है. निषाद पार्टी के इस कदम से सपा-बसपा गठबंधन को झटका लगा है, जिसके टिकट और समर्थन से ही प्रवीण निषाद उपचुनाव में गोरखपुर लोकसभा सीट से योगी आदित्यनाथ के करीबी और भाजपा प्रत्याशी उपेन्द्र शुक्ला के खिलाफ 26 हजार वोटों से जीते थे.
गोरखपुर संसदीय सीट को लेकर योगी आदित्यनाथ को गठबंधन बनने के बाद ही डर सता रहा था. इस सीट से योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा जुड़ी थी, और भाजपा और योगी किसी भी कीमत पर गोरखपुर सीट को हारना नहीं चाहते थे. इसलिए उन्होंने ऐसा रास्ता चुना की गोरखपुर में सांसद भाजपा पार्टी का ही बने. इस सीट पर निषाद पार्टी इसलिए अहम है क्योंकि गोरखपुर में निषाद करीब 3.5 लाख है जो किसी भी पार्टी की हार जीत का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. संभव है कि योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल कर अपनी इज्जत बचाने में कामयाब हो जाएं लेकिन इसके लिए भाजपा और योगी आदित्यनाथ ने जो रास्ता चुनाव है, उसने साबित कर दिया है कि भाजपा सपा-बसपा गठबंधन को लेकर कितना डरी हुई है.
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राज कुमार साल 2020 से मीडिया में सक्रिय हैं। दलित दस्तक में उप संपादक पद पर हैं। देश और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

