HomeTop Newsकांशीराम जी की जयंती के पहले राजनीति गरम

कांशीराम जी की जयंती के पहले राजनीति गरम

समाजवाद पार्टी द्वारा मान्यवर कांशीराम की जयंती 15 मार्च को पीडीए दिवस मनाने की घोषणा के बाद बसपा सुप्रीमों ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बहनजी ने एक बयान जारी कर सपा को जमककर घेरा है और इसे राजनीतिक नाटकबाजी ठहराया है।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपने ऊपर से दलित विरोधी तमगे को हटाने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि बसपा सुप्रीमो बहन मायावती उन्हें दलित हितैषी होने का तमगा नहीं लेने देगी। ताजा घटनाक्रम में समाजवाद पार्टी द्वारा मान्यवर कांशीराम की जयंती 15 मार्च को पीडीए दिवस मनाने की घोषणा के बाद बसपा सुप्रीमों ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बहनजी ने एक बयान जारी कर सपा को जमककर घेरा है और इसे राजनीतिक नाटकबाजी ठहराया है। बहनजी का कहना है कि ऐसा कर सपा उपेक्षित वर्गों के वोटों के स्वार्थ में कर रही है, जैसे अन्य राजनीतिक दल करते हैं। बहनजी ने याद दिलाया कि बसपा ने मान्यवर श्री कांशीराम जी के सम्मान में यकासगंज का नाम जब कांशीराम नगर कर दिया था और इसको जिला मुख्यालय का दर्जा दिया था तो अखिलेश यादव ने इसका नाम बदल दिया था।

बहनजी ने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि जब मान्यवर श्री कांशीराम जी की ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुए जिले का नाम वापस बदल दिया था।

बहुजन समाज को समाजवादी पार्टी की घोषणाओं से सावधान रहने की अपील करते हुए बहनजी ने मान्यवार कांशीराम जी के नाम से लखनऊ में उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की याद दिलाते हुए भी अखिलेश यादव को जमकर घेरा। यही नहीं, बहनजी ने सहारनपुर में भी मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल देने का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या यही सपा का मान्यवर श्री कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान है?

 

बहनजी के इस हमले से साफ है कि वह बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम पर अपना दावा किसी के लिए भी छोड़ने के पक्ष में नहीं है। खासकर समाजवादी पार्टी के लिए जिसने अपने शासन काल में मान्यवर कांशीराम सहित तमाम बहुजन नायकों को सम्मान देने में जमकर न सिर्फ कोताही बरती बल्कि उन्हें अनदेखा किया। अपने शासनकाल में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव ने जो किया, दलित समाज का बड़ा वर्ग उसे भूलने के मूड में नहीं है।

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