लखनऊ। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपने ऊपर से दलित विरोधी तमगे को हटाने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि बसपा सुप्रीमो बहन मायावती उन्हें दलित हितैषी होने का तमगा नहीं लेने देगी। ताजा घटनाक्रम में समाजवाद पार्टी द्वारा मान्यवर कांशीराम की जयंती 15 मार्च को पीडीए दिवस मनाने की घोषणा के बाद बसपा सुप्रीमों ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
बहनजी ने एक बयान जारी कर सपा को जमककर घेरा है और इसे राजनीतिक नाटकबाजी ठहराया है। बहनजी का कहना है कि ऐसा कर सपा उपेक्षित वर्गों के वोटों के स्वार्थ में कर रही है, जैसे अन्य राजनीतिक दल करते हैं। बहनजी ने याद दिलाया कि बसपा ने मान्यवर श्री कांशीराम जी के सम्मान में यकासगंज का नाम जब कांशीराम नगर कर दिया था और इसको जिला मुख्यालय का दर्जा दिया था तो अखिलेश यादव ने इसका नाम बदल दिया था।
जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.पी.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे…
— Mayawati (@Mayawati) February 26, 2026
बहनजी ने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि जब मान्यवर श्री कांशीराम जी की ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुए जिले का नाम वापस बदल दिया था।
बहुजन समाज को समाजवादी पार्टी की घोषणाओं से सावधान रहने की अपील करते हुए बहनजी ने मान्यवार कांशीराम जी के नाम से लखनऊ में उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की याद दिलाते हुए भी अखिलेश यादव को जमकर घेरा। यही नहीं, बहनजी ने सहारनपुर में भी मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल देने का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या यही सपा का मान्यवर श्री कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान है?
‘पीडीए दिवस’ एक नयी शुरुआत है जो सांकेतिक रूप से पीडीए समाज के उन सभी महान व्यक्तियों को समर्पित है, जिन्होंने समाज के हर पीड़ित, दुखी, अपमानित के मान-सम्मान, उत्थान और बराबरी के लिए कभी भी, किसी भी वर्चस्ववादी का साथ नहीं दिया।
आज समस्त ‘पीडीए समाज’ इस निर्णय से हर्षित और…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 26, 2026
बहनजी के इस हमले से साफ है कि वह बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम पर अपना दावा किसी के लिए भी छोड़ने के पक्ष में नहीं है। खासकर समाजवादी पार्टी के लिए जिसने अपने शासन काल में मान्यवर कांशीराम सहित तमाम बहुजन नायकों को सम्मान देने में जमकर न सिर्फ कोताही बरती बल्कि उन्हें अनदेखा किया। अपने शासनकाल में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव ने जो किया, दलित समाज का बड़ा वर्ग उसे भूलने के मूड में नहीं है।

राज कुमार साल 2020 से मीडिया में सक्रिय हैं। दलित दस्तक में उप संपादक पद पर हैं। देश और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

