
नई दिल्ली। क्या आपको पता है कि आपके घर आंगन में हंसते खेलते बचपन को आज किसी की नजर लग रही है. लेकिन दुख तो इस बात का है कि आप जानकर भी अनजान बने हुए हैं. हम बात कर रहे हैं बच्चों के मोबाईल लत की. जो अंदर ही अंदर उसे चिड़चिड़ा बनाता जा रहा है. बड़ों की बातों पर ध्यान देना बंद कर दिया है. यानि मोबाईल फोन के ज्यादा और बेजा इस्तेमाल ने बच्चों को रोगी बनाना शुरू कर दिया है.
चिकित्सकों की माने तो 10 से 15 साल के उम्र के बच्चे मोबाइल एडिक्शन के चलते डिप्रेशन, एंजाइटी, अटैचमेंट डिसॉर्डर और मायोपिया जैसी बीमारी की जकड़ में आ रहे हैं. औसतन एक दिन में दो घंटे से अधिक मोबाइल के प्रयोग का सीधा असर बच्चों के दिमाग पर पड़ता है. इससे उनका शारीरिक विकास भी बाधित होता है. डॉक्टरों की माने तो बच्चे जब मोबाइल का प्रयोग करते हैं तो वे उसमें खो जाते हैं. मोबाइल के गेम्स की एक अलग ही दुनिया होती है.
अगर आप चाहते हैं कि आपका लाडला हानिकारक रेडिएशन से होने वाली खतरनाक बीमारी से बचे तो इसके लिए सबसे पहले आपको ही ध्यान देना होगा कि बच्चे को मोबाइल की लत न लगने पाए. भले ही इसके लिए कुछ सख्ती बरतनी पड़े. दरअसल, मां-बाप ही बच्चे को मोबाइल की लत लगा रहे हैं. छोटा बच्चा खाना नहीं खा रहा हो तो मोबाइल दिखाते हुए खाना खिलाना, शुरुआत यहीं से होती है. जबकि कम उम्र के बच्चों पर मोबाइल रेडिएशन का असर अधिक पड़ता है.

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