सरकार का भोंपू बन गया है मीडिया

not in my name

“Not In My Name” जून के अंतिम सप्ताह में दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के बुद्धजीवियों का जमावड़ा हुआ जिसको किसी मीडिया चैनल पर प्रसारित होते आपने नहीं देखा होगा. केवल एक चैनल जिसपर पिछले दिनों सीबीआई की रेड पड़ी थी उसने अपने प्राइम टाइम में छोटी सी झलक दिखाई. बाकी चैनल GST को लेकर कांग्रेस को कोस रहे थे, केंद्रीय मंत्रियों का GST के समर्थन में इंटरव्यू दिखा रहे थे, कुछ नीतीश कुमार की तारीफ इसलिए कर रहे थे कि उन्होंने GST और राष्ट्रपति चुनाव में अपने गठबंधन के विरोध में जाकर NDA का समर्थन किया. लेकिन आज की सबसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित इस प्रदर्शन पर भारतीय मीडिया का उपेक्षापूर्ण व्यवहार वास्तव में चिंता का विषय है.

हमारे देश के कुछ संगठन और पोलिटिकल पार्टी इस बात से अपनी नाराजगी जताती हैं कि ऐसे आयोजन केवल यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि ऐसा केवल विगत तीन सालों से ही हो रहा है. उनको आज के माहौल को अघोषित आपातकाल की संज्ञा पर भी एतराज़ है. बार-बार वे 84 के सिक्ख दंगों की याद दिलाकर ऐसे आंदोलन को गलत साबित करने की असफल चेष्टा करते हैं.

लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि आपातकाल का भी विरोध हुआ था और 84 के दंगों का भी विरोध हुआ था. और उस विरोध का निशाना केवल सत्तापक्ष था. पूरी जनता ऐसे आंदोलनों के साथ थी. पूरा समाज एक तरफ और सरकार एकतरफ. लेकिन आज की स्थिति दूसरी है. सत्तापक्ष जिससे वर्तमान उन्माद को रोकने की जिम्मेवारी है वह चुप्पी साधे हुए है और उससे जुड़े संगठन समाज में द्वेष और घृणा का उन्माद पैदा करने में जुटे हैं. सत्ता से तो कभी भी लड़ा जा सकता है और इतिहास भी गवाह है कि सत्ता के खिलाफ लड़ाई देर-सबेर जीती गई है. लेकिन समाज में जो मेरा और तेरा की लड़ाई है उससे कैसे लड़ा जाए? यह मुख्य प्रश्न है.

आज समाज का एक छोटा सा वर्ग अपनी आइडियोलॉजी दूसरों पर थोपने पर आमादा है और सरकार की चुप्पी और इससे जुड़े संगठन का सहयोग इसमें खाद्य पानी देने का काम कर रहा है. मीडिया का क्या कहना. यह तो पूरी तरह से सरकार का भोंपू बन गया है. ऐसे में एक सोशल मीडिया ही एक आशा की किरण है जो अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. हम तो बुद्ध के अनुयायी हैं. और उनके अनुसार कोई चीज स्थायी नहीं होती. आज का जो माहौल है वह भी स्थायी नहीं है. इसका भी अंत होना ही है. देखना यह है कि वह शुभ घड़ी कब आती है.

लेखक पी एन राम पासवान हैं.

दलित युवती के अपहरण के बाद 8 लोगों ने किया गैंगरेप

राजस्थान। राजस्थान के सीकर के अजीतगढ़ थाना क्षेत्र में एक दलित युवती के साथ आठ लोगों ने गैंगरेप किया जिसमें युवती ने मामला दर्ज कराया है.

वहां के थाना प्रभारी मंगलाराम ने  बताया कि 19 वर्षीय दलित युवती ने गढ़तकनेत निवासी गिरिराज वर्मा और संदीप योगी सहित आठ लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करायी है. उन्होंने बताया कि पीड़िता के परिजन की ओर से दर्ज करायी गयी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने युवती का अपहरण कर लिया और जयपुर एवं अहमदाबाद सहित कई शहरों में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. इसके बाद आरोपी उसे जयपुर के सिंधी कैम्प बस स्टैंड पर छोड़ कर फरार हो गए. जिसके बाद लड़की की हालत बेहद खराब हो गयी.

जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 376 (डी) सहित कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और उसके बाद आरोपियों की तलाश जारी है.

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक 6 जुलाई शाम को आरोपित हरि योगी और उसके साथी उसे जयपुर सिंधी कैंप छोड़कर फरार हो गये. जयपुर आने पर उसने परिजनों को घटना से अवगत कराया जिसके बाद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया. पीड़िता की मेडिकल जांच करायी गयी है.

गौरतलब है कि गढ़टकनेत निवासी युवती 29 मई को घर से खेत में जा रही थी कि अचानक उसके पास एक कार आकर रुकी. कार में सवार गढ़टकनेत निवासी गिरिराज वर्मा, संदीप योगी ने जबरन उसे कार में डालकर कर अपहरण कर ले गए. आगे जाकर उसे वहां से शाहपुरा ले गए, जहां पांच व्यक्ति और कार में सवार हो गए थे.

   

दलित लड़कियों को पुजारी ने दिया मंदिर से बाहर धक्का

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वड़ोदरा। गोधरा के पास मोहलोल गांव के मंदिर में लड़कियां गौरी-व्रत की पूजा करने के लिए जाना चाहती थीं, लेकिन दलित समुदाय से होने के चलते पुजारियों ने उन्हें मंदिर में घुसने से मना कर दिया. लड़कियों ने आरोप लगाया कि मंदिर के पुजारी ने वहां उन्हें मंदिर के बाहर भी पूजा करने से रोका क्योंकि वह दलित समाज से हैं. यह मामला 8 जुलाई को उस वक्त सामने आया, जब मंदिर के पुजारी बाबू भट्ट ने लड़की को मंदिर से बाहर धक्का दे दिया. लड़कियों के पिता गोपाल मोची ने अपनी ओर से दर्ज शिकायत में पुलिस को बताया कि व्रत की शुरुआत से ही पुजारी उन्हें मंदिर में नहीं जाने दे रहा था क्योंकि वे वाल्मीकि समुदाय से हैं.

मोची ने कहा कि पुजारी लड़कियों को बीते दो दिनों से मंदिर जाने से रोक रहा है, लेकिन लड़कियां हमें बता नहीं रही थीं. लेकिन, शनिवार को जब स्थिति ज्यादा बिगड़ तब उन्होंने हमें इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस मामले को निपटाने के लिए पुजारी से मिलने गया. लेकिन, उनके बेटे नीलेश ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है और वह चाहें तो पुलिस के पास भी जा सकते हैं.

मोची ने कहा कि नीलेश ने मुझे गालियां देते हुए कहा कि यदि लड़कियां मंदिर में प्रवेश करती हैं तो परिसर अशुद्ध हो जाएगा. मोची ने कहा कि हम लोग उस मंदिर में नहीं जाते हैं क्योंकि हमारे समुदाय का दूसरा मंदिर है, लेकिन उसके बंद होने के चलते लड़कियां उस मंदिर में चली गई थीं. जब मामला बातचीत से नहीं निपटा, तब मोची ने पुलिस में धमकी और एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज कराया. मोची ने पुजारी, उसके बेटे और एक अन्य व्यक्ति मधु मेहता के खिलाफ केस दर्ज कराया. हालांकि पुलिस अब तक किसी को अरेस्ट नहीं कर पाई.

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस: गृह त्याग कर सत्य की खोज में निकल पड़े थे तथागत बौद्ध

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9 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है. इसे गुरु पूर्णिमा और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है. बोधिसत्व राजकुमार सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में इसी दिन अपना गृह त्याग किया था और सत्य की खोज में निकल पड़े थे. 6 साल की कठिन तपस्या के बाद उनको वैसाख पूर्णिमा के दिन ज्ञान प्राप्त हुआ. 49 दिनों तक निर्वाण सुख में डूबे रहने के बाद सिद्धार्थ गौतम ने यह तय किया कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, उसे लोगों तक पहुंचाना है. लोगों को धम्म सिखाना है.

भगवान बुद्ध महाकारुणिक थे और करुणा से ओत प्रोत होकर उन्होंने निर्णय लिया कि सबसे पहले मुझे अपने पुराने साथियों को उपदेश देना है. इसके बाद वह बोधगया से निकल कर सारनाथ के ऋषिपत्तन मृगदाय वन में पहुंचे जहां उनके पांच पुराने साथी थे, जिन्होंने लगभग छह वर्षों तक उनके साथ कठोर तप किया था और उस दौरान बोधिसत्व सिद्धार्थ गौतम की सेवा करते थे.

हालांकि तथागत बुद्ध उन पांचों को नहीं भूले थे. वैसाख पूर्णिमा को ज्ञान प्राप्ति के बाद और निर्वाण सुख पूरा करने के बाद 11 दिनों में लगातार पैदल चल कर वह वाराणसी के ऋषिपत्तन मृगदाय वन में पहुंचे. और अपने पुराने पांचों साथियों को धम्म उपदेश दिया. तथागत बुद्ध का उपदेश प्राप्त करने के बाद वो पांचों शिष्य अर्हत हो गए. वहीं ऋषिपत्तन मृगदाय वन में वह बुद्ध की सेवा करने लगे. इसी वन में तथागत बुद्ध ने अपने पांचों शिष्यों के साथ अपना पहला वर्षावास किया.

यहीं पर वाराणसी के बहुत बड़े व्यापारी का पुत्र यशकुलपुत्त भी बुद्ध से प्रभावित होकर उनका शिष्य बन गया. यशकुलपुत्त के चार अन्य धनाढ्यों ने जब यह सुना कि हमारा मित्र बुद्ध के शरणागत हो गया है तो कहीं ऐसा तो नहीं है कि वहां कोई बड़े व्यवसायिक गतिविधि को अंजाम दे रहा है? यदि हम वहां नहीं गए तो हम पीछे रह जाएंगे. तब वो चारो मित्र भी वहां पहुंचें, और बुद्ध का उपदेश सुनने के बाद वे भी प्रव्रजित हो गए यानि बुद्ध के शिष्य बन गए. यहीं पर इनके पचास अन्य मित्र भी आएं और बुद्ध का उपदेश सुनने के बाद भिक्षु बन गए.

इस वर्षावास के समाप्ति पर जब बुद्ध के ये साठों शिष्य अर्हत हो गए तब बुद्ध ने उन्हें बहुजन हिताय बहुजन सुखाय का उपदेश दिया. जिस दिन तथागत बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे धम्म चक्क पवत्तन सुत्त कहते हैं. चूंकि भगवान बुद्ध गुरुओं के भी गुरु थे, इसलिए हमारे देश में इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. पूर्णिमा का दिन भगवान बुद्ध के जीवन में विशेष महत्व रखता है.

केंद्र की तरह यूपी में भी दिखावे कर रही है भाजपा सरकार: मायावती

लखनऊ. शनिवार को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती उत्तर प्रदेश इकाई के वरिष्ठ पदाधिकारियों को एक बैठक में सम्बोधित कर रहीं थीं जिसमें उन्होंने कहा कि बीजेपी एण्ड कम्पनी और आरएसएस के लोग बसपा को ही असल खतरा व चैलेन्ज मानते हैं और हमारे लोगो को गुमराह करने में लगे हैं. सब जानते है कि वह बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर को भी अपने रास्ते की रूकावट मानते थे. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही बीजेपी सरकार अपनी घोर विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए पहले गोरक्षा, आतंकवाद, कश्मीर, सीमा पर तनाव और नोटबन्दी जैसा विफल कदम उठाया और अब बिना पूरी तैयारी के ही जीएसटी जैसी जटिल नई कर व्यवस्था लागू की है.

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसी प्रकार उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार भी अब तक के अपने कार्यकाल में जनहित व विकास एवं अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था के मामले में बुरी तरह से विफल साबित होती हुई नजर आ रही है. हर तरफ असुरक्षा के भयभीत करने वाले माहौल के साथ-साथ प्रदेश में सड़क, पानी, बिजली, अस्पताल, शिक्षा आदि की आवश्यक सरकारी सेवाओें का भी काफी ज्यादा बुरा हाल बना हुआ है. उन्होंने कहा कि यह सब तब हो रहा है जब केन्द्र व प्रदेश में दोनों ही जगह बीजेपी की ऐसी सरकार है जिसने उत्तर प्रदेश के लगभग 22 करोड़ लोगों से काफी बड़े-बड़े वायदे किये हुये हैं और ऐसे हसीन व रंगीन सपने दिखाये हैं कि लोग बड़ी आसानी से इनके बहकावे में भी आ गये.

उन्होंने कहा कि केन्द्र में बीजेपी की मोदी सरकार की तरह ही प्रदेश की योगी सरकार भी जुमले व दिखावे की सरकार साबित हो रही है. हमारी पार्टी बी.एस.पी का मिशनरी मूवमेन्ट खासकर उत्तर प्रदेश में पहले की तरह ही काफी मजबूती से जड़ पकड़े हुये है, जबकि बीजेपी एण्ड कम्पनी और आर.एस.एस. केवल लोगों को गुमराह करने के लिये अनेक प्रकार की ग़लत अफवाहें फैलाने का काम करते रहते हैं.

मायावती ने आरोप लगाया कि आर.एस.एस. पिछले चुनावों के साथ-साथ अपने जातिवादी, साम्प्रदायिक व हिंसक राजनीतिक एजेण्डे को लागू करने में आजकल सरकारी धन, सुविधा व शक्ति का भी खुलकर उपयोग कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में खासकर उनकी पार्टी बसपा को निशाना बनाने का काम किया जा रहा है और दलितों को गुमराह करने का प्रयास भी किया जा रहा है लेकिन इस मंशा में वे कभी सफल नहीं होंगे.

 

Review: ‘मॉम’ जो अपने बच्चों के लिए ‘कुछ भी’ कर सकती है

 

भगवान हर जगह नहीं हो सकता था, इसलिए उसने मां बनाई. ये लाइन सुनकर वाकई मां के लिए अपार स्नेह उमड़ पड़ता है और लगता है कि उसके आंचल में जाकर बैठ जाएं. ममतामयी मां मां अगर ठान ले तो अपने बच्चों की खातिर वह कुछ भी कर गुजर सकती है. यही, रवि उदयवार की फिल्म का थीम है.

ऐसा बहुत ही कम मौकों पर होता है जब बॉलीवुड कहानी से लेकर कैरेक्टराइजेशन तक पर अपना दिमाग लगाता है. फिल्म में डायरेक्टर ने मेहनत की है. इस बात को इससे समझा जा सकता है कि कहानी काफी स्वाभाविक होते हुए भी, बांधे रखती है. श्रीदेवी की यह 300वीं फिल्म है और उन्होंने एक और शानदार फिल्म अपने नाम दर्ज कर ली है.

कहानी स्कूल टीचर श्रीदेवी की है. जो अपने पति और बेटियों के साथ शांति भरा जीवन जी रही होती है. लेकिन क्लास में एक स्टुडेंट टीचर की बेटी को गंदा क्लिप भेज देता है और टीचर उसके मोबाइल को खिड़की से बाहर फेंक देती है. बस इसके बाद उस लड़के को बात चुभ जाती है. टीचर की बड़ी बेटी उसके पति की पहली पत्नी की है तो वह खिंचाव मां-बेटी के रिश्ते में दिखता है. लेकिन वैलेंटाइंस डे पर जब वह बेटी पार्टी में जाती है तो उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि सब की जिंदगी में तूफान आ जाता है. फिर एक मां अपनी बेटी का बदला लेने के लिए निकलती है और उस हद तक गुजर जाती है जिसके बारे में पुलिस अधिकारी से लेकर बड़े-बड़े अफसर तक सोच नहीं पाते. फिल्म की कहानी पहले ही सीन के साथ इंट्रस्ट जगाने लगती है. कहानी की पृष्ठभूमि दिल्ली की है. नाइट पार्टी से लेकर यंगस्टर्स की लाइफ को इसमें केंद्र में रखा गया है. फिल्म की कहानी निर्भया कांड की यादें ताजा करा देती हैं, और रौंगटे खड़ा करने का काम करती है.

श्रीदेवी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वे एक जानदार अभिनेत्री हैं. फिल्म में अगर कुछ मौकों पर उनकी कंपकंपाती आवाज और उच्चारण को छोड़ दें और सिर्फ उनकी एक्टिंग को देखें तो वे कमाल हैं. उन्होंने टीचर और एक मां के कैरेक्टर को इतने मंजे हुए अंदाज में निभाया है कि वह दिल को छू जाता है. स्क्रीन पर उनकी मजबूत मौजूदगी देखकर अच्छा लगता है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी का रोल छोटा लेकिन काफी महत्वपूर्ण है, और उनकी यह खासियत है कि वह अपनी छाप अच्छे से छोड़ जाते हैं. वे फिल्म में दरियागंज के लोकल डिटेक्टिव बने हैं, जिसे बूंदी का रायता पसंद है. कम समय की स्क्रीन प्रेजेंस के बावजूद डीके का उनका कैरेक्टर लंबे समय दर्शकों के जेहन में रहने वाला है. अक्षय खन्ना का पुलिस अधिकारी का कैरेक्टर ठीक-ठाक है. अदनान और सजल का काम भी अच्छा है.

फिल्म विषय आधारित होने के बावजूद कहीं बोर नहीं होती है और कोई सिर दुखाऊ संदेश नहीं देती है. यहां मां का महिमामंडन नहीं है, मां यहां एक्शन में है. फिल्म को मस्ट वॉच कहा जा सकता है

फिल्म: मॉम

रेटिंगः 4 स्टार

डायरेक्टरः रवि उदयवार

कलाकारः श्रीदेवी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना, अदनान सिद्दीकी और सजल अली

मोदी और शाह के इशारे पर छापे मार रही है सीबीआईः लालू

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पटना। भ्रष्टाचार के मामले में 7 जुलाई को लालू यादव के 12 ठिकानों पर सीबीआई ने छापे मारे थे. छापों के बाद राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव मीडिया के सामने आए. लालू पर आरोप है कि 2006 में उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए BNR ग्रुप के होटलों के रखरखाव का ज़िम्मा एक प्राइवेट फ़र्म को दे दिया और बदले में ज़मीन ले ली. लालू ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के इशारे पर सीबीआई उनके परिवार को परेशान कर रही है.

लालू यादव ने बड़े ही रुखे स्वर में कहा कि इस मामले में सीबीआई का कोई दोष नहीं, बल्कि दोष तो मोदी और अमित शाह का है. RJD प्रमुख ने कहा, ‘मैं चारा घोटाले के मामले की सुनवाई के लिए रांची में था. वहीं सुबह मुझे पता चला कि सीबीआई के 17 अधिकारी मेरे घर छापे के लिए आए हैं. सीबीआई के लोगों ने ऊपर से ऑर्डर की बात कही. मैंने परिवार के लोगों से सीबीआCBI is raiding Modi and Shah’s gestureई के साथ सहयोग करने को कहा. अब सीबीआई जवाब दे कि उनको मेरे घर से क्या मिला.’

उन्होंने सवाल किया कि इस कथित घोटाले के समय तेजस्वी तो नाबालिग था, तो ऐसे में उसके खिलाफ केस कैसे दर्ज कर लिया गया. लालू यादव ने कहा, ‘मैं 31 मई 2004 में रेलमंत्री बना था, जबकि होटल का लीज 2003 में दिया गया.’ उन्होंने यह भी कहा, कि अटल जी की सरकार में लिए गए फैसले के तहत ही 2006 में टेंडर दिया गया था. इसकी कीमत 1 करोड़ 15 लाख थी और यह टेंडर अधिक बोली के हिसाब से दिया गया है. इसमें कह रहे हैं कि होटल के बदले जमीन मिल गई.

पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, सीबीआई प्रधानमंत्री के अधीन है. राज उनका है, सीबीआई उनकी है. ये हमको डीमोरलाइज करना चाहते हैं, हम डीमोरलाइज होने वाले नहीं है. इनकी घुड़की से हम डरने वाले नहीं है. 27 अगस्त को होने वाली ‘भाजपा भगाओ-देश बचाओ’ रैली फेल करने के लिए ही ये सब किया जा रहा है.

मोदी और बीजेपी सरकार के मुखर विरोधी रहे लालू ने कहा, ‘वे मुझे खत्म करना चाहते हैं. सुनो मोदी, अमित शाह, हम फांसी के फंदे पर लटक जाएंगे, लेकिन उससे पहले तुम्हारा अहंकार और बुनियाद चूर-चूर कर देंगे.’ उन्होंने पीएम मोदी और शाह पर महागठबंधन में दरार डालने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘चिल्लर और खटमल उनकी दवाई से खत्म हो जाएंगे.’ लालू ने कहा कि वो बीजेपी सरकार को उखाड़ फेकेंगे.

लालू यादव के समर्थन ममता

इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लालू यादव का समर्थन करते हुए सीबीआई की छापेमारी को ‘राजनीतिक बदले’ के तहत की गई कार्रवाई करार दिया है. ममता ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह भाजपा के नेतृत्व में केंद्र सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई के अलावा और कुछ नहीं है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों को परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. ममता ने कहा, ‘बीजेपी के पास दो काम हैं. एक, विपक्षी दलों को परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करना और दूसरा, बाहरी लोगों को लाकर उन्हें दंगे शुरू करने के काम में लगाना.’ उन्होंने कहा, ‘ साल 2019 में भाजपा की केंद्र में सत्ता से छुट्टी हो जाएगी.’

अब दिल्ली सरकार अपने खर्चे पर कराएगी प्राइवेट अस्पताल में इलाज

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नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली वालों को एक और सौगात दी है. दिल्ली वासियों के लिए शनिवार 8 जुलाई से एक राहत भरी योजना शुरू होने जा रही है. इस योजना के तहत केजरीवाल सरकार एक बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत करेगी. गौरतलब है कि सरकारी अस्पताल जो दिल्ली सरकार के अंतर्गत आते हैं उनमें मरीजों को ऑपरेशन के लिए 30 दिन से ज्यादा का इंतज़ार करना पड़ता है तो ऐसे में मरीजों का इलाज दिल्ली सरकार अपने खर्चे पर निजी अस्पताल में करवाएगी.

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज इस मेगा स्वास्थ्य योजना को हरी झंडी देंगे. इसके अतिरिक्त अब मरीज एमआरआई सीटी स्कैन और पीटी सिटी स्कैन जैसे महंगे रेडियो थैरेपी टेस्ट भी फ्री में करा पाएंगे.अपनी इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए दिल्ली सरकार ने कई मशहूर निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया है. बता दें कि, दिल्ली सरकार के अंतर्गत 30 से ज्यादा सरकारी अस्पताल आते हैं.

अब दिल्ली के सरकारी अस्पताल के डाक्टर यदि मरीजों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें कहीं और रेफर करेंगे तो मरीजों को सभी महंगे रेडियो टेस्ट निजी संस्थानों में मुफ्त कराने की सुविधा मिलेगी. इस सभी महंगी जांचों का खर्च सरकार उठाएगी, जिससे आम जनता को बड़ा फायदा होने जा रहा है

 

गणतंत्र दिवस पर 10 आसियान देशों के प्रमुख होंगे चीफ गेस्ट

नई दिल्ली। चीन को घेरने के लिए भारत ने एक्ट ईस्ट नीति को हथियार बनाया है. भारत पहली बार गणतंत्र दिवस 2018 के मौके पर 10 आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाने जा रहा है. इन आसियान देशों में ब्रूनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं.

यह पहली बार होगा कि गणतंत्र दिवस के मौके पर एक साथ इतने सारे नेता मुख्य अतिथि के तौर पर परेड समारोह के मेहमान होंगे. गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर होने वाला परेड भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाता है.

2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने लुक ईस्ट नीति को एक्ट ईस्ट नीति में तब्दील कर दिया. एनडीए सरकार का जोर था कि भारत की नीति ज्यादा गतिशील होनी चाहिए और न केवल आसियान बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत को लेकर होनी चाहिए.

सरकार का कहना था कि जापान पर जोर देते हुए आसियान देशों को एक्ट ईस्ट नीति की रीढ़ बनाया जा सकता है. गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाना एनडीए सरकार की सोच को और ज्यादा मजबूत करेगा.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत और आसियान देशों के संबंधों को 25 साल पूरे होने जा रहे हैं. 15 साल आसियान देशों के समिट लेवल के संबंधों को हो रहे हैं, जबकि पांच साल स्ट्रेटजिक रिलेशनशिप के पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर भारत में और आसियान देशों में स्थित उच्चायोग में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों की थीम ‘शेयर्ड वैल्यूज, साझा लक्ष्य (साझा मूल्य, साझा लक्ष्य)’ होगा.

हालांकि ध्यान देने वाली बात ये है कि सिंगापुर और वियतनाम भारत से क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने की बात कहते रहे हैं. चीन क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ा रहा है और जिस तरह से ड्रैगन ने विवादित दक्षिण चीन सागर मामले को हैंडल किया है उससे इलाके में भय का माहौल बना है. कम से कम 4 आसियान देशों वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और ब्रूनेई दक्षिण चीन सागर विवाद में सीधे तौर पर पार्टी हैं. सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली लूंग के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने की पूरी उम्मीद है.

पुराने स्टॉक पर नई MRP का स्टीकर नहीं लगाने पर हो सकती है जेल

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नई दिल्ली। अब अगर बचे हुए पुराने माल पर जीएसटी लागू होने के बाद नए न्यूनतम समर्थन मूल्य का स्टिकर नहीं लगाया, तो जेल की सजा समेत 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 7 जुलाई को उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने उत्पादकों को यह चेतावनी दी. पुराने स्टॉक पर संशोधित एमआरपी लिखने के संबंध में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नए नियम जारी किए हैं.

मंत्रालय ने कहा कि 1 जुलाई से पहले तैयार किए गए माल पर संशोधित एमआरपी लिखनी अनिवार्य होगी. सरकार ने पुराने स्टॉक को निकालने के लिए कंपनियों को 30 सितंबर तक का वक्त दिया है. कंपनियों से कहा गया है कि वे बचे हुए माल पर पुरानी कीमत के बराबर में ही संशोधित एमआरपी के स्टिकर लगाएं. इससे ग्राहक जीएसटी के बाद कीमतों में आए बदलावों को जान सकेंगे. पासवान ने कहा कि यदि कोई इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उस पर पहली बार 25,000 रुपये, दूसरी बार 50,000 रुपये और तीसरी बार एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके अलावा एक साल तक जेल भी हो सकती है.

मंत्रालय ने उपभोक्ताओं की शिकायतों को हल करने के लिए एक समिति बनाई है. साथ ही हेल्पलाइन की संख्या को 14 से बढ़ाकर 60 कर दिया गया है. पासवान ने कहा कि जीएसटी लागू करने को लेकर शुरुआती अड़चनें आ रही हैं. जल्द ही उनका समाधान हो जाएगा. उपभोक्ता हेल्पलाइन के जरिए 700 से अधिक सवाल प्राप्त हुए हैं और मंत्रालय ने वित्त विभाग से इसके समाधान के लिए विशेषज्ञों की मदद मांगी है.

जम्मू-कश्मीर में भी जीएसटी लागू

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श्रीनगर: भाजपा सरकार जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में जीएसटी पहले ही लागू कर चुकी है लेकिन अब लंबी जद्दोजहद के बाद शुक्रवार की आधी रात से पूरे जम्मू-कश्मीर में भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम लागू हो गया. शुक्रवार को विपक्ष के बायकाट के बावजूद जीएसटी अधिनियम 2017 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. इसके साथ ही विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया.

पूरे देश में यह कर व्यवस्था पहली जुलाई 2017 से ही लागू है. जम्मू-कश्मीर इस व्यवस्था को अपनाने वाला देश का अंतिम राज्य है, क्योंकि धारा 370 के कारण यहां कोई भी केंद्रीय कानून राज्य विधानसभा की अनुमति और बिना राष्ट्रपति के आदेश के लागू नहीं हो सकता. विधानमंडल के दोनों सदनों विधानसभा और विधानपरिषद में वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर बिल 2017 को पेश किया. विपक्ष की गैर हाजिरी में सत्तापक्ष ने इसे ध्वनिमत से पारित किया. जिसके बाद जम्मू कश्मीर भी वस्तु एंव सेवा कर अधिनियम के दायरे में शामिल हो गया.

शहीद के घर में योगी के लिए लगाए सोफा-कूलर

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गोरखपुर। श्रीनगर में शहीद सब-इंस्पेक्टर के घर पहुंचे CM योगी, प्रशासन ने पहले से सोफा-कूलर मंगा रखे थे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को गोरखपुर दौरे पर हैं. सीएम योगी कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर साहब शुक्ला के घर पहुंचे और परिवारवालों से मिलकर संवेदना जताई. योगी ने परिवार को 6 लाख का चेक भी सौंपा. हालांकि, सीएम के दौरे को लेकर प्रसाशन की तैयारियों पर फिर विवाद उठ खड़ा हुआ.

योगी आदित्यनाथ के दौरे को लेकर प्रशासन ने सीएम के स्वागत में रेप कार्पेट बिछाया था. खास सोफा भी मंगाया गया था. और तो और कूलर का भी विशेष इंतजाम किया गया. शहीद के घर सीएम के दौरे के लिए इन तैयारियों पर फिर सवाल खड़े हो गए. गोरखपुर के बेलीपार थानाक्षेत्र के मंझगांवा के रहने वाले 50 वर्षीय साहब शुक्ला 24 जून को श्रीनगर के पंथा चौक पर हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे.

शहीद साहब 16 जून को दूसरे बेटे देवाशीष की शादी के बाद वापस ड्यूटी पर लौटे थे. वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे. वह 1885 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. उनके परिवार में पत्नी शुभा शुक्ला के अलावा चार बेटे और दो बहुओं का भरा-पूरा परिवार है. सीएम योगी शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना देने गए थे.

इससे पहले मई महीने में भी बीएसएफ के शहीद हेडकॉन्स्टेबल प्रेम सागर के देवरिया स्थित घर पर योगी के दौरे से पहले प्रशासन ने घर में विंडो एसी, सोफा और कालीन लगवाया था. सीएम के जाते ही सब खोल कर ले जाया गया. इसपर विवाद हुआ था. तब योगी ने प्रसाशन ने सख्त लहजे में कहा था कि उनके दौरे पर ऐसी तैयारियां नहीं की जाए.

एशियन एथलेटिक्स में निर्मला व अनस ने जीता स्वर्ण

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भुवनेश्वर. भारतीय धावकों ने एशियन एथलेटिक्स के 22वीं चैंपियनशिप के बारिश से प्रभावित दूसरे दिन शुक्रवार को चार पदक अपने नाम किए. हरियाणा की निर्मला श्योराण ने महिलाओं की 400 मीटर की दौड़ जीत कर भारत के लिए दूसरे दिन स्वर्ण पदक जीतने की शुरुआत की. जिसके कुछ देर बाद मुहम्मद अनस ने पुरुषों की 400 मीटर में सोने का तमगा हासिल किया. राजीव अरोकिया दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें रजत पदक मिला जबकि महिला 400 मीटर में जिस्ना मैथ्यू ने कांस्य पदक हासिल किया. भारत का दबदबा यहीं पर नहीं थमा. पीयू चित्र और अजय कुमार सरोज ने क्रमश: महिलाओं और पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीते.

महिला फर्राटा धाविका दुती चंद ने 100 मीटर में कांस्य पदक हासिल किया. तेजेंदर पाल सिंह तूर ने पुरुष शॉटपुट में 19.77 मी. से रजत पदक जीता. भारत ने इस तरह शुक्रवार को चार स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य सहित कुल आठ पदक अपनी झोली में डाले. भारत कुल 15 पदकों (छह स्वर्ण, तीन रजत और छह कांस्य) के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर विराजमान है. चीन चार स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य लेकर दूसरे स्थान पर है.

जनजाति जीवन दुनिया को दिखाया तो होगी कड़ी कार्रवाई

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नई दिल्ली। संरक्षित जनजातियों का प्रचार प्रसार और उनकी जीवन शैली को अब आपत्तिजनक वीडियो फिल्मों और यूट्यूब चैनलों पर दिखाना महंगा पड़ सकता है. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने संरक्षित जारवा और अंडमान के अन्य जनजातीय समुदायों की तस्वीरों को प्रचार -प्रसार के रूप में प्रयोग करने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. बता दे कि आदिम जनजाति शैली से रहने वाले संरक्षण प्राप्त देश के कुछ जनजातियों की गिनती और उनकी बेहतरी के लिए केंद्र सरकार ने पहले भी संबंधित राज्य सरकारों को गौर देने की पहल थी.

बता दें कि लोगों द्वारा सोशल मीडिया समेत कई चैनलों पर आदिम तरीके से जनजातियों के रहन-सहन पर सवाल उठाए जाने और उन्हें विवादित करार दिए जाने के बाद यह पहली दफा है जब जनजाति आयोग ने कड़े रूप से संज्ञान लिया है. इन जनजातियों को मिला संरक्षण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में जनजातियों की जनसंख्या 28077  है जिसमें से संरक्षित जारवा जनजातियों की संख्या पांच सौ से भी कम है. जिसे संरक्षित करने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप (एबोरिजिनल जनजाति के संरक्षण) विनियमन, 1956 (पीएटी) जून 1956, को लागू किया गया है. जरावास, ऑनेज, सेंटिनेलीज़, निकोबारेसी को आदिवासी जनजाति के रूप में पहचान की गई है.

आयोग ने समुदायों को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने का भी प्रावधान इसमें शामिल किया हैं. कानूनी तौर पर फोटो लेना वर्जित है आदिवासी जनजातियों से संबंधित विज्ञापन के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देना या किसी भी प्रकार का इन संबंधित फोटो प्रयोग करना वर्जित है. 2012 के प्रावधान में किए गये परिवर्तन के हिसाब से इन क्षेत्रों में धारा 7 लागू है (जो रिज़र्व क्षेत्रों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है) इसमें किसी भी तरीके के फोटो लेना या वीडियो बनाना अधिसूचना के उल्लंघन में आता है. इन क्षेत्रों में प्रवेश करना भी दंडनीय अपराध है. इस कानून के तहत तीन साल तक कारावास का भी प्रावधान है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की धारा 3 (अ) (आर) भी यहाँ लागू होता है. जिसका पालन सभी को करना जरुरी है.

दलित पार्षद के वार्ड में काम नहीं होने दे रहे सवर्ण अधिकारी

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मुलताई। मध्यप्रदेश के मुलताई के भगतसिंह वार्ड में दलित पार्षद को अपने क्षेत्र में सवर्ण अधिकारी काम करने नहीं दे रहे हैं. पार्षद द्वारा प्रस्तावित विकास के प्रोजेक्ट को सीनियर अधिकारी पास नहीं होने दे रहे हैं. अगर प्रोजेक्ट पास भी होता है तो वह तमाम तरह के अड़ंगे डालते हैं.

दलित पार्षद उमेश झलिए ने आरोप लगाया कि दलित होने के कारण उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है, कुछ सवर्ण अधिकारी उनसे कमीशन मांगते हैं और कमीशन नहीं देने पर काम नहीं होने देते. इसलिए वह परेशान होकर इस्तीफा दे रहे हैं. हालांकि सीएमओ नहीं होने के कारण पार्षद इस्तीफा नहीं सौंप पाए.

झलिए ने कहा कि पार्षद बनने के दो वर्ष से ऊपर होने के बावजूद वार्ड में विकास कार्य के नाम पर सिर्फ एक सड़क बनी है बाकि कोई भी कार्य नहीं हो पाया है, जबकि अन्य पार्षदों तथा सवर्ण अधिकारियों के वार्डों में करोड़ों के कार्य हो गए हैं. ऐसी स्थिति में वार्डवासियों को जवाब देते नहीं बन रहा है.

वार्ड में काम नहीं होने से आहत पार्षद उमेश झलिए ने इसका कारण उनका दलित होना बताया है. उन्होंने कहा कि वे दलित समाज से हैं इसलिए उनके साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नगर पालिका में सिर्फ सभापतियों की ही चलती है तथा अधिकारी भी उन्हीं की सुनते हैं. पार्षदों की कोई नही सुनता. उन्होंने कहा कि वो वार्ड में काम कराने की गुहार लगा-लगा कर थक चुके हैं. ऐसी स्थिति में अब उनके पास सिवाय इस्तीफा देने के कोई और चारा नहीं है.

गंगा, यमुना को नहीं मिलेगा जीवित व्यक्ति का दर्जा

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गंगा, यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. नदियों को जीवित व्यक्ति की तरह मानने के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. राज्य सरकार ने नैनीताल हाई कोर्ट के 20 मार्च के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी. इस संबंध में उत्तराखंड सरकार ने दलील दी थी कि गंगा-यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के फैसले में हाईकोर्ट ने गंभीर चूक की है. इस बारे में हाईकोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका में दुबारा सुधार होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की यह याचिका अतिक्रमण और दो राज्यों में बंटवारे को लेकर दाखिल हुई थी. नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले से कई बड़े संवैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं. गंगा और यमुना सिर्फ उत्तराखंड में नहीं बल्कि कई राज्यों में बहती हैं. ऐसे में दूसरे राज्यों में इन नदियों की जिम्मेदारी उत्तराखंड को नहीं दी जा सकती. कई राज्यों में बहने वाली नदियों को लेकर कदम उठाना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है.

बता दें की राज्य सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति जताई औऱ कहा कि गंगा की सफाई का मसला उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला है इसलिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव या फिर महाधिवक्ता ऐसे मामलों में अकेले जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं इसलिए उत्तराखंड सरकार इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट गई है.

 

सरकारी गोशाला में 6 माह में 150 गायों की मौत

जयपुर। राजस्थान के उदयपुर स्थित सरकारी गौशाला में पिछले छह माह से गायों की मौते हो रही है अब जाकर गायों की मौत का मामला संज्ञान में आया है. उदयपुर नगर निगम की ओर से संचालित तितरडी गौशाला में सरकार द्वारा ध्यान ऱखा जाता है पर अब जानकारी में सामने आया है की पिछले छह माह में 150 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है.

उदयपुर नगर निगम प्रशासन की अनदेखी के चलते गायों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है. असल मे यह हालत गायों की देखभाल नहीं होने और समय पर चारा-पानी नहीं देने के कारण हुई है. गायों की मौत का सिलसिला पिछले छह माह पहले प्रारम्भ हुआ जो अब भी जारी है. यहां प्रतिदिन दो से तीन गायों की मौत हो रही है. बीमार गायों का इलाज नहीं होने की बात भी सामने आई है.

बता दें की इस गौशाला में 250 गायें रखने की क्षमता है, लेकिन यहां क्षमता से अधिक 350 गायें रखी गई है. गौशाला में गायों की देखभाल के लिए एक करोड़ रूपए प्रति माह खर्च होता है, वहीं एक दर्जन कर्मचारी तैनात है, लेकिन फिर भी सुध नहीं ले पाने के कारण गायों की मौत का सिलसिला जारी है.

उदयपुर नगर निगम के महापोर चन्द्र सिंह कोठारी का कहना है कि मृतक गायों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और फिर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने गायों की मौत पर चिंता जताते हुए कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि कहां लापरवाही रही.

गौरतलब है की वर्तमान भाजपा सरकार गायों के ऊपर लगातार राजनीति कर रही है ऐसे में सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी से गायों की मौत सरकार के ऊपर सवालिया निशान छोड़ खड़े करती है.