दलित बच्चियों को मंदिर में नहीं घुसने दिया

कोटा। दलितों के खिलाफ भेदभाव की घटनाऐँ मंदिरों में भी लगातार जारी है घटनाऐं कभी दक्षिणी भारत के राज्यों से आती हैं तो कभी उत्तरी भारत के भिन्न भिन्न राज्यों से. ताजा मामला राजस्थान के बूंदी जिले की है जहां 8 दलित बालिकाओं को मंदिर में प्रवेश नही करने दिए का जाने के मामले लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में आज सर्किट हाउस परिसर दलित समाज नेताओं ने बैठक कर दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में मंगलवार से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी हैं.

बता दें की कोटा महावीर नगर विस्तार में 10 जुलाई को भगवान शिव की पूजा अर्चना करने गई संतोषी नगर की 8 दलित बालिकाओ को मंदिर प्रबंधन से जुङे लोगों ने प्रवेश नहीं करने दिया था. दलित समाज के लोगों ने मामले में सबंधित थाने में शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है. लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कोटा पुलिस और प्रशासन द्वारा अभी तक दोषी लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है.

वहां के स्थानीय नेता पूर्व जिलाप्रमुख राकेश बोयत के साथ दलित समाज के नेताओं की बैठक की गयी जिसके दौरान जिलेभर के दलित समाज के लोगों द्वारा कलक्टर को संभागीय आयुक्त के नाम ज्ञापन दिये जाने की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ अगर कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे. उनका बड़ा सवाल यही है कि आखिर दलितों के खिलाफ इस तरह के भेदभाव की घटनाऐँ कब बंद होंगी.

 

‘दलितों के लिए देश नहीं, ख़ुद लड़ना होगा उन्हें’

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क्या जातीय हिंसा और भेदभाव से देश और इसे भुगतने वाले दलित, दोनों एक बराबर प्रभावित होते हैं?

क्या देश के सभी नागरिकों के साथ एक समान व्यवहार करने के मामले में भारत 70 सालों में कुछ बेहतर हो पाया है या फिर हालात पहले जैसे ही हैं?

तर्क-वितर्क करने वाले बुद्धिजीवियों के लिए राष्ट्र अपने-आप में एक मिथक हो सकता है और यह आम लोगों की धारणा भी हो सकती है. यह एक वर्गीकृत संरचना से बिल्कुल कम नहीं है और ऊपरी तौर पर यह एक छद्म निष्पक्ष तस्वीर पेश करती है. इसलिए किसी ख़ास परिस्थिति में इसकी कार्रवाई पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकती है.

ऊना की घटना

वाकई में दलित ऐसा ही महसूस करते हैं इसलिए ऊना की घटना देश की चेतना को नहीं बदल सकती. बदलावों के लिए दलितों और उनके दर्द से जुड़ाव होना जरूरी होता है. जाति व्यवस्था ख़त्म करने पर राजनीतिक इच्छाशक्ति और उत्साह का अभाव दिखता है क्योंकि कथित ऊंची जातियों की कई पीढ़ियों ने इस व्यवस्था से फ़ायदा उठाया है. दलित अगर बराबर के नागरिक बन गए तो उन्हें क्या फ़ायदा होगा? गुजरात के ऊना में गाय मारने के आरोप में कथित गोरक्षकों ने दलितों की घंटों पिटाई की थी. इस घटना को एक साल पूरे हो चुके है. उस वक्त ऊना की घटना के बाद बहस के लिए बुलाई गए संसद के विशेष सत्र में बड़े पैमाने पर सीटें खाली रह गई थीं. ये तब था जब मौजूदा एनडीए के पास यूपीए की तुलना में अधिक सांसद हैं और दलितों की बात संसद में रखने के लिए दलित ख़ुद वहां मौजूद हैं.

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भारत में छुआछूत

ये सभी दलित सांसद ये बताने में गर्व जताते रहे कि उनकी सरकार ने इस घटना के बाद पीड़ितों को कितनी मेडिकल सहायता और अन्य तरह की मदद मुहैया कराईं. यूपीए के समय में दलितों पर ज़्यादा जघन्य अपराध हुए, इस बात को साबित करने के लिए उनके पास अपने ही सबूत हैं. दुख की बात तो है कि कोई ये सवाल नहीं पूछता कि अभी तक भारत में छुआछूत इतने बड़े पैमाने पर क्यों हैं? ऊना के बाद हर कोई गोरक्षकों के अवैध तरीकों के बारे में बात कर रहा था. प्रधानमंत्री ने भी अपने पीड़ा भरे शब्द अगले दिन व्यक्त किए. उन्हें पता था कि गाय की राजनीति उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा वोट दिला सकती है. बीजेपी की राज्य सरकार इसके बाद ऐसे कड़े कानून ले आई जिससे गायों की सुरक्षा कम और गोरक्षकों की सुरक्षा ज़्यादा हो.

असल तस्वीर

ऊना की घटना ने हर किसी को परेशान किया क्योंकि सबने टीवी और मोबाइल फोन पर दलितों के साथ होने वाली क्रूरता देखी. लेकिन गैर सरकारी संगठन नवसर्जन ट्रस्ट के साल 2010 के सर्वे में एक भयावह तस्वीर सामने लाई है. यह उसी गुजरात की तस्वीर है जहां ऊना की घटना हुई है. अगर सवाल उठता है गुजरात ही क्यों? तो इसलिए क्योंकि इसे एक मॉडल स्टेट की तरह पेश किया गया है. गांवों में रहने वाले 90.2 फ़ीसदी दलित हिंदू होते हुए भी मंदिरों में प्रवेश नहीं कर सकते. 64 फ़ीसदी पंचायत अपने निर्वाचित दलित सदस्यों के साथ भेदभाव करते हैं. 54 फ़ीसदी राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में दलित बच्चों के लिए मिडडे मिल के वक्त अलग से लाइन लगाई जाती है.

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राजनीतिक परिदृश्य

यह 1569 गावों और 98,000 लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट कुछ ठोस तथ्य हैं. नवसर्जन ट्रस्ट को सौराष्ट्र के इलाके में उन 1500 से ज्यादा बच्चों के बारे में पता चला जिन्हें उनके शिक्षक, स्कूल के शौचालय साफ करने के लिए अलग से छांट कर रखे थे. ये मेहतर (साफ-सफाई करने वाले) के बच्चे थे. ये कुछ ऐसी सच्चाई हैं जो हमें टीवी या मोबाइल स्क्रीन पर नहीं दिखती है लेकिन होती हर रोज़ हैं. हालांकि ऊना की घटना ने राजनीतिक परिदृश्य में बहुत असर डाला है. दलितों के बीच साल 1980 में गुजरात के गांवों में काम करते हुए मैंने पाया था कि दलितों को मतदान केंद्र तक अमूमन नहीं पहुंचने दिया जाता था.

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ऊना के बाद राजनीति

मुझे वहां दलितों के ऊपर शारीरिक हिंसा के साथ उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी देखने को मिली. और ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वो ऊंची जातियों के वोट नहीं डालने के फरमान को नहीं मानने की हिम्मत करते थे. यह अभी भी आनंद ज़िले के धर्माज जैसे गांवों में ऐसा ही होता है.

यह गांव प्रभावशाली गैर प्रवासी भारतीयों और बैंक में सौ करोड़ से अधिक राशि जमा करने के लिए जाना जाता है. ऊना और सहारनपुर की घटना के बाद राजनीतिक दल इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जो दलित वोट बैंक पहले उप जातियों में विभाजित था, वो अब दलित पहचान के नाम पर एकजुट हो जाएगा.

एनडीए की छवि को नुक़सान

सभी राजनीतिक दल यह बात बखूबी समझते हैं कि दलित भले ही ‘अछूत’ हो सकते हैं, लेकिन उनके वोट तो काम के हैं. 16.6 फ़ीसदी दलित वोट के बिना कोई भी राजनीतिक दल बहुमत नहीं पा सकता है. इसलिए एनडीए ने पहली बार बौद्ध भिक्षुओं को दलितों को समझाने-बुझाने के काम पर लगाया है. ऊना की घटना के बाद एनडीए की छवि को नुक़सान पहुंचा है. गुजरात में दलितों की आबादी महज 7.01 फ़ीसदी है. वो अकेले अपने दम पर किसी भी बड़े दल की किस्मत बदलने की स्थिति में नहीं है. लेकिन सत्तारूढ़ बीजेपी गुजरात को लेकर आशंकित है क्योंकि यह कभी उसकी प्रयोगशाला रही है. हाल में ग़ैर-दलित वोट में बिखराव देखा गया है.

संविधान से अधिक…

हिंदू राष्ट्र का विचार लोगों की भावनाओं को छूने में कामयाब होता नहीं दिख रहा. जाट, पटेल और मराठा जैसी जो कथित ऊंची जातियां हैं, वो अपने आरक्षण को लेकर अधिक जागरूक दिख रहे हैं न कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर बलि का बकरा बनने को लेकर. प्रभावशाली जातियों में भी जो गरीब लोग हैं, उन्हें इस बात का एहसास है कि ऊंची जाति की पहचान भी उनकी आर्थिक स्थिति नहीं सुधार पाई है. यह राजनीति है. दलित जो कि अपमान झेल रहे हैं, वो सरकार कौन बना रहा है इससे अधिक इस बात को लेकर फिक्रमंद है कि जाति और भेदभाव ख़त्म हो. अब सवाल यह है कि देश में संविधान से अधिक जाति की सत्ता क्यों है?

छुआछूत मुक्त समाज? क्या भारत साल 2047 तक, जब वो अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे होने का जश्न मना रहा होगा, तब क्या छूआछूत मुक्त समाज बन पाएगा? दलितों के उभार को ऐतिहासिक तौर पर हमेशा नुकसान पहुंचाया जाता रहा है. इसी सिलसिले में कभी-कभी ऊना जैसी घटना के बाद गुस्सा भी फूट पड़ता है. यह द्वंद्व बना हुआ है कि उन्हें अपमान सहते हुए भी बहुसंख्यकों से जुड़कर रहना होगा या फिर राजनीति से अलग हो र बराबरी के लिए सामाजिक संघर्ष करना बेहतर होगा? इतिहास की दीवारों पर यह बहुत साफ-साफ लिखा हुआ है. अमरीका के अफ्रीकी मूल के लोगों का संघर्ष का अनुभव भी सामने हैं. सिर्फ़ सामाजिक संघर्ष ही बराबरी और सम्मान दे सकता है. दलितों को अपने अधिकारों की लड़ाई ख़ुद लड़नी पड़ेगी. यह लड़ाई पूरा देश नहीं लड़ने वाला.

मार्टिन मैकवान का यह लेख बीबीसी हिंदी से साभार लिया हुआ है. (ये लेखक के निजी विचार है)

असली गोरक्षकों को पहचान पत्र देगी हरियाणा सरकार

हरियाणा। देश में गौ रक्षा को लेकर हत्या, मारपीट आम हो चुकी है जिसमें कई युवकों की जान जा चुकी है और सांप्रदायिक घटनाऐँ भी आये दिन होती रहती हैं. देशभर में गोरक्षकों को लेकर जारी विवाद के बीच हरियाणा की खट्टर सरकार ने बड़ा फैसला किया है.

खबरों के अनुसार हरियाणा की सरकार अब गोरक्षकों को एक खास पहचान पत्र देगी जिससे गोरक्षकों की पहचान आसानी से हो सकेगी. इससे नकली गोरक्षकों को पहचानने में भी आसानी होगी. हरियाणा सरकार जल्द ही पहचान पत्र बांटना शुरू करेगी.

बता दें कि रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में कहा था कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा और राजनीति ठीक नहीं है. पीएम ने राज्य सरकारों को नकली गोरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. पीएम ने इशारा किया था कि कुछ लोग गोरक्षा के नाम पर अपना बदला ले रहे हैं और अपराध कर रहे हैं.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नागपुर शहर में बीफ ले जाने के शक में एक शख्स की पिटाई का मामला सामने आया था. घटना भारसिंगी गांव की है जहां भीड ने एक व्यक्ति की बीफ ले जाने के शक पर बुरी तरह पिटाई कर दी. इसके अलावा भी हाल के दिनों में गोरक्षकों द्वारा बीफ के नाम पर लोगों को निशाना बनाने की कई घटना सामने आई है. कुछ में तो लोगों की जान भी जा चुकी है तो कुछ समुदायों को जानबूझकर बार बार निशाना बनाया जाता रहा है.

 

सवर्णों ने तोड़े दलितों के शौचालय, बाहर जाने पर दी मारपीट की धमकी

छतरपुर। एक ओर जहां जातिवाद को खत्म करने की बात की जा रही है. वहीं दूसरी तरफ आज भी कई जगहों पर ये मतभेद जारी है. ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बराखेरा गांव से आया है. गांव में कुछ सवर्णों ने दलितों के शौचालय तोड़ दिए हैं. इतना ही दलितों को बाहर शौच के लिए जाने से भी रोका जा रहा है.

दलित प्रजापति समुदाय की महिलाओं का कहना है कि ऊंची जाति के लोग शौच के लिए बाहर जाने पर हमें पीटने की धमकी दे रहे हैं. वो लोग ना तो हमें हमारे शौचालय में जाने दे रहे हैं और ना ही खुले में. ऐसी स्थिति में हम करें तो करें क्या?

हालत यह है कि ये लोग शौच जाने के लिए घर के पास मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक बराखेरा गांव में सरपंच भी पटेल समुदाय का है. मामले पर जिला पंचायत के सीईओ हर्ष दीक्षित का कहना है कि ‘एक टीम का गठन कर स्थिति को जांचने के लिए भेजा जा चुका है. रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दी जा सकती है.’

अमरनाथ यात्रियों की बस खाई में गिरी, बचाव को आए कश्मीरी मुस्लिम

श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा को गये श्रद्धालुओं पर इस साल आफत आन पड़ी है अभी बीते सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर आतंकियों द्वारा हमले में 8 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी. अब इसके बाद रविवार को जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में अमरनाथ यात्रियों को लेकर जा रही बस जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से फिसलकर खाई में गिर गई, जिससे 17 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई और 29 लोग घायल हो गए.

एक सप्ताह में हुई इन दोनों घटनाओं में एक घटना यह रही कि जब बस हादसे का शिकार हुई तो मदद के लिए घटनास्थल पर सैकड़ों मुस्लिम सबसे पहले पहुंचे, जिन्होंने लगभग एक दर्जन तीर्थयात्रियों का जीवन बचाया.

भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की भावना दिखाते हुए एक गैर सरकारी संगठन जिसमें ज्यादातर मुस्लिम स्वयंसेवक थे, घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे. रामबन-बनिहाल क्षेत्र में ये एनजीओ सड़क हादसे के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आता है जिन्होंने कई मौके पर पंहुच कर अब तक 50 से अधिक जानें बचाई हैं.

इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीर्थयात्रियों की मौत होने पर दुख प्रकट किया और मृतकों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है. जेकेएसआरटीसी ने सड़क दुर्घटना की जांच कराने का आदेश दिया है. बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा को जाने वाले यात्रियों के साथ दो दहलाने वाली घटनाऐँ हो चुकीं हैं.

पहले घटना हमले के रुप में रही जिसमें 10 जुलाई को आतंकवादियों ने एक बस पर किया था जिसमें आठ तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी और अब दूसरी घटना सड़क हादसा रही जिसमें 17 यात्रियों की मौत हो गयी.

 

‘दोनों ओर से दलित उम्मीदवार होना, बाबासाहेब और बसपा की देन’

mayawati

नई दिल्ली। देश में नए राष्ट्रपति चुनने के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. देश की संसद समेत सभी विधानसभा में वोटिंग की जा रही है. मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार के बीच है. लेकिन वोटिंग शुरू होते ही बसपा सुप्रीमो मायावती का एक बड़ा बयान आया है.

मायावती ने अपने बयान में कहा कि यह पहली बार है कि सत्ता और विपक्ष की ओर से दलित उम्मीदवार मैदान में उतारा गया है. जीत या हार किसी की भी हो लेकिन राष्ट्रपति दलित ही होगा. मायावती ने कहा कि यह देन बाबा साहेब अंबेडकर की है, माननीय कांशीराम जी की है और बहुजन समाज पार्टी की है.

बता दें कि मायावती की पार्टी बसपा के लोकसभा में कोई सांसद नहीं हैं, वहीं यूपी में बसपा के 19 विधायक हैं. हालांकि बसपा की ओर से राज्यसभा में 6 सासंद हैं.

गौरतलब है कि एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद मूलत: रूप से उत्तर प्रदेश से ही आते हैं, रामनाथ कोविंद दलित जाति से हैं. कोविंद के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विपक्ष ने भी दलित कार्ड चलते हुए पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था.

राष्ट्रपति चुनाव आज, मतदान शुरू

Meira Kumar vs Ramnath Kovind

नई दिल्ली। देश के अगले राष्ट्रपति के लिए वोटिंग आज शुरू हो गई है. राष्ट्रपति चुनाव के लिए मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार के बीच है. वोटों की गिनती 20 जुलाई को दिल्ली में होगी, जहां सभी बैलेट बॉक्स लाए जाएंगे. इसी दिन नतीजों का भी ऐलान होगा. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो जाएगा.

आज संसद भवन और राज्य विधानसभाओं में सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे. इससे पहले बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने समर्थन जुटाने के मकसद से राज्यों के दौरे किए. इस चुनाव में दिलचस्प बात यह है कि बिहार में महागठबंधन में साथ जेडीयू और आरजेडी ने अलग-अलग उम्मीदवारों को वोट करने का फैसला किया है. जेडीयू जहां बिहार के राज्यपाल रहे रामनाथ कोविंद का समर्थन कर रही है वहीं आरजेडी ने मीरा कुमार के समर्थन का फ़ैसला किया है.

समाजवादी पार्टी भी इस मामले में बंटी नज़र आ रही है. समाजवादी पार्टी सांसद विपक्ष के साझा उम्मीदवार के समर्थन वाली बैठक में तो मौजूद थे लेकिन कुछ दिन पहले शिवपाल यादव ने साफ कर दिया कि उनका वोट रामनाथ कोविंद को जाएगा. मुलायम भी कोविंद को ही समर्थन कर सकते हैं.

राष्ट्रपति चुनाव में कुल 4896 वोटर हैं, जिसमें 776 सांसद हैं जबकि 4120 विधायक हैं. खास बात यह है कि इस बार मध्यप्रदेश के बीजेपी विधायक नरोत्तम मिश्रा को आयोग्य ठहराए जाने की वजह से अब कुल वोट 4895 ही रह गया है. राष्ट्रपति चुनाव में कुल पड़ने वाले वोटों की संख्या दस लाख 98 हज़ार 903 है. एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को 63 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है.

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यह पहली बार है कि दोनों ही उम्मीदवार दलित वर्ग के हैं, उन्होंने कहा कि यह बीएसपी की जीत है. बाबा साहेब अंबेडकर और कांशीराम की जीत है. उन्होंने कहा कि यह हमारी मूवमेंट के लिए जीत है. उन्होंने कहा कि कोई भी जीते राष्ट्रपति दलित होगा.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- मॉनसून सत्र जीएसटी की वर्षा के कारण नई उमंग से भरा होगा. देशवासियों की नजर इस सत्र पर है. उन्होंने उम्मीद जताई की सभी राजनीतिक दल और सांसद देशहित में फैसले लेंगे.

राष्ट्र निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर

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जैश-ए-मोहम्मद के निशाने पर मोदी और योगी

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लखनऊ। यूपी विधानसभा में विस्फोटक पदार्थ मिलने के बाद जैश-ए-मोहम्मद के रिकार्डेड टेप से खलबली मच गई है. पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक नए रिकार्डेड टेप के जरिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी दी गई है. अब इस टेप की जांच यूपी एटीएस के साथ एनआईए कर रही है. वहीं उत्तर प्रदेश विधान भवन में विस्फोटक मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ पर आतंकवादी खतरे की आशंका के तहत सुरक्षा और कड़ी की गई है.

जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के इस टेप में प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बारूद के बजाए दवा और केमिकल से हमला करने का जिक्र है. धमकी भरा यह टेप कश्मीर बेस कैम्प से जैश-ए-मोहम्मद ने जारी किया है. जहां उत्तर प्रदेश एटीएस इस टेप को फर्जी बता रही है, वहीं आईबी से लेकर देश की बड़ी सुरक्षा एजेंसियां इस धमकी को गम्भीरता से लेते हुए जांच कर रही है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी संदेश और इसके 36 घंटे के अंदर उत्तर प्रदेश विधान भवन में विस्फोटक मिलने से इस बात की आशंका गहरा जाती है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैश के निशाने पर हैं. बीते दो हफ्ते में प्रधानमंत्री मोदी तथा योगी आदित्यनाथ को यह दूसरी धमकी है.

भारत की संसद पर 2001 में आतंकी हमले का मास्टरमाइंड मसूद अजहर अपने धमकी संदेश में साफ कह रहा है कि अब हमले के लिए पारंपरिक तरीकों जैसे बंदूक, ग्रेनेड और गोलियों को छोड़कर नए और घरेलू तरीकों को अपनाना चाहिए. मसूद अजहर ने हमले के नए तरीकों के लिए खासतौर पर नए उपकरणों जैसे व्हीकल, बिजली, पेट्रोल, फर्टिलाइजर और खासतौर पर ‘दवाइयों’ को इस्तेमाल करने की सलाह दी थी. यूपी विधानसभा में कल मिला विस्फोटक पीईटीएन का दवाइयों के प्रयोग में इस्तेमाल होता है.

प्रो कबड्डी लीग की इनामी राशि बढ़कर 3 करोड़ हुई

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नई दिल्ली। कबड्डी टूर्नामेंट के आयोजन के बाद इस खेल के दर्शको में जबरदस्त इजाफा हुआ है. बता दें की 28 जुलाई से हैदराबाद में शुरू हो रहे प्रो कबड्डी लीग के पांचवें सीजन की इनामी राशि में जबर्दस्त बढ़ोतरी की गई है. इस सीजन के लिए कुल इनामी राशि 8 करोड़ रुपये कर दी गई है. 2016 में आयोजित हुए चौथे सीजन की इनामी राशि 2 करोड़ रुपये थी. ये लीग 28 जुलाई से शुरू होकर 28 अक्टूबर (करीब 13 हफ्ते) तक चलेगी.

प्रो कबड्डी के पांचवें सीजन में 12 टीमें 138 मैचों में हिस्सा लेंगी और तीन करोड़ की खिताबी राशि जीतने की कोशिश करेंगी. इस टूर्नामेंट की उपविजेता टीम को 1.80 करोड़ रुपये जबकि तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 1.20 करोड़ रुपये मिलेंगे.

टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मिलने वाली राशि में भी इस बार बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिसे अतीत में कबड्डी के स्टार अनूप कुमार और मनजीत छिल्लर जैसे खिलाड़ी जीत चुके हैं. इस बार टूर्नामेंट के बेस्ट खिलाड़ी को इनाम में 15 लाख रुपये दिए जाएंगे.

प्रो कबड्डी के पांचवें सीजन के उद्घाटन मुकाबले में 28 जुलाई को हैदराबाद में तेलुगु टाइटंस की टीम इस लीग में डेब्यू कर रही टीम तमिल थलाइवाज से भिड़ेगी. फैंस इस टूर्नामेंट के मैचों का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और लाइव स्ट्रीमिंग हॉटस्टार पर देख सकते हैं जिसमें मजेदार रोमांच होने का पूरा अंदाजा है.

दीपिका पादुकोण को इस तस्वीर के लिए किया गया ट्रोल

Dipika Padukone मुंबई। ऐक्ट्रेस दीपिका पादुकोण एक बार फिर ट्रोलर्स के निशाने पर उस वक्त आ गईं जब उनकी एक तस्वीर को लेकर लोगों ने उनके खानपान को लेकर मजे लेने शुरू कर दिए. ट्रोलर्स को दीपिका की यह तस्वीर पसंद नहीं आई तो उन्होंने ट्रोल करना शुरू कर दिया. इससे पहले हाल ही दीपिका ने एक मैगजीन के लिए हॉट फोटोशूट कराया था, जिसमें उनके बोल्ड अंदाज को लेकर उन्हें निशाने पर लिया गया था. डिंपल ब्यूटी दीपिका पादुकोण को यह कहकर ट्रोल किया गया कि वह बहुत दुबली और कमजोर दिखती हैं. दरअसल, दीपिका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपना ब्लैक आउटफिट में फोटो शेयर किया था. यह वैनिटी फेयर यूके के लिए कराए गए एक फोटोशूट का फोटो है. इस तस्वीर पर कुछ ने लिखा कि वह काफी दुबली दिख रही हैं. हालांकि, दीपिका ने फिलहाल इस पर कोई जवाब नहीं दिया है. किसी ने लिखा कि मुझे यह तस्वीर पसंद नहीं है. हद तो तब हो गई जब एक शख्स ने यह तक लिख दिया कि,’खाना नहीं है घर में…’ और यह कहकर उसने कुछ खाने की सलाह तक दे डाली. इतना ही नहीं, दीपिको का कुछ ने कुपोषण तो किसी ने टाइफाइड का मरीज कहकर भी मजाक उड़ाया. दीपिका का यह फोटो वायरल हो रहा है और इसपर 5 लाख से भी अधिक कॉमेंट आ चुके हैं. हालांकि, दीपिका के फैन्स अपनी चहेती ऐक्ट्रेस का बचाव भी कर रहे हैं और ट्रोलर्स को मुंहतोड़ जवाब देने की भी कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि दीपिका पादुकोण ‘पद्मावती’ में रानी पद्मावती का कैरेक्टर प्ले कर रही हैं. इस मूवी में दीपिका के साथ शाहिद कपूर भी स्क्रीन शेयर करेंगे. दीपिका के इस्टांग्राम अकाउंट पर 18 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं और वह सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव रहती हैं.

13 साल में महिला अफसर के 25 तबादले, PM से गुहार

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भोपाल। मध्य प्रदेश में एक महिला अधिकारी से बड़ा भेदभाव सामने आया है. उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुये कहा है उनके 13 वर्ष में 25 तबादले किए गए हैं. हैरानी की बात यह है कि इस अफसर पर कोई घपले-घोटाले का आरोप नहीं है. बता दें की यह वही महिला अफसर हैं, जिन्होंने टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में वर्ष 2011 में 50 लाख का पुरस्कार जीतकर अमिताभ बच्चन को भी अपना कायल बना दिया था. राजगढ़ जिले के ब्यावरा में तहसीलदार अमिता सिंह तोमर का तबादला अब सीधी जिले में कर दिया गया है. शिवराज सरकार के इस आदेश से वह काफी दुखी हैं. उन्होंने अपनी परेशानी एक ट्वीट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बताई है. उन्होंने ट्वीट किया, ’13 साल की नौकरी के दौरान यह मेरा 25वां तबादला है. जब भी मेरा तबादला किया गया, हर बार मुझे 500 किलोमीटर दूर ही भेजा गया.’ अमिता सिंह ने कहा कि तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे और उन्होंने ग्वालियर-चंबल संभाग में किसी भी जगह पर ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था, मगर उनका तबादला सीधी जिले में कर दिया गया है. उन्होंने अपनी परेशानी बताने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा है और प्रधानमंत्री को भी ट्वीट किया है. अब देखते हैं कि प्रधानमंत्री इस बारे में संज्ञान लेते हैं या नहीं.

BSNL लाया आपके लिए खास अॉफर, मिलेगी ये सर्विस

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ तालमेल बिठाते हुए भारत संचार निगम लि. (BSNL) ने शुक्रवार को देश भर में अत्याधुनिक ऑप्टिकल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (एनजी-ओटीएन) लॉन्च किया, जो बेहद हाई-स्पीड की ब्रांडबैंड सेवा देगी.

संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने एनजी-ओटीएन को लॉन्च करते हुए देश में आधुनिक तकनीक की हाई-स्पीड वाली ब्रॉडबैंड सेवा मुहैया कराने के लिए BSNL की सराहना की.

सिन्हा ने कहा कि सरकार ने साल 2018 के दिसंबर तक 2,50,000 ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड और 1,00,000 गांवों में ऑप्टिकल फाइबर ब्राडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. सिन्हा ने कहा कि NG-OTN देश के 100 शहरों में उपलब्ध है और इस प्रोजेक्ट पर 330 करोड़ रुपए की लागत आई है.

इस मौके पर बीएसएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि कंपनी के कुल 11.5 करोड़ ग्राहक हैं और एनजी-ओटीएन उन्हें बेहद हाई-स्पीड की ब्रॉडबैंड सेवा देगी. उन्होंने कहा कि बीएसएनएल और फाइबर होम की साझेदारी से देश को ऐसी कई परियोजनाएं मिलेगी.

ऊंची जाति से होना चाहिए उपराष्ट्रपति उम्मीदवार: RSS

नई दिल्ली। अब उपराष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी अपनी जुबानबाजी चालू कर दी है. आरएसएस प्रमुख उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए एनडीए की तरफ से दक्षिण भारत के ‘ऊंची जाति’ के उम्मीदवार को खड़ा करने के पक्ष में है. समाचार एजेंसी आईएएनएस के सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस ने यह सुझाव इसलिए दिया है क्योंकि सत्ताधारी एनडीए ने दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है, जो उत्तर भारत से हैं.

बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि आरएसएस की पंसद महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.विद्यासागर राव हैं, जो इस पद के लिए दौड़ में सबसे आगे निकल सकते हैं, क्योंकि उनके पास सार्वजनिक जीवन का बड़ा अनुभव है. तेलंगाना से बीजेपी के वरिष्ठ नेता राव अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री, केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री रह चुके हैं.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर चर्चा के लिए आरएसएस के दो वरिष्ठ नेताओं भैय्याजी जोशी और कृष्ण गोपाल से मुलाकात की. उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 5 अगस्त को होना है. सूत्रों के अनुसार, तीनों नेताओं ने दिल्ली में आरएसएस के मुख्यालय केशव कुंज में मुलाकात की. इनके बीच डेढ़ घंटे से ज्यादा वक्त तक चर्चा हुई.

भाभी ने दिया बेटी को जन्म तो देवर ने दोस्त के साथ मिलकर हॉकी से पीटा

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पटियाला। पंजाब के पटियाला शहर में एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शख्स अपनी भाभी को दोस्त के साथ मिलकर हॉकी से पीट रहा है. उस महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने एक बेटी को जन्म दिया और ससुराल वालों की दहेज की मांग पूरी नहीं की.

मामला पटियाला के डिविजन नंबर-2 थाना क्षेत्र के नाभा गेट का है. जहां गुरुवार को एक महिला के देवर ने अपने दोस्त के साथ मिलकर अपनी भाभी की हॉकी से जमकर पिटाई की. इस घटना में महिला के पति भी शामिल था. इसी दौरान किसी ने अपने मोबाइल से पिटाई का वीडियो बना लिया.

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला का देवर उसे बेरहमी के साथ पीट रहा है. वो और उसका दोस्त लगातार हॉकी से महिला की पिटाई कर रहा है. महिला मदद के लिए चिल्ला रही है. रहम की भीख मांग रही है. मगर उन दोनों ने उस पर कोई रहन नहीं दिखाया.

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आ गई. पीड़ित महिला के परिवार ने पुलिस को शिकायत भी की. पुलिस के मुताबिक महिला की पिटाई करने वाले आरोपी देवर और उसके साथियों को मुकदमा दर्ज करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है. जबकि महिला का अभी फरार है.

पीड़ित महिला के परिजनों ने बताया कि इस हमले में महिला के हाथ की अंगुलियां और घुटने की हड्डियां टूट गई हैं. उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

परिजनों के मुताबिक पीड़ित महिला का विवाह दो वर्ष पहले हुआ था. तभी से उसके ससुराल वाले उससे दहेज की मांग करते थे. इसी मांग के चलते महिला को अक्सर पीटा जाता था. दरअसल, उसका पति विदेश जाना चाहता था. जिसके लिए उन्हें एक बड़ी रकम की ज़रूरत थी.

लिहाजा महिला पति और ससुराल वाले इसी लिए हमेशा दहेज की मांग करते थे. परेशान होकर महिला ने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा भी दर्ज कराया था. इस संबंध में महिला आला पुलिस अधिकारियों से कई बार शिकायत भी की थी. इस बात से भी उसके ससुराल वाले खासे नाराज थे. गुरुवार को मौका देखकर उन्होंने महिला को पीट डाला.

गाय के गोबर और गौमूत्र को ऑनलाइन बेचेगा RSS

नई दिल्ली। भारत में गाय के उपर राजनीति लगातार जारी है. वर्तमान सरकारें इसे लगातार वोट बैंक से भी जोड़ती रही हैं. अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक ऑनलाइन पोर्टल खोलने की तैयारी में लगा है जिसके जरिए वह मोदी कुर्ता गोमूत्र, गाय के गोबर की खाद, गाय के गोबर का साबुन ऑनलाइन बेचेगा.

जानकारी के अनुसार बताया गया है की यह सब प्रॉडक्ट आरएसएस अपनी लैब में तैयार करता है. आरएसएस की लैब मथुरा के फरह में दीन दयाल धाम में है.

आरएसएस के एक प्रवक्ता ने बताया कि हम लैब में किसी भी तरह के किसी कैमिकल का इस्तेमाल नहीं करते हैं. हमारे यहां 50 गाय हैं. हम रोजाना गोमूत्र और उनका गोबर इकट्ठा करते हैं और जरूरत के अनुसार प्रॉडक्ट बनाने में उनका इस्तेमाल किया जाता है. दीन दयाल धाम के डायरेक्टर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर गोमूत्र से बने प्रॉडक्ट्स की बहुत मांग है. आरएसएस कैंपों का आयोजन कर रही है. इन प्रॉडक्ट्स को ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया जाएगा

 टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक दीन दयाल धाम के डिप्टी सेक्रेटरी मनीष गुप्ता ने बताया कि कामधेनू उत्पादों को जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा. इन प्रॉडक्ट्स में कैंसर, डायबिटीज की दवा, फेस पैक और साबुन शामिल हैं. इसके अलावा मोदी कुर्ता भी जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध होगा. अभी तक यह प्रॉडक्ट्स दीन दयाल धाम और आरएसएस के कैंपों में ही उपलब्ध हैं जिसके बाद अब गाय के मूत को आनलाईन बेचने की तैयारी की जा रही है.

   

साध्वी देवा की धमकी, हज यात्रा पर हिंदू सिखाएंगे सबक

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नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा पर हमले के बाद देश के मुस्लिमों के खिलाफ विवादस्पाद बयान देने में एक औऱ नया नाम जुड़ गया है. देवा इंडिया फाऊंडेशन की निर्देशक तथा हिंदुवादी साध्वी देवा ठाकुर ने अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले को लेकर विवादित बयान दिया है. जिसमें उन्होंने कहा है कि महादेव के भक्तों के साथ बुरा तो बहुत हुआ लेकिन याद रखना हज यात्रा भी निकलेगी तब हिन्दुओं बदला जरुर लेंगे.

साध्वी ने अपने इसी फेसबुक पोस्ट में आगे कहा है कि मेरे हिंदू शेरों अपना गुस्सा पाल कर रखो. बता दें कि साध्वी देवा ठाकुर हमेशा अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहती हैं. पिछले दिनों इन्होंने बयान दिया था कि देश में मुस्लिमों के अधिकार हिन्दुओं से कम होने चाहिए और बुर्के को बैन कर देना चाहिए, क्योंकि बुर्के की आड़ में बहुत अपराध होते हैं.

साध्वी अपने फेसबुक पेज पर खुलेआम मुसलमानों के लिए आपत्तिजनक बातें लिखती रहती हैं. सोमवार 10  जुलाई को अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की घटना के बाद साध्वी ने कई फेसबुक पोस्ट लिखे जिनमें उन्होंने साफ तौर पर एक धर्म विशेष के लोगों के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया है. साध्वी देवा ने सिर्फ भड़काऊ पोस्ट ही नहीं लिखे बल्कि ऐसे ही वीडियो भी अपलोड किये हैं.

साध्वी ने अपने फेसबुक लाइव वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा कि कट्टर हिंदू और मर्द इस वीडियो को देखें, नामर्द और मुसलमान दूर रहें. साध्वी अपने इस वीडियो में आजम खान और ओवैसी को गालियां भी दे रही हैं. हज पर जाने वाले मुसलमानों को चेतावनी देते हुए साध्वी कह रही हैं कि तुम लोग हज पर दिल्ली-मुंबई होकर ही जाओगे ना, देखना उस दिन ये शिवभक्त और गौभक्त कैसा बदला लेंगे तुमसे. गौरतलब है कि इस तरह की बयानबाजी से देश में हिदूं मुस्लिम के बीच विवाद के साथ सांप्रदायिक माहौल भी बिगड़ता है जिसके लिए सरकार को इस तरह के लोगो पर बड़ी कारवाई करनी चाहिए.