‘आम आदमी’ एवं ‘दलित’ की नई राजनीतिक परिभाषा

नई दिल्ली। राजनीति समाज में भ्रम फैलाने वाला सर्वोच्च, संगठित एवं सर्वाधिक शक्तिशाली संस्थान है. और भ्रम फैलाने का सबसे अच्छा माध्यम यह है कि शब्दों के परंपरागत-संस्कारगत अर्थों को भ्रष्ट करके उनकी परिभाषायें बदल दी जायें. इस राजनीतिक औजार की सबसे अधिक जरूरत लोकतांत्रिक प्रणाली वाली व्यवस्था में पड़ती है, और भारत में फिलहाल यही प्रणाली काम कर रही है.

अभी राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव में दो शब्द काफी चर्चा में रहे-दलित एवं आम आदमी. परंपरागत अर्थ में ‘दलित’ का अर्थ है- जिसको दला गया, यानी कि दबाया गया, सताया गया, तिरस्कृत किया गया. यह ‘पद-दलित’ शब्द से लिया गया है, जो इसके अर्थ को भारत की जातिगत सामाजिक संरचना के साथ व्यक्त करता है-पैरों तले कुचलना. यह एक सामाजिक अवहेलना है, जिसे हमारे संविधान में ‘सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग’ कहा गया.

‘आम आदमी’ शब्द ‘विशिष्ट व्यक्ति’ शब्द के विपरीत है. विशिष्ट, यानी कि किसी भी कारण से बना समाज का प्रभावशाली वर्ग, जिसे अंग्रेजी में ‘इलीट’ कहते हैं. ये संख्या में थोड़े से होते हैं. ‘आम आदमी’ यानी कि इस वर्ग के अतिरिक्त शेष बचे हुए लोगों का समूह. इसे आप देश की ‘भीड़’ कह सकते हैं. उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे गोपालकृष्ण गांधी ने इस पद की योग्यता के रूप में स्वयं को ‘आम आदमी’ घोषित किया. जाहिर है कि उनकी जुबान पर यह शब्द उन्हें खड़ा करने वाले राजनीतिक दलों ने धरा होगा. अन्यथा स्वयं के सम्पूर्ण जीवन को ‘सत्य का प्रयोग’ कहने वाले महात्मा गांधी के पोते के ओठों पर इतना असत्य शब्द नहीं आया होता.

आइये, हम इस ‘आम आदमी’ की आमीयत का थोड़ा जायजा लेते हैं: राष्ट्रपिता के पोते के रूप में एक अत्यंत श्रद्धेय परिवार में जन्म लेने के केवल 22 साल बाद ही गोपालकृष्ण गांधी इस देश की सबसे ऊंची और अभिजात्य नौकरी में आ गये, जिसे आई.ए.एस. के नाम से जाना जाता है. इससे पहले उन्होंने पढ़ाई भी की थी, तो उस समय के सबसे बड़े इलीट कॉलेज दिल्ली के सेंट स्टीफन से और वह भी अंग्रेजी साहित्य में. कलेक्टरी के बाद अनेक पदों पर रहने के साथ-साथ वे पहले उपराष्ट्रपति के तथा बाद में राष्ट्रपति के सचिव रहे. लंदन में नौकरी की. दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त रहे. नार्वे और आइसलैंड में राजदूत रहे. और सन् 2003 में इस सबसे रौबदार और सुविधाजनक नौकरी से रिटायर होने के बाद पश्चिम बंगाल में राज्यपाल बना दिये गये. वैसे यह जानना भी ठीक ही होगा कि इनके दादा के पिता राजकोट के राजा के दीवान थे.तो यह है भारत के आम आदमी की तस्वीर.

अब आइये देखते हैं-हमारे देश के दलित का चेहरा, लेकिन राजनीतिक आइने में. राष्ट्रपति पद के लिए खड़ी श्रीमती मीरा कुमार ने स्वयं को ‘दलित की बेटी’ बताकर मतदाताओं से अन्तरात्मा की आवाज़ पर मतदान की अपील की. लेकिन क्या सचमुच उनकी अपनी आत्मा के अंदर से अपने लिए निकला शब्द ‘दलित’ सही है? जाति के आधार पर उत्तर होगा-‘हां’, लेकिन ‘सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आधार पर’?

बात शुरू करते हैं तीन पीढ़ी पहले से. मीरा कुमार के दादा न केवल ब्रिटिश सेना में ही थे, बल्कि बहुत अच्छी अंग्रेजी भी बोलते थे. बाद में नौकरी छोड़कर शिवनारायणी संप्रदाय के महंत बनकर उन्होंने समाज में अपने लिए एक सम्मानजनक स्थान बनाया. पिता जगजीवन राम मीरा कुमार के जन्म से आठ साल पहले ही बिहार विधान परिषद के सदस्य नामांकित कर दिये गये थे. देश की आजादी से एक साल पहले जब अंतरिम सरकार बनी थी, उस समय जिन बारह सदस्यों को इसमें शामिल किया गया था, उनमें से एक बाबू जगजीवन राम भी थे. इसके बाद वे लगातार सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे.

मीरा कुमार इसी परिवार में पली-पढ़ी हैं. उनकी पढ़ाई देश के प्रसिद्ध जयपुर के महारानी गायत्री देवी गल्र्स पब्लिक स्कूल के साथ-साथ दिल्ली के मिरांडा कॉलेज जैसे संस्थानों में हुई. जब नौकरी की बात आई, तो वे शामिल हुईं-देश की अत्यंत प्रतिष्ठित एवं अभिजात्य नौकरी-भारतीय विदेश सेवा में. बाद में मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष के उनके रूप सर्वज्ञात हैं.

तो ये हैं हमारे देश के ‘आम आदमी’ एवं ‘दलित’ की वर्तमान राजनीतिक परिभाषा. निःसंदेह रूप से उपराष्ट्रपति एवं राष्ट्रपति के रूप में इनकी योग्यता पर तनिक भी उंगली नहीं उठाई जा सकती. लेकिन राजनीतिक आवश्यकताओं के समक्ष योग्यतायें कैसे निरस्त होकर असहाय की मुद्रा में खड़ी हो जाती हैं, यह इसका प्रमाण है. जाहिर है कि राजनीति जो न कराये, वही थोड़ा.

(डॉ. विजय अग्रवाल का यह लेख NDTV हिंदी से साभार लिया गया है. लेख में कोई बदलाव नहीं किया गया है)

डॉ. एपीजे कलाम की पुण्यतिथि आज, रामेश्वरम में मोदी करेंगे मेमोरियल का उद्घघाटन

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नई दिल्ली। देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री गुरुवार को तमिलनाडु पहुंचे. यहां से पीएम रामेश्वरम जाएंगे जहां वो डॉ. कलाम के समाधि स्थल पर बने मेमोरियल का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा पीएम यहां अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे.

पीएमओ द्वारा जारी एक बयान के अनुसार प्रधानमंत्री डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए और बनाए गए मेमोरियल पर तिरंगा फहराने के अलावा डॉ. कलाम की प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे. इसके बाद पीएम मोदी, कलाम संदेश यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह एक प्रदर्शनी की बस है जो देश के अलग-अलग राज्यों में यात्रा करते हुए 15 अक्टूबर को डॉ. कलाम की जयंती पर दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचेगी.

डॉ. कलाम को समर्पित यह मेमोरियल उसी जगह पर बनाया गया है जहां डॉ. कलाम को दफन किया गया था. सिर्फ 9 महीने में तैयार हुए इस मेमोरियल को बनाने में 20 करोड़ रुपए का खर्च आया है और इसे राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट की तर्ज पर बनाया गया है.

मेमोरियल को बनाने के लिए चेटीनाड लकड़ी का उपयोग हुआ है. गेट पर कलाम की 7 फीट ऊंची प्रतिमा लगी है साथ ही चारों कोनों में मेमोरियल हॉल बनाए गए हैं जिनमें कलाम के राष्ट्रपति रहने के दौरान उनका भाषण, वैज्ञानिक के रूप में उनके काम के अलावा शिलॉन्ग में उनके आखिरी भाषण को दर्शाया गया है.

डा. एपीजे कलाम के बारे में जानिए कुछ रोचक बातेंः- 

  • उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था. उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था.
  • वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में देश में जाने जाते थे.
  • बच्चों से बेहद प्यार करने वाले ए पी जे अब्दुल कलाम ने बहुत सारी किताबें भी लिखी थीं.
  • भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे.
  • स्वभाव से बेहद ही हंसमुख और कविताओं के शौकीन 1962 में ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ में आये थे.
  • डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ.
  • 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था जिसके बाद ही भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया.

योगीराज में दलित नाबालिग से गैंगरेप

जालौन। योगी की मुख्यमंत्री बनने के बाद से उत्तर प्रदेश में रेप, हत्या के मामले में तेजी से बढ़ोत्तरी आई है जिसमें दलित युवतियों के साथ रेप की घटनाओं में कमी होने का नाम नहीं ले रही ताजा मामला जालौन का है जहां एक दलित नाबालिग को घर से बहला फुसलाकर दो युवक खेत पर ले गए और वहां बारी बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया गया. घर पहुंचकर किशोरी ने परिजनों को आपबीती बताई. परिजनों ने युवक के परिजनों को शिकायत की तो वह मारपीट पर उतारू हो गए. किशोरी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने किशोरी को डॉक्टरी के जिला अस्पताल भेजा है.

बता दें की जालौन नगर के एक मोहल्ले की निवासी 15 वर्षीय दलित किशोरी मंगलवार शाम घर पर अकेली थी. इस दौरान मोहल्ले का राहुल (18) पुत्र गंगाराम वर्मा और पवन (19) किशोरी के घर पहुंच गए. किशोरी को नगर में घूमाने की बात कहकर राहुुल किशोरी को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया. उसके साथ पवन भी था. बातों में उलझाकर दोनों युवक किशोरी को नगर के बाहर एक खेत में ले गये. वहां किशोरी के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया. दोनों के चंगुल से छूटने के बाद रोते हुए किशोरी घर पहुंची और माता पिता को आप बीती सुनाई.

किशोरी के माता पिता शिकायत लेकर राहुल के घर पहुंचे. आरोप है कि राहुल के परिजनों ने किशोरी के परिजनों के साथ गाली गलौच और मारपीट कर दी. इसके बाद किशोरी का पिता कोतवाली पहुंचा और दोनों युवकों के खिलाफ तहरीर दी. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है. कोतवाल महाराज सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर किशोरी को चिकित्सीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है जिसके बाद उन युवको पर मुकदमा कायम किया जायेगा

                                           

दलितों के बाल काटने से नाई का इंकार

लखीमपुर खीरी। बदलते भारत के दौर में बदलाव प्रत्येक जगह देखने को मिला रहा है पर नहीं बदलती तो वह दलितों की स्थिति, यह जस की तस नजर आती है इसका ताजा उदहारण उत्तर प्रदेश का है जहां दलितों के साथ छुआछुत आम है.

मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव ककरहा निवासी वाल्मीकि समाज के एक व्यक्ति के दाढ़ी-बाल बनाने से एक नाई द्वारा इनकार किए जाने का मामला सामने आया है. पीड़ित ने जातिसूचक गालियां देकर धमकाने का भी नाई पर आरोप लगाया है. मामले में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो पीड़ित ने डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है. ककरहा गांव निवासी संतोष कुमार वाल्मीकि ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में बताया है कि 17 जुलाई को वह अपनी बहन के घर जा रहा था. रास्ते में पसगवां थाना के गांव मछेछा में बस से उतरकर सेविंग कराने के लिए नाई की दुकान पर बैठ गया. आरोप है कि नाई ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए सेविंग करने से इंकार कर दिया. विरोध करने पर पिटाई की धमकी भी दी.

इसके बाद संतोष ने मोहम्मदपुर ताजपुर चौकी पुलिस को तहरीर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. फिर पसगवां के प्रभारी निरीक्षक को तहरीर दी गई. कोई कार्रवाई न होते देख पीड़ित ने डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है.

 

कल इस्तीफा देने के बाद, आज फिर मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार

पटना। बुधवार रात भर चले सियासी ड्रामे के बाद नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसके साथ ही नीतीश कुमार 6ठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं. उनके अलावा भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण के साथ ही राज्य में एक बार फिर से भाजपा-जदयू की सरकार काबिज हो गई है.

शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नीतीश कुमार और सुशील मोदी को बधाई दी है. पीएम ने लिखा है कि नीतीश कुमार जी और सुशील मोदी जी को बधाई, बिहार के विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करें.

इससे पहले नीतीश कुमार ने बुधवार रात बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा देते हुए राजनीतिक भूचाल पैदा कर दिया. उनके इस्तीफे के कुछ ही घंटों में राज्य के अंदर नई सरकार बनाने की कवायदें पूरी हो गईं. इसके कहा जा रहा है कि नीतीश के मंत्री मंडल में दोनों ही दलों के 13-13 मंत्री होंगे और सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री बनेंगे. सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार शनिवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे.

जदयू और भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर कुल 132 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है. विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है और इस लिहाज से यह गठबंधन बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है. बिहार में लालू कुनबे पर भ्रष्टाचार के आरोपों और सीबीआई-ईडी के जांच ने राज्य में सरकार को कमजोर करने का काम किया. 7 जुलाई से शुरू हुआ यह घटनाक्रम 26 जुलाई की रात नीतीश के इस्तीफे पर आकर खत्म हुआ और इसी के साथ राज्य में महागठबंधन टूट गया. जहां इसके पीछे भ्रष्टाचार एक बड़ा कारण था वहीं लालू यादव का पुत्र मोह भी इस सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हुआ. 7 जुलाई को लालू प्रसाद के घर पर सीबीआई का छापा पड़ा था. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी आरोपी बनाए गए. भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का झंडा उठाए नीतीश ने तेजस्वी से कहा कि जनता में सफाई दें. लालू प्रसाद और तेजस्वी जिद पर अड़े थे. बार-बार कहा कि इस्तीफा नहीं देंगे. बुधवार को नीतीश कुमार ने फैसला किया कि अब ऐसा नहीं चल सकता. जदयू विधायकों की बैठक बुलाई गई. फिर शाम सवा छह बजे नीतीश कुमार अकेले ही राजभवन पहुंचे. प्रभारी राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी एक दिन पहले ही पटना पहुंचे थे. नीतीश ने उनको इस्तीफा सौंप दिया, जिसे मंजूर भी कर लिया गया. बाहर निकले नीतीश ने कहा कि मैं सब चीजों को झेलता रहा, लेकिन अब संभव नहीं था.

अफगानिस्तान में तालिबान का हमला, 26 सैनिकों की मौत

काबुल। अफगानिस्तान के दक्षिणी कंधार प्रांत स्थित सैन्य ठिकाने पर आतंकी संगठन तालिबान ने हमला कर दिया, जिसमें कम से कम 26 अफगान सैनिकों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा घायल हो गए. इसके अलावा आठ सैनिक अभी तक लापता हैं.

तालिबान आतंकियों ने यह हमला मंगलवार रात किया. टोलो न्यूज के मुताबिक जब तालिबान आतंकियों ने दक्षिणी कंधार प्रांत के खाक्रिज जिले में स्थित सैन्य ठिकाने पर हमला बोला, उस समय वहां पर 82 सैनिक मौजूद थे. इसके अलावा बाकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं.

वहीं, अफगानिस्तान के उत्तरी बघलान के बघलान-ए-मरकजी जिले में सैन्य अभियान में कम से कम 50 तालिबान आतंकी मारे गए हैं. बुधवार को स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने 20 से ज्यादा गावों से तालिबान का सफाया कर दिया. मंगलवार रात तक इस सैन्य अभियान में 50 से ज्यादा तालिबान आतंकी मार गिराए गए हैं.

इसके अलावा करीब 70 आतंकी घायल हो गए हैं. बघलान दौरे के समय जनरल शोयायोर गुल और उप रक्षामंत्री ने कहा कि सैन्य कार्रवाई में भारी नुकसान होने के बाद तालिबान आतंकी बघलान-ए-मरकजी जिले से भाग रहे हैं. यह अभियान आठ दिन पहले उस समय शुरू किया गया था, जब तालिबान आतंकियों ने जिले में हमला करके कब्जा कर लिया था.

सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष के दौरान आम नागरिकों के घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. इस अभियान के दौरान अफगानिस्तान वायुसेना ने भी तालिबान आतंकियों को निशाना बनाया. बताया जा रहा है कि हवाई हमले से तालिबान को ज्यादा नुकसान हुआ. वहीं, इस संघर्ष के चलते एक हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए.

लोकसभा कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर फंसे बीजेपी सांसद

दिल्ली। लोकसभा के नियमो का उल्लघंन करके बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी के लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर मुश्किल में फंस गए हैं. उन पर आरोप लगे हैं कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान जब विपक्षी सदस्य हंगामा कर रहे थे तो उन्होंने अपने फोन से उसका वीडियो बनाया. विपक्षी दलों की ओर से 24 जुलाई को अनुराग ठाकुर की इस हरकत का कड़ा विरोध किया गया, जबकि आप सांसद भगवंत मान ने मामले को लेकर स्पीकर को एक पत्र लिखकर विरोध जताया गया. हालांकि अनुराग ठाकुर की ओर से पूरे मामले पर माफी मांग ली गयी है पर उनकी इस गलती को नोटिस कर लिया लिया गया है.

हालांकि विपक्ष अनुराग ठाकुर के खिलाफ भगवंत मान की तरह कार्रवाई करने की मांग पर अड़ा है. मामले में कांग्रेसी सांसद मल्लिकार्जुल खड़गे ने जानना चाहा कि आखिर क्यों नहीं अनुराग ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. मल्लिकार्जुन खडगे ने स्पीकर सुमित्रा महाजन से कहा कि सांसद भगवंत मान के खिलाफ ऐसे ही एक आरोप में कार्रवाई करते हुए संसद के दो सत्रों के लिए निलंबित कर दिया था. मान पर संसद के बाहर का वीडियो शूट करने का आरोप था, जबकि अनुराग ठाकुर पर संसद के भीतरी भाग का वीडियो लेने का आरोप है. ऐसे में क्यों नहीं उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

मामले में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि मेरे नोटिस में ऐसा कुछ नहीं आया है. लेकिन फिर भी अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो वो निंदनीय है. मामले को लेकर सुमित्रा महाजन ने अनुराग ठाकुर से कहा कि अगर आपने ऐसा कुछ किया है, तो आपको सदन से माफी मांगनी चाहिए. स्पीकर के ऐसा कहने पर अनुराग ठाकुर ने एक बयान देते हुए अपनी हरकत पर माफी मांगी.

विपक्ष के हंगामे और शोर-शराबे के बीच अनुराग ठाकुर ने कहा कि अगर किसी को मेरे मोबाइल से आपत्ति है, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं. स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अनुराग ठाकुर को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसी हरकत भविष्य में दोहरायी गयी, तो सख्त कार्रवाई की जाएंगी और जो भी संसद की गरिमा को ठेस पंहुचायेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी.

INDvsSL: टेस्ट के पहले दिन चमके धवन आैर पुजारा

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गॉल। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक भारत 399/3 का स्कोर बना लिया था. स्टंप्स के समय चेतेश्वर पुजारा (144*) और अजिंक्य रहाणे (39*) क्रीज़ पर मौजूद थे. शिखर धवन ने 190 रनों कि शानदार पारी खेली.

श्रीलंका के खिलाफ गॉल में आज से खेले जा रहे तीन मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट मैच के पहले दिन टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, वहीँ ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया. हार्दिक पांड्या भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में खेलने वाले 289वें खिलाडी बने.

टॉस जीतकर बल्लेबाज़ी करने उतरी टीम इंडिया की पारी की शुरुआत काफी धीमी रही, जहां दोनों ही ओपनर शिखर धवन और अभिनव मुकुंद ने अपनी टीम को संभली हुई शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए 45 गेंदों में 27 रनों की महत्वपूर्ण साझीदारी निभाई, जिसके बाद अभिनव मुकुंद (12) को तेज़ गेंदबाज़ नुवान प्रदीप ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरे चेतेश्वर पुजारा अच्छी लय में नज़र आए. उन्होंने शिखर धवन के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 88 रनों की अटूट साझेदारी निभाई, वहीँ शिखर धवन ने भी अपनी फॉर्म को जारी रखते हुए शानदार अर्धशतक बनाया.

लंच तक समाचार लिखे जाने तक भारत का स्कोर 27 ओवरों में 115/1 है. शिखर धवन (64*) और चेतेश्वर पुजारा (37*) दोनों ही बल्लेबाज़ नाबाद वापस पवेलियन लौटे. भोजनकाल के बाद भारतीय बल्लेबाजों की कोशिश बड़े से बड़े स्कोर तक पहुंचने की होगी.

लंच के बाद भारतीय टीम ने अपने 115/1 के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया, वहीँ श्रीलंकाई टीम के गेंदबाज़ विकेट के लिए तरसते नज़र आए. मैच के पहले दिन का दूसरा सत्र पूरी तरह भारत के नाम रहा, जहां शिखर धवन और चेतेश्वर पुजारा ने श्रीलंका के गेंदबाजों को जमकर परेशान किया. बाएं हाथ के बल्लेबाज़ शिखर धवन ने अपने टेस्ट करियर का पांचवां शतक पूरा किया. दूसरी तरफ चेतेश्वर पुजारा भी अपने 12वें शतक की ओर अग्रसर हैं. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 253 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई, जो भारत की तरफ से दूसरे विकेट के लिए श्रीलंका के खिलाफ सबसे बड़ी साझेदारी है. सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन (190) काफी तेज़ी के साथ अपने दोहरे शतक की तरफ बढ़ रहे थे कि चायकाल से कुछ देर पहले उनको नुवान प्रदीप ने एंजेलो मैथ्यूज के हाथों की शोभा बनाया, जिसके बाद भारत को दूसरा झटका लगा.

श्रीलंका की तरफ से नुवान प्रदीप को 2 विकेट हासिल हुए. चायकाल तक रिपोर्ट लिखे जाने तक भारतीय टीम का स्कोर 55 ओवरों में 282/2 था. चेतेश्वर पुजारा (75*) और कप्तान विराट कोहली (1*) बनाकर क्रीज़ पर मौजूद थे.

चायकाल के बाद टीम इंडिया ने अपने स्कोर 282/2 से आगे खेलना शुरू किया. चेतेश्वर पुजारा के शानदार नाबाद शतक की बदौलत विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने अपनी स्थिति काफी मजबूत करली है. पहले दिन का खेल समाप्त होने तक भारत का स्कोर 399/3 था. चेतेश्वर पुजारा (144*) और अजिंक्य रहाणे (39*) क्रीज़ पर मौजूद थे. चेतेश्वर पुजारा ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को जमकर परेशान करते हुए अपने विकेट के लिए तरसा दिया.

टेस्ट क्रिकेट में भारत द्वारा बनाया गया यह स्कोर एक दिन में अपनी घरेलू धरती से बाहर बनाया गया भारत का सबसे बड़ा स्कोर है. पुजारा और रहाणे के बीच चौथे विकेट के लिए तक 113* नाबाद साझेदारी हो चुकी है. इससे पहले विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, जिसके बाद भारत कि तरफ से सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन (190) ने आतिशी पारी खेल अपनी टीम के विशाल स्कोर कि नींव रखी. चेतेश्वर पुजारा के साथ शिखर धवन ने दूसरे विकेट के लिए मिलकर 253 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई. खतरनाक दिख रहे शिखर धवन को नुवान प्रदीप ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद बल्लेबाज़ी करने उतरे कप्तान विराट कोहली (3) ने ख़ासा निराश किया और उनको भी तेज़ गेंदबाज़ प्रदीप ने वापस पवेलियन की राह दिखाई. इससे पहले नुवान प्रदीप ने अभिनव मुकुंद (12) को भी आउट कर मेहमान टीम को पहला झटका दिया था.

इसके बाद दाएं हाथ के बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने अपने टेस्ट करियर का 12वां शतक जमाया और वापस नाबाद पवेलियन लौटे. श्रीलंका की तरफ से तेज़ गेंदबाज़ नुवान प्रदीप को 3 विकेट हासिल हुए. उनके अलावा श्रीलंका का कोई भी गेंदबाज़ भारतीय बल्लेबाजों को आउट नहीं कर पाया. कल भारतीय बल्लेबाजों की कोशिश बड़ा से बड़ा स्कोर खड़ा करने की होगी.

गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई अल्फाबेट बोर्ड में शामिल

वाशिंगटन। गूगल के लिए शानदार काम करने वाले भारत में जन्मे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को एक और उपलब्धि प्राप्त हो गयी है. पिचाई को अल्फाबेट के निदेशक मंडल में भी नियुक्त किया गया है. गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट ने यह जानकारी दी है. कैलीफोर्निया स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी अल्फाबेट के सीईओ लेरी पेज ने सोमवार को एक बयान में कहा कि गूगल के सीईओ के तौर पर पिचाई शानदार काम कर रहे हैं. उनके प्रयासों से गूगल को मजबूत रफ्तार और भागीदारी मिल रही है.

उनके साथ कई इनोवेटिव प्रोडक्ट भी विकसित किये जा रहे हैं. उनके साथ काम करना अच्छा लग रहा है. हमें खुशी है कि वह अल्फाबेट के बोर्ड में शामिल हो रहे हैं. चेन्नई के रहने वाले पिचाई आइआईटी खड़गपुर के छात्र रहे हैं और गूगल में लंबे अरसे से जुड़े हैं. उन्हें दो साल पहले गूगल के सीईओ के तौर पर नियुक्त किया गया था. अल्फाबेट के बोर्ड में पिचाई की नियुक्ति 19 जुलाई से प्रभावी हुई है. 13 सदस्यीय बोर्ड में चार और अन्य अधिकारियों को भी शामिल किया गया है.

गूगल के सीईओ के तौर पर वह कंपनी के प्रोडक्ट डवलपमेंट और टेक्नोलॉजी स्ट्रैटजी के अलावा गूगल के रोजमर्रा के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं. उन्होंने गूगल में 2004 में नौकरी शुरू की थी. उन्होंने कंपनी के कई कंज्यूमर प्रोडक्ट विकसित करने में अहम भूमिका निभाई. आज ये उत्पाद दुनियाभर में लोग इस्तेमाल कर रहे हैं जिसके बाद गूगल सीईओ की चौतरफा तारीफें जारी हैं.

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षामित्र

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक पद पर समायोजित शिक्षामित्र आज सड़क पर उतर आएं. पूरे यूपी में शिक्षामित्रों के भरोसे संचालित स्कूल बंद रहे. सभी जिलों में शिक्षामित्रों ने जुलूस निकाल कर अपना विरोध दर्ज किया. उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद में शिक्षामित्रों के सामने भुखमरी का संकट आ जाएगा. देवरिया जनपद मुख्यालय के सुभाष चौक पर शिक्षा मित्रों ने जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है. यही हाल संतकबीर नगर और गोरखपुर में भी है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद बुधवार को गोरखपुर में शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. यहां कलेक्‍ट्रेट से होते हुए शिक्षा मित्र गोरखनाथ मंदिर के मुख्य गेट पर पहुंच गए. वहां पर उन्‍होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. हालांकि पुलिस ने मंदिर के मुख्य द्वार को बंद कर गोरखनाथ ओवरब्रिज पर प्रदर्शनकारियों को रोकने का किया, लेकिन चकमा देकर दूसरे रास्ते से प्रदर्शनकारी शिक्षामित्र गोरखनाथ मंदिर के मुख्‍य गेट तक पहुंच गए. मंदिर के मुख्‍य गेट के सामने सभी शिक्षामित्र बैठ गए हैं और नारेबाजी कर रहे हैं. मंदिर प्रबंधन और पुलिस उन्‍हें समझाने में लगी हुई है. मंदिर गेट पर शिक्षामित्रों के बैठ जाने से रास्‍ता पूरी तरह जाम हो गया है. गोरखनाथ रोड के साथ अलीनगर, बाबीना मार्ग भी जाम हो गया है.

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संतकबीरनगर में शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त किए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आक्रोशित शिक्षा मित्रों ने बुधवार को बीएसए आफिस में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी. हालांकि इससे पहले बीएसए माया सिंह कार्यालय का ताला बंद कर बाहर निकल आईं. सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल मौके पर पहुंच चुका है.

कन्नौज में सुप्रीम कोर्ट चुनौती के तौर पर लिया गया है. बुधवार को शिक्षा मित्र स्कूल नहीं पहुंचे. इससे कई विद्यालयों में ताला लटक गया. ब्लाक संसाधन केंद्रों पर दोपहर में बैठक की तैयारी है. इसके बाद अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा. शिक्षा मित्र संघ के पदाधिकारी बड़े आंदोलन की तरफ भी कदम बढ़ा सकते हैं.

DU: 7वीं लिस्ट होगी जारी, आरक्षित सीटों पर होगा फोकस

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी में अब तक करीब 55,500 सीटें भर चुकी हैं लेकिन फिर भी यूनिवर्सिटी एडमिशन की सातवीं लिस्ट निकालेगी. DU की एडमिशन कमेटी के चेयरमैन डॉ एम के पंडित ने बताया कि 7वीं कटऑफ लिस्ट के बाद 27 और 28 जुलाई को एडमिशन होंगे. इस लिस्ट में कॉलेज ज्यादातर reserved category को फोकस करेंगे.

डीयू की छठी लिस्ट में करीब 4 हजार एडमिशन हुए हैं. कॉलेजों का कहना है कि कई कोर्स में ओवर एडमिशन हो गए हैं. इसकी वजह से एडमिशन ज्यादा नजर आ रहे हैं, जबकि अभी कई कोर्स में जनरल के लिए भी सीटें खाली हैं. इसके अलावा आउट ऑफ कैंपस और ईवनिंग कॉलेज में कॉमर्स समेत कुछ कोर्सेज में ऐडमिशन कैंसल भी हुए हैं. आपको बता दें कि फीस के साथ अब तक करीब 53500 छात्रों ने एडमिशन कनफर्म कर लिया है. हालांकि अब भी रिजर्व्ड कैटिगरी की सीटें खाली हैं.

 

 

टीवी शो ‘एक श्रृंगार स्वाभिमान’ के सेट पर तेंदुए ने किया हमला

मुंबई। कलर्स के फेमस टीवी शो ‘एक श्रृंगार स्वाभिमान’ के सेट पर बड़ा हादसा हो गया है. शो के सेट के पास से एक तेंदुए ने दो साल के बच्चे को अपना शिकार बनाया और उसे मार डाला. मुंबई स्थित गोरेगांव के फिल्मसिटी में ‘एक श्रृंगार स्वाभिमान’ का सेट बना हुआ है जिस पर काफी लोग काम कर रहे थे पर बारिश के कारण लोगो की आवाजाही कम थी चूकिं सेट के चारों तरफ घना जंगल है. जहां जंगली जानवर आते जाते रहते हैं. अंदर शूटिंग जारी थी पर बाहर एक बड़ा हादसा हो गया. बताया जा रहा है कि सेट के पास एक दो साल का बच्चा खेल रहा था तभी अचानक एक तेंदुआ आ गया और बच्चे को गर्दन से पकड़कर अपने साथ ले गया. लोग जब तक बच्चे को बचाने के लिए आते तब तक वह उसे लेकर भाग चुका था हालांकि तेंदुए ने कुछ दूर जाने के बाद बच्चे को छोड़ दिया लेकिन तब तक बच्चे के मौत हो चुकी थी. इस घटना के बाद सारे एक्टर औऱ को-स्टार सभी लोग दुखी हैं और उन्होंने माना कि ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है.    

योगी के शपथ ग्रहण में खर्च हुए 1.81 करोड़, होगी जांच

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में किया गया था जिसकी खबर मीडिया में आने के बाद सरकार की किरकीरी हो रही है. इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं. जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण का जिम्मा लखनऊ विकास प्राधिकरण का होता है. LDA ने इस कार्यक्रम पर एक करोड़ इक्यायासी लाख रूपये खर्च कर दिए. इस खर्च के लिए प्राधिकरण के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शक के घेरे में है. सूत्रों के मुताबिक एलडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष सत्येंद्रवीर सिंह पर इस मामले मे गड़बड़ी करने का शक है.

राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद 19 मार्च को लखनऊ के स्मृति उपवन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ ली थी. जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत बीजेपी के दिग्गज नेता शामिल हुए थे.

शपथ ग्रहण समारोह पर खर्च ये रकम मंच, टेंट, ऑडियो सिस्टम, सुरक्षा, फ्लीट और खाने-पीने की व्यवस्था पर खर्च हुई थी. सूत्रों के मुताबिक ये रकम पहले खर्च की रकम से काफी ज्यादा है. इसके मुकाबले साल 2012 में अखिलेश यादव के शपथ ग्रहण समारोह में सिर्फ 89.9 लाख रुपये खर्च हुए थे.

शक है कि इस मामले में फर्जी बिल या फिर ज्यादा दाम पर चीजों को लिया गया है. ये मामला सामने तब आया जब लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी ने सचिवालय को शपथ ग्रहण समारोह का बिल पिछले हफ्ते भेजा. शक होने पर उसकी जांच के आदेश दिए गए हैं जिसके बाद घोटाले के आरोपी का जल्द पता लग जायेगा.

 

सरकार ने माना- मोदी के आने से धर्म-जाति के नाम पर हिंसा 41 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली। बीजेपी सरकार आने के बाद सांप्रदायिक हिंसा जिस तेजी से बढ़ी है इसकी निंदा विदेश तक में हो रही है पर ताजा जानकारी गृह राज्य मंत्री गंगाराम अहिरवार ने जुटाई है जो चौकानें वाली है. नरेंद्र मोदी सरकार ने मंगलवार को लोक सभा में जानकारी दी कि पिछले तीन सालों में सांप्रदायिक, जातीय और नस्ली हिंसा को बढ़ावा देने वाली घटनाओं में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

गृह राज्य मंत्री गंगाराम अहिरवार द्वारा सदन में पेश की गई राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 में धर्म, नस्ल या जन्मस्थान को लेकर हुए विभिन्न समुदायों में हुई हिंसा की 336 घटनाएं हुई थीं. साल 2016 में ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़कर 475 हो गई. अहिरवार एक गौरक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा और सरकार द्वारा उन पर रोक लगाने से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे.

अहिरवार ने सदन में कहा कि सरकार के पास गौरक्षकों से जुड़ी हिंसा का आंकड़ा नहीं है लेकिन सांप्रदायिक, जातीय या नस्ली विद्वेष को बढ़ाने वाली हिंसक घटनाओं का आंकड़ा मौजूद है. मंत्री अहिरवार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार राज्यों में ऐसी घटनाओं में 49 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई. साल 2014 में राज्यों में 318 ऐसी घटनाएं हुई थीं जो साल 2016 में बढ़कर 474 हो गईं. वहीं दिल्ली समेत सभी केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसी घटनाओं में भारी की कमी आई. राजधानी और केंद्र शासित प्रदेशों में  साल 2014 में ऐसी हिंसा की 18 घटनाएं हुई थीं लेकिन साल 2016 में ऐसी केवल एक घटना हुई.

उत्तर प्रदेश में सांप्रादायिक, जातीय और नस्ली विभेद को बढ़ावा देने वाली हिंसक घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई. यूपी में तीन सालों में ऐसी घटनाएं 346 प्रतिशत बढ़ीं. साल 2014 में यूपी में ऐसी 26 घटनाएं हुई थीं तो साल 2016 में ऐसी 116 घटनाएं हुईं. उत्तराखंड में साल 2014 में ऐसी केवल चार घटनाएं हुई थीं लेकिन साल 2016 में राज्य में ऐसी 22 घटनाएं हुईं. यानी उत्तराखंड में ऐसी घटनाओं में 450 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जिसके बाद बीजेपी के लिए दिक्कतें बढ़ने के पूरे आसार हैं.

   

6 किमी पैदल ले जाने पर भी नहीं हुआ इलाज, आदिवासी बच्चे की मौत

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बारन। भाजपा शासित राज्य राजस्थान में इलाज न होने के कारण सात महीने के आदिवासी बच्चे की मौत हो गई. उसके रिश्तेदार छह किलोमीटर तक पैदल अपने कंधे पर रखकर उपचार के लिए उसे एक स्वास्थ्य केंद्र ले गए थे. अफसरों ने हालांकि परिवार के आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि बच्चा निमोनिया से पीड़ित था और एक चिकित्सक ने दवाएं लिखीं. उसने बच्चे को सीएचसी में उनसे भर्ती कराने को भी कहा था लेकिन वे घर चले गए.

बच्चे की दादी कोसाबाई के अनुसार उनका पौत्र सनी देओल सहारिया बीते रविवार से कफ और सर्दी से पीड़ित था. कोसाबाई सोमवार को अपने पति और सनी की मां सुमंताबाई के साथ बच्चे को कंधे पर रखकर अपने गांव चोरखादी से छह किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिखाने के लिए ले गए. उन्होंने आरोप लगाया कि वे दोपहर के समय सीएचसी पहुंचे तो उन्हें सूचित किया गया कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक घर चले गए हैं क्योंकि उनकी ड्यूटी समाप्त हो चुकी है.

जब वे चिकित्सक के आवास पहुंचे तो उन्होंने उनसे शाम पांच बजे तक उपचार के लिए इंतजार करने या बारन में जिला अस्पताल ले जाने को कहा, जो 80 किलोमीटर दूर है. उन्होंने इस उम्मीद में कुछ समय के लिए इंतजार किया कि जिला अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था हो जाएगी लेकिन असफल रहे. आखिरकार वे अपने गांव के लिए रवाना हुए ताकि धन की व्यवस्था करके बारन अस्पताल पहुंच सकें. लेकिन सीएचसी से रवाना होने के तुरंत बाद सनी की उनकी बांहों में मौत हो गई. उन्हें अपने कंधे पर रखकर बच्चे के शव को वापस गांव लाना पड़ा क्योंकि उन्हें एंबुलेंस नहीं मिल सका.

बारन के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि मामला प्रकाश में आने के बाद उन्हें उप मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी राजेंद्र मीणा को घटना की जांच के लिए मंगलवार सुबह घटनास्थल भेजा. मीणा ने दावा किया कि जब परिवार ने चिकित्सक अशोक मीणा से उनके आवास पर संपर्क किया तो उन्होंने कुछ दवाएं लिख दी थीं और परिवार से बच्चे को सीएचसी में भर्ती कराने को कहा था. मीणा ने कहा कि परिवार के सदस्य वहां जाने की बजाय सीधा अपने घर चले गए. बच्चा गंभीर रूप से निमोनिया से पीड़ित था. उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों का बयान दर्ज किया जाना बाकी है.

नवजातों की जान बचाने के लिए सरकारी डॉक्टर करा रहे हैं हवन!

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हैदराबाद। भारत में अंधविश्वास के असर से सरकारी अस्पताल तक अछूते नही हैं इसका बड़ा उदहारण तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में देखने को मिला. वहां के प्रसूति वार्ड में कई मौतों को भूत-प्रेत आदि का असर माना गया जिससे निपटने के लिए सोमवार को अस्पताल में बड़ा हवन कराया गया है.

इस हवन का आयोजन वरिष्ठ डॉक्टर और कर्मचारियों ने मिलकर कराया था. यह हवन गर्भवती महिलाओं और नवजातों के कल्याण के लिए हवन कराया गया. करीब 150 साल पहले इस गांधी अस्पताल को तीन वार्ड के साथ शुरू किया गया था. आज यह 1800 बिस्तरों वाला अस्पताल है. यहां मेडिकल कॉलेज भी है. आंध्र प्रदेश का यह पहला ऐसा अस्पताल है, जहां ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी.

दो-तीन महीने पहले तक यहां के प्रसूति विभाग में रोजाना 25-30 डिलिवरी कराई जाती थी, अब यह संख्या करीब दोगुनी हो गई है. डिलिवरी के लिए यहां आने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी के पीछे तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की KCR Kits योजना है. इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में डिलिवरी करवाने पर मां और नवजात को नकदी के साथ कई तरह तरह के जरूरी सामान दिए जाते हैं. ऐसी ही योजना तमिलनाडु में मुख्यमंत्री रहते हुए जयललिता लेकर आई थीं.

हाल के सप्ताह में यहां गांधी अस्पताल में डिलिवरी के दौरान करीब जच्चा बच्चा की मौत हुई है. इन मौतों पर गांधी अस्पताल के उप अधीक्षक एन नरसिम्हा राव ने कहा, ‘हमारे यहां ज्यादातर गंभीर मामले सामने आते हैं, हम उन्हें डिलिवरी के लिए मना नहीं कर सकते, इसी वजह से मौतें हो रही हैं.’ प्रसूति वार्ड में करीब चार घंटे तक महामृत्युंजय हवन कराया गया. हवन में शामिल होने वाले डॉक्टर ने कहा कि हवन से मां और नवजात को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त होगा. इस मामले में उप अधीक्षक एन नरसिम्हा राव ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी. साथ ही जो भी दोषी पाया जाएगा उसपर कार्रवाई की जाएगी साथ ही कहा इस तरह के किसी भी अंधविश्वास को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

हरियाणा में भी दलित प्रेम दिखाएंगे अमित शाह

चंडीगढ़। हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव की एक साथ तैयारी कर रही भाजपा दलितों को रिझाने का कोई मौका नहीं चूकेगी. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हरियाणा दौरे के दौरान पार्टी जहां जाटलैंड में दस्तक देगी, वहीं दलितों को लुभाने की हरसंभव कोशिश करेगी. इस कड़ी में शाह किसी दलित कार्यकर्ता के घर भोजन कर सकते हैं.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हरियाणा दौरे के कार्यक्रमों को जींद में हो रही दो दिवसीय बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा. भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले शाह 2 से 4 अगस्त तक हरियाणा में रहेंगे. पहले उनका दौरा चंडीगढ़ से शुरू होकर रोहतक में खत्म होना था, मगर अब तीनों दिन शाह रोहतक में ही रहेंगे.

रोहतक जाटलैंड होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ है. हुड्डा ने आजकल हर जिले में किसान पंचायतों का दौर शुरू कर रखा है. अपने रोहतक दौरे के दौरान शाह यहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल व भाजपा प्रभारी अनिल जैन के साथ-साथ पार्टी के तमाम पदाधिकारियों तथा राज्य सरकार के मंत्रियों से फीडबैक लेंगे.

सरकार और संगठन के बारे में मिले फीडबैक के आधार पर शाह कार्यकर्ताओं तथा मंत्रियों को नया चुनावी मूलमंत्र देकर जाएंगे. बूथ विस्तारक योजना के तहत शाह रोहतक जिले के किसी भी बूथ पर खुद चलकर जा सकते हैं और वहीं कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करेंगे. इसी तरह जिस दलित कार्यकर्ता के घर शाह भोजन करने जाएंगे, उसके नाम का चयन भी मौके पर ही होगा.

भाजपा अध्यक्ष जिस भी राज्य में जा रहे हैं, वहां के चुनावी व जातीय गणित के मद्देनजर सरकार और संगठन में नई जान फूंक रहे हैं. भाजपा के प्रांतीय मीडिया प्रमुख राजीव जैन के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, लेकिन यह तय है कि अपने प्रवास के दौरान वे न केवल बूथ पर जा सकते हैं बल्कि किसी दलित कार्यकर्ता के घर भोजन कर उसका मान-सम्मान बढ़ा सकते हैं.

घाटकोपर बिल्डिंग हादसे का दोषी शिवसेना नेता गिरफ्तार

मुंबई। कल मुंबई के घाटकोपर इलाके स्थित दामोदर पार्क के पास एक बिल्डिंग गिरने के कारण कई लोगों की जान चली गयी थी. इस मामले में मुंबई ने शिवसेना नेता को अरेस्ट किया गया है. बता दें की जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसमें शिवसेना नेता का नर्सिंग होम था. आरोप है कि इस नर्सिंग होम में मरम्मत के दौरान तोड़फोड़ करने की वजह से इमारत गिर गई. शिवसेना नेता को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस हादसे में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम जारी है.

निकट निवासियों के अनुसार, ग्राउंड फ्लोर में स्थित नर्सिंग होम में मरम्मत का काम चल रहा था जिस कारण इमारत के खंभे कमजोर हो गए थे. 15 फ्लैटों वाली इस बिल्डिंग में स्थित नर्सिंग होम में तोड़-फोड़ का काम चल रहा था. इसी कारण मंगलवार सुबह इमारत ढह गई. नर्सिंग होम कथित तौर पर शिवसेना के स्थानीय नेता सुनील शितप का है. शितप के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 336 और 338 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि शितप को बीती रात हिरासत में लिया गया था और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. वहीं, घटना की जांच के लिए डेप्युटी म्युनिसिपल कमिश्नर समेत 2 सदस्यों की टीम बनाई गई है, जो 15 दिन में रिपोर्ट देगी.

मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ दिनों पहले नर्सिंग होम के मालिक सुनील सितप ने भाड़े पर चल रहे नर्सिंग होम को खाली करवा लिया था. आरोप है कि उस जगह पर गेस्ट हाउस बनवाया जा रहा था. यह भी आरोप है कि यह फेरबदल बीएमसी की अनुमति के बिना हो रहा था. मनमाने ढंग से किए जा रहे बदलाव में बिल्डिंग को काफी नुकसान पहुंचाया गया था जिस कारण यह बड़ा हादसा हुआ, दोषी नेता को गिरफ्तार कर मुकदमा कायम कर लिया गया है.

‘जंगल में छिपने वाले आदिवासी और सूअर खाने वाले दलित बने’

  • भगत सिंह ‘कम्युनिकेशन गैप’ के शिकार थे, वे राष्ट्रवादी थे, कम्युनिस्ट नहीं थे.
  • दलित शब्द में एक मार्क्सवादी नज़रिया है.
  • महाभारत के समय सभी हिंदुओं की एक ही जाति थी–ब्राह्मण.
ये विचार हैं भारत की समाज विज्ञान की शीर्ष शोध संस्था ‘इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च’ (आईसीएसएसआर) के चेयरमैन डॉक्टर ब्रज बिहारी कुमार के. उन्हें इसी साल मई में इस संस्था का प्रमुख बनाया गया है. समाज विज्ञान के क्षेत्र में अब तक प्रचलित और स्थापित लगभग सभी सिद्धांतों से डॉक्टर कुमार असहमत दिखते हैं, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ईमानदार मानते हैं लेकिन कहते हैं कि वे संघ से जुड़े नहीं हैं. उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं, ‘चिंतन सृजन’ नाम की एक पत्रिका के संपादकीय लेखों में उन्होंने कई ऐसी ‘विवादित’ बातें लिखीं हैं जिन्हें कई अख़बारों ने उनकी नियुक्ति के समय छापा था . 76 साल के बीबी कुमार ने बीबीसी से बातचीत की शुरुआत में ही ज़ाहिर कर दिया कि अपनी नियुक्ति पर आए मीडिया कवरेज से वे ख़ुश नहीं हैं. आपकी अकादमिक यात्रा और सामाजिक विज्ञान से जुड़ाव के बारे में बताएं. मैंने बिहार के एक कॉलेज से केमिस्ट्री के लेक्चरर के तौर पर नौकरी शुरू की थी, फिर नागालैंड कोहिमा साइंस कॉलेज चला गया. आज से 39 साल पहले मैं नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल का सदस्य था. तब एक मित्र के कहने पर एंथ्रोपॉलजी में एमएससी और पीचएडी दोनों की. फिर हिंदी में भी एमए किया. और वहीं से प्रिंसिपल पद पर रिटायर हुआ. समाज विज्ञान में शोध के क्षेत्र में आपका क्या योगदान रहा है? मैंने पूर्वोत्तर भारत की जनजातीय भाषाओं के कोश और व्याकरण देवनागरी में तैयार किया और प्रकाशित कराया. लगभग 13 हज़ार पृष्ठों का काम है. जाति व्यवस्था, इस्लाम, छोटे राज्यों के गठन पर मेरी किताबें हैं. मेरी 80 से अधिक पुस्तकें अमेरिकन लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस की सूची में शामिल हैं. लोगों ने मेरे बारे में कहा कि वे मुझे नहीं जानते. इस देश के लोग तो बहुतों को नहीं जानते. कुमारस्वामी और अरबिंदो को नहीं जानते. मुझे लोग जानें, ये मैं आवश्यक नहीं समझता. सामाजिक विज्ञान के शोध में हमसे कुछ ग़लतियां हुई हैं? बहुत कुछ अच्छा भी हुआ है, ग़लतियां भी हुई हैं. हम सर्वे कराने जा रहे हैं. सबसे बड़ी ग़लती ये है कि बहुत से विषयों पर कई-कई रिसर्च और डुप्लीकेशन हैं और बहुत सारे विषय अनछुए हैं. मुझे लगता है कि प्राथमिकता बदलने की ज़रूरत है. बहुत से लोगों ने बहुत अच्छा काम किया है. धर्मपाल का ज़िक्र करूंगा. उन्होंने सर्वे करके पाया कि हर गांव में पारंपरिक स्कूल होते थे और उनमें हर जाति के बच्चे पढ़ते थे. सामने आया कि अंग्रेज़ों के आने के पहले हमारे यहां शिक्षा का स्तर अच्छा था. अंग्रेज आए तो 40 साल में शिक्षा तिहाई रह गई. लेकिन मिथक ये रचे गए कि हिंदुओं ने अपनी तथाकथित नीची जाति के लोगों को पढ़ने नहीं दिया. क्या हमें धर्मपाल को पढ़ना नहीं चाहिए? लेकिन हमारी मुख्यधारा के अकादमिक लोग उनका बहिष्कार करते हैं. उनका नज़रिया औपनिवेशिक है. भारत में दलितों की मौजूदगी आप कब से मानते हैं? मैं विदेशी लेखक अल बरूनी से बात शुरू करूंगा. वो मध्य एशिया से एक हजार वर्ष पहले भारत में आए थे. उन्होंने कहा है कि भारत में केवल चार जातियां हैं. आठ अन्य लोगों की बात भी की है, लेकिन हिंदुओं में सिर्फ़ चार जातियों का ज़िक्र किया है और लिखा है कि वे लोग एक स्थान पर भोजन करते थे. तो छुआछूत कहां रही? ये उल्लेख एक विदेशी मुसलमान का है. फिर दस हज़ार जातियां बाद में कैसे बन गईं. इसके दो कारण रहे. हमारे यहां श्रेणियां होती थीं. वे अपनी जाति से बाहर विवाह करते थे, जैसे सुनार और लुहार में आपस में विवाह कर लेते थे. बाद में वे अंतर्विवाही बन गए. एक दूसरी वजह थी कि हिंदुओं ने ख़ुद में विश्वास करना छोड़ दिया. अल बरूनी ने कहा है कि महमूद के आक्रमण से हिंदू धूल की तरह बिखर गए. उनकी विद्या दूर चली गई. फिर वे मानसिक सिकुड़न के शिकार हो गए और उन्होंने दूर के स्थानों पर विवाह करना बंद कर दिया. लेकिन अल बरूनी का पूरा टेक्स्ट कुछ और है, उन्होंने लिखा है कि लोग एक स्थान पर खाते थे, लेकिन वे चार अलग-अलग समूहों मेंऔर एक समूह के लोगों को दूसरे में घुलने-मिलने की इजाज़त नहीं थी. जिसकी व्याख्या आप चार जातियों के तौर पर कर रहे हैं, अल बरूनी शायद चार वर्णों की बात कर रहे थे? ऐसा है कि जाति शब्द हमारे साहित्य में उस रूप में नहीं आया है, जिस रूप में आप सोच रहे हैं. पाणिनि ने जाति के उल्लेख को गोत्र और चारण से जोड़ा है. अगर जाति को आप इतिहास में पीछे ले जाते हैं तो जाति वर्ण से अलग नहीं है. और अलग खाने की बात आप कहते हैं तो अल बरूनी ये भी लिखता है कि दो भाइयों में हिंसक द्वंद्व है तो उनके बीच में एक पर्दा लगा दिया जाए और वो एक पंगत में न खाएं. छुआछूत की जिस परंपरा का बार-बार जिक्र होता है, उसमें एक स्थान में लोग नहीं खाते हैं. मैं कहूंगा कि संपादकीय में बातें संक्षिप्त होती हैं. मेरी बहुत मोटी किताब है, उसे आप पढ़ें तो लगेगा कि चीज़ें उतनी सरल नहीं हैं. क्या आज अंतर्जातीय विवाह होने चाहिए? हमारे यहां ऐसा होता रहा है. निषेध नहीं था. महाभारत में कहा गया है कि हिंदुओं में एक ही जाति थी- ब्राह्मण. सभी ब्राह्मण थे. इसलिए तथाकथित दलित, वैश्य, ब्राह्मण और क्षत्रिय के बीच आपस में विवाह नहीं होना चाहिए, इसे मैं नहीं मानता. दलित के आगे आपने तथाकथित दलित क्यों लगाया? इस शब्द में एक मार्क्सवादी नज़रिया है. मैं नहीं मानता कि एक वर्ग के साथ अन्याय नहीं हुआ. हुआ है. लेकिन कुछ बदलाव आए हैं, उसकी स्वीकृति तो आप नहीं देते. आज जो कुछ लिखा जा रहा है, क्या उसमें अंबेडकर और गांधी की स्वीकृति है? आप मानते हैं कि अंबेडकर के लाए आरक्षण से बदलाव आया है? आरक्षण की स्वीकृति है. कुछ लोग स्वीकृत नहीं करते हैं, लेकिन वे कम हैं. आरक्षण में ग़लतियां भी होती हैं. साधन संपन्न वर्ग अगर सब कुछ खा जाए तो उस वर्ग के लोगों को भी सोचना चाहिए. प्रयास उधर से होना चाहिए. जो सच में वंचित है उसे लाभ मिले. आपने ऐसा भी लिखा था कि मुग़लों के हमले की वजह से आदिवासी और दलित अस्तित्व में आए? अत्याचार के डर से हिंदू जंगलों में भागे और बहुत से हिंदू आदिवासी बन गए. इसका बड़ा भारी डेटा दिया है इतिहासकार अवकेश लाल ने. इसका एक और पहलू है जिसका उल्लेख मैंने भी किया है. वो ये है कि बहुत से हिंदुओं ने मुसलमानों के डर से सूअर का मांस खाना शुरू किया. उनका सामाजिक दर्जा नीचे हो गया और उनमें सभी जातियों के लोग थे. तीसरी बात, यहां समझने की है कि हिंदू जाति व्यवस्था में ऊपर जाने की प्रवृत्ति भी थी और नीचे आने की भी. मोबिलिटी दोतरफ़ा थी. मुग़ल तो भारत में बहुत बाद में आए. लेकिन हज़ारों साल पहले लिखी गई मनुस्मृति में दलितों का ज़िक्र है? आप 14वीं या 15वीं शताब्दी में ‘मनुस्मृति’ का कहीं कोई ज़िक्र पाते हैं. जितना अंग्रेज़ों ने उसे महत्व दिया. अंग्रेज़ों ने एक साज़िश के तहत मनुस्मृति को स्वीकृति दी. मनुस्मृति को आप पढ़िए. आप पाएंगे कि बहुत सहजता से बातें चल रही हैं और अचानक एक रूखापन आता है. उसमें बहुत कुछ क्षेपक है (बाद में जोड़ा गया). उस पर हमारे विद्वान अध्ययन नहीं कर रहे हैं. आप कह रहे हैं कि मनुस्मृति को संपादित किया गया? संपादित नहीं किया गया. उसमें जोड़ दिया गया. बहुत कुछ जोड़ा गया. उदाहरण मैं देता हूं. तुलसी की रामायण में शंबूक का उल्लेख नहीं है. अकेला संस्करण जो बॉम्बे से छपा, उस आदमी को अंग्रेज़ों ने पुरस्कृत किया. इस साज़िश से हम आंख मूंद नहीं सकते. क्षेपक की या चीज़ों को जो़ड़ने की बातें इस देश में छिपकर नहीं हुई हैं. उन पर रिसर्च होना चाहिए. लेकिन मनुस्मृति में एक ही अपराध के लिए ब्राह्मणों को कम सज़ा और शूद्रों को अधिक है. ब्राह्मणों को ज़्यादा दंडित करने का प्रावधान है. आप समग्रता में पढ़िए चीज़ों को. एक और बात. ब्राह्मण हर जाति में होता है. आप वाल्मीकि को पढ़िए. वो लिखते हैं कि रावण की अर्थी जा रही है और उसके पीछे राक्षस कुल के यजुर्वेदी ब्राह्मण अग्नि लेकर चल रहे हैं. जब राक्षस कुल में ब्राह्मण हो सकता है तो नस्ल कहां आई, सामाजिक दर्जा कहां रहा. जिस मोबिलिटी का ज़िक्र आप कर रहे हैं, उसके आधार पर क्या हम तथाकथित नीची जातियों को तथाकथित ऊंची जातियों में प्रवेश दे सकते हैं? आज कई जाति क्लस्टर के लोग मिल रहे हैं, समूह बना रहे हैं. जैसे ओडिशा का तेलियों का संगठन हुआ, कई तेलियों की जातियां जो एक दूसरे में शादियां नहीं करती थीं, वे साथ मिल गईं. यादवों में भी ऐसा ही बदलाव आया. लेकिन वे सभी समाज व्यवस्था के चौथे पायदान पर ही थीं और अब भी वही हैं. सिर्फ आपस में दूरियां घटी होंगी, लेकिन उनका सामाजिक दर्जा कहां बढ़ा? चौथा पायदान उतना बड़ा नहीं था. तीसरे से लोग चौथे में गए हैं. यानी नीचे की ओर मोबिलिटी थी, इसे आप स्वीकृत करें. और विवाह हो रहे हैं. अंतर्जातीय विवाह हो रहे हैं, उनमें सामाजिक स्वीकृति मिल रही है. मार्क्सवादी इतिहासकारों से आप ख़ासे नाराज़ हैं? मार्क्सवादी इतिहासकार औपनिवेशिक इतिहासकारों की नकल हैं. वो एक सिक्के के दो पहलू हैं. दोनों में कोई अंतर नहीं है. मार्क्स ने ब्रिटिश साम्राज्य की तारीफ़ की है. उसके कंस्ट्रक्टिव और डिस्ट्रक्टिव दोनों पहलुओं की तारीफ की है. वो उनके चेले हैं. इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं बोलूंगा. लेकिन भगत सिंह परंपरावादियों के प्रिय कैसे बने हुए हैं, जबकि उन्होंने खुलेआम मार्क्सवादी विचार लिखे हैं? नास्तिकवाद का उल्लेख आपने किया तो ये बतलाइए कि चार्वाक क्या मार्क्स के चेले थे. मैं आपसे पूछता हूं कि नास्तिक परंपरा तो बहुत पुरानी परंपरा है. वो कब से मार्क्स के शिष्य बन गए. लेकिन भगत सिंह ने अपने लेखों में मार्क्स को कोट किया है. मार्क्स की बात छोड़िए. जिस व्यवस्था में लाखों लोगों को मार डाला गया. सोवियत व्यवस्था इतनी क्रूर व्यवस्था थी. बहुत से अच्छे लोग भी उसमें विश्वास करते थे. उसको कम्युनिकेशन गैप कहते हैं. जानकारी पूरी तरह से स्थान पर नहीं आ पाई. भगत सिंह उस कम्युनिकेशन गैप के शिकार थे? ज़रूर थे. कई मामलों में थे. मार्क्स को कई लोगों ने अच्छा माना. मैंने एक किताब की समीक्षा लिखी थी, किताब का नाम अभी याद नहीं आ रहा पायनियर में छपी है. तथ्य यही है कि वो राष्ट्रवादी थे. उनका साम्यवाद से कुछ लेना देना नहीं था. मौजूदा सरकार कैसा काम कर रही है? प्रधानमंत्री मोदी फ़ैसले लेने वाले प्रधानमंत्री हैं. इसके लिए हौसला चाहिए. कई तो सामाजिक आंदोलन के रूप में उनकी पहल हैं. उसके परिणाम बहुत समय लेते हैं. दस साल-बीस साल. उन्होंने जोखिम भरे कदम लिए हैं. जैसे नोटबंदी को आप लें तो कोई कमज़ोर प्रधानमंत्री वो कदम नहीं उठा सकता था. और इस सरकार के मंत्रियों के बारे में कोई घोटाले जैसी बात भी नहीं कही गई है. लेकिन विपक्ष गोरक्षा के मुद्दे पर घेर रहा है? गोरक्षा होनी चाहिए. लेकिन उसके नाम हिंसा नहीं होनी चाहिए. अगर हिंसा होती है तो मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री या उनके कैबिनेट के लोग इसमें शामिल हैं. समाज है. हर समाज में विकृत बर्ताव वाले लोग होते हैं और उसका प्रतिकार भी सरकारी मशीनरी करती है. लेकिन उसका दोष प्रधानमंत्री या कैबिनेट पर नहीं लगाया जा सकता. क्या आपने प्रधानमंत्री को सबसे बेहतर प्रधानमंत्री कहा था? मैंने एक संपादकीय में लिखा था कि ‘मोदी को बर्दाश्त करना सीखो.’ मेरा ये दृढ़ विश्वास है कि मोदी पर विश्वास करके, उन पर लगातार आक्रमण न करके, हम उन्हें बर्दाश्त करना सीखेंगे तो देश का भला होगा. प्रधानमंत्री पूरी क्षमता से देश और समाज का काम करेंगे. मिथक और विज्ञान को जोड़ने के प्रयासों पर आपका क्या सोचना है? प्रधानमंत्री गणेश की ‘सर्जरी’ का उदाहरण दे चुके हैं. सुश्रुत को बहुत लोग पहला सर्जन बताते हैं. सुश्रुत सच में पहले सर्जरी करने वाले थे. इन चीज़ों को स्कूलों में पढ़ाया नहीं जाता. जानकारी के बीच में एक गैप है. इसकी जानकारी स्कूलों में बच्चों को होनी चाहिए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में आप क्या सोचते हैं? मैं कभी आरएसएस का सदस्य नहीं रहा. लेकिन मैं ये भी मानता हूं कि संघ के लोग बड़े ईमानदार लोग हैं. ऐसा हमेशा मानता रहा. बाकी नासमझ और समझदार हर विचारधारा में हैं. यह साक्षात्कार बीबीसी से साभार लिया गया है. बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र ने आईसीएसएसआर के चैयरमेन ब्रजबिहारी कुमार का साक्षात्कार लिया है.