‘बिग बॉस 11’ फिर एक नये थीम के साथ

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नई दिल्ली। टीवी की दुनिया का पॉपुलर रिएलिटी शो ‘बिग बॉस 11’ एक बार फिर दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए तैयार है. इस शो को लेकर अक्सर लोग काफी उत्सुक रहते हैं और हर बार की तरह इस बार भी यह शो दर्शकों के लिए एक अलग थीम के साथ आने के लिए तैयार है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ‘बिग बॉस 11’ में एक नहीं बल्कि 2 घर होंगे. इसका मतलब यह कहा जा सकता है कि ‘बिग बॉस 11’ की थीम ‘पड़ोसी’ होगी. हालांकि, इस बार भी शो में पिछले सीजन की तरह आम लोगों को एंट्री दी जाएगी और इस बार शो के आम कंटेस्टेंट्स टास्क जीत कर पैसे कमा सकते हैं. हमारी सहयोगी वेबसाइट बॉलीवुडलाइफ.कॉम की खबर के अनुसार इस वक्त शो के लिए आम परिवार के लोगों के ऑडिशन चल रहे हैं और शो के मेकर्स ने कुछ लोगों को सेलेक्ट भी कर लिया है.

मिली जानकारी के अनुसार इस बार बिग बॉस के घर में आपको मां-बेटी, पिता-बेटे और भाई-बहन जैसी जोड़ियां देखने को मिल सकती हैं. बता दें कि इस बार यह शो सितंबर में ऑन-एयर किया जाएगा. खबरों के मुताबिक इस बार शो में सेलिब्रिटी फेस में प्रियंका चोपड़ा की हमशक्ल नवप्रीत बंगा, टीवी एक्ट्रेस अंचित कौर, रश्मि देसाई के पूर्व पति नंदीश संधू, बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया सेन, टीवी एक्टर अभिषेक मलिक, मिष्टी चक्रवर्ती, एक्टर मोहित मल्होत्रा, नवनीत कौर ढिल्लन और जोया अफरोज के नाम शामिल होने की खबर है.

अकालतख्त एक्सप्रेस में मिला विस्फोटक, दुजाना का बदला लेने की धमकी

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कोलकाता से अमृतसर को जाने वाली 12317 अप अकालतख्त एक्सप्रेस ट्रेन में विस्फोटक मिलने से हड़कंप मच गया. खबर मिलते ही मौके पर पहुंचे बम निरोधक दस्ते ने विस्फोटक को डिफ्यूज किया. ट्रेन की टॉयलेट में मिले इस संदिग्ध विस्फोटक के पास एक पत्र भी मिला है, जिसमें दुजाना की मौत का बदला लेने की बात कही गई है. इस मामले के सामने आने के बाद आतंकी निरोधी दस्ता (एटीएस) की टीम पर मौके पर पहुंच चुकी है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अकालतख्त एक्सप्रेस के एक मुसाफिर ने देर रात करीब 1 बजे बी-3 ऐसी कोच में बम मिलने की सूचना दी, जिसके बाद इसे अमेठी के इन्हौना के पास स्थित अकबरगंज हॉल्ट के पास रोका गया. सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गई और सभी यात्रियों को सुरक्षित ट्रेन से उतारकर ट्रेन की तलाशी शुरू की.

लखनऊ डिविजन के आरपीएफ कमांडेंट सत्य प्रकाश ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि अकबरगंज स्टेशन पर अकालतख्त एक्सप्रेस के बी-3 कोच के टॉइलट में बम जैसी चीज मिलने की जानकारी मिली है. बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंच कर उस संदिग्ध चीज को बरामद कर लिया है.’ इसके साथ ही वहां एक चिट्ठी मिली है, जिसमें लश्कर आतंकी अबु दुजाना की मौत क बदला लेने की धमकी दी गई है. वहीं जीआरपी के एसपी सौमित्र यादव ने कहा कि एक कम तीव्रता का विस्फोटक मिला है, जिसे डिफ्यूज कर दिया गया. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस ट्रेन की छानबीन की गई और पूरी तरह संतुष्ट हो जाने के बाद ही ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया.

लालू के करीबी की गोली मारकर हत्या

पटना। पटना में आज अहले सुबह राजद नेता और वार्ड पार्षद केदार सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई. सगुना मोड़ के पास मॉर्निंग वॉक के दौरान राजद नेता को अपराधियों ने ताबड़तोड़ तीन गोलियां मार दीं जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान केदार राय ने दम तोड़ दिया.

मिली जानकारी के मुताबिक आज सुबह वे मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे कि एक ही बाइक पर सवार तीन अपराधियों ने उन्हें गोली मारी और फरार हो गए. घायल अवस्था में उन्हें पटना के ही एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. केदार सिंह यादव के भाई ने 21 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई है जिसमें से पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार लोगों से पुलिस गहन पूछताछ कर रही है. हत्या के बाद लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है. वहीं इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है.

राजद नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि जब से बिहार में एनडीए की सरकार बनी है तब से राजद के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यही नीतीश जी का अपराधमुक्त बिहार है जहां दिन दहाड़े अपराधी गोली मारकर फरार हो जाते हैं. वहीं जदयू नेता नीरज कुमार ने उनके इस बयान को लेकर नाराजगी जताई है और कहा है कि अपराध मुक्त बिहार नारा है और रहेगा. अपराधी किसी पार्टी का नहीं होता, किसी का सगा नहीं होता और पुलिस ने तुरत कार्रवाई की है, चार लोग गिरफ्तार हुए हैं. अपराध करने वाला कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा.

बताया जाता है कि केदार सिंह यादव राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी थे. अपराधियों की ओर से फायरिंग में केदार सिंह यादव को तीन गोलियां लगी थीं. अभी तक हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है लेकिन मिली जानकारी के मुताबिक उनकी हत्या जमीन के विवाद में की गई है. इस घटना के बाद परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल है.शव को पोस्टमार्ट के लिए भेजा गया है. पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है. पुलिस के साथ ही एसआरएफ के जवान केदार सिंह यादव के घर पहुंच गए हैं, घटना की गहन जांच की जा रही है. पुलिस घरवालों से जानकारी ले रही है. घटना की जानकारी मिलने के बाद काफी संख्या में लोग भी पहुंचे हैं.

शरद यादव आज से तीन दिवसीय बिहार दौरे पर

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पटना। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव अपने तीन दिन की यात्रा पर बिहार आ रहे हैं. यहां वे जनता के बीच जाकर गठबंधन टूटने के कारणों और उसके बारे में जनता का निर्णय जानने की कोशिश करेंगे.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शरद पार्टी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्होंने अपनी यात्रा की जानकारी पार्टी को नहीं दी है, इस वजह से पार्टी उनपर बड़ी कार्रवाई कर सकती है. जदयू ने एक नोटिस भी जारी किया है जिसमें कहा गया है कि जो भी कार्यकर्ता शरद के कार्यक्रम में जाएगा उसपर पार्टी कड़ी कार्रवाई करेगी.वहीं, उनके आने से पहले जदयू से निकाले गए गुजरात के पार्टी महासचिव अरुण श्रीवास्तव भी आज सुबह पटना पहुंचे हैं. हालांकि शरद के बिहार दौरे को लेकर जदयू ने कहा है कि वो उनका अपना निजी दौरा है और पार्टी को इससे कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि शरद को पार्टी से इस बारे में बात करनी चाहिए थी.

बता दें कि, बिहार में महागठबंधन टूटने और उसके बाद भाजपा से हाथ मिलाकर नीतीश कुमार के राजनीतिक पालाबदल पर शरद खासे नाराज चल रहे हैं और अपना बिहार दौरा शुरू करने से पहले भी उन्होंने कहा कि महागठबंधन के टूटने से मुझे बड़ी चोट पहुंची है. खास तौर पर बिहार की 11 करोड़ जनता का भरोसा टूटा है. उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार को बधाई भी दी है जिससे पार्टी की नाराजगी उन्हें झेलनी पड़ सकती है. शरद ने कहा है कि हमारे अथक प्रयास से महागठबंधन बना था. हमने तीन हेलीकाप्टर से भाजपा के 26 हेलीकाप्टर का मुकाबला किया था. परिस्थिति विकट है और मैं जब भी परेशान होता हूं जब मन के अंधेरे से घिर जाता हूं तो उजाले के लिए लोगों के बीच जाता हूं और इसीलिए बिहार दौरा कर रहा हूं.

शरद के इस कड़े बयान के तुरंत बाद जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता केसी त्यागी की प्रतिक्रिया आई. त्यागी ने उम्मीद जताई कि शरद जदयू को कमजोर करने वाला आचरण नहीं करेंगे. हालांकि त्यागी ने यह भी जोड़ा कि पार्टी के खिलाफ किसी की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

दूसरी ओर शरद के दौरे को लेकर लालू यादव ने भी बड़ा बयान दिया और कहा कि शरद यादव की पार्टी ही जदयू की असली पार्टी है और नीतीश की पार्टी तो जदयू ‘बी’ है, शरद यादव के साथ हमारा गठबंधन था और रहेगा. इस बयान के बाद अटकलबाजी का दौर भी शुरू हो गया है. साथ ही, लालू ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वो शरद यादव के पटना पहुंचते ही उनपर हमला करवा सकते हैं. शरद के बिहार दौरे को लेकर गड़बड़ी की आशंका वाले लालू प्रसाद के बयान पर जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि ऐसा कहीं कुछ होता है, तो इसके लिए राजद और लालू प्रसाद जिम्मेदार माने जाएंगे. जदयू कार्यकर्ताओं को इसे लेकर सतर्क रहना चाहिए.

पार्टी के प्रवक्ता निखिल रंजन ने कहा कि शरद यादव को जल्द ही पता चल जाएगा कि नीतीश कुमार का फैसला सही था. उन्होंने कहा कि आज कैसे शरद के आदर्श तेजस्वी और तेजप्रताप यादव हो गए हैं, समाजवादी नेता भ्रष्टाचारियों के साथ होगा ये दुखद है. उन्होंने कहा कि शरद यादव की यात्रा से पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. शरद यादव की पहली सभा सारण जिले के सोनपुर में होगी. वह नीतीश कुमार के भाजपा से हाथ मिलाने के फैसले से नाराज हैं और इस मुद्दे को लेकर वह जनता से सीधा संवाद करेंगे. तीन दिनों के दौरान वह आठ जिलों में जाएंगे. शरद दिल्ली से गुरुवार को पटना आएंगे और एयरपोर्ट से ही सोनपुर के लिए रवाना हो जाएंगे.

शरद यादव ने अपने इस कार्यक्रम का नाम ‘जनता से सीधा संवाद’ रखा है. जिन जिलों का वह दौरा करेंगे उनमें सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा एवं मधेपुरा शामिल हैं.

शरद यादव के इस दौरे को जदयू पार्टी विरोधी गतिविधि मान रहा है. पार्टी सूत्रों ने बताया कि यह मुद्दा जदयू की 19 अगस्त को आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उठ सकता है. उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है. वैसे, शरद यादव भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक में मौजूद रहेंगे. वह इस आशय की घोषणा पहले की कर चुके हैं. जदयू के भाजपा से हाथ मिलाने के बावजूद शरद यादव लगातार भाजपा पर हमलावर हैं. वह राज्यसभा में भी विभिन्न मुद्दों पर केंद्र की राजग सरकार को घेर रहे हैं.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि महागठबंधन से नाता तोडऩे का फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी के अंदर विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिया था. ऐसे में इस निर्णय के खिलाफ आवाज उठाना पार्टी विरोधी गतिविधि मानी जाएगी. पार्टी के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि लगता है शरद यादव ने अपना अलग रास्ता चुन लिया है.

डोकलाम में चीन ने लगाए 80 सैन्य टेंट

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डोकलाम पर पिछले सात सप्ताह से भारत और चीन के बीच जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. चीन ने डोकलाम पर सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने डोकलाम पर 80 टेंट लगा दिए हैं. जहां पर चीनी सेना ने टेंट लगाया है, वह स्थल उत्तर डोकलाम के पोस्ट डोलाम पठार से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस इलाके में चीनी सैनिकों की संख्या आठ सौ से कम है यानी चीन ने यहां पर PLA की पूरी बटालियन तैनात नहीं की है. इतना ही नहीं, चीन ने विवादित इलाके में 350 भारतीय सैनिकों के मुलाबले करीब 300 PLA सैनिक तैनात किए हैं. ये भारतीय सैनिक 30 टेंट लगाए हुए हैं.

हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने डोकलाम पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी बढ़ाने की बात पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि दूसरी ओर किसी तरह की गतिविधि देखने को नहीं मिली है. वहीं, भारतीय सेना ने भी ऑपरेशन अलर्ट सेड्यूल को एडवांस कर दिया है. भारतीय सेना की दो सप्ताह की वार्षिक ट्रेनिंग कार्यक्रम को ऑपरेशन अलर्ट कहा जाता है, जिसके तहत सेना को इलाके की जानकारी से अवगत कराया जाता है. इसके तहत 33 सुरक्षाकर्मी चीन से सटे सिक्किम बॉर्डर की निगरानी कर रहे हैं.

इस दो सप्ताह की अवधि में सेना के मूवमेंट के समय को नहीं जोड़ा जाता है. आमतौर पर ऑपरेशन अलर्ट सितंबर आखिरी या अक्टूबर के शुरुआत में आयोजित किया जाता है. इसके तहत भारतीय सेना चीनी सेना को बिना कोई संकेत दिए यहां ठहरती है.

सीवर में मौत

सीवर में मौत कोई नयी घटना नहीं है . प्रभात खबर केएक सरकारी रिपोर्टर के अनुसार (9 अगस्त 2017 ) तक 22,327 सफाई कर्मी लोगो की मौत सीवर में दम घुटने से हुई है. 14 जुलाई 2017 को दक्षिण दिल्ली के घिटरोली गावं में चार सफाईकर्मी जिनका नाम , स्वर्णसिंह, अनिल कुमार, दीपू, बलविंदर की मृत्यु सैप्टिक टैंकसफाई में दम घुटने की वजह से हुई थी. अभी एक माह भी नहीं हुआ कि दूसरी घटना लाजपत नगर में 6 अगस्त 2017 की सुबह फिर से दुहरा दी गयी. सीवर, सैप्टिक टैंक सफाई का चार्ज दिल्ली जलबोर्ड के आधीन होता है जिसकी जिम्मेदारी सम्बन्धित इन्जिन्यर और जलबोर्ड अधिकारियो की होती है. परन्तु आजकल अनुभवहीन सवर्ण ठेकेदारों के जिम्मे इस काम को सौप कर अधिकारी व् इंजीनियर निश्चिन्त हो जाते है. ज्ञातव्य है कि सन 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने मैनुअल स्क्वैन्जर एंड रिहैब्लटेशन एक्ट 2013 के तहत किसी भी कर्मचारी को सीवर में उतारना गैर क़ानूनी कर दिया था. सीवर में मरने वालो के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 10 लाख की राशि परिवार के लिए निश्चित भी की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की खुले आम अवहेलना की जा रही है, यंहा तक कि सफाईकर्मी को धड्ल्ले से सीवर में उतार दिया जाता है जिसका परिणाम उनकी भयंकर मौत के रूप में आये दिन देखने को मिलती है. सफाई कर्मी की मृत्यु के बाद दो दिन की सुर्खियों के बाद, फिर से उनेह कही पर भी उनेह बेधड़क सीवर में उतार दिया जाता है. ठेकेदारों और जलबोर्ड के अधिकारियो की संवेदनहीनता दृष्टिगत हो उठती है. लाजपतनगर में सीवर में उतरे तीनो युवक डेली वेजेस पर थे. उनेह इस काम के बदले 300-350/ रूपये दीये जाते थे. एक कर्मचारी मंथली सैलरी पर था जिसकी तनख्वाह 8000/ थी लेकिन उसे 2000 -5000/ रूपये तक मिलते थे. सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी इस अस्वच्छ कार्य हेतु नहीं दिया जाता. तीनो कर्मचारियों की उम्र 20 -32 वर्ष थी. चोथा कर्मचारी राजेश जो तीनो की खोज खबर लेने सीवर में उतरा थे वो भी जा कर बेहोश हो गया जिसे आम जनता ने अपनी मशक्कत से बाहर निकालाकर अस्पताल में दाखिल किया गया तत्पश्चात इलाज के बाद थोडा स्वस्थ हुआ. चार सदस्यीय दल सफाई कर्मचारी आयोग के नेतृत्व में तीनो कर्मचारियों के घर पर उनके परिवारों से मुलाक़ात करने और मौके पर घटी घटना की जानकारी लेने पहुंचा. सबसे पहले हम लोग पूछ पूछ कर कल्यानपुरी मन्नू के घर गये. छोटी छोटी तंग गलियों से गुजरते हुए हमें एसा लगा की हम स्वम् किसी गटर से गुजर रहे है. इन गलियों से एक साथ तीन व्यक्ति एक साथ नहीं चल सकते. ऊपर की छतों से गलिया पटी हुई थी. गलिय पार करके हम एक पार्क में पहुंचे. पार्क तो नाम का था दरअसल वह एक खुली जगह थी जिसके एक तरफ वाल्मीकि समाज रहता है. एक हजार परिवार का वाल्मीकि समाज इस दमघोटू माहौल में रहने का अभ्यस्त दीखा. ज्यादातर लोग सफाई के काम में लिप्त है यंहा करीब 200 महिलाए भी बाहर जा कर सफाई का काम करती है. मोनू के घर के सामने भरी धुप में एक सस्ता सा सामियाना टंगा हुआ था. एक तरफ महिलाए बैठ कर रो रही थी, तो थोड़ी दूरी पर परिवार व् समाज के कुछ पुरुष बैठ कर बीडी पी रहे थे. मोनू पुत्र श्री फूल सिंह उम्र 22 वर्ष जिसके दो बच्चे थे. गोद में एक बेटी जो अभी केवल ढाई महीने की थी और एक बेटा जो डेढ़ साल का था. उसकी पत्नी प्रीति 20 वर्ष की जिसने अभी जीवन के कोई सुख नहीं देखे थे गोद में दो बच्चो को ले कर विधवा हो गयी थी. अन्नू बेरोजगार था अतः डेली वजेस पर इसी तरह के काम करने चले जाता था. बीबी बच्चो के साथ साथ बुजुर्ग माँ-बाप की जिम्मेवारी भी उसके सर पर थी. सरकार और ठेकेदारों की मिली भगत से इस परिवार का एक जिम्मेदार कमाने वाला नौजवान जवानी आने से पहले ही दुनिया सिधार चुका था, मोनू के घर की हालत जान कर दुखी मन से हम दुसरे केस जोगिन्दर के घर खिचड़ीपुर की झुग्गियो में गये जन्हा पहले से ही केंद्र सरकार के एक संसद सदस्य, अनुसूचित जाती आयोग के अध्यक्ष वंहा पहुंचे हुए थे.

उनके वंहा जाने के बाद जोगिन्दर के बारे में पता चला कि उसकी उम्र ३२ वर्ष थे और बेरोजगारी के आलम की वजह से उसने शादी ही नहीं की थी.खिचड़ीपुर में वाल्मीकि समाज की करीब 600 घर थे. यंहा भी ज्यादातर लोग सफाई के काम में लिप्त है. यंहा की 60 प्रतिशत महीलाए भी बाहर काम करने जाती रही है. जोगिन्दर के घर से निकल कर हम लोग तीसरे केस दल्लू पूरा के दुर्गा पार्क में अन्नू के घर गये. यह एक मिक्स आबादी का घर था. कोण पर एक दूकान थी हमने उनके घर के बारे में पूछा तो गली में खड़े एक नौजवान ने इशारा करके हमें घर बताया, यह युवक दैनिक जागरण का फोटो ग्राफर था, सरकार की टीम का इन्जार कर रहा था. हमने घर पर दस्तक दी तो एक युवक बहर आया तो हमने बाते कि हम अन्नू के बारे में आये है हम जैसे ही घर में प्रवेश कर रहे थे तो बीच में ही हमे खुला शिट देखा, हम उसे पार करके घर में बैठे तो पता चला कि अन्नू की उम्र 28 वर्ष थी उसकी पत्नी की उम्र 27 साल थी उनका छ साल का बेटा भी था. अन्नू मासिक तनख्वाह पर था लेकिन उसे कभी पूरी तनख्वाह नहीं मिले कभी 2000/, कभी 4000/, कभी 5000/ से ज्यादा उनेह तनख्वाह नहीं मिली. उनकी पत्नी ने बताया कि घर खर्च चलने के लिए वो अपने मायके से वितीय मदद लगातार लेती रही है, यहां तक कि बिजली का बिल और बच्चे की 500/ फीस अपनी माँ और भाई से लेती है. अन्नू की माँ और भाई पत्नी और उसका 6 वर्ष का बच्चा अन्नू को खो कर बहुत ही दुखी दिख रहे थे.

रक्षाबंधन पर मिली भाई की लाश, बहने बाँध न सकी राखी

6 अगस्त की सुबह तीनो कर्मचारी घर से यह कह कर निकले कि कल रक्षाबंधन है बहने घर आएंगी तो काम करके थोडा पैसा हाथ में आजएगा तो त्यौहार मना लेंगे. अनुसूचित जातियों में ज्यादातर उप-जातिया हिन्दू परम्परा और त्यौहार मानाने के अभ्यस्त है, क्योंकि वे खुद को हिन्दु ही मानते रहे है. तीनो कर्मचारी जब शाम तक घर नहीं लौटे तो यही समझा गया कि अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती कर रहे होंगे. रात के दस बजे पुलिस का फोन रेखा पत्नी अन्नू को आया कि आपके पति बीमार है लाजपत नगर अस्पताल में सुबह आ जाना , पता पूछने पर कोई जबाब नहीं दिया गया. सुबह 10 बजे दुबारा से किसी का फोन आया कि अस्पताल से बॉडी ले जाओ. दिनभर और रात भर ये खबर पुलिश और जलबोर्ड ने ये सुचना घरवालो से छुपा कर रखी कि उनकी जीवन लीला 6 अग्स्त की दोपहर समाप्त हो चुकी थी. ये कैसी विडंबना है ? 7 अगस्त जब बहने राखी बाँधने भाइयो के घर आई तो उनेह भाई की कलाई पर राखी नहीं कफन देखने को मिला. यह खबर क्यों छुपायी गयी? क्यों परिवार को अँधेरे में रक्खा गया? ऐसा सदमा परिवार को क्यों दिया?

सीवर में मौत शाहदत क्यों नहीं मानी जाती? देश में तीन लोग महत्वपूर्ण है. सफाई कर्मचारी- किसान और बार्डर पर सैनिक. किसान अन्न उगा कर देश का पेट भरता है और सफाई कर्मचारी देश के भीतर खुद अस्वच्छ प्रक्रिया से गुजर कर देश को साफ सुथरा रखता है, नाली, सीवर, सेफ्टीटैंक, गटर मैनहोल साफ रखता है. बॉर्डर पर सैनिक को सम्मान जनक तनख्वाह , पेंशन, शहीद होने पर विधवा को कोटे से पैट्रोलपम्प आदि दिया जाता है ताकि उसका परिवार एक सम्मानजनक जिन्दगी जी सके और और उसके बच्चो का भविष्य उज्जवल हो सके . पिछले वर्ष बॉर्डर पर ६० जवान शहीद हुए जबकि उनकी तुलना में देश के भीतर 1471 सफाईकर्मी मौत के घाट उतर गये.यह दोगला व्यवहार क्यों? सफाई कर्मी को न यूनिफार्म है, न ईएसआई सुविधा, न नयूनतम वेतन, न सम्मानजनक व्यवहार , न ही मरने के बाद उनके बच्चो के भविष्य की सुरक्षा ?

एसा क्यों? क्या हम आज के लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुश्तैनी धंधो को क्या जातिगत पेशे में सुरक्षित रखना चाहते है? क्या सफाई कर्मचारी इस देश का नागरिक नहीं? सफाई कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये आर्डर की अवहेलना क्यों की जा रही है ? वर्तमान सरकार का दायित्व है की इस पर अपनी पैनी नजर रख कर पीडितो को न्याय दिलाये और अपराधियों को सख्त् से सख्त सजा दिलाये.

हमारी मांगे : – गटर, सीवर, मैनहोल, सैप्टिक टैंक की सफाई अनिवार्य रूप से मशीनों से करवाई जाए. – ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त की जाए – सफाई कर्मियों की भर्ती स्थायी की जाए – सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागु किया जाए – महिलाओ के लिए शौचालय , खाना खाने व् बैठने की जगह की व्यवस्था की जाए – क्रेच व् बच्चो के लिए खेलने व् पढने की व्यवस्था की जाए – महिलाओ को प्रसूति अवकाश वेतन सहित दिया जाए, एवं एबोरशन लीव भी मुहैय्या हो – एवजिदारो एवं अस्थायी कर्मचारियो को न्यूनतम वेतन दिया जाए – चिकित्सा सुविधा, युनिफोर्म , जूते ,एवं कार्यस्थल पर उपयोगी वस्तुए उपलब्ध हो. – जीपीएफ,लोन, एच.आर.ए एवं अन्य वितीय सुविधा अन्य सेवाओ की तरह सुगम की जाए – रिटायर्मेंट पर उनका पूरा पैसा दिया जाए और पेंशन भी नियमित रूप से दी जाए.

भवदीय कांता बौध (राष्ट्रिय दलित महिला आन्दोलन ) रजनी तिलक (अ.भ. दलित लेखिका मंच) डॉ. हंसराज सुमन (चेयरमैन-फ़ोरम आफ एकेडमिक फार सोशल जस्टिस), प्रोफेसर धर्मपाल पीहल( अध्यक्ष- प्रबुद्ध भारत)

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दलितों के लिए आज ″काला दिवस″

पुडुचेरी। पुडुचेरी तथा कुड्डालोर महाधर्मप्रांत एवं अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए बने आयोग ने निश्चय किया है कि वे दलित ईसाई और दलित मुसलमानों को अनुसूचित जाति के दर्जा में अस्वीकार करने के विरोध में 10 अगस्त को ″काला दिवस″ के रूप में मनायेंगे.

पुडुचेरी में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए बने आयोग के सचिव फा. ए. अर्पुथाराज ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि संविधान (अनूसूचित जाति) आदेश,1950 के अनुसार ‘कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो हिन्दू (सिक्ख या बौद्ध) धर्म के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म में आस्था रखता हो, को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जायेगा. इस आदेश में संसद द्वारा 1956 में संशोधन कर दलित सिक्ख व दलित बौद्धों को भी इसमें शामिल कर दिया गया. यह साफ़ है कि इस आदेश के तहत अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण केवल हिन्दुओं (सिक्ख या बौद्ध दलितों सहित) को उपलब्ध है, ईसाई या मुसलमान दलितों या किसी अन्य धर्मं के दलितों को नहीं. इसका अर्थ यह है कि अनुसूचित जाति का हिन्दू केवल तब तक ही आरक्षण का लाभ ले सकता है, जब तक कि वह हिन्दू बना रहे. अगर वह अपना धर्म परिवर्तित कर लेता है, तो वह आरक्षण का पात्र नहीं रहेगा. स्पष्त:, हमारे संविधान में अनुसूचित जाति की परिभाषा केवल और केवल धर्म पर आधारित है. इसलिए इस्लाम ईसाई व अन्य धर्म मानने वाले इससे बाहर हैं. मामले को उच्च न्यायालय में भेजा गया था फिर भी इसका गठन नहीं किया गया है.

फादर ने कहा कि दलित ईसाई और दलित मुसलमान संवैधानिक अधिकार से पिछले 67 वर्षों से धर्म के आधार पर वंचित हैं. उन्होंने बतलाया कि भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष निधिनाथन ने संबंधित क्षेत्रों, धर्मप्रांतों और संस्थानों में 10 अगस्त को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है. अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए बने आयोग के सचिव फा. ए. अर्पुथाराज ने जानकारी दी कि दलित ईसाईयों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए बैठकें, रैलियों, प्रदर्शनों और मोमबत्ती जागरण आयोजित की जाएगी.

सेल कंपनियों की सूची में शामिल कंपनियों का गड़बड़ी से इनकार

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नई दिल्ली। सरकार की ओर से जांच के लिए सेबी के पास भेजी गयीं और कथित कर चोरी और अन्य धोखाधड़ी की जांच का सामना कर रही 331 संदिग्ध मुखौटा कंपनियों में पार्श्वनाथ डेवलपर्स, एसक्यूएस इंडिया, जे कुमार तथा प्रकाश इंडस्टरीज भी शामिल हैं. हालांकि, इन कंपनियों ने किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है. नियामक ने शेयर बाजारों से ऐसी 331 कंपनियों के शेयरों में कारोबार को प्रतिबंधित करने को कहा है. इनमें से कुछ में कई चर्चित घरेलू तथा विदेशी निवेशकों का पैसा लगा हैं. इस प्रकार की कुछ अन्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवार्इ की आशंका से बाजार धारणा भी प्रभावित हुई.

नियामकीय और बाजार अधिकारियों के अनुसार, सूची में शामिल कंपनियों में से 162 के शेयरों में कारोबार पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है. इसके तहत इनमें महीने में एक बार कारोबार (माह के पहले सोमवार को) होगा. इसी प्रकार की कार्रवार्इ अन्य कंपनियों के खिलाफ जल्दी ही की जा सकती है. इन कंपनियों को पूंजी बाजार नियामक और शेयर बाजार के प्रतिबंध के अलावा दूसरी कार्रवार्इ का भी सामना करना पड़ सकता है, जो आयकर विभाग तथा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) समेत अन्य एजेंसियों की जांच पर निर्भर करेगा.

ऋतिक रौशन ने साइन की 100 करोड़ की डील

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ऋतिक रौशन ने हाल ही में 100 करोड़ की डील साइन की है. ऋतिक अपने लाइफ स्टाइल और फिटनेस ब्रांड एचआरएक्स के जरिए इस स्टार्ट अप को प्रमोट करेंगे.

इस मौके पर पहुंचे ऋतिक ने इस पर बात करते हुए कहा,’मैं पूरी दृढ़ता के साथ स्वस्थ जीवन शैली में विश्वास रखता हूं, जो एचआरएक्स का अभिन्न अंग है. यह न सिर्फ फिट रहने के बारे में है, बल्कि यह आपकी जीवन शैली और मन व शरीर के बीच संबंध की समझ को पूरी तरफ बदल देने के बारे में है.

जिस कंपनी के साथ ऋतिक ने ये डील साइन की है उसका इरादा आने वाले 5 वर्षों में देश में 500 आउटलेट खोलने का है.

आपको बता दें कि ऋतिक ने इस ब्रांड को 2013 में शुरु किया था.

शिक्षामित्रों का मानदेय 17000 रुपये करने का फर्जी आदेश वायरल

समायोजित शिक्षामित्रों का मानदेय 17000 रुपये तय करने से संबंधित फर्जी आदेश व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया. मंगलवार दोपहर वायरल हुए इस आदेश में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा के फर्जी हस्ताक्षर हैं, जो कि समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को निर्देशित है. मामला सचिव तक भी पहुंचा, तब जाकर उनको इस फर्जी आदेश की जानकारी हुई. सचिव ने इस मामले में सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर भेजी है. 25 जुलाई को सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद सरकार ने 1.37 लाख शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद से हटा दिया. इससे नाराज शिक्षामित्रों ने विद्यालयों में पठन-पाठन बंद करके प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था. पिछले सप्ताह शिक्षा मित्रों का प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिला था.

उस दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा मित्रों से उनके हित में निर्णय लेने के लिए 15 दिन का वक्त मांगा था और शिक्षण कार्य पूर्व की भांति करते रहने की अपील की थी. मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद शिक्षामित्र विद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाने में भी जुट गए लेकिन मंगलवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा के हस्ताक्षर से जारी आदेश शिक्षा मित्रों के बीच चर्चा का विषय बन गया.

अक्षर पटेल कर सकते हैं डेब्यू, जडेजा की जगह टीम में शामिल

नियमों का उल्लंघन करने के कारण एक टेस्ट का बैन झेल रहे रविंद्र जडेजा की जगह तीसरे टेस्ट में अक्षर पटेल लेंगे. मंगलवार को इस बात की पुष्टि की गई है. पल्लेकल टेस्ट में अक्षर पटेल के खेलते हैं तो ये उनके करियर का पहला टेस्ट होगा. अब संशय इस बात पर है कि क्या कुलदीप यादव को मौका मिलेगा या अक्षर ही टीम में आएंगे.

अक्षर पटेल अभी दक्षिण अफ्रीका में हैं, वह इंडिया ए का हिस्सा हैं. उन्हें तीसरे टेस्ट से पहले श्रीलंका बुलाया गया है. आपको बता दें कि अक्षर अभी तक 30 मैच में 35 विकेट ले चुके हैं. उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ अक्टूबर 2016 में खेला था.

आपको बता दें कि नंबर 1 टेस्ट गेंदबाज रविंद्र जडेजा पर आईसीसी ने एक मैच का बैन लगाया है. कोलंबो टेस्ट के तीसरे दिन, जब श्रीलंका की टीम दूसरी पारी में फॉलोऑन खेलने उतरी, तो उनकी पारी के 58वें ओवर में रवींद्र जडेजा ने अपने फॉलो थ्रू में गेंद को फील्ड करके क्रीज पर मौजूद श्रीलंकाई बल्लेबाज दिमुथ करुणारत्ने पर अनावश्यक थ्रो कर दिया, जबकि बल्लेबाज ने रन लेने प्रयास भी नहीं किया था.

जडेजा को आईसीसी की धारा 2.2.8 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है. इसका साफ मतलब यह है कि अनुचित या खतरनाक तरीके से किसी भी खिलाड़ी, खिलाड़ी के समर्थक, अंपायर या मैच रेफरी की ओर गेंद या कोई अन्य उपकरण जैसे पानी की बोतल आदि फेंकना गलत है.

इससे पहले जडेजा पर आचार संहिता की धारा- 2.2.11 के उल्लंघन के मामले में अक्टूबर 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर टेस्ट के दौरान 50 जुर्माने के साथ तीन डिमेरिट प्वाइंट लगाए गए थे. तब जडेजा को दो बार अनौपचारिक और एक आधिकारिक चेतावनी भी दी गई थी. वह चौथी बार पिच में सुरक्षित क्षेत्र में घुसे और उसे नुकसान पहुंचाया.

चीन में 6.5 तीव्रता के भूकंप से मची भारी तबाही, 100 के मारे जाने की आशंका

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बीजिंग। चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में आए 6.5 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही मची है. 100 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई है. हालांकि सरकारी टेलिविजन ने सात लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है. मगर चीन के आपदा नियंत्रण संबंधी राष्‍ट्रीय आयोग ने भूकंप प्रभावित इलाके में रहने वाले लगभग 100 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है.

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्‍हुआ के अनुसार, भूकंप से सात लोगों की मौत हुई है, जबकि 88 लोग जख्‍मी हो गए. इनमें 21 लोगों की स्थिति गंभीर है. यह भी बताया कि मारे जाने वालों में कम से कम पांच पर्यटक शामिल हैं. वहीं पीपुल्‍स डेली अखबार ने भूकंप में छह पर्यटकों समेत कुल नौ लोगों के मारे जाने और 130 से ज्‍यादा के जख्‍मी होने की बात कही है.

हालांकि चीन के नेशनल कमिशन फॉर डिजास्‍टर रिडक्‍शन ने कम से कम 100 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई है. 2010 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यहां की आबादी को देखते हुए यह बात कही गई है. सिचुआन प्रांत के जिस हिस्से में यह भूकंप आया, वह कम आबादी का क्षेत्र है. 13,000 से ज्यादा घरों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है.

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप का केंद्र प्रांतीय राजधानी चेंगदू से 300 किमी उत्तर में ज़मीन से दस किलोमीटर नीचे था और यह भारतीय समयानुसार मंगलवार रात करीब 1.20 पर आया.

गौरतलब है कि जिस जगह पर भूकंप आया है, 2008 में उसी के पास 8.0 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया था. इसमें 87,000 लोग या तो मारे गए या फिर लापता हो गए. एक स्‍थानीय रेस्त्रां कारोबारी ने बताया कि भूकंप के झटके 2008 से ज़्यादा तीव्र थे. भूकंप का जहां केंद्र था, उसके पास ही एक नेशनल पार्क है, जो पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है. इसलिए भूकंप में कई पर्यटकों के मारे जाने या घायल होने की आशंका है.

आदिवासी दिवस पर विशेष : भारत के छले हुए लोग

9 अगस्त को प्रत्येक वर्ष आदिवासी दिवस आते ही मन में यह प्रश्न उठता है कि हम आदिवासियों को अपने देश (आजाद भारत) में अबतक क्या मिला? यदि हम आदिवासियों के मुद्दों को लेकर संविधान सभा में हुई बहस पर गौर करें तो यह स्पष्ट दिखता है कि मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा आदिवासी मसले पर बहुत स्पष्ट थे. उनकी मौलिक मांग थी कि संविधान में आदिवासी शब्द को रखा जाये, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों को स्वायत्तता दी जाये और लोकतांत्रिक ढांचे में आदिवासियों को पीसने के बजाय देश को उनसे लोकतंत्र सीखना चाहिए क्योंकि वे धरती पर सबसे लोकतांत्रिक लोग हैं. इस बहस के दौरान देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने जयपाल सिंह मुंडा से कहा था कि आप दस वर्षों में आदिवासी शब्द को ही भूल जायेंगे. उनके कहने का तात्पर्य यह था कि भारत सरकार आदिवासियों के साथ संपूर्ण न्याय करेगी और उनकी पीड़ा हमेशा के लिए दूर हो जायेगी. यहां मौलिक प्रश्न यह है कि आज आदिवासी इलाकों में अंतहीन पीड़ा, क्रंदन और किलकारी क्यों है?

यद्यपि आजाद भारत के शासकों ने आदिवासियों के साथ न्याय करने का वादा किया था, लेकिन काम ठीक इसके विपरीत हुआ. भारतीय संविधान के मूर्त रूप लेते ही आदिवासी लोग छले गये. ब्रिटिश शासन के समय आदिवासियों के लिए अंग्रेजी में ‘अबॉरिजिनल’ शब्द का प्रयोग किया जाता था, जिसका अर्थ आदिवासी है. इसलिए जब संविधान का प्रारूप तैयार हुआ तो उसमें आदिवासियों के लिए संविधान के अनुच्छेद 13(5) में ‘अबॉरिजिनल और आदिवासी शब्द’ रखा गया था. संविधान सभा में बहस के दौरान जयपाल सिंह मुंडा ने कहा था कि हमें ‘आदिवासी’ शब्द के अलावा कुछ मंजूर नहीं होगा, क्योंकि यह हमारी पहचान का सवाल है. लेकिन, जातिवाद से ग्रसित नेताओं ने आदिवासियों के ऊपर जातिवाद को थोपते हुए संविधान में आदिवासियों को ‘जनजाति’ का दर्जा देकर उनके आदिवासी पहचान पर सीधा प्रहार किया. आजाद भारत में यह आदिवासियों के साथ सबसे बड़ा छलावा था, क्योंकि पहचान और अस्मिता की लड़ाई आदिवासियों की सबसे बड़ी लड़ाई है.

भारत में संविधान लागू होने के बाद देश के आदिवासी बहुल इलाकों में औद्योगिक विकास को गति मिली, क्योंकि ये इलाके खनिज संपदा से परिपूर्ण थे. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोवियत रूस के विकास मॉडल को यहां लागू करते हुए आदिवासियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित के लिए बलिदान दें. आदिवासी इलाकों में डैम बनाया गया, खनन कार्य बड़े पैमाने पर शुरू हुए और बड़े-बड़े उद्योग लगाये गये. इसका हस्र यह हुआ कि आदिवासियों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ और आदिवासी इलाके में गैर-आदिवासी जनसंख्या की घुसपैठ हुई. फलस्वरूप, आदिवासी लोग अपने ही इलाकों में अल्पसंख्यक हो गये. देशभर में लगभग एक करोड़ आदिवासी विस्थापित हुए हैं. सबसे दुखद बात यह है कि आदिवासियों की जमीन को डुबाकर बिजली पैदा करने के लिए डैम का निर्माण किया गया, लेकिन आदिवासी गांवों में बिजली नहीं है. उनकी जमीन पर सिंचाई परियोजना स्थापित की गयी, लेकिन उनके खेतों में पानी नहीं है. उनके इलाके में खनन कार्य हो रहा है, लेकिन बच्चे कुपोषित हैं और उनको शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हो सकी हैं. ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि विकास किसके लिए और किसकी कीमत पर? देश में सबसे पहले विकास परियोजनाओं का लाभ किसको मिलना चाहिए था? देश के विकास, आर्थिक तरक्की और राष्ट्रहित के नाम पर आदिवासियों के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है.

1980 के दशक में संघ परिवार को इस बात का एहसास हुआ कि आदिवासी बहुल राज्यों में शासन करना है, तो आदिवासियों की एकता को तोड़ना होगा और धर्म आधारित विवाद इसके लिए सबसे बड़ा हथियार है. इसी आधार पर संघ परिवार ने आदिवासियों के बीच सरना और ईसाई आदिवासी नामक हथियार को खोज कर निकाला. वर्ष 2000 पहुंचते-पहुंचते संघ परिवार ने आदिवासी इलाको में अपनी मजबूत पकड़ बना ली. इसी का परिणाम है कि आज देश के आदिवासी बहुल इलाकों के अधिकतर सीट भाजपा जीत पा रही है. इन इलाकों में आदिवासी लोग अपनी मूल लड़ाई को छोड़ धर्म के विवाद में फंस कर आपस में लड़ रहे हैं, जबकि आदिवासियों को आज तक धर्म कोड नहीं मिला. यह उनके लिए एक बड़ा छलावा है.

भारतीय संविधान में आदिवासियों के संरक्षण के लिए कानून तो बनाये गये, लेकिन नीतियों को लागू नहीं किया गया. जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हू-ब-हू लागू किया गया, लेकिन देश के अनुसूचित क्षेत्रों में अनुच्छेद 244(1) को सही ढंग से लागू ही नहीं किया गया. इसी तरह सीएनटी-एसपीटी जैसे भूमि रक्षा कानून, वन अधिकार कानून 2006, पेसा कानून 1996 जो आदिवासियों की जमीन और जंगल पर अधिकार तथा स्वायत्तता को बरकरार रखनेवाले कानूनों को सही ढंग लागू ही नहीं किया गया. जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2011 को ‘कैलास एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र सरकार’ स्पेशल लीव पीटिशन (क्रिमिनल) सं 10367 ऑफ 2010 के मामले में फैसला देते हुए कहा था कि आदिवासी लोग ही भारत के मूलनिवासी और देश के मालिक हैं. उनके साथ देश में सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है. अब उनके साथ और अन्याय नहीं होना चाहिए. दुर्भाग्य है कि आज भी आदिवासियों के साथ अन्याय जारी है और वे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

आदिवासी अस्मिता, अबुआ दिसुम अबुआ राज और प्राकृतिक संसाधनों पर मालिकाना हक की मांग पिछले तीन सौ वर्षों से आदिवासियों के संघर्षों की मूल मांगे हैं और उसी के तहत झारखंड, छत्तीसगढ़ और तेलांगना जैसे राज्यों की मांग की गयी थी. लेकिन, सबसे आश्चर्य की बात यह है कि झारखंड जैसे राज्य में भी सिर्फ 14 वर्षों में ही आदिवासियों के हाथों से सत्ता चली गयी. राज्य में मुख्यमंत्री गैर-आदिवासी को बनाया गया और आदिवासियों के सबसे बड़े संवैधानिक संस्थान ‘आदिवासी सलाहकार परिषद’ के अध्यक्ष पद पर भी गैर-आदिवासी ही विराजमान हैं. इसके अलावा झारखंड सरकार ने स्थानीय नीति बना कर बाहरी लोगों को झारखंडी घोषित कर दिया. आदिवासियों की जमीन सुरक्षा कानून सीएनटी-एसपीटी का संशोधन किया गया. फलस्वरूप, नौकरी, जमीन और जनसंख्या सब हाथ से निकल रहा है और आदिवासी अपने ही घर में बेघर हो रहे हैं.

आज बाहरी ताकतें आदिवासियों को धर्म के नाम पर आपस में लड़वा रही हैं. वहीं, केंद्र और राज्य सरकारें आदिवासियों को अपनी मूल लड़ाई से भटकाने की कोशिश में जुटी हैं, क्योंकि उन्हें उनकी जमीन, जंगल, पहाड़, जलस्रोत और खनिज संपदा चाहिए. इसलिए आदिवासी युवाओं को समझना चाहिए कि आज भी उनकी मूल लड़ाई है आदिवासी पहचान, अस्मिता, भाषा-संस्कृति, परंपरा और स्वायत्तता को बरकरार रखना तथा जमीन, जंगल, पहाड़, जलस्रोत और खनिज संपदा पर अपना मालिकाना हक हासिल करना. क्या आदिवासी युवा फिर से उलगुलान करेंगे? आदिवासियों के लिए आदिवासी दिवस उसी दिन सार्थक होगा, जिस दिन भारत के संविधान में अनुसूचित जनजाति की जगह आदिवासी शब्द डाला जायेगा, अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी स्व-शासन व्यवस्था कायम की जायेगी और आदिवासियों को प्राकृतिक संसाधनों पर मालिकाना हक दिया जायेगा.

यह लेख ग्लैडसन डुंगडुंग ने लिखा है. प्रभार: – प्रभात खबर

5 साल में क्रूज टूरिज्म को मिलेंगे 40 लाख टूरिस्ट

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सरकार का इरादा पांच साल में 40 लाख पर्यटकों को क्रूज टूरिज्म की तरफ आकर्षति करने का है. पिछलें साल यह आंकड़ा 1.80 लाख रहा है. केन्द्रीय सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी. समुद्री क्षेत्र में बड़े बड़े आलीशान जलपोतों में यात्रा करना क्रूज टूरिज्म कहलाता है. हालांकि, क्रूज टूरिज्म उद्योग भारत में माल एवं सेवाकर जीएसटी लगाये जाने को लेकर आशंकित है.

सडक परिवहन एवं नौवहन मंत्री ने यहां क्रूज टूरिज्म पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि यदि सही दिशा में कदम बढ़ाये जायें तो भारत में पर्यटकों को लेकर आने वाले जहाजों की संख्या मौजूदा 158 से बढ़कर सालाना 955 तक पहुंच सकती है. गडकरी ने कहा कि जल-विहार के पर्यटकों की संख्या बढ़ने से राजस्व लाभ 2022 तक 35,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. पिछले साल यह आंकड़ा 700 करोड़ रुपये था.

कार्नविल यूके के चेयरमैन डेविड डिंगल ने कराधान और बंदरगाह शुल्क जैसी कुछ चिंताओं को उठाया. उन्होंने कहा कि विकसित देशों के मुकाबले यह शुल्क यहां 50 प्रतिशत तक अधिक हैं. यूके कार्नविल दुनिया में क्रूज टूरिज्म का 42 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है. डिंगल ने कहा, भारत में क्रूज टूरिज्म से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर कोई जीएसटी नहीं लगना चाहिये.

यह केवल धन की बात नहीं है बल्कि सैद्धांतिक तौर पर क्रूज टूरिज्म को टिकट के दाम और यात्रा के दौरान क्रूज जहाज में होने वाली बिक्री पर जीएसटी लागू नहीं होना चाहिये. इस उद्योग में ऐसा नहीं हो सकता हॉ. यह समझाने की बात है कि क्रूज टूरिज्म अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में संचालित होता है. इसमें खपत का स्थान महत्वपूर्ण है, जो कि गहरा समुद्री क्षेत्र है, इसलिये इस पर जीएसटी नहीं लगना चाहिये.

अमेरिकी द्वीप गुआम पर हमले की तैयारी में उत्तर कोरिया

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यह ख़बर उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया से आई है. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की धमकी के कुछ ही घंटों बाद एक सैन्य बयान जारी किया है. उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी का कहना है कि गुआम पर मध्यम से लंबी दूरी के मिसाइल हमले के बारे में विचार किया जा रहा है. गुआम में अमरीकी सामरिक बमवर्षक विमानों के ठिकाने हैं. उत्तर कोरिया का यह बयान दोनों देशों के बीच ख़तरनाक तनाव को ही दर्शाता है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर और आर्थिक पाबंदी लगाई थी. दूसरी तरफ़ उत्तर कोरिया का कहना है कि यह उसकी संप्रभुता का हिंसक उल्लंघन है और इसके लिए अमरीका को क़ीमत चुकानी होगी.

बुधवार को उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने कहा कि गुआम पर हमले की तैयारी का मुआयना किया गया है. केसीएनए ने कहा कि गुआम के चारों तरफ़ हमले की तैयारी है. इसमें उत्तर कोरिया में ही बनी मिसाइल ह्वॉसोंग-12 का इस्तेमाल किया जा सकता है. उत्तर कोरिया की तरफ़ से मंगलवार को जारी सैन्य बयान में इस बात का ज़िक्र किया गया था. उत्तर कोरिया का यब बयान उस ख़बर के बाद आई है कि अमरीकी सेना ने गुआम में सैन्य अभ्यास किया है. उत्तर कोरिया के इस आक्रामक बयान से स्थिति और बिगड़ गई है.उत्तर कोरिया ने पांच बार परमाणु बम का परीक्षण किया है. इसके साथ ही जुलाई में इंटरनेशनल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का भी परीक्षण किया था. दावा है कि उसकी मिसाइल की क्षमता अमरीका तक को निशाने पर लेने की है. मंगलवार को अमेरिकी मीडिया में यह रिपोर्ट छपी थी कि उत्तर कोरिया ने परमाणु हथियारों को हासिल कर लिया है और उसकी मिसाइलों में भी परमाणु हथियारों से लैस होने की क्षमता है.

वॉशिंगटन पोस्ट में एक रिपोर्ट छपी है कि उत्तर कोरिया उम्मीद से ज़्यादा तेजी से अमेरिका को निशाने पर लेने वाली परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों को विकसित कर रहा है. जापानी सरकार ने भी एक श्वेतपत्र जारी किया है जिसमें बताया गया है कि उसके पास संभवतः परमाणु हथियार हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्तर कोरिया को धमकी देते हुए कहा था कि वह अमेरिका को चेताना बंद करे नहीं तो उसे ऐसे हमले का सामना करना पड़ेगा जिसे दुनिया ने कभी नहीं देखा होगा. हालांकि अमेरिकी सीनेटर जॉन मैकेन ने ट्रंप की चेतावनी पर संदेह जताया है. उन्होंने कहा कि वो इस मामले में आश्वस्त नहीं हैं कि ट्रंप ऐसा करने के लिए तैयार हैं.

दलित भाई, बहन को चाकू से गोदा

अलीगढ़। कोतवाली के गांव महगवां में दरवाजे के सामने पड़ी मिट्टी हटाने को लेकर मंगलवार को दो पक्षों में विवाद हो गया. आवेश में आए एक पक्ष ने दलित भाई-बहन को चाकू से गोद दिया. चाकू के हमले से युवक की हालत गंभीर है. उसे अलीगढ़ के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है. महगवां निवासी लाल सिंह ने बताया कि उनके घर के सामने गांव के ही दबंगों ने कई दिनों से मिट्टी डाल रखी है. मंगलवार को उनके बेटे राजेंद्र उर्फ राजू ने पड़ोसियों से मिट्टी हटाने के लिए कहा तो कहासुनी हो गई. इस पर दबंगों ने राजेंद्र को जमकर मारा पीटा.

इसी बीच भाई को बचाने उनकी बेटी राजकुमारी पहुंची तो उसे भी बेरहमी से पीटा गया. भाई-बहन पर दबंगों ने ईंट, पत्थर और चाकू से भी हमला किया. इससे उनकी हालत गंभीर है. आरोपी पक्ष में एक व्यक्ति पुलिस में तैनात है, इसीलिए थाना पुलिस आरोपी पक्ष को बचाने का प्रयास कर रही है. दलित की तहरीर पर पुलिस ने इंद्रपाल, बबलू आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.

हमले में आरोपी पक्ष की एक महिला भी थाने पहुंच गई. उसने पीड़ित पक्ष से फैसला करने के लिए आरजू मिन्नत करने लगी. कोतवाली में ही वह हमले में लाल सिंह के पैर पकड़कर बैठ गई. बोली कि अपने बेटे का इलाज कराओ, मेरा मंगलसूत्र ले जाओ पर मेरे पति के खिलाफ रिपोर्ट मत दर्ज कराओ. इलाज पर जितना खर्च होगा हम करेंगे, लेकिन फैसला कर लो. हालांकि पीड़ित परिवार समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ.

नहीं रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री सांवर लाल जाट

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पूर्व केंद्रीय मंत्री सांवरलाल जाट का बुधवार सुबह निधन हो गया है. सांवरलाल जाट पिछले काफी समय से बीमार थे और एम्स में भर्ती थे. कुछ दिन पहले ही उन्हें हार्ट अटैक आया था. सांवरलाल जाट मोदी सरकार में जल संसाधन राज्य मंत्री रह चुके हैं. सांवरलाल 62 वर्ष के थे, उनका जन्म 1 जनवरी 1955 को हुआ था. आपको बता दें कि जुलाई में राजस्थान की राजधानी जयपुर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कार्यक्रम में बेहोश होकर गिर पड़े थे. उनकी बिगड़ती तबीयत देखते हुए तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई थी और सांवरलाल जाट को एसएमएस अस्पताल पहुंचाया गया.

सांवरलाल जाट अजमेर से लोकसभा सांसद थे. वे मोदी सरकार में जल संसाधन राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. 9 नवंबर 2014 से 5 जुलाई 2016 तक उन्होंने जल संसाधन राज्य मंत्री के रूप में केंद्र में काम किया है.सांवरलाल का जन्म सन् 1955 में राजस्थान के अजमेर जिले के गोपालपुरा नामक गांव में हुआ. उन्होंने वाणिज्य में स्नातकोत्तर करने के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षक का कार्य किया. वे राजस्थान के अजमेर जिले की भिनाई विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं.1993, 2003 और 2013 में वे राजस्थान सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. 2014 से अजमेर से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें मंत्री बनाया गया था, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान हटा दिया गया.

सरकार को झकझोरने निकलेंगे लाखों मराठा

मुंबई। मराठा महारैली से आज मुंबई महाजाम से जूझ रही है. सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण के लिए मराठा समाज के लोगों के मुंबई की सड़कों पर उतरने से जगह-जगह जाम की खबरें आ रही हैं. मराठा समाज का यह मूक मोर्चा है. इसमें कोई नारेबाजी और भाषणबाजी नहीं है, ना ही इस मोर्चे में किसी राजनीतिक दल का बैनर है. बावजूद इसके मुंबई की रफ्तार थम सी गई है.

मराठा मोर्चा में शामिल होने के लिए मंगलवार से ही राज्य भर से लोग मुंबई पहुंचने शुरू हो गए थे. महाराष्ट्र के हर हिस्से से लोग मुंबई आ रहे हैं. मुंबई की तरफ आने वाले रास्तों पर बड़ी संख्या में भगवा झंडे लगाए हुए वाहन आते दिखाई दिए. मुंबई-पुणे और मुंबई-नासिक दोनों हाइवे पर मुंबई की ओर आने वाले यातायात में मंगलवार सुबह से ही रोज की अपेक्षा ज्यादा गाड़ियां दिखाई दीं. इसके अलावा मुंबई आने वाली बसों और ट्रेनों से भी लोग बड़ी संख्या में मुंबई पहुंच रहे हैं. खबर है कि मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और अन्य प्रदेशों में बसे मराठा समाज के लोग भी मोर्चे में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंच रहे हैं.

अहमद पटेल की जीत कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण

गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने दो सीटों पर कब्जा कर लिया. हालांकि यहां सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी सीट पर कांग्रेस के ‘चाणक्य’ अहमद पटेल को मिली जीत की है. राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के बाद मंगलवार को करीब 10 घंटे के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद नतीजे सामने आए, जिसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को 46-46 वोट मिले, वहीं अहमद पटेल ने 44 वोटों के साथ जीत दर्ज की. राज्य की 176 सदस्यीय विधानसभा में 2 कांग्रेसी विधायकों के वोट रद्द होने के बाद जीत का आंकड़ा 43.51 पहुंच गया. ऐसे में पटेल की जीत का अंतर भले ही मामूली दिखे, लेकिन राज्य की सियासत के हिसाब से देखें तो बड़े मायने रखती है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को हराने के लिए अमित शाह एंड कंपनी की तरफ से बेहद आक्रामक तैयारी दिखी. एक वक्त तो लगा कि अमित शाह ने मानो पटेल को हराने की ठान रखी है. वहीं कांग्रेस ने भी उन पर अपने विधायकों को डिगाने के लिए हर तरह के साम, दाम, दंड, भेद अपनाने के आरोप लगाए. ऐसे में चुनावी नतीजों के बाद एक बात तो साफ इन लड़ाई में कांग्रेस ही विजेता बनकर उभरी.

गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसी वजह से आम तौर पर बिना किसी शोर-शराबे के निपट जाने वाले राज्यसभा चुनाव में इस बार खूब हंगामा देखने को मिला था. यहां राजनीतिक जानकार अमित शाह की इन सारी कवायद को राज्य में चुनाव से पहले कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की थी. हालांकि इस लड़ाई में कांग्रेस ही विजेता बनकर उभरी, जो उसके लिए संजीवनी जैसी है.

यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि गुजरात के कद्दावर नेताओं में शंकरसिंह वाघेला ने राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दामन छोड़ दिया. वाघेला की इस घोषणा के समय कांग्रेस ने इसे ज्यादा तरजीह न देते हुए कहा था कि उनके जाने से पार्टी को कोई खास नुकसान नहीं होगा. हालांकि इन चुनावों में कांग्रेस के अंदर मची फूट ने पार्टी को वाघेला कैंप की शक्ति का वक्त रहते एहसास करा दिया. ऐसे में पार्टी के पास इस नुकसान की भरपाई के लिए अब समय मिल जाएगा.

दरअसल कांग्रेस इस बार राज्य में पाटीदारों, दलितों और दूसरे पिछड़े तबकों के भीतर सरकार के प्रति असंतोष को भुनाते हुए बीजेपी को सत्ता से उखाड़ फेंकने की उम्मीद लगाए है. यहां राज्यसभा में अगर उसकी फजीहत होती, तो उसके लिए राज्य में उसके लिए विकल्प के रूप में लोगों का भरोसा जीतना थोड़ा मुश्किल हो जाता.

ऐसे में अब अहमद पटेल की इस जीत ने कांग्रेस के अंदर एक उम्मीद जरूर जगाई है, हालांकि पार्टी को गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में इस उम्मीद को जगाने रखने और पूरी ऊर्जा से चुनाव में जुट जाने की जरूरत होगी.

‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वाले भाजपा नेता कहां हैं? : मायावती

mayawati

नई दिल्ली। बसपा अध्यक्ष मायावती ने भारत हरियाणा सरकार और हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष पर निशाना साधा है. हरियाणा के भाजपा अध्यक्ष के बेटे पर अपहरण और पीछा करने के मामले में कमजोर धाराएं लगाकर छोड़ देने के मामले में मायावती पीड़ित लड़की के पक्ष में आ गई हैं.

मायावती ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे मामूली घटना बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की है जोकि बहुत ही दुखद है यही नहीं भाजपा के बड़े-बड़े नेता भी इस जघन्य घटना पर ना केवल मौन हैं बल्कि इसका बचाव भी करने पर अमादा हैं.

मायावती ने अपने बयान में कहा कि भाजपा शासित राज्यों में दलितों, शोषितों, उपेक्षितों, पिछड़ों और मुस्लिम एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ महिला उत्पीड़न व अन्याय की घटना आम बात हो गई है. भाजपा शासित राज्यों में कानून राज नहीं बचा है. हरियाणा की बीजेपी तो इन मामलों में खासतौर से बहुत ही बदनाम सरकार है.

बसपा सुप्रीमों ने कहा कि महिला उत्पीड़न व शोषण के इतने गंभीर मामले में भी बीजेपी की हरियाणा सरकार द्वारा घोर लापरवाही व पक्षपात करने की जितनी भी निन्दा की जाय वह कम है. उन्होंने कहा कि हरियाणा की वर्तमान घटना ने यह साबित कर दिया है कि उसकी सरकारों को न्याय प्रिय नहीं हैं. महिला सम्मान, बेटी बचाओ, गौरक्षा, लवजेहाद, एण्टी-रोमियों’ आदि केवल नारेबाजी व शिगुफाबाजी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को बहकाकर उनका वोट हासिल करके सत्ता पर कब्जा किया जा सके.  फिर उसके बाद सत्ता का हर प्रकार से दुरूपयोग करके आरएसएस के तमाम गुप्त एजेण्डों पर अमल करके देश को ’अंधकार युग’ में वापस ढकेला जा सके.