बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा दोगला व जन-विरोधीः मायावती

लखनऊ। यूपी में आने वाले सभी मण्डल, जिला व विधान सभा यूनिट के सभी प्रमुख बसपा नेता और कार्यकर्ताओं की लखनऊ में बैठक हुई. बैठक में ‘बसपा का सपना, सरकार हो अपना’ के नारे साथ हर तरह से संघर्ष करने की बात हुई.

लखनऊ कार्यालय में आयोजित इस बैठक में बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फीडबैक के आधार पर यह महसूस किया कि भाजपा और आरएसएस जातिवादी और सांप्रदायिक नीतियों से गरीब, दलित, पिछड़ों को सरकारी स्तर पर काफी तिरस्कार झेलना पड़ रहा है. इसके साथ-साथ इन लोगों पर अत्याचार बढ़ गया है.

इन वर्गों का हित एवं सशक्तिकरण हर स्तर पर लगातार प्रभावित हो रहा है. जिससे ’’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’’ का मिशनरी लक्ष्य बुरी तरह से पिछड़ने लगा है, जो देशहित में बड़ी चिंता की बात है. इसके अलावा दलित व अन्य उपेक्षित वर्गों के मन में आज यह सवाल है कि देश में इन वर्गों की अपनी सरकार क्यों नहीं?

भाजपा-आरएसएस द्वारा दलितों और मुस्लमानों को भयभीत करके उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक जैसा जीवन व्यतीत करने को मजबूर करने वाला माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है. जिसके विरूद्ध बसपा का संघर्ष स्वाभाविक है क्योंकि बहुजन समाज के दोनों अभिन्न अंगों के बीच आपसी एकजुटता व भाईचारा उच्च संवैधानिक लक्ष्यों की प्रप्ति हेतु जरूरी है.

इस विशेष बैठक को सम्बोधित करते हुये बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डों के साथ-साथ असंवैधानिक व अलोकतान्त्रिक नीति व व्यवहार के कारण आज देश में हर तरफ भय, आतंक, हिंसा, बेचैनी व एक प्रकार से अफरातफरी जैसा माहौल है.

ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं, बुद्धजीवी व व्यापारी वर्ग के साथ-साथ दलितों, पिछड़ों व मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति भाजपा सरकार का रवैया लगातार निरंकुश व दमनकारी होता जा रहा है जिससे पूरा देश चिन्तित है. लेकिन इसे महसूस कर आवश्यक सुधार करने के बजाय भाजपा सरकार का अहंकार देश को लगातार त्रासदी की तरफ अग्रसर कर रहा है.

मायावती ने कहा कि बसपा एक राजनीतिक पार्टी के साथ-साथ एक मिशनरी मूवमेन्ट भी है, जो बाबासाहेब डा. अम्बेडकर के कारवां की देश में एक मात्र सशक्त राजनैतिक पार्टी है. इसने अपने राजनीतिक सफर में अबतक काफी उतार-चढ़ाव देखें हैं. बसपा की असलियत यह है कि इसने ना बिकने वाला एक शक्तिशाली समाज बनाया है जो बाबासाहेब डा. अम्बेडकर व मान्यवर कांशीराम की असली इच्छा थी. यही कारण है कि खासकर उत्तर प्रदेश में बसपा ने सत्ता की मास्टर चाबी चार बार अपने हाथ में लेकर अपना उद्धार स्वयं करने के बाबासाहेब के सपने को जमीनी हकीकत में बदलने का काम किया है.

इसी का एक परिणाम यह है कि लगातार बेहतर वोट प्रतिशत प्राप्त करने के बावजूद भी बसपा 2014 के लोकसभा आमचुनाव में कोई सीट नहीं जीत पायी और 2017 के विधान सभा आमचुनाव में अपेक्षा से काफी कम सीटें जीत पायी. यह सब पार्टी की कमजोरी से ज्यादा उन साजिशों का ही परिणाम है जो बसपा व उसके नेतृत्व के खिलाफ लगातार की जा रही है ताकि अम्बेडकरवादी कारवाँ को सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने से दूर रखा जा सके. लेकिन यह स्थिति हमेशा बरकरार रहने वाली नहीं है.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि इन चुनावी नतीजों का ही दुष्परिणाम है कि आज देश व उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में भाजपा एण्ड कम्पनी की संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व जनविरोधी सोच वाली सरकारें हैं और समाज के कमजोर, उपेक्षित व शोषित वर्ग के लोगों पर हर प्रकार की जुल्म-ज्यादती, अन्याय, शोषण, भेदभाव आदि के पहाड़ टूट रहे हैं और इन लोगों की गुलामी, लाचारगी के अंधकार में दोबारा धकेलने का प्रयास लगातार किया जा रहा है तथा इनके खिलाफ लोकतान्त्रिक तरीके से आवाज उठाने पर तानाशाही रवैया अपनाकर इनकी आवाज को संसद तक में कुचला जा रहा है.

इतना ही नहीं बल्कि भाजपा की नफरत की राजनीति अब इतनी ज्यादा कट्टरवादी व द्वेषपूर्ण हो गयी है कि विरोधी पार्टी के नेताओं के खिलाफ जानलेवा हमले भी करवाये जा रहे हैं, यह सब लोकतंत्र के लिये शुभ लक्षण कतई नहीं है जिसके विरूद्ध लोगों को सचेत व संगठित करना बहुत जरूरी है. इस प्रकार की अक्रामकता व अराजकता इसलिये जारी है क्योंकि बीजेपी सरकारें इन्हें शह व संरक्षण दे रही है.

‘ब्लू व्हेल’ के शिकार छात्र ने की आत्महत्या की कोशिश

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इंदौर। निजी स्कूल में गुरुवार को सातवीं के एक छात्र ने तीसरी मंजिल की बालकनी से छलांग लगाकर जान देने की कोशिश की. इसके पीछे सुसाइड गेम ‘ब्लू व्हेल’ का नाम सामने आया है. छात्र ने बताया कि वह पिता के मोबाइल पर गेम खेलता था. गेम की आखिरी स्टेज पार करने के लिए ऊंची इमारत से छलांग लगाने का विकल्प मिला था. इसके बारे में उसने एक दिन पहले ही इंटरनेट पर सर्च किया था.

घटना राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित चमेलीदेवी स्कूल की है. सिलिकॉन सिटी निवासी 12 वर्षीय छात्र सुबह 7.20 बजे तीसरी मंजिल पर पहुंचा और बालकनी से कूदने लगा. सहपाठियों ने उसे रेलिंग पर चढ़ते देखा और शोर मचाते हुए दौड़े. तीन छात्र और स्पो‌र्ट्स टीचर मो. शेख फारुक ने उसे छलांग लगाने से पहले ही पकड़ लिया. छात्र ने बताया कि वह ‘ब्लू व्हेल’ गेम खेल रहा था.

गेम के नियमों के मुताबिक अंतिम स्टेज पार करने के लिए उसे आत्महत्या करनी थी. वह सुबह ही इसकी योजना बना चुका था. पहले वैन से कूदना चाहता था, लेकिन गेम में ऊंची इमारत पर चढ़कर कूदने का नियम है. प्रार्थना समााप्त होते ही क्लास रूम पहुंचा. बैग रखकर बाहर आया और रेलिंग से कूदने की कोशिश की. उधर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. प्राचार्य संगीता पोद्दार के मुताबिक छात्र घबराया हुआ था. उसने बताया कि आज वह दोस्तों से दूर चला जाता.

स्कूल कर्मचारी अभिषेक मिश्रा के मुताबिक बच्चे के पिता फोर्स मोटर्स (पीथमपुर) में नौकरी करते हैं. छात्र ने बताया कि वह छिप-छिपकर पिता के मोबाइल में ब्लू व्हेल गेम खेलता था. गेम की सभी स्टेज स्कूल डायरी में नोट कर लेता था. उसने 49 स्टेज पार कर ली थी. 50वीं स्टेज के बारे में उसे जानकारी नहीं थी. दो दिन से डायरी भी नहीं मिल रही थी. इंटरनेट पर सर्च करने पर पता चला कि 50वीं स्टेज में ऊंची इमारत से कूदना है.

12 अगस्त को गगाल में होगा दलित स्वाभिमान सम्मेलन

भाजपा 12 अगस्त को गगाल के राजेंद्रा पैलेस में विशाल दलित स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन करेगी। महामंत्री पवन शर्मा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष सुनील कुमार सोनू ने बताया कि प्रदेश के सभी मंडलों में कमजोर, पिछड़े तथा दलितों के सम्मान के लिए अनुसूचित जाति मोर्चा के सहयोग से दलित स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। नादौन के गगाल में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, इसमें 1400 अनुसूचित जाति के लोग भाग लेंगे। इसमें एससी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सिकंदर, विधायक विजय अग्निहोत्री भी भाग लेंगे।

विधायक की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए दलित

वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक देवेंद्र निम ने कहा कि भाजपा सबका साथ-सबका विकास के एजेंडे पर कार्य कर रही है. केन्द्र में मोदी, प्रदेश में योगी सरकार आम जन के लिए कल्याणकारी योजना चला रहे हैं. इसके परिणाम देश की जनता को मिलने लगे हैं.

यहां बाबा छात्रावास में आयोजित भाजपा के एक कार्यक्रम में विधायक देवेन्द्र निम के नेतृत्व में सौ से भी ज्यादा दलित ससमाज के लोगों ने भाजपा के शामिल होने की घोषणा की. पार्टी नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले दलित समाज के लोगों का फूल मालाओं से स्वागत किया. देवेन्द्र निम ने कहा कि भाजपा प्रत्येक वर्ग के लोगों को बराबर का सम्मान देने का काम करती है. उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार आमजन के उत्थान के लिए कार्य कर रही है, भाजपा पूरे प्रदेश को खुले में शौच मुक्त करने के लिए गांव-गांव में शौचालय निर्माण कराने का कार्य कर रही है. कहा कि भाजपा में ही दलितों का हित है वही उनके अधिकारों को दिलाने का काम कर रही है.

सामने आया PAK का नापाक इरादा

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वॉशिंगटन: भारत को परमाणु हमले की धमकी देने वाले पड़ोसी देश पाकिस्तान का नापाक इरादा सामने आया है. दरअसल पाक ने अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को छुपाने के लिए एक सीक्रेट जगह बनाई है. इस बात का खुलासा एक अमरीकी थिंक टैंक के दावे के बाद हुआ है.

अमरीकी थिंक टैंक ने सैटेलाइट से ली गई फोटोज और जांच के आधार पर यह दावा किया है कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बलूचिस्तान के सुदूर पहाड़ी इलाकों में जमीन के नीचे छिपाकर रखा है.

अमरीका की एक गैर लाभकारी और गैर सरकारी संस्थान ‘इंस्टीट्यूट फॅार साइंस एंड इंटरनेशनल सेक्युरिटी’ ने बताया कि सैटेलाइट के फोटोज की जांच करने के बाद पूरी तरह सुरक्षित अंडरग्राउंड परिसरों वाले इस स्थान का पता चला है. उसने एक रिपोर्ट में कहा कि दक्षिण पश्चिम प्रांत में यह अंडरग्राउंड परिसर बैलेस्टिक मिसाइल और परमाणु आयुध भंडारण स्थल के रूप में काम कर सकता है. वैसे इस परिसर का उद्देश्य अब तक सार्वजनिक रुप से उपलब्ध नहीं है।

हालांकि इस परिसर में हथियारों के भंडारण का मकसद स्पष्ट नहीं है. वहीं रिपोर्ट तैयार करने वाले डेविड अलब्राइट, सारा बुरखर्द, अलीसन लैच और फ्रैंक पाबियन ने कहा, ‘इस जगह का इस्तेमाल सामरिक महत्व के हथियार भंडारण से ही है. ताकि वह जरूरत पड़ने पर अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कम से कम समय में कर सकें.’

पार्टी में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं सोनिया गांधी: जेडीयू

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नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय महासचिव ने आज सोनिया गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विपक्ष की बैठक में जेडीयू को बुलाकर सोनिया गांधी ने हमारी पार्टी में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं.

गौरतलब है कि गुजरात राज्यसभा चुनाव में मुश्किल लड़ाई जीतने के बाद कांग्रेस ने विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास फिर से शुरू कर दिया है. इस सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में 18 विपक्षी दलों की बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में बुलाई गई है.

सूत्रों ने बताया कि विपक्षी नेताओं की बैठक संसद के पुस्तकालय में होगी. इस दौरान उन मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनके सहारे केंद्र सरकार को घेरा जा सकता है. संसद का मानसून सत्र खत्म होने के बाद केंद्र के खिलाफ क्या रणनीति हो, इस मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी. केसी त्यागी ने कहा कि कहा कि विपक्ष की बैठक में जेडीयू को बुलाकर सोनिया गांधी ने हमारी पार्टी में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं।

शरद यादव को भी विपक्षी नेता के तौर पर बैठक के लिए न्योता भेजा गया है. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के खेमा बदलने से एकजुटता के प्रयासों को लगे बड़े झटके के मद्देनजर सोनिया गांधी के साथ अब ममता बनर्जी भी इस दिशा में सक्रियता दिखाएंगी.

ट्रेन के सामने कूदे बक्सर के DM

 

नई दिल्ली। बिहार के बक्सर जिले के डीएम मुकेश कुमार पांडे ने बीती रात गाजियाबाद में ट्रेन के आगे आकर खुदकुशी कर ली. गाजियाबाद स्टेशन से 1 किलोमीटर दूर कोटगांव के पास रेलवे ट्रैक पर उनका शव मिला. फ़िलहाल जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इस खुदकुशी की मिस्ट्री दिल्ली से शुरू होती है. गुरुवार शाम 6:30 बजे दिल्ली पुलिस को डीएम के दोस्तों ने ख़बर दी कि डीएम मुकेश पांडे जनकपुरी मॉल में सुसाइड करनेवाले हैं. उन्होंने वाट्सऐप के ज़रिए इसकी जानकारी दी. पुलिस मौक़े पर पहुंची, लेकिन डीएम वहां नहीं मिले. मॉल के सीसीटीवी फ़ुटेज में वह शाम 5:55 बजे मॉल से बाहर जाते दिखे हैं. बताया जा रहा है कि वे यहीं से ग़ाज़ियाबाद के लिए निकले थे, जहां उन्होंने ख़ुदकुशी की. डीएम ने अपने दोस्तों को भेजे मैसेज में लीला पैलेस होटल में अपना सुसाइड नोट होने की बात कही थी. पुलिस ने अब वह सुसाइड बरामद कर लिया गया है.

सूत्रों का कहना है कि मुकेश पांडे काफ़ी समय से तनाव में चल रहे थे. साथ ही पारिवारिक समस्याओं से भी जूझ रहे थे. छपरा के रहनेवाले मुकेश पांडे 2012 बैच के आईएएस अफ़सर थे और बीते 31 जुलाई को ही बक्सर ज़िले के डीएम का पदभार संभाला था. आईएएस के तौर पर यह उनकी पहली पोस्टिंग थी. इससे पहले वह कटिहार में बतौर डीडीसी तैनात थे.

सुसाइड नोट में मुकेश ने लिखा “मैं मुकेश पांडे, आइएएस 2012 बैच बिहार कैडर,अभी बक्सर में डीएम के पद पर तैनात हूं. मैं अपने निजी परेशानियों की वजह से ख़ुदकुशी कर रहा हूं. कृपया करके मेरी मौत के बाद मेरे रिश्तेदारों को इसकी सूचना पहुंचा देना. मैं अभी दिल्ली के लीला पैलेस होटल के रूम नंबर 742 में रह रहा हूं. मेरी ख़ुदकुशी की वजह मेरे बैग में हैं जो होटल के कमरे में रखा है.”

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है. मुकेश पांडेय की मौत हृदयविदारक है. वह कुशल प्रशासक, संवेदनशील पदाधिकारी थे. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. वहीं बीजेपी नेता अश्विनी चौबे ने कहा कि यह इस परिवार के लिए दुखद समय है. मैं इस परिवार से बहुत पहले से जुड़ा था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार- होटल लीला से मिले सुसाइड नोट में पत्नी और मां-बाप के बीच झगड़े से परेशान होने की बात सामने आ रही है.

13वें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ली पद एवं गोपनीयता की शपथ

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति पद के लिए वेंकैया नायडू ने शपथ ले ली है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में शपथ ग्रहण कार्यक्रम हुआ. उस समय पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत सभी बड़े नेता मौजूद थे. वह आज सवेरे सबसे पहले राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की थी. इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही में सभापति के तौर पर हिस्सा लिया.

वहीं हामिद अंसारी ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन मुस्लिमों की बेचैनी की बात की थी. इसके जवाब में उप-राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले वेंकैया नायडू ने बिना नाम लिए अंसारी के बयान पर निशाना साधा. उन्‍होंने देश में अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना होने की बात को महज ‘राजनीतिक प्रचार’ बताकर खारिज कर दिया. वेंकैया नायडू ने यद्यपि किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को पूर्व उप-राष्ट्रपति अंसारी के एक टीवी साक्षात्कार की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के मुसलमानों में असहजता और असुरक्षा की भावना है, और ‘स्वीकार्यता का माहौल’ खतरे में है. नायडू ने कहा, ‘कुछ लोग कह रहे हैं कि अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं. यह एक राजनीतिक प्रचार है. पूरी दुनिया के मुकाबले अल्पसंख्यक भारत में ज्यादा सकुशल और सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है.’ उन्होंने इस बात से भी इत्तेफाक नहीं जताया कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और कहा कि भारतीय समाज अपने लोगों और सभ्यता की वजह से दुनिया में सबसे सहिष्णु है. उन्होंने कहा कि यहां सहिष्णुता है और यही वजह है कि लोकतंत्र यहां इतना सफल है.

वेंकैया नायडू ने विपक्ष के उम्मीदवर गोपालकृष्‍ण गांधी को 272 वोटों से हराया था. वेंकैया नायडू को 516 वोट मिले जबकि गोपालकृष्ण गांधी को 244 मत मिले. विजय गोयल, सांवरलाल जाट, अनु आगा, एनके सारनिया, अब्दुल वहाब, पीके कुन्हालीकुट्टी, कुणाल कुमार घोष, तापस पॉल, प्रोतिमा मंडल, अभिषेक बनर्जी, मौसम नूर, रानी नारा उदयनराजे भोसले , अंबुमनि रामदौस वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाए थे.

वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई, 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ. नेल्लोर से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से राजनीति में स्नातक किया. विशाखापट्टनम के लॉ कॉलेज से अंतरराष्ट्रीय कानून में डिग्री ली. कॉलेज के दौरान ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए. नायडू पहली बार 1972 में जय आंध्रा आंदोलन से सुर्खियों में आए. 1975 में इमरजेंसी में जेल भी गए थे. -1977 से 1980 तक यूथ विंग के अध्यक्ष रहे. महज 29 साल की उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने. 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे. बीजेपी के विभिन्न पदों पर रहने के बाद नायडू पहली बार कर्नाटक से राज्यसभा के लिए 1998 में चुने गए. इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने.

फूलन देवी: वह दस्यु सुंदरी

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70-80 के दशक में यूपी-एमपी के बीहड़ों में डाकुओं का खौफ पसरा रहा करता था. दोनों ही राज्यों के सीमावर्ती इलाके डाकुओं के लिए सबसे बेहतर पनाहगार थे. इन्हीं दस्यु सरगनाओं में एक नाम तेजी से चढ़ा जिसे बीहड़ में ‘फूलन’ कहा जाता था. फूलन को लोग फूलन देवी और बाद में बैंडिट क्वीन के नाम से भी याद करते हैं. फूलन की शख्सियत ही कुछ ऐसी थी कि उसके ऊपर फिल्म भी बनी और किताब भी लिखी गई.

फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव गोरहा का पूरवा में हुआ था. बचपन से उसने जातिप्रथा और गरीबी का दंश झेला था. 11 साल की छोटी सी उम्र में फूलन की शादी उसे काफी बड़े आदमी से करा दी गई थी. छोटी सी उम्र में भारी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना ने उसे अंदर से बागी बना दिया. जिसकी वजह से वह अपने ससुराल से भाग कर अपने मायके वापस आ गई. फूलन ने बीहड़ में 1976 से 1983 तक राज किया. इंदिरा गांधी की पहल पर फूलन ने 12 फरवरी, 1983 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने अपनी शर्तों पर आत्मसमर्पण किया. जेल से छूटने के बाद वह राजनीति की दुनिया में आ गईं और सांसद बनीं. उस दौर में समाज में ऊंची जातियों का ही बोलबाला था. इसी वजह से छोटी-छोटी बातों पर फूलन को डांट पड़ा करती थी. एक दिन फूलन की किसी बात पर नाराज गांव के ठाकुरों ने उसे सबक सिखाने की ठानी. जिसका परिणाम हुआ कि फूलन को 15 साल की छोटी सी उम्र में सामूहिक बलात्कार का सामना करना पड़ा. ऐसा कहा जाता है कि फूलन को रास्ते से हटाने के लिए गांव के मुखिया ने डकैतों को बुलाया था. लेकिन वे उसे अपने साथ उठा ले गए. बीहड़ में भी दस्यु सरगना श्रीराम और उसका भाई लाला राम ने फूलन के साथ कई बार बलात्कार किया. बीहड़ में ही फूलन की मुलाकात विक्रम मल्लाह से हुई और दोनों ने मिलकर अपना खुद का अलग गिरोह बना लिया.

फूलनदेवी सबसे पहली बार (1981) में उस वक्त राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं जब उन्होंने और उनके गैंग ने कानपुर के बेहमई गांव में ऊंची जातियों के बाइस लोगों का एक साथ तथाकथित (नरसंहार) किया. इसे बेहमई हत्याकांड के नाम से भी जाना जाता है. लेकिन बाद में फूलन ने इस नरसंहार से इंकार कर दिया था. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार के अलावा प्रतिद्वंदी गिरोहों ने फूलन को पकड़ने की बहुत सी नाकाम कोशिशें कीं. इंदिरा गांधी की सरकार ने (1983) में उनसे समझौता किया की उन्हें (मृत्यु दंड) नहीं दिया जाएगा और उनके परिवार के सदस्यों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. फूलन ने इस शर्त को मान लिया क्योंकि उस वक्त तक उनके करीबी विक्रम मल्लाह की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी थी, जिसने फूलन को अंदर से तोड़ दिया था. 12 फरवरी, 1983 को फूलन ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. बिना मुकदमा चलाये ग्यारह साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने छोड़ दिया. दरअसल उस वक्त दलित लोग फूलन के समर्थन में गोलबंद हो रहे थे और फूलन दलित समुदाय में एक नायक की छवि के रुप में तेजी से बढ़ रही थीं. अपनी रिहाई के बाद फूलन ने बौद्ध धर्म में अपना लिया. 1996 में फूलन ने उत्‍तर प्रदेश के भदोही सीट से लोकसभा का चुनाव जीता और संसद पहुंचीं.

25 जुलाई 2001 की सुबह शेर सिंह राणा खुद फूलन देवी से मिलने गया था वहां उसने अपना फर्जी नाम शेखर बताया था. राणा ने फूलन के सामने उनकी एकलव्य सेना से जुड़ने की मंशा जाहिर की थी. इसी मुलाकात के दौरान राणा को फूलन ने खीर खाने को दी थी. क्योंकि उस दिन नागपंचमी का त्योहार था. उसी दिन तकरीबन 11 बजे फूलन देवी सरकारी बंगले से संसद भवन के लिए रवाना हो गईं लेकिन राणा उनके घर से गया नहीं वह बाहर बनी लॉबी में बैठा रहा. दोपहर करीब डेढ़ बजे जब फूलन देवी संसद भवन से वापस अपने आवास पहुंचीं राणा ने फुर्ती से गोलियां चला दीं जिससे उनकी मौत हो गई. यह बातें फूलन के पति उम्मेद सिंह ने खुद मीडिया को बताई थीं. आपको बता दें कि उम्मेद सिंह से फूलन ने 1994 में शादी की थी जब वे जेल से छुटकर बाहर आई थीं. उम्मेद सिंह की पहली शादी फूलन की बहन के साथ हुई थी.

25 साल के हो चुके शेर सिंह राणा ने घटना के तुरंत बाद अपने को कानून के हवाले कर दिया था और देहरादून डालनवाला थाने में हुई प्रेस कांफ्रेंस में यह स्वीकार किया था कि उन्होंने बेहमई में फूलन के हाथों मारे गए 22 क्षत्रियों की हत्या का बदला लिया था. इस बात की तस्दीक संयुक्त पुलिस आयुक्त के के पॉल ने भी दिल्ली में की थी। उन्होंने कहा था, “वह खुद चलकर पुलिस थाने आया और आत्मसमर्पण कर दिया.” फूलन की हत्या के बाद पुलिस ने फूलन के परिवार वालों से भी पूछताछ की. फूलन के पति उम्मेद सिंह से भी दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की. तत्कालीन खबरों की मानें तो उम्मेद सिंह और फूलन के रिश्तों में कुछ गड़बड़ चल रही थी. लोगों का अनुमान था कि फूलन कोई वसीयत भी बनवा रही थीं. माना जा रहा था कि वसीयत में शायद घर और किताब से आने वाली रॉयल्टी में उम्मेद सिंह का हक न होने की बात रखी जाने वाली थी. पुलिसिया पूछताछ के दौरान उम्मेद सिंह ने ऐसी किसी भी वसीयत के होने से इनकार किया था और फूलन के साथ उनके रिश्तों को भी बेहतर बताया था. उम्मेद सिंह का कहना था कि हमारी लड़ाई कभी इतनी गंभीर नहीं हुई.

फूलन हत्याकांड को लेकर समाजवादी पार्टी और मीडिया पुलिस पर दबाव बना रहा था. दरअसल फूलन एसपी से ही मिर्जापुर की सांसद थीं और पार्टी का दलित चेहरा थीं. समाजवादी पार्टी ने ही फूलन हत्याकांड को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया था. समाजवादी पार्टी ने सरकार द्वारा फूलन की सुरक्षा भी कम करने का आरोप लगाया था जिसे सरकार ने नकार दिया था. समाजवादी पार्टी के सांसदों का आरोप था कि फूलन की हत्या इसलिए कराई गई थी क्योंकि उत्तर प्रदेश में फरवरी में चुनाव होने वाले थे. जहां एसपी का सीधा मुकाबला राज्य में उस वक्त शासन कर रही बीजेपी से था. उम्मेद सिंह का भी मानना था कि फूलन की हत्या के पीछे लंबी साजिश रची गई थी. उनको लगता था कि फूलन की हत्या में किसी बड़े नेता का हाथ रहा होगा।.

फूलन देवी हत्याकांड में उस वक्त एसपी से सांसद रहे अमर सिंह का नाम भी खूब उछला था जिन्हें इन दिनों लोग ‘अखिलेश के अंकल’ के नाम से भी पुकारते हैं. फूलन हत्याकांड में सजा पा चुके शेर सिंह राणा की किताब ‘जेल डायरी’ भी इस बात की पुष्टि करती है. राणा ने अपनी किताब में लिखा है कि पुलिस रिमांड के बाद जब दिल्ली पुलिस ने उन्हें तिहाड़ जेल में बंद किया तो उसी दौरान एक दिन जेलर ने उनसे कहा कि मेरे पास एक आइडिया है जिससे तुम चाहो तो एक-दो करोड़ कमा सकते हो. जेलर ने शेर सिंह राणा से अमर सिंह (समाजवादी पार्टी के तत्कालीन सांसद) को फोन करने के लिए कहा था. जेलर के मुताबिक उनको अमर सिंह से फोन पर कहना था कि वे मीडिया के सामने कह देंगे कि फूलन की हत्या उन्होंने अमर सिंह के कहने पर की है.

जेलर का कहना था कि उस वक्त टीवी पर लगभग हर दिन सांसद अमर सिंह पर फूलन की हत्या का आरोप लगने वाली खबरें चल रही थीं. ऐसे में यदि शेर सिंह राणा मीडिया में जा कर अमर सिंह का नाम लेने की बात अमर सिंह से करेगा तो वे डर जाएंगे, क्योंकि इससे उनकी राजनीति खत्म हो सकती थी. हालांकि किताब के मुताबिक शेर सिंह राणा ने जेलर की इस सलाह को दरकिनार कर दिया.

मीडिया में भले ही फूलन हत्याकांड में को लेकर कई लोगों के नाम उछले हों लेकिन अदालत ने शेर सिंह राणा को ही फूलन की हत्या का दोषी माना. आपको बता दें कि फूलन की हत्या के 13 साल बाद अदालत ने 8 अगस्त 2014 को राणा को दोषी ठहराया और 14 अगस्त 2014 को एकमात्र दोषी शेर सिंह राणा को दिल्ली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई. उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था.

राष्ट्रीय दलित महासभा ने किया कलक्टर कार्यालय का घेराव

उमरिया। जिला मुख्यालय में राष्ट्रीय दलित महासभा ने रैली निकाल कर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया. इस दौरैन प्रदर्शन कर रहे लोगों ने चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो 2018 में हर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी उतारेंगे.

कलेक्टर ने कहा कि हम जांच करवाएंगे. जो समस्या हल होने लायक होगी हल करेंगे. उमरिया जिला मुख्यालय में विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर जहां गोंड समुदाय के लोग रैली निकाल कर कलेक्टर को ज्ञापन दिया. वहीं राष्ट्रीय दलित महासभा ने भी जिला मुख्यालय में अलग से रैली निकाल कर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और लगातार कर रहे अपनी मांगों को दोहराया.

कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते हुए राष्ट्रीय दलित महासभा की महासचिव केशकली कोल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘कोई भी नेता ऐसा नहीं है. जितने भी मंत्री बनते हैं, विधायक बनते हैं, लेकिन इन बहनों को देखों वहीं की वहीं पड़ी हैं उनकी ईज्जत लूटी जा रही है, यहां से लेकर पार्लियामेंट तक अधिकारी बैठे हुए हैं लेकिन ऐसे किन्नर हैं जो कोई भी समाज की बात नहीं मानते हैं’.

राष्ट्रीय दलित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय भारती ने कहा कि ‘जिन आदिवासियों के घरों को उजाड़ा जा रहा है. 70-70 साल से जमीन पर कब्जा करके बैठे हैं. उनको अभी तक पट्टे नहीं मिले हैं, बड़े लोगों को मिनटों में जमीन मिल जाती है और आदिवासी को जमीन मिलना मुश्किल हो जाता है, वनाधिकार अधिनियम 2007 के तहत अभी तक लोगों को पट्टे नहीं मिले बहुत से ऐसे गांव हैं जहां पट्टे नहीं मिले डबरोंहां में अभी तक कोटा नहीं पहुंचा. सेवई में नारकीय जीवन जीने को लोग मजबूर हैं’. उन्होंने कहा कि ‘कलेक्टर साहब के नाक के नीचे आज तक गांव में पहुंचने का रास्ता नहीं है, 2018 में अगर ये लोग सामाजिक आन्दोलन से नहीं मानते हैं तो हम राजनैतिक पारी खेलेंगे पूरे मध्य प्रदेश में, वोटिंग मशीन में गड़बड़ी करते हैं हमने खुद धांधली में पकड़ा है, इस बार हम लोग मांग करेंगे कि बैलट पेपर से वोटिंग होना चाहिए, जब राज्य सभा में बैलट पेपर से वोटिंग होता है तो यहां क्यों नहीं हो सकता है, चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार हमारी पांच एकड़ जमीन की मांग नहीं मानी तो हर विधानसभा में अपना प्रत्याशी खड़ा करेंगे’.

वहीं कलेक्टर माल सिंह ने सभी को अपने कक्ष में बुलवा कर बिठाया और इनकी परेशानियों को सुना. कलेक्टर ने कहा कि ‘जांच करवाएंगे जो उचित समस्या होगी उसको हल करेंगे’. गौरतलब है सालों से दूर-दूर से आदिवासी ग्रामीण लगातार अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं और जिले के कलेक्टर को हर बार अपनी मांग और समस्या से अवगत करते हैं.

कैंसर से जूझ रहे पीपली लाइव के अभिनेता की मौत

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मुंबई। करीब छह महीने पहले अक्षय कुमार के साथ फिल्म जॉली एलएलबी 2 में नज़र आये अभिनेता सीताराम पांचाल का गुरूवार को सुबह निधन हो गया. वो 54 वर्ष के थे और पिछले तीन साल से लंग्स कैंसर की बीमारी से ग्रस्त थे.

सीताराम पांचाल के पारिवारिक सूत्रों ने उन्हें कुछ समय से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और आज यानि गुरुवार को सुबह उनका निधन हो गया. बुधवार को ही उनकी शादी की 26 सालगिरह थी. सीताराम पांचाल फेफड़े के कैंसर से ग्रस्त थे. पिछले दिनों जब फेसबुक पर उनके परिजनों ने इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई तब जा कर बॉलीवुड को उनकी हालत का पता चला. फिल्म एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन ने इंडस्ट्री से मदद की अपील की थी और बाद में अभिनेता इरफ़ान संजय मिश्रा सहित कई कलाकार उनकी मदद के लिए आगे आये.

शुरू में कुछ हरियाणवी फिल्मों में करने के बाद सीताराम पांचाल ने 1994 में बैंडिट क्वीन से बॉलीवुड में कदम रखा. उन्होंने आमिर खान प्रोडक्शन की पीपली लाइव, इरफ़ान के साथ पान सिंह तोमर, लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह और स्लमडॉग मिलेनियर में भी काम किया था.

शिक्षा के मंदिर में मासूम से रेप, परिजनाें ने प्रिंसिपल काे पीटा

मेरठः उत्तर प्रदेश में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है।जहां शिक्षा के मंदिर में मासूम बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी।इस घटना को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि उसी स्कूल का एक छात्र है।जिसने चौथी कक्षा में पढ़ रही बच्ची के साथ रेप किया। मामले की जानकारी परिजनाें काे हुई ताे उन्हाेंने स्कूल में आकर जमकर हंगामा किया। मामला मेरठ के नौचंदी क्षेत्र के फूल बाग कॉलोनी का है। यहां के डेफोडिल पब्लिक स्कूल की मासूम छात्रा के साथ बाथरूम में रेप किया गया। खून से लतपथ पीड़िता राेती-बिलखती हुई घर पहुंची आैर परिजनाें काे घटना की जानकारी दी।मां के पुछने पर उसने बताया कि जब वह टॉयलेट गई तो किसी ने उसे टॉयलेट में बंद करके उसके साथ गलत काम किया। परिजन बच्ची को लेकर डॉक्टर के पास गए तभी सारी घटना का खुलासा हुआ। इस दाैरान पीड़ित के परिजन मामले की शिकायत लेकर स्कूल पहुंचे। जिसकाे लेकर  प्रिंसिपल परिजनों से ही झगड़ने लगी। गुस्साए परिजनाें ने प्रिंसिपल की पिटाई कर दी। किसी ने मामले की शिकायत पुलिस काे दे दी। माैके पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मसक्कत के बाद मामले काे शांत किया आैर आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।

बिहार में टूट के कगार पर नीतीश कुमार की पार्टी!

बिहार की सियासत में एक जमाने में धुर विरोधी रहे शरद यादव और लालू यादव के रास्ते एक हो सकते हैं। नीतीश से नाराज शरद यादव ने यह कह कर कि वो अब भी महागठबंधन के साथ हैं, इसका संदेश भी दे दिया है। वहीं तीन दिवसीय बिहार दौरे में 10 अगस्त को पटना पहुंचे शरद यादव के स्वागत के लिए मौजूद राजद के नेताओं से यह भी साफ हो गया है कि शरद यादव और लालू यादव एक राह पर चलने को तैयार हैं।

नीतीश कुमार का राष्ट्रीय जनता दल से गठबंधन तोड़ देने के बाद से ही शरद यादव नाराज हैं। शरद यादव का तर्क है कि दोनों के बीच गठबंधन पूरे पांच साल के लिए हुआ था और बीच में गठबंधन तोड़ देना ठीक नहीं है। असल में जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव का तर्क भी मजबूत है। बिहारपहुंचे शरद यादव ने कहा-

“हमने पांच साल के लिए गठबंधन किया था. जिस 11 करोड़ जनता से हमने जो करार किया था, वो ईमान का करार था. वो टूटा है, जिससे हमको तकलीफ हुई है. 70 साल के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता, जहां दो पार्टी या गठबंधन जो चुनाव में आमने-सामने लड़े हों और जिनके मेनिफेस्टो अलग-अलग हों, दोनों के मेनिफस्टो मिल गए हों. यह लोकशाही में विश्वास का संकट है.”

शरद यादव अकेले नहीं हैं जो नीतीश कुमार से नाराज हैं। इस कड़ी में राज्यसभा सांसद अली अनवर का भी नाम शामिल है। अनवर भी गठबंधन टूटने के बाद से ही लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ मुखर हैं। ऐसे में जनता दल यूनाइटेड का दो खेमों में बंटना तय माना जा रहा है। शरद यादव 10 से 12 अगस्त तक बिहार का दौरा करेंगे। 19 अगस्त को नीतीश खेमें के जनता दल की बैठक से पहले शरद यादव ने 17 अगस्त को दिल्ली में एक बैठक बुलाई है। इनदोनों बैठकों के बाद 20 अगस्त तक जनता दल यूनाइटेड के टूट की घोषणा हो सकती है।

गौतम के गंभीर सवाल, ‘आजादी के 70 साल बाद भूख जरूरी या मंदिर-मस्जिद’

देश इस समय स्वतंत्रता दिवस की 70वीं सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहा है. इस मौके पर मंगलवार को इंडियन प्लेयर गौतम गंभीर ने एक तस्वीर ट्वीट की, जो कि कई सवाल खड़े करती है. इस तस्वीर में एक भूखा बच्चा दिख रहा है और फोटो पर कैप्शन है कि हम तेरे लिए कुछ नहीं कर सकते दोस्त, हमें अभी मंदिर और मस्जिद बनाने हैं. गंभीर ने लिखा कि अभी भी मैं इस सवाल का जवाब तलाश रहा हूं. गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है कि गौतम ने इस प्रकार का ट्वीट किया हो. इससे पहले गंभीर छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में शहीद जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने की भी बात कही थी. इसके अलावा आईपीएल के दौरान उन्हें मैन ऑफ द मैच की राशि भी उनके सहयोग के लिए दी थी.

लंदन के ओवल में खेले गए चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में इंडिया की हार पर जश्न मनाने वाले अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक को क्रिकेटर गौतम गंभीर ने एक सलाह दी थी. इंडिया की हार पर कश्मीर घाटी में हुई आतिशबाजी में मीरवाइज के शामिल होने की तस्वीर सामने आने और पाकिस्तान को बधाई वाले ट्वीट के बाद क्रिकेटर गौतम गंभीर ने ट्वीट कर मीरवाइज पर निशाना साधा था. गंभीर ने लिखा एक सलाह है मीरवाइज तुम बॉर्डर क्यों नहीं पार कर जाते. वहां तुम्हें बढिय़ा पटाखे चाइनीज मिलते. वहीं ईद मनाते. सामान बांधने में मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं. गौतम गंभीर देश में चल रही समस्‍याओं पर अक्‍सर सवालिया निशान खड़ा कर देते हैं.

सिर्फ गोरे ही हैंडसम नहीं होते: अभिनव मुकुंद

नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर गई टीम इंडिया के लिए ओपनर अभिनव मुकुंद को भले ही एक टेस्ट मैच में खेलने का मौका मिला, पर इस दौरान भी वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराने से नहीं चूके. अभिनव मुकुंद ने सोशल मीडिया पर एक पत्र लिखकर नस्लभेद के खिलाफ कड़ी मुहिम छेड़ दी है. अभिनव मुकुंद बताते हैं कि उनके रंग के कारण उन्हें कई चुभाऊ टिप्पणियां सहनी पड़ीं, जिससे वह कई बार दुखी हो गए. अपने ख़त में उन्होंने नस्लभेद करने वाले लोगों को नसीहत दी है.

मुझे कई नामों से बुलाया जाता रहा है. मैं इन बातों को हंसकर नज़रअंदाज़ कर देता हूं. मैं ये बचपन से झेल रहा हूं और इन बातों ने मुझे मज़बूत बनाया है. मैं ऐसी बातों का जवाब नहीं देता पर आज मैं उन तमाम लोगों की तरफ़ से बोल रहा हूं जो रंगभेद शिकार हुए हैं. मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि सिर्फ़ गोरा ही सुंदर रंग नहीं होता.” मुकुंद के इस ट्वीट के समर्थन में फौरन ही आर अश्विन जैसे क्रिकेटर सामने आ गए. उन्होंने भी मुकुंद के पत्र की कॉपी ट्वीट कर उससे सीखने की सलाह दे डाली. 7 टेस्ट मैचों में दो अर्द्धशतकीय पारियां खेलने वाले बांए हाथ के इस सलामी बल्लेबाज़ ने भी साफ़ कर दिया कि उनका ये पत्र टीम इंडिया में किसी सदस्य के ख़िलाफ़ नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बात का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए. अभिनव सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने वाले पहले खिलाड़ी नहीं हैं, पर 122 फर्स्ट क्लास मैचों में 48 के औसत से साढ़े आठ हज़ार से ज़्यादा रन बनाने वाले अभिनव ने जो मुद्दा उठाया है वह बेहद संजीदा है और उम्मीद की जा सकती है कि खेल प्रेमी इस पर जरूर गौर फरमाएंगे.

रिजर्व बैंक का नया आदेश, अक्टूूूबर से नहीं निकलेंगे एटीएम से 500 व 2000 के नोट

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नई दिल्ली। पिछले साल आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के एेलान के बाद प्रचलन में आये 500 और 2000 रुपये के नोट अक्तूबर के बाद से एटीएम से निकलना बंद हो जायेंगे. बैंकों की ओर से एटीएम में 100 रुपये के नोट डाले जायेंगे और उन्हीं की निकासी हो जायेगी. इसके लिए रिजर्व बैंक की और से सर्कुलर जारी कर देश के बैंकों को पहले ही आगाह कर दिया गया है, ताकि 500 और 2000 रुपये के नोटों को प्रचलन से बाहर करने के दौरान लोगों को नकदी के संकट से जूझना न पड़े.

रिजर्व बैंक की ओर से जारी सर्कुलर में देश के बैंकों से इस तरह की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है. रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि अक्तूबर से कुल एटीएम के 10 फीसदी एटीएम मशीन में केवल 100 रुपये का नोट डाला जाये. नाम न छापने की शर्त पर एक बैंक अधिकारी ने बताया कि बाजार में 500 रुपये के नोट की कमी हो गयी है.

इसके साथ ही, खबरें इस तरह की भी आ रही हैं कि 2000 रुपये के नोट की छपार्इ कम कर दी गयी है. इस वजह से एटीएम में केवल 100 के नोट सप्लाई किये जा रहे हैं. 500 रुपये के नोट को लोगों ने फिर से जमा करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते यह कमी हुई है. हालांकि, एटीएम में 100 रुपये के नोटों को डालने के लिए रिजर्व बैंक ने करीब एक साल पहले ही सर्कुलर जारी करके देश के बैंकों को आगाह किया था, लेकिन इन बैंकों द्वारा निर्देश का पालन नहीं किये जाने की वजह से उसे दोबारा सर्कुलर जारी कर ऐसा करने का निर्देश दिया गया है. बताया यह जा रहा है कि देश के बैंकों ने पिछले साल आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा किये जाने की वजह से रिजर्व बैंक के निर्देश को अमलीजामा नहीं पहनाया. अब आरबीआई ने बैंकों को फिर से अपने इस सर्कुलर की याद दिलाते हुए इसे अक्तूबर से लागू करने का निर्देश दिया है.

टॉप 100 इनोवेटिव कंपनियों में HUL, एशियन पेंट्स और भारती एयरटेल शामिल

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नई दिल्ली। फोर्ब्स की ओर से जारी की गई दुनिया की 100 सबसे ज्यादा इनोवेटिव कंपनियों की सूची में तीन भारतीय कंपनियां शामिल हैं. इनके नाम हिंदुस्तान यूनिलिवर, एशियन पेंट्स और भारती एयरटेल है. इस लिस्ट में पहला स्थान सेल्सफोर्स डॉट कॉम का है. कंपनी ने टेस्ला मोटर्स को पछाड़ा है. हालांकि हिंदुस्तान यूनिलिवर बीते वर्ष के 31 वें स्थान से 7वें और एशियन पेंट्स 18 वें से 8वें पायदान पर आ गया है. इस सूची में भारती एयरटेल 78वें स्थान पर है. वर्ष 2016 की लिस्ट में देश की दिग्गज आईटी कंपनी टीसीएस (टाटा कंसलंटेंसी सर्विसेज), सनफार्मा और लार्सन एंड ट्यूबरो थे, लेकिन इस साल यह कंपनियां सूची में अपनी जगह नहीं बना पाई. इससे लिस्ट में कुल भारतीय कंपनियों की संख्या पांच से घटकर तीन हो गई है.

दुनिया की सबसे इनोवेटिव कंपनियां उन्हें माना जाता है कि जिनको लेकर निवेशकों में उम्मीद होती है कि वे मौजूदा समय में और भविष्य में इनोवेटिव बनी रहेंगी. इसके अलावा लिस्ट में शामिल होने के लिये कंपनियों को सात वर्ष का पब्लिक फाइनेंशियल डेटा और 10 अरब डॉलर मार्केट कैप की जरूरत होती है.

फोर्ब्स मैगजीन ने कहा, हम केवल उन उद्योग को शामिल करते हैं जो इनोवेशन के क्षेत्र में निवेश के लिये जानी जाती हैं. इस सूची में उन उद्योगों को शामिल नहीं किया जाता जिनका शोध और विकास के क्षेत्र में किये गये निवेश को मापा नहीं जा सकता. इसलिए बैंक और अन्य वित्तीय सेवा प्रदाता भी इस सूची में शामिल की जाती हैं. इसी प्रकार ऊर्जा और खनन कंपनियों को भी शामिल नहीं किया जाता क्योंकि इनकी मार्केट वैल्यू इनेवोशन की जगह कमॉडिटी के मूल्य से बंधा होता है.

लिस्ट में शामिल टॉप 10 कंपनियों में अमेजन डॉट कॉम (तीसरे स्थान पर), शांघाई आरएएएस ब्लड प्रोडक्ट्स (चौथे), नेटफ्लिक्स (पाचवें), इनसाइट (छठे), नावेर (नौवें) और रिजेनेरोन फार्मास्युटिकल्स (10वें) स्थान पर हैं. इनके अलावा अडोब सिस्टम्स, मैरियॉट इंटरनेशनल, नील्सन, मास्टर कार्ड, कोका कोला, प्रॉक्टर एंड गैंबल, पेप्सीको, कोलगेट- पामोलिव कंपनियां भी लिस्ट में शामिल हैं.

भारतीय सेना ने डोकलाम सीमा पर गांव खाली करने के दिए आदेश

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नई दिल्‍ली : डोकलाम सीमा पर भारत और चीन के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. दोनों देशों के बीच 16 जून से सीमा विवाद चल रहा है. इस मामले को भारत बातचीत के माध्‍यम से सुलझाना चाहता है लेकिन चीन की तरफ से लगातार यह बयान दिया जा रहा है कि सीमा से भारतीय सेना के हटने के बाद ही बातचीत संभव है. चीन की सरकारी मीडिया की तरफ से भी भारतीय सेना को कई बार पीछे हटाने की धमकी दी जा चुकी है. अब डोकलाम पर भारत-चीन के बीच जारी तनातनी के बीच भारतीय सेना ने डोकलाम के आसपास के गांवों को खाली करने का आदेश दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सेना ने सीमा के नाथनांग गांव में रह रहे ग्रामीणों को तुरंत गांव खाली करने के लिए कहा है. यह गांव डोकलाम से 250 किमी. की दूरी पर स्थित है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि खाली करने का यह आदेश सुकना से डोकलाम की ओर बढ़ रहे 33 क्रॉप के जवानों के ठहरने के लिए खाली कराया गया है या भारत-चीन के बीच किसी मुठभेड़ की स्थिति में नागरिकों को हताहत होने से बचने के लिए.

इससे पहले खबर आई कि डोकलाम में जहां दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं उससे करीब एक किलोमीटर के दायरे में चीन ने 80 टैंट लगा दिए हैं. चीनी सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) की तरफ से डोकलाम में ये बड़ी तैयारी मानी जा रही है. हालांकि यहां भारतीय सेना ने करीब 350 सैनिकों को तैनात किया है जो करीब 30 टैंट में रह रहे हैं.

भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने चीनी सैनिकों की उपस्थिति पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. उन्होंने आगे बताया कि विरोधी की तरफ से किसी भी तरह की हलचल की उम्मीद नहीं है. लेकिन भारतीय सेना डोकलाम के आसपास लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है.

उपराष्‍ट्रपति अंसारी को दी गई विदाई

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नई दिल्‍ली। देश के उपराष्‍ट्रपति के तौर पर आज मोहम्‍मद हामिद अंसारी का कार्यकाल खत्‍म हो रहा है. इस मौके पर राज्‍य सभा में उन्‍हें विदाई दी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंसारी की जमकर तारीफ की. वहीं कुछ ऐसी गुदगुदाने वाली बातें भी की, जिस पर अंसारी बीच-बीच में मुस्‍कुराते नजर आए. राज्य सभा के पदेन सभापति होने के नाते अंसारी इस दौरान सदन का संचालन कर रहे थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में अंसारी को संबोधित करते हुए कहा, दोनों सदनों की तरफ से मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं. संविधान के मर्यादाओं के अनुकूल आपका निर्देश मिलता रहेगा, ऐसी मेरी कामना है.’

वहीं अंसारी के परिवार के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा, ऐसा परिवार जिसका करीब 100 साल का इतिहास सार्वजनिक जीवन का रहा. नाना और दादा कभी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष रहे, कभी संविधान सभा में रहे. आप उस परिवार की पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनके पूर्वजों का सार्वजनिक जीवन में खासकर कांग्रेस के जीवन के साथ और कभी खिलाफत मूवमेंट के साथ काफी सक्रियता रही.

अंसारी राजनयिक भी रह चुके हैं. इसे याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मजेदार अंदाज में कहा, आपका अपना जीवन एक करियर डिप्लोमैट का रहा. करियर डिप्लोमैट क्या होता है, यह मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद ही समझ आया. क्योंकि उनके हंसने का अर्थ क्या होता है, उनके हाथ मिलाने का अर्थ क्या होता है, वह तुरंत समझ नहीं आता है. क्योंकि उनकी ट्रेनिंग वही होती है. मगर इस कौशल का उपयोग 10 साल यहां जरूर हुआ होगा, सबको संभालने में उस कौशल का लाभ इस सदन को मिला होगा.