अभिनव बिंद्रा ने विराट कोहली पर साधा निशाना

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नई दिल्ली। भारत के एकमात्र व्यक्तिगत ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन संभवत: भारतीय क्रिकेट टीम के संदर्भ में खुलासा किया कि आखिर कैसे वह 20 साल तक उस कोच से जुड़े रहे जिससे वह नफरत करते थे. कप्तान विराट कोहली से मतभेद के कारण अनिल कुंबले के इस्तीफा देने के घंटों बाद बिंद्रा ने जर्मनी के उवे रीस्टरर के साथ अपने समीकरण को लेकर ट्वीट किया, जो लंबे समय तक उनके कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे.

अब संन्यास ले चुके बिंद्रा ने ट्वीट किया, ‘मेरे सबसे बड़े शिक्षक कोच रीस्टरर थे. मैं उनसे नफरत करता था, लेकिन 20 साल तक उनके साथ रहा. वह हमेशा मुझे वह बातें बोलते थे, जो मैं सुनना नहीं चाहता था. बिंद्रा ने इस अपने ट्वीट पर ‘जस्टसेयिंग’ हैशटैग के साथ ट्वीट किया है.

रीस्टरर 2008 में बीजिंग ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के दौरान भी बिंद्रा के सहयोगी स्टाफ का हिस्सा थे. वह पिछले साल रियो ओलिंपिक में भी बिंद्रा के साथ जुड़े थे, जहां यह दिग्गज भारतीय निशानेबाज 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहा था और फिर संन्यास ले लिया था.

बता दें कि कुंबले ने अपने इस्तीफे के बाद किए ट्वीट में इस बात का जिक्र किया है कि कोहली के साथ संबंधों में बढ़े विवाद के चलते उन्होंने कोच पद से इस्तीफा देना ही बेहतर समझा. उन्होंने माना कि बोर्ड की ओर से कोच और कप्तान में सुलह की कोशिशों के बावजूद कोच-कप्तान की जोड़ी अब अस्थिर हो गई. इस 46 वर्षीय पूर्व कप्तान ने कहा, ‘यह मालूम चलने के बाद कि कप्तान कोहली को उनके साथ दिक्कते हैं, तो उन्होंने अपने कदम वापस खींचना ही बेहतर समझा.’

आईएस ने फिलीपींस के गांव पर कब्जा किया, लोगों को बनाया बंधक

आतंकी संगठन आईएस ने इस बार दक्षिणी फिलीपींस में एक गांव पर कब्जा कर लिया और बाद में भागने के लिए गांव वालो को ढाल के रूप में लोगों को बंधक बना लिया.

स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर रियलान मैमन ने बताया कि सरकारी सुरक्षा बलों को मालागकिट गांव पर कब्जा करने वाले बंगसमोरो इस्लामिक फ्रीडम फाइटर्स के दर्जनों बंदूकधारियों से निपटने के लिए भेजा गया है. क्योंकि आंतकियों ने बड़ी संख्या में गांव को घेरा था. मैमन ने रेडियो स्टेशन से कहा कि बंदूकधारियों ने सुबह लगभग 5 बजे गांव पर हमला किया. उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों और बीआईएफएफ के बीच संघर्ष में अज्ञात संख्या में नागरिक फंसे हैं.

इससे पहले पुलिस ने कहा था कि सशस्त्र लोगों ने पिगकावायन कस्बे के एक स्कूल पर हमला किया है. यह कस्बा मारावी के दक्षिण-पूर्व में स्थित हैं, जहां सुरक्षा बलों और बीआईएफएफ आतंकवादियों के बीच 23 मई से संघर्ष जारी है. फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ द्वीप में आईएस की मौजूदगी के चलते और अधिक हमलों की चेतावनी जारी की है.

सुरक्षा बलों ने मोरो इस्लामिक लिबरेशन फ्रंट (एमआईएलएफ) से वैचारिक मतभेदों के कारण अलग हुए बीआईएफएफ को फिलीपींस का एक विद्रोही समूह करार दिया है. बीआईएफएफ आतंकवादी संगठन आईएस का समर्थक है.

फरार साध्वी जयश्री गिरी राजस्थान से गिरफ्तार

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गुजरात से फरार शातिर अपराधी शातिर अपराधी साध्वी जयश्री गिरी को क्राइम ब्रांच की टीम ने राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है.यह मामला तब ज्यादा चर्चा में आया जब साध्वी गिरी एक सप्ताह पहले मेडिकल पेरोल पर बाहर आने के बाद पुलिस निगरानी के बीच अहमदाबाद के एक मॉल से फरार हो गई थी. उसके खिलाफ हत्या, अपहरण और वसूली के कई मामले दर्ज हैं. पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी पर साध्वी के भागने के बाद पुलिस प्रशासन की बेहद किरकिरी हुई थी.

अहमदाबाद से फरार होने वाली शातिर साध्वी जयश्री गिरी को गुजरात पुलिस पिछले एक सप्ताह से तलाश कर रही थी. इसी दौरान गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने उसे राजस्थान के उदयपुर के टोल प्लाजा से गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान भी साध्वी अपनी हरकतों से बाज नहीं आई और भागने की कोशिश की.

दरअसल, साध्वी को साबरमती सेंट्रल जेल से 10 दिन की मेडिकल पेरोल पर इलाज के लिए रिहा किया गया था. इसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में लाया गया था. उत्तर गुजरात के मुक्तेश्वर मठ की पूर्व महंत साध्वी जयश्री गिरी इसी दौरान अहमदाबाद के एक मॉल से पुलिसवालों को चकमा देकर 14 जून को फरार हो गर्इ थी.

तभी उसे पुलिस तलाश कर रही थी. पुलिस ने साध्वी को वो गाड़ी भी बरामद कर ली है, जिससे वह फरार हुई थी. गिरफ्तारी के वक्त साध्वी जयश्री गिरी के साथ एक छोटा बच्चा भी था. पुलिस के मुताबिक साध्वी अपने बच्चे को इस लिये अपने साथ रख रही थी ताकि किसी को उस पर शक ना हो. पर उसकी चालाकी को क्राइम ब्रांच ने भाप लिया.

क्रिकेट एक हिन्दू विरोधी खेल है!

एक बहुत ही गंभीर बात है. 1857 में गाय की चर्बी कारतूस में होने के चलते अंग्रेजों की फौज में जीवन- यापन के लिये काम करने वाले सैनिकों नें हथियार डाल दिये थे और लड़ने से इन्कार कर दिया था. इस धार्मिक आपत्ति को अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करार देकर भारत का प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन घोषित कर दिया गया था. जैसे कारतूस में गाय की चर्बी की बात लोगों को पता नहीं थी उसी तरह अब तक आमलोगों को यह पता नहीं है की क्रिकेट का सबसे उत्कृष्ट व बेहतरीन चिकनाई वाला बॉल गाय के ही चमड़े से बनता है. अब सवाल यह है कि जब कारतूस में गाय की चर्बी होने से धर्म भ्रष्ट हो सकता है तो क्रिकेट बॉल में गाय का चमड़ा होने से क्या यह नहीं होगा? अगर उपर्युक्त सवाल सही है तो यह तथाकथित हिन्दू धर्म और उसके मानने वाले लोगों को भ्रष्ट करने की अंतर्राष्ट्रीय साजिश है कि इस विदेशी खेल ‘क्रिकेट’ बना कर हर गली- मुहल्ले व घर- परिवार में घुसा दिया गया है. देश के सभी हिन्दू क्रिकेट खिलाड़ियों से और जिस किसी हिन्दू ने जीवन में कभी भी क्रिकेट बॉल छुआ है, उन सभी से सख्त अपील है कि गंगा स्नान कर अपना- अपना शुद्धिकरण हरिद्वार या संगम तट पर करायें. जो क्रिकेट खेलते हुये मर गये उनकी अशुद्ध आत्मा को ‘गया (बिहार)’ में अर्पण- तर्पण कराकर मुक्ति दिलायें. यह सब रहस्योदघाटन होने के बाद सभी हिन्दू मान्यता वालों को क्रिकेट का खुलकर बहिष्कार करना चाहिये. यही नहीं हिन्दू धर्म मानने वालों को शपथ लेनी चाहिये कि क्रिकेट बॉल छुना तो दूर, जीवन में कभी क्रिकेट नहीं खेलेंगे. कितनी बुरी व तकलीफ की बात है कि वो गाय जिसे सभी हिन्दू अपनी माता मानते हैं, उसके मरने के बाद मृत शरीर का चमड़ा छीलकर- निकालकर क्रिकेट का बॉल बनता है. एक बॉलर उसे जोर से पटककर बॉलिंग करता है और बैट्समैन कितनी बेदर्दी से शॉट मारता है. इसी चौके- छक्के वाले शॉट पर सभी ताली बजाते हैं. ताली बजाने वालों में हिंदुओं भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं. इस गाय समर्थक एवं क्रिकेट विरोधी विचार पर गैर हिंदुओं को आपत्ति हो सकती है तो अन्यथा न लें, संविधान में दिये गये धार्मिक मान्यता की स्वतंत्रता के लिहाज से क्रिकेट खेल सकते हैं. अभी हाल ही में भारत की पर्यावरण नीति से संबंधित एक ड्राफ्ट के बारे में पता चला कि वह अमेरिकी पर्यावरण नीति का ही हूबहू नकल किया गया है, वह भी बिना रेफरेंस नोट या आभार व्यक्त किये. यह खबर पूरी सोशल मीडिया पर छाई हुई है. जिन महानुभव के मंत्रालय के अंतर्गत यह कॉपी- पेस्ट पॉलिसी ड्राफ्ट हुआ वो ब्रह्मज्ञानी श्री प्रकाश जावडेकर जी अब मानव संसाधन मंत्री बन चुके हैं. वैसे भी भारत की शिक्षा नीति, आर्थिक नीति, विदेश नीति तो अमेरिका के ही रास्ते पर, उसके ही आदेश- निर्देश का पालन करते हुये चलती है तो क्यों नहीं भारत की खेल नीति भी अमेरिका के हिसाब से कॉपी- पेस्ट कर बनाई जाती है जिसमें क्रिकेट जैसे घटिया खेल के लिये कोई जगह नहीं है. वैसे भी क्रिकेट ब्रिटिश साम्राज्यवाद का प्रतीक खेल माना जाता है, जिसमें गाहे- बगाहे आतंकियों के भी पैसे लगे होने की बात कई बार खबरों की सुर्खियां भी बनती रही हैं. क्रिकेट के बॉल का दाम पिछले एक साल में दुगना हो गया है यानि 400 रूपये से बढ़कर 800 रूपये हो गया है. क्रिकेट बॉल की इस बढ़ी हुई महंगाई में आम जनता के न समझ पाने वाला वो पेंच कहीं नहीं है कि पेट्रोल- डीजल का दाम लगातार घटने पर भी वस्तुओं- फल, सब्जी, अनाज, का दाम क्यों नहीं घटता है! क्रिकेट बॉल बनाने के लिये आमतौर पर गाय के चमड़े का इस्तेमाल होता आया है लेकिन केन्द्र में बीजेपी सरकार आने के बाद राजनीतिक कारणों से उत्तर प्रदेश में गौमांस पर रोक लगा दी गई है. हालांकि भारत के कई राज्यों केरल, पश्चिम बंगाल, अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम में गाय का वध वैध/ मान्य है. लेकिन बदले राजनीतिक माहौल के चलते गौमांस व चमड़े की खरीद- बिक्री व परिवहन एक चुनौतिपूर्ण खतरनाक काम हो गया है जिसपर अखलाक का साया पड़ गया है. इन्हीं सब कारणों से उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित वो खेल कारखाने जो क्रिकेट बॉल बनाते हैं संकटकाल से गुजर रहे हैं. लेकिन जब हिन्दू धर्म पर ही संकट माना जा रहा हो तो व्यापार- उद्योग को कौन पूछे, इन धंधों पर निर्भर लोग कोई दूसरा जीवन- यापन का रास्ता तलाश सकते हैं. सरकार और सरकार की आड़ में हिन्दूवाद- राष्ट्रवाद की ठेकेदारी करने वाले लोगों ने गौहत्या, गौमांस की बिक्री व गाय के चमड़े- अवशेषों आदि के परिवहन को लेकर सख्ती का माहौल बना रखा है. देश में कई घटनायें घट चुकी हैं जिनमें कट्टर हिन्दूवादी संगठन के लोगों ने गायों की तस्करी, गौमांस पकाने आदि शक के आधार पर कई लोगों को नृशंस हत्या भी कर दी है. इन सब कारणों से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की केन्द्र सरकार से मामले की गंभीरता- संवेदनशीलता को देखते हुये अपील है कि देशभर में गाय के चमड़े से बनने वाले क्रिकेट बॉल को खोजवाकर जब्त करे, साथ ही इस हिन्दू विरोधी खेल के भारत में खेले जाने पर रोक लगाकर धर्मनिरपेक्ष होने का सबूत दे. भारत सरकार आईपीएल पर भी अविलंब रोक लगाये जिसमें हवाला कारोबारियों एवं कॉरपोरेट- बिजनेस समूहों का कालाधन लगे होने की अफवाह- चर्चा आम जुबान से होती है. बीसीसीआई को भी नोटिस जारी कर सरकार सफाई मांगे और उसकी सभी सम्पत्ति को जब्त कर देश में क्रिकेट से इतर अन्य सभी खेलों के विकास में उस पैसे को लगाये. भारत का संविधान हर धर्म का सम्मान करने की सीख देता है और सभी धर्मों के मान- सम्मान व भावना का ख्याल करना सिखाता है  जिस बात से जाहिर है भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और उनके नेतृत्व में चलने वाली सरकार को भी ऐतराज नहीं होगा. भारत में सरकार संविधान से चलती है और सरकार में शामिल सभी लोग संविधान के प्रति कर्तव्य निष्ठा की शपथ लेते हैं. इस लिहाज से भारत के किसी भी सरकार का पहला कर्तव्य है कि संविधान की रक्षा करे. अत: भारत सरकार से गुजारिश है कि गाय के चमड़े से बने बॉल से खेले जाने वाले क्रिकेट पर बैन लगाये और हिन्दू धर्म के सम्मान की रक्षा करे.

एअर इंडिया को खरीद सकता है टाटा ग्रुप

लंबे समय से केन्द्र सरकार एअर इंडिया को कर्ज के बोझ से मुक्त करने के रास्ते तलाश रही है. लंबे समय से एअर इंडिया घाटे में चल रही है. ऐसे में खबर आ रही है कि निजी कंपनी टाटा बहुत जल्दी सरकार से एअर इंडिया को खरीद सकती है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बाबत टाटा के अधिकारों और सरकार के बीच अनौपचारिक बातचीत भी हुई है. अगर ऐसा होता है तो एअर इंडिया की जोरदार तरीके से वापसी होगी.  क्योंकि वर्ष 1953 से पहले एअर इंडिया का स्वामित्व टाटा समूह के पास ही था. रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सरकार के साथ अनौपचारिक बातचीत की, जिसमें उन्होंने 51 प्रतिशत इक्विटी के साथ एयर इंडिया पर टाटा समूह के नियंत्रण की इच्छा जताई है. सरकार एक दशक से घाटे में चल रही विमान कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण के बारे में विचार कर रही है. हाल ही में, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि विमानन मंत्रालय को उन सभी संभावनाओं का पता लगाने की जरूरत है जिससे एयर इंडिया का निजीकरण किया जा सकता है.एयर इंडिया के 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. जिससे सरकार जल्दी ही मुक्ति पाना चाहती है उसके लिए टाटा समूह का सहारा लिया जा रहा है.

किसानों का 50 हजार तक कर्ज माफ करेगी कर्नाटक सरकार

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कर्नाटक सरकार ने किसानों के कर्ज को माफ करने का फैसला किया है. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के किसानों की कर्जमाफी के बाद कर्ज माफी की लिस्ट में एक और राज्य का नाम जुड़ गया है. कर्नाटक सरकार ने प्रति किसान 50,000 रुपये तक का कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि हमारी सरकार किसानों को हमारी नीतियों के जरिए सक्षम बनाने के लिए काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समय के दौरान में हमारी सरकार प्रति किसान 50,000 रुपये तक का कर्ज माफ किए जाने की घोषणा करती है. ये फायदा उनको मिलेगा, जिन्होंने 20/06/2017 तक सहकारी बैंकों से लोन लिया है. इससे राज्य भर में 22,27,506 किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा. इससे राज्य के सरकारी खजाने पर 8,165 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ेगा पर किसानों के संकट को खत्म करना हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता है.

हम जानते हैं कि किसानों को सशक्त बनाने के लिए उन पर ऋण की मार को कम करना जरुरी होगा. किसानों की ओर से मैं पीएमओ इंडिया से अनुरोध करता हूं कि जल्दी ही सूखे पर विचार करें और वाणिज्यिक बैंकों से किसानों के ऋण को माफ कर दें. जिससे किसानों की जरुरी मदद के साथ-साथ उनके आर्थिक स्तर में भी सुधार आयेगा.

 

‘इंदू सरकार’ फिल्म पर ज्योतिरादित्य की टिप्पणी से आहत हैं मधुर भंडारकर

कांग्रेस पार्टी की आलोचना झेल रही फिल्म ‘इंदु सरकार’ के निर्देशक मधुर भंडारकर का कहना है कि वह कांग्रेस प्रवक्ता ज्योतिरादित्य सिंधिया का सम्मान करते हैं, लेकिन फिल्म के बारे में उन्होंने जो टिप्पणी की है, इसकी उन्हें बिल्कुल भी आशा नहीं थी.

गौरतलब है कि सिंधिया ने सोमवार को कहा था, “इस फिल्म को बनाने के पीछे जिस संगठन और व्यक्ति का हाथ है, उसे हम अच्छी तरह जानते हैं. हम फिल्म में दिखाए गए झूठ की निंदा करते हैं.”

भंडारकर ने आईएएनएस को बताया, “मैं हैरान हूं कि पूरी फिल्म देखे बिना ज्योतिरादित्य इस तरह की टिप्पणी कैसे कर सकते हैं? एक व्यक्ति के तौर पर मैं उनका सम्मान करता हूं, लेकिन मुझे उनसे यह अपेक्षा नहीं थी. फिल्म का सिर्फ एक ट्रेलर सामने आया है, जहां मैंने किसी भी राजनेता के नाम का जिक्र नहीं किया है.

मधुर से जब पूछा गया कि क्या यह वास्तविक चरित्र पर आधारित है क्योंकि सुप्रिया विनोद की भूमिका इंदिरा गांधी और नील नितिन मुकेश की भूमिका देखने में बिल्कुल संजय गांधी सी प्रतीत होती है, तो उन्होंने कहा, “फिल्म 70 फीसदी काल्पनिक और 30 फीसदी वास्तविकता पर आधारित है. फिल्म की पृष्ठभूमि 1972 में लगे आपातकाल पर है, जिसे सभी जानते हैं. दर्शकों को फिल्म की कहानी समझने के लिए फिल्म देखनी चाहिए. फिल्मकार ने कहा कि फिल्म में उन्होंने अपना राजनीतिक नजरिया नहीं दर्शाया है और इसकी कहानी आपातकाल के दौरान की मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है.”

यह फिल्म 28 जुलाई को सिनेमाओँ में रिलीज हो रही है.

रामनाथ कोविंद को नीतीश कुमार का समर्थन देने का फैसला: राष्ट्रपति चुनाव

जेडीयू के नीतीश कुमार ने भी राष्ट्रपति के लिए रामनाथ कोविंद का समर्थन करने की बात कह दी है. जिसके बाद बीजेपी की राह और आसान हो गयी है. जेडीयू के इस स्टैंड के बाद विपक्ष को करारा झटका लगा है, जो अपना प्रत्याशी उतारने की सोच रहा था. एनडीए ने बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद को अपना प्रत्याशी चुना है. नीतीश कुमार ने निष्पक्ष राज्यपाल के रूप में सेवा करने के लिए कोविंद के कार्यकाल के दौरान काफी प्रशंसा की है. रामनाथ कोविंद दलित समुदाय का प्रमुख चेहरा रहे हैं. उन्हें 2015 में बिहार का राज्यपाल बनाकर भेजा गया गया. हालांकि सहयोगी आरजेडी ने रामनाथ कोविंद का समर्थन न करने का फैसला किया हुआ है. गौरतलब है कि बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजभवन पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी. नीतीश ने कोविंद से मुलाकात के बाद कहा था कि मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर यह प्रसन्नता की बात है कि बिहार के राज्यपाल देश के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हुए हैं. प्रदेश के राज्यपाल के रूप में उन्होंने बहुत ही बेहतरीन कार्य किया. यह खुशी की बात है कि वे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हुए हैं, इसलिए मेरा फर्ज बनता था कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने राज्यपाल से मिलूं. उम्मीद है कि जल्द ही वे देश के नए राष्ट्रपति चुने जायेंगें.

इस नंबर पर मिस कॉल देते ही हो जाएगा 500 रुपये तक का रिचार्ज

नई दिल्ली। कई बार हमारे सामने ऐसे हालात भी आ जाते हैं जब हमें मोबाइल से कॉल करने की जरूरत होती है लेकिन बैलेंस नहीं होता और आसपास कोई रिचार्ज करने की दुकान भी नहीं होती है. लेकिन अब चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि एक मिस्ड कॉल से आपके मोबाइल में 500 रुपए तक का बैलेंस आ सकता है. इसके लिए किसी तरह का ऐप भी डाउन लोड करने के जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन इस सेवा के लिए एक शर्त यह है कि यूजर को एचडीएफसी बैंक का उपभोक्ता हो. अगर आप इस बैंक के खाताधारक हैं तो आप 7308080808 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर मोबाइल को रिचार्ज कर सकते हैं.

क्या करना है सबसे पहले

1- सबसे पहले यूजर को अपना नंबर ऐक्टिवेट करने के लिए एक मैसेज भेजना होगा और यह भी बताना होगा कि कितने रुपए का रिचार्ज कराना है. इसके लिए 7308080808 नंबर पर ACT <Operator Name> <Last 5 digits of Account Number> मैसेज भेजें.

2- मैसेज भेजते ही सेवा एक्टिवेट कर दी जाएगी. इतना ही नहीं अपने नंबर के अलावा यहां पर 5 और नंबर भी जोड़े जा सकते हैं. इन नंबरों को एक्टिवेट करने के लिए Mobile Number> <Operator Name> <Last 5 digits of Account Number> मैसेज 7308080808 नंबर पर भेजें.

3- इसके बाद जब भी आप अपने नंबर को रिचार्ज करना चाहें बस 7308080808 एक मिस्ड कॉल कर दें.

4- 10 से 500 रुपए तक का रिचार्ज किया जा सकता है. हालांकि डिफाल्ट 50 रुपए तक रिचार्ज होता है.

5- खास बात यह है कि इसके लिए यूजर को अपना डाटा खर्च करने की जरूरत नहीं मतलब किसी को भी इंटरनेट, एप और वॉलेट की जरूरत नहीं पड़ेगी.

6- जैसे ही यूजर मिस्ड कॉल करेगा उसका मोबाइल रिचार्ज कर दिया जाएगा और उसके एचडीएफसी अकाउंट से पैसा काट लिया जाएगा.

नरेंन्द्र मोदी योग के साथ राजनीति चमका रहे हैं : आजम खां

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा और कहा की उन्होंने योग को राजनीतिक रंग दे दिया और अब धर्म से जोड़कर इसे धार्मिक रंग दे दिया जा रहा है. वर्तमान सरकार योग के साथ राजनीति करने पर लगी है.

आजम खां ने संवाददाताओं से कहा कि एक्सरसाइज के लिए साइकिल से बेहतर कुछ नहीं हो सकता क्योंकि साइकिल गरीबो की निशानी है और उसे हर धर्म हर जाति का व्यक्ति इस्तेमाल करता है जबकि मोदी और उनकी पार्टी योग को राजनीतिक और धार्मिक मुद्दा बनाने पर तुली हैं.

उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों का कर्जा माफ हो चुका है, हर साल दो करोड़ लोगों को नौकरी मिलनी थी वह वादा जुमला साबित हो चुका है. कानून व्यवस्था चरमरचा रही है किसान गोली खा रहे हैं. आप मौजूदा सरकार को देख लें जिनके राज में बलात्कार लगातार रोजाना सामने आ रहीं हैं. तंज कसते हुए कहा कि अपराध खत्म हो गया है, विकास इतना हुआ है की कुछ पूछिये मत.

गौरतलब है कि मोदी सरकार पर योग के साथ राजनीति करने के सवाल लगातार उठते रहे हैं.

राममंदिर निर्माण के लिए अयोध्या पहुंचे दो ट्रक लाल पत्थर

अयोध्या। अयोध्या में विवादित स्थल पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच यहां दो ट्रक लाल पत्थर पहुंचे हैं. खबरों के मुताबिक सोमवार को यहां राजस्थान के भरतपुर से दो ट्रक लाल पत्थर पहुंचा है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि ये पत्थर राम मंदिर निर्माण के लिए भेजा गया है. राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर पहली बार नहीं पहुंचे हैं. इससे पहले साल 2015 में भी ट्रक भेजे गए थे. लेकिन अखिलेश सरकार ने उन ट्रकों को वापस भेज दिया था. बता दें कि अयोध्या में विवादित जमीन पर मालिकाना हक की सुनवाई के लिए अदालत में मुकदमा चल रहा है.

अयोध्या में काफी दिनों से राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने का काम भी चल रहा है. अयोध्या के रामघाट स्थित मंदिर निर्माण कार्यशाला में साल 1991-92 से पत्थर तराशे जा रहे हैं. बीच में इस काम में चार से पांच सालों के लिए रुकावट पेश आई लेकिन पिछले चार सालों से फिर से पत्थरों को मंदिर बनाने के अनुरुप काटा जाने लगा है. कुछ साल पहले तक यहां ढाई से तीन दर्जन कारीगर पत्थर तराशने का काम करते थे लेकिन बीच में ये संख्या दस से पंद्रह के बीच रह गई थी.

वीएचपी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पिछली सरकार के दौरान जब भी पत्थरों को लाने को कोशिश की जाती थी, टैक्स और खनन आदि नियमों का हवाला देकर अधिकारियों द्वारा इसे रुकवा दिया जाता था, लेकिन अब राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद आसानी से पत्थर आ रहे हैं. बता दें कि इधर हाल के दिनों में बाबरी मस्जिद विध्वंस के मामले में भी सुनवाई ने रफ़्तार पकड़ी है. सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल को इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार समेत कुछ दूसरे नेताओं के खिलाफ आपराधिक षड़यंत्र रचने के आरोप को फिर से लगाया है.

विराट से कहासुनी के बाद कुंबले ने दिया इस्तीफा

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नई दिल्ली। अनिल कुंबले ने टीम इंडिया के कोच पद से इस्तीफा क्यों दिया यह अब कोई राज की बात नहीं रह गई है. सोमवार रात को लंदन (इंग्लैंड) में क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) की बैठक में यह साफ हो गया था कि अब कुंबले का कोच पद पर बने रहना मुमकिन नहीं है. लेकिन इसके पीछे एक और खास वजह है जो कि अब सामने आ रही है. कुंबले और कोहली के बीच की खाई को गहरा करने में भारतीय खिलाड़ियों ने भी अहम भूमिका निभाई.

पाकिस्तान के हाथों चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में मिली हार के बाद कोच अनिल कुंबले ने कुछ खिलाड़ियों से निजी रूप से मैच में उनके प्रदर्शन को लेकर बात की. कुंबले ने खास तौर पर गेंदबाजों के खराब खेल को लेकर बात की थी. कुंबले को ये बात करना महंगा पड़ गया और टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार खिलाड़ियों ने इसकी शिकायत कप्तान कोहली से कर दी इसके बाद ड्रेसिंग रूम में अजीब सा माहौल बन गया.

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने साफ कर दिया कि कुंबले के साथ उनका तालमेल नहीं बन पा रहा है. वह उनके साथ कप्तानी करने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में दो विकल्प ही हो सकते थे. या तो कुंबले को हटाया जाए या फिर कोहली को. टीम इंडिया में सब कुछ सही नहीं चल रहा था यह तब साफ हो गया जब बीसीसीआइ द्वारा टिकट बुक कराए जाने के बावजूद कुंबले वेस्टइंडीज के दौरे पर रवाना नहीं हुए. हालांकि कुंबले ने इसकी वजह 22 जून को होने वाली आइसीसी की क्रिकेट समिति की बैठक को बताया. कुंबले इस समिति के प्रमुख हैं. फ्लाइट से कुछ घंटे पहले ही कुंबले ने टीम मैनेजमेंट को खबर दी कि वह टीम के साथ नहीं जा रहे हैं. बीसीसीआइ ने कुंबले को वेस्टइंडीज दौरे पर जाने के लिए कहा था और सीएसी इस बीच उनके और कोहली के संबंधों में आई दरार को कम करने में जुटी थी. बैठक में कोहली ने कुंबले को लेकर अपनी असहमति की बात खुलकर सामने रख दी थी. ऐसे में माना जा रहा था कि सीएसी दोनों के बीच कोई बीच का रास्ता निकाल लेगी, लेकिन कुंबले ने वेस्टइंडीज दौरे पर न जाकर इस मामले का पटाक्षेप करना बेहतर समझा.

कुंबले के जाने की एक वजह उनका बीसीसीआइ में कोई समर्थन न होना भी बताया जा रहा है. कुंबले का चयन सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण ने किया था, लेकिन उनके अलावा कुंबले को सपोर्ट करने वाला कोई नहीं था. वह टीम में अनुशासन को लेकर बेहद सख्त थे. उन्होंने कई बार प्रैक्टिस के दौरान भी खिलाड़ियों को लताड़ लगाई थी. कोच के तौर पर कुंबले कभी भी विराट की पहली पसंद नहीं रहे.

सऊदी के नए प्रिंस होंगें मुहम्मद बिन सलमान

सऊदी के नए प्रिंस की घोषणा हो चुकी है. सुल्तान सलमान ने अपने भतीजे मुहम्मद बिन नायेफ को हटाकर अपने बेटे मुहम्मद बिन सलमान को उत्तराधिकारी घोषित करने का फैसला कर लिया है. अपने पिता के बाद अब प्रिंस सलमान ही सऊदी की गद्दी पर बैठेंगे. प्रिंस सलमान को प्रिंस बनाने की तैयार पहले से ही देखी जा रहीं थी. उनसे पहले क्राउन प्रिंस रहे 57 साल के नायेफ से धीरे-धीरे सभी शक्तियां छीनी जा रही थीं. जिनसे उनको हटाने के कयास लगाये जा रहे थे. सऊदी अरब की न्यूज एजेंसी ने बताया की , बिन नायफ जो सालों से आतंकवाद रोधी कार्यक्रमों के लिए काम कर रहे थे. उन्होंने साल 2003-06 में अलकायदा समूह के बम विस्फोटों को भी नाकाम कर दिया था, उन्हें अब सभी पदों से मुक्त कर दिया गया.

नए राजकुमार प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान, जो रक्षा मंत्री के पद के अलावा एक विशाल आर्थिक पोर्टफोलियो की देखरेख भी करते हैं. बताया जाता है कि पहले वे इस रेस में दूसरे स्थान पर थे. हालांकि शाही मामलों में नजर रखने वालों को इस बात का संदेह था कि जल्द ही उनकी ताकत बढ़ सकती है और वे उत्तराधिकारी बन सकते हैं.

जनवरी 2015 में सलमान के राजा बनने से पहले युवा राजकुमार को सऊदी के लोग नहीं जानते थे. इससे पहले प्रिंस सलमान अपने पिता के शाही अदालत के प्रभारी थे. अब सऊदी सम्राट ने अपने बेटे को शाही परिवार का प्रिंस नियुक्त कर अपार शक्तियां प्रदान की हैं. अल अरबिया टेलीविजन ने बताया कि राजकुमार को बढ़ावा देने के लिए राज्य की सशक्तीकरण परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया था. इसके बाद राजा ने बुधवार शाम को मक्का में मोहम्मद बिन सलमान के प्रति वफादारी दिखाते हुए इस बात की अधिकारिक घोषणा कर दी.

अपील करने पर माफ हो सकती है कुलभूषण जाधव की फांसी की सजाः बासित

नई दिल्ली। पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कुलभूषण जाधव पर नरम संकेत दिया है. एक अंग्रेजी इंटरव्यू में उन्होंने कहा, जाधव क़ानून के मुताबिक पाकिस्तान में अपील कर सकते हैं. बासित ने कहा अगर ‘कोर्ट ऑफ अपील’ से भी जाधव की अपील रद्द हो जाती है, तो उनके पास अपील का मौका है. उन्होंने कहा कि जाधव पहले आर्मी चीफ जनरल कमर बाजवा से दया के लिए अपील कर सकते हैं, उसके बाद राष्ट्रपति के पास भी याचिका दे सकते हैं.

अंग्रेजी अखबार द हिंदू से बातचीत में अब्दुल बासित ने कहा कि जब तक कुलभूषण जाधव का मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में है, तब तक उन्हें फांसी नहीं दी जाएगी. बासित ने कहा कि भले ही आईसीजे का फैसला आने में दो-तीन साल लग जाएं, लेकिन उससे पहले फांसी नहीं दी जाएगी. हालांकि, बासित ने कहा कि वो चाहते हैं इस मामले में जल्द कोर्ट का फैसला आए.

बासित ने कहा जब तक जाधव का मामला हेग के अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में है, तब तक उन्हें फांसी नहीं दी जाएगी. बासित ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की प्रक्रिया को लेकर कहा, “हम चाहते हैं कि यह जल्दी से खत्म हो. लेकिन जब तक पाकिस्तान सरकार का कोई फैसला नहीं आता है हम प्रतिबद्ध हैं.”

हाल ही में, पाकिस्तान सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी कर दिया था कि जाधव को अभी फंसी दी सकती. क्योंकि अभी वह 2 अपीलें और दायर कर सकते हैं एक पाकिस्तानी सेना प्रमुख और दूसरा पाकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ.

जाधव भारतीय नौसेना के एक सेवानिवृत अधिकारी हैं जिन्हें पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने पाकिस्तान में जासूसी और आतंकवादी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के लिए मौत की सज़ा सुनाई थी. जाधव को ईरान से प्रवेश करने के बाद, बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था.

मौत की सज़ा के खिलाफ भारत 8 मई को आईसीजे पहुंचा और जाधव के खिलाफ आरोपों को मनगढ़ंत बताया. 18 मई को सुनवाई के दौरान आईसीजे की 10 सदस्यीय पीठ ने पाकिस्तान को जाधव को फांसी पर कार्यवाई करने से रोक दिया था.

सऊदी अरब के सुल्तान ने भारतीयों पर लगाया 100 रियाल का टैक्स

रियाद। सऊदी अरब सरकार 1 जुलाई से फैमिली टैक्‍स में इजाफा करने का निर्णय लिया है. इसलिए सऊदी अरब में काम करने वाले बड़ी संख्‍या में भारतीय नागरिक अपने आश्रितों को वापस भारत भेजने की योजना बना रहे हैं. इस टैक्स के तहत प्रत्येक आश्रित के लिए शुल्क- 100 रियाल (लगभग 1700 रुपये) होगा जो हर माह सऊदी अरब सरकार को देना होगा. यह वहां रहने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ है. बता दें कि सऊदी अरब में भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 41 लाख है.

दम्माम निवासी कंप्यूटर प्रोफेसनल मोहम्मद ताहिर बताते हैं कि मेरे जानने वाले कुछ परिवारों ने हैदराबाद लौटने की योजना बनायी है, अभी ये सऊदी में अपने परिवार के साथ रहते हैं. इन्हें लगता है कि अब वह सऊदी के खर्चों को उठाने में असमर्थ हैं.‘ प्रवासी अधिकार कार्यकर्ता भीम रेड्डी मांधा ने बताया, कई लागों ने तो चार महीने पहले ही अपने परिवारों को भारत वापस भेज दिया.

5000 रियाल (करीब 86,000 रुपये) प्रति माह वेतन वालों को सऊदी अरब की ओर से फैमिली वीजा दिया जाता है. इसलिए, जो भारतीय अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सऊदी में रहना चाहते हैं उनको 300 रियाल (लगभग 5,100 रुपये) महीने का भुगतान करना होगा.

इसके अलावा, यह टैक्स साल 2020 तक हर साल 100 रियाल प्रति सदस्य बढ़ता रहेगा. इसका मतलब है कि 2020 में, प्रत्येक परिवार को अपने हर सदस्य के लिए 400 रियाल (करीब 6, 900 रुपये) प्रति माह देना होगा. इस टैक्स से जुड़ी सबसे बड़ी मुश्किल यह है की यह टैक्स आपको एडवांस देना होगा. उदाहरण के लिए यदि किसी की पत्‍नी को एक साल के लिए सऊदी अरब में रहना है तो 1200 रियाल एडवांस में देना होगा. हालांकि, वहां कि कुछ कंपनियों ने काम करने वाले लोगों को डिपेंडेंट फीस देने का फैसला किया है, लेकिन ज्यादातर लोगों को खुद भुगतान करना होगा.

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इस संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता है. लेकिन इतना जरूर है की ‘आश्रित टैक्स’ सऊदी में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों को प्रभावित करेगा.

पूर्व जज कर्णन को 6 माह जेल में रहना होगा

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कोलकाता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सीएस कर्णन को कम से कम 6 माह के लिए जेल में रहना होगा. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जमानत देने या सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट की दो जजों की बेंच ने कहा कि सात जजों की संविधान पीठ ने उन्हें छह महीने की सजा सुनवाई है. ऐसे में ये बेंच उस आदेश पर कोई सुनवाई नहीं कर सकती. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी न्यायिक अनुशासन के तहत काम कर सकता है. अगर कोई भी राहत लेनी है तो चीफ जस्टिस के सामने केस को रखना होगा. मंगलवार को ही जस्टिस कर्णन को कोयम्बटूर से गिरफ्तार किया गया है.

9 मई को सात जजों की बेंच ने जस्टिस कर्णन को अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी, लेकिन तभी से वह फरार चल रहे थे. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कर्णन की ओर से वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मंगलवार को उन्हें गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देने या सजा को निलंबित करने के लिए मना कर दिया है.

गौरतलब है कि 23 जनवरी को जस्टिस कर्णन ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वर्तमान 20 जजों की लिस्ट भेजी थी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस कर्णन को अवमानना नोटिस जारी किया था. नौ फरवरी को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस जारी होने के बाद इस कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को खत लिखा. इस खत में कहा गया है कि हाई कोर्ट के मौजूदा जस्टिस के खिलाफ कार्यवाही सुनवाई योग्य नहीं है. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर के रिटायर होने के बाद होनी चाहिए. अगर बहुत जल्दी हो तो मामले को संसद रेफर किया जाना चाहिए. इस दौरान न्यायिक और प्रशासनिक कार्य वापस कर दिए जाने चाहिए. चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुआई वाली सात जजों की बेंच पर सवाल उठाते हुए जस्टिस कर्णन ने उन पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 6 माह तक जमानत न देने का फैसला किया है..

किसानों ने शव आसन कर जताया केंद्र सरकार का विरोध

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लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर जहां भारत सहित दुनिया के 150 देशों में कार्यक्रम है, वहीं देश का किसान इस दिन विरोध प्रदर्शन करेगा. किसान सड़कों पर शव आसन कर अपना विरोध दर्ज करेंगे.

भारतीय किसान यूनियन ने योग दिवस के मौके पर लखनऊ के अलावा पूरे उत्तर प्रदेश में सुबह 9 बजे से 11 बजे तक विरोध प्रदर्शन किया. किसानों ने नेशनल हाइवे पर जाम लगाकर और सड़कों पर शव आसन कर अपना विरोध जताया.

उत्तर प्रदेश के अलावा किसानों ने भोपाल, पंजाब और उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन किया. किसान मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस की फायरिंग में मारे गए किसानों की हत्या के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, एम एस स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू किए जाने (रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों की लागत में 50 प्रतिशत अधिक जोड़ करके किसानों को दिया जाए), फसलों की खरीद निश्चित करने, एमएसपी से कम खरीद करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने जैसी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत सुबह 8 बजे मुजफ्फननगर के रामपुर तिराहा पर किसानों के साथ एनएच 58 पर किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ योग किया. राष्ट्रीय किसान महासभा ने आज सुबह 8 बजे दिल्ली के किसान घाट पर शव आसन कर विरोध प्रदर्शन किया.

ब्रसल्स में संदिग्ध आत्मघाती हमलावर को गोलियों से भूना

 

ब्रसल्स। बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स में एक आत्मघाती हमलावर को सैनिकों ने मार गिराया है. मारे गए शख्स ने कथित तौर पर ब्रसल्स के केंद्रीय रेलवे स्टेशन पर आतंकी हमला करने की कोशिश की थी. खबरों के मुताबिक, संदिग्ध के शरीर में एक विस्फोट बेल्ट बंधी थी और उसने स्टेशन पर इस बेल्ट में धमाका करने की कोशिश की. कुछ चश्मदीदों का दावा है कि हमलावर चीखकर ‘अल्लाहो अकबर’ भी कह रहा था. हमलावर की उम्र 30 से 35 साल के बीच बताई जा रही है. पुलिस इस मामले की जांच फिलहाल आतंकी हमले के तौर पर कर रही है.

फिलहाल संदिग्ध की पहचान नहीं हो पाई है. उसके पास से एक सूइसाइड बेल्ट और विस्फोटकों से भरा बैग मिला है. संदिग्ध ने स्टेशन की इमारत के अंदर एक छोटा विस्फोट भी किया, जिसके बाद पुलिस ने उसे मार गिराया. चश्मदीदों का कहना है कि धमाके के बाद पुलिस ने कुछ ही सेकंड्स के भीतर स्टेशन और इसके पास स्थित ग्रैंड प्लेस को खाली करवा लिया. एक चश्मदीद का कहना है कि संदिग्ध ने मारे जाने से पहले चीखकर ‘अल्लाहो अकबर’ भी कहा था. चश्मदीदों का कहना है कि वह काफी उत्तेजित भी दिख रहा था.

बेल्जियम नैशनल रेल कंपनी में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि संदिग्ध जिदाहियों के बारे में कुछ कह रहा था और फिर उसने एक सामान से भरी ट्रॉली पर कोई धमाका भी किया. अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन पर छोटा धमाका हुआ, लेकिन इसमें बहुत कम नुकसान ही हुआ. यह स्टेशन बेल्जियम के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक है. खबरों के मुताबिक, सबसे पहले एक ट्रेन चालक ने लोगों को रेलवे पटरी के पास भागते देखकर सरकारी एजेंसियों को इस मामले की सूचना दी थी. उसने स्टेशन पर लोगों को रेलवे पटरी के पास भागते हुए देखा था इस स्टेशन का प्रबंधन देखने वाली रेल कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल ऐहतियात बरतते हुए सभी ट्रेनों का रूट बदल दिया गया है. साथ ही, बसों की मदद से स्टेशन पर जमा यात्रियों को वहां से हटाया जा रहा है.

जम्मू-कश्मीर के बारामूला में मुठभेड़, दो आतंकवादी ढेर

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श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के बारामूला में आतंकियों और सेना के बीच मुठभेड़ हुई है. सोपोर में हुई इस मुठभेड़ में अभी तक हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों के मारे जाने की खबर है. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी जिले के सोपेरा के पज़ल्पोरा गांव स्थित एक घर के अंदर छिपे थे. उन्होंने बताया कि मौक से दो हथियार बरामद किए गए हैं और इलाके में अभियान अभी जारी है.

आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर अभियान शुरू किया था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि रात को खोज अभियान रोक दिया गया था, लेकिन सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरा रखा ताकि आतंकवादी वहां से भाग न पाएं. उन्होंने बताया कि अभियान आज सुबह फिर शुरू किया गया और अंदर मौजूद आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करने के बाद एक बार फिर मुठभेड़ शुरू हो गई.

जानकारी के अनुसार सेना ने सोपोर के पाजलपोर गांव में सर्च अभियान चलाया था जिसके बाद जवानों का आतंकियों से सामना हुआ. जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और दोनों तरफ से फायरिंग चल रही है. सोपोर पुलिस, SOG और सेना के 22 RR के जवान इस ऑपरेशन में शामिल हैं. इस मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से सेना को हथियार भी बरामद हुए हैं.