साल 1941 में फ़ैज़ ने एक अंग्रेज़ महिला एलिस से श्रीनगर में विवाह किया था और उनका निकाह पढ़वाया था उस समय कश्मीर के सबसे बड़े नेता शेख़ अब्दुल्ला ने. फ़ैज़ के नवासे अली मदीह हाशमी उस घटना के बारे में बताते हैं, ”1941 में श्रीनगर में उनका निकाह हुआ था. मेरी नानी ने मुझे बताया कि फ़ैज़ उनके लिए एक अंगूठी लेकर आए थे. एलिस ने पूछा कि पैसे कहां से आए अंगूठी ख़रीदने के, तो उन्होंने कहा कि मियां इफ़्तखारुद्दीन से उधार लिए हैं लेकिन हम उनको वापस नहीं करेंगे.”

हाशमी ने बताया, ”एलिस ने अंगूठी पहनी. वो उन्हें बिल्कुल फ़िट आई. उन्होंने फ़ैज़ से पूछा- नाप कहां से मिला? फ़ैज़ ने कहा मैंने अपनी उंगली का नाप दिया. इसे कहते हैं परफ़ैक्ट फ़िट. हमारी उंगलियां भी बराबर हैं. उस शादी में उनकी तरफ़ से तीन बाराती गए थे और शाम को हुए दावते-वलीमा में जोश मलीहाबादी और मजाज़ भी शामिल हुए थे.”
1962 में फ़ैज़ को सोवियत संघ ने लेनिन शांति पुरस्कार से नवाज़ा था. चूंकि फ़ैज़ को दिल का दौरा पड़ चुका था इसलिए उन्हें हवाई जहाज़ से सफ़र करने की मनाही थी. वो कराची से नेपल्स पानी के जहाज़ से गए थे और फिर वहां से तीन दिनों का ट्रेन का सफ़र करते हुए मॉस्को पहुंचे थे.
- साभार- बीबीसी में रेहान फजल के लिखे आलेख से

दलित दस्तक (Dalit Dastak) साल 2012 से लगातार दलित-आदिवासी (Marginalized) समाज की आवाज उठा रहा है। मासिक पत्रिका के तौर पर शुरू हुआ दलित दस्तक आज वेबसाइट, यू-ट्यूब और प्रकाशन संस्थान (दास पब्लिकेशन) के तौर पर काम कर रहा है। इसके संपादक अशोक कुमार (अशोक दास) 2006 से पत्रकारिता में हैं और तमाम मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। Bahujanbooks.com नाम से हमारी वेबसाइट भी है, जहां से बहुजन साहित्य को ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। दलित-बहुजन समाज की खबरों के लिए दलित दस्तक को सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलो करिए। हम तक खबर पहुंचाने के लिए हमें dalitdastak@gmail.com पर ई-मेल करें या 9013942612 पर व्हाट्सएप करें।

