चित्रकूट। फर्जी मुठभेड़ों को लेकर बदनाम उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की पुलिस अब मानवाधिकारों के हनन में भी अव्वल होती जा रही है.
एक दलित ग्राम प्रधान को पुलिस पूछताछ के नाम पर कोतवाली ले आई और बिना लिखा-पढ़ी किए पिछले 10 दिनों से हिरासत में रखे हुई है. ग्राम प्रधान के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है. यह वाकया चित्रकूट जिले की कर्वी कोतवाली का है. करारी गांव के दलित ग्राम प्रधान को हत्या के एक मामले में पूछताछ के लिए लाया कोतवाली लाया था.
करारी गांव की एक दलित महिला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अलावा उच्चाधिकारियों को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि उसने अदालत के आदेश पर 17 जुलाई, 2018 को गांव के राजाभइया सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले में दोष मुक्त करने के बदले विवेचना अधिकारी ने आरोपी से कथित रूप से एक लाख रुपये की मांग की थी. इसी को लेकर आरोपी ने अपने पिता पर जमीन बेचने का दबाव बनाया, जिसको लेकर दोनों के बीच दो दिन काफी झगड़ा हुआ था और उसके पिता दादू भाई ने 31 जुलाई और एक अगस्त की दरम्यानी रात अपने खेत के बबूल के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.
शिकायती पत्र के मुताबिक, पुलिस महिला के पति कल्लू, देवर कमलेश, भतीजे सुशील और गांव के दलित ग्राम प्रधान कोदा प्रसाद कोरी को एक अगस्त की देर रात घर से उठा ले गई. पति, देवर और भतीजे को छह अगस्त को कथित हत्या के मामले में जेल भेज दिया है, लेकिन ग्राम प्रधान को अब भी कर्वी पुलिस अपनी हिरासत में रखे हुई है. इस मामले में पुलिस ने कोई लिखा-पढ़ी नहीं की है.
पीड़िता ने यह भी लिखा कि जिस रात पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था, उसके दूसरे दिन अदालत में उसका धारा-164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज कराया जाना था, जो अब तक दर्ज नहीं कराया गया है. आरोपी उसकी व उसके परिवार की हत्या के लिए खुला घूम रहा है.
दस दिन से पुलिस की हिरासत झेल रहे दलित ग्राम प्रधान कोदा प्रसाद कोरी ने रविवार को फोन पर बताया कि कोतवाल ने कथित हत्या बावत अब तक कोई पूछताछ नहीं की है और न ही थाने से एक भी दिन खाना दिया है. उसके परिजन दोनों पहर 40 किलोमीटर की दूरी तय कर कोतवाली खाना देने आते हैं.
उन्होंने फोन पर बताया कि कोतवाल ने सीधे तौर पर रिश्वत की मांग नहीं की, बल्कि कोतवाल की तरफ से उनके सरकारी जीप चालक और एक पंड़ित होमगार्ड ने कई बार एक लाख रुपये देने पर छोड़ने की बात कह चुके हैं. मैं पचास हजार रुपये तक देने को कह चुका हूं.
इस मामले में जब कोतवाल अनिल सिंह से बात की गई तो उनका कहना था, कल्लू, कमलेश, सुरेश, ग्राम प्रधान कोदा और उसके दो भाइयों रामकुमार व मिठाईलाल के खिलाफ दादू भाई सिंह की हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज है. कल्लू, कमलेश और सुशील को छह अगस्त को जेल भेज दिया गया है. ग्राम प्रधान को घटना बावत पूछताछ और दो भइयों की गिरफ्तारी के दबाव के लिए हिरासत में रखा गया है.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लिखा-पढ़ी में जरूर हिरासत में नहीं लिया गया, लेकिन पुलिस अधीक्षक की जानकारी में है. जल्दी ही ग्राम प्रधान का भी चालान किया जाएगा.
दुष्कर्म पीड़िता का अदालत में अब तक बयान न दर्ज कराए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उस घटना के विवेचना अधिकारी सीओ सिटी हैं, इस बारे में वही बता सकते हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहले ही 24 घंटे से ज्यादा समय तक किसी भी आरोपी को हिरासत में न रखने के दिशा-निर्देश दे चुका है, लेकिन यहां की पुलिस के लिए इसका कोई मायने नहीं है.
(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)
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