थाईलैंड। तमाम धर्म अपने भीतर के चमत्कार को खूब प्रचारित करते हैं. कुछ धर्म तो चमत्कार की कहानियों पर ही टिके हुए हैं. बौद्ध धम्म ऐसा धम्म है, जहां चमात्कार की बजाय करुणा, प्रज्ञा, शील, शांति, बंधुत्व और सौहार्द की बात की जाती है. आम तौर पर इस धर्म और इसके धर्म गुरुओं से जुड़ी खबरें बहुत कम सामने आती है, लेकिन जब आती हैं तो दुनिया को चौंका जाती है. एक ऐसी ही खबर थाइलैंड से आई है.
थाईलैंड में बौद्ध भिक्षु के शव को एक रस्म के लिए उनकी मौत के बाद कब्र से निकालने की परंपरा रही है. पिछले दिनों जब एक बौद्ध भिक्षु के शव को उनके अनुयायियों ने रस्म के लिए कब्र से बाहर निकाला, तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें खुली रह गई. देखते ही देखते यह खबर दुनिया भर में फैल गई. असल में बौद्ध भिक्षु के शरीर पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा था और उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी.
असल में बौद्ध भिक्षुओं के गुरु Luang Phor Pian की 92 साल की उम्र में 16 नवंबर को परिनिर्वाण हो गया था. परिनिर्वाण यानि मृत्यु के बाद उन्हें उसी बौद्ध परिसर में दफना दिया गया जहां वे सेवा करते थे. दो महीने बाद जब एक खास रस्म के लिए उनका शव कब्र के बाहर निकाला गया तो लुआंग के चेहरे की मुस्कान देखकर बाकी भिक्षु दंग रह गए. मानों वो खुशी से चैन की नींद में सो रहे हों.
इस तस्वीर के सामने आने के बाद एक्सपर्ट्स के लिए भी यकीन करना मुश्किल है कि 2 महीने बाद भी उनका शरीर वैसा ही है. ऐसा लग रहा है मानो इनकी मौत सिर्फ 36 घंटे पहले हुई हो. वहीं भिक्षु के अनुयायियों के मुताबिक उनके चेहरे पर मौजूद मुस्कान इस बात का इशारा है कि वे शांति की अवस्था को प्राप्त हो गए हैं. इसी तरह कुछ साल पहले एक सर्वे में दुनिया के सबसे बड़े खुशहाल व्यक्ति के रूप में एक बौद्ध भिक्षु का नाम सामने आया था.
फिलहाल रस्म के मुताबिक खास रस्म की प्रक्रिया शुरू हो गई है. भिक्षु के शव को साफ कर नए कपड़े पहना दिए गए है और प्रार्थनाओं का दौर शुरू हो चुका है. ये प्रार्थना तबतक चलेगी जबतक उनकी मौत हुए 100 दिन पूरे नहीं हो जाते. 100वें दिन एक बार फिर उन्हें हमेशा के लिए दफना दिया जाएगा.

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