नई दिल्ली। MeToo अभियान को लेकर जहां तमाम राजनीतिक दलों और मीडिया दिग्गजों ने चुप्पी साध रखी है, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने इस पर बड़ा बयान दिया है. सुश्री मायावती ने ‘मी टू’ अभियान के तहत 14 महिलाओं से दुर्व्यवहार और यौन शोषण के आरोपों में फंसे केंद्रीय मंत्री एम.जे. अकबर पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले पीएम मोदी को घेरा है. बसपा प्रमुख ने कार्रवाई नहीं करने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार को हठधर्मी और अहंकारी कहा.
उन्होंने एम. जे. अकबर द्वारा अपने पर लगे आरोपों को राजनीतिक रंग दिए जाने की निंदा करते हुए कहा, “इस मी टू अभियान में जहां कई महिलाओं ने आगे आकर अपने साथ हुए शोषण और यौन उत्पीड़न के घटनाक्रमों को हिम्मत के साथ मीडिया के सामने रखा, वहीं बीजेपी एंड कंपनी इस अति संवेदनशील मुद्दे पर भी खामोश तमाशाई और मूकदर्शक बनी हुई है.”
एम. जे अकबर पर लगे आरोपों को आधार बनाते हुए बीएसपी प्रमुख ने भाजपा को भी कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि “आरोपों के कठघड़े में खड़े मंत्री से ज्यादा यह घटनाक्रम बीजेपी व केंद्र सरकार की महिला सम्मान के प्रति असंवेदनशील व इनके घोर महिला विरोधी चाल, चरित्र व चेहरे को देश दुनिया के सामने पूरी तरह से बेनकाब करता है.”
उन्होंने कहा कि- “बीजेपी सरकारों में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा व सम्मान का बहुत बुरा हाल है, लेकिन चुनावी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए पीड़ित महिलाओं की आवाज को पूरी तरह से असंवेदनशील होकर एक सिरे से नजरअंदाज कर देना एक ऐसा कृत्य है, जिसे शायद देश में कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा. इसका खामियाजा भी बीजेपी को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा.”
सुश्री मायावती ने कहा कि फिल्म, खेल, मीडिया सहित सभी जगहों पर ऐसे यौन उत्पीड़न व शोषण के लगने वाले आरोपों के संबंध में कार्रवाइयों के उदाहरण देखने को मिल रहे हैं और इसकी निंदा व विरोध किया जा रहा है. ऐसे में बीजेपी और केंद्र सरकार का अपने मंत्री के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न करना हठधर्मी सरकार के अहंकारी होने का भी जीता-जागता प्रमाण है.
ऐसे वक्त में जब ‘मी टू’ पर राजनीति के दिग्गजों ने चुप्पी साध रखी है, बसपा प्रमुख मायावती के इस बयान से एक हलचल शुरू हो सकती है.

राज कुमार साल 2020 से मीडिया में सक्रिय हैं। दलित दस्तक में उप संपादक पद पर हैं। देश और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

