स्वतंत्रता दिवस पर मायावती ने उठाए जरूरी सवाल

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भारत अपनी आजादी के 77 साल का जश्न मना रहा है। इस मौके पर जहां देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिला पर तिरंगा फहराया तो तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने प्रदेश में तिरंगा फहरा कर आजादी का जश्न मना रहे हैं। लेकिन आजादी के साल-दर-साल बीतने के बावजूद देश के सामने अब भी तमाम ऐसे सवाल खड़े हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिल पाया है। वह सवाल देश की आम जनता से जुड़े हुए हैं।

देश की कद्दावर नेता और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्हीं सवालों को उठाया है।

उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री रहीं बहन मायावती ने इस मौके पर कहा कि, देश व दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय भाई-बहनों को आज 77वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आज हर कोई पेट पालने तथा अपना व अपने परिवार का जीवन बेहतर बनाने में व्यस्त है। ऐसे में यह सरकार का दायित्व है कि वह उन्हें शान्ति, सदभाव, तनावमुक्त व सुविधायुक्त जीवन दे।

संविधान निर्माता और राष्ट्रनिर्माता भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर को इस मौके पर याद करते हुए मायावती ने कहा कि, भारत खासकर परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के अति मानवतावादी संविधान को लेकर दुनिया में आज भी एक आदर्श मिसाल है, किन्तु अपार गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन, अमीर-गरीब के बीच आय की जबरदस्त खाई व रुपए के अवमूल्यण आदि के अभिशप्त जीवन से लोगों की मुक्ति अब बहुत जरूरी हो गई है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की आम जनता का जिक्र करते हुए बहनजी ने कहा कि, देश की लगभग 140 करोड़ गरीब व मेहनतकश जनता के लिए स्वतंत्रता की सही स्थापना तथा उसका समुचित लाभ तभी संभव है, जब संविधान की पवित्र मंशा के अनुसार देश में केवल राजनीतिक लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी जमीनी स्तर पर कायम हो, जैसाकि बाबा साहेब की असली मंशा थी।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब देश के प्रधानमंत्री से लेकर तमाम प्रदेशों के मुख्यमंत्री बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने में व्यस्त हैं, बसपा सुप्रीमों मायावती ने जिस तरह भारत की असली तस्वीर पेश करते हुए आम जनता से जुड़े मसलों को उठाया है, साफ है कि उन मसलों को हल किये बिना देश को असली स्वतंत्रता नहीं मिलेगी।

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