नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में होने वाले लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों को लेकर तारीख का ऐलान हो गया है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर जबकि बिहार में अररिया, भभुआ व जहानाबाद क्षेत्र में उपचुनाव होना है. उप चुनाव 11 मार्च को होंगे और 14 मार्च को मतगणना होगी. चुनाव की घोषणा के बाद जहां विरोधी दल भाजपा को घेरने में जुट गए हैं तो वहीं भाजपा के लिए यह अपनी इज्जत बचाने वाला चुनाव बन गया है.
असल में यह उप चुनाव दो वहजों से रोचक हो गया है. हाल ही में राजस्थान में हुए उपचुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद पूरे देश की नजर इस चुनाव पर है. राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण बिहार और उत्तर प्रदेश में यह चुनाव होने की वजह से इसे देश का मूड भांपने वाला चुनाव माना जा रहा है. यूपी का चुनाव इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि यहां जिन दो सीटों पर उप चुनाव होना है, वह उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई है.
वहीं बिहार में भी लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों को लेकर आर-पार की लड़ाई देखने को मिलेगी. इसमें अररिया लोकसभा सीट और जहानाबाद विधान सभा सीट राजद के पास तो भभुआ की सीट भाजपा के पास थी. जाहिर सी बात है कि यूपी का उप चुनाव भाजपा के लिए, तो बिहार का चुनाव राजद के लिए काफी महत्वपूर्ण है. भाजपा के सामने जहां राजस्थान उप चुनाव हारने के बाद अपनी साख को फिर से बहाल करने की चुनौती है तो तेजस्वी यादव के सामने पिता के जेल जाने के बाद सामने आए पहले चुनाव में खुद को साबित करने की. कुल मिलाकर चुनौती भाजपा के सामने ज्यादा है.

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