दलित दस्तक के पांच साल पर प्रोफेसर विवेक कुमार की टिप्पणी

Details Published on 28/05/2017 16:25:19 Written by Dalit Dastak News


आज के दिन बर्बस साहिर लुधियानवी का शेर याद आता है. मैं तो अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग साथ आते गए, कारवां बनता गया. साथियों दलित दस्तक के पांच वर्ष पूरे होने पर पूरे बहुजन समाज को बहुत-बहुत साधुवाद. बहुजन समाज को इसलिए साधुवाद क्योंकि अगर बहुजन समाज ने दलित दस्तक का सहयोग न किया होता तो शायद यह पत्रिका वजूद में न आई होती. अतः बहुजन समाज के उन लोगों को अपनी पीठ थपथपानी चाहिए जिन्होंने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से पत्रिका का सहयोग किया है. पत्रिका का क्या बल्कि उन्होंने अपना और अपने समाज का सहयोग किया है. और एक छोटी सी शुरुआत को पांच वर्षों तक अपनी सोच, अपने जज्बे और खून पसीने की कमाई से सींच कर एक आंदोलन... Read More

क्या भारत सभ्य है?

Details Published on 27/05/2017 17:18:26 Written by संजय जोठे


भीम आर्मी: स्थापित दलित नेतृत्व से निराशा का परिणाम

Details Published on 26/05/2017 16:43:10 Written by एच. एल. दुसाध


    21 मई, 2017  दलित आंदोलनों के इतिहास में एक खास दिन के रूप में चिन्हित हो गया. इस दिन एक गुमनाम युवा ,भीम आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के आह्वान पर दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर नयी सदी में दलित शक्ति का जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. सुबह से ही लोग लाठियों में नीला झंडा लगाये संसद भवन के निकट जंतर मंतर पर इक्कट्ठा होने लगे. यह अफवाह फैलाये जाने के बावजूद, कि प्रदर्शन कि अनुमति नहीं मिली है, देखते ही देखते जंतर मंतर नीले झंडों से पट गया. जंतर मंतर के इस छोर से उस छोर तक सिर ही सिर. अधिकांश के सिर पर ‘भीम आर्मी’ की  नीली टोपी थी. लाख से अधिक संख्या में पहुंचे लोगों में 80 प्रतिशत के करीब युवा थे जिनमें महिलाओं... Read More

दलित प्रोफेसर के जातीय उत्पीड़न की अंतहीन दास्तां

Details Published on 21/05/2017 23:09:00 Written by भंवर मेघवंशी


प्रोफेसर सुनील वाघमारे 34 साल के नवजवान है, जो महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खोपोली कस्बे के के एम सी कॉलेज के कॉमर्स डिपार्टमेंट के हेड रहे हैं और इसी महाविद्यालय के वाईस प्रिंसीपल भी रहे हैं. उत्साही, ईमानदार और अपने काम के प्रति निष्ठावान. वे मूलतः नांदेड के रहने वाले हैं, वाणिज्य परास्नातक और बी एड करने के बाद वाघमारे ने वर्ष 2009 में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर इस कॉलेज को ज्वाइन किया था. वर्ष 2012 तक तो सब कुछ ठीक चला, मगर जैसे ही वर्तमान प्राचार्य डॉ. एन बी पवार ने प्रिंसिपल का दायित्व संभाला, प्रोफेसर वाघमारे के लिये मुश्किलों का दौर शुरू हो गया.प्राचार्य पवार का प्रोफेसर वाघमारे से इस कदर चिढ़ने लगे कि उनको अपमानित... Read More

मायावती के खिलाफ बीजेपी का मोहरा बनेंगे नसीमुद्दीन!

Details Published on 16/05/2017 17:30:48 Written by अशोक दास


नसीमुद्दीन सिद्दीकी की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद कई तरह की खबरें आ रही हैं. आधिकारिक तौर पर यह खबर आ रही है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सीएम योगी से मिलकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन नसीमुद्दीन और सीएम योगी की मुलाकात सिर्फ सुरक्षा भर की बात नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनैतिक कारण हैं. असल में आरोपों और घोटालों में घिरे नसीमुद्दीन जांच एजेंसियों से अपने बचाव को लेकर छटपटा रहे हैं. इसके लिए वह बसपा से अलग होने के बाद पार्टी अध्यक्ष मायावती के खिलाफ भाजपा का मोहरा बनने तक को तैयार हो सकते हैं. भाजपा को भी बसपा की जड़ खोदने के लिए नसीमुद्दीन के रूप में मोहरा मिल गया है, जिसे... Read More

मीडिया में सहारनपुर कहां है?

Details Published on 15/05/2017 12:13:45 Written by उर्मिलेश


सहारनपुर से लौटे एक युवा रिपोर्टर ने यह कहकर मुझे चौंका दिया कि जिन दिनों वहां पुलिस मौजूदगी में सवर्ण-दबंगों का तांडव चल रहा था, दिल्ली स्थित ज्यादातर राष्ट्रीय न्यूज चैनलों और अखबारों के संवाददाता या अंशकालिक संवाददाता अपने कैमरे के साथ शब्बीरपुर और आसपास के इलाके में मौजूद थे, लेकिन ज्यादातर चैनलों और अखबारों में शब्बीरपुर की खबर नहीं दिखी.उन दिनों ज्यादातर चैनलों की खबरों में जस्टिन बीबर छाये हुए थे और लाखों रुपये खर्चकर उनके कार्यक्रम में मुंबई जाने वालों के इंटरव्यू दिखाये जा रहे थे. देश के कथित राष्ट्रीय मीडिया के मुख्यालयों से सहारनपुर की दूरी महज 180 किमी की है. पर मीडिया दिल्ली सरकार के हटाये गये... Read More

सिद्दीकी साब, ऐसे थोड़े न होता है कि मुंह खोलो और बिना सबूत कुछ भी कह दो

Details Published on 11/05/2017 17:01:18 Written by अशोक दास


बसपा से निकाले जाने के बाद पार्टी के पूर्व महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पूर्व निर्धारित घोषणा के तहत बसपा प्रमुख मायावती पर तमाम आरोप लगाए. सिद्दीकी ने कहा कि मायावती ने मुझसे 50 करोड़ रुपये मांगे. हालांकि सिद्दीकी ने अपने इस आरोप को लेकर कोई सबूत नहीं दिया. सिद्दीकी ने यह भी आरोप लगाया कि उनका पेन और घड़ी तक रखवा लिया जाता है और सतीश मिश्रा के लिए दरवाजा तुरंत खुल जाता है. तो सिद्दीकी साहब हो सकता है कि मायावती जी को आपकी नियत पर शक हो कि आप कहीं पार्टी की कोई बात रिकार्ड कर पैसों के लिए विरोधी खेमे को न बेच आएं. अब किसकी घड़ी और कलम रखवानी है और किसके लिए दरवाजा तुरंत खोलना है, यह तय करने का हक को हर किसी को है, इसमें... Read More

Page 1 of 25

  • Share this:
  • Google+
  • LinkedIn
  • Youtube

Journey of Dalit Dastak

Opinion

View More Article