दलित साहित्य एक काल-खण्ड है

Details Published on 30/03/2017 12:46:36 Written by आर डी आनंद


 जब वस्तुपरिस्थियों का सही उद्घाटन न किया गया हो तो वे अपने अति के कारण अस्तित्व में आने को व्याकुल हो जाती हैं. इसे ही समय की अनिवार्यता कहा जाता है. भक्ति काल को किसी ने प्रायोजित नहीं किया था. रीतिकाल को किसी ने प्रायोजित नहीं किया था. वीरगाथा काल की वस्तुपरिस्थियां पहले उत्पन्न हुईं. छायावाद की अपनी परिस्थितियां थीं. शुक्ल युग, द्विवेदी युग, वर्तमान काल अनायास नहीं उत्पन्न हुआ. सबके कारण थे.  ठीक ऐसे ही दलित की अपनी वस्तुस्थितियां थी, किन्तु विद्वान सहित्यकारों ने दलितों (अतिशूद्रों) पर अपनी कलम नहीं चलाई, नहीं तो उनकी कलम गन्दी हो जाती. शूद्रों को कभी मनुष्य का दर्ज नहीं दिया. अधिकतर साहित्यकार ब्राह्मण... Read More

महागठबंधन और लालू यादव के बयान के मायने

Details Published on 27/03/2017 12:26:15 Written by नीरजा चौधरी


अगर विरोधी दलों को भारतीय जनता पार्टी की चुनौती से जूझना है तो महागठबंधन अनिवार्य हो गया है. ये सबको साफ़ दिख रहा है. भाजपा के पक्ष में इतनी बड़ी सुनामी के बाद भी अगर विरोधी पार्टियों के वोट को एकसाथ गिना जाए तो उन्हें करीब 95 लाख वोट भाजपा से ज्यादा मिले. ये सब दिखा रहा है कि अगर भाजपा के विरोधी दलों को बचे रहना है तो इकट्ठे आना होगा, खासकर 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए.इसी की पहल लालू प्रसाद यादव ने की है. बिहार चुनाव के पहले जनता परिवार को इकट्ठा करने की कोशिश की गई थी. वो एक अटपटी कोशिश थी. अलग-अलग मुद्दों को नहीं देखा गया था. मुलायम सिंह यादव ने चुनाव के बीच ही इकट्ठा होते जनता परिवार को तोड़ दिया था और वो निकल गए... Read More

क्या सुप्रीम कोर्ट दलित विरोधी है

Details Published on 22/03/2017 18:20:55 Written by डॉ. अलख निरंजन


कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस.सी. कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है. 8 फरवरी, 2016 को अवमानना नोटिस जारी होने के पश्चात सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लिखे गए पत्र में जस्टिस कर्णन ने कहा कि मुझे सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि मैं दलित हूं. अपने आरोप के समर्थन में उन्होंने कई प्रक्रियागत तकनीकी पहलुओं का साक्ष्य दिया है. जैसे-अवमानना की कार्रवाई हाईकोर्ट के कार्यरत जज के खिलाफ नहीं की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट को इसका अधिकार ही नहीं है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट का 8 फरवरी का आदेश कानून सम्मत नहीं है. अगर सुप्रीम कोर्ट को कोई शिकायत है तो वह मामला संसद में भेज सकता है. जस्टिस कर्णन... Read More

कुलदीप नैयर सम्मान के दौरान रवीश कुमार का भाषण

Details Published on 21/03/2017 12:17:31 Written by रवीश कुमार


पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार को एक बार फिर सम्मानित किया गया भाषाई पत्रकारिता के लिए स्थापित पहला कुलदीप नैयर सम्मान संजीदा पत्रकार रवीश कुमार को 19 मार्च को दिया गया। रवीश कुमार को कुलदीप नैयर सम्मान मिलने के बाद ओम थानवी जी ने उनके वक्तव्य को साझा किया है।यहां पढ़ सकते हैं- "एक ऐसे वक्त में जब राजनीति तमाम मर्यादाओं को ध्वस्त कर रही है, सहनशीलता को कुचल रही है, अपमान का संस्कार स्थापित कर रही है, उसी वक्त में ख़ुद को सम्मानित होते देखना उस घड़ी को देखना है जो अभी भी टिक-टिक करती है। दशकों पहले दीवारों पर टिक टिक करने वाली घड़ियां ख़ामोश हो गई। हमने आहट से वक्त को पहचानना... Read More

आप पुरानी व्यवस्था से चुनाव कराने की बात कह रही हैं उसी प्रकार बसपा को अपने पुराने रूप में आना चाहिए (समर्थक का दर्द, पार्ट-3)

Details Published on 19/03/2017 08:37:23 Written by बी आर गौतम


माननीया बहनजी .सादर जयभीम            ई वी एम मशीन से बहुजन के वोटों को हैक किया गया है कि नही, यह एक जाँच का विषय है जिस पर सरकार तैयार नहीं होगी क्योकि कथित तौर पर जिसने हैक किया है उसी की केंद्र में सरकार है. लेकिन बहुजन समाज जरूर हैक हो गया है. मान्यवर साहब ने सामाजिक मूवमेंट के द्वारा बहुजन समाज को जोड़ने का कार्य किया था जिसमे काफी हद तक कामयावी मिली थी लेकिन राजनीतिक मूवमेंट के कारण सामाजिक मूवमेंट कमजोर होता चला गया. 2 जून, 1995 की घटना ने इसे और कमजोर करने का काम किया. वह एक अप्रत्याशित घटना थी जिसके कारण भाजपा से राजनीतिक  समझौता करना पड़ा था.उसके बाद तो सामाजिक मूवमेंट लगातर कमजोर होता चला गया. मान्यवर... Read More

पूर्व बसपा नेता गंगाराम अम्बेडकर का दर्द

Details Published on 18/03/2017 08:23:34 Written by गंगाराम अम्बेडकर


बहनजी ड्राइवर के कहने पर पूरी पार्टी चला रही हैं, जबकि उस ड्राइवर को हमारे और बहनजी के मिशन से कोई मतलब नहीं है. उनको रास्ते पर लाने के लिए इस्तीफा दिया है. शायद बसपा परिवार के छोटे सदस्य की बातें समझ में आएंगी तो पार्टी बच जाएगी. बता दें,  बहनजी ने सतीशचंद्र मिश्रा के भरोसे पूरी पार्टी सौंप दी है. हमारा इस्तीफा बहन जी को अलर्ट करने के लिए है.  कभी-कभी ड्राइवर की बात माननी पड़ती है, लेकिन बहनजी अब उस ड्राइवर के ही कहने पर चलने लगी हैं. ड्राइवर शॉर्ट कट रास्ता दिखाता तो बहनजी उधर ही चल देती हैं. ऐसे रास्ते और ऐसे लोगों से बच निकलने की जरूरत है. हां, कभी-कभी रास्ता दिखाने वालों पर ध्यान देने की आवश्यकता है. बहनजी को ये भी... Read More

क्या बुद्ध और कबीर की तरह अंबेडकर भी चुरा लिए जायेंगे?

Details Published on 17/03/2017 18:13:49 Written by संजय जोठे


एक महत्वपूर्ण कबीरपंथी सज्जन से मुलाक़ात का किस्सा सुनिए. एक गाँव में किसी काम से गया था, उसी सिलसिले में मालवा के दलितों के बीच फैले कबीरपंथ से परिचय हुआ. एक घर के बड़े से आँगन में कबीर पर गाने वाले और कबीर पर बोलने वाले एक सज्जन बैठे थे और आसपास बैठे गरीब दलित सुन रहे थे. मैं और मेरे एक मित्र कबीर की वाणी में सामाजिक क्रान्ति के सूत्र खोजने के मन से उन सज्जन से प्रश्न पूछ रहे थे. आसपास बैठे दलित गरीब चुपचाप सुन रहे थे. बात निकली तो लोगों ने शेयर किया कि सब पञ्च तत्व के बने हैं, सब एक ही परमात्मा की संतान हैं और सबमे एक ही खुदा का नूर है आत्मा परमात्मा की ही औलाद है और भेदभाव सब इंसान के बनाये हुए हैं, सबका खून लाल है, सबको मरकर... Read More

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